न भारत और न चीन, फिर किसके पास है सबसे ज्यादा ‘सोना’, देखें दुनिया के टॉप देशों की लिस्ट

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सोना (GOLD) शुरुआत से ही संपन्नता का प्रतीक माना जाता रहा है. आमतौर पर भी ज्यादा सोना हमेशा से अमीरों के पास ही रहा है.  हालांकि, गहनों की चमक-दमक से ज्यादा सोना दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ भी माना जाता है. डिजिटल करेंसी के इस दौर में भी सोना सुरक्षा, स्थिरता और धन के प्रतीक के लिहाज से आज भी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बना हुआ है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि दुनिया के किस मुल्क के पास से सबसे ज्यादा सोना है. 

दुनिया में सबसे ज्यादा सोना किसके पास
ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के पास सितंबर 2025 तक 8133 टन सोना है. दरअसल, अमेरिका लंबे समय से सोने का सबसे बड़ा भंडार रखने वाला देश है और साल 2000 से लगभग अमेरिका का सोना स्थिर है. इसी कारण इस लिस्ट में अमेरिका पहले नंबर पर है. यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश जर्मनी के पास 3,350 टन सोना है, जो साल 2000 में 3,468 टन था. इस लिहाज से जर्मनी दुनिया में सबसे ज्यादा सोना रखने वाला दूसरा देश है. 

रूस के पास कितना सोना
इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर है इटली. सितंबर 2025 तक इस यूरोपीय देश के पास 2452 टन सोना है. भारत के खास दोस्त फ्रांस के पास मौजूदा वक्त में 2,437 टन सोना है. इस तरह दुनिया में फ्रांस सोना रखने के मामले में चौथे नंबर पर है. भारत के सबसे अच्छे मित्र देश रूस के पास 2330 टन सोना है. रूस पांचवें नंबर पर है. ये आंकड़े सितंबर 2025 के हैं. 

भारत के पास जापान से ज्यादा सोना
भारत के पड़ोसी चीन के पास 2,304 टन सोना है. इससे पहले चीन के पास 2299 टन सोना था. मतलब साफ है कि चीन धीरे-धीरे सोने का भंडार बढ़ा रहा है. सबसे ज्यादा सोना रखने वाले देशों की लिस्ट में चीन छठे नंबर पर है. यूरोप के छोटे से देश स्विट्जरलैंड के पास मौजूदा समय में 1,040 टन सोना है. वहीं, भारत की बात करें तो मौजूदा वक्त में 880 टन सोना है, जो अब तक का सबसे ज्यादा है. भारत दुनिया का आठवां देश है, जिसके पास इतना सोना है. भारत के दोस्त जापान के पास 846 टन सोना है और ये इस लिस्ट में नौवें नंबर पर है.

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‘ये विराट है मदद चाहिए, मेडे…मेडे’, यूक्रेन ने रूसी तेल टैंकर पर किया ड्रोन अटैक, काला सागर..

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रूस-यूक्रेन युद्ध साढ़े तीन साल से भी अधिक समय से जारी है. इसी बीच काला सागर में शनिवार (29 नवंबर) को यूक्रेन के मानवरहित ड्रोन ने रूस के तेल टैंकर विराट को अपना निशाना बनाया. ये वही जहाज है जिस पर शुक्रवार को भी विस्फोट हुए थे. सीएनएन ने यूक्रेन की सुरक्षा सेवाओं (एसबीयू) के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि रूस के तथाकथित छाया बेड़े को ड्रोन ने निशाना बनाया. यूक्रेन ने औपचारिक रूप से इस हमले की जिम्मेदारी भी ली है.

विराट और एक अन्य टैंकर ‘कैरो’ के क्रू मेंबर ने एक खुली रेडियो संकट कॉल जारी कर ड्रोन हमले की सूचना दी थी. कॉल की वीडियो रिकॉर्डिंग में एक क्रू मेंबर को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “यह विराट है मदद चाहिए! ड्रोन हमला मेडे!” यूक्रेन का दावा है कि ये जहाज भले ही अफ्रीकी देशों में रजिस्टर थे लेकिन ये रूस की शैडो-फ्लीट का हिस्सा थे. इन पर अमेरिका और यूरोप ने प्रतिबंध लगा रखा है. रूस-यूक्रेन जंग रोकने की ट्रंप की कोशिशों को एक बार फिर झटका लग सकता है, क्योंकि जंग के दौरान पहली बार किसी सिविलियन जहाज पर हमला हुआ है.

तुर्किये के परिवहन मंत्रालय ने क्या कहा
एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान के अनुसार, तुर्किये के परिवहन मंत्रालय ने कहा कि विराट जिसके बारे में पहले कहा गया था कि उस पर काला सागर तट से लगभग 35 समुद्री मील दूर मानवरहित समुद्री वाहनों ने हमला किया था, आज सुबह मानवरहित समुद्री वाहनों द्वारा उस पर फिर से हमला किया गया.

तुर्किये के परिवहन मंत्री अब्दुल कादिर उरालोलू ने बताया कि जांचकर्ता बाहरी हमले के संकेतों की जांच कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि बाहरी हमले का मतलब है कि जहाज पर किसी बारूदी सुरंग, रॉकेट या शायद किसी ड्रोन से हमला हुआ है. ये पहली चीजें हैं जो दिमाग में आती हैं. हालांकि मामूली क्षति के बावजूद विराट स्थिर है. अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और उनका स्वास्थ्य ठीक है.

दक्षिणी काला सागर में हुआ हमला 
एक ओपन सोर्स इंटेलिजेंस मॉनिटर द्वारा संचालित एक्स हैंडल OSINTdefender ने तुर्किये के परिवहन मंत्रालय के हवाले से बताया कि रूसी छाया बेड़े से जुड़े गाम्बिया के झंडे वाले टैंकर M/T VIRAT पर दक्षिणी काला सागर में सतही जहाजों ने फिर से हमला किया. शुक्रवार के शुरुआती हमले के बाद बीस चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया. बताया जा रहा है कि जहाज अब तुर्की के तट पर जल रहा है और डूब रहा है.

सीएनएन ने एक यूक्रेनी सुरक्षा सूत्र के हवाले से बताया कि इस हमले में एसबीयू-नौसेना के समन्वित अभियान में सी बेबी समुद्री ड्रोन शामिल थे. रूस ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. सूत्र के अनुसार दोनों जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है और वे प्रभावी रूप से निष्क्रिय हो गए हैं.

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‘आतंकवादियों को सीमा पर घुसपैठ में मदद कर रहा तालिबान’, PAK आर्मी ने अफगानिस्तान पर लगाया आरोप

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अफगानिस्तान के रिहायशी इलाकों में एयर स्ट्राइक करने के बाद अब पाकिस्तान ने आतंकवाद को लेकर अफगानिस्तान पर आरोप लगाए हैं. पाकिस्तानी सेना ने आरोप लगाया है कि अफगानिस्तान तालिबान देश में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आतंकवादियों को सीमा पर घुसपैठ कराने में मदद कर रहा है. सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने मंगलवार (25 नवंबर, 2025) को पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान आरोप लगाया, जिसका वीडियो शुक्रवार (28 नवंबर, 2025) शाम को जारी किया गया. 

प्रवक्ता के अनुसार अफगान तालिबान सेना पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर गोलीबारी करती है, जिससे आतंकवादियों और यहां तक ​​कि तस्करों को पाकिस्तान में अवैध घुसपैठ का मौका मिलता है. सीमाओं की सुरक्षा हमेशा पारस्परिक रूप से होती है. दोनों देश उनकी रक्षा करते हैं. अब दूसरी तरफ एक ऐसा देश है, जिसकी चौकियां पहले आपकी चौकियों पर गोलीबारी करती हैं और फिर गोलीबारी शुरू हो जाती है और फिर वे आतंकवादियों को बीच की खाली जगहों से पार करवाते हैं. 

‘तस्करों के वाहनों को नीचे से गुज़रने देते हैं’
सैन्य प्रवक्ता ने कहा, “ये बेहद समन्वित हमले हैं. वे चौकियों पर हमला करते हैं और तस्करों के वाहनों को नीचे से गुज़रने देते हैं. ये पूछे जाने पर कि पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक फ्रंटियर कोर के जवान जब सीमा पर तैनात हैं तो पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से आतंकवादी कैसे घुसपैठ कर सकते हैं, इस पर चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान ने 2,500 किलोमीटर लंबी सीमा पर 15-25 किलोमीटर की दूरी पर सैन्य चौकियां स्थापित कर ली हैं, लेकिन सीमा को पूरी तरह से सील करना संभव नहीं है, यहां तक ​​कि अमेरिका जैसा देश भी ऐसा करने में असमर्थ है और मैक्सिको से अवैध घुसपैठ को रोक नहीं पा रहा है.

अफगानिस्तान में हमलों पर क्या बोली पाक सेना
लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने अफ़ग़ान तालिबान के उन आरोपों का भी खंडन किया कि पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान में रातों रात हमले किए थे. उन्होंने कहा कि कोई अच्छा या बुरा तालिबान नहीं होता और पाकिस्तान आतंकवादियों में कोई भेद नहीं करता. उन्होंने विद्रोहियों के खिलाफ चल रहे खुफिया-आधारित अभियानों (आईबीओ) के बारे में भी बात की और कहा कि 4 नवंबर से अब तक 4,910 ऐसे अभियान चलाए गए हैं, जो प्रतिदिन 233 आईबीओ के बराबर हैं.

कितने खुफिया अभियान चलाए
उन्होंने बताया कि इन अभियानों में 206 आतंकवादी मारे गए. जनवरी से अब तक देश भर में कम से कम 67,023 आईबीओ चलाए जा चुके हैं. बलूचिस्तान में ऐसे अभियानों की संख्या सबसे ज़्यादा रही, जहां 53,000 से ज़्यादा ऐसे अभियान चलाए गए, जबकि खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में 12,800 से ज़्यादा और देश के बाकी हिस्सों में लगभग 850 ऐसे अभियान चलाए गए

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‘उनकी एक तस्वीर से PAK की सियासत…’, इमरान खान की मौत की अफवाह पर PTI नेता का बड़ा बयान

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पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर पाकिस्तान में हल्ला थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब उनकी पार्टी के एक नेता ने इमरान खान की जेल में हालत पर चिंता जताई है. खैबर पख्तूनख्वा से पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के सीनेटर खुर्रम जीशान ने न्यूज एजेंसी (ANI) से बातचीत में कहा, ‘उन्हें लगभग एक महीने से पूरी तरह आइसोलेशन में रखा गया है. उनके परिवार, वकीलों या पार्टी के सीनियर नेताओं से कोई बातचीत नहीं हो पा रही है.’

जीशान ने कहा, यह साफ तौर पर ह्यूमन राइट्स का उल्लंघन है. अधिकारी लगातार उनपर शर्तें मानने का दबाव बना रहे हैं. 

‘हमें उनके जिंदा होने का भरोसा दिलाया है’

शान ने बताया कि हमें कुछ दिनों में भरोसा दिलाया गया है कि वह जिंदा हैं, और अदियाल जेल में बंद हैं. वह ठीक हैं. उन्होंने साथ ही सरकार और आर्मी की तरफ से रखी गई शर्तों का भी जिक्र किया है. वह इमरान के साथ एक डील करने की कोशिश कर रहे हैं. उनसे देश छोड़ने के लिए कह रहे हैं. उन्हें देश छोड़कर अपनी पसंद की जगह पर रहने के लिए छूट मिलने का दावा किया गया है. लेकिन इमरान इसके लिए राजी नहीं है. वह जिस तरह के नेता हैं, इन शर्तों को कभी कबूल नहीं करेंगे. 

आखिर कुछ वक्त से पाकिस्तान में क्या हो रहा?

दरअसल, इस हफ्ते कुछ सोशल मीडिया हैंडल से दावा किया गया कि इमरान को मार दिया गया. ये अफवाहें तब आईं, जब पाकिस्तानी ने कोर्ट के आदेश को भी नजरंदाज कर परिवार और वकील से इमरान की मुलाकात करने की इजाजत नहीं दी. 

जीशान ने कहा कि यह बहुत बुरा है. उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है. उनके परिवार और उनके वकीलों और पार्टी के सीनियर नेता से मिलने नहीं दिया गया है. खान साहब इतने पॉपुलर हैं, कि उनकी एक तस्वीर से देश की सियासत का सीन बदल सकता है. पाकिस्तानी शासन खतरा महसूस कर रहा है. यह रोक जानबूझकर लगाई गई है. इमरान को दुनिया से अलग रखने की कोशिश है. 

जिशान ने कहा, कि जिस दिन से जेल हुई है, एक तस्वीर, रिकॉर्ड वॉयस क्लिप या वीडियो बाहर नहीं आने दिया गया है. कोर्ट की सुनवाई के दौरान भी कैमरे पर रोक लगी हुई है. हर जगह सख्त पाबंदियां है. 

परिवार क्या कह रहा है?

इस पूरे मामले पर इमरान खान के परिवार से भी प्रतिक्रिया आई है. उनके बेटे कासिम खाने के पब्लिक अपील करते हुए कहा है कि 73 साल के नेता को हफ्तों से कैद में रखा हुआ है. इसमें परिवार की कोई पहुंच नहीं है. अधिकारियों की तरफ से पारदर्शिता नहीं है.  इधर, पीटीआई और उनके परिवार की तरफ से इसे अघोषित ब्लैकआउट करार दिया गया है.  

कासिम खान ने सोशल मीडिया की पोस्ट में लिखा, ‘पिता को 845 दिनों से हिरासत में रखा गया है. पिछले छह हफ्तों से उन्हें डेथ सेल में अकेले कैद में रखा गया है. कोर्ट के आदेशों के बावजूद अधिकारी सभी मुलाकातों से इनकार कर रहे हैं. उनके जीवन का कोई सबूत नहीं मिला है.’

इसके अलावा कासिम ने लिखा, ‘ये ब्लैकआउट है, कोई सिक्योरिटी प्रोटोकॉल नहीं है. यह उनकी हालत छिपाने की कोशिश है. अगर उन्हें कुछ होता है तो पाकिस्तानी सरकार और उसके हैंडलर्स को जिम्मेदार ठहराया जाएगा.’

कासिम ने पूरे मामले में ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन और डेमोक्रेटिक सरकारों से दखल देने की अपील की है. 

पत्रकारों और मीडिया पर बहुत अधिक सेंसरशिप

इमरान की बहन ने नोरीन नियाजी ने कहा कि मीडिया पर बहुत ज्यादा सेंसरशिप है. पत्रकारों और मीडिया मालिकों को हिरासत में लिया जा रहा है. चुप रहने के लिए धमकाया जा रहा है. कई जाने-माने पत्रकार देश छोड़कर भाग गए हैं. उन्होंने पाकिस्तान के शासन की तुलना हिटलर से करते हुए कहा कि हम हिटलर के बारे में सुनते और पढ़ते थे, पाकिस्तान में भी यही हो रहा है. साथ ही उन्होंने चुनाव में शहबाज शरीफ पर धांधली का आरोप लगाया है. 

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इमरान की मौत की अफवाह, लेकिन मुनीर पर कोई सवाल नहीं! कितनी गहरी है नए-नवेले CDF की पैठ?

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पाकिस्तान की सत्ता में हमेशा से सेना का दखल इतना ज्यादा रहा है कि वहां का जनरल जब चाहे देश में तख्तापलट कर शीर्ष पद पर काबिज हो जाता है. इस बार पाकिस्तानी सेना को ये सब किए बिना ही टॉप पॉजिशन दे दी गई. आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने गुरुवार (27 नवंबर 2025) को देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्स (CDF) का पद संभाला है और यही कारण है कि पाकिस्तान में इमरान खान की मौत को लेकर बढ़ रही अटकलों के बावजूद कोई आसिम मुनीर से सवाल करने की हिम्मत नहीं जुटा रहा है. यहां तक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी भी मुनीर के आगे नतमस्तक नजर आ रहे हैं.

पाकिस्तान में ताक पर कानून व्यवस्था

पाकिस्तान में कई दिनों से अफवाहें उड़ रही हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को रावलपिंडी की आडियाल जेल में प्रताड़ित किया गया है, गंभीर रूप से घायल किया गया है या यहां तक कि उनकी हत्या भी कर दी गई है. कोर्ट के आदेश के बावजूद इमरान खान को सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किया गया और न ही परिवार या वकीलों से मिलने की अनुमति दी गई. जेल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है, जिस वजह से लोगों में इमरान खान की हत्या को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है.

देशव्यापी प्रदर्शन करेगी इमरान खान की पार्टी

जेल की सुरक्षा को देखते हुए वहां 2,500 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है. पुलिस और अर्धसैनिक बल पूरी तरह से दंगा-रोधी उपकरणों से लैस हैं. लाहौर की कोट लखपत जेल और क्वेटा के पास सेंट्रल जेल के लिए भी इसी तरह के अलर्ट जारी किए गए हैं. यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब इमरान खान की पार्टी पीटीआई आडियाल जेल और इस्लामाबाद हाई कोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही है. अब पूरे पाकिस्तान में इस सवाल ने जोर पकड़ लिया है कि इमरान खान कहां हैं?

मुनीर के हाथों में अब पाकिस्तान का कंट्रोल

एक सामान्य संवैधानिक व्यवस्था वाले देश में हिरासत में रहने वाले किसी भी पूर्व प्रधानमंत्री को कोई नुकसान पहुंचता है तो तुरंत जांच शुरू हो जाती है, लेकिन पाकिस्तान के संदर्भ में ये उल्टा है. यहां सत्ता की चाभी फील्ड मार्शल से नए-नए सीडीएफ बने सैयद आसिम मुनीर के हाथों में है, जिसकी पावर को संविधान में संशोधन कर बढ़ाया गया है. इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान की उच्च रक्षा व्यवस्था का पूर्ण पुनर्गठन है.

इसके तहत अब आसिम मुनीर अगले पांच साल के लिए तीनों सेनाओं यानी आर्मी, एयर फोर्स और नेवी के हेड हैं. इसके अलावा मुनीर को न्यूक्लियर वेपन सिस्टम का प्रभारी बना दिया गया है. तीनों सेनाओं का ओवरऑल कंट्रोल भी राष्ट्रपति और मंत्रिमंडल से हटाकर सीडीएफ को सौंप दिया गया है. अगर इमरान खान को लेकर फैल रही अफवाहें सच साबित होती है या उनकी हत्या हो जाती है तो ये सबसे बड़ा सवाल होगा कि आखिर सुरक्षा तंत्र पर किसका नियंत्रण है.

PAK में मुनीर का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता

ये भी सवाल उठेगा कि इतने दिन से इमरान खान को जेल में रखने से किसे फायदा हुआ. 27वें संशोधन को इस तरह से तैयार किया गया है कि पाकिस्तान के सबसे लोकप्रिय विपक्षी नेता को हिरासत में लेने जैसा राजनीतिक झटका भी उस व्यक्ति (आसिम मुनीर) को हिला नहीं पाएगा, जो अब देश की सुरक्षा व्यवस्था के शीर्ष पर बैठा है. अब राष्ट्रपति की तरह मुनीर को भी किसी भी कानूनी मुकदमे से आजीवन छूट है.

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ट्रंप का बड़ा फैसला, इस देश के एयरस्पेस को बंद कर दिया घोषित; क्या जंग में उतरेगा अमेरिका?

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वेनेजुएला से बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने जो कहा वो चेतावनी से कम आंका नहीं जा सकता. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (29 नवंबर, 2025) को कहा कि वेनेजुएला के ऊपर और आसपास के एयरस्पेस को पूरी तरह से बंद माना जाना चाहिए.

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर शेयर किए एक पोस्ट में कहा, “सभी एयरलाइंस, पायलट, ड्रग और मानव तस्कर, कृपया वेनेजुएला के ऊपर और आसपास के एयरस्पेस को पूरी तरह से बंद मानें.” दोनों देशों के बीच बढ़ती तल्खी और ट्रंप का ये बयान वेनेजुएला के लिए धमकी से कम नहीं है.

पेंटागन ने ड्रग जहाजों पर किए 20 से ज्यादा हमले

चीनी न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने कहा कि सितंबर की शुरुआत से पेंटागन ने कैरिबियन और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में कथित ड्रग जहाजों पर 20 से ज्यादा हमले किए हैं, जिनमें 80 से ज्यादा लोग मारे गए. मध्य नवंबर में कैरिबियन इलाके में अमेरिकी सेना की मौजूदगी और मजबूत हुई, जब एक बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड R. फोर्ड को उस लेवल पर तैनात किया गया, पिछले तीन दशकों में पहले कभी नहीं देखे गए.

अमेरिकी सैनिकों के लिए गुरुवार (27 नवंबर, 2025) की रात आयोजित थैंक्सगिविंग समारोह में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका बहुत जल्द वेनेजुएला में ड्रग ट्रैफिकिंग नेटवर्क के खिलाफ जमीनी कार्रवाई कर सकता है.

ट्रंप की धमकी के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति ने आरोप से किया इनकार

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने ड्रग तस्करी में किसी भी तरह से शामिल होने से इनकार किया है और वॉशिंगटन पर वेनेजुएला में सरकार बदलने के लिए बहाना बनाने का आरोप लगाया है. न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) ने इस मामले से जुड़े लोगों का हवाला देते हुए शुक्रवार (28 नवंबर, 2025) को कहा कि ट्रंप ने पिछले हफ्ते वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति से फोन पर बात की थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं ने आमने-सामने मिलने की संभावना पर चर्चा की, हालांकि अभी तक कोई इंतजाम नहीं किया गया है. इसमें यह भी बताया गया कि व्हाइट हाउस और वेनेजुएला सरकार दोनों ने इस बातचीत पर टिप्पणी करने से मना कर दिया.

US ने ऑफिशियली कार्टेल डे लॉस सोल्सको विदेशी आतंकवादी संगठन किया घोषित

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने 24 नवंबर को ‘ऑफिशियली कार्टेल डे लॉस सोल्स’ को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया और उस ग्रुप पर बैन लगाए, जिसके बारे में दावा किया गया कि इसके नेता मादुरो हैं. वेनेजुएला की तरफ से एक बयान में कहा गया कि वह इस तरह के कदम का विरोध करता है और इसे अपने अंदरूनी मामलों में गैर-कानूनी तरीके से दखल देने के मकसद से किया गया एक बेतुका झूठ बताया.

एक्सियोस ने सोमवार (24 नवंबर, 2025) को एक अनजान सोर्स का हवाला देते हुए कहा कि ट्रंप ने मादुरो से सीधे बात करने का मन बना लिया है. कहा गया कि बातचीत के बारे में ज्यादा बातें हो रही हैं और बमबारी के बारे में कम. एक्सियोस ने इस मामले से वाकिफ एक अधिकारी के हवाले से कहा, “अभी कोई भी अंदर जाकर उन्हें गोली मारने या उन्हें (मादुरो) पद से हटाने का प्लान नहीं बना रहा है. मैं यह नहीं कहूंगा कि ऐसा कभी नहीं होगा, लेकिन अभी यह प्लान नहीं है.”

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप का यह फैसला गनबोट डिप्लोमेसी (धमकी भरी कूटनीति) में एक अहम पड़ाव है और यह इशारा दे सकता है कि अमेरिका की ओर से मिसाइल हमले या सीधी मिलिट्री कार्रवाई अभी होने वाली नहीं है.

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‘मां की तबीयत नाजुक, बांग्लादेश लौटना मेरे कंट्रोल में नहीं’, खालिदा जिया के बेटे के बयान पर आय

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बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के स्व-निर्वासित कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने शनिवार को कहा कि स्वदेश लौटना पूरी तरह उनके नियंत्रण में नहीं है. वो भी ऐसे समय में जब उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया एक बेहद गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री को 23 नवंबर को किया था भर्ती

बीएनपी नेता जिया (80) को सीने में संक्रमण के बाद 23 नवंबर को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. संक्रमण के कारण उनके हृदय और फेफड़े दोनों प्रभावित हुए थे. लंदन से शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए, रहमान (60) ने कहा कि किसी भी बच्चे की तरह वह इस संकट के क्षण में अपनी मां के पास रहना चाहते हैं. रहमान 2008 से ब्रिटेन में रह रहे हैं.

उन्होंने लिखा, ‘लेकिन दूसरों के विपरीत, इस संबंध में एकतरफा फैसला लेना न तो मेरे हाथ में है और न ही पूरी तरह मेरे नियंत्रण में. इस मामले की संवेदनशीलता विस्तृत व्याख्या की गुंजाइश को भी सीमित करती है.’

रहमान ने कहा कि उनके परिवार को उम्मीद है कि ‘एक बार जब मौजूदा राजनीतिक वास्तविकताएं अपेक्षित स्तर पर पहुंच जाएंगी, तो अपने वतन लौटने का मेरा लंबा और बेचैनी भरा इंतजार आखिरकार खत्म हो जाएगा.’

हालांकि, उनके पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस कारण से वह बांग्लादेश नहीं लौट पा रहे हैं. ब्रिटेन ने संबंधित ब्रिटिश कानून में गोपनीयता प्रावधानों का हवाला देते हुए उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं की है.

‘उनकी वापसी पर कोई अपत्ति नहीं’
रहमान के पोस्ट के कुछ ही घंटों बाद, मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के कार्यालय ने कहा कि अंतरिम सरकार को उनकी वापसी (बांग्लादेश) को लेकर कोई आपत्ति नहीं है. यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने सोशल मीडिया में कहा, ‘इस मामले में सरकार की ओर से कोई प्रतिबंध या आपत्ति नहीं है.’

राष्ट्रपति ने गहरी चिंता व्यक्त की
इस बीच, बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने खालिदा जिया की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और देशवासियों से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करने का आग्रह किया.

सरकारी समाचार एजेंसी ‘बीएसएस’ ने शहाबुद्दीन के हवाले से एक बयान में कहा, ‘देश के लोकतांत्रिक परिवर्तन के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर, मैं पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं.’

निजी अस्पताल में भर्ती होने के चार दिन बाद, ज़िया को कोरोनरी केयर यूनिट में स्थानांतरित कर दिया गया क्योंकि उनकी कई स्वास्थ्य समस्याएं जटिल हो गईं.

अस्पताल के बाहर जमा हुए कार्यकर्ता
पार्टी द्वारा अस्पताल में भीड़ न लगाने के अनुरोध के बावजूद, बड़ी संख्या में बीएनपी कार्यकर्ता और समर्थक ज़िया के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए अस्पताल के बाहर जमा हो गए. हालांकि अस्पताल अधिकारियों ने शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य पर कोई बयान जारी नहीं किया, लेकिन बीएनपी महासचिव मिर्ज़ा फ़ख़रुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि उनकी हालत ‘बेहद गंभीर’ है. पार्टी ने इससे पहले शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद बांग्लादेश की सभी मस्जिदों में उनके लिए विशेष नमाज़ का आह्वान किया था.

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ब्लैक सी में रूस के शैडो फ्लीट टैंकर पर हुआ ड्रोन अटैक, धू-धू कर जल गया जहाज; Video

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तुर्किए के बोस्फोरस स्ट्रेट (Bosphorus strait) के पास रूस के शैडो फ्लीट के दो टैंकरों में शुक्रवार (28 नवंबर 2025) देर रात धमाके हुए, जिसके बाद जहाज धू-धू कर जल गए. ब्लैक सी में हुए इस धमाके को लेकर तुर्किए ने मिसाइल, ड्रोन या किसी समुद्री वाहन से बाहरी हमला होने की आशंका जताई है. रूस के इन दोनों शैडो फ्लीट टैंकर का नाम Kairos और Virat है. 

मेडे-मेडे चिल्लाकर क्रू ने मांगी मदद

टैंकर के क्रू मेंबर ने एक इंटरसेप्टेड ओपन-फ्रीक्वेंसी रेडियो डिस्ट्रेस कॉल में ड्रोन हमले की सूचना दी. वे मानवरहित समुद्री ड्रोन की बात कर रहे थे. एक वीडियो में क्रू मेंबर को यह यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘यह विराट है. मदद चाहिए. ड्रोन हमला. मेडे.’

तुर्किए परिवहन मंत्रालय ने एक्स पर कहा, ‘विराट, जिसके बारे में पहले कहा गया था कि उस पर ब्लैक सी तट से लगभग 35 समुद्री मील दूर मानवरहित समुद्री जहाज से हमला किया गया था, उस पर 29 नवंबर की सुबह फिर से हमला किया गया.’

यूक्रेन ने ली हमले की जिम्मेदारी

तुर्किए की ओर से कहा गया, ‘रूसी जहाज पर किसी रॉकेट, माइन, मिसाइल, ड्रोन या किसी समुद्री जहाज से हमला हुआ है.’ हालांकि विराट को मामूली क्षति पहुंची है और चालक दल भी स्वस्थ हैं. न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब यूक्रेन पर शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए अमेरिका का भारी दबाव है.

यूक्रेन की सुरक्षा सेवा के एक अधिकारी ने बताया कि रूसी शैडो फ्लीट के जहाजों पर हमला करने का संयुक्त अभियान एसबीयू और यूक्रेन की नौसेना ने चलाया गया था. उन्होंने कहा, ‘हमले का वीडियो देखकर पता चलता है कि दोनों टैंकरों का गंभीर नुकसान हुआ है. इससे रूसी तेल परिवहन को गहरा झटका लगेगा.’

यूक्रेन की एसबीयू सुरक्षा सेवा के एक सूत्र ने एएफपी को बताया, ‘मॉडर्न सी बेबी नेवल ड्रोन ने रूसी जहाजों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया.’ उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया जिसमें कथित तौर पर समुद्री ड्रोनों को दोनों जहाजों की ओर बढ़ते हुए दिखाया गया था, जिसके बाद विस्फोट हुए.

क्या होती है शैडो फ्लीट?

वेसलफाइंडर वेबसाइट के अनुसार, रूस पर यह आरोप लगाया गया है कि वह पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने और अपने तेल निर्यात को जारी रखने के लिए शैडो फ्लीट का इस्तेमाल कर रहा है. रूस के तेल और गैस निर्यात पर पश्चिमी देशों की सख्त पाबंदियों के बाद यह बेड़ा रूस की अर्थव्यवस्था का संजीवनी बना हुआ है. इन जहाजों पर मौजूद AIS (Automatic Identification System) ट्रांसपोंडर को बंद कर दिया जाता है, जिससे इनका ट्रैकिंग सिस्टम निष्क्रिय हो जाता है और ये रडार से गायब हो जाते हैं.



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PAK में कानून संशोधन के बाद ‘तानाशाह’ बना मुनीर! बेलगाम हुई सत्ता, UN ने दी सख्त चेतावनी

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पाकिस्तान में हाल ही में किए गए संवैधानिक संशोधनों ने सत्ता संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है. नए बदलावों के बाद सेना, खासकर मौजूदा आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर, बेहद प्रभावशाली हो गए हैं. इसके उलट न्यायपालिका की शक्तियों में स्पष्ट रूप से कटौती दिखाई देती है. इस फैसले ने कई संस्थाओं के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र को भी चिंतित कर दिया है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रमुख वोल्कर टर्क ने शुक्रवार को जारी बयान में चेतावनी दी कि पाकिस्तान में जल्दबाजी में किए गए ये संशोधन न्यायपालिका की स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं. उनके अनुसार, इस कदम से सेना का दखल बढ़ने और नागरिक सरकार की भूमिका कमजोर होने की आशंका मजबूत होती है, जो कानून के शासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

UN ने कही ये बड़ी बात

टर्क ने कहा कि यह संशोधन बिना किसी सार्वजनिक चर्चा, कानूनी समुदाय से सलाह या व्यापक बहस के लागू कर दिया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत है. उनके मुताबिक, यह बदलाव उन संस्थाओं के खिलाफ जाते हैं जो पाकिस्तान में मानवाधिकारों और कानून के शासन की रक्षा करती हैं. विशेष रूप से, न्यायाधीशों की स्वतंत्रता पर इन संशोधनों के असर को लेकर गहरी चिंता जताई गई है.

जजों की नियुक्ति और तबादले से जुड़े प्रावधानों में बदलाव

बयान में कहा गया है कि जजों की नियुक्ति और तबादले से जुड़े नए प्रावधान न्यायपालिका की संरचनात्मक स्वतंत्रता को कमजोर कर सकते हैं. इससे राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ने और कार्यपालिका के नियंत्रण में न्यायपालिका आने का खतरा है. वोल्कर टर्क ने जोर देकर कहा कि अदालतों को अपने फैसलों में किसी भी राजनीतिक दबाव से पूरी तरह मुक्त रहना चाहिए.

उन्होंने 27वें संशोधन पर विशेष आपत्ति जताते हुए कहा कि यह राष्ट्रपति और फील्ड मार्शल को आजीवन आपराधिक मुकदमों और गिरफ्तारी से सुरक्षा देता है. उनके अनुसार, यह कदम मानवाधिकार सिद्धांतों और लोकतांत्रिक नियंत्रण के ढांचे के खिलाफ है और पाकिस्तान के लोकतांत्रिक भविष्य पर दूरगामी असर डाल सकता है.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने लिया बड़ा फैसला

गौरतलब है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने आसिफ अली जरदारी ने 13 नवंबर को 27वें संवैधानिक संशोधन पर हस्ताक्षर कर उसे कानून का रूप दे दिया. इस संशोधन के बाद आर्मी चीफ आसिम मुनीर की शक्ति अभूतपूर्व रूप से बढ़ गई है, जिससे वह देश के सबसे प्रभावशाली व्यक्ति बनकर उभरे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पास अब प्रधानमंत्री से भी अधिक अधिकार हैं.

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रेत के टीले हों या फिर पहाड़, कहीं भी चढ़ जाते हैं दुनिया के ये तीन सबसे खतरनाक टैंक

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आधुनिक युद्ध चाहे बर्फीले पहाड़ों में हो या रेगिस्तान की धूल में टैंकों की ताकत आज भी किसी भी सेना की रीढ़ मानी जाती है. रूस–यूक्रेन युद्ध, गाजा–इजरायल संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि टैंक ही वह हथियार हैं, जो जमीनी जंग का पूरा नक्शा बदल देते हैं. 2025 में दुनिया के कई देशों ने अपने टैंकों को नई तकनीक, जबरदस्त सुरक्षा और खतरनाक फायर-पावर से लैस किया है.

अमेरिका का M1A2 Abrams

अमेरिका का M1A2 Abrams उन कुछ टैंकों में शामिल है जिन्हें दुनिया में सबसे सुरक्षित माना जाता है. इसका आर्मर इतना मजबूत है कि भारी बमबारी भी इसे आसानी से तोड़ नहीं सकती. इसमें लगी 120 मिमी XM256 स्मूथ बोर गन बेहद सटीक मार करती है और इसका डिजिटल युद्ध-प्रणाली सिस्टम हर मौसम में इसे युद्ध के लिए तैयार रखता है.

रूस का T-14 Armata

रूसी T-14 Armata आधुनिक तकनीक का नमूना माना जाता है. इसका टॉवर रिमोट कंट्रोल से चलता है, यानी चालक दल को सीधा खतरा कम हो जाता है. 125 मिमी की नई पीढ़ी की गन और एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम इसे किसी भी आधुनिक मिसाइल या टैंक शेल से बचाने में सक्षम बनाते हैं. इसके अलावा टी-90 रूसी मुख्य युद्धक टैंक है, जो दुनिया के सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले टैंकों में से एक है. रूस ने इसे भारत को भी बेचा है, जिसे टी-90 भीष्म के नाम से जानते हैं.

दक्षिण कोरिया का K2 Black Panther

दक्षिण कोरिया का K2 Black Panther अपनी फुर्ती और फायर रेट के कारण दुनिया के सबसे तकनीकी टैंकों में गिना जाता है. इसका सस्पेंशन सिस्टम किसी भी ऊबड़-खाबड़ इलाके में इसे हाई-स्पीड मूवमेंट देता है. इसकी 120 मिमी गन प्रति मिनट कई राउंड दाग सकती है.

जर्मनी का Leopard 2A7

Leopard 2A7 युद्ध के मैदान में भरोसे का प्रतीक है. जर्मनी ने इसे मजबूत आर्मर, तेज गति और अद्भुत फायर कंट्रोल सिस्टम के साथ तैयार किया है. यही कारण है कि NATO में इसे सबसे विश्वसनीय टैंकों में सबसे ऊपर रखा जाता है.

ब्रिटेन का Challenger 2

Challenger 2 अपनी प्रसिद्ध L30A1 राइफल गन के लिए जाना जाता है, जो दुनिया की सबसे सटीक टैंक गनों में से एक मानी जाती है. इसके भारी कवच और मजबूत संरचना ने इसे कई युद्धों में बेहतरीन प्रदर्शन देते देखा है.

इजरायल का Merkava Mark IV

इजरायल ने अपने क्षेत्र की जरूरतों को देखते हुए Merkava IV को खास तौर पर सुरक्षा-केंद्रित बनाया है. इसका डिजाइन ऐसा है कि चालक दल पर हमले का खतरा काफी कम हो जाता है. इसमें लगी 120 मिमी गन और LAHAT मिसाइल इसे और भी खतरनाक बनाती हैं.

फ्रांस का Leclerc

Leclerc टैंक तेज गति, स्मार्ट तकनीक और बेहतरीन हथियारों के संयोजन के साथ आता है. यह बाकी भारी टैंकों की तुलना में हल्का है और युद्ध के मैदान में तेजी से पोजीशन बदलने की क्षमता रखता है.

चीन का VT-4 – दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाला आधुनिक टैंक

VT-4 चीन का निर्यात वाला प्रमुख टैंक है, जिसे पाकिस्तान समेत कई देशों ने अपनी सेना में शामिल किया है. इसका थर्ड जनरेशन फायर कंट्रोल सिस्टम और 125 मिमी स्मूथबोर गन इसे अत्यधिक खतरनाक बनाते हैं. इसके साथ एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम इसे आधुनिक मिसाइलों से सुरक्षित रखता है. ये वाला टैंक चीन ने पाकिस्तान को भी दिया है. 

दुनिया का नंबर 1 टैंक कौन?

अगर सभी पहलुओं फायर-पावर, सुरक्षा, तकनीक, युद्ध प्रदर्शन और विश्वसनीयता को एक साथ देखा जाए तो 2025 में M1A2 Abrams, T-14 Armata, और Leopard 2A7 को दुनिया के सबसे बेहतरीन और प्रभावशाली टैंकों की शीर्ष श्रेणी में रखा जाता है. ये टैंक न केवल युद्ध का तरीका बदल रहे हैं, बल्कि बड़ी सेनाओं की राजनीति को भी नए रूप में ढाल रहे हैं.

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