फोन–लैपटॉप को रीस्टार्ट करना क्यों है बेहद जरूरी? असली वजह जानकर आपके भी उड़ जाएंगे होश

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Phone-Laptop Restart: आज के डिजिटल दौर में हम अपने फोन और लैपटॉप को घंटों नहीं, बल्कि दिनों तक बिना बंद किए इस्तेमाल करते रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि लगातार ऑन रहने वाले डिवाइस धीरे-धीरे स्लो होने लगते हैं, ऐप्स क्रैश करना शुरू कर देते हैं और कई बार सिक्योरिटी रिस्क भी बढ़ जाता है? यही वजह है कि विशेषज्ञ बार-बार फोन और लैपटॉप को नियमित रूप से रीस्टार्ट करने की सलाह देते हैं. रीस्टार्ट आपके डिवाइस के लिए एक तरह की डीप ब्रीदिंग जैसा होता है जो उसे फिर से तेज, सुरक्षित और स्मूथ बना देता है.

रीस्टार्ट क्यों है इतना फायदेमंद?

जब आपका फोन या लैपटॉप लंबे समय तक चलता रहता है तो RAM में कई तरह के टेम्पररी फ़ाइल्स जमा हो जाते हैं. बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स और प्रोसेसेस सिस्टम पर बोझ डालते हैं जिससे डिवाइस की स्पीड कम हो जाती है. रीस्टार्ट करने से ये सभी अनचाहे फ़ाइल्स और टास्क बंद हो जाते हैं RAM खाली होती है और सिस्टम को एक फ्रेश स्टार्ट मिलता है.

इससे डिवाइस न सिर्फ तेज चलता है, बल्कि बैटरी बैकअप भी बेहतर होता है. इसके अलावा, कई बार अपडेट्स और सिक्योरिटी पैच सही तरीके से तब तक लागू नहीं होते जब तक कि फोन या लैपटॉप रीस्टार्ट न किया जाए. इसलिए नियमित रीस्टार्ट से आपका डिवाइस अतिरिक्त सुरक्षा भी पाता है.

फोन को सही तरीके से कैसे रीस्टार्ट करें?

फोन को रीस्टार्ट करना बहुत आसान है लेकिन इसे सही तरीके से करना ज़रूरी है ताकि सिस्टम पर किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे. सबसे पहले पावर बटन को कुछ सेकंड दबाकर रखें. स्क्रीन पर Restart या Reboot का ऑप्शन दिखे तो उसे चुनें. अगर यह ऑप्शन न दिखे तो आप फोन को पहले पावर ऑफ करें और फिर दोबारा ऑन कर लें. सप्ताह में एक या दो बार फोन को रीस्टार्ट करना पर्याप्त होता है.

लैपटॉप को कैसे रीस्टार्ट करें?

लैपटॉप में सिर्फ स्क्रीन लॉक करना या लिड बंद कर देना रीस्टार्ट नहीं माना जाता. लैपटॉप को रीस्टार्ट करने के लिए Windows में Start Menu खोलें और Power बटन पर क्लिक करें. यहां “Restart” का विकल्प चुनें. MacBook यूज़र्स Apple मेन्यू में जाकर “Restart” चुन सकते हैं. रीस्टार्ट से पहले अगर आपका कोई अनसेव्ड काम है तो उसे सेव करना न भूलें.

कितनी बार करना चाहिए रीस्टार्ट?

स्मार्टफोन्स को हफ्ते में कम से कम एक बार और लैपटॉप को 3–4 दिनों में एक बार रीस्टार्ट करना सबसे बेहतर माना जाता है. यह डिवाइस की लाइफ बढ़ाने, परफॉर्मेंस बेहतर बनाने और सुरक्षा मजबूत करने में बेहद अहम भूमिका निभाता है. नियमित रीस्टार्ट एक छोटी-सी आदत है लेकिन इससे फोन और लैपटॉप दोनों लंबे समय तक तेज और सुरक्षित रहते हैं.

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आपका iPhone अब कचरे के बराबर? Apple ने 5 नए मॉडल को No-Repair लिस्ट में किया शामिल, यूजर्स में

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Apple iPhone: Apple ने एक बार फिर अपनी Vintage और Obsolete प्रोडक्ट लिस्ट में बदलाव किया है और इस बार कंपनी ने पांच और पुराने डिवाइसेज़ को ऐसी कैटेगरी में डाल दिया है जिनकी अब कोई आधिकारिक मरम्मत नहीं की जाएगी. इन डिवाइसेज़ में पहला iPhone SE, दूसरी जनरेशन का iPad Pro और Apple Watch के कुछ स्पेशल एडिशन मॉडल शामिल हैं.

Apple की Obsolete लिस्ट में कौन-कौन से डिवाइस आए?

कंपनी ने जिन प्रोडक्ट्स को अब पूरी तरह ‘Obsolete’ घोषित कर दिया है उनमें ओरिजिनल iPhone SE, iPad Pro 12.9-inch (2nd Gen), Apple Watch Series 4 के Nike और Hermès मॉडल, और Beats Pill 2.0 शामिल हैं. गौर करने वाली बात यह है कि Watch Series 4 का स्टैंडर्ड मॉडल अभी इस सूची में नहीं आया है लेकिन इसके स्पेशल एडिशन अब सर्विस से बाहर हो चुके हैं.

Apple Obsolete का मतलब आखिर होता क्या है?

Apple किसी भी डिवाइस को तब Obsolete मानता है जब उसके बाजार में उपलब्ध हुए सात साल से ज्यादा समय बीत जाए. इस स्टेटस के बाद कंपनी उस प्रोडक्ट की किसी भी तरह की हार्डवेयर सर्विस बंद कर देती है और अधिकृत सर्विस सेंटर भी इसके पार्ट्स ऑर्डर नहीं कर पाते.

Mac लैपटॉप्स को इसमें थोड़ी छूट मिलती है, जहां कुछ मॉडलों के लिए केवल बैटरी रिप्लेसमेंट 10 साल तक उपलब्ध रह सकता है वो भी तभी जब पार्ट्स का स्टॉक बचा हो.

कौन-कौन से प्रोडक्ट अब पूरी तरह बंद माने जाएंगे?

ओरिजिनल iPhone SE को Apple ने 2018 में बंद किया था और 2020 में इसका नया वर्ज़न लॉन्च किया गया. यह फोन iOS 15 के बाद अगला सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं पा सका और अब रिपेयर बंद होने से यूज़र्स के पास इसे बदलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा.

Apple Watch Series 4 साल 2018 में आई थी और यह पहला Apple वॉच मॉडल था जिसमें कलाई से ही ECG रिकॉर्ड करने की सुविधा दी गई थी. यह मॉडल 2019 में Series 5 आने के बाद डिसकंटिन्यू कर दिया गया.

दूसरी तरफ, iPad Pro (2nd Gen) वह पहला iPad था जिसने 2017 में 120 Hz ProMotion डिस्प्ले दिया था. बाद में यही फीचर 2021 में iPhone 13 Pro सीरीज़ और 2024 के iPhone 17 बेस मॉडल तक पहुंचा.

क्या आपका Apple प्रोडक्ट भी जल्द Obsolete होने वाला है?

अगर आपके पास कोई पुराना Apple डिवाइस है, तो उसके Obsolete होने में शायद ज्यादा वक्त न बचे. Apple डिवाइसेज़ को पहले Vintage कैटेगरी में डालता है जो पांच साल बाद Obsolete बनने की प्रक्रिया में आ जाते हैं. यानी जो मॉडल आज Vintage हैं वे अगले दो साल में रिपेयर-फ्री ज़ोन में पहुंच सकते हैं.

पुराने iPhone, iPad या Apple Watch यूज़ करने वालों के लिए यह अपडेट किसी चेतावनी से कम नहीं है क्योंकि अब कंपनी की लिस्ट में शामिल होना मतलब डिवाइस का अंतिम अध्याय शुरू होना.

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चीन ने बनाया ऐसा रोबोट जो पलक झपकते ही बन जाता है असली जैसा डायनासोर, ऐसी टेक्नोलॉजी देख रह जाए

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China Robot: चीन की टेक कंपनी LimX Dynamics ने ऐसा रोबोट पेश किया है जिसने दुनियाभर के टेक एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया है. कंपनी ने एक नया वीडियो जारी किया है जिसमें दो पैरों पर चलने वाला रोबोट कुछ ही सेकंड में एक पूरे आकार वाले Tyrannosaurus Rex यानी टी-रेक्स डायनासोर में बदल जाता है. यह डेमो दिखाता है कि आधुनिक रोबोटिक्स कैसे मनोरंजन और पर्यटन उद्योग का रूप बदल सकती है.

कैसे रोबोट बदल जाता है डायनासोर में

वीडियो में दिखाया गया है कि यह मशीन TRON1 प्लेटफॉर्म पर आधारित है. रोबोट के ऊपर टी-रेक्स की स्किन लगाई गई है जिसमें विशाल सिर, छोटी बाहें और हिलती हुई लंबी पूंछ शामिल है. देखने में यह बिल्कुल जीवित डायनासोर जैसा लगता है.

डेमो की शुरुआत में यह डायनासोर आकृति जमीन पर लेटी होती है और आसपास लोग इकट्ठा होते हैं. जैसे ही ट्रेनर्स इसके पैरों और बॉडी को धक्का देते हैं, रोबोट तुरंत अपनी बैलेंसिंग ठीक कर लेता है. कंपनी के अनुसार इसकी स्थिरता का राज TRON1 सिस्टम है जो वजन और दिशा बदलने पर तुरंत रिएक्ट करता है.

पर्यटन और म्यूज़ियम के लिए तैयार खास कॉन्सेप्ट

LimX Dynamics का कहना है कि यह रोबोट विशेष रूप से क्लचरल टूरिज्म के लिए बनाया गया है. म्यूज़ियम, थीम पार्क और पब्लिक इवेंट्स में इसे इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि लोग विशाल डायनासोर को पास से चलते हुए देख सकें. कंपनी का मानना है कि इससे लोग extinct जीवों के बारे में बेहतर तरीके से सीख पाएंगे.

TRON1 प्लेटफॉर्म कई तरह की सतहों पर बैलेंस बनाए रखता है और जरूरत पड़ने पर इसे पहियों पर भी चलाया जा सकता है. डायनासोर मोड में रोबोट दो पैरों पर प्राकृतिक चाल से चलता है.

सेंसर, कैमरे और स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम

रोबोट के अंदर कई तरह के सेंसर और कैमरे लगे हैं जो उसके आसपास की हर गतिविधि पर नज़र रखते हैं. कैमरे रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचान लेते हैं जबकि मोशन सेंसर हर कदम की स्थिरता चेक करते हैं. अगर कोई व्यक्ति इसे धक्का दे तो सिस्टम तुरंत कैलकुलेट करके रोबोट को गिरने से बचा लेता है.

डेमो में यह लगभग 3.1 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलता है जो भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षित मानी जाती है और देखने में बिल्कुल असली डायनासोर जैसी लगती है.

स्किन बदलने की सुविधा और आसान मेंटेनेंस

कंपनी ने बताया है कि डायनासोर की स्किन TRON1 फ्रेम पर आसानी से लग और हट सकती है. चाहें तो ऑपरेटर कुछ ही मिनटों में किसी और प्राणी की स्किन भी लगा सकते हैं. कंपनी इसे खरीदने या किराए पर लेने दोनों के ऑप्शन देगी, साथ ही स्टाफ को इसे चलाने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी. रोबोट एक बार चार्ज पर कई घंटों तक चालू रह सकता है और इसकी सर्विसिंग में सिर्फ जॉइंट चेक और स्किन की सफाई जैसे बेसिक काम शामिल हैं जो एक घंटे के अंदर पूरे हो जाते हैं.

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सबसे ज्यादा बिकने वाले इस आईफोन पर आ गई 17,000 रुपये की छूट, जल्दी चेक करें डील

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आईफोन 17 को लॉन्च हुए कुछ समय हो चुका है और लोग इसे पसंद भी कर रहे हैं, लेकिन आईफोन 16 का जलवा अभी भी कायम है. कुछ समय पहले आई काउंटर प्वाइंट रिसर्च की रिपोर्ट में बताया गया था कि आईफोन 16 भारत में ऐप्पल का सबसे ज्यादा बिकने वाला फोन है. सितंबर में स्मार्टफोन की कुल बिक्री में 4 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले आईफोन 16 की थी. अब इस आईफोन को सस्ते में खरीदने का मौका मिल रहा है. आइए इसके फीचर और इस पर मिल रही डील के बारे में जानते हैं.

आईफोन 16 के फीचर्स

आईफोन 16 में 6.1 इंच का OLED डिस्प्ले है, जो HDR कंटेट सपोर्ट और 2,000 निट्स की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है. A18 प्रोसेसर वाला यह आईफोन मल्टीटास्किंग और ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स को आसानी से हैंडल कर लेता है. हाई परफॉर्मेंस के साथ-साथ यह प्रोसेसर एफिशिएंट और अपकमिंग सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए कंपेटिबल भी है. इसके रियर में 48MP + 12MP का डुअल कैमरा सेटअप है. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसके फ्रंट में 12MP का कैमरा है. बैटरी की बात करें तो फुल चार्जिंग पर यह आईफोन 22 घंटे का वीडियो प्लेबैक सपोर्ट करता है. 

कहां मिल रही है डील?

इस आईफोन को पिछले साल सितंबर में 79,990 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था, लेकिन क्रोमा से आप इसे सस्ते में खरीद सकते हैं. क्रोमा पर इस फोन के 128GB वाला बेस वेरिएंट ब्लैक, व्हाइट, पिंक, अल्टामैरिन और टील कलर ऑप्शन में उपलब्ध है. यह फोन क्रोमा पर 66,990 रुपये में लिस्टेड है. साथ ही इस इंस्टेंट डिस्काउंट भी मिल रहा है. ICICI, IDFC और SBI बैंक के क्रेडिट और डेबिट कार्ड होल्डर इस पर 4,000 रुपये की और छूट पा सकते हैं. इस तरह आप इस आईफोन को केवल 62,990 रुपये में अपना बना सकते हैं. 

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भारतीय मूल के Amar Subramanya को ऐप्पल में बड़ी जिम्मेदारी, संभालेंगे यह पद

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ऐप्पल में मशीन लर्निंग और एआई स्ट्रैटजी के सीनियस वाइस प्रेसिडेंट John Giannandrea ने अपना पद छोड़ दिया है. वो अगले साल रिटायर हो रहे हैं और तब तक एडवाइजर की भूमिका में रहेंगे. ऐप्पल ने उनकी जगह Amar Subramanya को नियुक्त किया है, जो कंपनी में एआई स्ट्रैटजी से जुड़ा कामकाज देखेंगे. भारतीय मूल के अमर पहले माइक्रोसॉफ्ट और गूगल डीपमाइंड में काम कर चुके हैं. बता दें कि 2024 में ऐप्पल इंटेलीजेंस डिवीजन की शुरुआत के बाद लीडरशिप लेवल पर यह पहला बड़ा चेंज है. 

एआई में पिछड़ रही है ऐप्पल

ऐप्पल लीडरशिप में यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है, जब कंपनी एआई एडवांसमेंट को लेकर बाकी कंपनियों से काफी पीछे है. कंपनी न तो अपने डिवाइस में बड़े एआई फीचर दे पाई है और वह सिरी को भी एआई से लैस करने में संघर्ष कर रही है. अब अमर पर यह बड़ी जिम्मेदारी आई है. अपने पद पर रहते हुए अमर ऐप्पल के सॉफ्टवेयर चीफ Craig Federighi को रिपोर्ट करेंगे. Craig भी ऐप्पल में एआई को लेकर अहम भूमिका निभा रहे हैं. ऐप्पल में फाउंडेशन मॉडल, एआई रिसर्च और सेफ्टी पर काम कर रही टीमें अब अमर को रिपोर्ट करेंगी.

कौन हैं Amar Subramanya?

एआई एक्सपर्ट अमर माइक्रोसॉफ्ट से ऐप्पल में आ रहे हैं. माइक्रोसॉफ्ट में वो एआई के कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट की भूमिका निभा रहे थे. इससे पहले उन्होंने 16 साल तक गूगल में काम किया था. गूगल में वो जेमिनी असिस्टेंट की इंजीनियरिंग के हेड थे. उनकी नियुक्ति को लेकर ऐप्पल का कहना है कि एआई और मशीन लर्निंग और रिसर्च को प्रोडक्ट और फीचर में इंटीग्रेट करने की उनकी एक्सपर्टीज ऐप्पल के इनोवेशन और ऐप्पल इंटेलीजेंस के आने वाले फीचर्स में अहम भूमिका निभाएगी. कंपनी ने कहा कि अमर की एक्सपर्टीज से एआई टेक्नोलॉजी की नेक्स्ट जनरेशन को गाइडेंस मिलेगी.

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iPhone Air की कीमत में बड़ी गिरावट! अब तक का सबसे पतला iPhone सबसे सस्ते दाम पर

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iPhone Air: अगर आप लंबे समय से iPhone Air खरीदने का प्लान बना रहे थे तो यह मौका आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट है. साल 2025 के सितंबर में लॉन्च हुआ यह अब तक का सबसे पतला और हल्का iPhone अब बड़ी कीमत कटौती के साथ उपलब्ध है. ब्लैक फ्राइडे सेल के चलते फोन की कीमतों में भारी गिरावट आई है जिससे यह प्रीमियम iPhone अब पहले से कहीं ज्यादा किफायती हो गया है.

iPhone Air के दामों में भारी कटौती कहाँ मिल रही है?

रिलायंस डिजिटल पर iPhone Air के सभी स्टोरेज वेरिएंट अभी लॉन्च कीमत से कम दाम पर बेचे जा रहे हैं. 256GB मॉडल की कीमत 1,19,900 रुपये से घटकर 1,09,900 रुपये हो गई है. 512GB वेरिएंट अब 1,39,900 रुपये की जगह 1,28,900 रुपये में उपलब्ध है. वहीं 1TB मॉडल सबसे ज्यादा सस्ता हुआ है जिसकी कीमत 1,59,900 रुपये से गिरकर 1,46,900 रुपये हो गई है.

इसके अलावा, कई बैंक ऑफर, एक्सचेंज बोनस और नो-कॉस्ट EMI विकल्प भी उपलब्ध हैं जिससे फोन और भी कम दाम में खरीदा जा सकता है. यह फिलहाल बाजार में उपलब्ध सबसे आकर्षक प्रीमियम iPhone डील्स में से एक है.

iPhone Air

सिर्फ 5.6mm की मोटाई के साथ iPhone Air, Apple द्वारा बनाया गया सबसे पतला iPhone है.

iPhone 17 सीरीज से भी स्लिम होने के बावजूद यह फोन मजबूत Ceramic Shield बॉडी के साथ आता है, जिसे आम ग्लास से चार गुना ज्यादा मजबूत बताया गया है. फोन में 6.5-इंच Super Retina XDR OLED डिस्प्ले, 120Hz रिफ्रेश रेट और 3000 निट्स पीक ब्राइटनेस मिलती है. यह Cloud White, Light Gold, Sky Blue और Space Black जैसे प्रीमियम रंग विकल्पों में उपलब्ध है.

Samsung Galaxy S24 में भी हुआ बड़ा प्राइस ड्रॉप

सिर्फ iPhone ही नहीं, Samsung Galaxy S24 (Snapdragon मॉडल) की कीमत में भी 38,000 रुपये की भारी कटौती की गई है. Flipkart पर 8GB + 128GB वेरिएंट 47,999 रुपये में लिस्टेड है जो बैंक ऑफर के साथ घटकर 40,999 रुपये तक पहुंच जाता है. SBI क्रेडिट कार्ड उपयोग करने पर अतिरिक्त 4,000 रुपये कैशबैक भी मिल रहा है.

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ये हैं 25 हजार रुपये के अंदर आने वाले बेस्ट 5G स्मार्टफोन! जानिए कौन-सा मॉडल है आपके लिए परफेक्

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Smartphones Under 25K: साल अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुका है लेकिन स्मार्टफोन लॉन्च की रफ्तार कम होने का नाम नहीं ले रही. दिसंबर आते-आते इस बजट सेगमेंट में कई दमदार फोन मार्केट में एंट्री कर चुके हैं. अगर आप लगभग 25 हज़ार रुपये में एक ऐसा फोन ढूंढ रहे हैं जिसमें परफॉर्मेंस, कैमरा, बैटरी और डिस्प्ले—all-round बैलेंस मिले तो यह लिस्ट आपके बहुत काम आएगी.

OnePlus Nord CE 5

इस नए मॉडल में बड़ा 6.77-इंच AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 1.5K रेज़ॉल्यूशन के साथ कंटेंट देखने का शानदार अनुभव देता है. इसमें Dimensity 8350 Apex चिपसेट लगाया गया है जो इस रेंज में काफी स्मूद परफॉर्मेंस ऑफर करता है. 12GB तक की LPDDR5X RAM और UFS 3.1 स्टोरेज मल्टीटास्किंग को आसान बनाती है.

पीछे 50MP का Sony सेंसर OIS के साथ मिलता है, जो लो-लाइट में भी अच्छा काम करता है. सबसे बड़ा हाईलाइट इसका 7,100mAh बैटरी पैक है जो 80W चार्जिंग के साथ आता है. हां, एक कमी यह है कि इसमें सिंगल स्पीकर और NFC सपोर्ट नहीं है.

Lava Agni 4

Lava का यह मॉडल 6.67-इंच 120Hz AMOLED डिस्प्ले के साथ आता है. Dimensity 8350 प्रोसेसर और LPDDR5X RAM इसे स्पीड-लवर यूज़र्स के लिए अच्छा विकल्प बनाते हैं. 50MP OIS कैमरा और 50MP का सेल्फी कैमरा इसका मजबूत पक्ष है.

डिज़ाइन की बात करें तो ग्लास बैक और मेटल फ्रेम इसे काफी प्रीमियम महसूस करवाते हैं. हालांकि 5,000mAh बैटरी आज की जरूरतों के हिसाब से थोड़ी कम लगती है और कैमरों का ट्यूनिंग उतना प्रभावशाली नहीं है.

Infinix GT 30 Pro

Infinix ने इस फोन को खास गेमिंग फैनबेस को ध्यान में रखकर बनाया है. 6.78-इंच AMOLED डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है जो तेज़ मोशन में भी बेहद स्मूद विज़ुअल्स देता है. Dimensity 8350 Ultimate और 12GB RAM इसे हाई-एंड गेमिंग के लिए काफी योग्य बनाते हैं.

इसमें 108MP कैमरा, 5,500mAh बैटरी और वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट दिया गया है. GT 30 Pro की सबसे बड़ी खासियत इसके शोल्डर ट्रिगर्स और पीछे लगी फ्यूचरिस्टिक लाइटिंग है. कमी सिर्फ इतनी है कि बैटरी थोड़ी छोटी लगती है और कैमरे में OIS नहीं मिलता.

Poco X7 Pro

Poco ने इस मॉडल में MediaTek 8400 Ultra चिपसेट दिया है जो परफॉर्मेंस के मामले में इस बजट में काफी आगे है. 1.5K AMOLED डिस्प्ले, 90W फास्ट चार्जिंग और 6,550mAh बैटरी इसे पावर-हंग्री यूज़र्स के लिए शानदार विकल्प बनाते हैं. 50MP OIS कैमरा बढ़िया स्टेबलाइजेशन देता है और IP68 रेटिंग इस फोन को पानी-धूल से सुरक्षित रखती है. हाँ, सॉफ्टवेयर में मौजूद एड्स कई यूजर्स को परेशान कर सकते हैं.

Vivo T4

Vivo का यह फोन 6.77-इंच AMOLED डिस्प्ले और Snapdragon 7s Gen 3 चिपसेट के साथ आता है. इसका सबसे बड़ा हाइलाइट 7,300mAh की बैटरी है जो 90W चार्जिंग के साथ बेहद लंबा बैकअप देती है. 50MP OIS कैमरा इसका अच्छा पॉइंट है, लेकिन Ultra-wide लेंस की गैरमौजूदगी और पुरानी RAM-स्टोरेज टेक्नोलॉजी थोड़ी निराश करती है.

आपकी जरूरत के हिसाब से बेस्ट विकल्प

अगर आप गेमिंग पसंद करते हैं, तो Poco X7 Pro, OnePlus Nord CE 5 और Infinix GT 30 Pro में से कोई भी गलत चुनाव नहीं होगा. GT 30 Pro गेमर्स के लिए खास तौर पर बेहतर है क्योंकि इसमें शोल्डर ट्रिगर्स, हाई-रिफ्रेश डिस्प्ले और यूनिक लाइटिंग मिलती है.

कैमरा आपके लिए बड़ी प्राथमिकता है तो OnePlus Nord CE 5 इस लिस्ट में सबसे भरोसेमंद चुनाव साबित होता है. OnePlus का सॉफ्टवेयर अनुभव और बड़ी बैटरी इसे ऑल-राउंडर बनाते हैं, हालांकि प्रीमियम बिल्ड और UFS 4.0 स्टोरेज की कमी महसूस हो सकती है.

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iPhone SE फर्स्ट जनरेशन हुआ ऐप्पल की विंटेज लिस्ट में शामिल, यूजर्स के लिए क्या है इसका मतलब?

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ऐप्पल ने iPhone SE फर्स्ट जनरेशन को अपनी विंटेज प्रोडक्ट लिस्ट में शामिल कर लिया है. छोटे आकार वाला यह आईफोन काफी हिट साबित हुआ था और लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया था. अब यह फोन विंटेज लिस्ट में आ गया है. ऐप्पल आमतौर पर उन प्रोडक्ट्स को अपनी विंटेज लिस्ट में शामिल करती है, जिनकी बिक्री को 5 साल पहले बंद कर दिया गया था, लेकिन बिक्री बंद होने को सात साल नहीं हुए हैं. आइए जानते हैं कि इससे यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा. 

विंटेज लिस्ट में शामिल होने का ग्राहकों के लिए क्या मतलब?

अगर आप iPhone SE फर्स्ट जनरेशन यूज कर रहे हैं तो इस फैसले का आपके लिए बहुत महत्व है. विंटेज लिस्ट में शामिल प्रोडक्ट्स को ऐप्पल के ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर पर रिपेयर के लिए ले जाया जा सकता है. हालांकि, पार्ट्स उपलब्ध होने पर इस आईफोन को रिपेयर किया जाएगा. विंटेज लिस्ट वाले प्रोडक्ट के पार्ट्स के लिए ऐप्पल गारंटी नहीं लेती है. ऐसे में अगर इस आईफोन की बैटरी या स्क्रीन खराब हो जाती है तो कई जगह इसे रिपेयर किया जा सकता है और कई जगह यूजर्स को वापस भी लौटाया जा सकता है. इसकी रिपेयरिंग पार्ट्स की उपलब्धता पर निर्भर करेगी. 

सात साल होने के बाद क्या होता है?

किसी डिवाइस की बिक्री बंद होने के सात साल बाद ऐप्पल उसके हार्डवेयर देना पूरी तरह बंद कर देती है. इसका मतलब है कि अगर आपके पास ऐसा डिवाइस है, जिसकी बिक्री बंद हुए सात साल से ज्यादा हो चुके हैं तो ऐप्पल की तरफ से आपको किसी प्रकार की कोई हेल्प नहीं मिलेगी. न तो ऐप्पल के सर्विस सेंटर पर इसे रिपेयर किया जाएगा और न ही इसके नए पार्ट्स मिलेंगे. ऐसे में अगर पुराना डिवाइस खराब हो जाता है तो आप केवल थर्ड-पार्टी सर्विस सेंटर से ही इसे रिपेयर करवा पाएंगे.

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भारत, दुबई और अमेरिका में इतनी हो सकती है आईफोन 18 की कीमत, जानिए इसके एक्सपेक्टेड फीचर्स

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आईफोन 17 सीरीज की लॉन्चिंग के बाद ऐप्पल आईफोन 18 सीरीज की तैयारी में जुटी हुई है. अगले साल से ऐप्पल अपने सारे नए आईफोन एक साथ लॉन्च नहीं करेगी. सितंबर, 2026 में आईफोन प्रो मॉडल्स के साथ फोल्डेबल आईफोन लॉन्च होने की उम्मीद है, जबकि आईफोन 18 मॉडल को 2027 की शुरुआत में आईफोन 18e मॉडल के साथ लॉन्च किया जाएगा. आईफोन 18 से जुड़ी कई लीक्स सामने आई हैं, जिनमें इसके फीचर्स और अनुमानित कीमत का खुलासा हो गया है. 

क्या होगा आईफोन 18 में खास?

आईफोन 18 के लुक में खास बदलाव देखने को नहीं मिलेगा और इसकी डिजाइन लैंग्वेज आईफोन 17 के समान ही रह सकती है. इसमें 6.3 इंच का सुपर रेटिना डिस्प्ले दिया जा सकता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आएगा. इसमें ऐप्पल का A20 चिपसेट मिलने की उम्मीद है, जिसे 12GB रैम और 256GB स्टोरेज के साथ पेयर किया जा सकता है. इस फोन को ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर के साथ लॉन्च किया जाएगा. कैमरा की बात करें तो इसमें आईफोन 17 की तरह डुअल रियर कैमरा सेटअप मिल सकता है, जिसमें 48MP+48MP के दो लेंस होंगे और फ्रंट में इसे 18MP का सेंटर स्टेज कैमरा दिया जा सकता है. हालांकि, कैमरा आईलैंड के लुक को थोड़ा बदला जा सकता है. इसमें आईफोन 17 से बड़ी बैटरी मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं.

कहां कितनी हो सकती है कीमत?

ऐप्पल की तरफ से अभी तक इस आईफोन को लेकर कोई भी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि भारत में इसकी शुरुआती कीमत 85,900 रुपये हो सकती है. दुबई की बात करें तो यहां इस आईफोन के लिए 2,899 दिरहम और अमेरिका में 799 डॉलर चुकाने पड़ सकते हैं. ग्लोबल मार्केट में इस आईफोन को 2027 के फरवरी-मार्च में लॉन्च किया जा सकता है. 

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Artificial Intelligence: भारत में AI अब सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि डिजिटल लाइफ़ का रोज़मर्रा का हिस्सा बन चुका है चाहे चैटिंग हो, ऑनलाइन पेमेंट हों या फिर वे ऐप्स जो आपकी पसंद के हिसाब से वीडियो, ख़बरें और शॉपिंग सुझाव दिखाते हैं. जैसे-जैसे AI का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यह सवाल भी बड़ा हो रहा है कि इस शक्तिशाली तकनीक को कैसे नियंत्रित किया जाएगा और आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी.

इन्हीं चिंताओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने India AI Governance Guidelines जारी की हैं. लगभग 65 पन्नों वाली यह डॉक्यूमेंट बताती है कि देश में AI को सुरक्षित, पारदर्शी और सभी के लिए उपयोगी बनाने के लिए किस दिशा में कदम उठाए जाएंगे. भले यह दिशा-निर्देश बड़ी नीतियों पर आधारित हों लेकिन इसका सबसे बड़ा प्रभाव उन करोड़ों लोगों पर पड़ेगा जो रोज अपने स्मार्टफोन और इंटरनेट सेवाओं पर निर्भर रहते हैं. सरकार का सबसे बड़ा संदेश यह है कि AI पर जनता का भरोसा ही इसका आधार है और अगर भरोसा कमजोर पड़ा तो तकनीक का विस्तार भी रुक जाएगा.

AI ऐप्स में साफ़-सुथरे खुलासे और पारदर्शिता की शुरुआत

नए नियमों के लागू होने के बाद यूज़र्स के डिजिटल अनुभव का सबसे बड़ा बदलाव पारदर्शिता के रूप में सामने आएगा. सरकार ने साफ़ कहा है कि AI सिस्टम ‘Understandable by Design’ होने चाहिए यानी किसी भी ऐप में इस्तेमाल हो रही AI के बारे में यूज़र को सरल और समझ में आने वाले खुलासे मिलें.

इसका असर यह होगा कि आपकी स्क्रीन पर जो भी AI-जनित सामग्री दिखेगी, चैटबॉट से होने वाली बातचीत, या फिर शॉपिंग/लोन जैसे ऐप्स की सिफारिशें इन सबकी वजहें स्पष्ट तौर पर बतानी होंगी. एल्गोरिदम अब अपने फैसले छुपाकर नहीं रख पाएंगे.

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी AI वैल्यू-चेन डिज़ाइन, डेवलपमेंट से लेकर ऑपरेशन तक की पारदर्शिता ज़रूरी है ताकि किसी भी गलती या दुरुपयोग पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.

डीपफेक और खतरनाक AI कंटेंट पर सख़्त नियंत्रण

AI के बढ़ते दुरुपयोग से सबसे ज्यादा चिंता डीपफेक्स को लेकर है. फर्जी वीडियो, आवाज़ और तस्वीरों ने लोगों की निजता और सुरक्षा को गंभीर खतरा बना दिया है. दिशानिर्देशों में इसे समाज के लिए तेज़ी से बढ़ता हुआ ख़तरा बताया गया है और तुरंत कदम उठाने की ज़रूरत जताई गई है.

सरकार चाहती है कि AI-बने वीडियो और तस्वीरें वॉटरमार्क के साथ आएं ताकि असली और नकली कंटेंट की पहचान आसान हो. साथ ही प्लेटफॉर्म्स को ऐसे सिस्टम बनाने होंगे जो डीपफेक तैयार करने वालों का पता लगा सकें. दस्तावेज़ में खासतौर पर यह भी कहा गया है कि महिलाएं AI-आधारित गैर-सहमति वाले कंटेंट की शिकार सबसे अधिक बन रही हैं, इसलिए उनके लिए अलग से सुरक्षा उपाय और सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है.

डाटा प्राइवेसी के कड़े नियम और यूज़र के अधिकार

AI मॉडलों को ट्रेन करने के लिए उपयोगकर्ताओं का डाटा सबसे महत्वपूर्ण आधार है. इसी वजह से सरकार ने यह साफ कहा है कि AI सिस्टम को भारत के डेटा प्रोटेक्शन कानूनों के अनुरूप चलाना अनिवार्य होगा.

AI मॉडल में किसी भी उपयोगकर्ता का डाटा इस्तेमाल करने से पहले स्पष्ट सहमति लेनी होगी. यूज़र्स को यह भी बताना होगा कि उनका कौन-सा डेटा किस उद्देश्य के लिए लिया जा रहा है और उसका इस्तेमाल कैसे होगा. भविष्य में यूज़र्स को अपने डाटा को अन्य सेवाओं पर ट्रांसफर करने का अधिकार (डेटा पोर्टेबिलिटी) भी मिल सकता है जिससे डिजिटल स्वतंत्रता और बढ़ेगी.

AI की वजह से नुकसान हो तो शिकायतों का तेज समाधान

दिशानिर्देशों ने ग्रिवेंस रिड्रेसल पर खास ध्यान दिया है. सरकार का कहना है कि हर कंपनी और प्लेटफॉर्म को ऐसा सिस्टम बनाना होगा जहां यूज़र AI-संबंधित किसी भी नुकसान की शिकायत आसानी से दर्ज करा सके. इसके लिए मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट, त्वरित प्रतिक्रिया और समाधान की स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही, एक राष्ट्रीय AI Incident Database बनाने की भी सिफारिश की गई है, जहां AI से जुड़े सभी घटनाक्रम दर्ज होंगे ताकि समय रहते जोखिमों का पता लग सके.

स्मार्टफोन और इंटरनेट को साइबर हमलों से मजबूत सुरक्षा

AI का दुरुपयोग साइबर अटैक, डेटा पॉइज़निंग या सिस्टम के साथ छेड़छाड़ जैसे रूप भी ले सकता है. दिशानिर्देश इन खतरों पर चेतावनी देते हुए मजबूत सुरक्षा उपायों की जरूरत बताते हैं. इससे डिजिटल इकोसिस्टम में बेहतर सुरक्षा आएगी—चाहे वह ऐप्स हों, नेटवर्क हों या फिर खुद स्मार्टफ़ोन. AI-आधारित खतरे पहचानने वाली तकनीकें और सुरक्षा ऑडिट आम बात बन जाएंगी.

AI साक्षरता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान

दस्तावेज़ में बार-बार इस बात पर जोर दिया गया है कि जनता को AI के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है यह कैसे काम करता है, इसके फायदे क्या हैं और इसके जोखिम क्या हो सकते हैं. सरकार राष्ट्रीय स्तर पर ट्रेनिंग प्रोग्राम और पब्लिक कैंपेन चलाने की तैयारी में है ताकि लोग डीपफेक पहचान सकें, गलत सुझावों को समझ समझ सकें और तकनीक का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कर सकें.

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