सस्ता होगा लोन, कम होगी EMI; RBI ने रेपो रेट में की 25 अंकों की फिर कटौती

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RBI Repo Rate: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने रेपो रेट को  25 bps घटाकर 5.25 परसेंट करने का फैसला किया है. गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने शुक्रवार को इसका ऐलान किया. रिजर्व बैंक के इसी ऐलान के साथ अब रेपो रेट 5.5 परसेंट से घटकर 5.25 परसेंट पर आ गया है.

रेपो रेट कम होने से लोन सस्ता होगा, जिससे EMI पर खर्च में कमी आएगी और बचत को बढ़ावा मिलेगा. इससे पहले 1 अक्टूबर को MPC की बैठक हुई थी, जिसमें रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव न करते हुए इसे 5.5 परसेंट पर स्थिर रखा था.

गोल्डीलॉक्स जोन में होगी इकोनॉमी की एंट्री

पिछले दो महीने के पॉलिसी रिव्यू का ऐलान करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ”अक्टूबर 2025 की पॉलिसी के बाद से इकोनॉमी में महंगाई को काफी हम होते देखा गया है. मौजूदा ग्रोथ इन्फ्लेशन डायनामिक्स एक दुर्लभ गोल्डीलॉक्स पीरियड दिखाते हैं, ग्रोथ मजबूत बनी हुई है.”

किसे कहते हैं गोल्डीलॉक्स?

बता दें कि अर्थशास्त्रियों की भाषा में गोल्डीलॉक्स उस दौर को कहा जाता है, जब महंगाई काबू में रहे और लगातार विकास होते रहने का भी क्रम बना रहे. यह शब्द बच्चों की कहानी ‘गोल्डीलॉक्स एंड द थ्री बेयर्स’ से लिया गया है. इसमें गोल्डीलॉक्स तीन कटोरे में परोसे गए दलिया को आजमाती हैं, जिसमें एक बहुत गर्म, एक बिल्कुल ठंडा और एक न बहुत ठंडा और न ज्यादा गर्म होता है. गोल्डीलॉक्स तीसरे कटोरे वाले दलिया को खा जाती है.

भारत की इकोनॉमी का भी हाल अभी कुछ ऐसा ही है. एक स्थिर आर्थिक विकास का क्रम बना हुआ है, जिसने मंदी को रोक रखा है और लेकिन इतना भी तेज नहीं कि महंगाई बढ़ जाए. यानी कि विकास की रफ्तार बैलेंस्ड और स्थिर है.

इस साल कितना कम हुआ रेपो रेट?

RBI इस साल फरवरी से लेकर जून के बीच रेपो रेट में कुल 100 bps की कटौती कर चुका है. यानी कि सीधे 6.5 परसेंट से इसे 5.5 परसेंट पर लाया गया है. फिर अगस्त और अक्टूबर में हुई बैठकों में पॉलिसी में दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया. 

क्या होता है रेपो रेट? 

रेपो रेट उस रेट को कहते हैं, जिसमें रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को लोन देता है. ऐसे में अगर रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से मिलने वाला लोन महंगा हो जाता है. अब अगर बैंकों को रिजर्व बैंक से महंगा लोन मिलेगा, तो लोगों को भी मिलने वाले लोन महंगे हो जाएंगे. इसका ग्राहकों पर बोझ बढ़ेगा. इससे होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन महंगे हो जाते हैं. रिजर्व बैंक रेपो रेट तब बढ़ाता है, जब महंगाई को काबू में लाने और बैंकों की लिक्विडिटी बढ़ाने की जरूरत पड़ती है.  

 

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क्या गजब का रिस्क लिया! 25 लाख की नौकरी छोड़ डिलीवरी बॉय बना लड़का, प्लान सुनकर रोने लगे घरवाले

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Online food delivery: आज के समय में नौकरी की भारी किल्लत है. एक पोस्ट के लिए हजारों-लाखों की तादात में एप्लीकेशन जमा होते हैं. इंटरव्यू के लिए कतारों में लोग खड़े होते हैं. ऐसे में अगर किसी के पास अच्छी-भली नौकरी है, तो वह किस्मत का धनी है.

हालांकि, आज हम आपको जिस शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं उसने सालाना 25 लाख रुपये की नौकरी को महज इसलिए ठोकर मार दी और वह भी इसलिए क्योंकि उसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी करनी है. शख्स के इस अजीबोगरीब फैसले का किस्सा जब सोशल मीडिया पर शेयर हुआ, तो इसने लोगों का ध्यान अपनी ओ खींचा. 

घर पर रो रहे हैं माता-पिता 

X पर एनजी वी (@original_ngv) नाम के एक यूजर ने इस कहानी को शेयर करते हुए बताया कि उसके दोस्त ने एक अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी, जिससे उसके माता-पिता परेशान है, रो रहे हैं और उसके फ्यूचर को लेकर परेशान हो रहे हैं. अगले साल उसकी शादी है और हाल ही में उसने एक नई कार भी खरीदी है, लिहाजा फाइनेंशियली काफी प्रेशर है. एनजी ने लिखा, ”मेरे एक दोस्त ने Swiggy / Rapido ड्राइवर बनने के लिए अपनी 25 lpa+ की नौकरी छोड़ दी. नहीं, मैं मजाक नहीं कर रहा हूं. उसके माता-पिता ने मुझे फोन करके उसे समझाने के लिए कहा, वे सच में रो रहे थे. वह अगले साल शादी करने वाला है और उसने अभी-अभी एक कार खरीदी है.”

दोस्त का बिजनेस मॉडल तैयार 

हालांकि, उसने बहुत सोच-समझकर यह कदम उठाया है. एंजी ने बताया, ”वह एक  यूनिवर्सिटी के पास रहता है, जहां खूब सारे स्टूडेंट्स और ऑफिस वर्कर आते हैं. वह अपनी नौकरी छोड़कर 6 महीने के अपने रनवे के साथ क्लाउड किचन शुरू कर रहा है, लेकिन इसे शुरू करने से पहले उसे सबसे पहले मेन्यु तैयार करना था. यह पता लगाने के लिए उसके इलाके में कौन-कौन से फूड आइटम्स सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं, वह कुछ हफ्तों के लिए डिलीवरी बॉय बन गया.”

एंजी ने बताया कि उसके दोस्त ने पहले ही 12 SKU शॉर्टलिस्ट कर लिया है, जिनके बारे में उसका मानना ​​है कि वे कम कीमत पर लेकिन ज्यादा वॉल्यूम में बिक सकते हैं. उसका बिजनेस मॉडल तीन-चार महीने में मुनाफे का अनुमान लगा रहा है.

लोगों ने दी हिम्मत की दाद

उसके प्लान के बारे में जानकर भी उसके दोस्त और परिवारवाले राजी नहीं हो रहे हैं. एनजी ने कहा, “उसके माता-पिता अभी भी इसके खिलाफ हैं और दोस्त भी फैसले का मजाक उड़ा रहे हैं.” उसे काफी बेइज्जती भी झेलनी पड़ रही है जैसे कि लिफ्ट का इस्तेमाल करने पर वॉचमैन का चिल्लाना वगैरह. लेकिन वह अपनी बात पर अड़ा हुआ है.

एनजी ने कहा, ”अब मैं भी उसे 100 परसेंट सपोर्ट कर रहा हूं. उम्मीद करता हूं कि सब कुछ आगे उसके लिए ठीक हो.” सोशल मीडिया पर लोग एनजी के दोस्त की हिम्मत को दाद दे रहे हैं. कोई इसे असली मार्केट रिसर्च बता रहा है, तो कोई कह रहा है कि फ्यूचर को बेहतर बनाने के लिए अपनी लाइफस्टाइल को डाउनग्रेड करने के लिए हिम्मत चाहिए. 

 

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आंध्र प्रदेश की सरकार ने अडानी को सौंप दी 480 एकड़ की जमीन, डेटा सेंटर बनाने का है प्लान

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Guatam Adani: आंध्र प्रदेश ने विशाखापत्तनम और अनकापल्ली जिलों में 480 एकड़ की जमीन अडानी इंफ्रा (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड (Adani Infra (India) Private Limited) को ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी है. अडानी इंफ्रा गूगल की कंपनी रेडेन इंफोटेक इंडिया का पार्टनर है. दोनों मिलकर यहां एक बड़ा डेटा सेंटर बनाने का प्रोजेक्ट चला रही है.

राज्य सरकार के मंत्रियों ने रेडेन इंफोटेक इंडिया के इस पर प्रस्ताव के बाद मंजूरी दी है, जिसका ऑफिशियल ऑर्डर 2 दिसंबर को जारी किया गया. जमीन के मिलने से आने वाले समय में यहां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और टेक्नोलॉजी इंवेस्टमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा.

डेटा सेंटर बनाने में 87500 करोड़ खर्च 

2 दिसंबर को जारी ऑर्डर में कहा गया, प्रस्ताव की ध्यान से जांच करने के बाद सरकार और मंत्रियों की काउंसिल ने 28/11/2025 की मीटिंग में इसे मंजूरी दी. इसके मुताबिक, विशाखापत्तनम और अनकापल्ली जिलों में 480 एकड़ की जमीन मेसर्स अडानी इंफ्रा इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर करने की मंजूरी दी जाती है.

रेडेन इंफोटेक इंडिया पहले चरण में पूरे आंध्र प्रदेश में डेटा सेंटर के डेवलपमेंट मेंब 87,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का इंवेस्टमेंट कर रही है. बदले में कंपनी को डिजिटल प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने की सरकारी कोशिशों के तहत समय के साथ राज्य से 22,000 करोड़ रुपये के इंसेंटिव मिलेंगे.

रेडेन ने क्या थी डिमांड? 

सरकारी आदेश के मुताबिक, रेडेन ने रिक्वेस्ट की है कि अडानी इंफ्रा समेत उसके नोटिफाइड पार्टनर्स को डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की सरकार द्वारा पहले वादा किए गए इंसेंटिव्स का फायदा उठाने के लिए ऑथराइज किया जाए. गूगल की कंपनी रेडेन इंफोटेक इस प्रोजेक्ट के मेन हिस्से के तौर पर 1 GW का AI डेटा सेंटर बनाएगी. कंपनी ने कई ‘नोटिफाइड पार्टनर्स’ की पहचान की है, जिनमें अडानी इंफ्रा, अडानीकॉनेक्स इंडिया, अडानी पावर इंडिया, भारती एयरटेल, नेक्सट्रा डेटा और नेक्सट्रा विजाग (भारती एयरटेल की सब्सिडियरी) शामिल हैं.

रेडेन ने खास तौर पर रिक्वेस्ट की है कि आंध्र प्रदेश इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (APIIC) द्वारा पहचाने गए सभी तीन जमीन के टुकड़े, सर्वे पूरा करने और कब्जा देने के बाद प्राइमरी नोटिफाइड पार्टनर के तौर पर अडानी इंफ्रा को अलॉट किए जाएं.

सरकारी ऑर्डर में कहा गया है कि डेटा सेंटर उन्हीं स्टैंडर्ड्स पर बनाया जाएगा, जैसे गूगल की मुख्य सर्विसेज़, जैसे सर्च, यूट्यूब और वर्कस्पेस को सपोर्ट करने वाले स्टैंडर्ड्स पर बनाए जाते हैं। प्लान की गई फैसिलिटी की 1 GW बिजली की खपत मुंबई के सालाना बिजली इस्ते

 

 

 

 

 

 

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बासमती चावल से लेकर गरम मसाले तक… इन भारतीय चीजों का दीवाना है रूस, खूब होती है खरीदारी

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Indian Products in Russia: भारत बड़े पैमाने पर रूस से क्रूड ऑयल खरीदता है. इसके चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 परसेंट की टैरिफ को पेनाल्टी के तौर पर दोगुना बढ़ा दिया. अब अमेरिका में भारत से आयात होने वाले वालों पर 50 परसेंट की दर से टैरिफ लगता है.

हालांकि, भारत और रूस के बीच कारोबार सिर्फ क्रूड ऑयल तक ही सीमित नहीं है. इसका दायरा फार्मास्यूटिकल्स, कंस्ट्रक्शन मैटेरियल्स, प्रोसेस्ड फूड, इंटीरियर, इलेक्ट्रॉनिक जैसे तमाम अलग-अलग सेगमेंट्स में बढ़ता जा रहा है. दोनों देशों के बीच आज के समय में USD 68 बिलियन से ज्यादा का कारोबार होता है. आइए इस क्रम में देखते हैं भारत से रूस बड़े पैमाने पर किन सारी चीजों को खरीदता है:-

चाय और मसाले

भारत की चाय और यहां के मसालों की पहचान पूरे दुनिया में है. रूस में भी इनकी अच्छी-खासी डिमांड है. बीते कुछ सालों में यहां भारतीय मसाला चाय का चलन काफी तेजी से बढ़ा है. कड़ाके की ठंड में यहां लोग मसाला चाय की चुस्की लेकर इसका लुत्फ उठाना पसंद करते हैं. इसके अलावा, रूस के किसी भी शहर के सुपरमार्केट में आपको दालचीनी, तेजपत्ता, हल्दी, गरम मसाला, इलायची, लौंग जैसे भारतीय मसाले बड़े आराम से मिल जाएंगे. 

अनाज और दालें

रूस भारत से बड़े पैमाने पर दालें भी खरीदता है. खासकर, मसूर दाल. इसके अलावा, रूस भारत से मूंग, चना दाल और पीली मटर की दाल का भी आयात करता है. भारत से रूस में कॉफी, चावल, केला, पपीता, प्रोसेस्ड फूड, मीट भी भेजा जाता है. 

बासमती चावल

रूस भारत के खूबसूरत, हाई क्वॉलिटी के बासमती चावल का भी दीवाना है. यहां इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. न केवल ये सुंगधित और खाने में टेस्टी होते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी यह काफी फायदेमंद है क्योंकि इसमें फाइबर ज्यादा पाए जाते हैं और ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है. ऐसे में भारत से भर-भरकर रूस के लिए बासमती चावल भी भेजा जाता है. 

सब्जियां

भारत रूस को बड़ी मात्रा में सब्जियां भी एक्सपोर्ट करता है. इस लिस्ट में अंगूर, किशमिश और सूखी सब्जियों के साथ-साथ प्याज, पत्तागोभी, लहसुन, अदरक और जड़ वाली सब्जियां शामिल हैं. भारत के एक्सपोर्ट डेटा के अनुसार, 2024-25 में रूस को सब्जी प्रोडक्ट्स का टोटल एक्सपोर्ट 75,229,407 डॉलर का था.

टेक्सटाइल

भारत से रूस को कपड़े भी खूब भेजे जाते हैं. इनमें रेशम से बने कपड़ों से लेकर सूती वस्त्र भी शामिल हैं. भारत रूस से इसके लिए कच्चा माल भी खरीदता है. 

फार्मास्यूटिकल्स

पिछले कुछ सालों में एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी के साथ भारत रूस का टॉप फार्मास्यूटिकल रिसोर्स बन गया है. इंडिया एक्सपोर्ट डेटा के अनुसार, 2024-25 में रूस के लिए इंडिया का फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट 520,549,626 डॉलर का था. 

मशीनरी

भारत अपने घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और मॉडर्नाइजेशन के लिए रूस को मशीनरी और मैकेनिकल अप्लायंस एक्सपोर्ट करता है. भारत-रूस ट्रेडिंग बढ़ने के साथ मशीनरी और मैकेनिकल अप्लायंस टॉप प्रोडक्ट लिस्ट में पहले नंबर पर आ गए.

रूस में भारतीय रेस्तरां

इसके अलावा, रूस में लोग पका-पकाया भारतीय खाना भी खूब पसंद करते हैं. मॉस्को से लेकर सेंट पीटर्सबर्ग में कई ऐसे भारतीय रेस्तरां हैं, जहां केवल प्रवासियों की ही भीड़ नहीं रहती, बल्कि भारतीय खाना चखते हुए रूसी भी दिख जाते हैं. इन रेस्टोरेंट्स की कस्टमर लिस्ट में 70–80 कस्टमर्स रूसी ही होते हैं. 

योग भारत की प्राचीन परंपरा है, जिसे अब पूरी दुनिया अपना रही है.  मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग और व्लादिवोस्तोक रूस के तमाम बड़े शहरों में आपको आयुर्वेदिक उपचार सेंटर, योग स्टूडियो, मसाज थेरेपी सेंटर मिल जाएंगे. यहां इनकी लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ रही है. इसके अलावा, हर्बल ऑयल और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स भी खूब डिमांड में हैं. रूस में योग प्रशिक्षकों की भी अच्छी-खासी डिमांड है. रूसी लोगों में ‘नैचुरल हीलिंग’ का कॉन्सेप्ट बढ़-चढ़कर उभर रहा है. 

बॉलीवुड का जादू

दिग्गज कलाकार राज कपूर की फिल्म ‘आवारा’ से रूस में बॉलीवुड की दीवानगी का जो दौर शुरू हुआ था, वह आज भी बरकरार है. रूस के थिएटर्स में  ‘आवारा’, ‘श्री 420’ जैसी फिल्में खूब देखी गईं. ‘आवारा’ फिल्म की तो रूस में 640 लाख टिकट बिके थे. आप समझ सकते हैं कि किस हद तक वहां के लोगों को भारतीय सिनेमा को लेकर क्रेज है. रूस के लोगों को मसालेदार भारतीय फिल्में खूब पसंद आती है, जिसकी कहानी दमदार हो, गाने हो, अच्छे डायलॉग्स हो. यही वजह है कि आज के समय में ‘दंगल’, ‘3 इडियट्स’, ‘बाहुबली’ जैसी फिल्मों को भी यहां के लोगों ने खूब पसंद किया. 

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कल हाे जाएगा फैसला… क्या RBI कम करेगा रेपो रेट? जानें एक्सपर्ट्स की राय

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RBI MPC Meeting: रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 3 दिसंबर, 2025 को शुरू हुई थी. इसके नतीजे शुक्रवार को आएंगे. रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​शुक्रवार को मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की मीटिंग खत्म होने के बाद रेपो रेट के बारे में ऐलान करेंगे, जिसका पूरे देश को इंतजार है.

फिलहाल रेपो रेट 5.5 परसेंट है. रेपो रेट कम होगा, तो इससे लोन सस्ता होगा, जिससे EMI कम भरनी पड़ेगी. पहले महंगाई कम होने की वजह से रेपो रेट में कटौती की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन GDP की नई डेटा और रुपये में आई गिरावट को देखते हुए अब यह माना जा रहा है रेपो रेट को लेकर फैसला तय करने की राह आरबीआई के लिए इस बार आसान नहीं होगी.

जेएम फाइनेंशियल की रिपोर्ट

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​5 दिसंबर को सुबह 10 बजे रेट का ऐलान करेंगे. घरेलू ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “हमें उम्मीद है कि RBI FY26 के लिए अपने ग्रोथ अनुमान को कम से कम 20 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 7 परसेंट कर देगा और महंगाई के अनुमान को 40 बेसिस पॉइंट घटाकर 2.2 परसेंट कर देगा.”

इस समय रेट में कटौती से FY26 के दूसरे हाफ में उम्मीद के मुताबिक धीमी ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन इससे रुपये में और गिरावट का खतरा भी है. अगर रेट में कटौती के साथ नरम रुख नहीं अपनाया जाता है, तो बॉन्ड यील्ड और गिरेगी. ऐसे में, RBI मौजूदा हालात को बनाए रखकर और आने वाले महीनों में पॉलिसी सपोर्ट पर गाइडेंस देकर बीच का रास्ता अपना सकता है. इस बीच, कुछ एनालिस्ट का मानना ​​है कि 25 बेसिस पॉइंट इंटरेस्ट रेट में कटौती से इकोनॉमी को ऐसे समय में सपोर्ट मिल सकता है जब कीमतों का दबाव कम है. 

Yes Bank का क्या है कहना?

यस बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि RBI से उम्मीद है कि आरबीआई रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे 5.5 परसेंट पर बरकरार रखेगा. रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि सेंट्रल बैंक के पॉज पर रहने की संभावना है क्योंकि धीरे-धीरे कटौती की गुंजाइश कम हो रही है.

 

 

 

 

 

 

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डीमैट अकाउंट में नॉमिनी जोड़ना है बहुत आसान, जानें मिनटों में कैसी पूरी करें ये प्रोसेस

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Demat Account Nomination: डीमैट अकाउंट एक डिजिटल खाते की तरह काम करता है, जिसमें निवेशक अपने शेयरों, बॉड और सिक्योरिटीज रखते हैं. बैंक अकाउंट्स की तरह ही इसमें भी नॉमिनी रखी जाती है. डीमैट अकाउंट में नॉमिनी जोड़ना और अपडेट करना अब पहले से बहुत आसान हो गया है.

निवेशक इस प्रक्रिया को डिजिटली पूरा कर सकते हैं. फिर चाहे पहले बारी नॉमिनी बनाना हो या फिर नॉमिनी में बदलाव करना हो. आप यह काम बस कुछ ही मिनटों में कर सकते हैं. आइए इसकी प्रक्रिया के बारे में जानते हैं….

ब्रोकर्स ऐप में नॉमिनी जोड़ने का तरीका

ज्यादातर ब्रोकर्स ऐप Aadhaar eSign के माध्यम से ऑनलाइन नॉमिनी जोड़ने या बदलने की सुविधा देते हैं. ग्राहक ऐप या उनकी वेबसाइट पर जाकर प्रोफाइल सेक्शन का चुनाव करें. इसके बाद अकाउंट सेटिंग में जाकर नॉमिनेशन सेक्शन का चुनाव करें.

नॉमिनी से संबंधी सारी जानकारी भरने के बाद इसे आधार ओटीपी से वेरीफाई करना होगा. आमतौर पर नॉमिनी बदलाव में 2 से 3 दिनों का समय लगता है. 

NSDL पोर्टल में नॉमिनी जोड़ने का तरीका

अगर आपका डीमैट खाता NSDL में है, तो यहां भी नॉमिनी अपडेट करना बहुत आसान है. NSDL पोर्टल पर जाकर आप अपने DP आईडी, क्लाइंट आईडी और PAN के जरिए ओटीपी लॉगिन कर सकते हैं. लॉगिन करने के बाद I wish to Nominate विकल्प चुनें और नॉमिनी से संबंधित सभी जानकारी दर्ज करें.

अंत में आधार eSign पूरा करते ही आपकी रिक्वेस्ट DP के पास चली जाती है. इसके बाद एसएमएस के माध्यम से आपको स्वीकृति या अस्वीकृति की जानकारी मिल जाती है.

कौन हो सकता है नॉमिनी?

नॉमिनी केवल किसी व्यक्ति को ही बनाया जा सकता है. किसी कंपनी, ट्रस्ट, सोसायटी या पार्टरनशिप फर्म नॉमिनी नहीं बन सकते हैं. साथ ही डीमैट अकाउंट में 3 से ज्यादा नॉमिनी शामिल नहीं किए जा सकते हैं और उन सभी की हिस्सेदारी तय करनी भी जरूरी है.   

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रुपये की कमजोरी से किसे मिलेगा फायदा और कौन टूटेगा? इस सेक्टर पर क्या होगा असर, जानें डिटेल

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Rupee fall impact: भारतीय शेयर मार्केट में बुधवार, 3 दिसंबर को दोनों ही प्रमुख बेंचमॉर्क इंडेक्स लाल निशान पर ट्रेड करते हुए बंद हुए थे. साथ ही डॉलर की तुलना में रुपये की कीमतों में भी जबरदस्त गिरावट देखने को मिली थी. 90 रुपया प्रति डॉलर के पार पहुंच कर रुपये ने नया रिकॉर्ड बनाया था.

जिसका सीधा प्रभाव देश के विभिन्न सेक्टरों में देखने को मिलेगा. मनी कंट्रोल हिंदी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, रुपये की इस गिरावट से कुछ सेक्टरों को फायदा होगा तो वहीं कुछ सेक्टरों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं, अलग-अलग सेक्टरों पर इसका क्या प्रभाव दिखने वाला है….

फार्मा सेक्टर पर प्रभाव

फार्मा सेक्टर में रुपये में हो रही इस गिरावट का असर सीमित रह सकता है, क्योंकि फार्मा कंपनियां अपने डॉलर एक्पोजर के लिए हेजिंग कर लेती हैं. जिससे दवाईयों की कीमत पहले ही तय हो जाती है और करेंसी के कमजोर होने पर भी डील पर प्रभाव नहीं पड़ता है. हालांकि. कंपनियों का इनपुट कॉस्ट बढ़ सकता है. 

आईटी सेक्टर पर प्रभाव

रुपये में आई इस गिरावट से आईटी सेक्टर को फायदा हो सकता है, क्योंकि आईटी कंपनियों की ज्यादातर इनकम डॉलर में होती है. रुपये के कमजोर होने से कंपनियों को मार्जिन बढ़ाने में मदद मिलती है. बुधवार के कारोबारी दिन आईटी सेक्टर के शेयर हरे निशान पर ट्रेड करते हुए बंद हुए थे. निफ्टी आईटी इंडेक्स ने बाजार को संभालने का काम किया था.  

केमिकल सेक्टर

केमिकल सेक्टर में रुपये की कमजोरी से लाभ पहुंच सकता है. केमिकल सेक्टर की कई कंपनियों की कमाई डॉलर में होती है. साथ ही बहुत से कंपनियां अमेरिकी बाजार से जुड़ी हुई हैं. रुपये में आई इस गिरावट से इन कंपनियों के आय में इजाफा हो सकता है.  

तेल और गैस सेक्टर 

रुपये की कीमत कम होने से ऐसी कंपनियां जो तेल और गैस आयात करती है, उनकी लागत बढ़ जाती है. जिससे उनका मुनाफा कम होता है. वहीं, वे कंपनियां जो तेल और गैस का उत्पादन और निर्यात का काम करती है, उन्हें फायदा होने की उम्मीद होती है. 

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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Vidya Wires IPO 2025 Full Review | Price Band, Lot Size, Revenue, Profit & Listing Date | Paisa Live

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इस वीडियो में हम Vidya Wires IPO 2025 का पूरा विश्लेषण करेंगे। Vidya Wires IPO का कुल आकार ₹300.01 करोड़ है जिसमें Fresh Issue 5.27 करोड़ शेयरों का और Offer For Sale 0.50 करोड़ शेयरों का है। IPO निवेश के लिए खुला रहेगा 3 दिसंबर 2025 से 5 दिसंबर 2025 तक। Price Band ₹48 से ₹52 प्रति शेयर है और एक Lot में 288 शेयर होंगे। Retail Investors के लिए Minimum Investment ₹14,976 और HNI/NII के लिए ₹10,03,392 है। Book Running Lead Manager Pantomath Capital Advisors Pvt. Ltd. है और Registrar MUFG Intime India Pvt. Ltd. है। Face Value ₹1 प्रति शेयर है। शेयर आवंटन में QIB को 50%, Retail Investors को 35% और NII को 15% शेयर रिज़र्व किए गए हैं। Vidya Wires की स्थापना 1981 में हुई थी और कंपनी Copper और Aluminum wires बनाती है। इसके प्रमुख products में Precision-engineered wires, copper strips, conductors, busbars, specialized winding wires, PV ribbons और aluminum paper-covered strips शामिल हैं। Vidya Wires का Revenue 31 मार्च 2023 को ₹1,015.72 करोड़ था जो 31 मार्च 2024 में ₹1,188.49 करोड़ और 31 मार्च 2025 में ₹1,491.45 करोड़ हो गया। Profit After Tax 31 मार्च 2023 को ₹21.53 करोड़ था जो 31 मार्च 2024 में ₹25.68 करोड़ और 31 मार्च 2025 में ₹40.87 करोड़ हो गया। Revenue में वृद्धि 25% और PAT में वृद्धि 59% हुई। Grey Market Premium ₹6 है और Listing Date 10 दिसंबर 2025 को है।

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रिटेल निवेशकों के लिए OFS खुलते ही बैंक ऑफ महाराष्ट्र के शेयर धड़ाम, सरकार बेच रही 6% हिस्सा

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Bank of Maharashtra Shares: भारत सरकार ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 6 परसेंट की अपनी हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचने का फैसला लिया है. आज भी जैसे ही रिटेल इंवेस्टर्स के लिए ऑफर-फॉर-सेल खुला शेयर लगभग 2 परसेंट तक लुढ़क गए. बैंक ऑफ महाराष्ट्र के शेयर में लगातार पांचवें दिन से गिरावट जारी है. शेयर बेचने का प्रॉसेस 2 दिसंबर से ही शुरू हो चुका है, जिसमें आज रिटेल निवेशकों ने हिस्सा लिया. 

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सचिव अरुणिश चावला ने एक्स पर बताया था, “बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BOM) में ऑफर-फॉर-सेल आज नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए खुल गया है. रिटेल निवेशक बुधवार (3 दिसंबर) को बोली लगा सकेंगे. सरकार बैंक में 5 परसेंट इक्विटी बेचेगी और साथ ही  ग्रीन शू ऑप्शन के तौर पर 1 परसेंट अतिरिक्त की पेशकश भी की है.” DIPAM ने बताया कि OFS बेस साइज के मुकाबले 400 परसेंट सब्सक्राइब हुआ.

बैंक में कितनी है सरकार की हिस्सेदारी? 

सरकार ने इस ऑफर-फॉर-सेल के लिए फ्लोर प्राइस 54 रुपये प्रति शेयर तय किया है. मौजूदा मार्केट प्राइस पर बेस ऑफर की कीमत लगभग 2,200 करोड़ रुपये है, और ग्रीन शू ऑप्शन से सरकार को लगभग 400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम मिल सकती है.

सितंबर 2025 को खत्म हुई तिमाही के लिए उपलब्ध शेयरहोल्डिंग डेटा के अनुसार, केंद्र सरकार के पास बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 612.26 करोड़ शेयर  या 79.6 परसेंट हिस्सेदारी है. बाकी 156.89 करोड़ शेयर, या 20.4 परसेंट हिस्सेदारी पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास है.

OFS के चलते सरकार को बैंक में अपनी 75 परसेंट से कम करने में मदद मिलेगी. इससे पब्लिक शेयरहोल्डिंग 25 परसेंट से ऊपर चली जाएगी, जो सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार है. पब्लिक शेयरहोल्डिंग का मतलब है कि आम जनता के पास बैंक के कितने शेयर है. अगर यह 25 परसेंट से ऊपर चला जाता है, तो इसका मतलब यह है कि किसी व्यक्ति का या किसी सस्थान का इस पर ज्यादा कंट्रोल नहीं है. 

PSU बैंक के स्टॉक्स धड़ाम

इस दरमियान वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को संसद में कहा कि सरकार PSU बैंकों के लिए FDI लिमिट बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है. उनके इस बयान के बाद बुधवार को PSU बैंक के शेयर क्रैश हो गए, जिसमें इंडियन बैंक के शेयर में 6 परसेंट की सबसे बड़ी गिरावट आई.

इसके अलावा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और UCO बैंक हर एक में 2 परसेंट तक की गिरावट आई. इस दौरान निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स भी 3 परसेंट तक फिसलकर 8,264 पॉइंट्स के इंट्राडे लो पर आ गया—जो इसके हाल के 8,665 पॉइंट्स के हाई से लगभग 5 परसेंट नीचे है. 

 

 

 

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