कुवैत के पुरातत्वविदों ने एक 7000 साल पुरानी मिट्टी की मूर्ति की खोज की है जो एलियन जैसी दिखती है

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कुवैत में उत्खनन: कुवैत में खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों को एक 7000 साल पुरानी मूर्ति मिली है। खुदाई में मिली मिट्टी की बनी मूर्ति आपके लिए बिल्कुल अनोखी है। क्योंकि यह मूर्ति किसी एलियन की तरह दिखती है। हालाँकि इस प्रकार की मूर्ति की इमारत और शिक्षण मेसोपोटीमिया की प्राचीन कला शैली की मेल है।

कुवैत और अरब की खाड़ी में खुदाई के दौरान मिली इस तरह की पहली मूर्ति. पुरातत्वविद् की यह खोज उत्तरी कुवैत के बहरा-1 नाम की जगह पर हुई है। जहां कभी प्राचीन वास्तुशिल्प हुआ करता था. यह खोज कुवैत और आसपास के देशों की संस्कृति को दर्शाती है। इस मूर्ति की बैठक से पता चलता है कि मुस्लिम धर्म में मुस्लिम धर्म के आने से पहले किस तरह की धार्मिक आस्था थी।

लाइव साइंसेज की रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत में मिली यह मूर्ति उबैद संस्कृति से संबंधित है, जो मेसोपोटामिया से आई थी। उबैद लोग छठी सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व में अरब की खाड़ी में नवपाषाण समाजों के साथ मिल गए थे। इसी कारण से यह क्षेत्र सांस्कृतिक लेन-डेन का केंद्र बन गया था। इस मूर्ति को हैशटैग्स में शामिल कर रहे हैं।

मेसोपोटामिया की मिट्टी से बनी है ये मूर्ति

विशेषज्ञ का कहना है कि यह मूर्ति मेसोपोटामिया की मिट्टी से बनी है, न कि अरब की खाड़ी की स्थानीय मिट्टी से। इससे इस बात की जानकारी मिलती है कि उबैद लोग अपने मूल को इस क्षेत्र में दर्ज करते थे। इस मूर्ति को ध्यान से देखने पर इसमें साक्षियों से बनी सिर, तिरछी आंखें, चपटी नाक और लंबी खोपड़ी दिखाई दी। ये मूर्ति बहरा 1 से मिली है, ये उत्तरी कुवैत में एक प्रागैतिहासिक स्थल है, जहां, साल 2009 से एक कुवैती-पोलिश टीम खुदाई कर रही है।

बहरा-1 में उबैद लोग रहते थे। जो एक संस्कृति थी जो मेसोपोटामिया में शुरू हुई थी और उसकी विशिष्ट मिट्टी के पोखों के लिए जानी जाती है।

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डॉ. यूनुस ने शहबाज शरीफ से संबंधों में सुधार के लिए पाकिस्तान से 1971 के मुद्दों को सुलझाने का आग्रह किया

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बांग्लादेश-पाकिस्तान संबंध: बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने गुरुवार (19 दिसंबर) को पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शाहबाज सरफराज से 1971 के दशक के संगीत कार्यक्रम का आग्रह किया, ताकि ढाका को नाममात्र के साथ अपने संकल्प को आगे बढ़ाने में मदद मिल सके।

यूनुस ने पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शाहबाज शरीफ़ से कहा, “मुद्दे बार-बार आ रहे हैं। आओ हम उन लोगों को एकजुट लें, ताकि हम साहस को आगे बढ़ा सकें।” इसके साथ ही सरफराज ने कहा कि 1974 के त्रिक्रांति एकांत में शामिल होने के लिए बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत को शामिल किया गया है, लेकिन अगर कोई अन्य सामान मुद्दा है, तो उन पर विचार करके खुशी होगी।

डी8 शिखर सम्मेलन में मिले यूनुस और सरफराज

प्रोफ़ेसर यूनुस ने कहा, “भविष्य की दीक्षा के लिए एक बार और सभी के लिए एकांत अच्छा होगा।” मुख्य सलाहकार और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सरफराज ने डी8 शिखर सम्मेलन के दौरान व्यापार, वाणिज्य और खेल और सांस्कृतिक तत्वों के बीच मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने पर जोर दिया।

दोनों नेताओं ने चीनी उद्योग और ढांचागत प्रबंधन जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा भी व्यक्त की। प्रो. यूनुस और सरफराज ने सार्क के पुनरुद्धार सहित मित्र देशों के हितों के बारे में चर्चा की – अंतरिम सरकार के प्रमुखों के रूप में बौद्ध मठ के बाद मुख्य सलाहकार द्वारा घोषित विदेश नीति की एक प्रमुख विशेषता।

बांग्लादेश में चुनाव को लेकर एक और बात

2006 के नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं ने अपनी सरकार की “आवश्यक सुधार” करने और 2026 के मध्य से पहले आम चुनाव की योजना के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि वे सुधारों पर बातचीत के लिए आम सहमति बनाने वाले आयोग का नेतृत्व कर रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज सरफराज ने ढाका और इस्लामाबाद के बीच संबंध बनाने की पेशकश की।

शाह सरफराजबाज ने की यूनुस की महिमा

सरफराज ने कहा, “हम अपने भाई बांग्लादेश के साथ अपने प्रयासों को मजबूत करने के लिए वास्तव में प्रयासरत हैं।” उन्होंने क्षेत्रीय संगठन के शिखर सम्मेलन के आयोजन की संभावना पर काम करने के लिए सार्क और बांग्लादेश को पुनर्जीवित करने के लिए अपनी पहल के लिए प्रोफेसर यूनुस के सलाहकार की भूमिका निभाई।

मोहम्मद यूनुस ने कहा, “मैं सरकार के विचार का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। मैं इस मुद्दे पर जोर देता हूं। मैं सरकार के नेताओं का एक शिखर सम्मेलन चाहता हूं, भले ही यह केवल एक फोटो सत्र के लिए हो, क्योंकि यह एक मजबूत संदेश है ” पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सरफराज ने भी प्रोफेसर यूनुस को अपनी सुविधा के अनुसार अपने देश आने की शिकायत दी।

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पेंटागन ने चीन को किया बेनकाब, कहा- भारतीय सीमा के पास अभी भी उसके पास हैं लाखों सैनिकों की मिसाइलें और यहां तक ​​कि टैंक भी

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भारत-चीन सीमा: जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद चीन ने भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपनी स्वायत्त सैन्य उपस्थिति बनाई है। क्षेत्र में कुछ सैन्य टुकड़ियों के पीछे के पीछे, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अपनी स्थिति या संख्या में कोई कमी नहीं की है। यह बात पेंटागन की रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “पीएलए ने 2020 की राइफलों के बाद अपनी स्थिति या सैन्य संख्या में कोई कमी नहीं की है और एलएसी पर कई ब्रिगेड के स्मारक बनाए रखने के लिए आधारभूत ढांचे और सहायता सुविधाओं का निर्माण किया है।”

एलएसआई पर एक लाख से अधिक सैनिक

पेंटागन के सर्वे में पता चला है कि चीन ने 3,488 किमी लंबी एलएसी पर लगभग 120,000 सैनिक तैनात कर रखे हैं। सेना के अलावा, पीएलए ने टैंक, होविट्जर, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और अन्य उन्नत सैन्य उपकरणों सहित भारी हथियारों को स्थापित किया है। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि एलएसी के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी इलाकों में 20 से ज्यादा यूनाइटेड वेपन ब्रिगेड (सीबीआई) के ठिकाने बने हुए हैं।

एलएसआई पर रेस्तरां के साथ जमा हुआ है चीन

पेंटागन की रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि चीन की वेस्टर्न थिएटर कमांड, जो भारत के साथ सीमा की निगरानी करती है, भारत के साथ अपनी सीमा की सुरक्षा को मूल भावना दे रही है। रिपोर्ट में कहा गया है, “हाल के वर्षों में, भारत और चीन के बीच सीमा निर्धारण के बारे में अलग-अलग धारणाओं ने कई क्रांतियों, सैन्य संरचनाओं के जमावड़े और सैन्य ढांचे के निर्माण को बढ़ावा दिया है।” सूत्र ने कहा कि कुछ केंद्रीय बैंक वापस आ गए हैं, “अधिकांश सैनिक जहां बने हुए हैं”, जिसमें बताया गया है कि चीन के इस क्षेत्र में स्थानों से जाम हो गया है।

चीन से 600 परमाणु परमाणु का प्रक्षेपण हुआ

पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपने परमाणु बमों के आधुनिकीकरण के लिए प्रयासरत है। 2024 के मध्य तक, चीन के पास 600 से अधिक ऑपरेशनल परमाणु हथियार हैं, संख्या 2030 से 1,000 से अधिक होने की उम्मीद है। रिपोर्ट में चीन के परमाणु शस्त्रागार के विविधीकरण पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें कम-क्षमता वाली मिसाइलें से लेकर मल्टी-मेगाटन अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (आईसीबीएम) तक के हथियार शामिल हैं। पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है, “पीएलए कम-क्षमता से लेकर कई तरह की बमबारी की एक बड़ी और अधिक विविध परमाणु शक्ति चाहता है, ताकि उसे कई विकल्पों में वृद्धि की सीढ़ी मिले।”

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पाकिस्तान सरकार ने टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले लोगों को बैंक खाते खोलने और 800 सीसी से ऊपर की कार खरीदने पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक विधेयक पेश किया।

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पाकिस्तान नवीनतम समाचार: अपनी आय बढ़ाने के लिए पाकिस्तान सरकार नए-नए तरीके अपना रही है। अब पाक सरकार ने किया कुछ ऐसा जिसकी चर्चा खूब हो रही है. पूर्वी, पाकिस्तान सरकार ने बुधवार (18 दिसंबर 2024) को संसद में एक ऑक्सफोर्ड पेशी आयोजित की, जिसमें टैक्स रिटर्न्स न करने वाले लोगों के बैंक इक्विटी और 800 सीसी से अधिक की कार छूट पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।

वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने सरकार के खिलाफ कर चोरी करने वालों पर कानून (संशोधन) के तहत कर कानून, 2024 पेश किया। संशोधन में यह प्रस्ताव रखा गया है कि टैक्स रिटर्न्स पैलेश न करने वालों को एक निश्चित सीमा से अधिक शेयर शेयर और बैंक अकाउंट शेयर पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। ऐसे लोग एक निश्चित सीमा से अधिक चॉकलेट बैंक के माध्यम से नहीं कर पाएंगे।

सम्पत्ति भी नहीं कर पाई सम्पत्ति

सुजुकी में कहा गया है कि संघीय राजस्व बोर्ड (एफबीआर) के साथ मिलकर व्यवसायियों के बैंक रेफ्रिजिरेटर की तलाश शुरू कर दी जाएगी और उनकी संपत्ति पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। बिक्री कर रिटर्न दाखिल करने के लिए संबंधित निकाय में नामांकन एफबीआर बैंक पर रेफ्रीजिरेटर करने और संपत्ति हस्तांतरण पर रोक लगाने में भी सक्षम नहीं होगा। हालाँकि, नामांकन के दो दिन बाद उनकी फिर से बहाली कर दी जाएगी। मैक्सिकन में कहा गया है कि ये प्रतिबंधित संघीय सरकार के स्वीकृत होने के बाद लागू होगा।

आईएमएफ को दिए गए सुझाव पूरे करने का दबाव

बता दें कि यह ऐसे समय में आया है जब सरकार इस साल सितंबर में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ मिलकर 7 करोड़ अमेरिकी डॉलर के ऋण भंडार को हासिल करने के लिए डील के अनुसार राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रही है।

2024-25 के लिए 12.913 ट्रिलियन डॉलर्स का लक्ष्य

पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 12.913 ट्रिलियन रिक्स लिबरल का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वित्त वर्ष में 40 प्रतिशत अधिक है। साल की पहली तिमाही (जुलाई-सितंबर) में एफबीआर 96 अरब रुपये से कम आ रहे थे, क्योंकि कलाकार 2,652 अरब रुपये के टेलीकॉम 2,556 अरब रुपये ही जमा हो गए थे।

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डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि जस्टिन ट्रूडो अमेरिका के 51वें राज्य के गवर्नर बनेंगे

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कनाडा पर डोनाल्ड ट्रम्प: चारों ओर से राजनीतिक उठापटक से कनाडा जा रहे हैं और जस्टिन ट्रूडो के लिए जोश कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। भारत के साथ राजनीतिक टकराव के बाद कनाडा के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। वहीं, अब अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड जस्टिन ट्रूडो पर लगातार हमले बोल रहे हैं।

डोनाल्ड वॉल्ट ने सबसे पहले अपने विचारधारा अभियान के दौरान कनाडा में कर वृद्धि की बात कही थी। वहीं, अब वे कनाडा से जस्टिन ट्रूडो को संयुक्त राज्य अमेरिका का 51वां राज्य बनाने का प्रस्ताव दे रहे हैं।

रियल ने कनाडा के अमेरिका राज्य निर्माण को लेकर पोस्ट डाली

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड खैल ने सोशल मीडिया पर इस बारे में पोस्ट किया है. अपने पोस्ट में रियल ने कहा कि कनाडा के हर नागरिक इस कदम का स्वागत कर रहे हैं।

सर्वे में लोगों ने बताई अपनी इच्छा

उल्लेखनीय है कि कनाडा में इसी सप्ताह एक लेगर जनमत सर्वेक्षण हुआ है। नतीजों के मुताबिक, 13 प्रतिशत कनाडाई नागरिक अपने पड़ोसी देश अमेरिका के साथ जुड़ने की सोच का समर्थन करते हैं। डोनाल्ड रियल ने सोशल मीडिया पर इसी सर्वे के आधार पर कनाडा को 51वें राज्य निर्माण के संबंध में पोस्ट किया है।

अपने पोस्ट में डोनाल्ड कुणाल ने स्केच स्टाइल में लिखा, “कनाडा राजनीतिक उधेड़न- क्लासिक के दौरे से गुजर रहा है। ऐसे में यहां के लोगों के लिए यह प्रस्ताव काफी अच्छा हो सकता है।’ उदाहरण ने आगे लिखा, “अगर कनाडा संयुक्त राज्य अमेरिका का हिस्सा बनता है तो कर और सैन्य सुरक्षा पर उसकी बड़ी बचत होगी।”

रियल ने ट्रूडो को कई बार दिया कनाडा के गवर्नर कहा जाता है

डोनाल्ड रियल ने कई बार अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को ‘कनाडा का गवर्नर’ कहा है। बता दें कि अमेरिका के 50 राज्यों के नेताओं के लिए इसी कहावत का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा पहली बार नहीं है जब रियल्टी ने सार्वजनिक तौर पर ट्रडो पर ये बात कही है। हाल ही में फ्लोरिडा में ट्रूडो के साथ मुलाकात के दौरान अंकल ने ये बात कही थी. हालाँकि तब इस बात को एक मज़ाक की तरह उड़ा दिया गया था.

हालाँकि रीच के इस पोस्ट को लेकर कनाडा की राजधानी ओटावा में भर्ती किया गया है। ओटावा में लोगों ने इसे एक भद्दा और नकली मजाक बताया है।

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कनाडा डरहम पुलिस ने सरकार पर खराब कानून-व्यवस्था का आरोप लगाते हुए जस्टिन ट्रूडो से इस्तीफे की मांग की

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कनाडा जस्टिन ट्रूडो: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के खिलाफ सबसे बड़ा दबदबा कायम है। जहां पार्टी के न्यूनतम सदस्य अपनी बेरोजगारी की मांग कर रहे हैं, वहीं कनाडा के पुलिस कर्मियों ने भी बेरोजगारी की बात सामने रखी है। टोरंटो पुलिस एसोसिएशन और दरहम क्षेत्रीय पुलिस एसोसिएशन ने सार्वजनिक रूप से जस्टिन ट्रूडो की बैठक पर सवाल उठाए हैं।

पुलिस का आरोप है कि ट्रूडो सरकार की ग़लती के कारण कनाडा में आपराधिक संस्कृति को बढ़ावा मिला है। अवैध अवैध और लैपटॉप का प्रकाशन तेजी से हुआ है। उद्यमियों को गिरफ्तार करने के बाद भी उन्हें कोर्ट से तुरंत जमानत मिल जाती है, जिससे कानूनी व्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।

टोरंटो पुलिस एसोसिएशन का बयान
टोरंटो पुलिस एसोसिएशन ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जस्टिन ट्रूडो की आलोचना की। उन्होंने कहा कि चमत्कार वादों और बातों का कोई मतलब नहीं है। यह केवल हमारे सदस्यों और आम जनता के प्रति रुझान को बढ़ावा नहीं देता है, बल्कि हिंसक अपराध और बंदूक अपराध को बढ़ावा देता है। वैध सुधार की कमी पूरे समाज को ख़तरे में डाल रही है।”

दरहम क्षेत्रीय एसोसिएशन पुलिस का समर्थन
दरहम क्षेत्रीय पुलिस एसोसिएशन ने भी टोरंटो पुलिस एसोसिएशन का समर्थन किया। उन्होंने जस्टिन ट्रूडो पर अविश्वास प्रस्ताव रखा और कहा कि देश में नया चुनाव होना चाहिए।

खालिस्तानी उग्रवाद और अपराध को बढ़ावा
आलोचकों का कहना है कि जस्टिन ट्रूडो खालिस्तानी मछुआरों के प्रभाव में कानून व्यवस्था ख़राब हो रही है। खालिस्तानी समर्थक गन कल्चर और स्टोन के व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं।

कानून व्यवस्था पर प्रभाव
पुलिस प्रधान मंत्री द्वारा अविश्वास प्रस्ताव में कहा गया है कि कनाडा में कानून व्यवस्था की स्थिति गंभीर हो गई है। पुलिस और प्रधानमंत्री के बीच अविश्वास की यह स्थिति आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक जटिल बना रही है।

बदतमीज़ी की माँग और भविष्य की चुनौती
जस्टिन ट्रूडो पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। पुलिस और पुरातत्वविदों की ओर से जमानत की मांग के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन दावों और विश्वास को कैसे बनाए रखती है।

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कनाडा विदेशियों को पीएनपी के तहत स्थायी निवास के लिए आवेदन करने के लिए आमंत्रित करता है

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कनाडा में प्रांतीय नामांकित कार्यक्रम: कनाडा में स्थायी घर का सपना देख रहे भारतीयों के लिए एक बड़ा समाचार। कनाडा की सरकार ने अपने प्रांतीय नामांकित कार्यक्रम (पीएनपी) के तहत 1085 विदेशी नागरिकों को स्थायी निवास के लिए आवेदन के लिए आमंत्रित किया है। 16 दिसंबर 2024 को पीएनपी के माध्यम से कनाडा में बसने की चाहत वाले लोगों के लिए एक शानदार अवसर देने वाली इस एक्सप्रेसवे एंट्री ड्रामा का आयोजन किया गया। इससे पहले 2 दिसंबर को इस पीएनपी कार्यक्रम के तहत 676 लोगों को स्थायी निवास के लिए आमंत्रित किया गया था।

नॉर्वेजियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में बसने की इच्छा रखने वाले विदेशी नागरिकों को प्रांतीय पिरामिड कार्यक्रम (पीएनपी) के माध्यम से स्थायी निवासी का दर्जा मिल सकता है। यह प्रोग्राम उन्हें किसी खास प्रांत या क्षेत्र में काम करने और बसने की जानकारी देता है। पीएनपी चाकलेट पर उन क्रांतिकारी के लिए है, जिनके पास कौशल, शिक्षा और काम का अनुभव है। हर प्रांत और क्षेत्र के अपने अलग-अलग आप्रवासन कार्यक्रम होते हैं, जो कि विभिन्न समुदायों को पूरा करते हैं।

क्या लोग एक्सप्रेस डाउनटाउन सिस्टम के बारे में जानना चाहते हैं?
एक्सप्रेस डायरेक्टोरियल सिस्टम कनाडा सरकार का एक प्वाइंट-बेस्ड इमिग्रेशन सिस्टम है, जो कुशल होटलों को कनाडा में स्थायी निवास के लिए चयन करता है। इस सिस्टम का ऑपरेशन इमिग्रेशन, रिफ्यूजी और सिटीजनशिप कनाडा (आईआरसीसी) करता है। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से अप्रवासियों के लिए है, जो अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के आधार पर कनाडा में बसना और काम करना चाहते हैं।

एक्सप्रेस एडवांस्ड सिस्टम के अंतर्गत आने वाले कार्यक्रम
संयुक्‍त ‍विस्तारित कैरेबियाई कार्यक्रम (एफएसडब्ल्यूपी) में उन पेशेवरों के लिए आवेदन किया गया है जिनके पास उच्च शिक्षा, कार्य अनुभव और लैंग्वेज विशेषज्ञता है। यह कनाडा के विभिन्न प्रांतों में नौकरी के अवसरों का लाभ उठाने का सबसे प्रमुख तरीका है।

संस्थागत ट्रेडर्स प्रोग्राम (एफएसटीपी) यह तकनीकी और व्यावसायिक ज्यामिति में गणितीय के लिए है। जैसे, निर्माण कार्य, प्रयोगशाला, और अन्य तकनीकी प्रोफेशन।

कैनेडियन एक्सपीरियन क्लास (सीईसी) उन लोगों के लिए, जो पहले कनाडा में काम करते थे या पढ़ाई करते थे। यह कार्यक्रम कनाडा के श्रम बाजार से मित्रवतों को प्राथमिकता देता है।

संस्थागत प्रशिक्षण कार्यक्रम (PNP) यह कनाडा के प्रांतों और क्षेत्रों को स्थानीय श्रम बाजार की ओर से पूर्ण करने के लिए वन्यजीवों का चयन करने का अवसर देता है।
पीएनपी नामांकन के बाद एमिरेट्स को 600 अतिरिक्त सीआरएस पद मिलने वाले हैं, जिससे स्थायी निवास मिलने की संभावना बढ़ रही है।

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अराकान सेना अब म्यांमार बांग्लादेश सीमा मोहम्मद यूनुस रखाइन प्रांत के साथ बांग्लादेश के अंदर के क्षेत्रों को नियंत्रित करती है

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बांग्लादेश म्यांमार सीमा तनाव: बांग्लादेश की नई सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। पिछले हमले से म्यांमार की बांग्लादेश सीमा सुरक्षा व्यवस्था में नाटकीय बदलाव आया है, क्योंकि जुंटा ने इस क्षेत्र पर नियंत्रण खो दिया है, जिसका असर भारत पर भी हो सकता है। म्यांमार के सभी विद्रोही विचारधारा में सबसे बड़ी अराकान सेना अब प्रांत (बांग्लादेश की सीमा से सटा) के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर रही है, जो भारत के लिए प्रतिष्ठित रूप से अहम है।

म्यांमार और बांग्लादेश को विभाजित करने वाली 270 किमी लंबी सीमा पर जुंटा (म्यांमार की सेना) का नियंत्रण समाप्त हो गया है। ऐसी भी रिपोर्टें हैं कि अराकान सेना अब म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के साथ बांग्लादेश के आंतरिक क्षेत्रों को नियंत्रित करती है और इससे बांग्लादेश सेना और अराकान सेना के बीच दोस्ती हो सकती है और इस क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति और जटिल हो सकती है।

‘बांग्लादेश की ओर भाग रहे मुसलमान’

इसके अलावा अराकान सेना ने एनएफ नदी के पार वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। अराकान सेना ने दावा किया है कि पुलिस और म्यांमार सेना से जुड़े स्थानीय मुस्लिम बांग्लादेश पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं।

अराकान आर्मी क्या है?

साल 2021 में म्यांमार की सत्ता पर सेना ने कब्ज़ा कर लिया था. इसके बाद सेना के देश भर में कई गुट एक ताकतें उभर कर सामने आ रही हैं. अछूते देशों के हालात गृहयुद्ध की तरह हैं। म्यांमार के गृहयुद्ध में सैन्य प्रशासन के तीन विरोधी गुटों का एक गठबंधन है। इस गठबंधन ने अलग-अलग देशों पर अलग-अलग कब्ज़ा कर लिया है। इस गठबंधन में म्यांमार नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस आर्मी (एमएमडीएए), तांग नेशनल लिबरेशन आर्मी (पूर्वी म्यांमार) और अराकान आर्मी (पश्चिमी म्यांमार) शामिल हैं।

2009 में म्यांमार में अराकान आर्मी का गठन किया गया था, जिसका नेतृत्व पूर्व छात्र कार्यकर्ता त्वान मराट नाइंग ने किया था। वह उत्तरी म्यांमार में कचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) के साथ शरण चाहते थे। शुरुआत में इस ग्रुप का मकसद एक स्वामिन सरकार की थी, जो केंद्र की सरकार से कुछ अधिकार की मांग के लिए हथियार उठाया गया था। लेकिन जब म्यांमार की सेना जुंटा ने सरकार का तख्तापलट कर दिया तब अराकान सेना ने उसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

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भारत-चीन सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए सहमत, कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू होगी, संबंधों को स्थिर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे

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भारत चीन शांति बनाए रखने पर सहमत: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रविवार (18 दिसंबर 2024) को विशेष प्रतिनिधि वार्ता के दौरान ‘सार्थक चर्चा’ की और छह सूत्री आम सहमति पर क्षेत्र, जिसमें मुद्दों पर शांति बनाए रखना और स्वस्थ एवं स्थिर रहना शामिल है विकास को बढ़ावा देने के लिए आगे भी कदम उठाना शामिल है।

चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, पांच द्विपक्षीय के अंतर के बाद हुई पहली बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच दोनों देशों के बीच अंतिम समाधान का सकारात्मक आकलन किया गया और अंतिम कार्य जारी रखा जाना चाहिए। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह माना जाता है कि सीमा मुद्दे को समग्र स्थिति के सिद्धांत में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि मूल्यांकन के विकास पर प्रभाव न पड़े।

दस्तावेज़ में सुधार पर बनी सहमति

इसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने और थोक विक्रेताओं के स्वस्थ और स्थिर विकास को बढ़ावा देने के लिए कदम बढ़ाने पर सहमति जताई है। 2005 में सीमा मुद्दे के समाधान के लिए दोनों देशों के विशेष उद्यमों की ओर से समन्वित राजनीतिक सिद्धांतों की समीक्षा की गई, और इस प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक कदम उठाए गए। विस्तार दोहराई.

कहा गया है कि दोनों तरफ से सीमा की स्थिति का आकलन किया गया और सीमा क्षेत्र में प्रबंधन और नियंत्रण को और अधिक परिष्कृत किया गया, विश्वास बहाली के उपायों को मजबूत किया गया और सीमा पर स्थिर शांति और स्थिरता हासिल की गई।

कैलास मानसरोवर यात्रा फिर शुरू होगी

इसमें कहा गया है कि दोनों देश सीमा पार जापान-भारत यात्रा को मजबूत करने और तिब्बत में सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमत हुए।

चीन के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार चीन-भारत सीमा के मामलों में विशेष उद्यमों के तंत्र को और मजबूत करने, दस्तावेज और सैन्य बातचीत को बढ़ावा देने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के मंत्रालयों की बैठक में चर्चा की गई। कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) के लिए सहयोग के लिए स्पष्ट रूप से सहमति की आवश्यकता है। दोनों स्टार्स ने अगले साल भारत में स्पेशल डायरेक्टरेट की मीटिंग का एक नया दौर कॉन्स्टेंटा पर आयोजित किया और इसके लिए समय-समय पर कॉन्सर्ट माध्यमों से काम किया।

इसके अलावा, दोनों पक्षों ने चिंता साझा वाले समूह, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए व्यापक और गहन विचारधारा का समावेश किया।

चीन-भारत अधिकृत पर बोले चीन के विदेश मंत्री वांग यी

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक अलग प्रेस विज्ञप्ति के सच में कहा गया है कि दोनों देशों के नेताओं ने चीन-भारत में समानता की बहाली और विकास की दिशा पर जोर दिया है। स्पष्ट की. प्रेस में जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि पिछले 70 दशकों में चीन-भारत के प्रकाशनों में शामिल हुए – दोनों देशों के नेताओं के प्रमुख दिशानिर्देशों का पालन करना, एक-दूसरे के बारे में सही समझ स्थापित करना, फिलिस्तीन सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों का पालन करना और बातचीत और परामर्श के माध्यम से सिद्धांतों को ठीक से स्थापित करना है।

वांग ने जोर देकर कहा कि आज की विशेष प्रतिनिधि बैठक में दोनों देशों के नेताओं के बीच आम सहमति बनी जिसे लागू करने के लिए प्रभावी उपाय करने का समय दिया गया है। उन्होंने कहा, “यह कड़ी मेहनत से हासिल किया गया है और यह संजोकर बाकी है।” प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बोथर्स स्टॉक को मुद्रित स्थान पर ‘उचित स्थान’ पर रखा जाना चाहिए, स्टॉक क्षेत्र में संयुक्त रूप से शांति बनाए रखा जाना चाहिए और चीन-भारत को यथाशीघ्र स्वस्थ और स्थिर विकास के मार्ग पर जारी रखा जाना चाहिए। करना चाहिए.

चीन के विपक्ष से डोभाल की मुलाकात

डोभाल ने चीन के हान झेंग से बातचीत के बाद बातचीत की। हान ने कहा कि चीन और भारत की स्वतंत्रता, एकता और सहयोग में प्राचीन सभ्यताएँ और उभरती प्रमुख शक्तियाँ शामिल हैं, जिनका वैश्विक प्रभाव और महत्व महत्वपूर्ण है। भारतीय निजीकरण का नेतृत्व कर रहे हैं दोभालपांच साल के अंतराल के बाद 23वें दौर की विशेष कंपनी की बातचीत में भाग लेने के लिए मंगलवार को यहां क्षेत्र। पिछली बैठक 2019 में दिल्ली में हुई थी।

पूर्वी इंडोनेशिया में सैन्य टकराव के कारण चार साल से अधिक समय तक गतिरोध में रहने के बाद पहली ठोस बातचीत हुई, जो 21 अक्टूबर को सैनिकों के पीछे हटने और सैनिकों के पीछे हटने के बाद हुई। एकैट के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के कज़ान में मुलाकात की और एक ऐक्ट का समर्थन किया। मोदी-शी बैठक के बाद, विदेश मंत्री एस जय शंकर और चीनी समकक्ष ने ब्राजील में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की, जिसके बाद चीन-भारत सीमा मामलों पर परामर्श और सहयोग तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की बैठक हुई।

मई 2020 में पूर्वी तट पर वास्तविक एक ही रेखा (एलएसी) पर सैन्य टकराव शुरू हुआ और उसके बाद के वर्ष जून में गलवान घाटी में घातक तूफान उठे, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पड़ोसियों के बीच गंभीर तनाव पैदा हो गया। भारत-चीन के बीच 3488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े विवाद को लेकर विशेष उद्यमियों ने पिछले कुछ वर्षों में 22 बैठकें की हैं। इस तंत्र का गठन 2003 में किया गया था.

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कनाडा आव्रजन प्रक्रिया कनाडा में स्थायी निवास के नियमों को सख्त करने की योजना बना रही है

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कनाडा के आप्रवासन नियम: कनाडा की आप्रवासन फर्म, लॉबी या प्रतिष्ठित निवास के पास की नौकरी का प्रस्ताव लेकर आने वाली अतिरिक्त बैठक वाले लाभ को समाप्त करने पर विचार कर रही है, जो कनाडा में निवास को धोखे से कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह जॉब ऑफर्स लेबर मार्केट इम्पैक्ट एसेसमेंट (लेबर मार्केट इम्पैक्ट असेसमेंट – एलएमआईए) के अंतर्गत आता है, जो नियोक्ता की ओर से विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने से एक दस्तावेज प्राप्त होता है।

इंस्टीट्यूशनल रेजिडेंस (पीआर) हासिल करने के लिए बेरोजगार अमीरों के लिए उनके स्कोर में कम से कम 50 अंक जोड़ने के लिए नौकरी की पेशकश की जा सकती है, जो एक्सप्रेस प्रवेश श्रेणी के तहत क्वालिफाई करने की संभावना को बढ़ाया जाता है।

इमिग्रेशन मंत्री ने बदलाव को लेकर की घोषणा

कनाडा के आव्रजन और नागरिकता मंत्री मार्क मिलर ने मंगलवार (17 दिसंबर) को कोटा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कनाडा के आव्रजन परिवर्तन की घोषणा की। इस दौरान मिलर ने कहा, ‘सरकारी प्रोग्राम की अखंडता को मजबूत करने और एलएमआईए ड्राप को कम करने के लिए अतिरिक्त कार्यक्रमों को लागू करने की योजना बनाई जा रही है।’ ‘जॉब ऑफर के कारण एक्सप्रेस एंट्री के लिए युवाओं को मिलने वाले अतिरिक्त प्वाइंट्स को शामिल करना शामिल है।’

मिलर ने आगे कहा, “यह उपाय LMIA को प्रेरित करने वाली प्रोत्साहन को समाप्त करने के लिए पियानो को समाप्त करने का एक उपाय है। जिससे सिस्टम में स्नातक स्तर की पढ़ाई होगी।”

एलएमआईए धोखाधड़ी कनाडा में बनी चर्चा का विषय

एलएमआईए धोखाधड़ी हाल के महीनों में कनाडा में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि सरकारी आप्रवासन को नियंत्रित करने और इसके पूरे सिस्टम को पूर्ण रूप से पुनर्प्राप्त करने का प्रयास किया गया है।

कई आदिवासियों में यह बात सामने आई है कि कुछ फाउल इमिग्रेशन एजेंट्स इंप्लायर्स के साथ मिलकर एलएमआईए तैयार कर रहे हैं। बदले में उन्हें स्टाफ ने 10,000 कैनेडियन डॉलर से लेकर लगभग 75,000 कैनेडियन डॉलर तक की राशि चुकाई। कुछ दिलचस्प उदाहरणों ने हिंदुस्तान टाइम्स को एलएमआईए की सलाह के लिए जाने वाले रिश्ते की जानकारी दी है।

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