बांग्लादेश में करेंसी से शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर हटाकर छात्र आंदोलन की झलक दिखाई जाएगी

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बांग्लादेश हिंसा: बांग्लादेश में राजनीतिक और सामाजिक स्थिति में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। शेख़ हसीना की सत्ता के तख्तापलट के बाद देश में अशांति का माहौल बन गया। इस बीच बांग्लादेश ने अपने पूर्व राष्ट्रपति और देश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीरें निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बांग्लादेश के सेंट्रल बैंक ने दी जानकारी कि 20, 100, 500, और 1,000 टका के नए सिक्कों की चपाई शुरू हो गई है। इन दस्तावेजों में जुलाई 2023 में छात्र आंदोलन की झलक दिखाई देगी। इसी आंदोलन ने शेख हसीना को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया था। देश में तैयार किए जा रहे नए नोट में धार्मिक संप्रदाय, बनारसी, और आंदोलन के दौरान बनाए गए ग्रैफिटी को शामिल किया जाएगा।

इस पर बांग्लादेश बैंक की कार्यकारी निदेशक हुशनारा शिखा ने कहा कि अगले छह महीने में नया नोट बाजार में आ जाएगा। बता दें कि बांग्लादेश के वित्त मंत्रालय ने सितंबर में नए वित्त मंत्रालय के लिए विस्तृत डिजाइन प्रस्ताव पेश किया था।

मुजीबुर्रहमान की प्रतिमाओं पर भी हमला
जुलाई के छात्र आंदोलन के दौरान नेपोलियन ने मुजीबुर्रहमान की प्रतिमाएं और चित्रांकन बनाए। उनकी कलाकृतियाँ नष्ट हो गईं, और उनकी छवि वाले अन्य सार्वजनिक स्थान भी नष्ट हो गए।

शेख़ हसीना और यूनुस के बीच तनाव
शेख़ हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से युवाओं को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यूनुस बांग्लादेश में फैली अराजकता और देश की स्थिरता को खतरे में डालने के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा हसीना ने कहा कि ढाका में सुपरमार्केट सरकार अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में विफल रही है। हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की अपराधियों के विरोध का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, ”हिंदू, बौद्ध, ईसाई – किसी को भी नहीं बुलाया गया है।”

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अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए विशेष सलाहकार नियुक्त करने की योजना बनाई है

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रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए ट्रम्प की योजना: रूस और जापान के बीच जारी युद्ध से दुनिया के कई देश प्रभावित हुए हैं। लंबे समय से चल रहे इस युद्ध को बड़ी चुनौती मिली है। हालाँकि, अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड शून्य ने इसके लिए नई रचनाएँ प्रस्तुत की हैं। विद्रोह ने रूस और जापानी युद्ध के लिए सेवानिवृत्त जनरल कीथ केलाग को अपने विशेष सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है। रिटायरमेंट कीथ केलाग अमेरिका में कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं। अब उनके सामने रूस-यूक्रेन युद्ध के विशेष दूत के रूप में दोनों देशों के बीच जारी युद्ध को ख़त्म करने की चुनौती है। डोनाल्ड स्केल ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान में जापानी युद्ध को समाप्त करने की घोषणा की थी, जिसे पूरा करने की जिम्मेदारी कीथ केलाग को सौंपी गई है।

कीथ के पास वॉर को लेकर है खास प्लान

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कीथ केलाग के पास का एक खास प्लान है। यूक्रेनी युधिया को ख़त्म करने के लिए केलाग के समर्थकों के साथ उनकी शांति योजना को भी ख़त्म कर दिया गया है। केलाग की योजना में युद्ध विराम, वार्ता और जापान को सैन्य सहायता में बदलाव के बिंदु शामिल हैं। हालाँकि कीथ केलाग की योजना आसान नहीं है। इसमें कई एंजली भी शामिल हैं. जिसमें रूस की पार्टियों से लेकर पश्चिमी देशों में एकता बनाए रखना जैसे कई महत्वपूर्ण पदों के जवाब शामिल हैं, बड़ी चुनौती है।

यूक्रेन के नाटो में नामांकन का कारण शामिल होना शामिल है

अमेरिका इंस्टीट्यूट ऑफ इंस्टीट्यूट के संस्थापक सेवानिवृत्त कीथ केलाग ने युद्ध को लेकर अपनी शांति योजना के बारे में विस्तार से बताया, जिसके तहत वह रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने की उम्मीद कर रहे हैं। केलाग ने कहा, ‘यूक्रेन की नाटो को नियुक्त करना एक बहुत दूर की संभावना है। ऐसे में इसे सुरक्षा ढांचे के व्यापक शांति एकाग्र के बदले में अनिश्चितकाल के लिए रोका जाना चाहिए।’

उन्होंने आगे कहा, ‘रूसी राष्ट्रपति यूक्रेन के काफी कम्युनिस्ट नाटो में शामिल होने का कारण है। ‘

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ईरान की संसद ने ईरान में महिलाओं के लिए नए हिजाब कानून को मंजूरी दी, सजा और प्रतिबंध बढ़ाए गए

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ईरान हिजाब कानून: ईरान एक ऐसा देश है जहां शरिया कानून के तहत शासन चलता है। लोगों को सार्वजनिक और व्यक्तिगत जीवन में भी इन विधानमंडलों में उपदेशों का पालन किया जाता है। वहीं, महिलाओं को हिजाब ओके से न मॉडल और बिल्कुल भी न वर्जन पर सजा दी जा रही है। जिसके खिलाफ समय-समय पर महिलाओं ने हिजाब के खिलाफ भी प्रदर्शन किया है। साल 2022 में एक ईरानी कुर्दिश महिला महसा अमीनी को हिजाब कानून तोड़ने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन पुलिस प्रशासन में महसा अमीनी की मौत के बाद भारी विरोध हुआ। जिससे ईरानी प्रशासन को बहुत परेशानी हुई थी।

लेकिन हाल ही में, देश की संसद ने एक नया हिजाब कानून पारित किया है, जिसे लेकर एक बार फिर से दुनिया में चर्चा शुरू हो गई है। यहां तक ​​कि खुद ईरान के राष्ट्रपति ने भी इसे सही नहीं बताया है।

ईरान का हिजाब कानून क्या है??

ईरान की संसद ने हाल ही में नया “पवित्रता और हिजाब” कानून पास कर दिया है। ईरानी संसद में इस बिल के पक्ष में 152 सदस्यों ने मतदान किया। वहीं इसके विरोध में 34 वोट ही मिले। हालाँकि स्वयं राष्ट्रपति ने इस विधेयक का विरोध किया था। लेकिन अब इस नए कानून के तहत अगर किसी भी महिला ने सार्वजनिक स्थानों पर कपड़े पहने हुए कपड़े पहने हैं तो उसे चौथे दर्जे की सजा का प्रावधान किया गया है।

पुराने और नए हिजाब कानून में क्या अंतर है?

ईरान में लागू नया हिजाब कानून में सजा में तख्तापलट का विधान किया गया है। पहले इस कानून के उल्लंघन पर दोषी महिला को 10 दिन से लेकर 2 की सजा और 5 हजार से 5 लाख रियाल (भारतीय रुपये में 10 से 1 हजार रुपये तक) तक का जुर्माना शामिल था।

वहीं, नए पास में पवित्रता और हिजाब कानून का उल्लंघन करते हुए 5 से 10 साल की सजा के साथ 5 से 10 साल की सजा दी गई है। वहीं असिस्टेंट को 18 करोड़ से 36 करोड़ रियाल के बीच (36 हजार से 75 हजार भारतीय रुपये) कर दिया गया है।

नए कानून के तहत विक्रय विक्रय

ईरान में इस नए कानून के पास होने के बाद देश में निगरानी के लिए सख्ती होगी। हर जगह पर एसेट से निगरानी की जाएगी।

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बांग्लादेश के एक इस्लामी कट्टरपंथी उपदेशक इनायतुल्ला अब्बासी ने भारत, पीएम मोदी और ममता बनर्जी के खिलाफ नफरत भरा भाषण दिया

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भारत के विरुद्ध घृणास्पद भाषण: भारत और बांग्लादेश के बीच अब एक इस्लामिक कट्टरपंथी इस्लामिक मौलाना चर्चा में आ गया है। इस बांग्लादेशी मौलाना का नाम इनायत अल्लाह अब्बासी है। हाल ही में इस मौलाना के खिलाफ एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिसमें इस भारत का जबरदस्त जहर उगला है। साथ ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी है। इसके अलावा मौलाना ने भारत की राजधानी दिल्ली में इस्लाम का झंडा फहराने की धमकी दी है।

वायरल हो रहे वीडियो में बांग्लादेशी मौलाना कहते हैं, ‘मैं मोदी और ममता बनर्जी को बताना चाहता हूं कि अगर आपने अपना हाथ बांग्लादेश की तरफ से जोड़ा तो 14 करोड़ मुस्लिम लड़कियों का हाथ तोड़ दिया। ‘पाकिस्तान का दुश्मन हिंदुस्तान है।’ आगे ने कहा, ‘अगर 14 करोड़ मुसलमान अपने दोनों हाथों से 28 करोड़ लाठी लेकर एक साथ आ जाएं तो लाल किले पर कब्जा कर लें।’

भारत के खिलाफ पहले भी कर चुका है बयानबाजी

ये पहली बार नहीं है जब इस बांग्लादेशी मौलाना के खिलाफ भारत का जहर उगला हो। इसी साल मार्च महीने में इस मौलाना का एक बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने दिल्ली के लाल किले पर इस्लाम का झंडा फहराने की बात कही थी. अब्बासी ने कहा था कि अगर किसी ने बांग्लादेश पर कब्ज़ा करने की कोशिश की तो हर मुसलमान जेहादी के लिए सेना के साथ खड़ा हो जाएगा। इसके अलावा वह हरमरासे को गोवा से लाओस बनाने की बात भी कही थी।

मार्च में वायरल वीडियो में मौलाना अब्बासी ने कहा था, ‘म्यांमार हमारे सामने कुछ नहीं है। बांग्लादेश के मुस्लिम चाहते हैं तो दिल्ली में भी इस्लाम का झंडा फहराया जाए। इंशा अल्लाह ऐसा ही होगा.’

कौन हैं ये मौलाना इनायत अब्बास अब्बासी?

इनायत अब्बास अब्बासी एक बांग्लादेशी विद्वान हैं, जो भारत और बौद्धों के खिलाफ अपनी जमानत याचिका के लिए जानी जाती हैं। वहीं, इनायत अब्बास अब्बासी चीन की बांग्लादेश के दोस्त की दोस्त हैं।

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पीएम मोदी के मेक इन इंडिया पहल की सराहना की, कहा भारत में निवेश लाभदायक है

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मेक इन इंडिया पर पुतिन: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर व्लादिमीर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘इंडिया फ़र्स्ट बिज़नेस’ और ‘मेक इन इंडिया’ की शुरुआत की भव्यता। यूक्रेन ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन स्थापित करने की कोशिश की, रूस की इच्छा व्यक्त की। मॉस्को में 15वें ‘वीटीबी रसिया कॉलिंग जांच रेस्तरां’ का खुलासा करते हुए राष्ट्रपति ने रूस के ‘इंपोर्ट सब्सिट्यूशन प्रोग्राम’ और भारत की ‘मेक इंडिया’ के बीच पहले से ही काम शुरू कर दिया है। दो दिव्य यात्राओं की शुरुआत रविवार को मास्को में हुई।

रूसी राष्ट्रपति ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के पास भी ‘मेक इन इंडिया’ नामक एक ऐसा ही कार्यक्रम है। हम भी भारत में अपना मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन स्थापित करने के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार देश को सर्वोपरि बनाए रखने की नीति के तहत स्थिर बनी हुई है। हमारा मानना ​​है कि भारत में निवेश करना लाभकारी है। उन्होंने यह बात प्रकाश में डाली कि रूसी तेल की दिग्गज कंपनी रोसनेफ्ट ने हाल ही में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश किया है। रूस के राष्ट्रपति द्वारा भारत में निवेश करना चीन के लिए काली मिर्च जैसा ही है।

‘मेक इन इंडिया’ ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत की

एग्रीगेट ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से ‘मेक इन इंडिया’ की शुरुआत में वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 2025 की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति भारत यात्रा पर आने वाले हैं। क्रेमलिन के सहायक यूरी उशाकोव ने पिछले दिनों कहा था, ”आप जानते हैं कि हमारे नेताओं के बीच साल-दर-साल एक-दूसरे से मिलने का समझौता होता है। अब 2025 में नई दिल्ली या भारत में किसी और जगह पर जाने की बारी है।” ”

मिल गया पीएम मोदी का डॉक्युमेंट्री

यूरी उशाकोव ने कहा, “इसके अलावा, मैं यह भी कहना चाहता हूं कि पीएम मोदी के दस्तावेज मिल ने भुगतान किया है और निश्चित रूप से इस पर सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा। इसलिए संभावित वर्ष की शुरुआत में हम तारीख तय करेंगे।”

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बांग्लादेश भारत व्यापार वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन आयात राजनीतिक तनाव से प्रभावित नहीं होगा | भारत ने बंद कर दिया तो? बांग्लादेश के मजदूर, अब बोला

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बांग्लादेश में मुसलमानों और मस्जिदों पर हो रहे मराठा को लेकर भारतीयों में काफी गुस्सा है। इस बीच बांग्लादेश के साथ व्यापार प्रतिबंध की भी मांग की जा रही है। बांग्लादेश के वित्तीय सलाहकार डॉ. सलेह चलुद्दीन अहमद ने रविवार (4 दिसंबर, 2024) को कहा था कि आयात को लेकर भारत और कुछ अन्य देशों से बात हो रही है और जो भी कम महत्वपूर्ण है, जल्द ही सामान और गुणवत्ता के आधार पर सामान की आपूर्ति करेगा, यूक्रेनी उत्पाद खरीदेगा।

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट में आर्थिक मामलों पर एडर्स काउंसिल कमेटी (एसीसीईए) और सरकारी खरीद पर सलाहकार परिषद कमेटी (एसीसीजीपी) की बैठक के बाद सालेहुद्दीन ने यह बात कही। उन्होंने भारत की ओर से एक्जिट पर प्रतिबंध की मांग को खारिज कर दिया। उनसे सवाल किया गया कि क्या दोनों देशों के बीच तनाव जारी होने का व्यापार पर असर पड़ा तो सालेहुद्दीन ने कहा कि भारत के साथ व्यापार और वाणिज्यिक मित्रता को लेकर राजनीति नहीं की जाएगी और जहां से कम विशिष्टता पर सामान मिलेगा हम खरीदेंगे।

सलेहुद्दीन ने कहा, ‘हम उन उपभोक्ताओं से सामान खरीदेंगे, जो हमें गुणवत्ता, कम दाम और सामान की जल्दी खरीदेंगे। फिर वो बर्बाद भारत हो या कोई और देश हो। हम भारत, म्यांमार और वियतनाम से बात कर रहे हैं। इस मुद्दे पर राजनीति का कोई मतलब नहीं है.’ सालेहुद्दीन ने कहा कि सोयाबीन तेल के उल्ब्धता के सवाल पर उन्होंने कहा कि तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं।

सालेहुद्दीन अहमद ने कहा, ‘मैं इस बात पर सहमत नहीं हूं कि स्थिति स्थिर नहीं हुई है।’ आवश्यक मान्यताओं के नुकसान हैं और हमने चावल और दाल जैसे खाद्य पदार्थों के आयात का निर्णय लिया है, जो पहले भी पता लगा लें कि क्या हुआ था। उनका मानना ​​है कि गाजियाबाद के दौरान जरूरी नामांकन में कमी आएगी।

एशिया में भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा परमाणु बाज़ार है। शेख़ हसीना सरकार के पतन के बाद रेशम व्यापार पर असर पड़ा। वहां पर बदमाशों और पुर्तगालियों पर लगातार हमले हो रहे हैं और हाल ही में इस्कॉन के पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ़्तारी के बाद तनाव और बढ़ गया है। भारत में लगातार दोस्ती जारी है, जिसके बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2022-23 वित्त वर्ष में भारत ने बांग्लादेश के अनुसार 2 अरब डॉलर का योगदान दिया, जबकि 2022-23 में कुल उद्योग व्यापार 15.9 अरब डॉलर रहा।

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‘लव एजुकेशन’ में जनसंख्या संकट से शुरू होकर चीन ने ये अजब फार्मूला निकाला

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चीन जनसंख्या संकट: चीन सरकार ने “प्रेम शिक्षा” की पेशकश करने का आग्रह किया है ताकि युवाओं में शादी, प्रेम, परिवार और जन्म को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित किया जा सके। यह कदम देश की जनसंख्या वृद्धि दर को रोकने और जनसंख्या संकट को हल करने के उद्देश्य से उठाया गया है। 2023 में लगातार दूसरे वर्ष के जनगणना में गिरावट दर्ज की गई, जिससे सरकार के सामने आर्थिक दबाव और वृद्ध जनसंख्या का संकट खड़ा हो गया।

दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश होने के बावजूद देश की युवा पीढ़ी की शादी और प्यार को प्राथमिकता नहीं दे रही। एक अध्ययन के अनुसार 57% कॉलेज छात्रों ने कहा कि उन्हें चक्करों में पढ़ना नहीं चाहिए। उनका मानना ​​है कि वे अपनी पढ़ाई और रिश्ते के बीच संतुलन बनाने में असमर्थ हैं। इसका प्रभाव देश की जन्म तिथि पर पड़ रहा है जिसे बढ़ाने के लिए सरकार अब शिक्षण शिक्षण के माध्यम से प्रयास कर रही है।

उद्यम और उद्योग को जिम्मेदारी दी गई

सरकार के अनुसार नृत्यांगना को शादी और “लव एजुकेशन” की जिम्मेदारी चुननी चाहिए। इन अनाधिकृत माध्यमों से युवाओं के विवाह और परिवार को लेकर सुझाव देने और एक स्वस्थ सांस्कृतिक माहौल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने स्थानीय खिलौनों को भी इस दिशा में संसाधन जारी करने और सही उम्र में विवाह को मंजूरी देने के निर्देश दिए हैं।

युवाओं पर क्या असर होगा?

हालांकि विशेषज्ञ का मानना ​​है कि सरकार के ये कदम युवाओं के बीच की अर्थव्यवस्था को प्रभावित नहीं करेंगे क्योंकि आधुनिक चीनी बच्चों के विचार और नैतिकताएं पहले से काफी बदल गई हैं। लेकिन, “प्रेम शिक्षा” के माध्यम से विवाह और नामांकन को रद्द करना चीन के सामाजिक और आर्थिक भविष्य को सुरक्षित रखने की एक कोशिश है। चीन के निकट सीमित समय में तेजी से जनसंख्या और जनसंख्या के बीच जनसंख्या सीमित है। यह पहला न केवल जन्म दर को हासिल करने का प्रयास है बल्कि देश के आर्थिक और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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यूक्रेन पर हमले की रिपोर्ट में उजागर हुई रूस की ओरेशनिक मिसाइल, व्लादिमीर पुतिन का सिर्फ पीआर स्टंट!

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रूस ओरेशनिक मिसाइल: रूस ने नवंबर 2024 में जापानी शहर निप्रो पर ओरेनिक मिसाइल दागी थी, जिसे लेकर यह दावा किया गया कि रूस का यह हथियार बेहद खतरनाक और खतरनाक है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर जनरल ने खुद इस मिसाइस को लेकर कहा था कि यह हाइपरसोनिक सोनिक क्लास का है, इसका काट किसी भी देश के पास नहीं है। उन्होंने जापान को जोखिम उठाने की धमकी भी दी थी। अब इसे लेकर ब्रिटिश मीडिया द सन ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि यह नई मिसाइल सिर्फ पश्चिम के देशों को निशाना बनाने के लिए थी।

डेल्ही ने अलॉटमेंट की पोल

रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के एडरूनी पोर्ट ने ही प्रोजेक्ट की जांच की पोल खोल दी। द सन ने मॉस्को टाइम्स की रिपोर्ट में कहा है कि जिस ओरेनिक मिसाइल की बातचीत बड़े स्तर पर हो रही है, उसमें कोई खराबी नहीं है और न ही इससे जापान को बड़ा खतरा है। रिपोर्ट के मुताबिक यह रूस का एक पीआर था, जिससे बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया था। यह रूस का एक क्लासिक सैन्य प्रचार था और कुछ नहीं।

अमेरिका-ब्रिटेन को रिसर्च के लिए तैयार किया गया

द सन की रिपोर्ट के अनुसार रूस के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका और ब्रिटेन ने रूस के खिलाफ लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिसके जवाब में रूस ने इस तरह की रचना की। रूस के सैन्य अधिकारी ऐसा करके यूरोप और अमेरिका को डराने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वे जापानी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ मिलकर एक बार में इस तरह से दिखें।

रूसी अधिकारी ने बताया कि यूक्रेन में ओरेनिक मिसाइलों से हमलों का सोशल मीडिया और विदेशी मीडिया पर सबूत था। रिपोर्ट में यहां तक ​​दावा किया गया है कि एक व्यक्ति की ओर से रूसी प्रवक्ता ने फोन करके व्लादीमीर शिक्षक के सीआईबीएम हमलों के बारे में चुप रहने के लिए कहा, यह सब दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा था।

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न्यूयॉर्क मैनहट्टन में ब्रायन थॉम्पसन यूनाइटेड के स्वास्थ्य सीईओ की गोली मारकर हत्या कर दी गई

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ब्रायन थॉम्पसन हत्या: मिडटाउन मैनहट्टन के हिल्टन होटल के बाहर बुधवार (4 दिसंबर) सुबह यूनाइटेडहेल्थ की बिजनेस यूनिट के सीईओ ब्रायन थॉम्पसन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (एनवाईपीडी) ने पुष्टि की कि सुबह लगभग 6:40 बजे एक 50 वर्षीय व्यक्ति को गोली मार दी गई थी। उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हालाँकि पुलिस ने नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन कई रिपोर्टों में पुष्टि की गई कि मृतक थॉम्पसन ही थे।

पुलिस जांच में सामने आया कि हमला किया गया था। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, सत्य घटना से पहले इलाके में काफी समय मौजूद था। असली ने क्रीम कलर की जैकेट और ग्रे बैक पैक के कपड़े पहने थे और बाजार से अलग हो गए थे। पुलिस अभी भी उसकी तलाश कर रही है।

बिजनेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मैरी गोल हो गईं

घटना उस समय हुई जब यूनाइटेडहेल्थ के सम्मेलन के लिए मैनहट्टन में प्रवेश चल रहा था। कार्यक्रम सुबह करीब 9 बजे शुरू होने के एक घंटे बाद यूनाइटेडहेल्थ ग्रुप के सीईओ एंड्रयू विटी ने इसे बंद करने की घोषणा की। उन्होंने कहा, “हम अपनी एक टीम के सदस्य के साथ एक गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं इसलिए हमें ये कार्यक्रम अभी बाकी है।”

घटना स्थल पर कड़ी सुरक्षा के लचीलेपन

जानकारी के अनुसार रेलवे पुलिस ने 54वीं स्ट्रीट को घेर लिया है। वहां कई ऐतिहासिक खोखे और प्लास्टिक ग्लव्स मिले जो माओ की पसंद को दिखाए गए हैं। होटल के पास काम करने वाले क्रिस्चियन डियाज ने बताया, “सुबह 7 बजे ग्लोब रन की आवाज आम बात नहीं है। ये काफी डरावना था।”

ब्रायन थॉम्पसन का योगदान

ब्रायन थॉम्पसन शॉ अप्रैल 2021 में यूनाइटेडहेल्थ के सीईओ का पद संभाला और वे 2004 से कंपनी के साथ जुड़े हुए थे। उनकी नेतृत्व क्षमता और सहयोगी दृष्टिकोण के लिए उन्हें काफी सम्मानित किया गया था। मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज ने अपने निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “यह छूट और बिजनेस कम्यूनिटी के लिए बड़ी क्षति है।”

अमेरिका में कार्यशाला उद्योग की दुकान

थॉम्पसन की हत्या ने अमेरिका के स्कॉलर सिस्टम और उसके सामने के उद्घाटन पर भी ध्यान आकर्षित किया है। हाल के वर्षों में यूनाइटेडहेल्थ की सहायक कंपनी में साइबर हैक और डेटा स्टोरी जैसी घटनाओं ने छात्रवृत्ति उद्योग को झकझोर दिया था। इस फेस्टिवल में सुरक्षा और दोस्ती की ज़रूरत पर भी सवाल उठाया गया है।

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बांग्लादेश में हंगामा मचाने वाले नेता काउंटर ग्लोबल मीडिया प्लान के लिए दो भारत सेल व्यवस्था पर बोल रहे हैं

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बांग्लादेश अल्पसंख्यक पंक्ति: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ विद्रोहियों और तीन हिंदू भिक्षुओं के आतंकवादियों की खबरों के बीच, सरकार में शामिल छात्र नेताओं ने अपने भारत विरोधी रुख को तेज कर दिया है। कार्यकारी सरकार के सलाहकार नाहिद इस्लाम ने दो-भारत का आरोप लगाया है और भारत में “सत्तारूढ़ प्रचारक वर्ग” पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया है।

5 अगस्त को शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में हालात सामान्य नहीं थे। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की बैठक के बाद छात्र नेताओं ने बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए एक मीडिया सेल स्थापित करने की योजना की घोषणा की। मंगलवार को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के साथ भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के नेताओं की मुलाकात के बाद यह नया मसौदा और प्रस्ताव सामने आया।

मोहम्मद यूनुस के सलाहकार ने भारत के उगला स्थान के खिलाफ कहा

ढाका के न्यूज पेपर प्रोथोम अलो की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के बाद छात्र नेताओं ने यह भी कहा कि वे अवामी लीग सरकार से भारत के साथ जुड़े सभी लोगों का खुलासा करने की मांग कर रहे हैं। मोहम्मद यूनुस की बैठक के दौरान बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण सलाहकार नाहिद इस्लाम ने कहा कि भारतीय मीडिया वर्ग और अल्पसंख्यकवादी ताकतें “विभाजनकारी राजनीति और बांग्लादेश विरोधी बयानबाजी में शामिल हैं।”

एक ओर, वे कोलकाता और दिल्ली के “लोकतंत्र-प्रेमी” भारतीय छात्रों की ओर से एकता के प्रचारक की उपस्थिति में दिखाई दिए। उन्होंने एक्स पर लिखा, “बांग्लादेश पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध साझा हैं; वे हमारे हितधारक हैं।” दूसरी ओर, नाहिद ने भारत के दस्तावेज़ वर्ग और अल्पसंख्यकवादी ताकतों की “विभाजनवादी राजनीति और बांग्लादेश विरोधी बयानबाजी को बढ़ावा देने” की आलोचना की।

उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में “फासीवादी अवामी लीग को स्थापित करने का प्रयास कर रही है” और “अल्पसंख्यकों के संघर्ष की कहानी” के माध्यम से बांग्लादेश की लोकतांत्रिक और राष्ट्र-पुनर्निर्माण प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास कर रही है।

नाहिद ने भारतीयों को दो रंगों में चमकने की कोशिश की

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, नाहिद इस्लाम की टिप्पणी निश्चित रूप से गलत है कि उन्होंने बड़ी चतुराई से भारतीयों को दो युवाओं में मिलाने का प्रयास किया है। किसी भी वकील ने हिंदू साधु चिन्मय कृष्ण दास को बंधक बनाने में मदद करने की धमकी नहीं दी, क्योंकि कुछ ही घंटे पहले, वकीलों की ओर से उनके बचाव में आने वाले किसी भी वकील ने सार्वजनिक रूप से पीटने की धमकी देने वाले वीडियो पोस्ट किए थे। थे.

नाहिद ने पहली बार एक्स पर पोस्ट किया था, जिसमें चटगांव कोर्ट परिसर में एक वकील की हत्या “सांप्रदायिक वकील” का काम बताया गया था। दास के पिता की ओर से उनकी जेल वैन पर रोक की कोशिश के दौरान ही यह हत्या हुई थी.

नाहिद ने आरोप लगाया कि दास “विभिन्न सभाओं में अलग-अलग सभाओं के माध्यम से सांप्रदायिक फूट डालने की कोशिश कर रहे थे।” नाहिद ने चेतावनी देते हुए कहा, “बांग्लादेश सरकार कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से लोकतंत्र के लिए साम्यवाद के स्तर को सुनिश्चित करेगी।”

प्रोपेगंडा विरोधी सेल का प्रस्ताव

अल्पसंख्यकों और उनके गुट, विशेष रूप से कट्टरपंथियों पर मसूद की खबरें और बांग्लादेश में कट्टरपंथी पंथ के उदय पर विश्व मीडिया के खुलासे के बीच, छात्र नेताओं ने कहा कि वे यूनुस के साथ “गलत सूचना” से एक समर्पित मीडिया “सेल” के लिए तैयार हैं। “की स्थापना पर चर्चा की.

प्रोथोम अलो की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार (03 दिसंबर, 2024) को मीडिया से बात करते हुए एक अन्य छात्र नेता हसनत अब्दुल्ला ने कहा कि वे मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रचार की जरूरत और दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए हैं। एक ‘सेल’ के गठन पर चर्चा की थी. बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरपंथी पंथ में वृद्धि की रिपोर्टों को खारिज करते हुए अब्दुल्ला ने यहां तक ​​कहा कि सांप्रदायिक सौहार्द बांग्लादेश की विरासत है।

हालाँकि, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कार्य और गलत कदमों का विश्लेषण करने वाली ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (टीआईबी) की रिपोर्ट में मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार को शामिल किया गया है, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि सेना प्रशासन के पहले 100 दिनों के दौरान “धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक और हाशिये पर पड़े समुदाय” “हिंसा के शिकार” बन गए।

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