Lok Sabha Election CG: अनुसूचित जाति के 25 प्रतिशत मतदाता होंगे निर्णायक, जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट का सियासी समीकरण
जांजगीर चांपा लोकसभा क्षेत्र में प्रचार जोर पकड़ने लगा है। भाजपा से यहां नई प्रत्याशी कमलेश जांगड़े चुनाव मैदान में हैं। वहीं, कांग्रेस ने पूर्व नगरीय प्रशासन मंत्री डा. शिवकुमार डहरिया को दूसरी बार यहां से उतारा है।
By komal Shukla
Publish Date: Wed, 10 Apr 2024 04:30 AM (IST)
Up to date Date: Wed, 10 Apr 2024 04:30 AM (IST)
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HighLights
- क्षेत्र में अजजा के वोटर 11.6 और पिछड़ा वर्ग 42 प्रतिशत से अधिक है
- कांग्रेस को न्याय योजना तो भाजपा को मोदी की गारंटी पर है विश्वास
- 1989 में पहली बार खिला था कमल
डॉ कोमल शुक्ला, जांजगीर-चांपा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जैसे-जैसे चुनाव की तिथि करीब आ रही है, जांजगीर चांपा लोकसभा क्षेत्र में प्रचार जोर पकड़ने लगा है। भाजपा से यहां नई प्रत्याशी कमलेश जांगड़े चुनाव मैदान में हैं। वहीं, कांग्रेस ने पूर्व नगरीय प्रशासन मंत्री डा. शिवकुमार डहरिया को दूसरी बार यहां से उतारा है। इस लोकसभा की सभी आठ विधानसभाओं में कांग्रेस की जीत हुई।
क्षेत्र में अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाताओं की संख्या 25 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जनजाति के वोटर 11.6 प्रतिशत हैं। यही मतदाता चुनाव में निर्णायक साबित होंगे। यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या एक प्रतिशत, ईसाई मतदाता 0.18, जैन 0.06 प्रतिशत हैं। पिछड़ा वर्ग के मतदाता 42 प्रतिशत से अधिक है। जबकि सामान्य वर्ग के मतदाता लगभग सात प्रतिशत है। यहां तीसरे चरण में सात मई को मतदान है। नामांकन 12 अप्रैल से शुरू होगा।
चुनाव प्रचार के बीच दल-बदल का सिलसिला भी जारी है। लोकसभा के प्राय: हर विधानसभा क्षेत्र में कई बड़े कांग्रेसी पार्टी छोड़कर भाजपा में आ गए हैं। इनमें जांजगीर-चांपा विधानसभा से कांग्रेस के प्रदेश संयुक्त महासचिव इंजी रवि पांडेय, कांग्रेस के पूर्व विधायक चुन्नीलाल साहू, सहित कई कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हो गए हैं। ना केवल ये कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर भाजपा में गए हैं, बल्कि उनके साथ चुनाव प्रचार में भी जा रहे हैं।
20 साल से भाजपा का कब्जा
वर्ष 2004 से यह लोकसभा सीट लगातार भाजपा के खाते में है। इसके पूर्व इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा था मगर बीस साल से इस सीट को कांग्रेस भाजपा से नहीं छिन पाई है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने यहां रवि परसराम भारद्वाज और भाजपा ने गुहाराम अजगल्ले को उम्मीदवार बनाया था। इसमें गुहाराम अजगल्ले को पांच लाख 72 हजार 790 वोट मिले थे।
जबकि, रवि परसराम भारद्वाज को चार लाख 89 हजार 735 वोट मिले थे। इस तरह 83 हजार 255 वोटों से भाजपा प्रत्याशी विजयी रहे। इधर इस बार विधानसभा चुनाव में लोकसभा की सभी आठ विधानसभाओं में कांग्रेस की जीत हुई। बसपा यहां एक भी सीट नहीं जीत सकी। जबकि लंबे समय से पामगढ़, जैजैपुर और चंद्रपुर विधानसभा बसपा का प्रभाव वाला क्षेत्र था।
मोदी की गारंटी और न्याय योजना पर भरोसा
भाजपा प्रत्याशी जहां राज्य में प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी से किसानों को धान की कीमत 3100 रुपए देने, महतारी वंदन और अन्य गारंटी तथा केंद्र सरकार की दस साल की उपलब्धियों पर वोट मांग रही हैं, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी कांग्रेस के पांच न्याय योजना जिसमें युवा, बेरोजगार, महिला और किसानों के लिए न्याय की बात कही गई है, इसे आधार बनाकर वोट मांग रहे हैं।
महिलाओं के खाते में प्रतिवर्ष एक लाख रुपये देने, किसानों के लिए एमएसपी लागू करने, फसल बीमा की राशि किसानों के खाते में सीधे भेजने और बेरोजगारों को रोजगार देने की बात कही जा रही है। भाजपा जहां अयोध्या में राममंदिर बनाने की बात कह रही है, वहीं कांग्रेस चुनावी बांड में भ्रष्टाचार का आरोप भाजपा पर लगा रही है। स्थानीय समस्या पलायन, पेयजल आपूर्ति और गांवों की सड़क निर्माण की बातें दोनों दल के उम्मीदवार कर रहे हैं।
दो विधानसभा में महिला वोटर अधिक
लोकसभा में 20 लाख 52 हजार मतदाता हैं। इनमें चंद्रपुर और बिलाईगढ़ विधानसभा में महिला वोटरों की संख्या अधिक है। चंद्रपुर में 1 लाख 17 हजार 599 पुरुष और 1 लाख 19 हजार 803 महिला मतदाता हैं। इसी तरह बिलाईगढ़ विधानसभा में 1 लाख 53 हजार 99 पुरुष और 1 लाख 53 हजार 579 महिला मतदाता हैं। जबकि कसडोल विधानसभा में महिला और पुरुष मतदाताओं में मात्र 58 का अंतर है। यहां 58 पुरुष मतदाता अधिक हैं। जांजगीर चांपा लोकसभा में सर्वाधिक मतदाता कसडोल विधानसभा में है। यहां तीन लाख 68 हजार 136 मतदाता हैं। इनमें पुरुष मतदाता एक लाख 84 हजार 96 और महिला मतदाता एक लाख 84 हजार 38 है। जबकि सबसे कम मतदाता सक्ती विधानसभा में है। यहां दो लाख 16 हजार 915 मतदाता हैं।
1989 में पहली बार खिला था कमल
जांजगीर-चांपा लोकसभा में 1984 में पहली बार भाजपा ने इस सीट पर अपना पैर जमाना शुरू किया। इससे पहले भारतीय जनसंघ के रूप में पार्टी पांच बार दूसरे स्थान पर रही। भाजपा के कद्दावर नेता दिलीप सिंह जूदेव ने पहली बार 1989 में पार्टी का खाता खोला और कांग्रेस के प्रभात मिश्रा को हरा दिया। अगली बार 1991 में कांग्रेस पार्टी के भवानी लाल वर्मा ने दिलीप सिंह जूदेव को हरा दिया। हालांकि 1996 में मनहरण लाल पांडेय और 2004 में करुणा शुक्ला ने पार्टी को जीत दिलाई। तब से लगातार यह सीट भाजपा के खाते में हैं।












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