Bhopal Information: महिला फांसी पर झूली, अंतिम बार पति से की थी फोन पर बात

मूलत: गंजबासौदा की रहने वाली थी महिला। दो साल पहले हुई थी शादी। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक उसे पति की नाइट ड्यूटी से दिक्कत थी।

By Ravindra Soni

Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 08:10 AM (IST)

Up to date Date: Fri, 22 Mar 2024 08:10 AM (IST)

Bhopal News: महिला फांसी पर झूली, अंतिम बार पति से की थी फोन पर बात
प्रतीकात्मक चित्र

HighLights

  1. पुलिस को नहीं मिला सुसाइड नोट।
  2. पेट्रोल पंच पर काम करता है पति।
  3. पुलिस मामले की जांच में जुटी।

भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि : Bhopal Crime Information। राजधानी के सूखी सेवनिया इलाके में रहने वाली 27 वर्षीय महिला ने बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात रात घर में फांसी लगा ली। परिजन उसे फंदे से उतारकर इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डाक्टरों ने चेक करने के बाद मृत घोषित कर दिया। मर्ग कायमी के बाद पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है। सुसाइड नोट नहीं मिलने से अभी महिला के खुदकुशी करने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस की शुरूआती जांच में पता चला है कि पति की रात ड्यूटी से उसे दिक्कत थी। घटना से पहले वह पति से फोन पर इसी को लेकर बात कर रही थी। पोस्टमार्टम के बाद महिला का शव स्वजन के सुपुर्द कर दिया गया है।

दो साल पहले हुई थी शादी

पुलिस के मुताबिक सोनम चिड़ार (27) मूलत: गंजबासौदा विदिशा की रहने वाली थी। दो साल पहले उसकी शादी सूखी सेवनिया स्थित रेलवे स्टेशन के पास रहने वाले अंकित चिड़ार के साथ हुई थी। अंकित पेट्रोल पंप पर काम करता है। इन दिनों उसकी पंप पर रात की ड्यूटी चल रही थी। सोनम ने अंकित से बोला था कि वह रात के बजाय दिन में ड्यूटी किया करे, लेकिन उसकी ड्यूटी नहीं बदल पाई। बुधवार की रात करीब दो बजे दोनों के बीच फोन पर बातचीत हो रही थी। इस दौरान सोनम ने नाराज होकर फोन काट दिया। बाद में अंकित ने अपनी मां को फोन लगाकर उसे देखने का बोला। सास जब सोनम के कमरे में पहुंची तो वह फांसी पर लटक रही थी।

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    वर्तमान में नवदुनिया भोपाल यूनिट में हाइपर लोकल डिजिटल डेस्क पर डिजिटल कोआर्डिनेटर के रूप में विगत तीन वर्ष से कार्यरत हूं। इससे पहले मैं नईदुनिया इंदौर यूनिट में पदस्थ था, जहां मैंने डिजिटल डेस्क के अलावा ज्या

Did not get an opportunity to bond with Aishwarya rai bachchan- Randeep hooda | ऐश्वर्या से बॉन्डिंग बनाने का मौका नहीं मिला था- रणदीप: बोले- सरबजीत की बहन से अच्छा रिश्ता था, उनकी चिता को मैंने अग्नि दी थी

22 मिनट पहले

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रणदीप हुड्डा ने एक इंटरव्यू के दौरान ऐश्वर्या राय के बारे में खुलकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि सरबजीत के सेट पर उन्हें ऐश्वर्या से बॉन्डिंग बनाने का मौका ही नहीं मिला था। उन्होंने खुलासा किया कि फिल्म में उनके सीन एक साथ नहीं थे, इस वजह से उन्हें एक साथ ज्यादा दिन बिताने का मौका नहीं मिला। इसके अलावा, उन्होंने सेट पर ऐश्वर्या के काम की तारीफ की।

ऐश्वर्या ने सरबजीत में रणदीप की बहन का किरदार निभाया था।

ऐश्वर्या ने सरबजीत में रणदीप की बहन का किरदार निभाया था।

रणदीप ने कहा- वो बहुत अच्छी हैं, सेट पर वो सभी के साथ बहुत पोलाइट थीं। अपना काम वो बहुत ईमानदारी से करती हैं। इसके बाद उन्होंने बताया कि सेट पर उन्हें बातचीत करने का ज्यादा समय नहीं मिला।

ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे के साथ बात करते हुए रणदीप ने कहा- ऐश्वर्या की वजह से सरबजीत की बहन के साथ उनका करीबी रिश्ता बन गया था। उन्होंने कहा- ऐश्वर्या से ज्यादा, मेरा सरबजीत की बहन के साथ अच्छा रिश्ता बन गया था। अब सरबजीत की बहन का निधन हो चुका है। उनकी इच्छा थी कि मैं उनकी चिता को अग्नि दूं। मैंने उनकी इच्छा का मान रखा और उनकी चिता को अग्नि भी दिया।

सरबजीत की बहन के साथ रणदीप हुड्डा।

सरबजीत की बहन के साथ रणदीप हुड्डा।

रणदीप चाहते थे कि काश उनके साथ थोड़ा और समय बिताने का मौका मिलता। वो एक महान महिला था। वो अपने भाई सरबजीत के बच्चों की देखभाल करती थीं। बता दें, रणदीप अभी भी उन लोगों से संपर्क में हैं।

रणदीप ने शेयर की तस्वीर।

रणदीप ने शेयर की तस्वीर।

अपनी अगली फिल्म के लिए रणदीप ने किया बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन

रणदीप हुड्डा की अगली फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ है। इस हिस्टोरिकल बायोग्राफिकल फिल्म में रणदीप भारत के क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के रोल में नजर आएंगे।

इसके लिए रणदीप ने जबरदस्त बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन किया है। एक्टर ने इसके लिए 18 किलो वजन घटाया है। अब हाल ही में रणदीप ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक शर्टलेस फोटो शेयर किया, जिसे देखकर फैंस उनकी डेडिकेशन जमकर तारीफ कर रहे हैं।

फोटो शेयर कर लिखा- ‘काला पानी’

इंस्टाग्राम पर एक मिरर सेल्फी शेयर करते हुए रणदीप ने कैप्शन में लिखा- ‘काला पानी’। इससे यह साफ है कि एक्टर ने यह ट्रांसफॉर्मेशन फिल्म के उन सीन्स के लिए किया है जब वीर सावरकर को सेल्यूलर जेल में कैद करके रखा गया था।

सरबजीत के दौरान की तस्वीर।

सरबजीत के दौरान की तस्वीर।

‘सरबजीत’ के लिए 28 दिनों में घटाया था 18 किलो वजन

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब रणदीप ने बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन किया है। इससे पहले उन्होंने 2016 में रिलीज हुई फिल्म ‘सरबजीत’ के लिए भी 28 दिनों में 18 किलो वजन घटाया था। तब एक इंटरव्यू में रणदीप ने अपने वेट लॉस पर बात की थी। उन्होंने कहा- मैं इस तरह के वेट गेन और वेट लॉस सिर्फ इसी वजह से कर पाता हूं, क्योंकि मैं एक स्पोर्ट्स पर्सन हूं।

Barwani Information: घर के चढ़ाव पर मिली नवजात बालिका, एसएनसीयू में उपचार जारी

आरएमओ डॉ. चेतन ब्राह्मणे ने बताया कि एक दिन पूर्व घर के बाहर मिली नवजात बच्ची की आयु करीब 15-16 दिन है।

By Hemant Kumar Upadhyay

Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 07:21 AM (IST)

Up to date Date: Fri, 22 Mar 2024 07:21 AM (IST)

Barwani News: घर के चढ़ाव पर मिली नवजात बालिका, एसएनसीयू में उपचार जारी

HighLights

  1. 15-16 दिन पूर्व हुआ हैं जन्म, डॉक्टर्स की टीम ने चम्मच से दूध-भोजन देना शुरू किया
  2. टीआई दिनेशसिंह कुशवाह ने बताया कि सूचना मिलने पर बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
  3. बच्ची को कौन छोड़कर गया हैं, उसका पता लगा रहे हैं।

बड़वानी। जिला मुख्यालय पर बुधवार शाम रानीपुरा में एक मकान के चढ़ाव पर नवजात बालिका को कोई छोड़ गया। साथ ही एक पर्ची भी छोड़ी गई। उक्त बालिका का महिला अस्पताल नई विंग की तीसरी मंजिल स्थित एसएनसीयू में उपचार जारी है। बालिका की आयु करीब 15-16 दिन है। फिलहाल उसका स्वास्थ्य ठीक है। वहीं मामले को लेकर कोतवाली पुलिस जांच में जुटी है।

आरएमओ डॉ. चेतन ब्राह्मणे ने बताया कि एक दिन पूर्व घर के बाहर मिली नवजात बच्ची की आयु करीब 15-16 दिन है। उसका एसएनसीयू में उपचार किया जा रहा है। फिलहाल उसकी हालत में सुधार है। डॉक्टर्स व स्टाफ उसकी देखभाल कर रहे है।

गुरुवार को बालिका को चम्मच से दूध व भोजन दिया गया। स्वस्थ्य होने तक उसे यहां रखा जाएगा। उधर घर के बाहर मिली नवजात मामले में कोतवाली पुलिस जांच में जुटी है। टीआई दिनेशसिंह कुशवाह ने बताया कि सूचना मिलने पर बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया। बच्ची को कौन छोड़कर गया हैं, उसका पता लगा रहे हैं। संबंधित क्षेत्र के सीसीटीवी भी खंगाल रहे है। साथ ही 15 दिन पूर्व हुए प्रसव रिकार्ड की जांच करेंगे।

यह है मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार शाम को रानीपुरा में एक मकान के चढ़ाव पर बच्ची मिली थी। साथ ही एक पर्ची भी मिली थी। जिस पर लिखा था कि आप जो कोई भी हो मेरी बेटी को बड़ी कर लेना, इसे किसी अनाथ आश्रम में मत देना। इसके बाद संबंधित ने पुलिस को सूचना दी।

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    प्रिंट मीडिया में कार्य का 33 वर्ष का अनुभव। डिजिटल मीडिया में पिछले 9 वर्ष से कार्यरत। पूर्व में नवभारत इंदौर और दैनिक जागरण इंदौर में खेल संपादक और नईदुनिया इंदौर में संपादकीय विभाग में अहम जिम्‍मेदारियों का

TV Actress Ratan Raajputh Battle Story | Autoimmune Dysfunction | पिता की मौत के बाद डिप्रेशन में थीं रतन राजपूत: नींद में रोती थीं, स्लीपिंग पिल्स लेना पड़ता; स्वयंवर के बावजूद अकेली हैं

59 मिनट पहलेलेखक: किरण जैन

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इस बार की स्ट्रगल स्टोरी कहानी है टीवी एक्ट्रेस रतन राजपूत की। रतन को संतोषी मां और अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो जैसे टीवी शोज के लिए जाना जाता है। 2018 में कैंसर की वजह से रतन के पिता का निधन हुआ था जिसके बाद वो डिप्रेशन में चली गई थीं। इसके बाद वो ऑटोइम्यून डिसऑर्डर से भी जूझीं, जिसका असर उनकी आंखों की रोशनी पर हुआ।

मुंबई के गोरेगांव वेस्ट स्थित घर में बैठकर रतन अपनी यह कहानी हमें सुना रही हैं। रतन ने बताया कि उन्होंने कभी एक्ट्रेस बनने का ख्वाब नहीं देखा था। सब होता चल गया, लेकिन इस इंडस्ट्री से जुड़ने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ने के बारे में नहीं सोचा। जो भी संघर्ष इस सफर में आए, उसका उन्होंने डट कर सामना किया।

पढ़िए रतन राजपूत के संघर्ष की कहानी, उन्हीं की जुबानी….

एक्ट्रेस बनने का ख्वाब कब देखा?

पटना में जन्मीं रतन ने कभी एक्ट्रेस बनने का ख्वाब नहीं सजाया था। इस सफर के बारे में उन्होंने कहा, ‘मैंने कभी एक्टर बनने का ख्वाब नहीं देखा था। हां, शीशे के सामने एक्ट करना और खुद को निहारना बहुत पसंद था। जब मैं पटना से दिल्ली गई, तब नहीं पता था कि मुझे करना क्या है? यहां मैं खुद को ढूंढ़ने आई थी।

मैंने दिल्ली में डांस के लिए श्रीराम भारतीय कला सेंटर में एडमिशन लिया था। NSD (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) में एडमिशन लेने के लिए मेरी औकात ही नहीं थी। पता नहीं था कि एडमिशन के लिए ड्रामा का बैकग्राउंड और 10 अलग-अलग सर्टिफिकेट का होना जरूरी है।

फिर मैंने थिएटर देखना शुरू किया। पहला ड्रामा मैंने कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा का देखा, जो उस वक्त एक्टिंग किया करते थे। उसके बाद ड्रामा देखने का सिलसिला बढ़ता गया। मुझे अपना रास्ता मिल गया। मैंने तय कर लिया कि मैं एक्टिंग में ही अपना करियर बनाऊंगी और वहीं से एक्टिंग का दौर शुरू हुआ।’

रतन का जन्म बिहार के पटना जिले में एक मिडिल क्लास परिवार में हुआ है। उनकी पढ़ाई-लिखाई भी पटना में ही हुई है।

रतन का जन्म बिहार के पटना जिले में एक मिडिल क्लास परिवार में हुआ है। उनकी पढ़ाई-लिखाई भी पटना में ही हुई है।

पहला ब्रेक कब मिला?

रतन ने हंसते हुए जवाब दिया, ‘मुझे पहली बार दूरदर्शन के शो ‘How’s That’ में काम मिला था। मैंने इस शो में लीड रोल की बहन का किरदार निभाया था। हालांकि इस शो को करते हुए मैं बहुत डरी हुई थी। मेरे ज्यादा शाॅट्स भी नहीं थे, लेकिन उस वक्त इंडस्ट्री का कुछ भी नहीं पता था।

इस शो में काम करने की खबर घर तक चली गई थी। पहले एपिसोड को पूरे परिवार ने देखा, लेकिन मैं कहीं दिखी ही नहीं। अब मैं लीड तो हूं नहीं कि पहले एपिसोड में नजर आ जाऊंगी। घर से फोन आया कि हमने तो सबको बता दिया था, लेकिन तुम कहीं दिखी ही नहीं। तब उन्हें समझाया कि मैं तीसरे एपिसोड में नजर आऊंगी।

फिर उन लोगों ने तीसरे एपिसोड तक इंतजार किया जिसमें मैं केवल एक पासिंग शॉट में दिखी। कुछ सेकेंड के लिए ही सही, लेकिन पापा ने मुझे स्क्रीन पर देखा तो बहुत खुश हुए। उन्होंने कहा- रसो, तुम बहुत अच्छी लग रही थी। उस शो के बाद ‘राधा की बेटियां’ में लीड रोल मिल गया। उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।’

आपने कुछ समय के लिए करियर पर ब्रेक क्यों लगाया था?

जवाब में रतन ने कहा, ‘कई प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स को लगता है कि मैंने यह इंडस्ट्री छोड़ दी है। वहीं, कुछ सोचते हैं कि मैंने जानबूझकर यह ब्रेक लिया है। हालांकि इसमें कोई सच्चाई नहीं है। किस्मत का खेल था कि ना चाहते हुए ब्रेक लग गया। मैं तो काम के जरिए आगे बढ़ते ही रहना चाहती थी। 5 जनवरी 2018 को पापा का निधन हुआ था।

दरअसल, पापा को कैंसर था। डॉक्टर ने हमें सिर्फ एक महीने का टाइम दिया था। मेरे लिए वो बहुत शॉकिंग था। बीमारी का पता चलते ही मैं उन्हें पटना से मुंबई ले आई। नेचुरोपैथी ट्रीटमेंट की मदद से 3 महीने तक उनकी देखभाल की। फिर वो चल बसे। मैं समझ ही नहीं पाई कि इतनी जल्दी यह सब कैसे हो गया। मैंने पूरी जिंदगी करियर बनाने में लगा दी थी। पापा के साथ ज्यादा वक्त ही नहीं बिता पाई। बस आखिरी के वो तीन महीने मैंने उनके साथ सेलिब्रेट किया था।

पापा के निधन के बाद मेरी पूरी जिंदगी बदल गई। उनके जाने से मेरी तबीयत बहुत खराब हो गई। मैं डिप्रेशन का शिकार हो गई। मन की बीमारी कब तन को लग गई, पता ही नहीं चला। डिप्रेशन के साथ-साथ मैं आटो इम्यून डिसऑर्डर का भी शिकार हो गई। इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसके तले पूरी जिंदगी तो बिता नहीं सकती थी। ऐसे में मैंने खुद पर काम करना शुरू किया, काम से ब्रेक लिया और खूब घूमा। इसकी बदौलत मुझे बहुत फायदा मिला।’

2013 में रतन ने रियलिटी शो बिग बॉस 7 में भाग लिया था और 28वें दिन बाहर भी हो गई थीं।

2013 में रतन ने रियलिटी शो बिग बॉस 7 में भाग लिया था और 28वें दिन बाहर भी हो गई थीं।

कब पता चला कि आपको ऑटोइम्यून डिसऑर्डर बीमारी है?

रतन कहती हैं, ‘मुझे पहली ठोकर तो तभी लगी थी जब पता चला कि पापा को कैंसर है। इस बात का बहुत ज्यादा स्ट्रेस ले लिया और बीमार रहने लगी। धीरे-धीरे मेरी आंखें लाल होना शुरू हो गईं। रोशनी भी कम होने लगी।

जब डाॅक्टर्स को दिखाया तो शुरुआत में वो भी इसकी वजह नहीं पकड़ पाए। काफी समय बाद पता चला कि मुझे ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, जिसका केवल स्टेरॉयड्स से इलाज होता है। मेरी कई महीनों तक काउंसिलिंग चली। मैंने तय कर लिया था कि मैं स्टेरॉयड्स पर नहीं जाऊंगी इसीलिए मैंने आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक ट्रीटमेंट शुरू किया। नतीजतन आज उस बीमारी से मुक्त हूं।

इसी दौरान मैं एक इंडियन साइकोलॉजी के टीचर से मिली। उन्होंने मेरा डिप्रेशन ट्रीट किया। पहले मैं उनकी पेशेंट थी, फिर स्टूडेंट बन गई। अब मैं उन्हें 5 साल से असिस्ट कर रही हूं। एक्टिंग के अलावा अब ज्यादातर इंट्रेस्ट साइकोलॉजी में है।’

रतन ने कोविड के दौरान यूट्यूब चैनल की शुरुआत की थी। इस चैनल पर उनके 496K फॉलोअर्स हैं। कोविड के वक्त उन्होंने इस चैनल पर रोजमर्रा की अपडेट के साथ खाने की डिशेज की वीडियोज भी अपलोड की थी।

रतन ने कोविड के दौरान यूट्यूब चैनल की शुरुआत की थी। इस चैनल पर उनके 496K फॉलोअर्स हैं। कोविड के वक्त उन्होंने इस चैनल पर रोजमर्रा की अपडेट के साथ खाने की डिशेज की वीडियोज भी अपलोड की थी।

क्या कभी शो के किरदार ने आपके रियल लाइफ किरदार को ओवरशैडो किया है?

इस बारे में रतन ने कहा, ‘मैंने एक्टिंग की पढ़ाई नहीं की थी। इस कारण मुझे नहीं पता था कि शूटिंग के बाद रील से रियल किरदार में कैसे स्विच करते हैं। जब भी किसी किरदार में ढली तो उसी के जैसे होकर रह गई। उससे खुद को बाहर नहीं कर पाई।

हम जब टीवी शो करते थे तब 12 घंटे की शिफ्ट नहीं होती थी। बल्कि मैंने 18 से लेकर 42 घंटों तक की शिफ्ट की है। 18 घंटे तक एक ही किरदार निभाने के बाद वो किरदार मेरे अंदर रह जाता था।

एक वक्त ऐसा आया जब मैं ‘अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो’ की शूटिंग खत्म होने के बाद रोती थी। नींद में अपने डायरेक्टर से वक्त मांगती थी। मेरी बहन ने जब ये देखा तो वो भी घबरा गई। वो मुझे डॉक्टर के पास ले गई। तब डॉक्टर ने बताया कि सोते वक्त भी मेरे दिमाग में शो का किरदार एक्टिव रहता है। डॉक्टर की सलाह पर मैंने नींद की गोलियां लेनी शुरू कर दी थीं। नींद की गोली लेकर सोती थी, ताकि मेरे दिमाग को आराम मिल सके।

‘संतोषी मां’ की शूटिंग के दौरान मैंने अपनी यही गलती फिर से दोहराई थी। बैक-टु-बैक शूट कर रही थी। जिसकी वजह से मेरा स्ट्रेस लेवल बहुत बढ़ गया। ऐसा बिल्कुल नहीं कि मुझे टीवी नहीं करना। टीवी हमेशा मेरा पहला प्यार रहेगा, लेकिन इस बार जब लौटूंगी तो अपनी पुरानी गलती नहीं दोहराऊंगी। किरदार को कैसे स्विच ऑन या स्विच ऑफ करना है, यह सीख चुकी हूं।’

करीबी दोस्त सुप्रिया पिलगांवकर (हरी साड़ी में) के साथ रतना।

करीबी दोस्त सुप्रिया पिलगांवकर (हरी साड़ी में) के साथ रतना।

बुरे वक्त में किस दोस्त ने सबसे ज्यादा सपोर्ट किया?

रतन कहती हैं, ‘हमारी इंडस्ट्री बहुत प्रैक्टिकल है। यही वजह है कि मैंने अपनी बीमारी के बारे में ज्यादा बात नहीं की। गलतफहमी के कारण कई रिश्तों में दूरी आ जाती है। वैसे सच्चाई यह भी है कि किसी वक्त मेरे कई दोस्त हुआ करते थे, लेकिन जब बुरा वक्त आया तो कइयों ने अपने कदम पीछे ले लिए।

इस दौरान मुझे सिर्फ सुप्रिया पिलगांवकर ने बहुत सपोर्ट किया। मैंने उनके साथ अपना पहला शो ‘राधा की बेटियां’ किया था। जिस तरह उन्होंने मुझे समझा, मैं हमेशा उनकी आभारी रहूंगी। आज भी हम मिलकर खाना खाते हैं, एक दूसरे की बातें साझा करते हैं। उनके पति सचिन पिलगांवकर सर, बेटी श्रिया भी बहुत करीब हैं। मुंबई में यही मेरी फैमिली जैसे हैं।’

आपने स्वयंवर किया है, उसके बारे में बताइए?

रतन ने बताया, ‘मेरे स्वयंवर की यादें बहुत अच्छी हैं। हालांकि उस वक्त मैं थोड़ी नासमझ थी। कुछ साल बाद यदि वो शो करती तो शायद कुछ अच्छा होता। सच कहूं तो उस वक्त मेरी जिंदगी किसी फेयरी टेल से कम नहीं थी। हालांकि मेरी सगाई बहुत अच्छे लड़के से टूटी थी। अभिनव अच्छा लड़का था। मैं थोड़ी नासमझ थी।

साल 2011 में रतन ने स्वयंवर किया था। इस स्वयंवर में उन्होंने अभिनव शर्मा को जीवनसाथी चुना था। कुछ समय तक दोनों ने डेटिंग भी की थी, लेकिन बाद में उनका यह रिश्ता चल नहीं पाया।

साल 2011 में रतन ने स्वयंवर किया था। इस स्वयंवर में उन्होंने अभिनव शर्मा को जीवनसाथी चुना था। कुछ समय तक दोनों ने डेटिंग भी की थी, लेकिन बाद में उनका यह रिश्ता चल नहीं पाया।

लोग कमेंट करते हैं कि आप बॉयफ्रेंड होने के बावजूद छुपा रही हैं। कइयों को लगता है कि मैं अपनी शादी छुपा रही हूं। उनका शक इस बात पर होता है कि मैं किसके साथ घूमती हूं? कौन मेरे वीडियो शूट करता है? मैं भला क्यों ऐसा करूंगी? मैंने इन लोगों को हर तरह से समझाने की कोशिश कि शूटिंग के लिए मेरी एक टीम है, लेकिन कोई समझने को तैयार ही नहीं। मेरी शादी नहीं हुई है। मैं सिंगल हूं और काफी खुश भी।

पापा के जाने के बाद बहुत कुछ बदल गया है। परिवार में सभी चाहते हैं कि मैं शादी करके अपना घर बसा लूं। उन्हें लगता है कि शादी के बाद ही मेरी जिंदगी पूरी होगी, लेकिन ऐसा नहीं है। मैं बिना पार्टनर के भी खुश हूं।’

Jabalpur Climate Replace: हटा पश्चिमी विक्षोभ का साया, सूरज अब फिर दिखाएगा गर्मी

फिलहाल अगले 24 घंटे के दौरान मौसम शुष्क रहेगा। वहीं होली तक तेज गर्मी पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

By Hemant Kumar Upadhyay

Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 06:49 AM (IST)

Up to date Date: Fri, 22 Mar 2024 06:49 AM (IST)

Jabalpur Weather Update:  हटा पश्चिमी विक्षोभ का साया, सूरज अब फिर दिखाएगा गर्मी

HighLights

  1. तापमान में दो से तीन डिग्री की बढ़ोतरी की संभावना
  2. उत्तरी हवा से रात में हल्की ठंडक घुली रही।
  3. 23 मार्च को एक नया पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना भी बनी हुई है

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। पश्चिमी विक्षोभ के असर से पिछले पांच दिनों से बिगड़ा मौसम अब सुधर गया है। गुरुवार को दिन भर आसमान साफ रहा। धूप की चमक भी तेज रही वहीं चार से पांच किमी प्रति घंटे की गति से चली उत्तरी-पश्चिमी हवा भी वातावरण में गर्माहट का अहसास कराती रही।

उत्तरी हवा से रात में हल्की ठंडक घुली रही। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अब कमजोर पड़ गया है। इसी के साथ तापमान में भी दो से तीन डिग्री तक की बढ़ोतरी की संभावना है। अब आने वाले दिनों में सूरज एक बार फिर गर्मी दिखाएगा।

क्षेत्रीय मौसम कार्यालय के अनुसार वर्तमान में पश्चिम विदर्भ के ऊपर एक चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय है जिसका असर मध्यप्रदेश पर भी हो रहा है। 23 मार्च को एक नया पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना भी बनी हुई है, लेकिन इसका ज्यादा असर जबलपुर में नहीं पड़ेगा। फिलहाल अगले 24 घंटे के दौरान मौसम शुष्क रहेगा। वहीं होली तक तेज गर्मी पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

दिन का पारा बढ़ा, रात का हुआ कम

मौसम में आ रहे बदलाव से तापमान में भी आंशिक रूप से घटबढ़ का दौर जारी है। गुरुवार को अधिकतम तापमान 32.3 डिग्री सेल्सियस से मामूली रूप से बढ़कर 33.0 डिग्री पर पहुंच गया वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री की गिरावट के साथ 15.4 डिग्री सेल्सियस रिकाॅर्ड किया गया।

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    प्रिंट मीडिया में कार्य का 33 वर्ष का अनुभव। डिजिटल मीडिया में पिछले 9 वर्ष से कार्यरत। पूर्व में नवभारत इंदौर और दैनिक जागरण इंदौर में खेल संपादक और नईदुनिया इंदौर में संपादकीय विभाग में अहम जिम्‍मेदारियों का

Manisha had rejected Mani Ratnam’s movie Bombay | मनीषा ने मणि रत्नम की फिल्म बॉम्बे को ठुकराया था: बोलीं- ऐसा करने पर लोगों ने पागल कहा, मां का रोल करने से डरी थी

25 मिनट पहले

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मनीषा कोइराला डायरेक्टर मणि रत्नम की फिल्म बॉम्बे नहीं करना चाहती थीं। उनका मानना था कि फिल्म में मां का रोल करने के बाद उनका करियर खत्म हो जाएगा। हालांकि उनके इस फैसले को किसी भी करीबी ने सपोर्ट नहीं किया था। सबका कहना था कि वो पागल हैं जो ऐसा कर रही हैं। उन्हें अंदाजा नहीं था कि मणि रत्नम का डायरेक्शन की फील्ड में कितना बड़ा रुतबा है। हालांकि लोगों के समझाने के बाद उन्होंने फिल्म के लिए हामी भर दी थी।

यह सारी बातें खुद मनीषा ने हालिया इंटरव्यू में कहीं हैं। इन दिनों वो संजय लीला भंसाली की सीरीज हीरामंडी को लेकर चर्चा में हैं। मनीषा को आखिरी बार कार्तिक आर्यन-स्टारर शहजादा में देखा गया था।

फिल्म का ऑफर मिलने पर कन्फ्यूज थीं मनीषा
यूट्यूब चैनल O2 को दिए इंटरव्यू में मनीषा ने कहा कि उस वक्त यह धारणा थी कि मां का रोल करने के बाद लोग टाइपकास्ट हो जाते हैं। उन्होंने आगे कहा- मुझे याद है जब मुझे फिल्म बॉम्बे का ऑफर मिला था। इससे पहले मैं 1992 की फिल्म रोजा देखी नहीं थी लेकिन उसका गाना जरूर सुना था। यह भी बड़ी हिट रही थी।

जब मुझसे फिल्म बॉम्बे करने के लिए कहा गया तो मैं थोड़ी कंफ्यूज थी। उस वक्त बहुत समझदार नहीं थी। इंडस्ट्री में यह मानदंड था कि यंग हीरोइन मां का रोल नहीं प्ले कर सकतीं। इन सब बातों ने मुझे और चिंता में डाल दिया था।

लोगों ने कहा कि बेवकूफ होगी अगर फिल्म को ना कहा- मनीषा
इसी बीच मनीषा की मुलाकात सिनेमैटोग्राफर अशोक मेहता से हुई, जिसके साथ उन्होंने फिल्म सौदागर में काम किया था। उन्होंने मनीषा से कहा था कि वो बेवकूफ ही होंगी अगर वो इस ऑफर को रिजेक्ट करती हैं।

इस बारे में मनीषा ने बताया- मुलाकात के दौरान अशोक मेहता ने मुझसे कहा कि बेटा क्या कर रही हो तुम। क्या तुम जानती हो कि वो किस तरह के फिल्ममेकर हैं? क्या पता है कि उन्होंने किस लेवल का काम किया है? मणि रत्नम की आखिरी फिल्म भी बड़ी हिट साबित हुई थी।

उनकी इन बातों ने मुझे झझकोर दिया। फिर मैं और मां चेन्नई गए। फिर मेरा एक लुक टेस्ट और फोटोशूट हुआ। इसके बाद मैंने फिल्म में शैला बानो का रोल प्ले किया। मनीषा ने आगे कहा कि वो खुश हैं कि वो इस फिल्म का हिस्सा बनीं।

Lok Sabha Election: छग निर्माण के बाद से अब तक हुए लोकसभा चुनाव में अटलजी पर केंद्रित नारों ने किया प्रभावित

CG Lok Sabha Election राज्य गठन के बाद लोकसभा के पांच चुनाव हुए हैं। इन सभी चुनावों में भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी को अपने केंद्र में रखा है। अटलजी से संबंधित नारों की लोकसभा चुनाव में गूंज होते रही है।

By Neeraj Pandey

Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 05:00 AM (IST)

Up to date Date: Fri, 22 Mar 2024 05:00 AM (IST)

Lok Sabha Election: छग निर्माण के बाद से अब तक हुए लोकसभा चुनाव में अटलजी पर केंद्रित नारों ने किया प्रभावित
राज्य गठन के बाद लोकसभा के पांच चुनाव

HighLights

  1. राज्य गठन के बाद लोकसभा के पांच चुनाव
  2. चुनावों में भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी को अपने केंद्र में रखा
  3. लोकसभा चुनाव में गूंजते रहे अटल के नारे

राधाकिशन शर्मा, बिलासपुर, नईदुनिया। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद अब तक हुए लोकसभा चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री व भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी पर केंद्रित चुनावी नारों ने मतदाताओं को बेहद प्रभावित किया है। वर्ष 2004 से लेकर 2024 तक हुए लोकसभा चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी से संबंधित नारों की बहार रही है। यह लोगों को भाजपा के साथ कनेक्ट करने में मददगार साबित हुआ है। एक प्रभावी नारा, जो हर लोकसभा चुनाव में गूंजता है वह है, ‘नजर अटल पर, वोट कमल पर ‘। यह 2004 के लोकसभा चुनाव में आया था।

चुनावी नारे हो या स्लोगन, इसे कुछ इस अंदाज में मतदाताओं के सामने परोसा जाता है, जिसे पढ़कर लोग सोचने के लिए मजबूर हो जाते हैं। नारों को पढ़ने के बाद लोगों के मन में संबंधित नेता की छवि सीधे उतरने लगती है। उनके द्वारा किए गए काम हो या फिर किए गए वादे…।

सब-कुछ आंखों के सामने चलचित्र की भांति दिखने लगते है। यह छवि इतनी असरदार होती है कि संबंधित पार्टी के उम्मीदवार को वोट देने के लिए सोचने पर मजबूर कर देती है। या ऐसा भी कह सकते हैं कि प्रभावी नारों की वजह से मतदाता उम्मीदवार के पक्ष में वोट के रूप में अपना समर्थन दे देते हैं।

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लोकसभा चुनाव में गूंजते रहे अटल के नारे

राज्य गठन के बाद लोकसभा के पांच चुनाव हुए हैं। इन सभी चुनावों में भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी को अपने केंद्र में रखा है। अटलजी से संबंधित नारों की लोकसभा चुनाव में गूंज होते रही है। राज्य निर्माता के रूप में हो या फिर छत्तीसगढ़ राज्य गठन के लिए उनके द्वारा किए गए ईमानदार वायदे। एक नारे के दम पर छत्तीसगढ़वासियों को सब-कुछ याद आ जाता है।

विधानसभा चुनाव में गूंजा दिल को छू लेने वाले नारे

तीन महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य की सत्ता पर कांग्रेस काबिज थी। वापसी के लिए भाजपा ने एक बार फिर अटलजी को याद किया। प्रभावी नारे लाए। ‘हमने बनाया है हम ही संवारेंगे’, ‘अब नई सहिबो बदल के रहिबो’। इन दो नारों ने जमकर काम किया। अटलजी द्वारा बनाए छत्तीसगढ़ राज्य की याद दिला दी। गड़बड़ी व घोटाले के बाद सुशासन का यह नारा लोगों को प्रभावित किया। इन दो प्रभावी नारों के बीच मोदी की गारंटी ने जो काम किया वह जगजाहिर है। राज्य की सत्ता पर भाजपा की दमदार तरीके से वापसी हुई।

भाजपा के इन नारों ने लुभाया

नजर अटल पर, वोट कमल पर, 1996 में अब की बारी अटलबिहारी, 2023 के विधानसभा चुनाव में अब नहीं सहिबो बदल के रहिबो, हमने बनाया है हम ही संवारेंगे। 1999 के चुनाव में प्रचलित नारा था- अटल बिहारी जरूरी है, ताराचंद मजबूरी है।

1980 में गूंजा कांग्रेस का यह नारा

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को केंद्र में रखकर वर्ष 1980 में बिलासपुर के कवि श्रीकांत वर्मा ने जात पर न पात पर, इंदिराजी की बात पर, मुहर लगाना हाथ पर, नारा दिया था। इस नारे ने जमकर कमाल किया था। लोगों की जुबान पर भी चढ़ा और इसका प्रभावी असर भी देखने को मिला था।

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Randeep Hooda Swatantrya Veer Savarkar Controversy Defined | Propaganda Motion pictures | स्वातंत्र्य वीर सावरकर आज रिलीज: सुभाष चंद्र बोस के पड़पोते को फिल्म पर आपत्ति, प्रोपेगैंडा मानी गई दो फिल्मों की कमाई थी ₹ 645 करोड़

24 मिनट पहले

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फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ 22 मार्च यानी आज रिलीज हो गई है। फिल्म में रणदीप हुड्डा राजनेता और क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की भूमिका निभा रहे हैं। ये बतौर डायरेक्टर उनकी पहली फिल्म है। चुनावी माहौल के बीच रिलीज हो रही फिल्म को प्रोपेगैंडा मूवी कहा जा रहा है। फिल्म को लेकर कुछ विवाद भी सामने आ रहे हैं। ट्रेलर के एक सीन पर सुभाष चंद्र बोस के पड़पोते ने आपत्ति जताई है।

वैसे, स्वातंत्र्य वीर सावरकर से पहले भी कई फिल्मों पर विवाद हुए हैं और उन पर प्रोपेगैंडा मूवी होने के आरोप लगते रहे हैं। कुछ फिल्मों को विवादों से बचाने के लिए रिलीज ही नहीं किया गया जबकि कुछ लंबी लड़ाई के बाद सिनेमाघरों तक पहुंचीं।

दिलचस्प बात ये है कि मौजूदा दौर में प्रोपेगैंडा मानी जाने वाली केवल दो फिल्में-द कश्मीर फाइल्स और द केरला स्टोरी ही बॉक्सऑफिस पर सफल रही हैं जिन्होंने कुल मिलाकर 645 करोड़ रु. कमाए थे।

आज हम आपको बताएंगे क्या होती हैं प्रोपेगैंडा मूवीज और किन फिल्मों की रिलीज से पहले हुए विवाद…

इससे पहले जानिए क्यों विवादों में है फिल्म ‘स्वतंत्र्य वीर सावरकर’

विवाद 1: ट्रेलर देखने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पड़पोते चंद्र कुमार बोस ने एक सीन पर आपत्ति जताई है। उन्होंने मेकर्स पर सुभाष चंद्र बोस की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया है। इस सीन में वीर सावरकर सुभाष चंद्र बोस से कहते हैं- ‘जर्मनी और जापान के आधुनिक हथियारों के साथ अंग्रेजों पर हमला कीजिए।

फिल्म के एक सीन में रणदीप हुड्डा।

फिल्म के एक सीन में रणदीप हुड्डा।

चंद्र कुमार बोस ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘रणदीप हुड्डा- ‘सावरकर’ पर फिल्म बनाने के लिए आपकी सराहना करता हूं, लेकिन कृपया ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस’ का नाम सावरकर के साथ जोड़ने से बचें। नेताजी एक धर्मनिरपेक्ष नेता और देशभक्त थे।’

विवाद 2: फिल्म में भीमराव अंबेडकर की भूमिका निभाने वाले एक्टर के रंग पर भी सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। लोगों को इस बात पर आपत्ति है कि फिल्म में भीमराव अंबेडकर के कैरेक्टर की कास्टिंग अच्छी नहीं हुई है। वो एक्टर का रंग-रूप देखकर इस कास्टिंग को जातिगत एंगल दे रहे हैं।

स्वातंत्र्य वीर सावरकर को क्यों कहा जा रहा प्रोपेगैंडा फिल्म?

कांग्रेस वीर सावरकर की स्वतंत्रता सेनानी वाली इमेज पर सवाल भी उठाती रही है। ऐसे में ‘आपने कभी सोचा है कि कांग्रेस के किसी मेंबर को काले पानी की सजा क्यों नहीं हुई?’ जैसे डायलॉग के चलते फिल्म को एंटी कांग्रेस करार दिया जा रहा है।

फिल्म पर एंटी महात्मा गांधी सेंटीमेंट्स सेट करने के आरोप लग रहे हैं क्योंकि इसमें ‘महात्मा गांधी बुरे नहीं थे, लेकिन अगर वो अपनी अहिंसावादी सोच पर अड़े नहीं रहते तो भारत 35 साल पहले ही आजाद हो जाता।’ जैसे डायलॉग हैं।

प्रोपेगैंडा मूवी कहे जाने पर रणदीप हुड्डा ने एक इंटरव्यू में सफाई देते हुए कहा है कि ये फिल्म उन्होंने अपना घर बेचकर बनाई है और किसी से फंडिंग नहीं ली है।

अब पढ़िए क्या होती हैं प्रोपेगैंडा मूवीज…

प्रोपेगैंडा मूवीज उन्हें कहा जाता है जिनके माध्यम से किसी तरह का एजेंडा सेट करने या प्रोपेगैंडा दिखाने की कोशिश की जाए। ऐसी फिल्में जिनमें देश के अहम और विवादित मुद्दे, राजनीति या राजनीति से जुड़े व्यक्ति विशेष और सरकार की नीतियों का प्रचार शामिल हो।

इसके अलावा धर्म, समुदाय, दंगों और जातीय हिंसा और ऐतिहासिक विषयों पर बनी फिल्में जिनमें एक धर्म विशेष को वीर और दूसरे धर्म को क्रूर दिखाया जाए तो वो प्रोपेगैंडा या एजेंडा मूवीज कहलाती हैं। अप्रैल में लोकसभा चुनावों से पहले ऐसी फिल्मों का ट्रेंड बढ़ गया है।

1) फिल्म: 72 हूरें

रिलीज डेट: 7 जुलाई, 2023

कहानी: फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे कट्टरपंथियों के बहकावे में आकर युवा अपने आप को सुसाइड बॉम्बर बना देते हैं। दावा किया गया कि यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है। ट्रेलर रिलीज होने के बाद ही फिल्म पर विवाद शुरू हो गए थे।

मुंबई के सोशल एक्टिविस्ट सैय्यद आरिफ अली महमूद अली ने मेकर्स के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। इसमें फिल्म के डायरेक्टर संजय पूरन सिंह और अशोक पंडित समेत चारों प्रोड्यूसर्स पर धर्म का अपमान करने और समुदाय विशेष की गलत छवि दिखाने के आरोप लगाए गए थे। इसके साथ ही एफआईआर में मेकर्स पर फेक प्रोपेगैंडा के जरिए पैसे कमाने के भी आरोप लगाए थे। फिल्म फ्लॉप रही।

2) फिल्म – अजमेर 92

रिलीज डेट: 21 जुलाई 2023

कहानी: फिल्म अजमेर 92 की कहानी देश के सबसे बड़े रेप स्कैंडल पर बेस्ड थी, जो राजस्थान के अजमेर में हुआ था। करीब 250 लड़कियों को उनके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो से ब्लैकमेल कर महीनों तक रेप किया गया। इस कांड में अजमेर के रसूखदार लोग शामिल थे। जब 1992 में इसका खुलासा हुआ तो पूरा देश सन्न रह गया था।

मूवी को लेकर मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों और अजमेर शरीफ दरगाह कमेटी के पदाधिकारियों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। फिल्म के माध्यम से एक ही कम्युनिटी के लोगों को टारगेट करने का आरोप लगाया था। दरगाह कमेटी की ओर से चेतावनी भी दी गई थी कि अजमेर शरीफ दरगाह और ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की इमेज को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिल्म फ्लॉप साबित हुई थी।

'द केरला स्टोरी' में अदा शर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

‘द केरला स्टोरी’ में अदा शर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

3) फिल्म: द केरला स्टोरी

रिलीज डेट: 5 मई, 2023

कहानी: सुदीप्तो सेन के निर्देशन में बनी ये फिल्म केरल की स्टूडेंट्स की कहानी थी, जिनका धर्म परिवर्तन कर उन्हें आईएसआईएस के एजेंडा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ये फिल्म रियल स्टोरी पर आधारित थी, हालांकि ये विवादों में घिर गई थी। फिल्म में 32 हजार लड़कियों को प्रताड़ित किए जाने की बात थी, जिस पर विवाद हुआ था। केरल से शुरू हुआ ये विरोध देशभर में चर्चा में रहा। एक ओर भाजपा ने फिल्म को आतंकवाद का असली चेहरा उजागर करने वाली फिल्म बताया। वहीं, कांग्रेस, TMC समेत कई विपक्षी दलों ने इसे प्रोपेगैंडा मूवी करार दिया।

केरल विधानसभा के नेता विपक्ष वीडी सतीशन ने कहा था कि इससे केरल राज्य की छवि बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। उनका आरोप था कि संघ केरल में नफरत फैलाने का एजेंडा चला रहा है।

विवाद बढ़ने के बाद फिल्म के मेकर्स ने ट्रेलर से 32000 लड़कियों का जिक्र हटा दिया था। हालांकि विवादों से फिल्म को काफी फायदा हुआ था। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तकरीबन 305 करोड़ का कलेक्शन किया था।

'द कश्मीर फाइल्स' में अनुपम खेर, मिथुन, पल्लवी जोशी जैसे सितारों ने काम किया था।

‘द कश्मीर फाइल्स’ में अनुपम खेर, मिथुन, पल्लवी जोशी जैसे सितारों ने काम किया था।

4) फिल्म: द कश्मीर फाइल्स

रिलीज डेट: 11 मार्च 2022

द कश्मीर फाइल्स में 1990 में कश्मीर विद्रोह के दौरान कश्मीरी पंडितों पर किए गए टॉर्चर की कहानी बताई गई थी। डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री पर आरोप लगे थे कि उन्होंने केवल एक पक्ष को ध्यान में रखकर फिल्म बनाई है।

इजराइली फिल्ममेकर नदाव लैपिड ने 2023 में गोवा में हुए 53वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की क्लोजिंग सेरेमनी में ‘द कश्मीर फाइल्स’ को वल्गर और प्रोपेगैंडा फिल्म बताया था जिससे विवाद और गहरा गया था।

उन्होंने कहा था कि हम इस फिल्म को देखकर डिस्टर्ब और हैरान थे। इतने प्रतिष्ठित फिल्म समारोह के लिए ये फिल्म उचित नहीं है। विवादों से फिल्म खासी चर्चा में आ गई थी। 12 करोड़ में बनी फिल्म ने 340 करोड़ का बिजनेस किया था।

फिल्म: द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर

रिलीज डेट: 11 जनवरी, 2019

संजय बारू की पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर लिखी किताब पर आधारित फिल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ रिलीज होने से पहले ही विवादों में घिर गई थी।

2014 में आई बारू की किताब ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ में कहा गया था कि मनमोहन सिंह नाम के प्रधानमंत्री थे और सत्ता पर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी का ही नियंत्रण था। इस फिल्म में भी इन्हीं बातों को प्रमुखता से पेश किया गया था।

फिल्म का ट्रेलर आते ही भाजपा के आधिकारिक हैंडल से इसे ट्वीट किए जाने के बाद विवाद गहरा गया था। कांग्रेस के नेता हमलावर हो उठे और फिल्म की रिलीज रोकने की मांग उठने लगी।

कांग्रेस शासित राज्यों में इसे बैन किए जाने की बात भी आई, लेकिन बाद में पार्टी की ओर से इसका खंडन कर दिया गया। फिल्म रिलीज हुई, लेकिन ये बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा सकी।

1975 में आंधी हुई थी बैन, ‘किस्सा कुर्सी का’ के जला दिए गए थे प्रिंट

फिल्मों पर विवाद के मामले नए नहीं हैं। 1975 में बनी फिल्म आंधी को इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी के दौरान बैन कर दिया था। बाद में 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने पर इसे रिलीज किया गया, लेकिन 1980 में इंदिरा फिर सत्ता में आ गईं।

फिल्म 'आंधी' में सुचित्रा सेन और संजीव कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

फिल्म ‘आंधी’ में सुचित्रा सेन और संजीव कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

1975 में जनता पार्टी के सांसद अमृत नाहटा द्वारा निर्देशित फिल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ के तो मास्टर प्रिंट सहित सभी कॉपियां इमरजेंसी के दौरान संजय गांधी के समर्थकों ने जला दी थीं। यह फिल्म इंदिरा गांधी व संजय गांधी की कार्यशैली को लेकर बनाई गई थी।

इस फिल्म को नष्ट करने पर संजय गांधी व तत्कालीन सूचना प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ला को सजा भी हुई। हालांकि बाद में यह फैसला रद्द हो गया। नाहटा ने 1978 में इस फिल्म को नए कलाकारों के साथ बनाया, लेकिन 1980 में कांग्रेस की फिर सत्ता में वापसी हो गई। बाद में खुद नाहटा कांग्रेस में शामिल हो गए।

1993 में राजीव गांधी की हत्या पर बनी फिल्म कुत्तरापथिरिकल को भी प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था। यह 2007 में रिलीज हो सकी।

Lok Sabha Elections: लोकसभा रण में अटल फैक्टर की काट नहीं ढूंढ पाई कांग्रेस, हमने बनाया हम ही संवारेंगे की नीति में भाजपा

CG Information पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 1998-99 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान रायपुर के सप्रे शाला मैदान में कहा था- ‘आप मुझे 11 सांसद दीजिए, मैं आपको छत्तीसगढ़ दूंगा।’ इसके बाद राज्य की जनता ने उन्हें 10 सीटें दिलाईं। राज्य का निर्माण हुआ।

By Neeraj Pandey

Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 05:34 AM (IST)

Up to date Date: Fri, 22 Mar 2024 05:34 AM (IST)

Lok Sabha Elections: लोकसभा रण में अटल फैक्टर की काट नहीं ढूंढ पाई कांग्रेस, हमने बनाया हम ही संवारेंगे की नीति में भाजपा
लोकसभा रण में अटल फैक्टर की काट नहीं ढूंढ पाई कांग्रेस

HighLights

  1. लोकसभा रण में अटल फैक्टर की काट नहीं ढूंढ पाई कांग्रेस
  2. अटल की 11 सीट देने की मांग पर छत्तीसगढ़िया आज भी अटल
  3. हमने बनाया हम ही संवारेंगे की नीति में आगे बढ़ रही भाजपा

रायपुर(राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ के लोकसभा के रण में आज भी अटल फैक्टर मायने रखता है। छत्तीसगढ़ के राज्य निर्माता भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 25 वर्ष पहले वर्ष 1998-99 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान रायपुर के सप्रे शाला मैदान में कहा था- ‘आप मुझे 11 सांसद दीजिए, मैं आपको छत्तीसगढ़ दूंगा।’ इसके बाद राज्य की जनता ने उन्हें 10 सीटें दिलाईं। राज्य का निर्माण हुआ। तब से लेकर आज तक कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में अटल फैक्टर की काट नहीं मिल पाई है।

पिछली बार 2019 के आम चुनाव में भाजपा को नौ और कांग्रेस को महज दो सीटें ही मिल पाई। ये स्थिति तब थी जब वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भूपेश बघेल के नेतृत्व में प्रदेश की 90 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को 68, भाजपा को 15, बसपा को दो और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) को पांच सीटें हासिल हुई थीं। अभी लोकसभा चुनाव 2024 के लिए भी भाजपा मोदी की गारंटी के साथ-साथ ‘हमने बनाया, हम ही संवारेंगे’ का नारा बुलंद कर रही है।

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विधानसभा में भी गूंजा था ‘हमने बनाया, हम ही संवारेंगे’

इसके पहले विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान भी छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि ‘हमने बनाया, हम ही संवारेंगे’। उन्होंने कहा था कि भाजपा ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का निर्माण किया था और इसीलिए आज पूरा छत्तीसगढ़ कह रहा है, ‘भाजपा ने बनाया है,भाजपा ही संवारेगी।

अब मोदी की गारंटी भाजपा का मुद्दा

भाजपा मोदी की गारंटी के मुद्दे को लेकर जनता के बीच पहुंच रही है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 हटाने का मामला हो या फिर नागरिक संशोधन कानून यानी सीएए लागू करने का मामला। या फिर राम मंदिर का मुद्दा हो, तमाम मुद्दों के साथ देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को पूरा करने को लेकर पार्टी अपने विजन को साझा कर रही है।

कांग्रेस दे रही ‘न्याय की गारंटी’

कांग्रेस चुनाव प्रचार के दौरान युवाओं, किसानों, महिलाओं, श्रमिकों और आदिवासी समुदाय के लिए ‘न्याय की गारंटी’ देने की बात कर रही है। महिलाओं को एक लाख सालाना देने, किसानों के मुद्दे और एमएसपी की कानून गारंटी देने की बात कर रही है। वहीं बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, ट्रेनों का अनियमित संचालन, इलेक्ट्रोल बांड मामले में भाजपा को घेर रही है।

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