सुबह-सुबह आया भूकंप, 4.1 की तीव्रता से कांपी धरती, घरों से निकलकर भागे लोग

[ad_1]

<p style="text-align: justify;">बांग्लादेश में गुरुवार (4 दिसंबर 2025) &nbsp;सुबह 4.1 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए. इसका असर राजधानी ढाका और पड़ोसी जिलों में देखने को मिला. सुबह लगभग 6 बजकर 14 मिनट पर महसूस किए गए हल्के भूकंप ने लोगों को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर तो किया, लेकिन राहत की बात यह रही कि कहीं से भी किसी तरह की क्षति की सूचना नहीं मिली. यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार इसका केंद्र नरसिंगडी जिले में करीब 30 किलोमीटर भीतर था. हल्की गहराई के कारण झटके तेज नहीं थे, इसलिए बड़ी परेशानी देखने को नहीं मिली.</p>
<p style="text-align: justify;">शहर और आसपास के जिलों में जिस समय कंपन महसूस हुआ, लोग कुछ पल के लिए घबरा गए. ढाका प्रशासन ने बताया कि न तो किसी इमारत में दरार आई है और न ही किसी व्यक्ति के घायल होने का मामला सामने आया है. पिछले कुछ दिनों में लगातार भूकंपीय गतिविधियां होने से लोग सतर्क जरूर हो गए हैं, लेकिन इस बार की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में बसता है ढाका</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भूविज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश तीन प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर स्थित है. यही वजह है कि यह इलाका हमेशा भूकंप के खतरे में रहता है. ढाका को दुनिया के उन शहरों में गिना जाता है, जहां भूकंप का जोखिम लगातार उच्च स्तर पर बना रहता है. पुराने मोहल्लों में मौजूद जर्जर इमारतें इस खतरे को और गंभीर बना देती हैं, क्योंकि हल्के झटके भी उनमें नुकसान पहुंचा सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एक महीने पहले आए भूकंप ने ली थीं 10 जानें</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लोगों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि ठीक एक माह पहले आए 5.7 तीव्रता के भूकंप ने बांग्लादेश के कई इलाकों को हिला दिया था. उस घटना में 10 लोगों की जान चली गई थी और कई घरों की दीवारों में दरारें पड़ गई थीं. ढाका और नरसिंगडी के बीच के क्षेत्र में उस समय काफी नुकसान देखने को मिला था.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>खबर अपडेट की जा रही है…</strong></p>

[ad_2]

भारत से हमारी दोस्ती तुम्हारे पेट में दर्द क्यों? तालिबान की पाकिस्तान को चेतावनी, जानें क्या-क

[ad_1]


अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान को साफ कर दिया है कि काबुल अब किसी भी बाहरी दबाव में विदेश नीति नहीं चलाएगा. भारत के साथ बढ़ती नजदीकी को लेकर पाकिस्तान की बेचैनी पर तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुतक्की ने खुलकर प्रतिक्रिया दी और कहा कि अफगानिस्तान अपने हितों के आधार पर संबंध बनाता है, न कि किसी पड़ोसी की पसंद के अनुसार.

मुतक्की ने राजनीतिक विश्लेषकों की एक बैठक में कहा कि पाकिस्तान को इस बात से समस्या नहीं होनी चाहिए कि अफगानिस्तान भारत के साथ संबंध मजबूत कर रा है. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान खुद भारत से राजनयिक संपर्क रख सकता है तो अफगानिस्तान को ऐसा करने से कोई नहीं रोक सकता. मुतक्की ने यह भी कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तानी विदेश नीति को नियंत्रित करने की कोशिश करता रहा है, लेकिन यह दौर अब खत्म हो चुका है.

पाकिस्तान की राजनीतिक अव्यवस्था पर भी तीखी टिप्पणी

अफगान विदेश मंत्री ने पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर भी तंज कसा. उन्होंने उस बयान का ज़िक्र किया जिसमें पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने माना था कि एक छोटे से फैसले के लिए भी प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख दोनों से अनुमति लेनी पड़ती है. मुतक्की ने व्यंग्य किया कि पाकिस्तान में इतने केंद्र हैं कि यह समझना कठिन है कि वास्तव में फैसला कौन लेता है. उन्होंने कहा कि इस अव्यवस्था का असर पाकिस्तान के हर निर्णय पर दिखाई देता है.

तालिबान का तंज

मुतक्की ने कहा कि पाकिस्तान के रिश्ते लगभग हर पड़ोसी देश से तनावपूर्ण हैं और यह समस्या अफगानिस्तान तक सीमित नहीं है. उनके अनुसार पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों, धार्मिक गुटों और अपनी ही जनता से लगातार टकराव बना रहता है. तालिबानी मंत्री ने दावा किया कि अफगानिस्तान की अन्य सभी सीमाओं पर संबंध सामान्य और व्यावसायिक हैं, जबकि पाकिस्तान ही एकमात्र ऐसा पड़ोसी है, जिसके साथ तनाव बना रहता है.

हवाई उल्लंघन और व्यापार रोकने पर गंभीर आरोप

तालिबान ने हाल के महीनों में पाकिस्तान पर कई आरोप लगाए हैं. काबुल का कहना है कि पाकिस्तान ने कई बार अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया और सीमा से जुड़े व्यापारिक रास्तों को मनमाने ढंग से बंद किया. मुतक्की ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों के साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है, जो दोनों देशों के रिश्तों को और खराब कर रहा है. तालिबान का कहना है कि उन्होंने धैर्य दिखाया है, लेकिन इसे कमजोरी समझना पाकिस्तान के लिए ठीक नहीं होगा.

ये भी पढ़ें: पाकिस्तान के लाहौर में 25 साल बाद पतंग उड़ाने की मिली इजाजत, जानें क्यों लगा था बैन

[ad_2]

Explained: व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा कितना ऐतिहासिक, अमेरिका-यूरोप को जलन क्यों?

[ad_1]


आज यानी 4 दिसंबर की शाम 7 बजे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुचेंगे. वह नई दिल्ली में 23वें भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. पुतिन दिल्ली में सीक्रेट जगह रुकेंगे, जिसका ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है. 4-5 दिसंबर को दिल्ली मल्टी लेयर सिक्योरिटी के घेरे में रहेगी. पुतिन और PM मोदी की मुलाकात ऐतिहासिक होने वाली है, क्योंकि पूरी दुनिया की नजरें इसपर टिकीं हैं. सबसे ताजा उदाहरण जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन आर्टिकल है. ABP एक्सप्लेनर में समझेंगे कि पुतिन की भारत यात्रा ऐतिहासिक क्यों और अमेरिका-यूरोप को इससे क्या दिक्कतें समेत 10 जरूरी सवालों के जवाब…

सवाल 1- पुतिन की भारत यात्रा का एजेंडा क्या है?
जवाब- रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद व्लादिमीर पुतिन पहली बार भारत आ रहे हैं. यह दौरा दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार की रणनीति को मजबूत करने का एक बड़ा मौका है, जहां, राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान-तकनीक, संस्कृति औऱ मानवीय क्षेत्रों की समीक्षा होगी. क्रेमलिन ने इसे द्विपक्षीय संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा का महत्वपूर्ण मंच बताया है, जो दोनों देशों के नेताओं को भविष्य की दिशा तय करने का मौका देगा.

पुतिन शाम 7 बजे नई दिल्ली पहुंचेंगे. उनकी यात्रा की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी के निवास पर प्राइवेट डिनर के साथ होगी. यह अनौपचारिक बैठक दोनों नेताओं को महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बात करने का मौका देगी, जहां वह व्यक्तिगत स्तर पर रिश्तों को मजबूत करेंगे. अगले दिन यानी 5 दिसंबर को सुबह पुतिन राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे. इसके बाद हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पुतिन के लिए राज्य भोज का आयोजन करेंगी. भारत-रूस व्यापार फोरम का उद्धाटन सत्र होगा, जहां दोनों नेता उद्योगपतियों को संबोधित करेंगे. पुतिन के साथ रूस के पुतिन के साथ सात मंत्री आ रहे हैं, जिनमें रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव, वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव, कृषि मंत्री ओक्साना लुट, आर्थिक विकास मंत्री माक्सिम रेशेतनिकोव और स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को शामिल होंगे. साथ ही, सेबरबैंक, रोसोबोरोन एक्सपोर्ट, रोसनेफ्ट और गैजप्रोमनेफ्ट जैसी प्रमुख कंपनियों के सीईओ भी डेलिगेशन का हिस्सा हैं, जो व्यापारिक समझौतों को गति देगी.

सवाल 2- पुतिन के भारत आने पर सिक्योरिटी कैसी होगी?
जवाब- पुतिन जब भारत पहुंचेंगे तो उनके कॉन्वॉय फिक्स होगा. भारत में वह PM मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से कब मिलेंगे, कैसे मिलेंगे, दरवाजा कौन खोलेगा, कौन फूल देकर स्वागत करेगा और किसने कौन से कलर के कपड़े पहने होंगे, यह सब पहले से तय होगा. अगर किसी शख्स ने दूसरे रंग के कपड़े पहने, तो सिक्योरिटी अलर्ट हो जाएगी और पुतिन को सुरक्षित किया जाएगा.

पुतिन के साथ FSO की स्पेट्सनाज यूनिट यानी अल्फा ग्रुप और विमपेल जैसी स्पेशल फोर्स यूनिट तैयार रहेंगी. ये यूनिट्स रूसी सैन्य खुफिया एजेंसी GRU के साथ लगातार संपर्क में रहती हैं. कोई खतरा होने पर यह यूनिट्स पुतिन को किसी सुरक्षित जगह या उनके विमान IL-96 जेटलाइनर विमान तक एस्कॉर्ट करके ले जाती हैं.

IL-96 जेटलाइनर विमान एक उड़ता हुआ कमांड सेंटर है, जिसमें रडार से लेकर सभी जरूरी सिक्योरिटी फीचर्स मौजूद होते हैं. पुतिन के क्रेमलिन से बाहर रहने के दौरान रूसी खुफिया एजेंसी, साइबर टीम एक्टिव रहती हैं.

सवाल 3- पुतिन के भारत आने से क्या फायदा होगा?
जवाब- रूस ने पहले ही रूसी संसद (डूमा) से रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स सपोर्ट (RELOS) समझौते को मंजूरी दिला दी है, जो 18 फरवरी 2025 को हस्ताक्षरित हुआ था. यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के बंदरगाहों, हवाई अड्डों और सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अनुमति देगा, जिससे अभ्यास, रखरखाव और संकट के समय त्वरित समर्थन संभव हो सकेगा.

  • भारत की सेना का 46% हथियार रूस से आते हैं. पुतिन की यात्रा में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के 5 और स्क्वाड्रन (लगभग 5,000 करोड़ रुपए की डील) खरीदने पर चर्चा होगी. यह सिस्टम मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान के खिलाफ बहुत काम आया था.
  • पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 फाइटर जेट के 2-3 स्क्वाड्रन पर फैसला हो सकता है. यह अमेरिकी F-35 का सस्ता विकल्प बनेगा.
  • पुराने T-72 टैंकों के लिए 1,000 हॉर्सपावर इंजन की डील टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ हो सकती है, जो मार्च 2025 में साइन हुई थी. इसके जरिए भारत में ही प्रोडक्शन बढ़ेगा. इससे नौकरियां और ‘मेक इन इंडिया’ को बूस्ट मिलेगा.
  • रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर है. 2025 की पहली छमाही में भारत ने रोज 1.6 मिलियन बैरल रूसी क्रूड तेल खरीदा, जो 2020 में सिर्फ 50,000 था. इससे तेल की कीमतें कम रहीं और भारत को सालाना अरबों डॉलर की बचत हुई थी.
  • पुतिन की यात्रा में आर्कटिक शेल्फ और फार ईस्ट में जॉइंट प्रोजेक्ट्स जैसी नई एनर्जी डील्स होंगी. छोटे मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर (SMRs) महाराष्ट्र में बनाने का MoU आगे बढ़ेगा.
  • ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने पर 50% टैरिफ लगाया था, जिसका जवाब देने के लिए ‘स्पेशल मैकेनिज्म‘ बनेगा, ताकि तेल सप्लाई बिना रुकावट चले.
  • भारत की 40% तेल जरूरत रूस से पूरी होती रहेगी, जो महंगाई कंट्रोल करेगी. यह 2030 तक 100 बिलियन डॉलर ट्रेड टारगेट में एनर्जी बड़ा रोल निभाएगा.
  • 2024-25 में भारत-रूस ट्रेड 68.7 बिलियन डॉलर रहा, जो 2022 से 6 गुना ज्यादा है. लेकिन भारत का डेफिसिट 59 बिलियन डॉलर है. पुतिन की यात्रा में इसे बैलेंस करने के लिए भारतीय निर्यात पर फोकस करके रूस में मार्केट एक्सेस बढ़ेगा.
  • यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) तेज होगा. अगस्त 2025 का 18-महीने प्लान MSMEs और किसानों के लिए रूस-बेलारूस मार्केट खोलेगा.
  • नेशनल करेंसी (रुपया-रुबल) में ट्रेड बढ़ेगा, डॉलर पर निर्भरता कम होगी. रूस से IT, एग्रीकल्चर और हेल्थकेयर में निवेश के लिए फोरम होगा.
  • इसके अलावा पुतिन की यात्रा से भारत की ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी‘ मजबूत होगी. अमेरिकी टैरिफ के बावजूद रूस से डील्स जारी रख सकेंगे. यह अमेरिका को मैसेज देगा कि भारत अपना फैसला खुद लेगा. SCO और BRICS जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ेगा. यूक्रेन, मिडिल ईस्ट जैसे मुद्दों पर बात होगी, जहां भारत शांति का मैसेज देगा. साइंस, टेक्नोलॉजी और कल्चर में MoUs साइन होंगे.

सवाल 4- अभी भारत और रूस के रिश्ते कैसे हैं?
जवाब- भारत-रूस के रिश्ते मजबूत, बहुआयामी और रणनीतिक साझेदारी के हैं, जो दशकों पुरानी ऐतिहासिक नींव पर टिके हुए हैं और वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बावजूद स्थिर है. यह साझेदारी 2000 में रणनीतिक साझेदारी के रूप में शुरू हुई थी, जिसे 2010 में विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया. आज यह दोनों देशों के बीच राजनीतिक, रक्षा, आर्थिक, ऊर्जा, विज्ञान-तकनीक, संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के सभी क्षेत्रों में गहरी पैठ रखती है.

2025 में, जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक दबाव बढ़ा है, भारत ने अपनी मल्टी-अलाइनमेंट नीति के तहत रूस के साथ संबंधों को बनाए रखा है, जो अमेरिका और यूरोप के साथ बढ़ती नजदीकियों के बावजूद अपनी मजबूत है. पुतिन की भारत यात्रा इस साझेदारी को नई रफ्तार देगी, जहां 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान व्यापक चर्चा होगी. यह यात्रा कोविड के बाद पुतिन की पहली भारत यात्रा है और इसमें रक्षा, व्यापार तथा ऊर्जा जैसे मुद्दों पर नए समझौते साइन होने की संभावना है. राजनीतिक स्तर पर, दोनों देशों के नेता नियमित संपर्क में रहते हैं, जो संबंधों की गहराई को दर्शाता है.

  • 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच कई फोन कॉल्स हुईं, जिसमें 5 मई को पहलगाम आतंकी हमले के बाद चर्चा शामिल थी.
  • 1 सितंबर 2025 को चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों की मुलाकात हुई, जहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया
  • भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अगस्त 2025 में मॉस्को में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की, जहां यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग पर बात हुई.

भारत ने हमेशा संवाद और कूटनीति का पक्ष लिया है, और रूस ने भारत की तटस्थता की सराहना की है. अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे BRICS, SCO और G20 पर दोनों देश एक-दूसरे का समर्थन करते हैं, जहां भारत-रूस संबंध वैश्विक स्थिरता के लिए एक स्थिरक कारक के रूप में देखे जाते हैं. हाल ही में, रूसी राष्ट्रपति के सहायक यूरी उशाकोव ने कहा कि यह साझेदारी राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, वित्त, परिवहन, विज्ञान-तकनीक और संस्कृति के क्षेत्रों में सक्रिय रूप से बढ़ा रही है.

सवाल 5- पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात पर दुनियाभर की नजरें क्यों टिकी हैं?
जवाब- एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन की यह पहली भारत यात्रा है और यह ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और यूरोप भारत पर रूस के साथ सैन्य और आर्थिक साझेदारी कम करने का दबाव डाल रहे हैं. लेकिन भारत अपनी दोस्ती को बनाए रखते हुए मल्टी-अलाइनमेंट नीति अपनाए हुए है. यह मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासन के तहत यूक्रेन शांति योजना के प्रस्तावों के बीचरही है, जहां ट्रंप ने भारत से रूसी तेल खरीद रोकने की अपील की है और 50% टैरिफ की धमकी दी है. इससे सवाल उठता है कि क्या यह शिखर सम्मेलन भारत को पश्चिम से दूर धकेलेगा या अपनी स्थिति को मजबूत करने का लीवर बनेगा.

क्रेमलिन के सहायक यूरी उशाकोव ने कहा कि इस मुलाकात से 10 अंतर-सरकारी समझौते और 15 से अधिक व्यावसायिक सौदे साइन होने की उम्मीद है. जो न सिर्फ भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देंगे, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, रक्षा निर्यात और बहुपक्षीय मंचों जैसे BRICS और SCO पर भी असर डालेंगे.

अमेरिकी CAATSA प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस के साथ सैन्य साझेदारी जारी रखी है और यह सौदा भारत की वायुसेना को मजबूत करेगा. पश्चिमी देश इसे एक चुनौती के रूप में देख रहे हैं. हाल ही में RELOS समझौता भी हुआ है, जो आर्कटिक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह रक्षा सौदे न सिर्फ भारत की सुरक्षा को मजबूत करेंगे, बल्कि रूस के लिए वैकल्पिक बाजार बनेंगे.

भारत-रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 68.72 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो महामारी के पहले 10 अरब डॉलर से सात गुना ज्यादा है. लेकिन यह मुख्य रूप से रूसी कच्चे तेल आयात पर निर्भर है, जो भारत के कुल आयात का 30-35% है. दोनों देश 2030 तक 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रुपया-रूबल पेमेंट मोड को मजबूत करेंगे. अमेरिका ने हाल ही में रूसी तेल खरीद पर जांच तेज की है और कुछ भारतीय रिफाइनरियां अस्थायी रूप से आयात कम कर रही हैं.

सवाल 6- इस मुलाकात से ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी को मिर्ची क्यों लग रही है?
जवाब-
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पुतिन-मोदी की इस मीटिंग से ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी को मिर्ची लग रही है, क्योंकि ये लोग रूस के खिलाफ पूरी ताकत लगा रहे हैं और भारत का रूस से गले मिलना उनके पूरे प्लान को हिला दे रहा है. 1 दिसंबर को टाइम्स ऑफ इंडिया में इन तीनों देशों के राजदूतों ने मिलकर एक आर्टिकल लिखा, जिसमें उन्होंने पुतिन को खरी-खोटी सुनाई. आर्टिकल में लिखा कि रूस ने यूक्रेन पर हमला करके मानवता का गला काटा है, जंग को लंबा खींच रहा है और पुतिन ही वो इंसान है जो चाहे तो कल ही युद्ध रोक सकते हैं, लेकिन नहीं रोक रहे. उन्होंने ये भी कहा कि रूस यूरोप के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ कर रहा है.

ये आर्टिकल पुतिन की यात्रा से ठीक पहले आया, जैसे कोई सीधा तीर मारने का इरादा हो. भारत को चेतावनी दी कि रूस से मत मिलो, वरना गलत सिग्नल जाएगा. भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इसे ‘अनुचित’ और ‘असम्मानजनक’ बताते हुए कहा कि राजदूतों का काम तीसरे देश के बारे में ऐसी पब्लिक बयानबाजी करना नहीं है. ये तो डिप्लोमैटिक नियमों का उल्लंघन है.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तीनों देशों को मिर्ची लगने की 3 बड़ी वजहें हैं…

  • भारत का रूस से सस्ता तेल खरीदना: भारत हर महीने करोड़ों बैरल, जो हमारे पेट्रोल-डीजल के दाम कंट्रोल में रख रहा है. यूरोप वाले कहते हैं कि ये तेल रूस को पैसा दे रहा है, जिससे वो यूक्रेन में बम बरसाता रहेगा. लेकिन भारत कहता है, ‘हमारी 140 करोड़ जनता की जरूरत है, हम क्यों बंद करें?’ ये मीटिंग में तेल का सौदा और मजबूत हो सकता है, जो इनके ‘रूस को अलग-थलग करो’ वाले प्लान को फेल कर देगा.
  • दोनों देशों में रक्षा सौदा: इस मीटिंग में S-400 मिसाइल सिस्टम की बाकी डिलीवरी, Su-57 फाइटर जेट्स की डील और नई मिसाइलों पर बात होगी. रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है. यूरोप वाले (जो खुद हथियार बेचना चाहते हैं) सोच रहे हैं कि अगर भारत रूस से खरीदता रहा, तो उनका बाजार खराब हो जाएगा. यह डील रूस को ताकत देगी, जो यूक्रेन में और आगे बढ़ सकता है. वह चाहते हैं कि भारत उनके साथ हो जाए, रूस को सजा दे, लेकिन भारत अपनी आजादी चुन रहा है.
  • ग्लोबल पावर गेम: यह मीटिंग वैश्विक पावर गेम बदल सकती है. ट्रंप ने भी भारत से कहा है कि रूस से दूरी बनाओ, वरना टैरिफ बढ़ाएंगे. लेकिन भारत ना अमेरिका का, ना यूरोप का, बल्कि अपना रास्ता चलेगा. BRICS, SCO जैसे ग्रुप्स में भारत-रूस साथ हैं, जो यूरोप को लगता है कि रूस को वैकल्पिक दोस्त मिल जाएंगे. अगर मोदी पुतिन को यूक्रेन पर थोड़ा झुकने के लिए कह भी दें, तो वो भी इनके फेवर में होगा, लेकिन अभी तो लग रहा है कि मीटिंग रूस को बूस्ट देगी.

सवाल 7- रूस क्यों चाहता है कि भारत उसके और करीब आए?
जवाब- एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन 5 वजहों से रूस को भारत की जरूरत पड़ रही है…

  • पैसे की जरूरत: यूक्रेन वॉर के बाद अमेरिका-यूरोप ने रूस के बैंक, तेल कंपनियां, जहाज सब पर सैंक्शन लगा दिए. पश्चिम ने रूस को दुनिया के पैसा ट्रांसफर सिस्टम स्विफ्ट से बाहर कर दिया. अब भारत ही इकलौता बड़ा देश है जो रूस से ढेर सारा तेल रुपए-रूबल में खरीद रहा है. यह पैसा रूस की अर्थव्यवस्था को अभी भी जिंदा रखे हुए है.
  • हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार: पहले रूस के हथियार चीन, भारत, अल्जीरिया, वियतनाम सब खरीदते थे. अब चीन अपना खुद का हथियारों का बाजार बनाने लगा, बाकी देश अमेरिका के डर के मारे रूस से कुछ नहीं ले रहे. सिर्फ भारत ही बड़े-बड़े ऑर्डर दे रहा है. S-400, Su-57, ब्रह्मोस-2, AK-203 राइफल फैक्ट्री, छोटे न्यूक्लियर रिएक्टर, सब कुछ. यह ऑर्डर रूस की डिफेंस इंडस्ट्री को चलाते हैं और लाखों लोगों की नौकरी बचाते हैं.
  • रूस का अकेलापन: यूरोप ने मुंह फेर लिया, अमेरिका दुश्मन है और ज्यादातर देश डर के मारे चुप हैं. सिर्फ भारत ही है जो दुनिया के सामने खुलकर पुतिन से गले मिलता है, फोटो खिंचवाता है और कहता है ये हमारा पुराना और सच्चा दोस्त है‘. रूस की छवि मजबूत करता है कि वो पूरी तरह अकेला नहीं है.
  • चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहता: रूस को डर है कि अगर वो सिर्फ चीन के साथ रहा तो चीन उस पर हावी हो जाएगा. भारत को पास रखकर रूस बैलेंस बनाता है. चीन को भी मैसेज जाता है कि हमारे पास दूसरा बड़ा दोस्त भी है‘.
  • BRICS और SCO में ताकत: इन ग्रुप्स में अगर भारत रूस का साथ छोड़ दे तो ये ग्रुप कमजोर पड़ जाएंगे. भारत के साथ रहने से रूस दिखा पाता है कि देखो, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी हमारे साथ है, हम गलत नहीं हैं‘.

रूस को पता है कि अगले 20-30 साल में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा. अभी से अच्छे रिश्ते बनाकर रखो तो बाद में तेल, गैस, हथियार, न्यूक्लियर प्लांट, डायमंड और स्पेस टेक्नोलॉजी सब में बड़ा बिजनेस मिलेगा.

[ad_2]

‘इस्लामिक कट्टरपंथी आसिम मुनीर भारत से जंग के लिए तड़पता है’, बोलीं इमरान खान की बहन

[ad_1]


पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन अलीमा खान ने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ आसिम मुनीर को कट्टरपंथी इस्लामवादी और इस्लामिक रूढ़ीवादी बताया है. उन्होंने कहा कि आसिम मुनीर भारत से जंग करने के लिए तड़पते हैं, जबकि उनके भाई इमरान खान ने हमेशा पड़ोसी मुल्क के साथ रिश्ते बेहतर करके दोस्ती करने की कोशिश की है. 

स्काई न्यूज के  ‘वर्ल्ड विद यालदा हकीम’ शो पर अलीमा खान ने ये बातें कहीं. उनसे सवाल किया गया कि मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष की क्या वजह थी. इस पर अलीमा ने पाक आर्मी चीफ को निशाने पर लिया और कहा, ‘आसिम मुनीर कट्टरपंथी इस्लामवादी और इस्लामिक रूढ़ीवादी हैं. यही वजह है कि वह भारत के साथ जंग के लिए तड़पते हैं. उनकी इस्लामिक कट्टरपंथी और रूढ़ीवादी सोच उन्हें उन लोगों के खिलाफ लड़ने के लिए उकसाती है जो इस्लाम से नहीं जुड़े हैं.’

अलीमा ने भाई इमरान खान को उदारवादी बताया और कहा, ‘जब भी इमरान खान सत्ता में आएंगे, तो आप देखेंगे कि वह हमेशा भारत और यहां तक की बीजेपी के साथ भी दोस्ताना संबंध बनाने की कोशिश करते हैं. और जब इस्लामिक रूढ़ीवादी आसिम मुनीर सत्ता में आएगा, आप देखोगे कि वह भारत के साथ जंग करेगा. न सिर्फ भारत बल्कि उसके सहयोगी देशों को भी नुकसान होगा.’ उन्होंने पश्चिमी देशों से अपील की है कि वह इमरान खान को रिहा करवाने में उनकी मदद करें.

22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च करके पाकिस्तान में मौजूद टेरर ग्रुप्स के आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था. इसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत के अलग-अलग शहरों में सैन्य ठिकानों पर हमले किए, लेकिन भारत ने उसकी सभी कोशिशों को नाकाम कर दिया था. 7-9 मई के बीच दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष देखा गया और 10 मई को दोनों मुल्क सीजफायर के लिए सहमत हो गए.

इमरान खान अगस्त, 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं. कुछ दिन पहले जेल में उनकी मौत की खबरें भी सामने आई थीं. हालांकि, 2 दिसंबर को उनकी बहन उजमा खान ने उनसे मुलाकात की और बताया कि इमरान खान शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं, लेकिन मेंटली उन्हें बहुत टॉर्चर किया जा रहा है. इमरान खान ने आसिम मुनीर पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनके साथ जेल में जानवरों से भी बुरा सुलूक किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी कंडिशंस में रखा जा रहा है, जिनमें मौत की सजा सुनाए जाने के बाद किसी दोषी को रखा जाता है.

आसिम मुनीर और इमरान खान के बीच विवाद 2019 से है. तब इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे और आसिम मुनीर आईएसआई चीफ. उस वक्त आसिम मुनीर भ्रष्टाचार के एक मामले में इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी के खिलाफ जांच करना चाहते थे, जिसके बाद इमरान खान ने उन्हें 8 महीने में ही आईएसआई चीफ के पद से हटा दिया था, जबकि उनका कार्यकाल तीन साल का था. इमरान खान ने बुशरा बीबी पर लगाए गए आसिम मुनीर के आरोपों को भी झूठा बताया है.

[ad_2]

बुलेटप्रूफ ब्रीफकेस, स्नाइपर और सीक्रेट एजेंट… पुतिन की ‘4-लेयर’ सिक्योरिटी जानकर रह जाएंगे द

[ad_1]


रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आ रहे हैं और उनके आगमन से पहले उनके सुरक्षा घेरों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. दुनिया के सबसे सुरक्षित राष्ट्राध्यक्षों में गिने जाने वाले पुतिन सामान्य परिस्थितियों में भी चार सुरक्षा घेरे में रहते हैं और भारत पहुंचने पर भी इसी मॉडल की सुरक्षा लागू किए जाने की संभावना है.

पुतिन की सुरक्षा कैसे होती है?
पुतिन की सुरक्षा प्रणाली को दुनिया की सबसे गुप्त और सबसे हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था माना जाता है. यह सुरक्षा चार लेयर में बंटी होती है, जिसमें हथियारबंद बॉडीगार्ड, स्नाइपर, हमशक्ल व्यक्ति, बुलेटप्रूफ ब्रीफकेस और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी शामिल होती है.

पहली लेयर: निजी बॉडीगार्ड
सबसे नजदीकी घेरा पुतिन के पर्सनल सिक्योरिटी एजेंटों का होता है. ये पुतिन के चारों ओर चलते हैं. इनके पास एक विशेष बुलेटप्रूफ ब्रीफकेस होता है. इनके पास 9 mm SR-1 वेक्टर पिस्तौल होती है, जो कवच भेदी गोलियों को भी झेल सकती है.

दूसरी लेयर: भीड़ में छिपी सुरक्षा
दूसरा सुरक्षा घेरा ऐसा होता है जो आम आंखों को नजर नहीं आता. यह सुरक्षा अधिकारी भीड़ में सामान्य व्यक्तियों की तरह घुलमिल कर रहते हैं और किसी भी संदिग्ध हरकत पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं.

तीसरी लेयर: चारों ओर घेरा और स्नाइपर
तीसरी लेयर में बॉडीगार्डों की दूसरी टीम और आसपास की इमारतों पर तैनात स्नाइपर शामिल होते हैं, जिनकी नजर हर दिशा में रहती है. यह लेयर किसी भी खतरे को सुरक्षा घेरे के पास आने से पहले ही निष्क्रिय करने की क्षमता रखती है.

चौथी लेयर: तकनीकी और खुफिया सुरक्षा
यह सुरक्षा लेयर महीनों पहले से सक्रिय हो जाती है. गंतव्य स्थान का निरीक्षण, मौसम और जोखिम रिपोर्ट, मोबाइल नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, बम डिफेंस जेमर सिस्टम की तैनाती जैसी चीजों के अलावा पुतिन के ठहरने और यात्रा क्षेत्रों में हर तकनीकी गतिविधि को स्कैन किया जाता है.

भारी गाड़ियों का काफिला
यात्रा के दौरान पुतिन के साथ बख्तरबंद गाड़ियों का काफिला चलता है, जिसमें AK-47, एंटी-टैंक ग्रेनेड लॉन्चर और पोर्टेबल एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों से लैस कमांडो मौजूद रहते हैं.

भारत दौरे के लिए तैयारियां
पुतिन के 4 दिसंबर को भारत आने की घोषणा के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी यात्रा मार्ग, ठहरने की जगह और कार्यक्रम स्थलों पर शुरुआती निरीक्षण शुरू कर दिया है. माना जा रहा है कि भारत में भी पुतिन अपनी इसी वैश्विक सुरक्षा प्रणाली के साथ यात्रा करेंगे.

[ad_2]

एक बार फिर बम धमाके से दहला पाकिस्तान, पुलिस की गाड़ी को बनाया गया निशाना, तीन की मौत

[ad_1]


पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा का डेरा इस्माइल खान इलाका बुधवार (3 दिसंबर 2025) को धमाके से दहल गया. एक पुलिस वाहन को निशाना बनाया गया, जिसमें असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) समेत तीन पुलिसकर्मी मारे गए. स्थानीय मीडिया ने जिला पुलिस प्रवक्ता याकूब ज़ुल्करनैन के हवाले से बताया कि इस धमाके में असिस्टेंट कमिश्नर की मौत हो गई.

बम धमाके में 3 पुलिस अधिकारी की मौत

याकूब ज़ुल्करनैन ने कहा, “पनियाला इलाके में धमाका करने के लिए एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस का इस्तेमाल किया गया था.” पाकिस्तानी मीडिया डॉन के मुताबिक पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि हमले में एएसआई गुल आलम, कांस्टेबल रफीक और मोबाइल वैन के ड्राइवर की मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद एक और कांस्टेबल को कोई चोट नहीं आई.

सुरक्षा बलों ने वारदात वाली जगह को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा, “पुलिस हमलावरों की तलाश कर रही है और मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है.” इसके अलावा, डीआई खान डीपीओ सज्जाद अहमद साहिबजादा के दफ्तर से जारी एक बयान में कहा गया कि यह हमला अज्ञात आतंकवादियों ने किया था.

लगातार दूसरे दिन पुलिस का काफिला बना निशाना

बयान में कहा गया कि डीपीओ ने मीडिया से भी बात की और कहा, “आतंकवादियों ने कायरतापूर्ण हमला किया है, लेकिन ऐसी हरकतें पुलिस का हौसला कम नहीं कर सकतीं.” एक दिन पहले ही खैबर पख्तूनख्वा में नॉर्थ वजीरिस्तान के असिस्टेंट कमिश्नर शाह वली खान के काफिले को निशाना बनाया गया था, जिसमें डीआई खान की मौत हो गई थी.

शाह वली खान अपनी टीम के साथ बन्नू-मीरनशाह रोड पर जा रहे थे, तभी हमलावरों ने मासूमाबाद ममंदखेल के पास उनके काफिले पर हमला किया. उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि हमले में उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिस वाले और एक राहगीर भी मारे गए. वारदात में शाह वली खान की सिक्योरिटी स्टाफ के दो सदस्यों और काफिले के ड्राइवर समेत तीन लोग घायल हो गए थे. सभी घायलों को इलाज के लिए हॉस्पिटल ले जाया गया.

खैबर पख्तूनख्वा में शहबाज सरकार का विरोध

पाकिस्तान में पिछले साल, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में सत्ता विरोधी गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने नवंबर 2022 में सरकार के साथ सीजफायर समझौता खत्म होने के बाद हमले तेज कर दिए हैं. खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मरवत जिले में सोमवार एक सिक्योरिटी गाड़ी को निशाना बनाकर किए गए एक सुसाइड ब्लास्ट में एक पुलिस वाला मारा गया था और तीन अन्य घायल हो गए थे.

इस बीच, इस्लामाबाद के सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (सीआरएसएस) ने अपनी सुरक्षा रिपोर्ट में बताया कि पाकिस्तान में 2025 की तीसरी तिमाही में सिक्योरिटी एरिया में कुल हिंसा में 46 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में इस दौरान 901 मौतें हुईं और 599 लोग घायल हुए. इनमें आम लोग, सुरक्षा कर्मी और अपराधी भी शामिल हैं.

[ad_2]

अफगानिस्तान में युवक को मिली तालिबानी सजा, 13 साल के बच्चे ने गोली मारकर लिया बदला

[ad_1]


अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत से एक दिल दहलाने वाला वीडियो सामने आया, जिसने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है. यहां हत्या के एक दोषी को सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई, जिसके बाद तालिबानी अधिकारों ने दोषी मंगल नाम के शख्स को 13 साल के बच्चे के हाथों गोली मरवा दी. एक बड़े स्पोर्ट्स स्टेडियम में सार्वजनिक रूप से इस घटना को अंजाम दिया गया, जिसे देखने के लिए करीब 80 हजार लोग पहुंचे थे. संयुक्त राष्ट्र ने इसे अमानवीय कृत्य करार देते हुए इसकी निंदा की है.

13 वर्षीय बच्चे ने परिवार के कातिल को मारी गोली

तालिबानियों ने 13 साल के एक बच्चे से स्टेडियम में सब के सामने दोषी शख्स को गोली करने के लिए कहा. उस बच्चे ने वैसा ही किया. दरअसल दोषी शख्स ने इसी बच्चे के परिवार के 13 लोगों की हत्या की थी, जिसमें कई बच्चें और महिलाएं भी शामिल थीं. इसके बाद अफगानिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उसे दोषी करार और तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने उसकी फांसी की मंजूरी दी.

यूएन ने इस घटना को क्रूर बताया

तालिबान अधिकारियों ने फांसी से पहले उस 13 साल के बच्चे से पूछा कि क्या वह आरोपी को माफ करना चाहता है तो बच्चे ने इनकार कर दिया. इसके बाद अधिकारी ने बच्चे को बंदूक देकर सामने खड़े शख्स पर गोली चलाने को कहा. खोस्त पुलिस के मुताबिक मरने और मारने वाले दोनों रिश्तेदार थे. न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक यूएन ने इस घटना को क्रूर और असामान्य सजा बताया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के उलट है.

इस साल के शुरुआत में लड़के के घर पर हुआ हमला

कोर्ट ने कहा कि पीड़ित परिवारों की ओर से माफी की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया. स्थानीय निवासी मुजीब रहमानी ने इस घटना को सही ठहराते हुए कहा कि अब भविष्य में कोई किसी को मारने की हिम्मत नहीं करेगा. आधिकारिक नोटिस में इस कार्यक्रम में जनता की उपस्थिति को प्रोत्साहित किया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक मंगल उन कई व्यक्तियों में शामिल था, जिसने जनवरी 2025 में एक घर पर हमला किया था, जिसमें तीन महिलाओं और समेत 13 लोगों की मौत हो गई थी.



[ad_2]

पाकिस्तान के लाहौर में 25 साल बाद पतंग उड़ाने की मिली इजाजत, जानें क्यों लगा था बैन

[ad_1]


लगभग ढाई दशक बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पतंगबाजी की वापसी हो गई है. सरकार ने बसंत उत्सव पर पतंग उड़ाने की अनुमति दे दी है, लेकिन इसके लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं. पंजाब के गवर्नर सरदार सलीम हैदर ने इस आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस फैसले के बाद पंजाब की सांस्कृतिक पहचान और परंपरा फिर से जीवंत होने की उम्मीद है.

नियमों के साथ मिली अनुमति
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब पतंगबाजी की जा सकती है, लेकिन केवल तय नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत. यह कदम संस्कृति को बचाने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. अगर कोई व्यक्ति कानून तोड़ता है, तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ेगा. नए कानून के अनुसार नियम तोड़ने वालों को कम से कम तीन साल और अधिकतम पांच साल तक की जेल हो सकती है. इसके साथ ही दो मिलियन रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है. पुलिस को संदिग्ध स्थानों और घरों की तलाशी लेने की अनुमति भी दी गई है और इस कानून में दर्ज मामले जमानती नहीं होंगे.

खतरनाक मांझे पर पूरी तरह रोक
सरकार ने केवल साधारण धागे का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है. धातु वाली डोर, केमिकल से लेपित धागा, कांच या ब्लेड जैसी धार वाला मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है. ऐसे धागे का इस्तेमाल करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी.

बच्चों के लिए भी नियम
18 साल से कम उम्र के बच्चों को पतंग उड़ाने की अनुमति नहीं होगी. अगर कोई नाबालिग पहली बार पतंग उड़ाता पकड़ा गया, तो उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और दूसरी बार नियम तोड़ने पर जुर्माना बढ़कर 1 लाख रुपये हो जाएगा. अगर भुगतान नहीं किया गया तो बच्चे के अभिभावक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

QR कोड से होगी निगरानी
सरकार ने पतंगबाजी को नियंत्रित तरीके से करने के लिए पंजीकरण प्रणाली लागू की है. पतंग बेचने वाले और मांझा बनाने वाले सभी दुकानदारों को सरकार के साथ रजिस्टर्ड होना पड़ेगा. हर पतंग और संबंधित दुकान पर QR कोड होगा ताकि नियमों की निगरानी की जा सके. इसके अलावा, पतंग उड़ाने वाले क्लबों को भी डिप्टी कमिश्नर के ऑफिस में पंजीकरण कराना होगा.सरकार ने यह भी कहा है कि नियम तोड़ने वालों की शिकायत करने वालों को प्रोत्साहन देने की व्यवस्था भी की जाएगी.

[ad_2]

एफबीआई ने मां-बेटे की हत्या के मामले में वांछित भारतीय नागरिक पर 50 हजार डॉलर का इनाम रखा

[ad_1]


अमेरिकी की संघीय जांच एजेंसी (FBI) ने 2017 में एक भारतीय महिला और उसके छह वर्षीय बेटे की हत्या के मामले में वांछित एक भारतीय नागरिक के बारे में सूचना देने पर 50,000 डॉलर तक का इनाम घोषित किया है. अधिकारियों ने भारत सरकार से संदिग्ध को अमेरिका प्रत्यर्पित करने की अपील की है.

नजीर हामिद (38) पर मार्च 2017 में न्यू जर्सी के मेपल शेड में शशिकला नारा (38) और उनके बेटे अनीश नारा की हत्या का आरोप है. इस साल फरवरी में हामिद पर हत्या के दो आरोप, अवैध हथियार रखने और उसे गैर-कानूनी उद्देश्य से इस्तेमाल करने के आरोप तय किए गए.

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, हामिद हत्या के छह महीने बाद भारत लौट गया था और वहीं रह रहा है. बर्लिंगटन काउंटी के अभियोजक कार्यालय ने एक बयान में बताया कि जांच के दौरान उसे मुख्य संदिग्ध माना गया क्योंकि वह मृतक महिला के पति हनुमंथ नारा का पीछा करता पाया गया.

एफबीआई की वांछित अपराधियों की सूची में उसका नाम दर्ज है और संघीय जांच एजेंसी ने उसकी गिरफ्तारी के लिए महत्वपूर्ण सूचना देने के लिए 50,000 डॉलर के इनाम की घोषणा की है. न्यू जर्सी के गवर्नर फिल मर्फी ने भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा को फोन और पत्र भेजकर हामिद के प्रत्यर्पण में भारत सरकार की सहायता मांगी है. उन्होंने कहा कि इस नृशंस अपराध ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था.

पुलिस को 23 मार्च 2017 की शाम को एक अपार्टमेंट में मां-बेटे के शव मिले. पोस्टमार्टम में पता चला कि दोनों की गर्दन पर कई गहरे घाव थे और अनीश का गला धड़ से लगभग अलग होने की अवस्था में था. पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि यह दृश्य भयावह था. हामिद उसी अपार्टमेंट में रहता था और उसी आईटी कंपनी में काम करता था जहां हनुमंथ नारा काम करते थे. अधिकारियों के अनुसार, ठोस प्रमाण है कि हामिद ने ही शशिकला और अनीश की हत्या की थी.

[ad_2]

Imran Khan News: ‘ओवन जैसी सेल, अंधेरे में अकेले रहता हूं’, बहन से मिलते ही भावुक हो गए इमरान

[ad_1]


रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार (2 दिसंबर, 2025) को बहन उजमा खान से मुलाकात की. 20-25 मिनट की मुलाकात में इमरान खान ने पाकिस्तान सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और खुफिया एजेंसी आईएसआई पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने आसिम मुनीर को दिमागी रूप से बीमार और इतिहास का सबसे जालीम तानाशाह बताया है.

इमरान खान से मुलाकात के बाद उजमा खान ने बताया कि उनके भाई शारीरिक रूप से तो स्वस्थ हैं, लेकिन उन्हें मानसिक तौर पर पर बहुत टॉर्चर किया जा रहा है. उजमा खान की मुलाकात के बाद इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके एक बयान जारी किया, जिसमें भाई-बहन की बातचीत का पूरा ब्योरा दिया गया है.

पोस्ट में बताया गया कि इमरान खान के साथ जेल में जानवरों से भी बुरा सुलूक किया जा रहा है. उनको ऐसी फैसिलिटी दी जा रही हैं, जो मौत की सजा पाए कैदियों को दी जाती हैं. पीटीआई ने कहा, ‘इमरान खान को मनमाने ढंग से 850 दिनों से हिरासत में रखा गया है. जनरल आसिम मुनीर के तहत तानाशाही मिलिट्री शासन ने यूएन मंडेला नियमों का उल्लंघन किया है. उन्हें परिवार और वकीलों से भी मिलने नहीं दिया जा रहा है.’

इमरान खान ने कहा कि आसिम मुनीर मानिसक रूप से बीमार, नैतिक तौर पर भ्रष्ट और पाकिस्तान के कानूनी और संवैधानिक ढांचे को नष्ट करने का जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि आसिम मुनीर ने उन्हें और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को झूठे आरोपों में जेल में डालने का आदेश दिया और उन्हें भीषण तरीके से मेंटली टॉर्चर किया जा रहा है. 

इमरान खान ने कहा, ‘मुझे कोठरी में बंद किया गया और एकांत कारावास में रखा गया है. चार हफ्ते तक मुझे किसी से मिलने नहीं दिया गया. यहां तक की जेल में मिलने वाली सामान्य सुविधाएं उन्हें देने से भी इनकार कर दिया गया.’ उन्होंने कहा, ‘सेना मेरे खिलाफ जो कुछ भी कर सकती थी, उसने कर लिया. अब उनके पास बस मुझे मार डालने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है.’

इमरान खान ने कहा कि आईएसआई उनकी कैद से जुड़े सभी एडमिनिस्ट्रेटिव मामलों को कंट्रोल करती है. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कुछ हुआ तो, उसके लिए आर्मी चीफ और डीजी आईएसआई जिम्मेदार होंगे. इमरान खान का कहना है कि उनकी सेल ओवन की तरह गर्म रहती है. पांच दिन तक उनकी सेल में बिजली नहीं थी और दिस दिन तक उन्हें सेल में बंद रखा गया.

[ad_2]