दो प्लेन, एक राष्ट्रपति… दुनिया देखती रह गई, पुतिन की सीक्रेट फ्लाइट का भेद दिल्ली पहुंचकर खुला

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Putin India Visit: गुरुवार का दिन ग्लोबल एविएशन वॉचर्स और विमान ट्रैकिंग विशेषज्ञों के लिए बेहद रोमांचक रहा. सभी की नजर आसमान में एक ही चीज पर थी औए वो था रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का प्रेसिडेंशियल एयरक्राफ्ट ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’. दो बिल्कुल एक जैसे रूसी विमान भारत की ओर बढ़ रहे थे और उन्होंने ऐसा खेल खेला कि पूरी दुनिया रोमांचित रही. कभी एक विमान का ट्रांसपॉन्डर ऑन होता, जिससे उसका सटीक स्थान दिखाई देता, तो दूसरा विमान गायब हो जाता. थोड़ी देर बाद दोनों विमानों की स्थिति बदल जाती, जिससे इस लुका-छिपी का खेल और भी रहस्यमयी बन गया.

करीब साढ़े छह घंटे तक चलने वाले इस खेल ने हजारों लोगों को विमान ट्रैक करते रहने पर मजबूर कर दिया. देर शाम, राष्ट्रपति पुतिन का फ्लाइंग क्रेमलिन दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंड हुआ. यहां उनका स्वागत खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. इसके बाद फ्लाइट ट्रैकिंग साइट Flightradar24 ने इसे दुनिया की सबसे ज्यादा ट्रैक की गई फ्लाइट घोषित किया.

रहस्यमयी खेल का कारण
पुतिन दुनिया के सबसे सुरक्षित नेताओं में से एक हैं और उनकी विदेश यात्राएं हमेशा मल्टी-लेयर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत होती हैं. इसका एक अहम हिस्सा डिकॉय एयरक्राफ्ट स्ट्रैटेजी है. इसका मकसद पुतिन को दुनिया की नजर से छिपाना और यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कीमत पर उनके विमान की पहचान न हो. गुरुवार को भी यही रणनीति अपनाई गई. पुतिन का खास प्रेसिडेंशियल एयरक्राफ्ट IL-96-300PU, जिसे दुनिया ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ के नाम से जानती है, ने अपने क्लोन एयरक्राफ्ट के साथ हवा में सस्पेंस पैदा किया.

ऑन-ऑफ ट्रांसपॉन्डर ने बढ़ाया रोमांच
फ्लाइंग क्रेमलिन ने करीब साढ़े छह घंटे तक आसमान में रहस्य बनाए रखा. इस दौरान दोनों विमानों के ट्रांसपॉन्डर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे. कभी एक विमान का ट्रांसपॉन्डर बंद, तो कभी दूसरे का. कभी दोनों विमान एक साथ दिखाई देते. दोनों विमान सिक्योर, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम, स्पेशल एंटी-मिसाइल टेक्नोलॉजी, एक्सटेंडेड रेंज, हाई-लेवल इलेक्ट्रॉनिक प्रोटेक्शन और सीक्रेट कमांड सेंटर से लैस थे. इन विमानों की गतिविधियों ने पूरी दुनिया में कौतूहल और रोमांच पैदा किया.

दिल्ली में लैंडिंग के बाद खत्म हुआ रहस्य
रूसी राष्ट्रपति पुतिन का फ्लाइंग क्रेमलिन देर शाम दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड हुआ. रेड कारपेट पर विमान के खड़े होते ही साफ हो गया कि पुतिन किस विमान में हैं. थोड़ी देर इंतजार के बाद विमान के दरवाजे खुले और राष्ट्रपति पुतिन बाहर आए, जिनका स्वागत खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया.

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पुतिन ने कारपूल को लेकर किया बड़ा खुलासा, ‘PM मोदी के साथ गाड़ी में बैठना मेरा….’

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भारत की धरती पर कदम रखने से कुछ घंटे पहले ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने क्रेमलिन के कैथरीन हॉल में एक ऐसा इंटरव्यू दिया, जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. पहली बार उन्होंने दो भारतीय महिला पत्रकारों को अपने निजी विचारों, भारत के प्रति भावनाओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों पर खुलकर बातचीत की. यह इंटरव्यू उसी समय आया है, जब भारत-रूस के रिश्ते एक नए मोड़ पर खड़े हैं और वैश्विक राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहा है. इस बातचीत के दौरान पुतिन ने SCO शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी के साथ की गई कार की सवारी की कहानी के पीछे का सच बताया.

तियानजिन में हुए SCO सम्मेलन के बाद जिस दिन प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन एक ही ऑरस सीनेट कार में बैठे दिखाई दिए थे, वह पल इतिहास का हिस्सा बन गया था. इस क्षण के बारे में पूछे गए सवाल पर पुतिन ने हल्के से हंसते हुए कहा कि इसमें किसी प्रकार की कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी. उन्होंने खुद ही प्रस्ताव दिया था कि दोनों एक साथ बैठकर चलें. उनके अनुसार यह कदम दोनों नेताओं के बीच निजी विश्वास और सहजता का प्रमाण था. पुतिन ने यह भी कहा कि यह सब बिना किसी योजना के हुआ. कार में बैठते ही बातचीत तेज़ी से शुरू हो गई और मंजिल पर पहुंचने के बाद भी बातचीत लगभग 45 मिनट तक जारी रहा.

मोदी का पोस्ट, पुतिन का इंतज़ार और लंबी बातचीत

SCO सम्मेलन से लौटते समय पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर पुतिन संग साझा तस्वीर पोस्ट की थी और लिखा था कि उनके साथ बातचीत हमेशा सीख देने वाली रहती है. उस दिन की रिपोर्टें बताती हैं कि पुतिन खुद प्रधानमंत्री को लेने के लिए करीब दस मिनट तक प्रतीक्षा करते रहे थे. सम्मेलन स्थल से होटल तक दोनों एक साथ गए और होटल पहुंचकर भी आधे घंटे से अधिक लंबी अनौपचारिक चर्चा चली. यह वह समय था, जब दुनिया भारत-अमेरिका संबंधों में हल्का तनाव देख रही थी, फिर भी भारत-रूस की गर्माहट पहले जैसी ही बनी रही.

अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच दोस्ती का यह संदेश क्यों महत्वपूर्ण है

हाल के दिनों में अमेरिका की तरफ से भारत पर रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर लगाए गए टैक्स और चेतावनियों से दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में तनातनी महसूस हो रही थी. इसके बावजूद पुतिन और पीएम मोदी की दोस्ती का यह नजारा जनमत और वैश्विक राजनीति दोनों को नया संकेत देता है कि भारत अपने कूटनीतिक निर्णयों को किसी दबाव में नहीं लेता. रूस के साथ उसका संबंध केवल रणनीतिक ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी मजबूत है.

ऐतिहासिक है यह भारत यात्रा

पुतिन का यह दौरा अपने साथ कई ऐतिहासिक संदर्भ लेकर आया है. 2021 के बाद पहली बार वह भारत की भूमि पर कदम रख रहे हैं. यह यात्रा भारत-रूस साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रही है और इसके साथ ही 23 वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है.

दौरे का पूरा कार्यक्रम

पुतिन के आगमन के साथ ही दिल्ली ने उन्हें विशेष मेहमान के रूप में सम्मान दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोटोकॉल की परंपरा तोड़कर खुद एयरपोर्ट जाकर स्वागत किया. उसके बाद पीएम आवास पर विशेष रात्रिभोज का आयोजन हुआ. आज दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल आमने-सामने बैठेंगे, जिसमें सैन्य सहयोग, तकनीक, ऊर्जा और व्यापार को लेकर कई नई दिशा-निर्देशक नीतियों पर सहमति बनने की उम्मीद है. दिन के अंत में दोनों नेता संयुक्त बयान भी जारी करेंगे.

ये भी पढ़ें: ‘इसमें ग्रेट जैसा कुछ नहीं क्योंकि भारत…’, G-7 में रूस के शामिल होने के सवाल पर पुतिन का क्लीयर जवाब

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‘अमेरिका खुद रूस से न्यूक्लियर फ्यूल खरीदता है और हमें ज्ञान…’, ट्रंप पर पुतिन का निशाना

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंच गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया और फिर दोनों नेता एक की कार में 7 लोक कल्याण मार्ग के लिए रवाना हो गए. दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति पुतिन का विमान लैंड हुआ. पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर पुतिन को गले लगाया और उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. स्वागत समारोह के दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने एयरपोर्ट पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी देखा और उसकी सराहना की.

रूसी तेल पर अमेरिका के रवैये पर पुतिन का निशाना

भारत दौरे से पहले व्लादिमीर पुतिन ने रूसी कच्चे तेल और एनर्जी के मुद्दे पर अमेरिका और पश्चिम देशों के रवैये पर सवाल उठाया. इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में पुतिन ने कहा कि अमेरिका अपने परमाणु प्लांट के लिए रूस से न्यूक्लियर फ्यूल खरीदता है, लेकिन भारत पर कच्चा तेल आयात करने के लिए प्रतिबंध लगाता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका हमसे परमाणु ऊर्जा खरीदता है और फिर हमें ज्ञान देता है.

पुतिन ने की पीएम मोदी की तारीफ

पुतिन ने पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि दुनिया ने भारत की मजबूत और स्पष्ट स्थिति देखी है. ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाया है, जिसके बाद भारत पर कुल टैरिफ 50 फीसदी हो गया. उस समय भी रूस ने ट्रंप के इस कदम की आलोचना की थी और कहा था कि कोई भी देश अपने हितों के लिए फैसले लेने के लिए आजाद है.

अमेरिका का टैरिफ नीति खतरनाक- पुतिन

पुतिन ने कहा, “अमेरिका और ट्रंप के आर्थिक सलाहकार मानते हैं कि इस तरह टैरिफ लगाने से उन्हें फायदा होगा, लेकिन हमारे जानकार मानते हैं इस तरह की नीतियां खतरनाक हैं. हमने कई ऐसा नहीं किया और न ही आगे करेगा. रूस खुली अर्थव्यवस्था पर विश्वास करता है. हम चाहते हैं कि वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन( WTO) के नियमों में संशोधन किया जाए.”

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3 हजार जवान, 3 वॉरशिप और 10 एयरक्राफ्ट… क्या है RELOS, जिस पर भारत-रूस ने लगाई मुहर?

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भारत और रुस के बीच हुए सैन्य समझौते के तहत दोनों देश एक दूसरे के सैन्य ठिकानों पर तीन हजार सैनिक, पांच जंगी जहाज (युद्धपोत) और 10 मिलिट्री एयरक्राफ्ट तैनात कर सकते हैं. इस तरह, हिंद महासागर में रूस अपनी मौजूदगी रख सकता है तो भारत सूदुर आर्टिक क्षेत्र में कदम रख सकता है.

पुतिन के भारत दौरे के दौरान, रूस की संसद (डूमा) ने भारत के साथ एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते को मंजूरी दी है, जिससे दोनों देशों को संयुक्त सैन्य अभ्यास, मानवीय सहायता और आपदा राहत के लिए एक-दूसरे के क्षेत्र में सैनिकों और उपकरणों को तैनात करने की अनुमति मिलेगी.

यह समझौता, जिसे रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक सपोर्ट (RELOS) कहा जाता है, दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित किया गया था और अब इसे रूस की संसद के निचले सदन, डूमा द्वारा अनुमोदित किया गया है.

दरअसल, आर्टिक क्षेत्र में तेल और खनिज की खोज के लिए भारत, इस सुदूर इलाके में अपनी मौजूदगी चाहता है क्योंकि आर्टिक क्षेत्र से रूस का एक लंबा बॉर्डर है, ऐसे में रूस के साथ ये लॉजिस्टिक करार किया गया है. इस क्षेत्र में जबरदस्त बर्फ पड़ती है और समुद्री-जहाज तक को बर्फ काटकर नौवहन करना पड़ता है. ऐसे में रूस ने भारत को इस तरह के क्षेत्र के लिए खास आइस-कटर जहाज बनाने के निर्माण तक में मदद करने का प्रस्ताव दिया है.

दूसरी तरफ रुस अकेला ऐसा पी-5 (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) देश है, जिसकी हिंद महासागर में कोई मौजूदगी नहीं है. ऐसे में भारत के साथ आरईएलएस करार कर रुस ने इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी पक्की कर ली है.

भारत और रूस की सेनाएं, साझा युद्धाभ्यास इंद्रा (इंडिया-रशिया) करती हैं. खास बात है कि रूस पहला ऐसा देश है जिसके साथ भारत की सेना के तीनों अंग, रूस की तीनों अंग यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना के साथ साझा मिलिट्री एक्सरसाइज करती हैं. इसका नाम भी इंद्रा है.

यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से दोनों देशों के बीच इंद्रा एक्सरसाइज रुक गई थी. लेकिन इस वर्ष एक बार फिर भारतीय सेना (थलसेना) और रूसी सेना के बीच ये युद्धाभ्यास, बीकानेर के करीब महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित की गई.

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शरीफ ने जरदारी से मुनीर को देश का पहला सीडीएफ नियुक्त करने का औपचारिक अनुरोध किया

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पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को पाकिस्तान का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) अपॉइंट करने की मंजूरी दे दी. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से देश के सेनाध्यक्ष (COAS) फील्ड मार्शल असीम मुनीर को पाकिस्तान के रक्षा बलों का कमांडर (CDF) नियुक्त करने का गुरुवार (4 दिसंबर 2025) को औपचारिक रूप से अनुरोध किया था.

राष्ट्रपति जरदारी ने CDF अपॉइंट करने की मंजूरी दी

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने पीएम शहबाज शरीफ की भेजी समरी के बाद मुनीर को सीडीएफ के तौर पर अपॉइंट करने की मंजूरी दे दी. पिछले महीने, संसद ने 27वें संविधान संशोधन को पारित किया, जिसमें सीडीएफ के पद को सृजित करने का प्रावधान किया गया.

चेयरमैन ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीजेसीएससी) का पद समाप्त कर यहां सीडीएफ का पद शुरू किया गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय के एक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने फील्ड मार्शल मुनीर को सेना प्रमुख और सीडीएफ के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी और फिर इसे राष्ट्रपति भवन को भेज दिया.

तानाशाह बना आसिम मुनीर

पाकिस्तान राष्ट्रपति ऑफिस से जारी एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अब चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का ऑफिस भी संभालेंगे. राष्ट्रपति जरदारी ने पीएम शहबाज शरीफ की भेजी समरी के बाद मुनीर को CDF के तौर पर अपॉइंट करने की मंजूरी दे दी. नए रोल में मुनीर का कार्यकाल पांच साल का होगा. इससे मुनीर पहले मिलिट्री ऑफिसर बन गए हैं जो एक ही समय में COAS और CDF दोनों पद संभालेंगे.

पाकिस्तान में 27वें संविधान संशोधन के तहत मुनीर को पावरफुल बनाने पर पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई थी. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रमुख वोल्कर टर्क पाकिस्तान में जल्दबाजी में किए गए ये संशोधन न्यायपालिका की स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं. उनके अनुसार, इस कदम से सेना का दखल बढ़ने और नागरिक सरकार की भूमिका कमजोर होने की आशंका मजबूत होती है, जो कानून के शासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

पाकिस्तान की जनता पर सेना का जुल्म

पाकिस्तान के हुक्मरान सेना को तो ताकतवर बनाने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन स्थानीय बलों या अर्धसैनिक बलों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. आर्मी चीफ असीम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा बेहद खराब है. पाकिस्तान के रसूखदार पदों, खासकर सेना पर पंजाब प्रांत का दबदबा है, जबकि छोटे प्रांतों को हाशिए पर धकेल दिया गया है.

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‘इसमें ग्रेट जैसा कुछ नहीं क्योंकि भारत…’, G-7 में रूस के शामिल होने के सवाल पर पुतिन का क्ली

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया. दोनों नेताओं ने एयरपोर्ट पर एक-दूसरे को गले लगाया और गर्मजोशी से अभिवादन किया. पीएम मोदी ने अपने आवास पर पुतिन के लिए डिनर की मेजबानी की. पुतिन के इस दौरे के दौरान डिफेंस डील समेत कई मुद्दों पर सहमति बनने की उम्मीद है. ट्रंप के टैरिफ के बाद से वर्ल्ड ऑर्डर में बड़ा बदवाल देखने को मिल रहा है. इस बीच पुतिन ने जी-7 देशों पर तंज कसा और भारत की जमकर तारीफ की.

इसमें ग्रेट जैसा कुछ नहीं: पुतिन

भारत दौरे से पहले इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में जी-8 में रूस के शामिल होने वाले सवाल पर पुतिन ने कहा कि वे इस बैठक में जाना पहले की छोड़ चुके थे. रूसी राष्ट्रपति ने कहा, मैं ये नहीं समझ पा रहा हूं कि जी-7 देश खुद को जी-7 क्यों कहते हैं. जी यानी ग्रेट, लेकिन जरा सोचिए आज भारत खरीद शक्ति के आधार पर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था है तो फिर क्षमता के लिहाज से यूके या कुछ और देशों की स्थिति क्या है? मुझे ये थोड़ा अजीब लगता है. हालांकि ठीक है उनका अधिकार है खुद को जो कहने चाहें कहें.

पश्चिम देशों की अर्थव्यवस्था पर पुतिन का बयान 

पुतिन ने कहा, “इन देशों (वेस्टर्स) की अर्थव्यवस्थाएं हाईटेक है. उनकी नींव मजबूत है, लेकिन इसके बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था में उनकी हिस्सेदारी लगातार घट रही है और ये रुझान आगे भी जारी रहेगा क्योंकि ये उनकी सरकारों की गलत नीतियों के कारण हो रहा है. जर्मनी की बात करें तो वह तीन साल से मंदी का शिकार है. फ्रांस की हालत काफी खराब है और वह भी मंदी के बिल्कुल करीब है. यही स्थिति कई अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की भी है.

मोदी-पुतिन के बीच रक्षा सहयोग पर होगी चर्चा

पुतिन की भारत यात्रा के दौरान व्यापार और आर्थिक सहयोग के प्रमुख पहलुओं पर चर्चा की जाएगी और कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. 2022 में यूक्रेन के साथ रूस का युद्ध शुरू होने के बाद से यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है. इस शिखर सम्मेलन में रक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ व्यापार और ऊर्जा साझेदारी पर भी चर्चा होगी. शुक्रवार को हैदराबाद हाउस में होने वाली औपचारिक बैठक से पहले रूसी राष्ट्रपति का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया जाएगा.

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4 साल बाद भारत में पुतिन, PM मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ खुद किया रिसीव; एक ही गाड़ी से हुए रवाना

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चार साल बाद भारत पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर खुद रिसीव किया. दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और गले मिले. पीएम मोदी के साथ एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह, रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार भी मौजूद रहे. पीएम मोदी और पुतिन एक गाड़ी में बैठकर 7LKM रवाना हुए. मोदी फॉर्च्यूनर कार में बायीं ओर और पुतिन दाहिनी ओर बैठे. इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन को गॉर्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया. 

रूस-यूक्रेन जंग के शुरू होने क बाद से पुतिन का यह पहला भारत दौरा है. उन्हें रिसीव करने सबसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफिले के साथ एयरपोर्ट पहुंचे. प्रधानमंत्री आज उनके सम्मान में एक प्राइवेट डिनर की मेजबानी भी करेंगे. 

पुतिन भारत में अगले तीस घंटे तक रहेंगे. उनके भारत पहुंचने से पहले ही रूस के कई मंत्री दिल्ली पहुंच चुके हैं. इनमें उप प्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव, रक्षामंत्री सर्गेई शोइगु और कृषि मंत्री दिमित्री पेट्रोव भी शामिल हैं. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 नेताओं को इससे पहले रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे थे. इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, जापान के शिंजो आबे, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और कतर के अमीर शेख तमीन बिन हमद अल थानी शामिल हैं. 

‘रूस व्यापार में रूचि रखता है’

रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने कहा कि रूस व्यापार आदान-प्रदान बढ़ाने में रुचि रखता है. हम रूसी बाजार में भारतीय उत्पादों की आपूर्ति बढ़ाने और व्यापार संतुलन में रुचि रखते हैं. हम भारतीय उत्पादों को खरीदने में बहुत रुचि रखते हैं.

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह क्या बोले?

पुतिन के आने से पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का भी बयान आया. उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बावजूद, हमारा इंडिया-रशिया डिफेंस कोऑपरेशन अच्छी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. हमारे आर्म्ड फोर्सेज के जवानों और एक्सपर्ट्स के बीच नतीजों पर आधारित बातचीत ने हमारी डिफेंस पार्टनरशिप की रफ्तार बनाए रखी है.



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रूस की 14 करोड़ आबादी में कितने फीसदी मुस्लिम, तेजी से क्यों फैल रहा इस्लाम?

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रूस में इस्लाम धर्म तेजी से बढ़ रहा है. 2025 में रूस की कुल आबादी 14.30 करोड़ है, जिसमें 2.14 करोड़ (करीब15%) आबादी मुस्लिम है. हालांकि, आंकड़ों कुछ अलग हो सकते हैं क्योंकि आधिकारिक जनगणना धार्मिक पहचान पर आधारित नहीं होती है. रूस में मुस्लिम आबादी का अनुमान कई स्त्रोत और रिपोर्ट्स से आते हैं. प्यू रिसर्च के मुताबिक, 2030 तक रूस में मुस्लिम आबादी 18.6 करोड़ हो जाएगी.

सोवियत यूनियन में मुस्लिमों पर सख्ती थी
बहुत पुराने समय से रूस एक बड़ा और विविध देश रहा है. यहां ज्यादातर ईसाई स्लाव लोग सदियों से रहते आए हैं. लेकिन रूस के दक्षिणी इलाकों जैसे चेचन्या, दागेस्तान और तातारस्तान में मुसलमान हमेशा से बसे हुए हैं. सोवियत यूनियन के समय (1917-1991) में धर्म पर सख्ती थी, इसलिए मुस्लिम परिवार चुपचाप अपनी परंपराएं निभाते रहे. लेकिन जब 1991 में सोवियत यूनियन टूटा, तो सब कुछ बदल गया. मुस्लिम समुदाय को फिर से अपनी पहचान मिली और धीरे-धीरे उनकी तादाद बढ़ने लगी.

रूस में कैसे बढ़ने लगी मुस्लिम आबादी
पोनर्स यूरेशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 1990 के दशक की शुरुआत में रूस की कुल आबादी करीब 148 मिलियन थी. इसमें मुस्लिमों की संख्या अनुमानित 14-16 मिलियन थी, यानी कुल आबादी का लगभग 10% था. फिर यह तादाद लगातार बढ़ने लगी. इसकी दो वजहें हैं…

  • पहली वजह मुस्लिम परिवारों में बच्चे ज्यादा पैदा होते रहे. रूस के मुस्लिम बहुल इलाकों में जन्म दर राष्ट्रीय औसत से ऊपर थी. करीब 2.3 बच्चे प्रति महिला पर थे, जबकि पूरे रूस में यह 1.4 के आसपास रहा.
  • दूसरी वजह माइग्रेशन है. मध्य एशिया के देशों जैसे उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और कजाकिस्तान से लाखों लोग काम की तलाश में रूस आते थे. यह ज्यादातर मुसलमान थे और वह मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे बड़े शहरों में बस जाते थे. 2010 तक मॉस्को में ही 1 मिलियन से ज्यादा मुस्लिम रहने लगे. 

पोनर्स यूरेशिया के मुताबिक, समय बीतता गया और 2010 में मुस्लिम आबादी 1.6 करोड़ हो गई, यानी 11.7%. लेकिन रूस की कुल आबादी घट रही थी. जन्म कम और मौतें ज्यादा. मुस्लिम इलाकों में परिवार मजबूत थे, बच्चे ज्यादा और नए लोग आते रहे. 

रूसी पब्लिक ओपिनियन रिसर्च सेंटर (VCIOM) के सर्वे के मुताबिक, 7% रूसी खुद को मुस्लिम बताते हैं. लेकिन मुस्लिम लीडर्स जैसे चीफ मुफ्ती रवील गैनुटदिन का अनुमान ज्यादा है. वह रूस की कुल आबादी में 17% मुस्लिम आबादी बताते हैं यानी पूरे रूस में 25 मिलियन यानी ढाई करोड़ मुसलमान हैं.

रूस में मुस्लिम आबादी कितनी तेजी से बढ़ रही है?
पोनर्स एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस में मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर सालाना 0.6% से 1-2% तक है, जो रूस की कुल आबादी के घटने (-0.2%) से कहीं तेज है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2030 तक मुस्लिम आबादी 18.6 मिलियन (14.4%) हो सकती है. 

लेकिन यह सब जन्म दर और माइग्रेशन पर निर्भर है. अगर मध्य एशिया से लोग कम आए या मुस्लिम इलाकों में भी जन्म घटे तो संख्या कम हो सकती है. पोनर्स एशिया जैसे थिंक टैंक कहते हैं कि यह रूस को ज्यादा विविध बनाएगा. उत्तरी काकेशस को शांत रखेगा, विदेश नीति बदलेगा और रूसी पहचान को नया रूप देगा.

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Putin India Visit: ‘ट्रंप का दबाव बेअसर, मोदी प्रेशर में आने वाले नेता नहीं…’, भारत आने से पह

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर आ रहे हैं. अपने भारत दौरे के दौरान वो कई बड़े समझौते साइन कर सकते हैं. इसी बीच भारत पर अमेरिका की तरफ से लगाए टैरिफ को लेकर उन्होंने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दबाव में आने वाले नेता नहीं हैं. यह बयान उन्होंने उस सवाल के जवाब में दिया जिसमें पूछा गया था कि क्या अमेरिका भारत पर टैरिफ के जरिए दबाव डाल रहा है. 

पुतिन ने PM मोदी की नेतृत्व क्षमता की सराहना की
पुतिन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता और भारत-रूस संबंधों के भविष्य के बारे में भी पूछा गया. इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि दुनिया ने भारत की अडिग नीति देखी है और देश को अपने नेतृत्व पर गर्व होना चाहिए. पुतिन ने यह भी बताया कि भारत और रूस के बीच 90 प्रतिशत से अधिक द्विपक्षीय लेन देन सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं.

मोदी से मित्रता और आगामी भारत दौरा
पुतिन ने कहा कि उन्हें अपने  मित्र, प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए यात्रा करने में बहुत खुशी हो रही है. उन्होंने यह भी बताया कि दोनों नेताओं ने अगली बैठक भारत में आयोजित करने पर सहमति जताई है.

भारत-रूस सहयोग और ऐतिहासिक संबंध
पुतिन ने कहा कि बहुत सारी बातें चर्चा के लिए हैं, क्योंकि भारत और रूस के बीच सहयोग का दायरा बहुत व्यापक है. उन्होंने दोनों देशों के बीच के विशिष्ट ऐतिहासिक संबंधों को भी रेखांकित किया. उन्होंने भारत की आजादी के बाद की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि सिर्फ 77 साल के अल्प समय में, देश ने अद्भुत विकास हासिल किया है.

बता दें कि पुतिन अब तक भारत के नौ दौरे कर चुके हैं, जिनमें से तीन मोदी के कार्यकाल में (2016, 2018 और 2021) हुए. दिसंबर में यह उनका दसवां दौरा होगा. वहीं प्रधानमंत्री मोदी सात बार रूस जा चुके हैं. 

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इतना सस्ता है रशियन रूबल…. डॉलर के मुकाबले भारत में कितनी है रूसी करेंसी की कीमत?

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार (4 दिसंबर, 2025) को भारत के दो दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं. चार साल बाद यह पुतिन का भारत दौरा है. उनके इस दौरे को भारत के लिए बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें व्यापार, रक्षा और ऊर्जा को लेकर कई अहम समझौते होने हैं. व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती की बातें पूरी दुनिया करती है. अगस्त में चीन में हुए एससीओ समिट में भी दोनों नेता जिस गर्मजोशी से मिले, उसने बहुत से देशों की बेचैनी बढ़ा दी थी. अब फिर जब दोनों नेता मुलाकात करने वाले हैं तो कई देशों की निगाहें इस मीटिंग पर टिकी हैं.

अमेरिका, चीन, पाकिस्तान और यूक्रेन की खास तौर पर पुतिन के दौरे पर नजर है. पुतिन के दौरे से कुछ दिन पहले ही भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी खबर आई थी. भारत की जीडीपी जुलाई से सितंबर में 8.2 प्रतिशत की ग्रोथ रेट के साथ बढ़ी है. इस समय भारत  4.3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि रूस नौवें नंबर पर है. रूस की जीडीपी 2.54 ट्रिलियन डॉलर है. 

अब रूसी करेंसी और भारतीय रुपये की तुलना करें तो इसमें बहुत मामूली सा अंतर है. Xe कंवर्टर के अनुसार एक रूसी रूबल की वैल्यू भारत में 1.16 रुपये के बराबर है, यानी दोनों में सिर्फ 16 पैसे का ही अंतर है. रूसी रूबल की कीमत भारतीय रुपये से 16 पैसे ज्यादा है. भारत का एक रुपया वहां 0.85 रूसी रूबल के बराबर है. डॉलर से तुलना की जाए तो एक डॉलर की कीमत 77.20 रूसी रूबल के बराबर है, जबकि एक डॉलर भारत में 90 रुपये के बराबर है. 

व्लादिमीर पुतिन आखिरी बार साल 2021 में भारत आए थे. वह भारत-रूस एनुअल समिट के लिए यहां आए थे. हालांकि, पुतिन और पीएम मोदी इसी साल अगस्त में चीन के शहर तियांजिन में मिले थे. 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच चीन में एससीओ समिट हुआ था, जिसमें पुतिन, पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की दोस्ती की खूब चर्चा हुई थी. तीनों साथ में हंसते, मजाक करते और गले मिलते नजर आए थे.

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