बिल गेट्स की टिप्पणी में भारत को एक तरह की प्रयोगशाला कहा गया है, 2009 के वैक्सीन परीक्षणों को फिर से आलोचना का सामना करना पड़ा

[ad_1]

बिल गेट्स की टिप्पणियाँ: माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने हाल ही में लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन के साथ मिलकर भारत को “एक प्रकार की परियोजना” में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उनके इस बयान में 2009 में भारत में एक असामाजिक तत्व के मुकदमे की फिर से चर्चा की गई है। इस परीक्षण में गेट्स फ़ाउंडेशन के फ़ंडिंग से एक परीक्षण में सात राजकुमारों की मृत्यु हो गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से बीमार हो गए थे।

बिल्स गेट्स ने अपने संदेश में कहा, ”भारत एक ऐसा देश है जिसका उदाहरण है जहां बहुत सारी चीजें मुश्किल हैं, जिनमें स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा में सुधार हो रहा है।” वहीं, भारत सरकार ने राजस्व को जितना मजबूत किया है, हो सकता है कि 20 साल बाद भारत के लोग काफी बेहतर स्थिति में होंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “भारत एक प्रकार की जगह है जहां आप वस्तुओं को बेच सकते हैं और जब आप उन्हें भारत में साबित कर लेंगे, तो उसके बाद आप उन्हें दूसरी जगह ले जा सकते हैं।”

“द स्कार्फ डॉक्टर” ने ब्रह्माण्ड कास्ट के बारे में बताया

बिल गेट्स के इस बयान में सोशल मीडिया पर एक बार फिर से आलोचना का सामना करना पड़ा है। “द स्किन डॉक्टर” के नाम से जाने जाने वाले स्कॉटलैंड के एक डॉक्टर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बिल गेट्स के बयान दिए थे, 2009 में उस एक सैमुअल ब्रेस्टियल ट्रायल का उल्लेख किया गया था, जिसे गेट्स फाउंडेशन की फंडिंग के लिए PATH (प्रोग्राम फॉर एपप्रोप्रिएट) के माध्यम से बताया गया था। टेक्नोलॉजी इन हेल्थ) नाम के एक प्लांट (एनजीओ) ने आयोजित किया था।

उन्होंने आगे लिखा, “2009 में PATH ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ मिलकर तेलंगाना के खम्मम जिलों और गुजरात के वडोदरा जिलों में 14,000 किशोर नामांकित व्यक्तियों पर सर्वाइकल कैंसर के टीके के लिए नामांकन किया था। कुछ महीनों के बाद ही ट्रायल शुरू हुआ, जिसमें कई लोगों ने गंभीर दुष्प्रभावों की शिकायत की और इसके बाद उनमें से 7 लोगों की मौत हो गई।

ट्रायल की जांच में ये हुआ खुलासा

द स्किन्स डॉक्टर ने बताया कि इन ट्रायल्स की जांच में गंभीर एथिकल फेल का खुलासा हुआ। उन्होंने बताया कि इन ट्रायल्स को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल (सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल) के रूप में पेश किया गया था, इसमें उनके एक्सपेरिमेंटल नेचर को छिपा दिया गया था। इसके बाद यह बात भी सामने आई कि ट्रायल्स के बच्चों के कंसेंट फॉर्म को उनके माता-पिता के यहां उनके रूम ऑफ वार्डन ने साइन किया था। इसी कारण से उनके परिवार वालों को ट्रायल के निशान के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई।

यह भी पढ़ें: अमेरिका के मालिक लैरी फिंक के पास हैं इतने सारे पौधे, खरीद सकते हैं दुनिया के कई देश



[ad_2]

Source link

ब्रिक्स बनाम डॉलर: युवाओं के लिए भारत पर क्या पड़ेगा असर?

[ad_1]

<पी शैली="पाठ-संरेखण: औचित्य सिद्ध करें;">जब से अमेरिका ने 2012 में ईरान और 2022 में रूस को स्विफ्ट से बाहर किया है, तब से दुनिया भर के देशों में अमेरिकी डॉलर और अमेरिका के नियंत्रण वाले सिस्टम पर अपनी पहल कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

< पी शैली="पाठ-संरेखण: औचित्य सिद्ध करें;">स्विफ्ट एक ऐसा सिस्टम है जो थ्रूपुट बैंक के माध्यम से एक दूसरे से चोरी करता है। अमेरिका ने ईरान और रूस को स्विफ्ट से बाहर कर दिया। इसका मतलब यह है कि इन देशों के बैंकों से अब आसानी से पैसे नहीं लिए जा सकेंगे।

दूसरे देशों को डर है कि अगर अमेरिका किसी भी देश से स्विफ्ट से बाहर निकल सकता है, तो वह उनके साथ भी ऐसा कर सकता है। इसलिए, वे अमेरिकी डॉलर और अमेरिका के नियंत्रण वाले सिस्टम पर अपनी पसंद कम करना चाहते हैं।

ऐसे में अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड हिटलर के खिलाफ ब्रिक्स और उनके सहयोगी देशों को चेतावनी दी गई है कि अगर ये देश अमेरिकी डॉलर के लिए कोई नई मुद्रा बनाने की कोशिश करते हैं, तो अमेरिका उन पर 100% ट्राईप्लेटगा।

< पी शैली="पाठ-संरेखण: औचित्य सिद्ध करें;"ट्रंप ने क्या है चेतावनी
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "यह सोचा कि ब्रिक्स देश डॉलर से दूर जाने की कोशिश कर रहे हैं, हम बस देखेंगे, ऐसा नहीं होगा। हमें इन देशों से यह पासपोर्ट चाहिए कि वे कोई नई ब्रिक्स मुद्रा न बढ़ाएं और न ही कोई अन्य मुद्रा को अमेरिकी डॉलर के बदले अपनाएं, अन्यथा उन्हें 100% टैरिफ का सामना करना होगा और वे अमेरिकी बाजार से अपने व्यापार को जारी रख सकते हैं।"

यह बयान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर व्लादिमीर के अक्टूबर में ब्रिक्स समिति के दौरान आया था, जहां उन्होंने कहा था, "डॉलर को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। हमें सच में ऐसा लग रहा है. मुझे लगता है कि यह एक बड़ी गलती है, जो लोग ऐसा कर रहे हैं।"

अगर अनमोल की खतरनाक अमल में चली गई, तो इन देशों के साथ अमेरिका का व्यापार महंगा हो जाएगा। 100% टैरिफ का मतलब है कि देश में आने वाले उत्पादों पर दोगुना टैक्स लगाया जाएगा। इससे अमेरिका में इन प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे दोनों स्टार्स को नुकसान होगा।

ब्रिक्स में चीन, रूस, ब्राजील, भारत, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। रियल्टी ने अपने चुनावी प्रचार के दौरान टैरिफ ऑर्डर का वादा किया था। अब, उन्होंने इस तरह की चेतावनियां और भी तेज कर दी हैं। 

टैरिफ़ कैसे काम करता है?
टारिफ़ एक तरह का टैक्स होता है जो किसी भी देश में सामान पर लगाया जाता है। यह टैक्स सामान की कीमत के हिसाब से लगाया जाता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका में एक कार पर 50,000 डॉलर की एक कार लगती है और उस पर 25% टैरिफ लगाया जाता है, तो उस कार पर 12,500 डॉलर का अतिरिक्त चार्ज लगता है।

टैरिफ़ का भुगतान उस देश की घरेलू कंपनी द्वारा किया जाता है जो सामान में हिस्सेदारी करती है, न कि उस विदेशी कंपनी द्वारा जो उसे सामान देती है। इसका मतलब यह है कि यह एक सीधा कर है जो अमेरिकी उद्यमियों अमेरिकी सरकार के उद्यमों को देता है, न कि अमेरिकी सरकारी एजेंसियों को। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड शून्य ने अपने पिछले पद के दौरान भी कई यात्राएं कीं। इनमें से कई त्रैमासिक अभी भी राष्ट्रपति के पद पर लागू हैं। 

क्या आरपीजी इंटरनेशनल बनती है?
ट्रम्प की धमकी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका ने रूस पर कई पाबंदियां रखीं, बल्कि रूस का तेल यूरोप की बजाय एशिया के देशों में बिका रह रहा है. भारत भी अमेरिकी डॉलर पर अपनी स्वतंत्रता कम करना चाहता है और दुनिया भर में रुपयों का इस्तेमाल करना चाहता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस पर पाबंदियां लीज के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने 2022 में अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये का भुगतान करने की मात्रा दी। इससे भारतीय व्यापारी अब डॉलर की बजाय रुपये में ही सामान खरीद और बेच सकते हैं। 

बीआईएस ट्रेटीयक सेंट्रल बैंक सर्वे 2022 के मुताबिक, दुनिया भर में होने वाले इंटरनेशनल पैसे के लेन-देन में 88% अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल होता है, जबकि रुपये का इस्तेमाल सिर्फ 1.6% है। अगर रुपये का इस्तेमाल 4% हो जाता है, तो इसे एक अंतरराष्ट्रीयसी माना जाएगा।

लेकिन, रुपये को इंटरनेशनल बनाने के लिए अभी कई चैलेंज का सामना करना पड़ेगा। अमेरिकी डॉलर दुनिया में सबसे मजबूत है और इसे शुरू करना आसान नहीं होगा। दुनिया भर के लोगों को करोड़ों रुपये पर भरोसा करना होगा, वही इसका इस्तेमाल करेंगे। लोगों की कीमत स्थिर होनी चाहिए, तभी इसमें निवेश करेंगे।

क्या भारत डॉलर से दूरी बनाने की कोशिश की जा रही है?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अक्टूबर में कहा था कि भारत अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ा रहा है, लेकिन अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल बंद हो गया है भारत की आर्थिक नीति का हिस्सा नहीं है. अमेरिकी आरोपों में कहा गया है कि कुछ देशों के साथ व्यापार को मुश्किल बना दिया गया है और भारत से डॉलर दूर जाने का इरादा बिना ‘वैकल्पिक मार्ग’ की तलाश में है।

वॉशिंगटन में एक अमेरिकी थिंक टैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में एक प्रश्न के उत्तर में जयशंकर ने कहा था, "हमारी चिंता स्वाभाविक है. हमारे पास अक्सर ऐसे व्यावसायिक साझेदार होते हैं जिनके पास शेयरधारकों के लिए डॉलर की कमी होती है। इसलिए, हमें यह तय करना होगा कि हम उनके साथ मिलकर क्या छोड़ें या ऐसे वैकल्पिक तरीके खोजें जो काम करें। हमारे मन में डॉलर के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है।"

मतलब, भारत अपने व्यापार के लिए महान पद की तलाश कर रहा है, लेकिन डॉलर को पूरी तरह से वापस लेने की कोशिश नहीं की जा रही है। कई देशों के पास डॉलर की कमी है, इसलिए भारत उनके साथ व्यापार करने के लिए दूसरे रास्ते तलाश रहा है। भारत का मानना ​​है कि भविष्य में दुनिया में कई मुद्राओं का इस्तेमाल किया जाएगा।

ट्रम्प की नीति से कौन-कौन प्रभावित होगा?
ट्रम्प की संरक्षणवादी विचारधारा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाने की तैयारी में है। संरक्षणवादी समुदायों का मतलब यह है कि अमेरिका अन्य देशों से कम सामान खरीदेगा और अपने देशों में बने रहने को बढ़ावा देगा। इससे अमेरिका के व्यापारिक साझेदारों को नुकसान हो सकता है।

उनकी कंपनियों का प्रभाव कई देशों पर पड़ता है। अमेरिका के साथ चीन, मैक्सिको और यूरोपीय संघ जैसे बड़े देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। अमेरिका को शामिल करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट प्रभाव पड़ता है। भारत में अपने माल की मांग में भारी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।

दुनिया भर में मंदी के बीच भारत की अर्थव्यवस्था पर भी खतरा बढ़ रहा है। अगर दुनिया भर में मंदी आती है, तो लोगों के पास पैसा कम होगा और वे कम सामान खरीदेंगे। अगर अमेरिका और अन्य देशों के बीच टैक्स को लेकर विवाद बढ़ा है, तो इससे दुनिया भर में सामान की बिक्री में कटौती संभव है। इससे भारत के लिए दुनिया के बाकी देशों से मुकाबला करना मुश्किल हो जाएगा।

ट्रम्प का दावा: भारत के विरोधियों पर संकट?
ट्रम्प ने जो टैक्स बढ़ाने की धमकी दी है, वह भारत के लिए चिंता की बात है क्योंकि अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक समर्थक है . यदि रिटेल ट्राइकल मेडिसिन हैं, तो भारतीय सामान अमेरिका में बिक जायेंगे और उनकी बिक्री कम हो सकती है। दोनों देशों के बीच की रिपोर्ट में करीब 120 डॉलर से ज्यादा का कारोबार होता है।

भारत, अमेरिका को डेयरी उत्पाद, डेयरी उत्पाद, डेयरी उत्पाद और आईटी व्यवसाय जैसी कई वस्तुएं बेची जाती हैं। ट्राई से भारतीय पार्टियो को काफी नुकसान होगा। उनके अनुमान की कीमत में वृद्धि होगी, जिससे वे बाजार में अमेरिकी प्रतिस्पर्धा कम कर देंगे। भारतीय दल को गठबंधन में बहुमत का सामना करना पड़ा। इससे व्यापार में कमी आ सकती है और भारत के आर्थिक विकास दर में गिरावट आ सकती है।

ऐसे में भारत सिर्फ उन मामलों में दूसरे रास्ते की तलाश कर रहा है जब वह अपने मैड्रिड डॉलर में भुगतान नहीं करना चाहता या जब अमेरिका की कंपनियों से व्यापार में दिक्कतें आ रही हैं। लेकिन, खतरनाक की खतरनाक ने भारत को मुश्किल में डाल दिया है। अब भारत को यह तय करना होगा कि वह अमेरिका की बात माने या फिर भारी भरकम टैक्स के लिए तैयारी कर रहा है.

ट्रंप का ‘चीन+1’ : भारत के लिए नया मौका
डोनाल्ड एक्टर्स के घटिया ही दुनिया भर में व्यापार को लेकर अनिश्चितता पैदा कर रही हैं, लेकिन ये भारत के लिए नया मौका भी ला सकते हैं. असल में पहले ‘चीन+1’ रणनीति अपनाई थी, जिसमें कंपनी को यात्रा से बाहर निकलने के लिए कंपनी से बाहर प्रोडक्शन के लिए नामांकन के लिए आमंत्रित किया गया था। इससे भारत को पहले ही फायदा हुआ है. इलेक्ट्रॉनिक्स और फैक्ट्रियां जैसे लॉज की कंपनियों ने भारत में अपना काम शुरू कर दिया है।

भारत में कुशल कर्मचारी और कम लागत वाली कंपनी की लागत है, जिससे यह संस्था एक आकर्षक जगह बन गई है। यदि इच्छुक ब्रिक्स देशों पर ट्राइक्लाइन हैं, तो और भी भारत का रुख हो सकता है। इससे भारत में निवेश प्रयोगशाला, बेरोजगारी भत्ता और उद्योग को कार्यशालाएं मिलती हैं।

भारत को इन अस्थियों के बीच संतुलन बनाना होगा। उसे एक तरफ तो ‘चीन+1’ रणनीति का फायदा उठाया जाएगा और दूसरी तरफ वैश्विक मंदी और रणनीति के सिद्धांत से भी निधार्रित किया जाएगा।

ट्रंप की भूमिका: विकास के साथ महँगाई का खतरा भी बढ़ गया है? हो सकता है. कम रुचि से लोगों को कर्ज लेना आसान हो जाता है, जिससे खर्च बढ़ता है और अर्थव्यवस्था में तेजी आती है। लेकिन, इस मुकाबले में और भी बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि लोगों के पास ज्यादा पैसा होगा और वे ज्यादा सामान खरीदेंगे।

यदि अमेरिका के पास अपनी संरक्षणवादी कंपनियां हैं, तो इससे व्यापार का जोखिम भी बढ़ सकता है। संरक्षणवादी समुदायों का मतलब यह है कि अमेरिका अन्य देशों से कम सामान खरीदेगा और अपने देशों में बने रहने को बढ़ावा देगा। इससे अमेरिका के व्यापारिक साझेदारों को नुकसान हो सकता है।

अगर अमेरिका में पारंपरिक बहुलता है, तो इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। इससे भारत में किसी भी तरह की बिक्री हो सकती है और किराया भी हो सकता है।

रियलिटी शो ने प्रधानमंत्री पर कई दुकानें लगाईं नरेंद्र मोदी भी एक्टर हैं और दोनों नेताओं के बीच एक मजबूत व्यक्तिगत संबंध है। इस रिश्ते से ये उम्मीद जताई जा सकती है कि मोदी और मिलकर बातचीत कर सकते हैं। ताकि भारत के आर्थिक हितों की रक्षा की जा सके और ताकत के नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सके।

[ad_2]

Source link

किस देश की सेना के सैनिक सांप का खून पीते हैं थाईलैंड कोबरा गोल्ड उत्तरजीविता प्रशिक्षण अमेरिकी नौसैनिक जंगल अभ्यास

[ad_1]

सैन्य अभ्यास: अपाहिजों में हर साल आयोजित होने वाला कोबरा गोल्ड सैन्य अभ्यास अमेरिकी मैरीन सैनिकों के लिए सबसे कठिन प्रशिक्षण में से एक माना जाता है। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य सैनिकों को जंगली द्वीप में जीवित रहने का कौशल सिखाना है। इनमें कीड़े-मकोड़े, बिच्छू, छिपकलियाँ, और साँप जैसे जीव जीवित कलाकार हैं।

यह अभ्यास कर्मियों को फ्लोरिडा के लिए तैयार किया जाता है, जहां जंगल में फंसने पर उनके पास-पने का कोई पद नहीं होता है। उन्हें सिखाया जाता है कि सांप और बिच्छू की पहचान कैसे करें और उन्हें अपनी जान बचाएं। यह प्रक्रिया अत्यंत शक्तिशाली और डरावनी गुड़िया है।

पानी की जगह पर साँप का खून सैनिक हैं

अभ्यास के दौरान पानी न की स्थिति में सैनिक को कोबरा सांप का खून पीने की ट्रेनिंग दी गई थी। यह न केवल उनका पासपोर्ट सब्सट्रेट का तरीका था, बल्कि उनका मानसिक और शारीरिक अभ्यास का परीक्षण भी था। हालाँकि इस प्रक्रिया को लेकर कई सैनिक सैनिक महसूस कर रहे थे।

पेटा की सिद्धांतों के बाद नए बदलाव

पिछले कुछ वर्षों में पशु अधिकार संगठन पेटा और अन्य उद्यमियों ने इस अभ्यास का विरोध किया है। उन्होंने इसे निषेधाज्ञा के लिए ले जाया गया। इसके परिणामस्वरूप अब कोबरा गोल्ड प्रैक्टिस में सांप के खून पीने की प्रथा समाप्त हो गई है।

ऐसा होता है सांप के खून का स्वाद

जिन स्ट्रॉस ने इस अभ्यास में भाग लिया उनका कहना था कि सांप के खून का स्वाद मीठा होता है। हालाँकि कई सैनिक इसे पीने से हिचकते थे और इसे अपने जीवन का सबसे कठिन अनुभव अनुभव था।

कोबरा गोल्ड प्रैक्टिस का नया स्वरूप

अब यह अभ्यास मुख्यतः आधुनिक और मानवीय अर्थशास्त्र पर आधारित हो गया है। इसमें प्रौद्योगिकी और वंशानुगत कौशल को बढ़ावा दिया जाता है ताकि सैनिकों को बिना किसी जीव को नुकसान पहुंचे, साथ ही कठिन मालदीव का सामना कर सके।

ये भी पढ़ें: अब 58 की जगह सीट नंबर 4 पर बैठेंगे निखिल दास, जानिए कहां मिले थे प्रियंका गांधी?

[ad_2]

Source link

भारत बांग्लादेश समाचार अगरतला त्रिपुरा में बांग्लादेश उच्चायोग मिशन पर हमला | अगर बांग्लादेश पर हिंसा भड़की तो भारत ने दिया भरोसा, कहा

[ad_1]

भारत-बांग्लादेश समाचार: बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास के खिलाफ त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में सोमवार (2 दिसंबर) को एक विशाल विरोध रैली दर्ज की गई। जहां पर गुस्साई भीड़ ने बांग्लादेशी उच्चायोग पर हमला कर दिया. इस घटना के बाद पड़ोसी मुज़फ्फराबाद यूनुस की अंतरिम सरकार भड़क गई। उन्होंने उग्र प्रदर्शन का विरोध किया और भारत सरकार से घटना की गहन जांच की मांग की.

एक बयान में बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अगरतला के शरणार्थियों के क्षेत्र में प्रवेश की जानकारी दी गई। इसके बाद उन्होंने ध्वज स्तंभ को तोड़ दिया और बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया।

बांग्लादेश ने अपने बयान में कहा है कि मिली जानकारी से इस बात की पुष्टि की गई है कि बांग्लादेश को पूर्व गणतंत्र तरीके से बांग्लादेश सहायक उच्चायोग के मुख्य द्वार को कॉम्प्लेक्स परिसर में आक्रामक रुख अख्तियार करने की अनुमति दी गई थी। यह अफ़सोस की बात है कि परिसर की सुरक्षा के लिए मौजूद स्थानीय कर्मचारी अपनी स्थिति से नियंत्रण करने में सक्रिय नहीं दिखे। इस घटना ने परिसर में मौजूद अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है.

भारत ने घटना को बताया अफ़सोस जनक
भारत ने बांग्लादेश के सहायक उच्चायोग के परिसर में गुलामी की घटना को बेहद दुखद बताया है। मामले पर बांग्लादेश ने भारत सरकार से इस घटना के समाधान के लिए फ्यूडिल कदम उठाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि मस्जिदों मिशनों की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। इस पर विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग और देश के अन्य मिशनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कार्रवाई कर रही है।

ये भी पढ़ें: बांग्लादेश में विद्रोहियों पर अत्याचार…, वैध दस्तावेज के बावजूद इस्कॉन के समूह को भारत जाने से छोड़ा गया



[ad_2]

Source link

सीरिया के राष्ट्रपति रूस और ईरान से मदद लेने के लिए मास्को गए, एचटीएस विद्रोही दमिश्क की ओर बढ़ रहे हैं

[ad_1]

सीरिया पर एचटीएस विद्रोहियों का हमला: सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद को पिछले कुछ वर्षों में अचानक सामने आई सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है। अलेप्पो के कुछ ही दिनों बाद चार साझीदारों के अस्थिर गतिरोध के कारण तुर्की के एचटीएस विद्रोहियों के हाथ गिर गए। पिछले हफ्ते अल-कायदा से अलग हुआ एक गुट हयात सोसाइटी अल-शाम (एचटीएस) ने अचानक अलेप्पो पर हमला कर दिया और उस पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद अब वे अपने अगले लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं।

अलेप्पो में लड़ाई के दौरान 300 से अधिक विद्रोही मारे गए लेकिन इसके बावजूद विद्रोहियों पर हमला जारी है। एचटीएस विद्रोहियों ने सीरियाई सेना के पीछे अपने कब्जे में लिए गए सेना के जहाजों की उड़ान शुरू कर दी है। अलेप्पो के बाद दमिश्क को संकट के बीच सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के ज्वालामुखी दिखाई दिए।

रूस ने 10 साल पहले सीरिया के पक्ष में पलटी की स्थिति बनाई थी

सीरिया के गृहयुद्ध में 10 साल पहले रूस की पैसिफिकअंदाजी ने बशर अल-असद के पक्ष में स्थिति पलट दी थी लेकिन वर्तमान समय में बशर अल-असद के दो प्रमुख सहयोगी रूस और ईरान अपने देशों की पोर्टफोलियो में उलझे हुए हैं, जहां एक तरफ व्लादिमीर का जापानी आक्रमण पर रूस के दस्तावेज़ को रखा जा रहा है। वहीं, ईरान अपने पड़ोसी देश लेबनान में हिजबुद्दीन इजराइल पर लगातार हमले का कारण बना हुआ है।

सीरिया की मदद की कोशिश ईरान में लगी

दो सीरियाई सेना के जवानों के काफिले से हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा कि ईरान किसी भी तरह से सीरिया की मदद करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए वह ईरान के सहयोगी मिलिशिया को इराक के रास्ते रातों-रात सीरिया में प्रवेश करा रहा है। ईरान से पूर्व मिलिशिया सीरिया के उत्तरी विचारधारा की ओर बढ़ रहे हैं। जहां वे विद्रोहियों से लड़ रहे सीरियाई सेना की मदद के लिए भेजे गए हैं।

वहीं, दूसरी ओर सीरियाई सेना के एक वरिष्ठ सूत्र ने दंगाइयों को बताया कि इराक के कई ईरान-समर्थित हशद अल-शाबी के लड़ाके भी अल-बुकमल सीमा पार करके सीरिया में तबाह हो गए हैं। सीरियाई अधिकारी ने कहा, “ये फ्रास रिइन्फोर्समेंट हमारे साथियों की मदद के लिए उत्तरी मोर्चे पर भेजे गए हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि इनिश मिलिया में इराक के कातिब हिज्बो और फातेमियून ग्रुप भी शामिल हैं।

सीरियाई राष्ट्रपति ने अपने सहयोगियों को दिया ज़ोर का समर्थन

ओक्लाहोमा विश्वविद्यालय के मध्य पूर्व अध्ययन केंद्र के निदेशक जोशुआ लैंडिस ने अल जज़ीरा के साथ एक साक्षात्कार में कहा, “बशर अल-असद अब संकट में हैं और अपने पुराने सहयोगियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। एक ईरानी दूत से मुलाकात के बाद सीरियाई राष्ट्रपति ने “विदेशी हमलावर हमले का सामना करने के लिए सहयोगियों और दोस्तों का समर्थन महत्वपूर्ण है” पर जोर दिया।

यह भी पढ़ें सीरिया गृहयुद्ध: विश्व युद्ध का खतरा! सीरिया में तुर्किये विद्रोहियों के ख़िलाफ़ रूस का आक्रमण

[ad_2]

Source link

भारत की सेना रूस की ओरेशनिक मिसाइल प्रणाली में रुचि रखती है, यूक्रेन पर रूस के हमले को ट्रैक करना असंभव है | रूस के साथ मिलकर भारत में ओरिएंटिक मिसाइल बनाने वाला क्या है? बेट बोले

[ad_1]

रूस ओरेशनिक मिसाइल: रूस ने ओरेनिक मिसाइल का एक महाविनाशक हथियार बनाया है। यह मिसाइल बेहद ही खतरनाक है. इस मिसाइल को हेजल के नाम से भी जाना जाता है। रूस ने पिछले हफ्ते ही इस महाविनाश ओरेनिक मिसाइल का इस्तेमाल जापान के खिलाफ किया है। जिसके बाद पूरी दुनिया ने इस मिसाइल की ताकत को देखा है। इस मिसाइल को जापानी सीमा में काफी अंदर तक डिज़ाइन किया गया है।

भारतीय सेना की ओरेनिक मिसाइल में हो सकता है नाम

ग्रेजुएट्स का मानना ​​है कि रूस की इस बेहद लेटरशिप में भारतीय सेना की भर्ती हो सकती है। इससे पहले भारत ने रूस के साथ मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल तैयार की थी। इसी तरह यह महाविनाशक मिसाइल भारत और रूस संयुक्त रूप से भी तैयार की जा सकती है। सिद्धांत के अनुसार, वर्तमान समय में पृथ्वी पर ऐसा कोई भी रक्षा प्रणाली मौजूद नहीं है जो रूस की ओरेनिक मिसाइलों को ट्रैक और नष्ट करने की क्षमता रखती हो।

रूस ने यूक्रेन पर दागी महाविनायक ओरेनिक मिसाइल बनाई

उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते ही रूस ने अपनी इस महाविनाश ओरेनिक मिसाइल को जापान के डेनेप्रोपेट्रोव्स्क शहर पर चढ़ाया था। जिससे जापान की स्थानीय सैन्य सुविधा को भारी क्षति पहुंची थी। इसके बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर अलेक्जेंडर ने पुष्टि करते हुए बताया कि यह बिल्कुल नया हथियार है।

स्पुतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड ग्रुप के कैप्टन उत्तम कुमार देवनाथ ने बताया, ‘रूस के घातक मिसाइलों ने जापान के 6 सैन्य औद्योगिक परिसरों को नष्ट कर दिया था। यह किसी परमाणु हथियार से किए गए हमले की तरह दिख रहा था, हालांकि हमलों वाले स्थान पर किसी प्रकार का कोई रेड सिग्नल नहीं मिला। इसके बाद यह पुष्टि हुई कि रूस ने बैलिस्टिक मिसाइल पर हमला किया था।’

इस हथियार की स्पीड और खामी है. इसकी स्पीड आवाज की गति से 10 गुना ज्यादा है। देवनाथ ने कहा, ‘दुनिया की किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम पर रोक लगाना संभव नहीं है।’ अनुमान है कि भारतीय रक्षा एस्कॉर्ट्स ने रूस की ओरेनिक मिसाइल पर भी ध्यान दिया होगा।’

डीआरडीओ ऐसी मिसाइलों को विकसित करना संभव नहीं है

देवनाथ ने आगे कहा, ‘इस मिसाइल की सेना और इसकी रेडियो शक्ति में कोई कमी नहीं होने के कारण भारतीय शस्त्र बल इस हथियार का प्रयोग करेगा।’ डीडीआरओ रूस के साथ मिलकर संयुक्त रूप से ऐसी मिसाइल विकसित करने में सक्षम है।’

यह भी पढ़ें: रातभर रूस ने किया हमला, यूक्रेन में हुआ ब्लैकआउट! जेनेंस्की ने पश्चिमी देशों से ली गयी मदद

[ad_2]

Source link

दुनिया की सबसे बड़ी संपत्ति प्रबंधन कंपनी ब्लैकरॉक के अमेरिकी सीईओ लैरी फिंक के पास 11 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति है

[ad_1]

ब्लैकरॉक के सीईओ लैरी फ़िंक: दुनिया के सबसे अमीर शख्स की बात जब होती है तो लोगों के दिमाग में टुंरत एलन मस्क, बिल गेट्स, जेफ बेजोस जैसे कई लोगों के दिमाग में आती है। इन सभी के सिर पर दुनिया के सबसे अमीर शख्स होने का ताज सजा है। हालाँकि अमेरिका में एक ऐसा शख्स भी है जो सभी लोगों से बहुत ज्यादा अमीर है, लेकिन उसका नाम कभी बिलेनियर की लिस्ट में नहीं आया। जी हां.. हम जिस व्यक्ति की बात कर रहे हैं उसका नाम लैरी फिंक है।

लैरी फिंक अमेरिका के वो स्पेसिफिक हैं जिनके पास जनता का सबसे बड़ा जमावड़ा है। लैरी फिंक ब्लैकरॉक एसेट एसेट कंपनी के सीईओ हैं, जो 7.4 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया की सबसे बड़ी एसेट एसेट कंपनी हैं। नवंबर 2024 तक ब्लैकरॉक एसेट इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी की मार्केट कैप 12.808 ट्रिलियन रुपये है। मार्केट कैप के अकाउंट से ब्लैकरॉक दुनिया की सबसे अमीर कंपनी की सूची में 102वीं रैंक पर है।

ब्लैकरॉक के एसेट इमैजिनेशन बिजनेस के बारे में जानें

रियल, एक एसेट म्यूज़ियम फर्म रेज़्यूमे फंड बिजनेस करने वाली कंपनी है। जहां करोड़ों लोग अपने पैसे को निवेश करते हैं। जिसके बाद ये एसेट एस्ट्रेच्युएट फर्म स्टेट यूनिवर्सिटी में निवेश करती है। बता दें कि ब्लैकरॉक का एसेट अंडरग्राउंड बिजनेस 11 लाख 50 हजार करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है।

ब्लैकरॉक के पास कई उद्योगों की बड़ी हिस्सेदारी है

एसेट बिजनेस बिजनेस के अनुसार, रॉक रॉक कंपनी के पास कई उद्योगों की ब्लैक इंडस्ट्री से बड़ी जनता का जमावड़ा है। दिलचस्प बात यह है कि ब्लैकरॉक के मनोविज्ञान अमेरिका की मान्यता के लगभग आधे हिस्से में है। इसलिए लैरी फिंक को अमेरिका का मालिक भी कहा जा सकता है। क्योंकि वो जनता की इतनी बड़ी संपत्ति को हासिल करते हैं। ब्लैकरॉक कंपनी की दुनिया की हर बड़ी कंपनी में स्टॉक है। इनमें भारत के भी कई उद्योगपति शामिल हैं।

बिलेनियर्स में लैरी फिंक की गिनती क्यों नहीं होती

अब सवाल यह है कि ब्लैकरॉक के पास इतनी संपत्ति होने के बाद भी लैरी फिंक का नाम दुनिया के अमीरों की सूची में क्यों नहीं आया। इसका कारण यह है कि कंपनी के पास जो पैसा है वो जनता का ठिकाना है, जिसे ब्लैकरॉक सिर्फ काम करता है। व्यक्तिगत रूप से लैरी फिंक बिलेनियर्स की सूची में नहीं है।

फोर्ब्स के लेखकों के अनुसार, अप्रैल 2022 में लैरी फिंक की कुल संपत्ति 1 अमेरिकी डॉलर की कमाई हुई थी।

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान अमेरिका में चला आ रहा होटल, भर रहा अपनी जेब, भड़के विवेक रामास्वामी

[ad_2]

Source link

गन और टैक्स धोखाधड़ी मामले में जो बिडेन के बेटे हंटर बिडेन क्षमा ने अमेरिकी न्याय पर गंभीर सवाल उठाए | प्राइमरी के बेटों को मिली गन और टैक्स फ्रॉड मामले में माफ़ी! भारतीय बिजनेसमैन सुहेल सेठ बोले

[ad_1]

हंटर बिडेन का जो बिडेन क्षमा: अमेरिकी राष्ट्रपति जो सुपरमार्केट ने अपने बेटे हंटर सुपरमार्केट को दी है, जिस पर भारतीय सुपरमार्केट सुहेल सेठ ने प्रतिक्रिया दी है। सुहेल सेठ ने इसे अमेरिकी न्याय प्रणाली का मज़ाक करार दिया है। उन्होंने इस राजनीतिकरण के प्रतीक पर अमेरिकी न्याय विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

हंटर मास्टर को बंदूक रखने और टैक्स फ्रॉड के मामले में 16 दिसंबर को दोषी करार दिया गया था। सुहेल सेठ ने कहा, “कल जो सार्जेंट ने अपने बेटे हंटर सार्जेंट को बिना शर्त माफ़ी दी, यह अमेरिकी न्याय प्रणाली का मजाक है। अमेरिका में न्याय विभाग को हथियार बनाया गया है। हमने देखा कि डोनाल्ड साझी के साथ क्या हुआ।” जज जिसने अनैथिक को बनाया था, अब वही मामला वापस ले लिया है। यह एक अनहोली मेस (अनैतिक) है।” उन्होंने इस मुद्दे को भारत से भी जोड़ा और कहा कि यह भारतीय साहस की सफलता से जुड़े मामलों को लेकर अमेरिका के गिरोह को दर्शाता है।

अडानी मामले का ज़िक्र

सुहेल सेठ ने अडानी ग्रुप का उदाहरण देते हुए कहा, ”मैंने अडानी के साथ क्या देखा? पहले उन्होंने प्रेस कंजेशन जारी किया था कि अडानी का नाम लिया गया था. फिर उन्होंने दूसरा कंजेशन जारी किया है कि उनका नाम नहीं है.” भारतीय व्यावसायिक सफलता का राजनीतिकरण है।” सेठ ने अमेरिकी राष्ट्रपति की माफ़ी पर सवाल उठाते हुए कहा, ”अगर अमेरिकी राष्ट्रपति को लगता है कि उनके बेटे के साथ अन्याय हुआ है तो क्या वह किसी भारतीय कंपनी के साथ न्याय कर सकते हैं, क्या वह अडानी हो सकते हैं या कोई और?” “

अमेरिका को ‘बनाना रिपब्लिक’ बताया गया

सुहेल सेठ ने अमेरिकी न्याय प्रणाली पर कटाक्ष करते हुए कहा, “अमेरिकियों को यह विश्वास चाहिए कि वे वास्तव में एक गणतंत्र में रह रहे हैं, जहां उनका साम्राज्य टूट रहा है, खासकर जब वे मानते हैं कि न्याय उनकी एक महत्वपूर्ण उम्मीद का स्तंभ है है।” यह दावा अमेरिकी न्याय व्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के जटिल संबंधों पर नए सवाल उठाता है, जो वैश्विक स्तर पर गंभीर बहस का अंत बन सकता है।

ये भी पढ़ें:

महाराष्ट्र सीएम: बीजेपी वाले शिंदे और बीजेपी वाले शिंदे, महायुति के पास सीएम पद के लिए दो ही स्थिर विकल नामांकन

[ad_2]

Source link

कुवैत हवाई अड्डे की खाड़ी हवाई उड़ान में तकनीकी खराबी के कारण फंसे भारतीय यात्री

[ad_1]

गल्फ एयर उड़ान तकनीकी गड़बड़ी: बहरीन से मैनचेस्टर जा रही ‘गाल्फ एयर’ की उड़ान को तकनीकी उद्यमों के साथ कुवैत हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया गया। भारतीय यात्रियों सहित कई लोग इस फ्लाइट में कर रहे थे जिनमें 20 घंटे से ज्यादा समय तक कुवैत एयरपोर्ट यात्रा पर रुकना शामिल था। जानकारी के अनुसार उड़ान 1 दिसंबर को रात 2:05 बजे शुरू हुई बहरीन से उड़ान भारी थी, लेकिन कुछ तकनीकी जानकारी के कारण इसे सुबह 4:01 बजे कुवैत में जारी किया गया।

भारतीय दूतावास ने यात्रियों की मदद के लिए तत्परता दिखाई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दूतावास ने जानकारी साझा की कि उनकी टीम ने तुरंत ही हवाई अड्डे पर छापे और ‘गल्फ एयर’ के अधिकारियों से समन्वय कर यात्रियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कीं। यात्रियों को कुवैत एयरपोर्ट के दो गेस्ट हाउस में ठहराया गया जहां यात्रियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की गई।

सुबह 4:34 बजे यात्रा फिर से शुरू हुई

सोमवार यानी आज सुबह 4:34 बजे ‘ग्ल्फ़ एयर’ का विमान मैनचेस्टर के लिए प्रस्थान हुआ। भारतीय दूतावास की टीम इस दौरान पूरी रात यात्रियों की सहायता के लिए वहां मौजूद रही। हालाँकि सोशल मीडिया पर कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि शुरुआत में उनकी कोई मदद नहीं की गई, जिससे ई-कॉमर्स का सामना करना पड़ा।

यात्रियों की समीक्षाएँ और अनुभव

इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ यात्रियों ने अपनी आपबीती साझा की और आरोप लगाया कि भारतीय यात्रियों को बिना किसी मदद के छोड़ दिया गया। हालाँकि दूतावास ने यह स्पष्ट किया कि उनकी टीम ने स्थिति और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया। ऐसे में इस इवेंट में फ्लाइट सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा को लेकर मार्केट और एयरलाइंस की जिम्मेदारी पर सवाल उठाया गया है।

ये भी पढ़ें: बांग्लादेश हिंसा: ‘इनकी जंजाल सिर्फ फिलीस्तीन पर खुलती है…’, बांग्लादेश हिंसा को लेकर सोसायट की गलियों में बरसे गिरिराज सिंह

[ad_2]

Source link

विश्व के सबसे क्रोधी देशों की सूची में लेबनान शीर्ष पर है, टर्की दूसरे स्थान पर है, जानें भारत का स्थान कहां है

[ad_1]

विश्व का सबसे क्रोधी देश: दुनिया में अलग-अलग देशों में रह रहे नागरिक कई तरह की लिस्ट लेकर सामने आते हैं, जैसे हैप्पीनेस लीडर्स लिस्ट, अमीर देशों की लिस्ट, गरीब देशों की लिस्ट आदि। ऐसी ही एक और सूची सामने आई है, जो कि अम्रोट पर आधारित है। इस सूची को गैलप ने तैयार किया है। 2024 ग्लोबल इमोशन्स रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान दुनिया के सबसे बड़े देशों की सूची में पहले नंबर पर मौजूद है। इसकी करीब 49% आबादी को गुस्सा आने की बात कही है. यह पात्र देश में चल रहे राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संकटों की सूची में शामिल हैं।

इस वक्त लेबनान-इजरायल के जारी लेख जंग में चर्चा हुई है, जिसके कारण वहां की जनता काफी निराश है। इस दौरान इजराइली दावे में अब तक करीब 3000 लोगों की मौत हो गई है, जिसके कारण देश में विनाशकारी आर्थिक स्थिति पैदा हो गई है, जनता में व्यापक असंतोष पैदा हो गया है। सांप्रदायिक विभाजन और संघर्ष ने समाज को और अधिक अस्थिर बना दिया है।

भारत की स्थिति में गुसल देश की सूची
दूसरे नंबर पर 48 प्रतिशत के साथ लेबनान है। जो साल की शुरुआत में भूकंप से हुई तबाही और आर्थिक संकट की वजह से अब तक रिकवरी नहीं मिली है। तीसरे नंबर पर आर्मेनिया है. जो हाल के समय में नागोर्नो-काराबाख संघर्ष और क्षेत्रीय बैठक से संबंधित है। इसके अलावा सूची में इराक, अफगानिस्तान, जॉर्डन, माली और सिएरा लियोन भी शामिल हैं। हालाँकि, इस सूची में भारत का कौन सा नंबर है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

लेबनान में उग्र वृद्धि की वजह
लेबनान में गुस्सा बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है हिज्बो का प्रभाव। इसकी सैन्य और राजनीतिक ताकतों ने शासन व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया। इजराइल के साथ बढ़ते तनाव ने लेबनानी लोगों के बीच सुरक्षा को और गहरा कर दिया है। इस वजह से देश में 2024 में 6.6% आर्थिक गिरावट का सामना करना पड़ा। कभी मध्य पूर्व का गठबंधन कहा जाने वाला लेबनान अब राजनीतिक और आर्थिक विचारधारा का प्रतीक बन गया है।

ये भी पढ़ें: बांग्लादेश हिंसा: चिन्मय कृष्ण दास के अपराधी के बाद बांग्लादेशी अल्पसंख्यक परिषद ने की बड़ी मांग, कहा- ‘हमारे 70 वकीलों और पत्रकारों को रिहा करो’

[ad_2]

Source link