Jio या Airtel! दिल्ली में किसका चलता है राज? स्पीड टेस्ट के नतीजे देखकर आपके भी उड़ जाएंगे होश

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रिपोर्ट के अनुसार डाउनलोड स्पीड में इस बार Reliance Jio ने सभी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया. जियो की औसत डाउनलोड स्पीड 249 Mbps के करीब पहुंच गई जो राजधानी में सबसे तेज मानी गई. एयरटेल भी ज्यादा पीछे नहीं रहा और 234 Mbps की मजबूत डाउनलोड स्पीड दिखाकर दूसरा स्थान हासिल किया.

रिपोर्ट के अनुसार डाउनलोड स्पीड में इस बार Reliance Jio ने सभी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया. जियो की औसत डाउनलोड स्पीड 249 Mbps के करीब पहुंच गई जो राजधानी में सबसे तेज मानी गई. एयरटेल भी ज्यादा पीछे नहीं रहा और 234 Mbps की मजबूत डाउनलोड स्पीड दिखाकर दूसरा स्थान हासिल किया.

वहीं, Vi और MTNL की स्पीड काफी कम रही जिनकी औसत डाउनलोड स्पीड क्रमशः लगभग 24 Mbps और 5 Mbps दर्ज की गई. साफ है कि डाउनलोडिंग के मामले में दिल्ली में जियो का दबदबा कायम है.

वहीं, Vi और MTNL की स्पीड काफी कम रही जिनकी औसत डाउनलोड स्पीड क्रमशः लगभग 24 Mbps और 5 Mbps दर्ज की गई. साफ है कि डाउनलोडिंग के मामले में दिल्ली में जियो का दबदबा कायम है.

जब बात अपलोड स्पीड की आई तो तस्वीर बदल गई. एयरटेल इस श्रेणी में सबसे आगे निकला और 31.83 Mbps की औसत अपलोड स्पीड के साथ पहला स्थान हासिल किया. जियो यहां थोड़ा पीछे रह गया जहां उसकी अपलोड स्पीड करीब 26 Mbps रही. MTNL और Vi की अपलोड स्पीड काफी कमजोर रही जिससे पता चलता है कि अपलोडिंग के समय यूजर्स को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

जब बात अपलोड स्पीड की आई तो तस्वीर बदल गई. एयरटेल इस श्रेणी में सबसे आगे निकला और 31.83 Mbps की औसत अपलोड स्पीड के साथ पहला स्थान हासिल किया. जियो यहां थोड़ा पीछे रह गया जहां उसकी अपलोड स्पीड करीब 26 Mbps रही. MTNL और Vi की अपलोड स्पीड काफी कमजोर रही जिससे पता चलता है कि अपलोडिंग के समय यूजर्स को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

वॉयस कॉलिंग परफॉर्मेंस में Airtel और Jio लगभग कंधे-से-कंधा मिलाते दिखाई दिए. एयरटेल का कॉल सेटअप सक्सेस रेट 99.50% रहा जबकि जियो का 99.30%. वहीं Vi और MTNL इस मामले में काफी पीछे रह गए. इसका मतलब है कि कॉल कनेक्ट होने की विश्वसनीयता में जियो और एयरटेल अब भी सबसे भरोसेमंद विकल्प हैं.

वॉयस कॉलिंग परफॉर्मेंस में Airtel और Jio लगभग कंधे-से-कंधा मिलाते दिखाई दिए. एयरटेल का कॉल सेटअप सक्सेस रेट 99.50% रहा जबकि जियो का 99.30%. वहीं Vi और MTNL इस मामले में काफी पीछे रह गए. इसका मतलब है कि कॉल कनेक्ट होने की विश्वसनीयता में जियो और एयरटेल अब भी सबसे भरोसेमंद विकल्प हैं.

TRAI समय-समय पर ऐसे आंकड़े जारी करता रहता है और अक्सर ट्रेंड यही बताता है कि दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में ज्यादातर मापदंडों पर जियो और एयरटेल ही शीर्ष पर रहते हैं. खास बात यह भी है कि भले ही दिल्ली में MTNL का संचालन बैकएंड में BSNL करता है फिर भी इन रिपोर्टों में इसे MTNL के नाम से ही शामिल किया जाता है.

TRAI समय-समय पर ऐसे आंकड़े जारी करता रहता है और अक्सर ट्रेंड यही बताता है कि दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में ज्यादातर मापदंडों पर जियो और एयरटेल ही शीर्ष पर रहते हैं. खास बात यह भी है कि भले ही दिल्ली में MTNL का संचालन बैकएंड में BSNL करता है फिर भी इन रिपोर्टों में इसे MTNL के नाम से ही शामिल किया जाता है.

BSNL ने हाल ही में दिल्ली में अपना 4G शुरू किया है और जल्द ही 5G सेवाएं भी लॉन्च करने की तैयारी में है. इस हिसाब से दिल्ली में डाउनलोड स्पीड की बात हो तो जियो का सिक्का चलता है जबकि अपलोड स्पीड और कॉलिंग स्थिरता में एयरटेल आगे दिखता है.

BSNL ने हाल ही में दिल्ली में अपना 4G शुरू किया है और जल्द ही 5G सेवाएं भी लॉन्च करने की तैयारी में है. इस हिसाब से दिल्ली में डाउनलोड स्पीड की बात हो तो जियो का सिक्का चलता है जबकि अपलोड स्पीड और कॉलिंग स्थिरता में एयरटेल आगे दिखता है.

Published at : 29 Nov 2025 11:33 AM (IST)

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सरकार की सख्त चेतावनी! WhatsApp पर ये गलती की तो सीधा जेल, एक मेसेज आपकी ज़िंदगी बदल सकता है

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इस ठगी की शुरुआत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैले ऐसे विज्ञापनों से होती है जो ऑनलाइन कमाई का झांसा देते हैं. स्कैमर्स आपसे संपर्क करते हैं और बताते हैं कि आपको सिर्फ एक छोटा-सा डिजिटल टास्क करना है. इसके बाद वे आपको एक ऐसी वेबसाइट या ऐप पर ले जाते हैं जहां एक WhatsApp Web का QR कोड दिखाया जाता है.

इस ठगी की शुरुआत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैले ऐसे विज्ञापनों से होती है जो ऑनलाइन कमाई का झांसा देते हैं. स्कैमर्स आपसे संपर्क करते हैं और बताते हैं कि आपको सिर्फ एक छोटा-सा डिजिटल टास्क करना है. इसके बाद वे आपको एक ऐसी वेबसाइट या ऐप पर ले जाते हैं जहां एक WhatsApp Web का QR कोड दिखाया जाता है.

वे इसे स्कैन करने को कहते हैं मानो यह किसी रजिस्ट्रेशन की पुष्टि हो. लेकिन जैसे ही आप इसे स्कैन करते हैं आपका WhatsApp किसी अनजान डिवाइस से लिंक हो जाता है ठीक उसी तरह जैसे आप खुद लैपटॉप पर WhatsApp Web चलाते हैं.

वे इसे स्कैन करने को कहते हैं मानो यह किसी रजिस्ट्रेशन की पुष्टि हो. लेकिन जैसे ही आप इसे स्कैन करते हैं आपका WhatsApp किसी अनजान डिवाइस से लिंक हो जाता है ठीक उसी तरह जैसे आप खुद लैपटॉप पर WhatsApp Web चलाते हैं.

बात यहीं खत्म नहीं होती. एक बार जब स्कैमर का डिवाइस आपके WhatsApp से जुड़ जाता है तो उसे आपकी चैट, कॉन्टैक्ट्स, मैसेज भेजने और अकाउंट के दुरुपयोग की पूरी आजादी मिल जाती है. यह सब चुपचाप होता है, बिना किसी अलर्ट के और आपको पता भी नहीं चलता कि आपका अकाउंट किसी और के नियंत्रण में जा चुका है. यही कारण है कि इस स्कैम को 'WhatsApp Mule Scam' कहा जा रहा है क्योंकि स्कैमर्स आपके नंबर का इस्तेमाल करके दुनिया भर में फ्रॉड करते हैं, जबकि फंसने वाला असली व्यक्ति आप बनते हैं.

बात यहीं खत्म नहीं होती. एक बार जब स्कैमर का डिवाइस आपके WhatsApp से जुड़ जाता है तो उसे आपकी चैट, कॉन्टैक्ट्स, मैसेज भेजने और अकाउंट के दुरुपयोग की पूरी आजादी मिल जाती है. यह सब चुपचाप होता है, बिना किसी अलर्ट के और आपको पता भी नहीं चलता कि आपका अकाउंट किसी और के नियंत्रण में जा चुका है. यही कारण है कि इस स्कैम को ‘WhatsApp Mule Scam’ कहा जा रहा है क्योंकि स्कैमर्स आपके नंबर का इस्तेमाल करके दुनिया भर में फ्रॉड करते हैं, जबकि फंसने वाला असली व्यक्ति आप बनते हैं.

I4C के मुताबिक, इन म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल इंटरनेशनल ठगी के लिए किया जाता है. स्कैमर्स आपके नाम से लोगों को फिशिंग लिंक्स भेजते हैं, पैसों की डिमांड करते हैं या कोई निवेश धोखा रचते हैं. चूंकि मैसेज आपके नंबर से जाते हैं, पीड़ित लोग आसानी से भरोसा कर लेते हैं. और जब पुलिस जांच करती है तो निशाना आपका नंबर बनता है जिससे कानूनी मुसीबत सीधे आपके सिर आ सकती है.

I4C के मुताबिक, इन म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल इंटरनेशनल ठगी के लिए किया जाता है. स्कैमर्स आपके नाम से लोगों को फिशिंग लिंक्स भेजते हैं, पैसों की डिमांड करते हैं या कोई निवेश धोखा रचते हैं. चूंकि मैसेज आपके नंबर से जाते हैं, पीड़ित लोग आसानी से भरोसा कर लेते हैं. और जब पुलिस जांच करती है तो निशाना आपका नंबर बनता है जिससे कानूनी मुसीबत सीधे आपके सिर आ सकती है.

ऐसे मामलों से बचने के लिए सतर्क रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है. किसी भी अनजान QR कोड को स्कैन न करें, चाहे ऑफर कितना भी आकर्षक क्यों न लगे. WhatsApp की सेटिंग्स में जाकर ‘Linked Devices’ जरूर चेक करते रहें और अगर कोई अनजान डिवाइस दिखे तो तुरंत लॉग आउट कर दें.

ऐसे मामलों से बचने के लिए सतर्क रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है. किसी भी अनजान QR कोड को स्कैन न करें, चाहे ऑफर कितना भी आकर्षक क्यों न लगे. WhatsApp की सेटिंग्स में जाकर ‘Linked Devices’ जरूर चेक करते रहें और अगर कोई अनजान डिवाइस दिखे तो तुरंत लॉग आउट कर दें.

साथ ही टू-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन रखना बेहद जरूरी है ताकि आपका अकाउंट ज्यादा सुरक्षित रहे. याद रखें असली कंपनियां कभी भी आपसे WhatsApp अकाउंट लिंक करने या किराए पर देने की मांग नहीं करतीं. कुछ पैसों के लालच में अपनी डिजिटल पहचान को जोखिम में डालना बेहद खतरनाक हो सकता है.

साथ ही टू-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन रखना बेहद जरूरी है ताकि आपका अकाउंट ज्यादा सुरक्षित रहे. याद रखें असली कंपनियां कभी भी आपसे WhatsApp अकाउंट लिंक करने या किराए पर देने की मांग नहीं करतीं. कुछ पैसों के लालच में अपनी डिजिटल पहचान को जोखिम में डालना बेहद खतरनाक हो सकता है.

Published at : 29 Nov 2025 01:57 PM (IST)

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TECH EXPLAINED: क्या होता है VPN? जानिए कैसे करता है काम और क्यों इसे ट्रैक करना होता है मुश्कि

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What is VPN: कभी आपने सोचा है कि इंटरनेट पर आपकी हर गतिविधि कोई न कोई देख रहा होता है चाहे आपका इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) हो, कोई वेबसाइट हो या फिर कोई हैकर? ऐसे में अपनी ऑनलाइन प्राइवेसी और सुरक्षा को बचाने के लिए लोग जिस तकनीक पर सबसे ज़्यादा भरोसा करते हैं वह है VPN (Virtual Private Network). आज हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि VPN क्या है, कैसे काम करता है और इसे ट्रैक करना इतना मुश्किल क्यों होता है.

VPN क्या होता है?

VPN यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क एक ऐसी तकनीक है जो आपके इंटरनेट कनेक्शन को सुरक्षित बनाती है और आपकी पहचान यानी IP Address को छिपा देती है. यह आपके डिवाइस और इंटरनेट के बीच एक सुरक्षित सुरंग (Encrypted Tunnel) तैयार करता है जिसके अंदर आपकी सभी ऑनलाइन गतिविधियां छिपी रहती हैं.

इसे ऐसे समझिए जैसे कोई कांच की ट्यूब हो जिसके अंदर से आपकी सारी ऑनलाइन जानकारी गुजर रही हो और बाहर से कोई भी यह नहीं देख सकता कि अंदर क्या चल रहा है.

VPN कैसे काम करता है? इसके पीछे की असली प्रक्रिया

जब आप बिना VPN इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तो आपका डेटा सीधे आपके इंटरनेट प्रोवाइडर से होकर वेबसाइट तक पहुँचता है. इस दौरान कई लोग आपकी जानकारी देख सकते हैं. लेकिन जब आप VPN ऑन करते हैं तो कनेक्शन का पूरा रास्ता बदल जाता है. इसकी प्रक्रिया कुछ इस तरह होती है.

डेटा का एन्क्रिप्शन (Encryption)

VPN आपकी सभी ऑनलाइन जानकारी को कोडेड फॉर्म में बदल देता है. यह कोड इतना जटिल होता है कि कोई हैकर या थर्ड पार्टी इसे समझ नहीं सकती. ये एन्क्रिप्शन इतना मजबूत होता है कि इसे तोड़ने में सुपरकंप्यूटर को भी लाखों साल लग सकते हैं.

VPN सर्वर से कनेक्शन

आपका असली IP Address छिप जाता है और उसकी जगह VPN सर्वर का IP दिखने लगता है. मान लीजिए आप इंडिया में बैठे हैं लेकिन VPN का सर्वर USA चुन लेते हैं तो इंटरनेट को लगेगा कि आप अमेरिका से ऑनलाइन हैं. यही कारण है कि लोग कई बार जियो-रिस्ट्रिक्टेड कंटेंट देखने के लिए VPN का इस्तेमाल करते हैं.

सुरक्षित टनलिंग (Tunneling)

VPN एक ऐसी वर्चुअल टनल बनाता है जिससे होकर आपका डेटा गुजरता है. बाहर से कोई भी उस टनल में झांक नहीं सकता. यह प्रक्रिया आपके इंटरनेट को और भी सुरक्षित बनाती है खासकर पब्लिक वाई-फाई पर.

VPN के इस्तेमाल से मिलने वाले बड़े फायदे

  • VPN आपका लोकेशन, IP और इंटरनेट हिस्ट्री छिपा देता है. ऐसे में कोई भी आपकी वास्तविक डिजिटल पहचान तक नहीं पहुंच पाता.
  • कैफे, एयरपोर्ट या मॉल में मौजूद पब्लिक वाई-फाई सबसे बड़ा खतरा होता है. लेकिन VPN आपके डेटा को एन्क्रिप्ट करके हैकरों से बचाता है.
  • कई बार कुछ वेबसाइटें या कंटेंट आपके देश में ब्लॉक होते हैं. VPN लोकेशन बदलकर उन्हें एक्सेस करने में मदद करता है.
  • आपका इंटरनेट प्रोवाइडर यह नहीं देख पाता कि आप कौन-सी वेबसाइट्स खोल रहे हैं या क्या डाउनलोड कर रहे हैं.

VPN को ट्रैक करना मुश्किल क्यों होता है?

यह सवाल हर किसी के मन में आता है कि जब सबकुछ इंटरनेट पर ट्रैक किया जा सकता है तो VPN को पकड़ना इतना कठिन क्यों है?

मजबूत एन्क्रिप्शन तकनीक

VPN डेटा को ऐसी भाषा में बदल देता है जिसे ना ISP पढ़ सकता है ना हैकर्स और ना ही कोई सरकारी एजेंसी बिना कानूनी अनुमति के. यह एन्क्रिप्टेड डेटा सिर्फ VPN सर्वर ही डिक्रिप्ट कर सकता है.

Shared IP Address

बहुत से VPN एक ही IP कई यूजर्स को देते हैं. इससे यह पता लगाना लगभग असंभव हो जाता है कि असल में कोई खास गतिविधि किस यूजर ने की है.

लॉग न रखने वाली पॉलिसी (No-Log Policy)

प्रतिष्ठित VPN कंपनियां आपकी पहचान या आपकी गतिविधियों का रिकॉर्ड नहीं रखतीं. ऐसे में अगर कोई ट्रैक भी करना चाहे तो डेटा उनके पास होता ही नहीं.

ट्रैफिक ऑब्फुस्केशन

कुछ VPN अपने ट्रैफिक को साधारण इंटरनेट ट्रैफिक जैसा दिखाते हैं. इससे यह पहचानना ही मुश्किल हो जाता है कि यूजर VPN इस्तेमाल कर रहा है या नहीं.

क्या VPN पूरी तरह सुरक्षित है?

VPN आपकी सुरक्षा काफी हद तक बढ़ाता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह 100% फुलप्रूफ है. अगर आप किसी फ्री VPN का इस्तेमाल करते हैं तो कई बार वे आपकी जानकारी बेच सकते हैं या आपका डेटा लीक कर सकते हैं. इसलिए हमेशा किसी भरोसेमंद, प्रीमियम और अच्छी रिव्यू वाले VPN का चयन करना चाहिए.

VPN का गलत इस्तेमाल और कानूनी पहलू

भारत में VPN का इस्तेमाल पूरी तरह कानूनी है लेकिन अगर कोई इसका इस्तेमाल अपराध छिपाने या गलत काम के लिए करता है तो VPN भी उसे बचा नहीं सकता. सरकार और एजेंसियां ज़रूरत पड़ने पर VPN कंपनियों से डेटा मांग सकती हैं खासकर उन कंपनियों से जो भारत के डेटा नियमों के तहत कार्य करती हैं.

क्या आपको VPN इस्तेमाल करना चाहिए?

आज के समय में जब हर कदम ट्रैक किया जा रहा है, साइबर ठगी बढ़ रही है और ऑनलाइन खतरे तेज़ी से बढ़ रहे हैं, VPN आपके लिए एक सुरक्षा ढाल है.

यह आपकी पहचान छिपाता है, डेटा सुरक्षित रखता है और इंटरनेट को प्राइवेट बनाता है. अगर आप अपनी ऑनलाइन प्राइवेसी को लेकर गंभीर हैं तो VPN आपके लिए सिर्फ एक ऐप नहीं बल्कि डिजिटल सुरक्षा का सबसे मजबूत हथियार है.

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अब इस देश में सोशल मीडिया पर लगने वाला है बैन! कारण जानकर आप भी रह जाएंगे दंग

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Social Media Ban: मलेशिया ने अपने डिजिटल नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए यह घोषणा की है कि साल 2026 से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं होगी. दुनिया के कई देशों की तरह मलेशिया भी अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठा रहा है.

बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़ा कदम

कम्युनिकेशंस मंत्री फहमी फ़ज़िल ने 23 नवंबर 2025 को इस योजना की आधिकारिक पुष्टि की. सरकार इस समय ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में अपनाए जा रहे एज-रिस्ट्रिक्शन मॉडल की समीक्षा कर रही है ताकि बच्चों को साइबरबुलिंग, ऑनलाइन ठगी और यौन शोषण जैसे खतरों से बचाया जा सके.

मंत्री ने टेक कंपनियों को साफ संदेश दिया:“हम उम्मीद करते हैं कि अगले साल तक सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 16 साल से कम उम्र के यूज़र्स को अकाउंट खोलने से रोकने के निर्णय का पालन करेंगे.”

वैश्विक चिंता और बढ़ता दबाव

सोशल मीडिया का बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता प्रभाव अब एक वैश्विक मुद्दा बन चुका है. TikTok, Snapchat, Google और Meta (Facebook, Instagram, WhatsApp) जैसी कंपनियों पर अमेरिका में युवाओं की मानसिक समस्याएं बढ़ाने के आरोपों पर मुकदमे भी चल रहे हैं. मलेशिया का यह कदम कई देशों की नीति से मेल खाता है ऑस्ट्रेलिया अगले महीने 16 से कम उम्र वालों के अकाउंट बंद करने वाला है. फ्रांस, स्पेन, इटली, डेनमार्क और ग्रीस मिलकर एक संयुक्त उम्र-पुष्टि (age verification) मॉडल टेस्ट कर रहे हैं.

क्या कर रहे हैं दूसरे एशियाई देश?

मलेशिया का पड़ोसी इंडोनेशिया भी उम्र सीमा तय करना चाहता था लेकिन बाद में उसने कम सख्त नियम अपनाए जैसे कि हानिकारक कंटेंट पर फिल्टर और मजबूत आयु-पुष्टि प्रक्रिया.

सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ी नजर

मलेशिया सरकार हाल के महीनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सख़्ती बढ़ाती दिख रही है. सरकार का दावा है कि ऑनलाइन जुआ, नस्ल, धर्म और राजशाही से जुड़ी संवेदनशील सामग्री में चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है. जनवरी से लागू नए नियम के तहत जिस प्लेटफॉर्म पर आठ मिलियन से अधिक मलेशियाई यूजर हैं उसे सरकार से लाइसेंस लेना अनिवार्य है.

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iPhone Fold की डिटेल्स हो गईं लीक! लॉन्च डेट, कीमत, कैमरा और डिजाइन का भी हो गया खुलासा

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iPhone Fold: Apple का पहला फोल्डेबल iPhone कई सालों से चर्चा में था लेकिन ताजा लीक ने पहली बार इसकी तस्वीर साफ कर दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक iPhone Fold को 2026 में iPhone 18 Pro सीरीज़ के साथ लॉन्च किया जा सकता है. जहां Android कंपनियाँ हर साल नए फोल्डेबल दिखाती हैं, वहीं Apple का फोकस एक “मच्योर और परफेक्ट” फोल्डेबल बनाने पर है जिसे वह किसी प्रयोग के बजाय एक मजबूत प्रोडक्ट लाइन मान रहा है.

24MP अंडर-डिस्प्ले कैमरा

JP Morgan की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार iPhone Fold के अंदर वाले डिस्प्ले पर 24MP अंडर-डिस्प्ले कैमरा दिया जा सकता है. यह मौजूदा Android फोल्डेबल्स के मुकाबले बड़ा अपग्रेड होगा जहां अधिकतर डिवाइस आज भी 4MP या 8MP कैमरा ही देते हैं. अगर यह लीक सही साबित होती है, तो Apple ने अंडर-डिस्प्ले कैमरों की वह तकनीकी दिक्कतें हल कर ली हैं जैसे कम लाइट पास होना, इमेज की स्पष्टता घट जाना. यानी यह पहला असली हाई-क्वालिटी अंडर-डिस्प्ले कैमरा वाला फोल्डेबल बन सकता है.

अब तक का सबसे बड़ा iPhone बैटरी

विश्लेषक Ming-Chi Kuo का कहना है कि Apple हाई-डेंसिटी बैटरी सेल इस्तेमाल करेगा. कोरियाई लीक इसे 5,400 mAh से 5,800 mAh के बीच बता रहे हैं जबकि चीनी लीकर्स का दावा है कि यह 5000 mAh से ज्यादा होगी. अगर ऐसा होता है तो यह iPhone की इतिहास की सबसे बड़ी बैटरी होगी – बिल्कुल उन बड़े फोल्डेबल्स जैसी जिनमें 7.8-इंच की स्क्रीन मिलती है.

स्क्रीन साइज और Touch ID की वापसी?

रिपोर्ट्स बताती हैं कि iPhone Fold में 7.8-इंच का बड़ा फोल्डेबल मेन डिस्प्ले और 5.5-इंच का कवर डिस्प्ले मिल सकता है. सबसे दिलचस्प लीक Apple Touch ID की वापसी कर सकता है शायद पतला कवर डिस्प्ले डिजाइन सपोर्ट करने के लिए.

चार कैमरों का सेटअप

लीक के अनुसार iPhone Fold में कुल 4 कैमरा मॉड्यूल मिल सकते हैं:

  • बाहरी स्क्रीन पर होल-पंच सेल्फी कैमरा
  • अंदर 24MP अंडर-डिस्प्ले कैमरा
  • पीछे डुअल 48MP कैमरा सिस्टम

कीमत भी करेगी हैरान

MacRumors के अनुसार अमेरिकी कीमत $2,000 से $2,500 (लगभग 1,70,000–2,10,000 रुपये) के बीच हो सकती है. यह इसे इतिहास का सबसे महंगा iPhone बना देगा. Apple साफ तौर पर शुरुआत में अल्ट्रा-प्रेमियम फोल्डेबल मार्केट को टारगेट कर रहा है आम यूजर्स को नहीं.

2026 में लॉन्च की सबसे ज्यादा उम्मीद

इतनी जल्दी इतने बड़े लीक सामने आना यह दिखाता है कि Apple का पहला फोल्डेबल लेकर मार्केट में उत्साह चरम पर है. अगर Apple स्मूद और मजबूत फोल्डिंग मैकेनिज़्म, एडवांस अंडर-डिस्प्ले कैमरा, बड़ी बैटरी और प्रीमियम डिज़ाइन के साथ आता है तो सितंबर 2026 इसका संभावित लॉन्च महीना माना जा रहा है. हालांकि, Apple की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है.

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Android यूजर्स सावधान! WhatsApp, Signal और Telegram की एन्क्रिप्शन भी नहीं बचा पाएगी आपका पैसा,

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Android Users: एक नया एंड्रॉइड बैंकिंग ट्रोजन सामने आया है जो WhatsApp, Signal और Telegram जैसी सुरक्षित मैसेजिंग ऐप्स की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को दरकिनार कर आपके बैंकिंग डिटेल्स चुरा सकता है. सिक्योरिटी फर्म ThreatFabric के शोधकर्ताओं के मुताबिक यह मालवेयर Sturnus नाम से जाना जा रहा है और अभी टेस्टिंग स्टेज में होते हुए भी बेहद खतरनाक क्षमताओं से लैस है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि Sturnus पहले से ही दक्षिणी और मध्य यूरोप की कई फाइनेंशियल संस्थाओं को टारगेट करने के लिए सेट किया गया है जिससे साफ है कि इसे बड़े स्तर पर फैलाने की तैयारी चल रही है. यह मौजूदा बैंकिंग मालवेयर की तुलना में ज्यादा एडवांस माना जा रहा है और इसका कम्युनिकेशन सिस्टम भी काफी जटिल है. इस ट्रोजन का नाम Sturnus vulgaris नामक एक यूरोपीय पक्षी पर रखा गया है जिसके बदलते और अनियमित स्वर पैटर्न की तरह यह मालवेयर भी सरल और जटिल मैसेजिंग प्रोटोकॉल के बीच लगातार स्विच करता है.

Sturnus कैसे करता है हमला?

यह ट्रोजन सीधे एन्क्रिप्शन को नहीं तोड़ता बल्कि Android की Accessibility Services सुविधा का दुरुपयोग करता है. फोन जब आपके मैसेज डिक्रिप्ट करता है Sturnus उन्हें सीधे स्क्रीन से पढ़ लेता है. यानी आपके आने-जाने वाले मैसेज, कॉन्टैक्ट लिस्ट और पूरी चैट तक इसकी पहुंच हो जाती है.

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह मालवेयर जैसे ही यूज़र WhatsApp, Signal या Telegram खोलता है तुरंत ऐप के UI-ट्री को स्कैन करने लगता है ताकि पूरी बातचीत को लाइव मॉनिटर किया जा सके. इसके अलावा, यह खुद को Google Chrome या Preemix Box जैसे भरोसेमंद ऐप्स का नाम देकर इंस्टॉल होने की कोशिश करता है.

कैसे करता है आपका पैसा गायब?

Sturnus का मुख्य लक्ष्य वित्तीय धोखाधड़ी है और यह दो बड़े तरीकों से बैंकिंग डाटा चुराता है.

नकली लॉगिन स्क्रीन

यह आपके असली बैंकिंग ऐप के ऊपर एक फेक स्क्रीन दिखाता है. आपको लगता है कि आप अपने बैंक में लॉगिन कर रहे हैं लेकिन असल में आपके यूज़रनेम और पासवर्ड सीधे हैकर तक पहुंच जाते हैं.

ब्लैक स्क्रीन हमला

जब हैकर आपके फोन को रिमोटली कंट्रोल करना चाहते हैं, वे स्क्रीन पर एक काला ओवरले लगा देते हैं. फोन बंद जैसा लगता है लेकिन उसी दौरान हैकर बैकग्राउंड में लेन-देन कर पैसे निकाल लेते हैं और आपको पता भी नहीं चलता.

हटाना भी मुश्किल, खुद की सुरक्षा भी करता है

Sturnus इतना चालाक है कि खुद को फोन से हटाने नहीं देता. यह डिवाइस एडमिनिस्ट्रेटर एक्सेस लेकर अनइंस्टॉल होने से बचता है. यह लगातार बैटरी, नेटवर्क और सेंसर एक्टिविटी को मॉनिटर करता है ताकि पता लगा सके कि कहीं उसे किसी सिक्योरिटी रिसर्चर द्वारा ट्रैक तो नहीं किया जा रहा. अगर आप इसकी परमिशन बंद करने या इसे हटाने की कोशिश करते हैं तो यह खुद ही back बटन क्लिक कर देता है या सेटिंग्स बंद कर देता है. शोधकर्ताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यह ट्रोजन अपने सर्वाइवल के लिए डिवाइस में हर स्थिति पर नज़र रखता है और लंबे समय तक सक्रिय रहने के लिए कई तरह की तकनीकें अपनाता है.

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मोबाइल हैक होते ही क्या हैकर LIVE स्क्रीन देख लेता है? सच जानकर दंग रह जाएंगे

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Smartphone Tips: आज के दौर में स्मार्टफोन हमारे बैंक, सोशल मीडिया, फोटो, चैट और पूरी डिजिटल लाइफ का दरवाजा बन चुका है. ऐसे में जब हैकिंग का ज़िक्र आता है सबसे बड़ा डर यही होता है क्या हैकर हमारी फोन स्क्रीन LIVE देख सकता है? आइए सच जानते हैं ताकि आप समय रहते सतर्क हो सकें.

क्या सच में हैकर लाइव स्क्रीन देख सकता है?

सीधा जवाब है हां, अगर आपका फोन किसी प्रोफेशनल मैलवेयर या स्पाईवेयर से संक्रमित हो जाए तो हैकर आपकी स्क्रीन रीयल-टाइम में देख सकतां है. ऐसे हैकिंग टूल्स आपकी हर गतिविधि पर नज़र रख सकते हैं चाहे आप बैंक ऐप खोलें, पासवर्ड टाइप करें या किसी से चैट करें. कुछ एडवांस स्पाईवेयर स्क्रीन रिकॉर्ड भी कर सकते हैं ताकि बाद में डेटा चोरी किया जा सके.

कैसे हैकर देखते हैं आपकी स्क्रीन?

हैकर आमतौर पर तीन तरीकों से आपकी लाइव स्क्रीन एक्सेस करते हैं

Remote Access Trojan (RAT)

यह खतरनाक मैलवेयर है जो आपके फोन पर पूरा कंट्रोल दे देता है. इंस्टॉल होते ही हैकर आपके फोन को ऐसे चला सकता है जैसे वो उसके हाथ में हो यहां तक कि स्क्रीन लाइव देखना भी आसान हो जाता है.

स्क्रीन मिररिंग मैलवेयर

कुछ स्पाईवेयर खास तौर पर स्क्रीन डुप्लीकेट कर सकते हैं. आपकी स्क्रीन पर जो भी चल रहा है वह सीधे हैकर के डिवाइस पर दिखने लगता है.

फर्जी Apps और Permissions

कई बार यूजर अनजाने में किसी ऐप को screen recording या accessibility permissions दे देता है. यही अनुमति हैकर्स के लिए बैकडोर बन जाती है.

ऐसे संकेत बताएंगे कि आपका फोन हैक हो रहा है

  • फोन अचानक गर्म होना
  • बैटरी जल्दी खत्म होना
  • अपने-आप ऐप्स खुलना
  • डेटा अचानक ज्यादा खर्च होना
  • स्क्रीन पर अजीब पॉप-अप्स आना

ये संकेत बताते हैं कि बैकग्राउंड में कोई संदिग्ध ऐप आपकी गतिविधियां मॉनिटर कर रहा हो सकता है.

कैसे बचाएं खुद को हैकर की नज़र से?

  • अनजान लिंक या APK फाइल कभी डाउनलोड न करें
  • फोन में एंटी-मैलवेयर ऐप रखें
  • हर ऐप को अनुमति देने से पहले सोचें
  • सिस्टम अपडेट समय पर करें
  • पासवर्ड और 2FA हमेशा ON रखें

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क्रिएटर्स की बल्ले-बल्ले, अब मिलेगी ज्यादा रीच, इंस्टाग्राम ले आई यह धाकड़ फीचर

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अगर आप क्रिएटर हैं तो अब पहले से ज्यादा लोगों तक अपना कंटेट पहुंचा पाएंगे. दरअसल, इंस्टाग्राम में पांच भारतीय भाषाओं के लिए एआई ट्रांसलेशन का फीचर आ गया है. साथ ही क्रिएटर को भारतीय भाषाओं के नए फॉन्ट भी मिलेंगे. इससे इंस्टाग्राम की एक्सेसबिलिटी तो बेहतर होगी ही, साथ ही ऐप ज्यादा लोकल नजर आएगी. जानकारी के लिए बता दें कि भारत इंस्टाग्राम की सबसे बड़ी और सबसे एक्टिव मार्केट्स में से एक है. 

अब इन भाषाओं में एआई से ट्रांसलेट हो जाएगा कंटेट

इंस्टाग्राम की पहली अपडेट ट्रांसलेशन से जुड़ी हुई है.अभी तक ऐप में सिर्फ इंग्लिश, स्पैनिश, पुर्तगाली और हिंदी भाषा में मेटा एआई ट्रांसलेशन का फीचर था. अब इसे एक्सपैंड करते हुए मराठी, बंगाली, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ के लिए ट्रांसलेशन फीचर को रोल आउट कर दिया गया है. इसका मतलब है कि अगर कोई क्रिएटर हिंदी में रील रिकॉर्ड करता है तो वो मेटा एआई की मदद से इसे तुरंत बंगाली, मराठी, कन्नड़ या तमिल आदि भाषाओं में ट्रांसलेट कर सकेगा, जिससे उसे नए व्यूअर्स के पास पहुंचने का भी मौका मिलेगा. इंस्टाग्राम का कहना है कि ट्रांसलेशन के बाद भी आपकी वॉइस क्वालिटी ऑरिजनल रहेगी इसमें लिप-सिंक करने का भी फीचर मिलेगा.

एडिटिंग टूल में आए नए फॉन्ट्स

एआई ट्रांसलेशन के अलावा इंस्टाग्राम के एडिटिंग टूल्स में नए इंंडियन फॉन्ट्स भी आए हैं और यूजर को देवनागरी के अलावा बंगाली और असमी स्क्रिप्ट्स में नए फॉन्ट्स मिलेंगे. इसका मतलब है कि इंग्लिश की तरह अब भारतीय भाषाओं के क्रिएटर भी कैप्शन और टेक्स्ट को नए स्टाइल में लिख सकेंगे. अगर आपके फोन में इंडियन लैंग्वेज सेट है तो इंस्टाग्राम सबसे पहले इन्हीं फॉन्ट्स को दिखाएगी. अगले कुछ दिनों में इस फीचर को एंड्रॉयड यूजर्स के लिए रोल आउट कर दिया जाएगा. वहीं आईफोन यूजर्स को इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है. 

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अगर आप AirPods Pro खरीदने का मन बना रहे हैं भारी बचत करने का मौका आ गया है. फ्लिपकार्ट की ब्लैक फ्राइडे सेल में AirPods Pro 2nd जनरेशन मॉडल बंपर छूट के साथ उपलब्ध है. फ्लिपकार्ट इस पर 7,000 रुपये से ज्यादा का फ्लैट डिस्काउंट दे रही है, जिससे यह अपनी अब तक की सबसे कम कीमत पर अवेलेबल हो गया है. इसके अलावा ग्राहक बैंक ऑफर का फायदा उठाकर इसे और भी सस्ता खरीद सकते हैं. आइए इस डील के बारे में डिटेल से जानते हैं.

AirPods 2 खरीदना इसलिए है फायदे का सौदा

AirPods Pro 2nd जनरेशन में अपग्रेडेड H2  चिप है, जो साउंड क्वालिटी को बेहतर बनाने के साथ स्पेटियल ऑडियो और बेहतर बैटरी एफिशिएंसी देती है. इसमें पुराने मॉडल की तुलना में दोगुना इफेक्टिव नॉइस कैंसिलेशन मिलता है. इसके अलावा कन्वर्सेशन अवेयरनेस के चलते बातचीत के दौरान ये ऑटोमैटिकली वॉल्यूम कम कर देते हैं. इसमें पर्सनलाइज्ड वॉल्यूम और स्पेटियल ऑडियो जैसे फीचर आपको एक शानदार एक्सपीरियंस देते हैं.

डील में मिल रही इतनी छूट

फ्लिपकार्ट की ब्लैक फ्राइडे सेल के दौरान ये एयरपॉड्स 7,010 रुपये के फ्लैट डिस्काउंट के बाद 15,990 रुपये में लिस्टेड है. इस पर कई बैंक ऑफर भी चल रहे है. ग्राहक BOB और दूसरे बैंकों के कार्ड्स से खरीद पर 1250 रुपये तक का डिस्काउंट भी पा सकते हैं, जिसके बाद इसकी कीमत 15,000 से भी कम रह जाएगी.

आईफोन 16 पर भी डिस्काउंट दे रही है फ्लिपकार्ट

फ्लिपकार्ट की ब्लैक फ्राइडे सेल के दौरान सिर्फ AirPods Pro 2 ही सस्ते नहीं मिल रहे हैं. ऐप्पल के सबसे ज्यादा बिकने वाले मॉडल में शामिल आईफोन 16 पर फ्लिपकार्ट डिस्काउंट दे रही है. फ्लिपकार्ट पर इस फोन को 69,900 रुपये में लिस्ट किया गया है. फ्लिपकार्ट SBI क्रेडिट कार्ड से खरीदने पर इस फोन पर 4,000 रुपये का कैशबैक पाया जा सकता है. इस पर एक्सचेंज ऑफर भी चल रहा है, जिसके तहत आप पुराने डिवाइस के बदले 64,300 रुपये की बचत कर सकते हैं. 

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आईफोन वाले हो जाएं सावधान, iMessage पर टेक्स्ट किया तो हो सकता है कांड, वार्निंग जारी

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अगर आप आईफोन यूज करते हैं तो सावधान रहने की जरूरत है. अमेरिकी अधिकारियों ने आईफोन यूजर्स को एक नए स्पाईवेयर के बारे में अलर्ट किया है, जो iMessage की चैट को लीक कर सकता है. इसके चलते यूजर्स को कुछ समय तक iMessage सर्विस के जरिए सेंसेटिव जानकारी वाले मैसेज न भेजने की सलाह दी गई है. सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने पाया कि यह पावरफुल स्पाईवेयर फोन में घुसकर प्राइवेट और यहां तक कि एनक्रिप्टेड चैट्स को भी पढ़ सकता है, जिससे आपकी जानकारी गलत हाथों में पहुंच सकती है.

इन यूजर्स को सावधान रहने की जरूरत

यह वार्निंग खासकर उन लोगों के लिए जारी की गई है, जिन पर सर्विलांस का ज्यादा खतरा रहता है. ऐसे लोगों में पत्रकार, राजनेता और संवेदनशील जानकारी रखने वाले दूसरे लोग शामिल होते हैं. फिर भी अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि सभी लोगों को इससे सतर्क रहने की जरूरत है.

बहुत पावरफुल है नया स्पाईवेयर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह स्पाईवेयर किसी ऐप या लिंक के जरिए इंस्टॉल होने वाला नहीं है. यह एक बेहद एडवांस्ड सॉफ्टवेयर है, जो सरकारों और बड़ी कंपनियो को बेचा जाता है. ये सॉफ्टवेयर यूजर की जानकारी के बिना उसके फोन में घुसते हैं. एक बार फोन में इंस्टॉल होने के बाद ये iMessage समेत सारे एनक्रिप्टेड मैसेज भी पढ़ सकते हैं. यह स्पाईवेयर ऐप्पल के सिक्योरिटी सिस्टम को भी बायपास कर यूजर के मैसेज पढ़ सकता है. इसे देखते हुए अधिकारियों ने कुछ समय तक लोगों को iMessage के माध्यम से सेंसेटिव और प्राइवेट जानकारी वाले मैसेज न भेजने की सलाह दी है. 

स्पाईवेयर से बचाव के लिए क्या करें?

सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि अपने फोन को सॉफ्टवेयर को हमेशा अपडेटेड रखें. इससे कई बग फिक्स हो जाते हैं और स्पाईवेयर जैसे दूसरे खतरों का डर कम हो जाता है. माना जा रहा है कि ऐप्पल जल्द ही इस स्पाईवेयर को ब्लॉक करने के लिए सिक्योरिटी पैच जारी कर सकती है.

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