फोन खो गया तो सेकंडों में होगा ब्लॉक! Sanchar Saathi के 5 धमाकेदार फीचर्स कर देंगे चोरों का खेल

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Sanchar Saathi App: अगर आपका फोन कभी खो गया हो या चोरी हो गया हो तो आप जानते हैं कि इस स्थिति में सबसे बड़ी चिंता क्या होती है फोन के अंदर मौजूद आपकी पर्सनल जानकारियों का गलत हाथों में चला जाना. लेकिन अब इस समस्या का समाधान सरकार की ओर से मिल चुका है. Sanchar Saathi ऐप को खास तौर पर इसी वजह से बनाया गया है ताकि हर यूजर अपने फोन को सुरक्षित रख सके और चोरी की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके. यह ऐप न सिर्फ फोन ब्लॉक करने में मदद करता है बल्कि कई ऐसे फीचर्स देता है जो चोरों को पूरी तरह बेअसर कर देते हैं.

चोरी या खोए फोन को तुरंत ब्लॉक करने की सुविधा

Sanchar Saathi का सबसे बड़ा फीचर है एक क्लिक में फोन ब्लॉक करना. जैसे ही आप ऐप में जाकर अपने फोन को “Lost/Stolen” मार्क करते हैं फोन का IMEI नंबर पूरे देश की सभी टेलीकॉम कंपनियों पर ब्लॉक हो जाता है. मतलब कोई भी उस फोन में दूसरा सिम डालकर उसे इस्तेमाल नहीं कर सकता. चोर के लिए वह फोन एक ईंट के बराबर हो जाता है.

फोन की लोकेशन ट्रैक करने का पावरफुल विकल्प

एक बार जब आप फोन ब्लॉक कर देते हैं तो फोन का हर इस्तेमाल ट्रैक किया जा सकता है. यदि कोई चोर ब्लॉक हटाने या सिम बदलने की कोशिश करता है तो लोकेशन सीधे पुलिस और संबंधित एजेंसियों तक पहुंच जाती है. यह फीचर चोरी हुई डिवाइस को वापस पाने के चांस कई गुना बढ़ा देता है.

Chakshu फीचर से फेक कॉल

आजकल धोखाधड़ी वाले कॉल, व्हाट्सऐप मैसेज और फर्जी SMS हर किसी के लिए खतरा बन चुके हैं. Sanchar Saathi में मौजूद Chakshu फीचर आपको किसी भी संदिग्ध मोबाइल नंबर या स्कैम मैसेज की तुरंत रिपोर्ट करने देता है. सरकार और टेलीकॉम कंपनियां इस डेटा के आधार पर स्कैमर्स के नंबर बंद कर देती हैं.

अपने नाम पर कितने मोबाइल नंबर हैं

कई बार किसी धोखेबाज़ द्वारा हमारे नाम पर बिना जानकारी के सिम कार्ड निकाले जाते हैं जिन्हें बाद में गलत कामों में इस्तेमाल किया जाता है. इस ऐप के अंदर आप सिर्फ एक क्लिक में देख सकते हैं कि आपके नाम पर कितने नंबर एक्टिव हैं और कोई संदिग्ध नंबर दिखे तो तुरंत उसे रिपोर्ट कर सकते हैं.

KYM (Know Your Mobile) से फोन की असलियत जांचें

अगर आप सेकेंड-हैंड फोन खरीदने की सोच रहे हैं तो KYM फीचर बेहद जरूरी है. यह बताता है कि जिस फोन को आप खरीद रहे हैं उसका IMEI असली है या नहीं. यदि फोन चोरी का है, ब्लॉक है या डुप्लीकेट IMEI पर चल रहा है Sanchar Saathi तुरंत अलर्ट दे देता है.

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ऐप्पल नहीं मानेगी आईफोन में संचार साथी ऐप देने का फैसला, सरकार को बताएगी अपनी चिंताएं- रिपोर्ट

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हाल ही में भारत सरकार ने स्मार्टफोन कंपनियों को आदेश दिया था कि वे अपने सभी नए स्मार्टफोन में संचार साथी ऐप को इंस्टॉल करके ही बेचें. साथ ही पुराने फोन पर सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इसे पुश करने के आदेश दिए गए थे. अब समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ऐप्पल इस फैसले का विरोध करेगी और उसने अपनी चिंताएं सरकार को बता दी हैं. आइए जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है?

सरकार ने कंपनियों को दिया आदेश

केंद्र सरकार ने ऐप्पल और सैमसंग समेत सभी स्मार्टफोन कंपनियों को यह आदेश दिया था कि उनके नए फोन में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल होनी चाहिए. जो फोन पहले बेचे जा चुके हैं, उनमें सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इसे इंस्टॉल किया जाना चाहिए और इसके लिए कंपनियों को 90 दिन का समय दिया गया. इस नोटिस के लीक होने के बाद सरकार ने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है. हालांकि, विपक्षी पार्टियों और कई एक्सपर्ट्स ने इस फैसले का विरोध किया है.

ऐप्पल नहीं मानेगी यह फैसला- रिपोर्ट

रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐप्पल यह फैसला नहीं मानेगी. वह सरकार को बता देगी कि वह दुनियाभर में कहीं भी इस तरह के फैसले का पालन नहीं करती क्योंकि इससे कंपनी के iOS इकोसिस्टम की प्राइवेसी और सिक्योरिटी को खतरा पैदा होता है. सूत्रों का कहना है कि ऐप्पल इसे लेकर न तो कोर्ट जाएगी और न पब्लिक स्टैंड लेगी, लेकिन वह सरकार को बता देगी कि सुरक्षा कारणों के चलते इस आदेश को नहीं माना जा सकता. बता दें कि ऐप्पल की तरफ से अभी तक आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है. रिपोर्ट में दूसरी कंपनियों को लेकर कहा गया है कि सैमसंग और बाकी ब्रांड्स अभी इस फैसले को रिव्यू कर रहे हैं. 

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Year Ender 2025: पिछले कुछ समय से स्मार्टफोन की कीमतों में इजाफा देखने को मिल रहा है. मेमोरी कंपोनेंट महंगे होने के कारण कंपनियों को अपने स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं, जिससे ग्राहकों पर ज्यादा बोझ पड़ रहा है. अगर आप नया साल आने से पहले एक किफायती और दमदार फीचर्स वाला फोन खरीदना चाहते हैं तो हम इस साल लॉन्च हुए 4 ऐसे फोन की लिस्ट लेकर आए हैं, जिनकी कीमतें 15,000 रुपये से कम है. आइए इन पर एक नजर डालते हैं.

iQOO Z10x 5G

इस फोन में भी 6.72 इंच का FHD+ LCD डिस्प्ले है, जो 120 Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है. मीडियाटेक डायमेंसिटी 7300 प्रोसेसर से लैस इस फोन में 6500 mAh की दमदार बैटरी है. कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके रियर में 50 MP + 2 MP का डुअल कैमरा और फ्रंट में सेल्फी और वीडियो के लिए 8 MP का कैमरा लगा हुआ है. अमेजन पर यह 14,999 रुपये में लिस्टेड है.

Realme P3x 5G

इस साल की शुरुआत में लॉन्च हुए इस स्मार्टफोन में 6.72 इंच का FHD+ LCD डिस्प्ले है, जो 60Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है. इसमें मीडियाटेक डायमेंसिटी 6400 प्रोसेसर मिलता है. फोन के रियर में 50 MP + 2 MP का डुअल कैमरा सेटअप और फ्रंट में 8 MP सेंसर मिलता है. इसे 6000 mAh की बैटरी से लैस किया गया है. अमेजन से इसे 12,220 रुपये में खरीदा जा सकता है. 

Samsung Galaxy M16 5G

सैमसंग ने भी इस साल 15,000 से कम कीमत वाला फोन Samsung Galaxy M16 5G लॉन्च किया था. यह फोन 90Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट वाले 6.72 इंच के FHD+ LCD डिस्प्ले के साथ लॉन्च हुआ था. इसमें मीडियाटेक डायमेंसिटी 6300 प्रोसेसर और 5000mAh की बैटरी है. इसके रियर में 50 MP + 5 MP + 2 MP का ट्रिपल कैमरा सेटअप और फ्रंट में 13MP का सेंसर दिया गया है. फ्लिपकार्ट पर यह फोन 12,367 रुपये में लिस्टेड है. 

Infinix Note 50x 5G

यह फोन 6.6 इंच के HD+ डिस्प्ले के साथ लॉन्च हुआ था, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है. यह फोन मीडियाटेक डायमेंसिटी 7300 प्रोसेसर से लैस है और इसमें फोटो-वीडियो के लिए 50MP का मेन कैमरा लगा हुआ है. फ्रंट में इसे सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 8MP का लेंस दिया गया है. फ्लिपकार्ट पर यह फोन 12,499 रुपये में लिस्टेड है.

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BLO ने आपका SIR फॉर्म जमा किया या नहीं? मोबाइल से घर बैठे ऐसे मिनटों में करें चेक, जानिए पूरा प

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SIR: देश के 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान कई लोग अपना एन्यूमरेशन फॉर्म भर चुके हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीएलओ ने आपका फॉर्म सही तरह से सबमिट किया है या नहीं. अच्छी बात यह है कि इसकी पुष्टि आप बिना कहीं जाए, सिर्फ अपने फोन से कुछ सेकेंड में कर सकते हैं. चुनाव आयोग द्वारा तैयार की गई ऑनलाइन प्रणाली की मदद से आप आसानी से जान सकते हैं कि आपका फॉर्म स्वीकार हुआ है या अभी लंबित है.

एन्यूमरेशन फॉर्म आखिर है क्या?

यह फॉर्म मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करने के लिए इस्तेमाल होता है. BLO घर-घर जाकर यह जानकारी जुटाते हैं ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी योग्य नागरिक वोटर लिस्ट से बाहर न रहे और किसी भी तरह का गलत डेटा दर्ज न हो. यह प्रक्रिया चुनाव आयोग के लिए बेहद अहम होती है क्योंकि इसी पर आगामी चुनावों की मतदाता सूची आधारित रहती है.

मोबाइल से फॉर्म का स्टेटस कैसे पता करें

यदि BLO अभी तक आपके पास फॉर्म भरवाने नहीं पहुंचे हैं तो आप इसे ऑनलाइन भी भर सकते हैं. वहीं, अगर आपने फॉर्म दे दिया है तो उसका स्टेटस मोबाइल से चेक किया जा सकता है. इसके लिए आपको इंटरनेट पर Sarkari CSC खोजकर वेबसाइट खोलनी होती है, जहां ‘सरकारी काम’ नाम के सेक्शन में SIR फॉर्म से जुड़ा विकल्प मिलता है. यहां नए यूजर्स को पहले अपना मोबाइल नंबर, ईमेल और कैप्चा डालकर रजिस्ट्रेशन पूरा करना होता है.

लॉगिन करने के बाद दिखाई देने वाले ‘Fill Enumeration Form’ ऑप्शन में जाकर आप अपना राज्य चुन सकते हैं और EPIC नंबर दर्ज करके सबमिट करते ही पता लगा सकते हैं कि फॉर्म जमा हुआ है या नहीं. अगर स्क्रीन पर “Your form has already been submitted” लिखा दिखाई देता है तो आपका फॉर्म सफलतापूर्वक स्वीकार हो चुका है. इस मैसेज के न दिखाई देने का मतलब होता है कि फॉर्म अभी तक सबमिट नहीं हुआ है. ऐसी स्थिति में आपको अपने क्षेत्र के BLO से संपर्क कर के जानकारी लेनी चाहिए.

ऑनलाइन एन्यूमरेशन फॉर्म भरने की प्रक्रिया

अगर आप खुद ऑनलाइन फॉर्म भरना चाहते हैं तो इसके लिए आपको मतदाता सेवा पोर्टल voters.eci.gov.in पर जाना होगा. यहां Special Intensive Revision–2026 सेक्शन में लॉगिन करने का विकल्प मिलता है जिसमें आप अपने EPIC नंबर, मोबाइल या ईमेल से प्रवेश कर सकते हैं. इसके बाद दिए गए फॉर्म में आपको अपना राज्य चुनकर EPIC नंबर दर्ज करना होता है जिसके बाद आपके सामने आपकी वोटर डिटेल और BLO से जुड़ी जानकारी खुल जाती है.

इस चरण पर आप अपना नाम, सीरियल नंबर, पार्ट नंबर, विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र जैसी महत्त्वपूर्ण जानकारियां जांच सकते हैं. आगे बढ़ने के लिए मोबाइल नंबर डालकर OTP वेरिफिकेशन पूरा करना होता है.

फॉर्म भरते समय आधार कार्ड अपने पास रखना जरूरी है क्योंकि आधार नंबर और उससे जुड़े मोबाइल पर आने वाले OTP के जरिए ही अंतिम वेरिफिकेशन पूरा होता है. फॉर्म सबमिट होने के बाद आपको SIR 2026 Receiver Slip मिल जाती है जिसे भविष्य की जरूरतों के लिए सुरक्षित रख सकते हैं.

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Vivo से लेकर OnePlus तक! दिसंबर में लॉन्च होने वाले हैं ये धांसू स्मार्टफोन्स, फटाफट चेक करें ल

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Upcoming Smartphones: साल 2025 का आखिरी महीना शुरू होते ही स्मार्टफोन बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. दिसंबर पूरे महीने टेक कंपनियां अपने नए फोन और टैबलेट पेश करेंगी जिससे यूज़र्स के पास कई नए विकल्प मौजूद होंगे. इस लाइनअप में Vivo X300 सीरीज़, OnePlus 15R, Oppo A6x और Redmi 15C जैसे चर्चित नाम पहले ही सुर्खियों में आ चुके हैं.

Vivo X300 Series

Vivo अपनी फ्लैगशिप X300 सीरीज़ को 2 दिसंबर को लॉन्च करने जा रही है. कंपनी इसे दो मॉडल X300 और X300 Pro के साथ पेश करेगी. दोनों स्मार्टफोन्स में 200MP का हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरा, Dimensity 9500 चिपसेट और 90W फास्ट चार्जिंग जैसे फीचर्स मिलने वाले हैं.

कीमत की बात करें तो X300 के लिए शुरुआती कीमत लगभग 54,999 रुपये रुपये से 59,999 रुपये के बीच रहने की उम्मीद है. वहीं X300 Pro की शुरुआत करीब 75,999 रुपये से होकर 1,09,999 रुपये तक जा सकती है.

Redmi 15C 5G

भारत में 3 दिसंबर को लॉन्च होने वाला Redmi 15C 5G बजट सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आएगा. इस फोन में 6000mAh की बड़ी बैटरी, MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर और 6.9 इंच का 120Hz डिस्प्ले दिया जाएगा. कैमरा सेटअप में 50MP AI डुअल कैमरा और सेल्फी के लिए 8MP फ्रंट कैमरा शामिल होगा. इसकी शुरुआती कीमत करीब 12,000 रुपये रहने की संभावना है.

Realme P4x Series

Realme ने घोषणा की है कि वह 4 दिसंबर को अपने नए Realme P4x 5G को लॉन्च करेगी. इस फोन में Dimensity 7400 Ultra चिपसेट दिया जाएगा जो बेहतर परफॉर्मेंस और एफिशिएंसी के लिए जाना जाता है. फोन की सबसे खास बात इसकी 7000mAh की विशाल बैटरी है जो लंबे समय तक बैकअप चाहने वाले यूज़र्स को खूब पसंद आएगी.

OnePlus 15R

OnePlus अपने नए मॉडल 15R को 17 दिसंबर को भारतीय बाजार में लॉन्च करेगा. यह चीन में पेश किए गए OnePlus Ace 6T का ग्लोबल वेरिएंट होगा और OnePlus 13R का अपग्रेडेड वर्ज़न भी माना जा रहा है.

फोन में 8000mAh की बैटरी और 100W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट दिया जाएगा. खास बात यह है कि यह दुनिया का पहला स्मार्टफोन होगा जिसमें नया Snapdragon 8 Gen 5 चिपसेट मिलेगा.

Oppo A6x

Oppo दिसंबर में अपना Oppo A6x पेश कर सकती है, हालांकि इसके लॉन्च की सटीक तारीख अभी कंपनी ने स्पष्ट नहीं की है. लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फोन 6500mAh की बड़ी बैटरी के साथ आएगा और इसकी कीमत 13,000 रुपये से कम हो सकती है. कम बजट में लंबे बैटरी बैकअप और अच्छे परफॉर्मेंस चाहने वालों के लिए यह फोन एक मजबूत विकल्प साबित हो सकता है.

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एआई चैटबॉट चैटजीपीटी यूज करने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर नहीं है. अब जल्द ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की तरह इस चैटबॉट पर भी एड और स्पॉन्सर्ड सजेशन नजर आने लगेंगे और इसके लिए टेस्टिंग शुरू हो गई है. अभी तक आधिकारिक तौर पर इसे लेकर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन कई लीक्स से इसकी जानकारी मिली थी. कुछ ही दिन पहले रिपोर्ट आई थी कि ओपनएआई अपने चैटजीपीटी चैटबॉट को मॉनेटाइज करना चाहती है और वह इसके लिए अलग-अलग तरीके एक्सप्लोर कर रही है. 

बीटा ऐप से चला पता

रिपोर्ट्स के अनुसार, चैटजीपीटी ऐप के बीटा वर्जन में एड को लेकर एक कोड देखा गया है. ऐप बंडल के कोड स्ट्रिंग में सर्च एड, सर्च एड कराउजल और बाजार कंटेट अपीयर होता है. इससे पता चलता है कि ओपनएआई चैटजीपीटी में चैट के दौरान स्पॉन्सर्ड और प्रमोटेड कंटेट दिखाने की तैयारी में है. एक और रिपोर्ट में बताया गया है कि चैटजीपीटी में ट्रेडिशनल बैनर वाली एड नहीं दिखेगी बल्कि वो कॉन्टेक्स्ट के हिसाब से सजेशन के तौर पर दिखेगा. अगर कोई यूजर शॉपिंग या प्रोडक्ट कंपेरिजन करेगा तो उसके सजेशन के तौर पर स्पॉन्सर्ड लिंक दिखाए जा सकते हैं.

अब चैटजीपीटी से कमाई चाहती है ओपनएआई 

चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई अपने बढ़ते खर्चों को पूरा करने के लिए इससे कमाई करना चाहती है. कंपनी को उम्मीद है कि उसके 2.6 अरब वीकली यूजर्स में 8.5 प्रतिशत यानी करीब 22 करोड़ यूजर्स 2030 तक चैटजीपीटी का प्रीमियम वर्जन खरीदेंगे. अभी केवल 5 प्रतिशत वीकली एक्टिव यूजर्स (करीब 3.5 करोड़) कंपनी के प्लस और प्रो प्लान का यूज करते हैं, जिनकी भारत में कीमतें क्रमश: 1,999 रुपये और 19,900 रुपये प्रति महीना है. ओपनएआई का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आगे चलकर और बड़ी संख्या में लोग उसकी पेड सर्विसेस को यूज करेंगे.

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SIM Binding क्या है? WhatsApp–Telegram यूजर्स को लगने वाला है बड़ा झटका, जानें पूरी कहानी

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SIM Binding: सरकार ने एक नया नियम लागू करने की तैयारी कर ली है जिसके बाद भारत में कई बड़े मैसेजिंग और सोशल कम्युनिकेशन ऐप्स का इस्तेमाल करने का तरीका बदल जाएगा. इसमें WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat, ShareChat, JioChat, Arattai और Josh जैसे लोकप्रिय ऐप्स शामिल हैं. यदि आप भी इन्हें इस्तेमाल करते हैं तो आने वाले महीनों में आपके अनुभव में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

सरकार ने आखिर कहा क्या है?

दूरसंचार विभाग (DoT) ने इन ऐप्स को निर्देश दिया है कि अगले 90 दिनों के भीतर वे अपनी सर्विस इस तरह तैयार करें कि ऐप तभी चले जब फोन में वही SIM मौजूद हो जिससे अकाउंट वेरिफाई किया गया था. जैसे ही वह SIM निकाली जाएगी, ऐप ऑटोमैटिक बंद हो जाना चाहिए. इसी प्रक्रिया को SIM Binding कहा जाता है.

अभी तक आप WhatsApp या Telegram पर एक बार OTP से लॉगिन करते हैं और उसके बाद SIM बदलने पर भी ऐप चलता रहता है चाहे SIM हट चुकी हो या फोन Wi-Fi पर चल रहा हो. सरकार का कहना है कि यही सुविधा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन रही है.

सरकार को SIM Binding क्यों जरूरी लग रही है?

सरकार का दावा है कि कई साइबर अपराधी—खासतौर पर भारत के बाहर बैठे ठग इंडियन मोबाइल नंबरों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. वे पुराने, निष्क्रिय या फर्जी नंबरों से अकाउंट बनाते हैं और बिना SIM के ऐप चलते रहने का फायदा उठाकर लोकेशन छुपाते हैं. SIM फिजिकली फोन में न होने के कारण उनकी ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है. अगर ऐप SIM हटते ही बंद हो जाएगा तो सरकार का मानना है कि धोखेबाज़ों के पास मौजूद यह बड़ा loophole बंद हो जाएगा.

टेलिकॉम कंपनियों ने भी इस कदम का समर्थन किया है. उनका कहना है कि आज ऐप्स केवल इंस्टॉल के समय SIM वेरिफाई करते हैं उसके बाद SIM हटे या बंद हो जाए ऐप फिर भी काम करता रहता है. यही वजह है कि स्पैमर्स और फ्रॉडस्टर्स नंबरों का आसानी से दुरुपयोग कर पाते हैं.

ऐप्स को क्या बदलाव करने होंगे?

सरकार ने दो मुख्य शर्तें रखी हैं.

SIM की लगातार मौजूदगी

ऐप को समय-समय पर यह जांचना होगा कि वही SIM फोन में लगी है या नहीं. जैसे ही SIM बदलेगी या हटेगी, ऐप तुरंत रुक जाना चाहिए.

वेब एक्सेस पर रोक:

WhatsApp Web जैसे फीचर्स पर हर 6 घंटे में ऑटो-लॉगआउट जरूरी होगा. दोबारा लॉगिन तभी होगा जब आप फोन से QR कोड स्कैन करेंगे. इससे यूज़र और डिवाइस की पहचान सुनिश्चित होगी. ऐप्स को 120 दिनों के भीतर सरकार को रिपोर्ट करनी होगी कि उन्होंने सभी निर्देश लागू कर दिए हैं.

आम यूजर्स पर इसका क्या असर होगा?

ज्यादातर लोगों की रोज़मर्रा की चैटिंग पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ेगा. बस ऐप्स SIM चेक अधिक बार करेंगे और शायद कभी-कभी दोबारा लॉगिन करवाएं. लेकिन जिन यूजर्स का ऐप किसी सेकेंडरी डिवाइस पर चलता है या जो SIM एक फोन में रखकर ऐप दूसरे में इस्तेमाल करते हैं उन्हें परेशानी हो सकती है.

क्या इससे ऑनलाइन फ्रॉड रुक जाएगा?

इस पर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है. कई साइबर विशेषज्ञ कहते हैं कि ठग अक्सर फर्जी दस्तावेज़ों से SIM खरीदते हैं, कुछ दिनों तक धोखाधड़ी कर SIM फेंक देते हैं ऐसे में SIM Binding भी उन्हें पूरी तरह रोक नहीं पाएगी. कुछ लोगों का कहना है कि भारत पहले से AI और वीडियो-KYC जैसी सख्त वेरिफिकेशन तकनीकें इस्तेमाल करता है, फिर भी फ्रॉड बढ़ रहा है तो समस्या शायद कहीं और है.

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TECH EXPLAINED: सिम बाइंडिंग क्या है और इससे यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा? आसान भाषा में जानिए सब

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दूरसंचार विभाग (DoT) ने साइबर सिक्योरिटी को लेकर नया कदम उठाते हुए मैसेजिंग ऐप्स को सिम बाइंडिंग लागू करने को कहा है. इसका असर, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट और जियोचैट जैसी ऐप्स पर पड़ेगा. सिम बाइंडिंग लागू होने के बाद यूजर्स बिना एक्टिव सिम के इन मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को यूज नहीं कर पाएगा. सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर यूजर एन्टिटी (TIUE) की कैटेगरी में रखा है और उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए 90 दिन दिए गए हैं कि उनकी ऐप्स हमेशा यूजर एक्टिव और उसी सिम से जुड़ी रही, जिससे उन्होंने रजिस्टर किया था. सिम बाइंडिंग को लेकर यूजर्स की कुछ चिंताएं भी हैं. आज हम टेक एक्सप्लेनर में आपको बताने जा रहे हैं कि सिम बाइंडिंग क्या है और इससे यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा.

सिम बाइंडिंग क्या है?

आसान भाषा में समझें तो सिम बाइंडिंग का मतलब है कि मैसेजिंग ऐप्स को केवल उसी डिवाइस पर एक्सेस किया जा सकता है, जिसमें वही सिम है, जिससे उस प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन किया गया था. अगर उस डिवाइस से वह सिम हटा ली जाती है, इनएक्टिव हो जाती है या उसमें दूसरी सिम डाल ली जाती है तो ऐप अपने आप यूजर को लॉग आउट कर देगी. सिम बाइंडिंग के फायदों की बात करें तो इससे कुछ मामलों में फ्रॉड को रोका जा सकता है और ट्रांजेक्शन को सिक्योर बनाया जा सकता है. इसके अलावा अगर किसी यूजर के क्रेडेंशियल लीक हो जाएं तो भी उसका लॉग-इन प्रोटेक्टेड रहता है. 

अब यह नियम क्यों लाया जा रहा है?

दूरसंचार विभाग ने कहा कि केंद्र सरकार के नोटिस में आया है कि मोबाइल नंबरों से अपने कस्टमर्स की पहचान करने वाली ऐप्स डिवाइस में बिना सिम के भी अपनी सर्विस यूज करने दे रही हैं. इससे टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी को खतरा है और इसे देश के बाहर से साइबर फ्रॉड करने के लिए मिसयूज किया जा रहा है. अब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को 90 दिनों का समय दिया गया है और इस समयसीमा के भीतर उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सर्विस लगातार उसी सिम के साथ लिंक रहे, जिससे उसे रजिस्टर किया गया था. अगर किसी डिवाइस में रजिस्ट्रेशन वाली सिम नहीं है तो वह सर्विस अपने डिसेबल हो जाएगी. इसके अलावा एसोसिएटेड वेब सर्विसेस भी 6 घंटे की भीतर अपने आप लॉग आउट हो जाएगी. यानी अगर आप अपने फोन से लिंक कर व्हाट्सऐप वेब आदि का यूज कर रहे हैं तो 6 घंटे के बाद आप अपने आप ही लॉग-आउट हो जाएंगे. दोबारा यूज करने के लिए आपको फिर से लॉगिन करना पड़ेगा. 

ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले से उन कस्टमर्स पर ज्यादा असर पड़ेगा, जो विदेश यात्राएं करते हैं और अलग-अलग देशों के हिसाब से अलग-अलग सिम कार्ड यूज करते हैं. अभी तक अगर कोई विदेश में नई सिम लेकर यूज करता है तो व्हाट्सऐप आदि ऐप्स पर दोबारा रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं पड़ती और उसका पुराना अकाउंट चलता रहता है. अब ऐसा नहीं होगा. अब अगर वह अपने मोबाइल में नई सिम डालेगा तो उसका पुराना अकाउंट अपने आप लॉग-आउट हो जाएगा. 

इसके अलावा इस फैसले से वो यूजर भी प्रभावित होंगे, जो इन ऐप्स के वेब इंटरफेस जैसे वेब व्हाट्सऐप आदि यूज करते हैं. नया नियम लागू होने के बाद हर 6 घंटे में यूजर अपने आप लॉगआउट हो जाएगा. इससे उसे बार-बार लॉगिन करना पड़ेगा और काम भी प्रभावित होगा. कई मामलों में लोग एक बार लॉगिन करने के बाद मोबाइल अपने पास नहीं रखते. ऐसे लोगों के लिए नए नियम झुंझलाहट पैदा करने वाला साबित हो सकता है. 

भारत में कई घरों में एक ही सिम कार्ड से रजिस्ट्रेशन वाले कई डिवाइस चलते हैं. आमतौर पर बच्चे अपने पैरेंट्स के नंबरों से रजिस्ट्रेशन के बाद व्हाट्सऐप और दूसरी ऐप्स यूज करते रहते हैं. ऐसे में नए नियम उन्हें भी प्रभावित करेंगे. 

क्या यह नियम साइबर अपराध रोक पाएगा?

सरकार का कहना है कि साइबर अपराध के मामलों पर रोक लगाने के लिए इस नियम को लागू किया जा रहा है, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे लेकर एकमत नहीं है. उनका मानना है कि इससे कुछ स्कैम्स पर रोक लग सकती है, लेकिन फ्रॉड को एकदम नहीं रोका जा सकता. जानकारों का कहना है कि साइबर अपराधी फर्जी आईडी का इस्तेमाल कर सिम कार्ड खरीदते हैं और फिर साइबर अपराधों को अंजाम देते हैं. ऐसे में यह तरीका नाकाफी होगा. इसी तरह उनका यह भी कहना है कि विदेशों में बैठे फ्रॉडस्टर सिम क्लोनिंग (सिम कार्ड की फर्जी कॉपी बनाना) की मदद से लोगों को अपना निशाना बनाते हैं. ऐसे मामलों में सिम बाइंडिंग क्लोन और असली सिम का फर्क नहीं पकड़ पाएगी. साथ ही कई स्कैम्स विदेशों में बैठे लोग करते हैं और वहां पर भारतीय कानून लागू नहीं हो सकते.

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ब्लैक फ्राइडे के दौरान लोगों ने की जमकर शॉपिंग, एआई टूल्स से उठाया बेस्ट डील का फायदा

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इस बार ब्लैक फ्राइडे के दौरान अमेरिका में लोगों ने एआई शॉपिंग टूल्स का जमकर इस्तेमाल किया है. भीड़भाड़ के बीच स्टोर्स पर जाने की बजाय इस बार लोगों ने घर बैठकर प्राइस कंपेरिजन किया और जमकर डिस्काउंट का फायदा उठाया है. एडोबी एनालिटिक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार अमेरिका में लोगों ने ब्लैक फ्राइडे पर 11.8 बिलियन डॉलर खर्च किए हैं, जो पिछले साल की तुलना में 9.1 प्रतिशत ज्यादा है. यह तब है, जब अमेरिका में बेरोजगारी दर चार सालों की उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और लोगों के पास खर्च करने के लिए कम पैसा है. 

एआई टूल्स ने किया कमाल

एडोबी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार अमेरिकी रिटेल वेबसाइट्स पर एआई के कारण आने वाले ट्रैफिक में 805 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जबकि अभी तक वॉलमार्ट और अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों के एआई शॉपिंग टूल्स लॉन्च भी नहीं हुए हैं. इनके आने के बाद इस ट्रेंड में और मजबूती आने की उम्मीद है. ईमार्केटर नामक फर्म में एनालिस्ट सुजी डेविडकैनियन कहा कि अब लोग अपनी जरूरत के सामान को जल्दी पाने के लिए एआई टूल्स का यूज कर रहे हैं. गिफ्ट देना काफी तनाव भरा काम हो सकता है, लेकिन एआई मॉडल ने इस प्रोसेस को आसान और तेज बना दिया है. 

एआई टूल्स के कारण दुनियाभर में खूब हुई बिक्री

अमेरिका की तरह बाकी देशों में शॉपिंग के लिए एआई का खूब इस्तेमाल हुआ है. लोगों ने डिस्काउंट पाने के लिए एआई टूल्स को खूब यूज किया है. सेल्सफोर्स की एक रिपोर्ट के मुताकि, इस साल एआई और एआई एजेंट्स ने ऑनलाइन सेल्स में 14.2 बिलियन डॉलर की शॉपिंग पर असर डाला है. इनमें से अधिकतर अकेले अमेरिका से आया है. इस बार अमेरिकियों ने भले ही पिछले साल की तुलना में अधिक खर्च किया है, लेकिन महंगाई के कारण वो कम सामान खरीद पाए हैं. पिछले साल उन्होंने इस साल की तुलना में कम कीमत पर ज्यादा सामान खरीदा था. 

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क्या होती है Vibe Coding जिसके सुंदर पिचाई भी हैं फैन, जानिए पूरी जानकारी

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What is Vibe Coding: टेक दुनिया में हर दिन कोई न कोई नया ट्रेंड सामने आता है लेकिन हाल ही में जिस कॉन्सेप्ट ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी है, वह है Vibe Coding. गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने भी इसकी खुलकर तारीफ की है जिसके बाद यह शब्द अचानक सुर्खियों में आ गया. पर आखिर Vibe Coding है क्या, और क्यों इसे भविष्य की कोडिंग स्टाइल माना जा रहा है? आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

Vibe Coding का मतलब क्या है?

Vibe Coding असल में कोडिंग का वह तरीका है जिसमें डेवलपर अपने रफ्तार, मूड और क्रिएटिविटी के हिसाब से कोड लिखता है. यह पारंपरिक सख्त और फॉर्मल कोडिंग स्टाइल से हटकर एक रिलैक्स्ड, फ्लो-बेस्ड और फील-ड्रिवन एप्रोच है. इसका फोकस सिर्फ सही कोड लिखने पर नहीं, बल्कि पूरे डेवलपमेंट प्रोसेस को मजेदार और क्रिएटिव बनाने पर होता है. Vibe Coding आपके दिमाग, आपकी ऊर्जा और आपके फोकस को एक तालमेल में जोड़कर कोड लिखने की कला है यानी कोडिंग सिर्फ काम नहीं बल्कि एक वाइब बन जाती है.

सुंदर पिचाई क्यों हैं इसके फैन?

सुंदर पिचाई ने एक इंटरव्यू में कहा कि “डेवलपर्स तभी अपना बेस्ट दे पाते हैं जब वे कोडिंग में खो जाते हैं” और यही Vibe Coding का मूल है. वे मानते हैं कि जब डेवलपर का वाइब सेट होता है जैसे सही म्यूजिक, सही माहौल और सही टूल्स तब उनकी क्रिएटिविटी कई गुना बढ़ जाती है. यही वजह है कि दुनिया के बड़े टेक लीडर्स Vibe Coding को डेवलपमेंट कल्चर का अगला बड़ा बदलाव मानते हैं.

कैसे की जाती है Vibe Coding?

Vibe Coding किसी तय नियम या भाषा पर आधारित नहीं है, बल्कि यह माहौल, फोकस और फ्लो पर आधारित है. डेवलपर्स अक्सर अपने लिए ऐसा सेटअप बनाते हैं जिसमें वे सबसे ज्यादा प्रोडक्शन-कैपेसिटी महसूस करते हैं. जैसे बैकग्राउंड में पसंदीदा म्यूजिक चलाना, कम रोशनी या RGB लाइटिंग, एर्गोनोमिक सेटअप, AI टूल्स का स्मार्ट इस्तेमाल, लगातार कोड लिखने के लिए फ्लो मोड. इस स्टाइल में कोड को फील करके लिखा जाता है जिससे डेवलपर का काम तेज और क्रिएटिव दोनों हो जाता है.

Vibe Coding क्यों हो रहा है लोकप्रिय?

Vibe Coding डेवलपर्स को ज़रूरत के मुताबिक फ्रीडम देता है. यह स्ट्रेस कम करता है, क्रिएटिविटी बढ़ाता है और प्रोजेक्ट्स को और स्मूद तरीके से पूरा करवाने में मदद करता है. आज जब AI भी डेवलपमेंट का बड़ा हिस्सा बन चुका है Vibe Coding उस गैप को भरता है जहां इंसानी क्रिएटिविटी और मशीन की दक्षता एक साथ मिलती है.

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