मुहम्मद यूनुस के मंत्री महफूज आलम का अजीबोगरीब दावा, कहा- बंगाल, असम और त्रिपुरा बांग्लादेश का हिस्सा, सोशल मीडिया पर ट्रोल

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महफूज आलम सोशल मीडिया पर ट्रोल: बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट होने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में भारत विरोधी कर्मों को अंजाम दिया जा रहा है। लगातार भारतविरोधी बयानबाजी हो रही है. ताज़ा घटना में यूनुस के एक और मंत्री ने असली पुलाव पकाए हैं। इतना ही नहीं भारत पर कब्ज़ा करने की खतरनाक भी विनाशलीला।

यूनुस सरकार के सलाहकार महफूज आलम ने सोशल मीडिया पर एक नक्शा पेश किया है, जिसमें बंगाल, असम और त्रिपुरा से लेकर बांग्लादेश तक का हिस्सा बताया गया है। इस सलाहकार के माध्यम से इस पोस्ट के माध्यम से विजय दिवस के बारे में इतना ही नहीं बताया गया कि भारत के सिद्धांतों पर कब्ज़ा करने की खतरनाक विनाशलीला की गई है। फिर क्या था भारतीय उद्यमियों ने जोरदार बखिया उधेड़ी और औकात बताया। इसके बाद पोस्ट ही डिलीट की गई।

पूरा मामला क्या है?

असल में, 16 दिसंबर को भारत विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान को दो देशों में विभाजित किया था और बांग्लादेश का जन्म हुआ था। सोमवार (16 दिसंबर) को कट्टरपंथियों महफूज आलम ने फेसबुक पर एक पोस्ट के माध्यम से उत्तर भारत के लोगों के बीच सांस्कृतिक पंथों के आधार पर जन्म लेने की कोशिश की। बाद में उन्होंने पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम के बांग्लादेश के हिस्सों में एक असंवैधानिक नक्शा जारी किया। हालाँकि, पोस्ट के व्यापक विरोध के बाद इसे हटा दिया गया।

महफूज़ आलम ने क्या पोस्ट किया था?

अपनी पोस्ट में महफ़ूज़ आलम ने लिखा कि भारत और बांग्लादेश की संस्कृतियाँ, धार्मिक देवियाँ एक जैसी हैं। उन्होंने आगे दावा किया कि पूर्वी पाकिस्तान में उच्च जाति के वोट और “हिंदू चरमपंथियों” का “बंगाल विरोधी नारा” का परिणाम था। आलम ने घोषणा की, “भारत ने नियंत्रण और उपनिवेशवाद की योजना बनाई है।” भारत से सच्ची आज़ादी सुनिश्चित करने के लिए, हमें 1975 और 2024 को डबल करने की ज़रूरत है।

बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान और उनके परिवार के 18 सदस्यों की 1975 में हत्या कर दी गई थी। 2024 में उनकी बेटी शेख़ हसीना को आलोकतांत्रिक पद से प्रधानमंत्री पद से हटा दिया गया। भारत को विभाजित करने की कोशिश की जा रही है। आलम ने कहा, ”इन घटनाओं में 50 साल का अंतर है, लेकिन कुछ भी नहीं बदला है। हम भूगोल और भूगोल में बदल गए हैं। हमें अब एक नए भूगोल और व्यवस्था की जरूरत है।” “

आलम ने तर्क दिया कि एक “छोटा, सीमित, भूमि से छीन लिया गया” बांग्लादेश कभी भी सच्ची स्वतंत्रता प्राप्त नहीं कर सका और अपने अवशेषों से मुक्त होने की आवश्यकता जोर से दी गई। उन्होंने लिखा, “आज, बांग्लादेश 2024 के आतंकियों के बलिदान के माध्यम से मुक्ति की मांग कर रहा है और यह सिर्फ शुरुआत है, अंत नहीं। तख्तापलट करने वाले नेता तत्व हैं कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।”

आलम ने आगे कहा, “इस लड़ाई को समाप्त करने के लिए अभी भी अपने जीवन का बलिदान देने के लिए तैयार रहें। हमारी शहादत को अंतिम विजय और मुक्ति की गति प्रदान करें! बांग्लादेश एक प्रारंभिक बिंदु है, न कि अंतिम बिंदु।” आलम ने अपने फेसबुक एकाउंट पर एक नक्शा भी साझा किया था जिसमें बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा तक का नक्शा दिखाया गया था। हालाँकि, काफ़ी रेस्टॉरेंट मचने के बाद उनके स्टोअम पोस्ट को हटा दिया गया।

इंडियन यूर्जस ने याद दिलाया औकात

महफूज आलम ने पोस्ट तो डिलीट कर दी लेकिन भारतीय उपभोक्ता ने उसे पीछे छोड़ दिया। उधार लें कि कहां भाग गए, उत्तर तो दे दें। इंद्रजीत नाम के एक सम्राट ने लिखा था कि भारत को अब सुनिश्चित करना चाहिए कि महफूज आलम के इस काम के बाद बांग्लादेश में वो महफूज फील न करे। इसके अलावा एक अन्य तानाशाह ने लिखा कि ये भारत की संप्रभुता पर हमला है, भारत पर सैन्य और सैन्य दोनों तरह से जबरन हमला करना चाहिए और महफूज आलम को गिरफ्तार करने के लिए बांग्लादेश पर दवाब बनाना चाहिए।

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खतरों के बारे में सन सुपरफ्लेयर के नए अध्ययन से सैटेलाइट जीपीएस पावर ग्रिड को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है

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सूर्य की सुपर फ्लेयर्स: सूर्य की रोशनी से पृथ्वी चमकती है। धरती पर गर्मी का एहसास होता है। साथ ही धरती पर कई और तरह की ऊर्जा का स्रोत सूर्य होता है। लेकिन सूर्य से अनपेक्षित रूप से बड़ी ऊर्जा के खतरे भी खराब होते हैं, जो पृथ्वी के लिए अत्यंत गंभीर समस्या बन सकते हैं। उन्हें सौर सुपरफ्लेयर कहा जाता है.

बेटियाँ के वैज्ञानिक धीरे-धीरे इसे लेकर चिंतित हो रहे हैं। क्योंकि पहले ऐसा लगता था कि सूर्य में ये घटना लगभग एक हजार साल में एक बार होती है। लेकिन हाल ही में पता चला है कि अंतरिक्ष में ये घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। सूर्य के सुपरफ्लेयर हमारे लिए चिंता का विषय हैं क्योंकि हम सैटेलाइट, सोलर और पावर टेलीकॉम जैसे बहुत से साड़ी तकनीशियनों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन एक बड़ी सौर बैटरी इन सभी को एक बार में स्थापित कर सकती है। अब सवाल यह है कि हम सौर्य स्कूटर से होने वाली समस्याओं के लिए क्या तैयार हैं?

ऊर्जा के विस्फोट हैं सौर ऊर्जा

सौर ऊर्जा के विस्फोटक, जिसमें सूर्य खुले अंतरिक्ष में छोड़ा जाता है। पृथ्वी से सूर्य की छोटी किरणें सरलता से उत्पन्न हो सकती हैं। जिसमें रेडियो सिग्नल या उपकरण सेवा में गड़बड़ी हो सकती है। हालाँकि, एक सौर सुपरफ्लेयर बेहद शक्तिशाली होता है। नियमित फ्लेयर की तुलना में इसमें लाखों गुना अधिक ऊर्जा उत्सर्जित होती है। बता दें कि ये विस्फोट की गति से चल रहे हैं, जिससे अंतरिक्ष में पृथ्वी तक पहुंचने में बस चंद मिनट का ही समय लग सकता है।

धरती पर सौर सुपरफ्लेयर से आ सकती हैं कैसी समस्याएं

सूर्य की छोटी सौर ऊर्जा पृथ्वी पर कई आक्षेप उत्पन्न होती है। लेकिन एक सुपरफ्लेयर बेहद विनाशकारी हो सकता है। जो अंतरिक्ष में सेटलाइटों को भी स्थिर किया जा सकता है, बिजली के उपग्रहों को बंद किया जा सकता है। साथ ही शतरंज के संचार माध्यमों से भी बुरा हो सकता है और यह समस्या कई दिन, सप्ताह या महीने तक भी रह सकती है। किन लोगों के जीवन में व्यक्तित्व का जन्म हो सकता है।

नए अध्ययन में हुआ खुलासा

डॉ. वैलेरी वसीलीव ने दिसंबर 2024 में साइंस में एक दोस्ती अध्ययन प्रकाशित किया जिसमें उन्होंने 50 हजार से अधिक सितारों के डेटा की जांच की। उन निश्चय को करीब 100 साल में एक बार सुपरफ्लेयर का अनुभव होता है। इस नई खोज ने गैजेट के लिए चिंता पैदा कर दी है।

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रूस यूक्रेन युद्ध में रूस के रासायनिक हथियार प्रभाग के प्रमुख इगोर किरिलोव एक हमले में मारे गए जिसकी जिम्मेदारी यूक्रेन ने ली थी

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रूस यूक्रेन युद्ध नवीनतम समाचार: रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में समय के साथ तनाव बढ़ रहा है। पिछले कुछ महीनों से रूस की तरफ से यूक्रेन पर आतंकवादी हमले की यादें ताजा हो रही हैं। इन सबके बीच रूस के तिब्बती प्रोग्रामर प्रमुख इगोर की हत्या के बाद यह खतरनाक और बड़ा दिख रहा है। हालाँकि, रूस ने परमाणु हमलों को लेकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन चर्चा है कि रूस अब जापान पर बड़ा हमला कर सकता है।

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के फीचर वेपन डिवीजन के प्रमुख इगोर किरिलोव की मंगलवार (17 दिसंबर 2024) को मॉस्को में एक हमले के बाद हत्या कर दी गई। यूक्रेन ने अपनी जिम्मेदारी ली है. यूक्रेन पर क्रेमलिन पर आक्रमण के बाद यह किसी हाई प्रोफाइल रूसी सैन्य अधिकारी की हत्या का सबसे बड़ा मामला है।

अपार्टमेंट बिल्डिंग के बाहरी हिस्से में हुआ ब्लास्ट

रिपोर्ट के अनुसार, इगोर किरिलोव और उनके सहायक की मौत तब हुई जब मंगलवार को दोनों दक्षिण-पूर्व मॉस्को में एक अपार्टमेंट बिल्डिंग के पास से गुजर रहे थे, तभी इलेक्ट्रिक इलेक्ट्रिकल में छिपे हुए विस्फोटक उपकरणों में विस्फोट हो गया। रूसी जांच एजेंसी ने कहा है कि यह एक अपार्टमेंट बिल्डिंग के बाहर विस्फोट हुआ है।

रूस ने कहा- निश्चित रूप से इसे बदला गया है

वहीं इगोर की हत्या के बाद रूसी सैन्य अधिकारियों की गोपनीयता की समीक्षा के साथ ही बदले की भावना से उच्च संवैधानिक बैठकों का दौर शुरू हो गया है। रूस के पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि अब जापान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को यादगार बनाया जाएगा। इन हालातों को देखते हुए प्रॉस्पेक्ट प्लांट जा रहे हैं कि रूस कभी भी जापानी जमीन पर हमला कर सकता है।

रूस दे रहा परमाणु हमलों के संकेत

यूक्रेन में परमाणु हमलों का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ रहा है क्योंकि रूस ने मोबाइल बम शेल्टर बनाना शुरू कर दिया है। ये परमाणु विस्फोट से उत्पन्न तरंगों और विकिरण सहित विभिन्न प्रकार के संकेतों से सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। मिनिस्ट्री रिसर्च इंस्टीट्यूट ने कहा, ‘केयूबी-एम’ शेल्टर प्राकृतिक और मानव निर्मित मॉडल से 48 घंटे तक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

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भारत चीन सीमा विवाद एनएसए अजीत डोभाल बीजिंग चीन की पहली प्रतिक्रिया

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एनएसए अजीत डोभाल का चीन दौरा: भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद जारी है। इस तरह से पूरी तरह से खत्म करने के लिए दोनों देशों ने पहल की है, जिसके तहत बीजिंग में एक अहम बैठक आयोजित की जा रही है। ये समूह काफी मायनों में खास है, क्योंकि समुद्र में पहली बार पड़ोसी देश के समूह अपने विशेष प्रतिनिधि के साथ बैठक में भाग लेने वाले हैं। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (चीनी) अजीत डोभालहोगे, जो अपनी टीम के साथ बीजिंग रीच पर पहुंचे हैं।

बैठक का मुख्य रूप से सीमा विवाद ही होगा। इस पर डेमचोक और देपसांग क्षेत्र में सेना के पीछे उद्योगों और पेट्रोलिंग से जुड़े लोगों की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर उल्लंघन और सीमा पर कोऑर्डिनेटर पेट्रोलिंग पर चर्चा की जाएगी। भारत का जोर अप्रैल 2020 के स्टेटस को बहाल करना होगा।

अजीत डोभाल के दौरे पर चीन का रुख
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के चीन दौरे के बीच पड़ोसी मुज़फ़्फ़र ने भी प्रतिक्रिया दी है। इस पर चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से बयान आया है. उन्होंने कहा कि जल्द-से-जल्द गैबल्स की दिशा में मिलकर सामान बनाना है। चीन ने एक दूसरे के हितों का सम्मान जोर से दिया। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि हम भारत के साथ मिलकर काम करने की तैयारी कर रहे हैं।

सीमा विवाद में भारत का सख्त रुख
पिछले चार वर्षों के दौरान भारत और चीन के बीच सेना कमांडरों की 21 दौर की बैठकों के अलावा कई चर्चाएँ हुई हैं। भारत ने हर स्तर पर अपनी स्थिति को स्पष्ट और मजबूत बनाये रखा है। इस दौरान भारत ने चीन के किसी भी दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया और अपने सैन्य संस्थान और थोक व्यापारी का निर्माण किया। इसके अलावा जी20, ब्रिक्स, एससीओ और ऑटोमोबाइल जैसे प्लेटफॉर्मों ने भारत की सबसे बड़ी भूमिका में चीन पर दबाव बढ़ाने का काम किया।

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अमेरिकी कांग्रेस की हिंदू सदस्य तुलसी गबार्ड ने न्यूयॉर्क अमेरिका में बाप्स अक्षरधाम मंदिर का दौरा किया | अमेरिका का पहला हिंदू न्यूक्लीयन तुलसी गबार्ड सुपरिणाम अक्षरधाम मंदिर, बोलीं

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अक्षरधाम मंदिर में तुलसी गबार्ड: अमेरिका के सबसे पहले हिंदू मुस्लिम तुलसी गबार्ड (तुलसी गबार्ड) ने अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में स्थित अक्षरधाम मंदिर का दौरा किया। तुलसी ख़ुद को प्राउड हिंदू कहानियाँ कहते हैं। अक्षरधाम मंदिर में अपने टूर को लेकर तुलसी गबार्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट भी शेयर किया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए तुलसी गबार्ड ने लिखा, ‘बीती रात अक्षरधाम मंदिर की स्थापना मुझे बहुत अच्छी लगी। मैं पूरे देश से आया हूं हिंदू नेताओ, रॉबिन्सविले मेयर और काउंसिल के सदस्यों के इस दौरे में प्रवेश के लिए आपका स्वागत है।’ इस दौरान अक्षरधाम मंदिर में विश्व के हिंदू धर्मगुरु और भक्त के लिए विशेष प्रार्थना की गई।

वास्तविक प्रशासन में राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी के निदेशक शामिल तुलसी

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड खैल ने तुलसी गबार्ड को अपने अगले पद में राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी का निदेशक नियुक्त किया है। इससे पहले तुलसी गबार्ड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में तुलसी गबार्ड हिंदू धर्म के पारंपरिक परिधान सूट और सलवार पहने देखा गया था। वहीं, वह पूरी तरह से भक्ति में डूबकर हरे कृष्ण..हरे राम.. का नारा लगाते हुए उग्र हिंदू धर्म का प्रचार कर रहे हैं।

पहले राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन, फिर से किया समर्थन

उल्लेखनीय है कि तुलसी गबार्ड ने साल 2022 में डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश की थी। लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया और 2022 में अपनी डेमोक्रेटिक पार्टी भी छोड़ दी थी.

डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ने के बाद तुलसी गबार्ड ने रिपब्लिकन पार्टी का हाथ थाम लिया और राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड यूक्रेन के फ्रैंक का समर्थन किया। तुलसी खुद को प्राउड हिंदू कहते हैं और अक्सर पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ आतंकवादियों की निंदा करते हैं।

हालाँकि तुलसी गबार्ड अब गुप्तचर मामलों पर व्हाइट हाउस के सलाहकार भी चिंतित हैं और अमेरिका के 18 जासूस एसेनियो का काम देखेंगे।

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पाकिस्तान पीएफएक्स फाइटर प्रोग्राम स्वदेशी फाइटर जेट विकसित कर रहा है लेकिन यह चीनी जेएफ17 फाइटर जेट की नकल दिखाता है

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पाकिस्तान लड़ाकू कार्यक्रम: चीन और तुर्की जैसे देशों पर अपने रक्षा सामुद्रिक देशों के लिए अवलंबित रहने वाला पाकिस्तान अब आत्मनिर्भर बनना चाहता है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए अब पाकिस्तान अपने रॉकेट के लिए स्वदेशी फाइटर जेट विकसित करने का प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान का नया एशियन एयरक्राफ्ट सिंगल इंजन पर होगा, जिसे 4.5 जेनरेशन के फाइटर प्रोग्राम के तौर पर विकसित करने की योजना है। लेकिन पाकिस्तान की इस योजना में दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान के नए फाइटर प्रोग्राम का डिजाइन चीन के लिए तय JF-17 लड़ाकू विमान से विफल हो गया है।

IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान अपने नए लड़ाकू विमान में रेड्यूस्ड रेडियो क्रॉस सेक्शन फीचर, इंफ्रारेड इलेक्ट्रॉनिक्स और ट्रैक (IRST) सिस्टम और एक्टिव इलेक्ट्रॉनिक स्कैंड एरे इलेक्ट्रॉनिक्स (AESA) जैसे अपडेट से लैस करने वाला है।

चीन पर स्टार्टअप कम करने की है कोशिश!

प्रारंभिक रिपोर्ट में संकेत दिया गया था कि पीएफएक्स एक डबल इंजन वाला लड़ाकू विमान होगा। हालाँकि नई रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का फोकस ऐसे फाइटर प्रोग्राम पर है जो पूरी तरह से स्वदेशी स्तर पर विकसित हो। इसके अलावा इस प्रोग्राम में चीनी तकनीक पर अधिक क्वांटम से भागने की कोशिश भी की गई है। बता दें कि पाकिस्तान के हथियार कार्यक्रम में चीन की प्रतिकृति तेजी से बढ़ी है, लेकिन पाकिस्तान अब इसे कम करना चाहता है।

भारत के आत्मनिर्भर बनने की है पहचान

पाकिस्तान का यह स्वेडशी फाइटर प्रोग्राम कहता है कि पाकिस्तान की हिस्सेदारी अब भारत की तरह आत्मनिर्भर रक्षा उत्पाद स्थापित करने की है। उल्लेखनीय है कि भारत ने आत्मनिर्भर स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान 2035 के बाद फिर से दो इंजन वाले फाइटर जेट के बारे में विचार कर सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान के भविष्य में पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट को स्वदेशी तौर पर विकसित करने की भी योजना है।

पीएफएक्स प्रोग्राम के सामने अभी भी हैं कई बाधाएं

पाकिस्तान के पीएफएक्स प्रोग्राम प्रोग्राम के सामने अभी भी कई तरह की बाधाएं हैं। जिसमें IRST, AESA इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टील्थ टेक्नोलॉजी स्वदेशी अवशेषों का विकास भी शामिल है। क्योंकि पाकिस्तान के पास इन प्रतिबंधित उत्पादों का कोई अनुभव नहीं है, इसलिए पाकिस्तान को अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वायत्त निवेश और अंतर्राष्ट्रीय साझेदार से मदद की ज़रूरत है।

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जगमीत सिंह न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी खालिस्तानी नेता ने कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो से डोनाल्ड ट्रम्प टैरिफ धमकी के बाद इस्तीफा देने को कहा

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कनाडा की राजनीति: कनाडा में बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे की मांग की है। यह कदम प्रधानमंत्री क्रिस्टिया फ़्रीलैंड की रिहाई के बाद उठाया गया है। खालिस्तानी नेताओं ने अपने पीछे देश में जनसंख्या जीवन-यापन की लागत और आने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड खले की ओर से यात्रा के खतरे को अपनी मांग को प्रमुख कारण बताया है।

खालिस्तान का समर्थन करने वाले जगमीत सिंह ने कहा, “आज, मैं जस्टिन ट्रूडो से मुक्ति की मांग कर रहा हूं। उदारवादी खुद से लड़ रहे हैं, जबकि कनाडावासियों को ऐसे प्रधानमंत्री की जरूरत है जो उनकी लड़ाई के लिए हों।” सिंह ने कहा कि कैनेडियन लोग पहले से ही घटिया जीवन शैली और आवास विवरण के कारण वित्तीय तनाव का सामना कर रहे हैं और इसके अलावा, 25 प्रतिशत टैरिफ से देश में कई संगठनों के खतरों का खतरा है।

डोनाल्ड लेवल की खतरनाक का दिख रहा असर?

कनाडा की वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने सोमवार को प्रधानमंत्री ट्रूडो की ओर से उन्हें कमतर पद छोड़ने के बाद अपना पद छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि खर्च बढ़ाने की उनकी इच्छा है कि कनाडा की टैरिफ से होने वाले नुकसान को झेलने की क्षमता को खतरे में डाला जा सकता है, जिसमें अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड डोनाल्ड का नामांकन खतरे में पड़ सकता है।

ट्रूडो पर बैकफुट के बाद फ्रीलैंड की रिहाई

फ्रीलैंड कनाडा- अमेरिका में एक विशेष कैबिनेट समिति के अध्यक्ष और एकजुटता प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए 10 प्रांतों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। फ्रीलैंड ट्रूडो की सरकार में एक प्रमुख भूमिका निभाई, उन्होंने व्यापार और विदेश मंत्री जैसे पद संभाले और यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता का नेतृत्व किया। हाल ही में, वह रियल मैड्रिड के प्रति कनाडा की प्रतिक्रिया का प्रबंधन कर रही थी।

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बाज़ार में भारत के इस कदम से तिलमिला उठेगा चीन! इंडोनेशिया में सबसे पहले ड्रैगन को झटका दिया गया था

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<पी शैली="पाठ-संरेखण: औचित्य सिद्ध करें;"भारतीय तट रक्षक जहाज: भारतीय तट रक्षक के दो प्रमुख जहाज, आईसीजीएस वैभव और आईसीजीएस अभिराज, वाराणसी की राजधानी माले में चार यात्राएं। यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में भारत के सागर क्षेत्र (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के तहत समुद्री सहयोग और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल है। भारत का यह कदम चीन के बेल्ट एंड रोडशिएटिवा (बीआरआई) और बाजार में उसकी बढ़त के खिलाफ भारत की बाजार हिस्सेदारी की चाल है।

भारत और विपणन के बीच रक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत करने की पहल की गई है। ICG जहाज समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में मदद करेंगे। आईसीजी जहाज प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और बचाव अभियान में सहायता प्रदान करता है। वहीं, कल श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा डिसनायके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलाकात के बाद कहा था कि वो अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं करेंगे। ये बात हंबनटोटा पोर्ट पर चीन के प्रभाव को लेकर चली थी.

चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने का प्रयास

चीन ने बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट प्रोजेक्टों के माध्यम से अपने मूल्यांकन को बढ़ाने की कोशिश की है। भारत के इस कदम से चीन के प्रभाव को चुनौती मिलेगी और आईओआर में भारत की प्रतिष्ठा भूमिका को और चुनौती मिलेगी। हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा न केवल बिक्री, बल्कि भारत और अन्य पड़ोसी देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है। आईसीजी जहाज क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री यातायात सुनिश्चित होगा।

क्यों चीन में होगी जादूगर ?

मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठित स्थान स्थित है। चीन ने ‘साउथ-साउथ कोऑपरेशन’ के तहत पोर्ट्रेट और एयरपोर्ट में निवेश किया जाता है। भारत का यह कदम, चीन की इन कोशिशों का जवाब देने वाला साबित हो सकता है। चीन का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) हिंद महासागर के जरिए अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, आईसीजी ने भारत के प्रभाव को बढ़ाने और बीआरआई के तहत चीन की कोशिशों पर नजर रखने की बात कही।

मिशन की अगली कड़ी श्रीलंका यात्रा

मालदीव की यात्रा के बाद, जहाज श्रीलंका के तट और गैले बंदरगाहों की यात्रा करेंगे। यह यात्रा भारत-श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग और उत्पादन को बढ़ाने का एक और कदम होगी।

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चीन 43 मिलियन यात्रियों को संभालने के लिए दुनिया के सबसे बड़े कृत्रिम द्वीप हवाई अड्डे का निर्माण करेगा

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चीन कृत्रिम द्वीप हवाई अड्डा: चीन एक बार फिर से प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए तैयार है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (एससीएमपी) की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने घोषणा की है कि वह प्रति वर्ष 43 मिलियन यात्रियों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा आर्टिफ़िशियल-आइलैंड हवाई अड्डा बना रही है। यह हवाईअड्डा ग्वांगडोंग प्रांत के तट पर बनाया गया है और इसे देश के अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात के लिए और भी अधिक स्थान देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

लियाओनिंग प्रांतीय सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वर्तमान में विचारधारा डालियान जिन्झोउवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे 20 वर्ग किलोमीटर (7.72 वर्ग मील) में फैला होगा। पूरे होने के बाद ये हवाई अड्डा हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, जो 12.48 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और जापान के कंसाई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, जो 10.5 वर्ग किलोमीटर में फैला है, उसे पीछे छोड़ दें – दोनों ही कलात्मक द्वीप स्थित हैं।

एयरपोर्ट की व्यवस्था

1. इस एयरपोर्ट की एनुअल पैसेंजर कैपेसिटी 43 मिलियन होगी। यह डिज़ाइन डिज़ाइन और स्मार्ट टेक्नोलॉजी के उपयोग से यात्रियों को सशक्त अनुभव प्रदान करता है।

2. एयरपोर्ट एक आर्टिफ़िशियल आइलैंड पर बनाया जाएगा, जो समुद्र के ऊपर एक आर्टिफ़िशियल स्ट्रक्चर होगा। इस परियोजना में समुद्र के पानी को बाहरी पैमाने पर बड़े पैमाने पर भूमि का निर्माण किया जाएगा।

3. एयरपोर्ट का डिज़ाइन पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव के लिए तैयार किया जाएगा। एयरपोर्ट पर रिन्यूएबल ऊर्जा ऊर्जा जैसे परमाणु ऊर्जा और पवन ऊर्जा का उपयोग होगा।

लियाओनिंग में स्टालिन सरकार ने बताया कि, अगस्त तक, 77,000 वर्ग मीटर का पुनर्भुगतान क्षेत्र “गहरी शैक्षणिक उपचार” पूरा हो चुका था। भूमि सुधार और टर्मिनल भवन की स्थापना के लिए भी चल रही हैं।

चीन से पहले ही दुनिया का सबसे व्यस्ततम हवाई अड्डा (बीजिंग कैपिटल इंटरनेशनल एयरपोर्ट) संचालित किया जा रहा है। यह नया एयरपोर्ट बनने से चीन को वैश्विक हवाई यातायात का केंद्र बनने की ओर एक और कदम बढ़ाया जाएगा। यह हवाईअड्डा ग्वांगडोंग-हांगकांग-मकाउ ग्रेटर बे क्षेत्र के आर्थिक विकास को और तेज करना है। यह स्थान चीन का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और पर्यटन केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

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बांग्लादेश विजय दिवस 1971 मुक्ति संग्राम पर नरेंद्र मोदी की सोशल मीडिया पोस्ट पर भड़के आसिफ नजरूल

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भारत-बांग्लादेश संबंध: हाल ही में बांग्लादेश में भारत को लेकर नेगेटिव मॉन्शियन बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजय दिवस (16 दिसंबर) के अवसर पर सोशल मीडिया पर एक संदेश पोस्ट किया, जिसमें बांग्लादेश के विधि सलाहकार, स्टिलेयर नजरुल ने दोस्त की दोस्ती बताई है। नॉर्वेजियन नजरुल ने कहा कि 16 दिसंबर को केवल बांग्लादेश का विजय दिवस है और भारत को इस विजय में सिर्फ एक सहयोगी माना जाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ”16 दिसंबर, 1971, बांग्लादेश का विजय दिवस था। भारत सहयोगी था, इससे अधिक कुछ नहीं।”

बांग्लादेश के इस रुख से दोनों देशों के बीच चल रहे मज़हब में एक नया मोर्चा खुला है। यह तनाव ऐसे समय में बढ़ रहा है जब बांग्लादेश भारत से दूरी बनाकर पाकिस्तान के साथ मिलकर अपने द्विपक्षीय मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसा लग रहा है कि नए बांग्लादेश के ऐतिहासिक स्मारकों को भुलाया जा रहा है, जिसमें भारत ने 1971 के युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। यह वही समय था जब बांग्लादेश ने पाकिस्तान के विद्रोहियों से आजादी पाई थी।

मोदी का विजय दिवस पोस्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्होंने 16 दिसंबर को विजय दिवस के अवसर पर लिखा था, “आज विजय दिवस पर हम उन बहादुर सैनिकों के साहस और बलिदान का सम्मान करते हैं, जो 1971 में भारत की ऐतिहासिक जीत में योगदान दिया था। उनका निस्वार्थ संकल्प और अटल संकल्प हमारे देश की रक्षा का प्रतीक है।” यह हमें गौरवान्वित महसूस कराता है। यह उनकी असाधारण वीरता और अद्भुत भावना का सम्मान करता है।” पीएम मोदी के इस पोस्ट में भारत के जवानों की शहादत को याद करते हुए देखा जा रहा है। लेकिन बांग्लादेश की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को नया आयाम दिया है।

बांग्लादेश का बदलता रुख और पाकिस्तान का विद्रोह
बांग्लादेश इन दिनों भारत के खिलाफ कदम उठा रहा है। इस दौरान वो पाकिस्तान के साथ मित्रता बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। इस स्थिति में भारत-बांग्लादेश के स्टॉक में तनाव बढ़ सकता है।

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