अमेरिका के ओहियो राज्य में एक अमेरिकी महिला एलेक्सिस फेरेल को क्रूरतापूर्वक बिल्ली खाने के जुर्म में एक साल की जेल की सजा सुनाई गई है

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पशु पर क्रूरता के लिए महिला को दोषी ठहराया गया: संयुक्त राज्य अमेरिका का एक राज्य ओहियो, मदर्स ऑफ़ प्रेसिडेंट्स के नाम से जाना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका के अब तक 7 राष्ट्रपति ओहायो में रहने वाले थे। लेकिन अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड हिटलर को ओहियो में कुछ ख़ास पसंद नहीं है। वेल्श अभियानों के दौरान अपनी रैली में डोनाल्ड पार्टिसिपेंट ने ये आरोप लगाया था कि हैती दल ओहियो में गैंगवार को बर्बाद कर रहे हैं। बता दें कि शेल्फ ने ये आरोप नहीं लगाया था।

पिछले महीने ओहियो के ओहियो में ऐसा ही एक मामला सामने आया था जिसमें एक महिला दोस्त को रॉ में फंसाया गया था। जिसके बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और कोर्ट ने उन्हें सज़ा सुनाई।

क्या था पूरा मामला

16 अगस्त को ओहायो के स्प्रिंगफील्ड से लगभग 270 किमी दूर एक महिला ने सड़क के बीच में बिल्ली को अपने पैरों से झुकाकर अपनी गर्दन तोड़ दी। इससे बिल्ली के मर जाने के बाद वह बिल्ली को कच्चा गोबर ले गई।

जब स्थानीय लोगों ने ये नाममात्र निर्धारण किया तो उनकी आत्मा का प्रतिपादन किया गया। इस अजीबोगरीब घटना को देखकर लोगों ने पुलिस को इसकी जानकारी दी। हमलावर पुलिस ने महिला के दांतों में खून और उसके मुंह पर बिल्ली के रोएं देखे। जिसके बाद तुरंत उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और अब उस महिला को अदालत ने सजा सुनाई है।

कोर्ट ने इस अपराध के लिए क्या दी सजा?

27 साल की इस महिला का नाम एलेक्सिस फेरेल है। जिस कोर्ट ने इस नैशनल अपराध के लिए एक साल की सजा सुनाई है। महिला को सजा सुनाते हुए जज ने कहा, ‘ये बेहद गंभीर मामला है। कोई भी जानवर के साथ ऐसा कैसे कर सकता है. मैं ये घटना जानकर हैरान हो गया हूं. आप समाज के लिए खतरे में हैं।’

अमेरिकी निवासी महिला है

ओहियो के सीनेटर और अब अमेरिका के उपराष्ट्रपति बने जा रहे जेडी वेंस ने महिला को सबसे पहले हैती चैलेंज में इस मामले को जोर-शोर से उठाया था। जिसके बाद डोनाल्ड ने इस घटना को लेकर कमला हैरिस को घेरा था। इस इवेंट से जुड़ा एक वीडियो एलन मस्क ने भी शेयर किया था. हालाँकि जाँच के बाद महिला की पहचान अमेरिकी नागरिक के रूप में हुई।

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भारत और इजराइल के खिलाफ नए जिहाद के आह्वान के 20 साल बाद मसूद अज़हर फिर से सामने आया है

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पाकिस्तान से संचालित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अज़हर ने बीस साल बाद फिर से दुनिया के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने भारत और इजरायल के खिलाफ जहर उगला और जिहाद का नया अभियान छेड़ने का ऐलान किया। इस वीडियो के सामने आते ही पाकिस्तान के कुत्तों को लेकर एक बार फिर सवाल हो गए हैं।

बाढ़पुर केमार्ससे से दी धमकी

दार्शनिक के अनुसार, यह पैगाम पाकिस्तान के बाढ़पुर स्थित उम्म-उल-क़ुरा मदरसा और मस्जिद परिसर से दिया गया था। यह वह जगह है जहां 2019 में विदेशी सरकार ने अपने कब्जे में लेने का दावा किया था, लेकिन स्थानीय इलाकों के अनुसार, वहां आज भी जैश-ए-मोहम्मद का कब्जा है और सुरक्षा के लिए हथियारबंद गार्ड तैनात हैं। इस वीडियो में मसूद ने कश्मीर और फ़िलिस्तीन में आतंक फैलाने की नई साजिश का खुलासा किया है।

मोदी और नेतन्याहू पर सीधा हमला

अपने ज़हरीले बयान में मसूद अज़हर ने भारतीय प्रधानमंत्री की बात कही नरेंद्र मोदी और इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को वाक्यांशों से वाक्यांश बनाया गया। उन्होंने कहा, “क्या हमारे पास इतने भी लोग नहीं हैं जो बाबरी मस्जिद को वापस ले जाएं?” इसके साथ ही उसने भारत में आतंक फैलाने के लिए ताकतवर आतंकियों का इस्तेमाल करना खतरनाक बना दिया।

इस भाषण के दौरान मसूद अज़हर ने लोगों से जैश-ए-मोहम्मद की अपील शामिल की थी। फ़्रांसीसी ने तालियां बजाकर पर इस अपील का समर्थन किया। वीडियो में देखा गया कि मसूद बार-बार “भारत, तेरी मौत आ रही है” जैसा कि अल्ट्रासाउंड नारा लगा रहा है। यह वीडियो अवैध शासन की उग्रता पर कथित कार्रवाई की पोल खोलता है।

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रूस-यूक्रेन युद्ध: रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए भारत की अग्नि 5 मिसाइल की ताकत का खुलासा किया

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भारत की अग्नि-5 मिसाइल: रूस लंबे समय से जापान के साथ युद्ध में संघर्ष कर रहा है। इस दौरान रूसी सेना ने जापान पर कई खतरनाक और बेहद खतरनाक आतंकवादियों पर हमला किया, जिससे जापान में भारी तबाही मची। वहीं हाल ही में रूस ने यूक्रेन के साथ युद्ध में ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है.

यूक्रेन, रूस में इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का इस्तेमाल होने वाले MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली री-एंट्री वेहाइल) मिसाइल तकनीक का प्रदर्शन करके युद्ध की परिभाषा ही बदल दी गई है। हाल ही में रूस ने यूक्रेन पर MIRV तकनीक से एक ICBM लॉन्च कर दी है। इस मिसाइल के बारे में कहा गया है कि इसे किसी भी एंटी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम से नहीं खरीदा जा सकता है।

लेकिन रूस के इस कदम से भारत की अग्नि-5 की ताकत का भी खुलासा हो गया है। बता दें कि अग्नि-5 से लैस भारत सिर्फ 10 सेकंड में अपने दुश्मनों के लिए तबाही मचा सकता है।

बहुत खसखस ​​है मिरव मिसाइल तकनीक?

MIRV मिसाइल तकनीक का इस्तेमाल करके रूस ने युद्ध की परिभाषा बदल दी है। ये तकनीक मिसाइल इसलिए खास है क्योंकि ये एक बैलिस्टिक मिसाइल को इसी तरह से डिजाइन किया जाता है, जिससे कि मिसाइल अपने लक्ष्य के करीब पहुंच कर अलग-अलग उद्यमों में अलग-अलग तरह के लक्ष्य तय कर लेती है और हर भाग अपने अलग-अलग लक्ष्य को पूरी तरह से विकसित कर लेती है। . यह किसी भी तरह से एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंसिव सिस्टम से लाभ प्राप्त करना मुश्किल है।

भारत की अग्नि-5 और अग्नि प्राइम इस तकनीक से लॉन्च

वहीं, भारत के पास पहले से ही MIRV मिसाइल तकनीक से लॉन्च मिसाइल मौजूद है। भारत ने अपनी अग्नि-5 और अग्नि प्राइम मिसाइल को यह खतरनाक तकनीक लॉन्च की है। अग्नि-5 की मारक क्षमता 5000 किलोमीटर से अधिक है। उनके एक ही हमले में अग्नि-5 10 से 14 प्रतिशत की पूरी तरह से क्षति हो सकती है।

भारत ने अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण करके यह साबित कर दिया है कि भारत अब अपने दुश्मनों को जवाब देने के साथ-साथ किसी भी हमले को रोकने और पलटवार करने में पूरी तरह सक्षम है।

भारत की मिरव तकनीक के कारण पाकिस्तान और चीन बैकफुट पर

भारत की खतरनाक मिसाइल तकनीक और मारक क्षमता पाकिस्तान से पहले ही खतरे में पड़ गई है। जो अब भारत की MIRV मिसाइल तकनीक का कारण पूरी तरह से बैकफुट पर है। भारत की अग्नि-5 मिसाइलों के हमले पाकिस्तान के 10 से 12 शहरों पर एक साथ खतरा आ सकता है। पाकिस्तान के किसी भी वायु रक्षा प्रणाली पर प्रतिबंध नहीं है।

वहीं, ये मिसाइल चीन के बीजिंग जैसे शहरों में आसानी से बनाई जा सकती है और चीन के डिफेंस सिस्टम में भी अग्नि-5 के एम तकनीकी तकनीक पर रोक लगाई जा सकती है।

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ब्रिटिश सांसद ने समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच बांग्लादेश में हिंदू उत्पीड़न के जातीय सफाए पर चिंता व्यक्त की

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बांग्लादेश हिंदू हिंसा: ब्रिटेन के मुसलमानों ने मंगलवार (3 दिसंबर) को बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे दावे और धार्मिक नेताओं की हत्या को लेकर गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। कंजरवेटिव पार्टी के न्यूनतम नेता बॉब ब्लैक ने इस हिंसा को हिंदू समुदाय के जातीय स्वच्छता प्रयास के खिलाफ बताया। उनका कहना था कि शेख़ ख़ुशना की सत्ता से बाहर होने के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के ख़िलाफ़ अत्याचार बढ़ गए हैं।

हाउस ऑफ कॉमन्स में एक बहस के दौरान ब्लैकमैन ने कहा, “इस समय बांग्लादेश में हिंदू समुदाय अपनी जलती हुई मकानों, लुटे हुए व्यापारियों और गिरफ्तार धार्मिक नेताओं को लेकर जा रहा है। हाल ही में दो पुजारियों और 63 संतों को गिरफ्तार किया गया है।” बांग्लादेश में प्रवेश पर रोक लगा दी गई।”

उन्होंने इस मुद्दे पर गंभीर चेतावनी देते हुए यह भी कहा है कि ये हिंदू समुदाय के खिलाफ एक रणनीति हो सकती है।

ब्रिटिश सरकार ने सख्त कार्रवाई की अपील की

ब्लैकमैन ने ब्रिटिश विदेश मंत्री कैथरीन वेस्ट से अनुरोध किया कि वह बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर फिल्मांकन का अगला कदम उठा रहे हैं। वेस्ट ने बांग्लादेश में इस मुद्दे को अपनी तस्वीरों में शामिल करने की बात कही और कहा कि वे भारत के साथ इस मामले पर चर्चा करते हैं। इसके साथ ही भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद प्रीति पटेल ने भी बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के बढ़ते दावों के खिलाफ चिंता जताई और ब्रिटिश सरकार से कठोर कदम उठाने की मांग की।

लेबर पार्टी के सांसद बैरी गार्डिनर ने क्या कहा?

लेबर पार्टी के सांसद बैरी गार्डिनर ने बांग्लादेश की स्थिति को गंभीर बताया। उन्होंने इस हिंसा को ब्रिटेन के हिंदू और बांग्लादेशी समुदाय के लिए एक बड़ा खतरा बताया। गार्डिनर ने यह भी बताया कि मृतक के अनुसार पुलिस और सेना ने बांग्लादेश में 20 से अधिक हिंदू और सूफी पूजा स्थलों के बयानों के दौरान कोई कार्रवाई नहीं की।

हिंदू नेता की गर्लफ्रेंड के बाद बढ़ा तनाव

बांग्लादेश में हाल ही में हिंदू पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की गुंडागर्दी ने तनाव को और बढ़ा दिया है। गार्डिनर ने चिन्मय दास की अपराधी और उन्हें अपराधियों से खारिज कर दिया, जो चिंता की बात है। वहीं गुरिंदर सिंह जोसन ब्रिटिश सिख मिनिएचर ने भी इस घटना को “हैरान करने वाला” बताया था और ब्रिटिश सरकार से इस मामले में सीक्वल प्रतिक्रिया की मांग की थी।

भारत में बढ़ता विरोध प्रदर्शन

2 दिसंबर को बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोग हो रहे हमले के विरोध में भारतीय शहर अगरतला में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया। वास्तुशिल्प ने बांग्लादेश के सहायक उच्चायोग में पेट्रो का प्रयास और साहस की। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस घटना के बारे में बताया था।

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बांग्लादेश के मुहम्मद यूनुस सरकार ने कहा कि हिंदू जीवन अब शेख हसन शासन से कहीं बेहतर है | बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा के बीच मोहम्मद यूनुस सरकार का बड़ा झूठ, कहा

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बांग्लादेश हिंसा: बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ़ हिंसा और सुरक्षा को लेकर विवाद तेज़ हो गया है। मोहम्मद यूनुस सरकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने दावा किया कि शेख हसीना के शासन की तुलना में अब हिंदू अधिक सुरक्षित हैं। हालाँकि, इस दावे में जो चित्र और वीडियो दिखाए गए हैं, उनमें कट्टर पंथियों पर हमला करने वाले हिंदू समुदाय भी शामिल हैं।

शफीकुल आलम ने भारतीय मीडिया में एक साक्षात्कार में आरोप लगाया कि वह “गलत सूचना अभियान” चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय सुरक्षित है। उनके अनुसार, शेख़ ख़ुशना की समकालीन स्थिति तुलना में बेहतर है। उन्होंने दावा किया कि भारत से शुरू हुई “गलत आज़ादी” मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। हालाँकि, आलम यह है कि अगर हिंदू सुरक्षित हैं तो यह स्पष्ट नहीं है कि हाल के दिनों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं।

आस्था पर अथाह की आवृत्ति
शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के पतन के बाद हिंदू समुदाय पर हमले में तेजी आई है। पौराणिक और धार्मिक स्थलों पर हमले हो रहे हैं। इस दौरान चटगांव में एक मंदिर का निर्माण हुआ। वहीं इस्कॉन के तीन कलाकारों पर हमला करने की कोशिश की गई। हाल के दिनों में तीन हिंदू पुजारियों के विनाश में वृद्धि हुई है। इस दौरान पिज्जा पर मराठा और सुरक्षा की मांग को लेकर हिंदू समुदाय ने सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

शेख़ हसीना सरकार पर आरोप
शफीकुल आलम ने हिंदू समुदाय की हिंसा के खिलाफ ठीकरा शेख हसीना सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि शेख़ ख़ुशना के शासनकाल में बड़े पैमाने पर विद्रोह हुए थे। उस समय भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इन स्मृतियों को ख़त्म कर दिया। उन्होंने ब्रिटिश संसद और विदेश नीति द्वारा इस मुद्दे पर कोई सवाल नहीं उठाया।

सरकार की ओर से सुरक्षा का दावा
शफीकुल आलम ने कहा कि सरकार ने पुजारियों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा, “हम लिंग, जातीयता, नस्ल और रंग से परे हर नागरिक के दावों को सुनिश्चित करने के लिए हैं।”

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नामीबिया की पहली महिला राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदाई नदैथवा स्वैपो पार्टी से वह सब कुछ जो आपको जानना आवश्यक है

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नामीबिया की पहली महिला राष्ट्रपति: अफ़्रीका देश नामीबिया के इतिहास में पहली बार कोई महिला राष्ट्रपति बनी है। नेतुम्बो नंदी-नदैतवाह, जो पहले देश की थीं उन्हें पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में चुना गया है। वो स्वैपो पार्टी से हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार (3 दिसंबर) को आधिकारिक नतीजे पेश किए गए, जिसमें स्वैपो पार्टी को 57 प्रतिशत वैध वोट मिले, जिसके लिए राष्ट्रपति बनने के लिए जरूरी 50 प्रतिशत वोट बैरियर को पार किया गया। नंदी-नदैतवाह ने अपने प्रतिद्वंद्वी प्रतिद्वंद्वियों पैट्रियट्स फॉर चांग (आईपीसी) के पांडुलेनी इटुला को शानदार जीत दिलाई, जहां इटुला को 26 फीसदी ही मिले वोट मिले।

वर्ष 1990 में नामीबिया को दक्षिण अफ्रीका से आजादी मिली थी। उस समय से नंदी-नदैतवाह लगातार राजनीति में सक्रिय हैं। हालांकि, इस बार राष्ट्रपति पद का चुनाव के बाद पार्टी को और अधिक मजबूत स्थिति में पहुंचाया गया है। वहीं चुनाव में मिली हार के बाद नदैतवा की फ़्रॉस्टी पार्टी आईपीसी ने पहल में धांधली का आरोप लगाया है. उन्होंने मतपत्र की कमी और अन्य तकनीकी पहलुओं का आरोप लगाया, जिसके लिए मतदान को तीन दिन के लिए आगे बढ़ाया गया। इसी बात को लेकर उन्होंने कोर्ट में जाने की बात कही है.

पॉलिटिकल स्टैंडर्ड रक्केल एंड्रियास का बयान
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 72 साल की नंदी-नदैतवाह काफी समय से राजनीति में सक्रिय हैं. उन्होंने 1960 के दशक में SWAPO पार्टी का गठन किया था। इसके बाद उन्होंने विदेश मंत्री सहित कई वरिष्ठ भूमिकाएँ निभाईं। समकालीन लेकेर पॉलिटिकल वैल्यूएशन रक्केल एंड्रियास ने उन्हें SWAPO का महत्वपूर्ण नेता बताया है। उन्होंने कहा कि हमसे आजादी की मुलाकात के बाद वह किसी भी रूप में नेतृत्व कर रही हैं। अपनी पार्टी के कुछ सहयोगियों के विपरीत, नंदी-नदैतवाह की प्रतिष्ठा के साथी से गद्दारी हो रही है। वहीं अपनी जीत के बाद, नंदी-नदैतवाह ने कहा, “नामीबियाई राष्ट्र ने शांति और स्थिरता के लिए मतदान किया है।”

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दक्षिण कोरिया में लगा मार्शल लॉ, जानिए क्या है इसका मतलब लोगों पर कितना पड़ेगा असर?

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दक्षिण कोरिया में लागू हुआ मार्शल लॉ: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक योल ने मंगलवार (3 दिसंबर, 2024) को एक अघोषित आपातकालीन राष्ट्रीय भंडार में मार्शल लॉ की घोषणा की। टेलीविज़न पर दस्तावेज़ देते हुए राष्ट्रपति योल ने दावा किया कि वह देश में विरोधी ताकतों को ख़त्म कर देंगे। राष्ट्रपति यून सुक योल के इस कदम ने राष्ट्रपति को चौंका दिया है। अब हर जगह ऐसी ही बात हो रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मार्शल लॉ क्या है और दक्षिण कोरिया में अब किस-किस चीज पर प्रतिबंध लग जाएगा।

मार्शल लॉ क्या है?

मार्शल लॉक एक बुनियादी शर्त है, जिसे सरकार आम तौर पर किसी भी देश में खतरे या सुरक्षा संकट के जवाब में लगाती है। मार्शल लॉ के अधीन सैन्य प्राधिकरण सामान्य नागरिक कार्य के साथ-साथ राज्य की सुरक्षा को भी नियंत्रित करता है। इनमें अधिकतर मामलों में स्वतंत्रता, कानून प्रवर्तन और सार्वजनिक व्यवस्था में सैन्य भागीदारी पर प्रतिबंध भी शामिल है।

पहले भी किया जा चुका है लागू

मार्शल लॉक को आम तौर पर तब घोषित किया जाता है जब सरकार व्यापक नागरिक विध्वंस, प्राकृतिक आपदाओं या आक्रमण के प्रोत्साहन का सामना करती है। दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ को आखिरी बार 1980 में राजनीतिक उधेड़न-अंश के समय लागू किया गया था। उस समय ग्वांगझू विद्रोह हुआ था, जब सरकार को तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा था। देश के पास एक मजबूत कानूनी ढाँचा और सैन्य तत्परता तो है ही, लेकिन मार्शल लॉ को हमेशा अंतिम आधार माना जाता है।

अब दक्षिण कोरिया में क्या प्रतिबंधित है

1- दक्षिण कोरियाई कलाकारों को देश के संसद भवन में प्रवेश से रोक दिया गया है।

2- दक्षिण कोरिया की सेना ने स्थानीय समय सीमा पर रात 11 बजे से सार्वजनिक राजनीतिक आक्रमण पर प्रतिबंध लगा दिया है।

3- अब पूरे दक्षिण कोरिया में राजनीतिक प्रकृति के विरोध प्रदर्शनों और सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

4- दक्षिण कोरिया के सभी मीडिया और प्रशासन अब सैन्य नियंत्रण के अधीन हैं।

5- आज से दक्षिण कोरिया में स्ट्राइक और वॉकआउट पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया.

6- इसके अलावा, यात्रा पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है, जिसमें देशों के प्रवास को नियंत्रित करने वाली सैन्य चौकियां शामिल हैं, विशेष रूप से क्षेत्रों में उच्च जोखिम वाले।

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दक्षिण कोरिया के मार्शल लॉ सांसदों ने सड़कों पर सैनिकों को उठाने के लिए युन सुक येओल घोषणापत्र पर मतदान किया

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दक्षिण कोरिया मार्शल लॉ: राष्ट्रपति युन सुक योल ने मंगलवार (03 दिसंबर, 2024) को रात को मार्शल लॉ की घोषणा की, जिससे दक्षिण कोरियाई लोग स्तब्ध रह गए और सेना की ओर से संसद में विद्रोह का प्रयास किया गया। मुसलमानों और लोकतंत्रवादियों ने 1980 के दशक के बाद देश में सबसे गंभीर चुनौती के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

1. संसद के अध्यक्ष ने मार्शल लॉ की घोषणा की कि इसे स्थानीय घोषित कर दिया गया है और इसे ठीक करने के लिए मतदान किया गया है। एक स्थानीय न्यूज पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरिया की सेना ने कहा है कि जब तक राष्ट्रपति उन सुक-योल को इसे हटाने का आदेश नहीं देंगे, तब तक वह मार्शल लॉक को बनाए रखेंगे।

2. सेना की ओर से मार्शल लॉ जारी रखने के निर्णय और बहस छेड़ दी गई है, सेना के नेता ली जे-मयांग ने इस कदम की अवैध रूप से निंदा की है और दावा किया है कि इस तरह के शासन के तहत कानून का पालन करना है उल्लंघन होगा. ली के बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि स्टैस्टर्ड रिजर्व में मार्शल लॉ अवैध है।

3. घोषणा के मकसद एक घंटे में ही नेशनल असेंबली के 190 सदस्यों ने मार्शल लॉक को छोड़ने को लेकर वोट किया। दक्षिण कोरिया में हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरे लोगों के खिलाफ यह आदेश जारी किया गया है। इसके बावजूद राष्ट्रपति अपने फैसले पर अड़े हैं। आधी रात को वहाँ के शीशे पर राष्ट्रपति को सड़क पर गिराए गए टैंकों के ढेर लगाए गए।

4. ब्रिटेन सरकार ने ब्रिटिश लोगों से दक्षिण कोरिया में प्रदर्शन से बचने का आग्रह किया है और कहा है कि वह चुपचाप से नजरें बनाए रख रही हैं। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के उप प्रवक्ता ने विश्लेषक से कहा, “हम सभी ब्रिटिश नागरिकों को सलाह देते हैं कि वे ब्रिटेन की यात्रा की सलाह के लिए स्थान और स्थानीय अधिकारियों की सलाह का पालन करें।”

5. दक्षिण कोरिया के अर्थशास्त्री नेता ली जे-मयांग ने घोषणा की कि राष्ट्रपति यूं सुक-योल और सैन्य कमांडरों मार्शल लॉक के संदर्भ में जारी किए गए निर्देश में कहा गया है कि कोई भी व्यक्तिगत राष्ट्रवादी तरीके से काम करेगा। ली ने ज़ोरदार ने कहा कि अगर मार्शल लॉ के तहत क़ानूनी तौर पर प्रशासन को क़ानूनी तौर पर दोषी घोषित किया जाता है, तो वह क़ानूनी तौर पर दोषी नहीं होगा।

6. ली की टिप्पणी देश में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अवैज्ञानिक मान्यता का पालन करने से व्यक्तिगत कानून के गलत पक्ष में आ जाएगा। उन्होंने कहा, “ऐसे संदर्भ में मार्शल लॉ का मूल्यांकन किया गया है। इस तरह का पालन करना कानून का उल्लंघन है।”

7. इस घोषणा में प्लास्टिक गुटों के बीच में प्लास्टिक और प्लास्टिक गुटों को लगाने और बढ़ाने की घोषणा की गई है, जिसमें प्लास्टिक गुट ने प्रशासन पर लोकतांत्रिक सिद्धांतों को अवैध बनाने का आरोप लगाया है। ली ने सेना और नागरिकों से कानून के शासन को देशभक्ति की अपील की और आपातकालीन शक्तियों द्वारा स्थिर सरकार की विचारधारा के खिलाफ चेतावनी दी।

8. राजनीतिक लोकतांत्रिक अभी भी डेमोक्रेट बने हैं, क्योंकि राजनीतिक नेता प्रशासन की कार्रवाइयों और विपक्ष को चुनौती दे रहे हैं और उन्हें दक्षिण कोरिया के लोकतांत्रिक विचारधारा के लिए खतरा बता रहे हैं।

9. मार्शल कमांडर लॉ पार्क के आदेश में “उन श्रमिकों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है जो लिबरल डेमोक्रेटिक सिस्टम को कमजोर कर रहे हैं या उखाड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिसमें फर्जी समाचारों का प्रचार, जनमत में प्रचार और दुष्प्रचार शामिल है।”

10. मार्शल कमांडर लॉ पार्क के आदेश में “उन श्रमिकों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है जो लिबरल डेमोक्रेटिक सिस्टम को कमजोर कर रहे हैं या उखाड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिसमें फर्जी समाचारों का प्रचार, जनमत में प्रचार और दुष्प्रचार शामिल है।”

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जो बिडेन का भारत के लिए अहम फैसला, 1 अरब कीमत के एमएच 60आर हेलीकॉप्टर उपकरण बेचने को दी मंजूरी

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भारत अमेरिका रक्षा सौदा: अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपना पद समाप्त करने से पहले भारत को एक बहुत बड़ी विरासत दी है। उन्होंने सोमवार (2 दिसंबर, 2024) को 1.17 बोलियों के MH-60R मल्टी-मिशन हेलीकॉप्टर उपकरणों से संबंधित आपूर्ति की बिक्री को मंजूरी दे दी है। इस डील से भारत को सबमरीन के फ्रैंचाइज़ी को बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिसे भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

डीएसीए ने कहा कि यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिका-भारत मूल्य निर्धारण को मजबूत बनाएगी। ये एक प्रमुख रक्षा साझीदारी की सुरक्षा में सुधार करने में मदद साबित होगी। ये अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा समूहों का समर्थन करता है, जो भारत-प्रशांत और दक्षिण एशिया क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति का कारण बनता है।

भारतीय नौसेना की नई सेना MH-60R हेलीकॉप्टर

MH-60R हेलीकॉप्टर को प्रोटोटाइप तकनीक से लॉन्च किया गया है, जिससे यह सबमर्सिबल रेज़िस्टेंस वॉर (ASW) और सर्फेस रेज़िस्टेंस वॉर (ASuW) के लिए अत्यधिक प्रभावी है। हेलिकॉप्टर एडवांस्ड डिजिटल सेंसर जैसे मल्टी-मॉड इलेक्ट्रॉनिक्स, डिपिघिंग सोनार और इलेक्ट्रो-ऑटोमोबाइल/इन्फ्रारेड कैमरा लॉन्च किया गया है। इसमें हवा से ज़मीन पर मार करने वाली मिसाइलें और डिज़ाइन एडवांस्ड वेपन सिस्टम हैं।

डेटा लिंक और एयरक्राफ्ट सर्वाइवेबिलिटी सिस्टम

यह सिस्टम हेलीकाप्टर को मुश्किल रॉकेट में भी ऑपरेशन के लिए सक्षम बनाता है। भारतीय नौसेना के लिए हेलीकॉप्टरों को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, जिसमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) का सहयोग शामिल है।

भारत- अमेरिका रक्षा संबंध

एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों की खरीद से भारतीय नौसेना की क्षमता में विस्तार होगा, जिससे भारत-प्रशांत और दक्षिण एशिया में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। अमेरिका ने यह सौदा अपनी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा कर्मियों के लिए महत्वपूर्ण बताया है। भारतीय नौसेना के लिए यह डील भारत की समुद्री सेनाओं को मजबूत बनाना चाहती है। अमेरिका और भारत के बीच यह डील दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी को सूचीबद्ध करती है। भारतीय नौसेना के लिए MH-60R हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों से संपर्क किया गया है।

दुनिया भर में 330 MH-60r कामकाजी हैं। भारतीय नौसेना, जिसमें ये हेलिकॉप्टर अमेरिकी नौसेना, रॉयल रॉयल नेवी, रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी और रॉयल सऊदी नौसेना शामिल हैं, के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इन हेलीकॉप्टरों को खोज, बचाव, चिकित्सा वितरक, कमांड, नियंत्रण और वर्टिकल रिप्लेनिशमेंट मिशनों के लिए भी डिजाइन किया गया है।

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कनाडा इमिग्रेशन का भारतीयों पर असर, 2025 के अंत तक 50 लाख अस्थायी परमिट खत्म हो जाएंगे

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कनाडाई मंत्री ने संसदीय समिति को बताया: कनाडा में आप्रवासन को लेकर भारतीय लोगों की चिंताएं बढ़ रही हैं। कनाडाई आव्रजन विभाग के मंत्री मार्क मिलर ने कनाडा में संसदीय समिति (पार्लियामेंट्री कमेटी) को जानकारी देते हुए कहा कि 2025 के अंत तक करीब 50 लाख अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा खत्म होने वाला है। परमीट खत्म होने वालों में 7,66,000 विदेशी छात्र शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने हाल ही में कनाडा में कई नए पदों को लागू किया है। वहां रह रहे विदेशी लोगों की भर्ती की जाती है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव भारतीय समुदाय के लोगों पर पड़ता है। कनाडाई मंत्री ने संसदीय समिति को बताया कि आप्रवासन अधिकारियों को उम्मीद है कि दस्तावेज के पूरा होने के बाद लोग अपनी इच्छा से कनाडा छोड़ देंगे। हालांकि इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजी ढांचे के खत्म होने के बाद संकटग्रस्त स्थिति में रहने वाले लोगों को सरकारी तौर पर उनके देश वापस भेजा जा सकता है।

कुछ लोगों को मिल सकती है राहत

हालाँकि सभी आश्रमों को जाने की आवश्यकता नहीं होगी। आप्रवासन विभाग के मंत्री मार्क मिलर ने कहा, इनमें से कुछ को प्रतिमा रिन्यूयल या पोस्ट ग्रेजुएट वर्कशॉप से ​​प्राप्त होगी। ये मान्यता प्राप्त कनाडाई खिलाड़ी या डिग्री वाले विदेशी छात्रों को स्थायी निवास के लिए आवेदन देते हैं। जो कि 9 महीने के लिए नीचे दिए गए हैं।

भारतीय समुदाय के लोगों पर सबसे अधिक प्रभाव

कनाडा में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की ओर से अप्रवासियों के लिए लागू किए गए नए राष्ट्रपतियों का सबसे ज्यादा प्रभाव वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों पर पड़ेगा। क्योंकि कनाडा में रहने वाले प्रवासी समुदाय में भारतीय समुदाय सबसे प्रमुख है। अगस्त 2024 से ही कनाडा के ब्रैमटन में भारतीय युवा खिलाड़ी तटरक्षक कनाडा के अलाभियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

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