सोशल मीडिया से डरे पाकिस्तान के सेना प्रमुख, सरकार से सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए मजबूत कानून बनाने का आग्रह

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सोशल मीडिया से डरता है पाकिस्तान पाकिस्तान की सेना यूँ तो हर किसी को आँख मारती है कि उसे किसी का डर नहीं है। लेकिन अब विदेशी सेना प्रमुखों को ही डर लग गया है. जी हां.. विदेशी सेना के प्रमुख जनरल कोटा मुनीर को ही पाकिस्तान के आवाम की सोशल मीडिया पर सेना की ताकत का खतरा सताने लगा है। सेना प्रमुखों में ये ख़तरा पिछले हफ्ते सेना के गठन के कमांडरों की बैठक में सामने आया है.

मित्र सेना की इस बैठक के दौरान कई सैन्य सलाहकारों पर चर्चा की गई, जिसमें सोशल मीडिया और उनकी खबरों में एक बड़े लक्ष्य की चर्चा की गई। आईएसपीआर की ओर से विदेशी मीडिया में प्रकाशित जानकारी में यह बात सामने आई है। इस जानकारी में खास बात यह है कि विदेशी सेना प्रमुखों को सोशल मीडिया पर डर लग रहा है।

पूर्ण सरकार से असैनिक कानून लागू करने की अपील

मीटिंग के दौरान फ़ेसबुक न्यूज़ को लेकर जो उदाहरण दिए गए वो बड़ा ही दिलचस्प था। यह खबर थी कि इस्लामाबाद में एससीओ सम्मेलन के लिए विदेशी दूतावासों की यात्रा के दौरान जब सुरक्षा के लिए सेना को बुलाया गया था, जिसमें पाकिस्तान की प्रमुख सरकारी इमारतों की सुरक्षा की जिम्मेदारी शामिल थी। इसे लेकर सोशल मीडिया में जो प्रचार हुआ वो सेना प्रमुखों को पसंद नहीं आया. उन्होंने इस बात पर न सिर्फ चिंता की बल्कि इसे फेसबुक न्यूज प्रोपेगेंडा तक जारी किया।

जबकि खुद विक्रमादित्य के संचालकों ने बाकायदा सेना को पट्टे पर दी गई सेना के अवशेषों की मांग की थी। उन्हें ही विदेशी सेना के प्रमुख फ़्रांसीसी समाचारों की शुरूआत में प्रशिक्षित किया जाता है। हीं नहीं, सेना प्रमुखों अब शाहबाज सरकार की ओर से पेश न्यूज को प्रतिबंध और लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भावना पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून और नियम लागू करने की अपील की गई है। साथ ही जो न्यूज चैनल उनके खिलाफ प्रचारित करते हैं, उनके एपिसोड एक्शन की मांग की जाती है। इसका साफ पता यह है कि विदेशी सेना प्रमुखों को सोशल मीडिया पर लोगों के बारे में जानकारी दी जा रही है।

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सीरिया गृह युद्ध इजराइल अमेरिका ने 100 से ज्यादा जगहों पर हवाई हमला किया

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सीरिया गृहयुद्ध: मध्य पूर्व राज्य में स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। इजराइल, अमेरिका और तुर्किस्तान जैसे देशों के सैन्य हमलों ने सीरिया में तनाव और बढ़ा दिया है। हाल ही में इजरायली वायु सेना ने सीरिया में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। इन दावों का मकसद सीरियाई सेना के उन आतंकियों को नष्ट करना है, जो बशर अल-असद की सरकार के हमले के बाद चरमपंथियों के हाथों में जा सकते हैं। इसी के बीच अमेरिका और तुर्कियों ने भी अपने-अपने लक्ष्य को साधने के लिए हवाई और ज़मीन पर हमले किए हैं।

सीरियाई ऑब्जर्वेटरी फॉर मैहरन राइट्स के अनुसार, इजरायल ने सीरिया में 100 से अधिक हवाई हमले किए। इन दावों में बर्जा साइंटिफिक रिसर्च सेंटर सहित कई महत्वपूर्ण अध्ययनों का अध्ययन किया गया। इजराइली विदेश मंत्री गिदोन सार ने इस बात की पुष्टि की है कि इस दावे का उद्देश्य रासायनिक पदार्थों और लंबी दूरी के रॉकेटों को नष्ट करना था। इज़रायल को डर है कि ये हथियार ज़ालिम के हाथों में पड़ सकता है। वहीं इजराइल ने हाल ही में गोलान हाइट्स में बॉलर्स जोन पर कब्जा कर लिया है।

अमेरिका का सीरिया में समुद्री हमला
अमेरिका ने मध्य सीरिया में हमलावर संगठन आईएसआईएस के निशाने पर 75 हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के, बी-52 बॉम्बर और एफ-15ई एफ़ियेट्स पासपोर्ट का इस्तेमाल इन दावों को अंजाम देने के लिए किया गया। इस दावे में आईएसआईएस के कई लड़ाकों और उनकी तस्वीरों को नष्ट कर दिया गया है। इसके अलावा तुर्कियों ने अमेरिकी कब्जे वाले कुर्दों पर हमला कर दिया, जिससे उत्तरी सीरियाई शहर मनबिज में तुर्कियों ने कुर्दों पर कब्जा कर लिया। बता दें कि तुर्कियों ने कुर्द कैदियों को बंधक घोषित कर दिया है और उन पर लगातार हमले कर रहे हैं। इन दावों से क्षेत्र में स्थिरता पर गहरा असर पड़ा है।

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बशर अल-असद के बाद सीरिया पर किसका शासन था? सीरियाई प्रधानमंत्री खुला राज

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सीरिया संकट: सीरियाई प्रधानमंत्री मोहम्मद गाजी जलाली ने सोमवार (09 दिसंबर, 2024) को सामान्य स्थिति का आहास देने का प्रयास किया और दावा किया कि सशस्त्र विद्रोहियों के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को रूस में शरण लेने के लिए मजबूर करने के लिए देश छोड़ना पड़ा, “अधिकांश “मंत्रिमंडलीय कैबिनेट दमिश्क स्थित अपने नॉर्वे से काम कर रहे हैं।”

जलाली ने दावा किया कि पिछले दिनों से सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है. उन्होंने स्काई न्यूज़ अरेबिया टीवी से कहा, “हम इस बात पर काम कर रहे हैं कि संक्रमण काल ​​जल्दी और आराम रूप से चले।” उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार विद्रोहियों के साथ “समन्वय” कर रही है और विद्रोही नेता अहमद अल-शरा से अपनी इच्छा व्यक्त कर रही है। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ज्यादातर सरकारी अधिकारी हयात शालिअल अल-शाम (एचटीएस) के नेतृत्व वाले सशस्त्र विद्रोहियों के प्रतिशोध के डर से अपने दायरे से भाग रहे हैं।

‘हम नया सीरिया बनाना चाहते हैं’

काम जारी रखने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं सरकारी अधिकारी नई वास्तविकता के साथ साठगांठ कर रहे हैं। दमिश्क की अदालत में न्यायाधीश खितम हद्दादा ने दावा किया कि न्यायाधीश जल्द से जल्द काम पर आने के लिए तैयार हैं। हद्दाद ने अदालत के बाहर कहा, “हम सभी को अधिकार देना चाहते हैं। हम एक नया सीरिया बनाना चाहते हैं और काम जारी रखना चाहते हैं, लेकिन नए सिरे से।”

सीरिया में सुशान्त रह रहे हालात?

सोमवार की सुबह दमिश्क में शांति रही क्योंकि लोग अपनी नई उलझन में वापस लौटना चाहते थे। अधिकांश कारखाने और सरकारी संस्थान बंद थे क्योंकि लोग सार्वजनिक चौक पर असद के जाने का जश्न मना रहे थे। सार्वजनिक परिवहन बंद रहने के बावजूद नागरिक यातायात फिर से शुरू हो गया। न्यूज एजेंसी एपी ने बताया कि बेकरी और अन्य खाद्य गोदामों के सामने लंबे समय तक सामान की जांच की गई।

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बांग्लादेश ने पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री के बयानों पर जताई नाखुशी, मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की मांग | शेख़ हसीना के मस्जिद से बांग्लादेश सरकार को लगी ‘मिर्ची’! शिकायत कर बोला

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भारत बांग्लादेश संबंध: भारत और बांग्लादेश के बीच अब तक के सबसे बुरे दौर में चल रहे रिश्ते के बीच बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मुलाकात की, जहां उन्होंने भारत से अपदस्थ पूर्व प्रधान मंत्री शेख हसीना की दोस्ती का रिश्ता उठाया और कहा कि इससे तनाव पैदा हो रहा है।

बांग्लादेश की अंतरिम पर्यावरण सरकार की सलाहकार सईदा रिजवाना हसन ने कहा है कि बांग्लादेश ने भारत से बांग्लादेश के एक पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से दी गई डॉक्यूमेंट्री को अपनी “असहजता” लेकर स्पष्ट रूप से कहा है। उन्होंने कहा कि इन संगीत का मकसद तनाव पैदा करना है. ढाका के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस और भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिश्री की बीच हुई बैठक के बाद साजिदा को जानकारी देते हुए कहा, “मैंने इस मुद्दे पर अपना पक्ष साफ तौर पर रखा है।”

‘मीडिया कलाकारों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं’

पर्यावरण सलाहकार ने कहा कि भारत ने बांग्लादेश के साथ मिलकर उसे मजबूत बनाया और अपनी रुचि को दोगुना किया। सहादा ने कहा कि भारतीय अभिजात्य ने साफ किया है कि उनके देश की सरकार के लिए उन मीडिया के विद्वानों या अनुयायियों की जिम्मेदारी नहीं है, जो बांग्लादेश के बारे में गहरी जानकारी फैला रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने बांग्लादेशियों को चमत्कारी रिलीज़ करने की प्रक्रिया में सुधार लाने की अभिव्यक्ति की है।

अगर ताला हमलों को लेकर ये कहा

हाल ही में त्रिपुरा के अगरतला में बांग्लादेश मिशन पर हुए हमलों के मुद्दे पर भारत ने ढाका के विरोध के बाद खेद जताया था। सईदा ने कहा, “अब जब उन्होंने अंतरिम सरकार के साथ मिलकर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया है, तो हमें विश्वास है कि उनकी पहले की पूछताछ अभी भी अधूरी है।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच शेख हसीना की प्रत्यर्पण पर कोई नई चर्चा नहीं हुई है. सोइदा ने कहा कि स्टूडियो स्टूडियो ने स्टॉक मार्केट को मजबूत बनाने की अपनी उत्सुकता पर जोर दिया। बांग्लादेश सरकार ने क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार और बिम्सटेक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। सईदा ने कहा कि भारत ने जुलाई और अगस्त के दौरान बांग्लादेश की घटनाओं पर विशेष नजर रखी और अपनी जागरूकता को उजागर किया।

बांग्लादेश ने शेख़ हसीना के गोदाम को बताया था ‘हेट स्पीच’

बांग्लादेश की एक ट्रिब्यूनल ने गुरुवार (5 दिसंबर) को अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के “हेट स्पीच” के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया था। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीटी) शेख हसीना के खिलाफ “सामुहिक हत्याकांड” में कई अन्य आरोपों की जांच की जा रही है, जो हसीना पर अगस्त के दौरान संघर्ष हुआ था। जिसके बाद उन्हें दूसरे पड़ोसी देश भारत के लिए जबरन ले जाया गया।

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सीरिया गृहयुद्ध दमिश्क पैगंबर मोहम्मद की पत्नी मुअज्जिन बिलाल बीवी ज़ैनब सीमेंट्री

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सीरिया गृह युद्ध: सीरिया में बशर अल असद के हालात के बाद पूरे देश में तेजी से हालात बदल रहे हैं। सीरिया पर जानलेवा हमला, सत्य के संघर्षों की चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस देश का परिचय बस इतना भर नहीं है। सीरिया के अपने ऐतिहासिक स्मारक और धार्मिक महत्व भी प्रसिद्ध हैं।

विद्रोहियों ने रविवार (8 दिसंबर 2024) को सीरिया की राजधानी दमिश्क पर भी कब्जा कर लिया। इसके बाद राष्ट्रपति बशर अल असद को देश में नियुक्त किया गया। राजधानी की छुट्टियों पर लोग जश्न मना रहे हैं। लेकिन हमेशा अशांत रहने वाले दमिश्क और आसपास के क्षेत्र पैगम्बर मोहम्मद और इस्लामिक इतिहास से जुड़े हुए हैं और धार्मिक शिष्यों और इतिहासकारों के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।

अतीत में शिल्प उद्योग का केंद्र दमिश्क था

दमिश्क, जिसे दुनिया का सबसे प्राचीन बसा शहर माना जाता है, लेकिन अब यहां आधुनिक सुविधाएं भी काफी दूर हैं। यह शहर अपनी प्राचीन वास्तुकला और सांस्कृतिक खलिहानों के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां के अवशेषों में सुधार की काफी कमी है। धारणा के अनुसार, तीसरा सहस्राब्दी ईसा पूर्व में स्थापित, दमिश्क अफ्रीका और एशिया के बीच पूर्व और पश्चिम के मुहाने पर अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण एक अहम सांस्कृतिक और वाणिज्यिक केंद्र था।

दमिश्क दुनिया का सबसे पुराना कॉन्सटेंट बस्ती शहरों में से एक माना जाता है। शहर के बाहरी इलाके में तेल रामद में खुदाई से पता चला है कि दमिश्क 8,000 से 10,000 ईसा पूर्व के बीच बसा हुआ था। हालाँकि, अरामियों के आने तक इसे एक महत्वपूर्ण शहर के रूप में दर्ज नहीं किया गया था। मध्यकाल में यह एक समृद्ध शिल्प उद्योग का केंद्र था, जहां शहर के कई इलाके विशेष व्यापार या शिल्प में कुशल थे।

पैगम्बर मोहम्मद से कैसे है रेल्वे?

दमिश्क में पैगंबर मोहम्मद की दो पटनियां और पहले मुअज्जिन बिलाल और अली की बेटी बीबी जैनब की कब्रें हैं। दमिश्क से कुछ किलोमीटर दूर स्थित ज़ैनबिया नामक गोदाम में हजरत अली की बेटी बीबी ज़ैनब का मकबरा है। यह स्थान शिया समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र है और यहां बड़ी संख्या में जायरीन (तीर्थयात्री) आते हैं। यह स्थल धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता मध्य-पूर्व का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।

दमिश्क का प्राचीन बाब सागीर कब्रिस्तान इस्लामिक इतिहास में एक अलग महत्वपूर्ण महत्व रखता है। यहां पैगंबर मोहम्मद की पत्नी उम्म-उल-मोमिनीन उम्मे सलमा और उम्मे हबीबा की कब्रें हैं। इसके साथ ही, इस्लाम के पहले मुअज्जिन हजरत बिलाल और पैगम्बर के कई अन्य दोस्त और बंगले भी यहां दफन हैं। इनमें ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का महत्व केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि ये इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान इतिहास का मूल हिस्सा हैं।

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सीरिया की मानव वधशाला जेलों में अब खाली परिवार कैदियों की तलाश कर रहे हैं

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सीरिया जेल के कैदियों को रिहा कर दिया गया: बशर अल-असद की सत्ता गिरकर, सीरिया का शासक, इस्लामिक विद्रोहियों ने अपने हाथों में रखा है। विद्रोहियों ने बशर शासन में सीरिया की राजधानी दमिश्क के निकट स्थित सादान्या जेल के दरवाजे खोले। इस जेल में हजारों की संख्या में बंद कैदी आजाद हो गये। सीरिया की जेलों से विद्रोहियों की रिहाई के बाद उनके परिवार में आशा की नई उम्मीद जगी है

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार (8 दिसंबर) को दमिश्क के निकट स्थित इस फ़्लिटी में लोगों ने अपने परिवार वालों को ढूढ़ने के किनारे देखा, जहाँ अक्सर पुरानी छाया रहती थी। असद शासन के ताले के बाद जेल के सुरक्षा गार्डों ने अपने सामान को खाली कर दिया और यहां तक ​​कि जेल के दरवाजे को भी खुला छोड़ दिया गया।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें और वीडियो

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही जेल में बंद जेलों के परिवारवालों को देखा जा सकता है। लोग अपने लापता परिवारजनों से मुलाकात के लिए पूछताछ कर रहे हैं। रविवार (8 दिसंबर) को विद्रोहियों के दमिश्क पर व्यवसाय के बाद यूएसएसआर की जेलों में स्थिर सुरक्षा कर्मियों ने अपने खाली कर दिया। सीरिया के लोगों को अब 1 लाख लापता लोगों के बारे में जानकारी का इंतजार है।

इस दौरान सीरिया में टेलीविज़न ब्रॉडकास्ट ने सरकार के गुप्त बंदी चित्रों को भी प्रदर्शित किया। इन साज़िशों में जेल में बंद लोगों को बिना जूतों के और नकली अंदाज़े दिए जा सकते हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार सादाया जेल में कभी-कभी एक बार 20 हजार की कैद की सजा दी गई थी। इस जेल में बंद इंसानों का कसाई खाना भी कहा जाता है. पुराने कैदियों ने बताया कि इस जेल में कई कैदियों के बारे में भी बताया गया है।

एचटीएस ने सादाया जेल से मुक्ति का नारा बुलंद किया

हयात कोचिंग अल-एचटीएस (एचटीएस) ने शनिवार (7 दिसंबर) को होम्स जनरल जेल से 3500 की रिहाई की घोषणा की। वहीं रविवार (8 दिसंबर) को उन्होंने सादाया जेल के प्रक्षेपण के अंत की भी घोषणा की, जिसे असद शासन के निर्दयता के लिए जाना जाता था।

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कैसे होगा पृथ्वी पर जीवन का अंत, जानिए वो पांच तरीके जिनसे हो सकता है दुनिया का अंत

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दुनिया का अंत : सदियों से चली आ रही कई कहानियों में पृथ्वी का कब अंत होगा इन अटकलों का जन्म हुआ है। पृथ्वी के निर्माण और अंत को लेकर लगातार कई विनाश सामने आये। पृथ्वी कैसे ख़त्म होगी, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। हालाँकि इस बारे में कई तरह के सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं, लेकिन पृथ्वी का अंत हो सकता है। प्रत्येक सिद्धांत में एक अलग नज़रिया है कि ये सब कैसे ख़त्म होगा। ये सिद्धांत, ब्रह्मांडीय घटनाएं से लेकर विनाश के लिए मानव निर्मित वस्तुओं तक अलग-अलग हैं। आइए आपको उन सिद्धांतों के बारे में बताते हैं जिनके बारे में चीन दुनिया के खात्मे के बारे में बताता है।

क्षुद्रग्रहों के कारण विनाशकारी विनाश

पृथ्वी के अंत के बारे में सबसे लोकप्रिय सिद्धांतों में से एक है पृथ्वी पर क्षुद्रग्रह का सिद्धांत। यह सिद्धांत इतिहास को लेकर प्रमाणित है, क्योंकि माना जाता है कि करीब 65 करोड़ साल पहले पृथ्वी से एक विशाल क्षुद्रग्रह टकराव के कारण स्थापत्य स्थापित हो गए थे। यदि ऐसी घटना आज है, तो यह अत्यंत विनाशकारी है। क्षुद्रग्रह के टकराव से क्षुद्रग्रही ऊर्जा से वैश्विक विनाश, आग और सुनामी जैसी आपदाएँ भी आती हैं।

सुपर आर्टिस्ट विस्फोट

सुपर स्टार ब्लास्ट एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है जो दुनिया के खत्म होने का कारण बन सकती है। सुपर विस्फोट के बाद वातावरण में भारी मात्रा में मैग्मा, राख और गैसें शामिल हो जाती हैं। अंतिम परमाणु सुपर स्टार का विस्फोट लगभग 74,000 वर्ष पहले इंडोनेशिया के टोबा काल्डेरा में हुआ था। माना जाता है कि एक महत्वपूर्ण वैश्विक शीतलन (ग्लोबल कूलिंग) घटना का कारण बना। आज, यदि कोई सुपर स्टार नहीं फटा है, तो यह उसी “ज्वालामुखी ज्वालामुखी” (ज्वालामुखीय शीतकालीन) को जन्म दे सकता है। इससे कृषि और खाद्य आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा और बड़े पैमाने पर भुखमरी और सामाजिक गिरावट भी हो सकती है।

जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन सहित वनों की कटाई और वनों की कटाई के कारण जलवायु परिवर्तन से पृथ्वी पर जीवन का अंत सबसे बड़ा खतरा है। जेम्स हैनसेन और माइकल ई. इस क्षेत्र में प्रमुख वैज्ञानिक वैज्ञानिकों ने शोध किया है। जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है बर्फ की चोटियाँ और कणों का मिश्रण हो रहा है। इससे समुद्र का स्तर बढ़ रहा है और तेजी से खराब मौसम का कारण बन रहा है। इसलिए यदि इसे जारी नहीं किया गया, तो जलवायु से ग्रह के कुछ विचारधारा में जीवित प्राणियों का अस्तित्व मुश्किल होगा।

विश्व में परमाणु युद्ध

दुनिया के सबसे अंत तक के सबसे वैज्ञानिक ग्रहों में से एक बड़े पैमाने पर परमाणु युद्ध की संभावना है। कई परमाणुओं से जुड़े विस्फोटों से न केवल तात्कालिक विनाश और जीवन की हानि का कारण बनता है, बल्कि दीर्घकाल तक पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचता है।

कारखाने की क्षमता में विस्तार

आज के समय में दुनिया के अंत में आधुनिक और काफी विवादास्पद सिद्धांत दिया गया है। यद्यपि यह मानव जीवन के कई सिद्धांतों में क्रांति लेकर आया है, लेकिन कुछ विशेषज्ञों ने दावा किया है कि जब एक सुपर वैज्ञानिक मशीन बनाई जाती है, तो उसका खतरा मानव बुद्धि से दूर हो जाता है और यदि एआई अपने नियंत्रण से बाहर हो जाता है या तो यह होता है खतरा पैदा होने का अनुभव हो सकता है।

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असद शासन के पतन के बाद सीरिया में अमेरिकी वायु सेना के बी52 बमवर्षक विमानों ने आईएसआईएस शिविर को निशाना बनाकर हवाई हमला किया

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सीरिया पर अमेरिकी हवाई हमला: संयुक्त राज्य अमेरिका ने सीरिया में हवाई हमले किये हैं। जिस दिन सीरिया में अमेरिका ने भयंकर हवाई हमला किया, उसी दिन इस्लामिक विद्रोहियों ने बशर अल-असद के शासन का तख्तापलट कर राजधानी दमिश्क को अपने व्यवसाय में ले लिया। रविवार (8 दिसंबर) को बशर अल-असद ने अपने परिवार के साथ देश छोड़ दिया और भागकर रूस की राजधानी मॉस्को पहुंच गए। दमिश्क पर विद्रोहियों का कब्ज़ा होने के बाद सीरिया में पाँच दशक के बाद असद परिवार का शासन ख़त्म हो गया। इस घटना के बाद अमेरिकी सेना ने बयान जारी कर कहा कि उसने मध्य सीरिया में 75 हवाई हमले किए हैं।

आईएसआईएस के सिद्धांत को बनाया गया

अमेरिकी सेना ने अपने भीषण हवाई हमले में हमलावर ग्रुप आईएसआईएस (आईएसआईएस) की पहचान को अपना ढांचा बनाया है। सीरिया में ISIS का गढ़ हुआ था. बता दें कि सीरिया में मुख्य विद्रोही समूह हयात शोरूम अल-शाम (एचटीएस) का प्रमुख अबू मोहम्मद अल-जोलानी भी आईएसआईएस से टकराया था। हालाँकि, बाद में एचटीएस ने अपने आप को आईएसआईएस से अलग कर लिया था और खुद भी इसे वापस लेने का अभियान चलाया था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि 8 दिसंबर (रविवार) को मध्य सीरिया में आईएसआईएस के शियास और परमाणु बम विस्फोटों पर बमबारी की गई। बयान में कहा गया है कि अमेरिका ने यह हमला उस मिशन के एक हिस्से के रूप में किया था ताकि हमलावर समूह को बाहरी ऑपरेशन करने से रोका जा सके।

बी-52 बॉम्बर ने आईएसआईएस मचाई तबाही के सबूत

उल्लेखनीय है कि आईएसआईएस के हमले में अमेरिकी वायु सेना के बी-52, एफ-15 और ए-10 समेत कई कार्टूनों का इस्तेमाल किया गया है। रविवार को सीरिया की स्थिति खराब होने पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने चेतावनी दी कि असद शासन का गिरना मध्य पूर्व के लिए खतरे और प्रतिष्ठा का क्षण है। बिडेन ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर आईएसआईएस सीरिया की स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश करेगा। तो हम ऐसा नहीं होंगे।’

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सीरिया गृहयुद्ध में बशर अल-असद भागे, UNSC आपात बैठक करेगा, असद को मास्को में ‘शरण’ दी गई, हयात तहरीर अल-शाम HTS

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UNSC ने सीरिया पर आपात बैठक की: सीरिया की अंतिम घटनाओं को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आज (9 दिसंबर 2024) एक असेंबली यूनिट का पता लगाया है। यह बैठक आज कुछ देर बाद शुरू होगी. बता दें कि सीरियाई विद्रोहियों ने रविवार (8 दिसंबर) को सीरिया की राजधानी दमिश्क पर कब्ज़ा कर लिया। इसी के साथ यहां असद परिवार का 50 साल का लंबा शासन समाप्त हो गया और राष्ट्रपति के रूप में बशर अल-असद का 24 साल का लंबा शासन खत्म हो गया।

सीरिया के सबसे शक्तिशाली विद्रोही समूह हयात शामियाल-शाम (एचटीएस) के नेतृत्व में विद्रोही रविवार को राजधानी शहर में घुसे, तो सीरियाई राष्ट्रपति को देश से किसी अज्ञात स्थान पर जाने के लिए मजबूर किया गया। इस बीच, सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद गाजी अल-जलाली ने विद्रोहियों के साथ मिलकर सहमति जताई और कहा कि वे मलेशियाई सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। इस अवलोकन के बाद, एचटीएस प्रमुख अबू मोहम्मद अल-जुलानी ने अपने सैनिकों को सार्वजनिक संविधानों से दूर रहने का आदेश दिया, जब तक कि प्रधानमंत्री की ओर से आधिकारिक स्थानांतरण पूरा नहीं हो गया।

सीरिया गृह युद्ध से संबंधित बड़ा अपडेट

1. 2011 में सीरिया में गृहयुद्ध की शुरुआत हुई। आख़िरकार लंबे संघर्ष के बाद बशर अल-असद की सरकार सफलतापूर्वक ख़त्म हो गई। रूस और ईरान के समर्थन के कारण बशर अल असद की सरकार बनी रही। 27 नवंबर को एचटीएस ने न्यू सुपरमार्केट से युद्ध शुरू किया।

2. लंबे समय तक राजधानी शहर पर अपनी नजर बनाए रखने के बाद, विद्रोहियों ने पहले 24 घंटे में चार प्रमुख शहरों – दारा, कुनेत्रा, सुवेदा और होम्स पर कब्ज़ा कर लिया। फिर अंतिम बड़ा कदम उठाते हुए, रेस्तरां सेना ने दमिश्क में प्रवेश किया और शहर में कब्ज़ा कर लिया।

3. विद्रोहियों ने 8 दिसम्बर को राजधानी पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद सीरियाई राष्ट्रपति बशर को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया गया।

4. असद के बाहरी इलाके में सीरियाई लोगों ने अपने दमनकारी शासन के अंत का जश्न मनाया। एचटीएस प्रमुख अल-जुलानी ने दमिश्क में कहा, “मेरे सैनिक, यह ऐतिहासिक जीत है। सीरिया हमारा है, असद परिवार का नहीं।”

5. ब्रिटेन स्थित युद्ध निगरानी संस्था, सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर होमॉन राइट्स ने बताया कि 27 नवंबर को विद्रोही हमलों की शुरुआत से 8 दिसंबर तक इस युद्ध में 910 लोगों की मौत हुई, मरने वालों में 138 नागरिक, 380 सीरियाई सैनिक और सहयोगी वामपंथी और 392 थे। विद्रोही शामिल हैं.

6. कई देशों ने सीरिया में नियंत्रण में बदलाव का स्वागत किया है। जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ ने कहा कि असद के शासन का अंत अच्छी खबर है। अब जो दावा करता है वह यह है कि सीरिया में कानून और व्यवस्था शीघ्र बहाल हो जाए।

7. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारर ने भी असद के “बार्बर शासन” के पतन का स्वागत किया, उन्होंने कहा कि यूके के सभी सितारों से नागरिकों और अल्पसंख्यकों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करने का दावा है कि आने वाले फ़्रांसीसी और दिनों में सबसे साहसी लोगों तक आवश्यक सहायता पहुंच सके।

8. संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रपति-चुनाव डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि अमेरिका को सीरिया में युद्ध से कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए, उन्होंने कहा कि “यह हमारी लड़ाई नहीं है”। हालाँकि, राष्ट्रपति जो एंटोनियो ने असद के पतन के निदेशक की और इसे न्याय का मूल कार्य बताया। उन्होंने कहा कि यह सीरियाई लोगों के लिए अपने राष्ट्र के पुनर्निर्माण का एक ऐतिहासिक अवसर था।

9. असद के पतन पर जश्न मनाने के दौरान रूस से मिली रिपोर्टों में कहा गया कि मॉस्को ने बशर अल-असद और उनके परिवार को शरण दी है। TASS समाचार एजेंसी ने क्रेमलिन के एक सूत्र का उद्धरण देते हुए बताया कि यह निर्णय मानवतावाद से प्रेरित है।

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इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताज़ानी ने कहा कि सीरिया विद्रोहियों ने दमिश्क में इतालवी राजदूत के आवास से कारें चुरा लीं

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सीरिया गृहयुद्ध: सीरिया में माचे घमासन और तख्तापलट के बीच विद्रोही दमिश्क में इटली के राजदूत के आवास में जा घुसे। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने कहा कि एक आर्म्ड ग्रुप दमिश्क में इतालवी राजदूत के आवास के बंधकों और तीन आतंकवादियों की चोरी में शामिल हो गया। हालाँकि विद्रोहियों ने राजदूत और काराबिनियरी (दूतावास पुलिस) को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। ताजानी ने सीरिया में सत्य के अवैध परिवहन की अपील की है।

इटली के विदेश मंत्री कार्यालय ने सीरिया में अपने 300 नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की राह रखी है। ताजानी ने कहा कि उनकी सरकार देश छोड़ने में आम जनता की मदद के लिए तैयार है. सीरिया की स्थिति पर एक बैठक के बाद तजानी ने कहा, “आज सुबह, एक विद्रोही समूह इटली के राजदूतों के आवास में घुस गया। उन्होंने तीन यात्राएं निकालीं।”

‘सीरिया में स्थिति पर पूरी तरह से नियंत्रण’

उन्होंने बताया कि विद्रोही समूह असद के सैनिकों की तलाश कर रहा था, लेकिन उन्होंने राजदूत या वहां के इस्लामिक पुलिस को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। तजानी ने इस बात की पुष्टि की है कि राजदूत “सुरक्षित” हैं और किसी अन्य स्थान से रजिस्ट्री फॉर्म में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “वहां की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। सीरिया में बहुत खुशी है, लेकिन हवा में शूटिंग करके खुशी इकट्ठी करना उलझाने को तैयार है।” दिन की शुरुआत में इस्लामवादी नेतृत्व वाले विद्रोहियों ने घोषणा की कि वे राष्ट्रपति बशर अल-असद की सेना के खिलाफ हमला बोलकर दमिश्क में प्रवेश कर चुके हैं।

इराकी दूतावास को खाली कर दिया गया
दमिश्क में घमासन के बाद इराकी दूतावास को खाली कराया गया है। इराक ने सीरिया की सीमा पर उच्च संभावना का एड भंडार जारी किया है और वहां सैनिकों की एस्टीआ को बढ़ाया गया है। भारी संख्या में सीरियाई सेना के जवानों ने इराक में शरण ले रखी है।

भारत ने भी एड्री की रिलीज जारी की
शनिवार को विदेश मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को सीरिया की यात्रा नकरने की सलाह दी थी। एड इश्यूरी में कहा गया है कि सीरिया में रहने वाले भारतीय दमिश्क स्थित भारतीय दूतावास के आपातकालीन नंबर नंबर +963 993385973 और ईमेल hoc.damascus@mea.gov.in पर संपर्क में रहें।

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