मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के दृष्टिवान नेतृत्व में राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा अर्निंग वेल-लिविंग वेल मंत्र को पूरा करने वाला ‘गुजरात जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक-2025’ विधानसभा में पारित हुआ

*कानूनी सरलता तथा पारदर्शिता की ओर राज्य सरकार का एक और कदम*

*प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दिशादर्शन में वैश्विक निवेशकों की पसंद बने गुजरात में मैक्सिमम गवर्नेंस-मिनिमम गवर्नमेंट के ध्येय को जनविश्वास विधेयक और तेज गति से साकार करेगा*

*6 विभागों के 11 कानूनों-अधिनियमों के लगभग 516 प्रावधानों में सुझाए गए सुधार किए जाएंगे*

*उद्योग मंत्री श्री बलवंतसिंह राजपूत द्वारा विधानसभा सदन में प्रस्तुत किए गए ‘गुजरात जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक-2025’ के मुख्य लाभ :*
– *विश्वास आधारित शासन को प्रोत्साहन–नागरिकों में अनावश्यक भय कम होगा*
– *कानून की चूक की गंभीरता के अनुसार फाइन नहीं, बल्कि पैनल्टी*
– *न्यायिक प्रणाली के बोझ में कमी*
– *कानूनी सुधारों द्वारा व्यापारिक सशक्तिकरण का दिशादर्शन*
– *पुराने कानूनों का समयानुकूल आधुनिकीकरण*
– *एमएसएमई-स्टार्टअप्स सहित अन्य व्यवसायों को प्रोत्साहन*

*गांधीनगर, 09 सितंबर :* प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिवान नेतृत्व में विकसित भारत@2047 के लिए विकसित गुजरात के निर्माण की दिशा में मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के दिशादर्शन में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तथा पॉलिसी ड्रिवन गवर्नेंस के चलते गुजरात आज जब विश्वभर के निवेशकों की पहली पसंद बना है, तब ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को वेग देकर अर्निंग वेल-लिविंग वेल की संकल्पना साकार करने का राज्य सरकार का ध्येय है।

15वीं गुजरात विधानसभा के सातवें सत्र के दूसरे दिन उद्योग मंत्री श्री बलवंतसिंह राजपूत ने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सदन में ‘गुजरात जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक-2025’ प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के सरलता एवं पारदर्शिता की ओर एक और ठोस कदम के रूप में पारित हुआ यह जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक-2025 राज्य में कानून के पालन को आसान बनाकर, डिजिटलाइज्ड कर तथा सुयोग्य ढंग से बदलाव लाकर व्यापार सरलता के साथ जीवन जीने की सरलता में भी वृद्धि करने वाला सिद्ध होगा। इतना ही नहीं; न्यायपालिका पर बोझ घटाने में भी यह विधेयक उपयुक्त बनेगा।

मंत्री श्री बलवंतसिंह राजपूत ने सदन में इस जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक-2025 की पृष्ठभूमि रखते हुए कहा कि किसी भी देश में विकास के लिए स्थिर नीतियाँ तथा अच्छा व्यावसायिक माहौल बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने हमेशा कानूनों को आधुनिक, फ्लेक्सिबल, पीपल फ्रेंड्ली तथा विश्वास आधारित बनाया है। सरकार ने आम नागरिकों तथा उद्योगों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना है।

इतना ही नहीं; टेक्नोलॉजी के उपयोग से त्वरित एवं अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकने वाले क्षेत्रों में उनके मार्गदर्शन का भी सरकार ने स्वागत किया है। इसलिए केन्द्र सरकार ने 2023 में जनविश्वास अधिनियम लागू कर कम्प्लायंसेज घटाने का प्रयास किया है। इस दिशा में केन्द्र व राज्य स्तर पर 40 हजार से अधिक कम्प्लायंसेज निर्मूल किए गए। इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को प्रोत्साहन मिला है। हाल ही में संसद में जनविश्वास विधेयक 2.0 प्रस्तुत हुआ है।

राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार के जनविश्वास विधेयक 2.0 का विस्तृत अध्ययन करने के बाद गुजरात जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक-2025 तैयार किया है।

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल इन्क्रीमेंटल चेंज के लिए नहीं, बल्कि क्वाण्टम जंप के लक्ष्य के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात के सुदृढ़ विकास की डाली गई नींव को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ट्रस्ट बेस्ड गवर्नेंस तथा प्रो-पीपल गवर्नेंस के लिए हमेशा आग्रही रहे हैं। उसे साकार करते हुए राज्य सरकार के 6 विभागों के 11 कानूनों-नियमों के अंतर्गत लगभग 516 प्रावधानों को अपराधमुक्त डिक्रिमिनलाइज्ड करना इस विधेयक का उद्देश्य है।

उद्योग मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस विधेयक में कानूनों एवं नियमों में सुझाए गए सुधारों में छोटी (कम गंभीर) भूलों के लिए जहाँ तक संभव हो, कैद की सजा का प्रावधान हटा दिया गया है और फाइन यानी दंड के स्थान पर वित्तीय पैनल्टी के प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार के शहरी विकास विभाग, श्रम एवं कौशल विकास तथा रोजगार विभाग, नर्मदा, जल संसाधन, जलापूर्ति एवं कल्पसर विभाग, उद्योग एवं खान विभाग, कृषि, किसान कल्याण एवं सहकारिता विभाग और वित्त विभाग के 11 कानूनों-नियमों के अंतर्गत आने वाले 516 प्रावधानों को अपराधमुक्त करने से सजा के भय के स्थान पर प्रामाणिकता से कानूनों के पालन में मदद मिलेगी।

उन्होंने अपराधमुक्त किए गए 516 प्रावधानों का विवरण देते हुए कहा कि एक प्रावधान में कैद की धारा है, जिसे हटाया जा रहा है। 17 प्रावधानों में कैद या फाइन को पैनल्टी में बदला जा रहा है तथा 498 प्रावधानों में फाइन को पैनल्टी में बदला जाएगा।

इसके अलावा; 8 कानूनों के अंतर्गत उल्लंघन के समाधान की व्यवस्था के साथ अधिकारी द्वारा राशि स्वीकार किए जा सकने के प्रावधान किए गए हैं।

उद्योग मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में प्रस्तुत हुए इस विधेयक का उद्देश्य नियमों में सुधारों से भी एक कदम आगे बढ़कर सरकार व नागरिकों के बीच विश्वास को अधिक मजबूत करने का प्रयास है।

इस विधेयक का उद्देश्य फाइलिंग विलंब, लाइसेंस रिन्यूल में विलंब टालना, सुरक्षा उल्लंघन संबंधी छोटी भूलों के लिए अनपेक्षित व फौजदारी आरोंपों से मुक्ति देना, न्यायिक प्रणाली पर बोझ घटाकर पैनल्टी आधारित दंड व्यवस्था लाना है। इस विधेयक से विशेषकर स्टार्टअप्स तथा एमएसएमई अधिक सुदृढ़ होंगे और छोटी (कम गंभीर) भूलों के लिए फौजदारी कार्यवाही के अनावश्यक भय के बिना अपने उद्योग-व्यवसायों का और बेहतर ढंग से विकास कर राज्य में एमएसएमई इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाएंगे।

श्री राजपूत ने कहा कि अब तक राज्य स्तर के जनविश्वास कानून पारित करने वाले अन्य राज्यों की तुलना में गुजरात ने सबसे अधिक कानूनों एवं प्रावधानों में सुधार किया है।

उद्योग मंत्री ने विधानसभा सदन के समक्ष ‘गुजरात जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक-2025’ के लाभों का विवरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के दिशादर्शन में तैयार किया गया यह जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक-2025 राज्य में विकास एवं निवेश को अधिक मजबूत करने के साथ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा ईज ऑफ लिविंग को भी गति देगा।

इस विधेयक में छोटे (कम गंभीर) उल्लंघनों और छोटे अपराधों को आपराधिक श्रेणी से बाहर निकाल कर डिक्रिमिनलाइज्ड करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। दंडात्मक कदमों के स्थान पर सुधारात्मक कदमों को जो प्रोत्साहन दिया गया है, वह राज्य के सर्वग्राही विकास के साथ नियमनकारी सुधार यात्रा का महत्वपूर्ण माइलस्टोन बनेगा तथा गुजरात की देश के विकास के रोल मॉडल के रूप में स्थापित हुई पहचान को मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में व्यापक स्तर पर उजागर करेगा।

इस विधेयक पर सत्तापक्ष तथा प्रतिपक्ष के सदस्यों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और इसके बाद यह ‘गुजरात जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक-2025’ सदन में बहुमत से पारित किया गया।

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल की उपस्थिति में – वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस के पूर्वार्ध के रूप में दिल्ली में डिप्लोमैट्स तथा हेड ऑफ द मिशन के साथ संवाद-बैठक संपन्न

*45 देशों के राजदूत, उच्चायुक्त तथा प्रतिनिधि सहभागी हुए*
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*गुजरात 69 बिलियन यूएस डॉलर के एफडीआई एवं निर्यात में 27 प्रतिशत के योगदान के साथ सुदृढ़ वैश्विक संपर्क रखने वाला राज्य बना है : मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल*
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*मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल*
*राजदूत इन्क्लूजिव तथा सस्टेनेबल इकोनॉमीज के निर्णायक पार्टनर*
*’व्यापारी राज्य’ की इमेज से आगे बढ़कर गुजरात अब न्यू एज इंडस्ट्री का हब बनने की ओर अग्रसर*
*एआई, स्पेस टेक, फिनटेक, सेमीकंडक्टर, डिफेंस एंड एयरोस्पेस, ईवी जैसे फ्यूचरिस्टिक सेक्टर्स में गुजरात देश का पथ प्रदर्शक राज्य*
*देश के सबसे लंबे समुद्री तट, 49 पोर्ट्स, पीएम गतिशक्ति मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तथा रोबस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ गुजरात लॉजिस्टिक्स में अग्रिम राज्य*

*गांधीनगर, 5 सितंबर :* मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने नई दिल्ली में विभिन्न राजदूतों तथा मिशन प्रमुखों के साथ संवाद बैठक में गुजरात के वैश्विक विकास की प्रभावी प्रस्तुति करते हुए कहा कि 69 लाख यूएस डॉलर के एफडीआई एवं निर्यात में 27 प्रतिशत योगदान के साथ गुजरात सुदृढ़ वैश्विक संपर्क रखने वाला राज्य बना है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दिशादर्शन में आयोजित होने वाली वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंसेज (वीजीआरसी) के पूर्वार्ध के रूप में नई दिल्ली में राज्य सरकार द्वारा आयोजित संवाद बैठक में लगभग 45 राष्ट्रों के राजदूत, उच्चायुक्त तथा प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने इस संवाद बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से 2003 में शुरू हुई वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट (वीजीजीएस) की उत्तरोत्तर सफलता के परिणामस्वरूप गुजरात ‘व्यापारी राज्य’ की इमेज से आगे बढ़कर अब न्यू एज इंडस्ट्री का हब बनने की ओर अग्रसर है।

उन्होंने जोड़ा कि एआई, स्पेस टेक, फिनटेक, सेमीकंडक्टर, डिफेंस एंड एयरोस्पेस, ईवी तथा ग्रीन एनर्जी जैसे फ्यूचरिस्टिक सेक्टर्स के उद्योगों के केन्द्र के साथ गुजरात देश का पथ प्रदर्शक राज्य बना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में पिछले दो दशक में गुजरात ग्रोथ, स्टेबिलिटी तथा अपॉर्च्युनिटीज का उज्ज्वल प्रतीक बना है। इतना ही नहीं; गुजरात वैश्विक निवेशकों के लिए एक ट्रस्टेड पार्टनर भी है।

श्री भूपेंद्र पटेल ने यह भी जोड़ा कि नीति आधारित शासन, निवेशकों के अनुकूल मैत्रीपूर्ण वातावरण तथा सुगठित ढाँचागत सुविधाएँ प्रदान कर गुजरात विदेशी निवेशकों के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन फॉर इन्वेस्टमेंट बना है।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि कनेक्टिविटी तथा औद्योगिक इकोसिस्टम गुजरात की स्ट्रेंथ हैं। देश के सबसे लंबे समुद्री तट, 49 पोर्ट्स तथा पीएम गतिशक्ति अंतर्गत मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के साथ लॉजिस्टिक्स एवं निर्यात में गुजरात ने अग्रणी राज्य के रूप में स्थान प्राप्त किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की विजनरी लीडरशिप में गुजरात देश के औद्योगिक उत्पादन में 18 प्रतिशत का योगदान देता है।

वीजीआरसी की पृष्ठभूमि देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट की सफलता को राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में विस्तृत करेगी, एमएसएमई को सशक्त बनाएगी तथा क्षेत्रीय रूप से संतुलित विकास को प्रोत्साहन देगी।

उन्होंने राजदूतों तथा भागीदार देशों को वीजीआरसी थीम ‘क्षेत्रीय आकांक्षाएँ, वैश्विक महत्वाकांक्षाएँ’ के साथ अनुरूप एवं इन्क्लूजिव, इनोवेटिव व सस्टेनेबल इकोनॉमीज के निर्माण में गुजरात के साथ सहभागी होने और व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ आगामी रीजनल कॉन्फ्रेंसेज में भाग लेने के लिए राजदूत समुदाय को ऊष्मापूर्ण आमंत्रण दिया।

इस अवसर पर विदेश मंत्रालय के आर्थिक संबंध प्रभाग के सचिव श्री सुधाकर दलेला ने कहा, “वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंसेज वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट की सफलता के बाद का महत्वपूर्ण कदम है और क्षेत्रीय क्षमताओं को दर्शाने, जमीनी स्तर के विकास को प्रोत्साहन देने तथा स्थानीय आकांक्षाओं को ‘विकसित भारत@2047’ तथा ’विकसित गुजरात@2047’ के व्यापक विजन से सुसंगत प्लेटफॉर्म के रूप में सेवा देंगी।”

उन्होंने गुजरात सरकार की वीजीआरसी की इस नवीनतम पहल की प्रशंसा करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह नया प्लेटफॉर्म निवेशकों में समान उत्साह पैदा करेगा।

इस अवसर पर राज्य के मुख्य सचिव श्री पंकज जोशी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव श्री एम. के. दास, उद्योग विभाग की प्रधान सचिव श्रीमती ममता वर्मा तथा विदेश मंत्रालय के के संयुक्त सचिव (आर्थिक कूटनीति) श्री पी. एस. गंगाधर आदि ने भी प्रासंगिक संबोधन किया।

इस संवाद बैठक में राजदूत, केन्द्र तथा राज्य सरकार के वरिष्ठ सचिव सहभागी हुए।

पंजाब के साथ खड़े हों: बाढ़ राहत के लिए सहयोग की अपील

इस समय पंजाब भीषण बाढ़ के विनाशकारी संकट का सामना कर रहा है। भारी बारिश के कारण बड़े पैमाने पर तबाही हुई है, अनगिनत परिवार विस्थापित हो गए हैं, घर और खेत पानी में डूब गए हैं, और अनगिनत जीवन और आजीविकाएँ खतरे में हैं। इस संकट की घड़ी में, पंजाब के लोगों को हमारी तत्काल मदद की ज़रूरत है।

आपका सहयोग पीड़ितों को तत्काल राहत पहुँचा सकता है

पंजाब सरकार बचाव और राहत कार्यों के लिए सभी संभव संसाधन जुटा रही है। हालाँकि, आपदा की गंभीरता को देखते हुए एक सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वे आगे आएँ और मुख्यमंत्री राहत कोष में उदारतापूर्वक योगदान दें।

आपका दान, चाहे छोटा हो या बड़ा, सीधे प्रभावित लोगों तक पहुँचेगा और उन्हें निम्नलिखित सहायता प्रदान करेगा:

तत्काल चिकित्सा सहायता 🩺

साफ पीने का पानी और खाद्य सामग्री 🍚

विस्थापित परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय ⛺

जीवन को फिर से संवारने के लिए आवश्यक सामग्री

दान कैसे करें

योगदान करना सरल और सुरक्षित है। आप अपने स्मार्टफोन पर किसी भी UPI-सक्षम पेमेंट ऐप का उपयोग करके ऊपर दी गई छवि में क्यूआर कोड को स्कैन करके सीधे मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर सकते हैं।

आइए, पंजाब को इस संकट से उबरने और पुनर्निर्माण में मदद करने के लिए एकजुट हों। आपकी उदारता किसी ज़रूरतमंद के लिए आशा और तत्काल राहत ला सकती है।

आइए पंजाब के लोगों को दिखाएँ कि वे अकेले नहीं हैं। अभी दान करें।

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने आणंद जिले के नावली में पांच करोड़ रुपए के खर्च से निर्मित एनसीसी लीडरशिप एकेडमी भवन का लोकार्पण किया

एनसीसी कैडेट्स में नेतृत्व, अनुशासन और जिम्मेदार नागरिक के गुण विकसित करने का केंद्र बनेगी नावली स्थित एनसीसी लीडरशिप
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5 करोड़ रुपए की लागत से पहले चरण का निर्माण, 200 कैडेट्स के लिए आवास और प्रशिक्षण की व्यवस्था : दूसरे चरण के निर्माण के बाद क्षमता बढ़कर 600 कैडेट्स की हो जाएगी
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28 जुलाई से युवा आपदा प्रशिक्षण और एनसीसी कैंप का आयोजन
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गांधीनगर, 25 जुलाई : मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने शुक्रवार को आणंद जिले के नावली दहेमी रोड पर 5 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) लीडरशिप एकेडमी के आधुनिक भवन का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के आर्थिक सहयोग से निर्मित इस आधुनिक भवन का निरीक्षण कर यहां उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जाना। उन्होंने एनसीसी लीडरशिप एकेडमी भवन के प्रांगण में पौधरोपण किया। इस अवसर पर एनसीसी कैडेट्स की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

गुजरात सरकार के दूरदर्शी मार्गदर्शन और सहयोग से निर्मित यह एकेडमी राज्य के युवाओं में नेतृत्व, अनुशासन और राष्ट्र सेवा का भाव जागृत करने का केंद्र बनेगी, जो युवा सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

यह एकेडमी राज्य में एनसीसी प्रशिक्षण को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी और युवाओं में नेतृत्व, देशभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों को प्रबल बनाएगी।

उल्लेखनीय है कि कि अभी गुजरात में अहमदाबाद और राजपीपला में एक-एक एकेडमी संचालित हैं। अब, तीसरी एनसीसी लीडरशिप एकेडमी का निर्माण किया गया है, जिसका संचालन वल्लभ विद्यानगर ग्रुप हेडक्वार्टर द्वारा किया जाएगा। इस एकेडमी में 28 जुलाई से ‘युवा आपदा प्रशिक्षण कैंप’ और ‘कम्बाइंड एन्युअल ट्रेनिंग कैंप’ (सीएटीसी) शुरू होगा। इसके बाद एकेडमी में समय-समय पर एनसीसी कैंप्स का आयोजन किया जाएगा।

इस एकेडमी के पहले चरण में 200 कैडेट्स के लिए आधुनिक आवास, प्रशिक्षण और प्रशासनिक बुनियादी ढांचा के साथ ही एकेडमी परिसर में ऑब्सटेकल कोर्स यानी बाधा मार्ग, फायरिंग रेंज, ड्रिल ग्राउंड, डिजिटल क्लासरूम और पूर्ण रूप से सुसज्जित आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। दूसरे चरण का कार्य प्रगति पर है, जिसके पूरा होने के बाद नावली मध्य गुजरात में 600 कैडेट्स की क्षमता वाला एक अग्रणी प्रशिक्षण केंद्र बन जाएगा।

एकेडमी के लोकार्पण अवसर पर विधानसभा में उप मुख्य सचेतक श्री रमणभाई सोलंकी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री हसमुखभाई पटेल, विधायक सर्वश्री योगेशभाई पटेल, कमलेशभाई पटेल और विपुलभाई पटेल, जिला अग्रणी श्री संजयभाई पटेल, जिला कलेक्टर श्री प्रवीण चौधरी, मनपा आयुक्त श्री मिलिंद बापना, जिला विकास अधिकारी सुश्री देवाहुति, जिला पुलिस अधीक्षक श्री गौरव जसाणी, गुजरात एनसीसी के एडीजी आर.एस. गोडारा, वल्लभ विद्यानगर ग्रुप कमांडर परमिंदर अरोरा, 4-बटालियन एनसीसी के सीईओ कर्नल मनीष भोला सहित एनसीसी के अधिकारी और कैडेट्स बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

“हर रास्ता सुगम बने: राज्य भर में चल रही सड़क और पुल मरम्मत की मुहिम” || “मुख्यमंत्री के निर्देश पर कार्रवाई: क्षतिग्रस्त सड़कों की त्वरित मरम्मत शुरू”

*सड़कों और पुलों की मरम्मत के लिए राज्य सरकार का सक्रिय दृष्टिकोण*
*राज्य के विभिन्न जिलों में चल रहे मरम्मत कार्यों के लिए जिला प्रशासन प्रमुख द्वारा महत्वपूर्ण स्थलों का दौरा*
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राज्य सरकार ने राज्य में चल रहे मानसून के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों को यातायात योग्य बनाने के लिए सक्रिय दृष्टिकोण अपनाया है। मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल ने सड़क एवं भवन निर्माण विभाग को इन सभी क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए विशेष निर्देश देते हुए कार्यों को शीघ्र पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं। तदनुसार, ये कार्य वर्तमान में पूरे राज्य में युद्धस्तर पर चल रहे हैं। आज, राज्य भर के विभिन्न जिलों में जिला प्रशासन के उच्च पदस्थ अधिकारियों ने इन स्थलों का दौरा कर निरीक्षण किया और संबंधितों को कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।

*सौराष्ट्र – मध्य गुजरात – दक्षिण गुजरात – उत्तर गुजरात के जिलों में सड़क मरम्मत अभियान का कलेक्टरों द्वारा निरीक्षण*

मध्य गुजरात के विभिन्न जिलों में चल रहे सड़क मरम्मत अभियान का संबंधित जिलों के कलेक्टरों द्वारा निरीक्षण किया गया और गड्ढों की मरम्मत के कार्य को तत्काल रोकने के निर्देश दिए गए।

वडोदरा कलेक्टर डॉ. अनिल धमेलिया और डीडीओ श्रीमती ममता हिरपारा ने दभोई तालुका में चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया और पुल की सुरक्षा की जाँच की।

छोटाउदपुर जिले में भारी बारिश के कारण ओरसंग, मेरिया, भारज नदियों पर बने पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जिला कलेक्टर गार्गी जैन ने भारज नदी पर बने सुखी बांध पुल, मेरिया नदी पर बने जाबुगाम-चाचक पुल और ओरसंग नदी पर बने बोडेली-मोदासर पुल का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया।

जिला कलेक्टर श्री अजय दहिया ने जीएसआरडीसी के संबंधित अधिकारियों के साथ हालोल, गोधरा, शामलाजी राजमार्ग पर गोधरा बाईपास गडुकपुर चौकड़ी के पास क्षतिग्रस्त सड़क का दौरा किया और मरम्मत कार्य का निरीक्षण किया।

मानसून के मौसम में भारी बारिश के कारण कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। आणंद जिला कलेक्टर श्री और आणंद नगर निगम प्रशासक श्री प्रवीण चौधरी और आणंद नगर निगम आयुक्त श्री मिलिंद बापना ने आज आणंद भलेज रोड इस्माइलनगर स्थित ओवरब्रिज और गणेश चौकड़ी राजोदपुरा स्थित ओवरब्रिज का दौरा किया और विस्तृत निरीक्षण किया। नाडियाड में, नगर आयुक्त श्री ने शहर में चल रहे कार्यों का भी निरीक्षण किया।

जिला कलेक्टर डॉ. सौरभ पारधी ने कामरेज तालुका में खोलवाड़ और अंबोली को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर तापी नदी पर बने पुल का दौरा किया और पुल के विस्तार जोड़ के मरम्मत कार्य का निरीक्षण किया। पुल की मरम्मत के कारण पुल को बंद कर दिया गया है, जबकि इस मार्ग पर यातायात को वडोदरा-मुंबई राजमार्ग के किम चार रास्ता से ऐना की ओर मोड़ दिया गया है। इस संबंध में, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ चर्चा कर यातायात को सुचारू बनाने और वाहन चालकों को किसी भी परेशानी से बचाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए।

नगर आयुक्त शालिनी अग्रवाल ने सूरत के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के पिपलोद स्थित चांदनी चौक में सड़क मरम्मत कार्य का स्थलीय दौरा किया और निरीक्षण किया। उन्होंने सड़क मरम्मत कार्य की गुणवत्ता, समय पर पूरा करने और जनहित को ध्यान में रखते हुए कार्य पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने उन क्षेत्रों में कार्य को तुरंत पूरा करने का आग्रह किया जहाँ विशेष रूप से बारिश के कारण जलभराव की समस्या है।

भरूच जिला कलेक्टर श्री गौरांग मकवाना ने आमोद-जंबूसर मार्ग पर ढाढर नदी पर बने पुल का दौरा किया। कलेक्टर ने पुल की वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

नवसारी नगर आयुक्त श्री देव चौधरी ने आज नवसारी नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में क्षतिग्रस्त सड़क का दौरा किया और कार्य का विस्तृत निरीक्षण किया। नवसारी नगर निगम द्वारा क्षतिग्रस्त सड़क की जानकारी 87992 23046 पर प्राप्त की जा रही है। नगर निगम सड़क विभाग द्वारा तत्काल मरम्मत कार्य किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत शहर के रुस्तम वाड़ी, रिंग रोड और लुंसीकुई क्षेत्र, गणदेवी इटालवा रोड पर क्षतिग्रस्त सड़क के पैचवर्क और मरम्मत कार्य का आयुक्त श्री देव चौधरी ने स्थल का दौरा किया और कार्य की गुणवत्ता में सुधार के लिए उपस्थित इंजीनियरों और कर्मचारियों को आवश्यक सुझाव दिए।

जिला कलेक्टर श्री एस.के. सड़क एवं भवन विभाग के अधिशासी अभियंता श्री मोदी ने राजपीपला-मोवी रोड पर करजण नदी पुल के निर्माण स्थल का दौरा किया और करजण पुल के नीचे, पुल पर और किनारे पर उतरकर विस्तृत निरीक्षण किया। कलेक्टर ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी को दूरभाष पर आवश्यक निर्देश दिए और अधिशासी अभियंता को आवश्यक निर्देश देकर उचित कार्रवाई करने को कहा।

राजकोट जिला कलेक्टर डॉ. ओम प्रकाश के मार्गदर्शन में, सतर्कता के तहत राजकोट जिले के सभी पुलों का निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के बाद, राष्ट्रीय राजमार्ग पर धोराजी-जामकंडोराना रोड पर भादर ब्रिज, मार्ग और माकन स्वामित्व के तहत जामकंडोरना-खारचिया रोड पर माइनर ब्रिज, उपलेटा-कोलकी-पनेली रोड पर मेजर ब्रिज और सुपेड़ी-जामटिंबडी ब्रिज को भारी और ओवरलोड वाहनों के लिए प्रतिबंधित घोषित किया गया है।

राजकोट नगर आयुक्त तुषार सुमेरा विभिन्न स्थानों पर मौजूद रहे और कार्यों का निरीक्षण किया। राजकोट के वार्ड क्रमांक 11 के मोटा मावा क्षेत्र में अमरनाथ पार्क, ओमनगर, सत्यम पार्क, तुलसी हाइट्स, सरिता विहार सोसाइटी में सड़कों से मिट्टी और बजरी हटाकर मेटलिंग कार्य का स्थल निरीक्षण किया गया। वहीं दूसरी रिंग रोडवीर वीरू झील के पास और वर्धमान नगर से जुड़े इलाकों में सड़क समतलीकरण का काम चल रहा है। वहीं, परसाना चौक से इंजीनियरिंग कॉलेज होते हुए कानकोट की ओर जाने वाली 24 मीटर सड़क को वाहन चालकों के लिए सुगम बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।

जामनगर नगर निगम आयुक्त श्री डी. एन. मोदी ने टीम के साथ शहर के सभी पुलों का सर्वेक्षण कार्य अपने हाथ में ले लिया है। आयुक्त श्री मोदी ने परियोजना एवं योजना, सिविल शाखा, भूमिगत सीवर शाखा, जलकार्य शाखा को निर्देश दिए थे। आयुक्त ने जामनगर शहर को जोड़ने वाले हर प्रवेश द्वार के पुलों का सर्वेक्षण करवाया था। जिसमें गुलाबनगर, सुभाष ब्रिज, नवनाला ब्रिज, रेलवे ओवर ब्रिज और धुनवाव से खिजड़िया बाईपास मार्ग पर स्थित नदी पुल का निरीक्षण किया गया और आवश्यकतानुसार छोटी-मोटी मरम्मत के निर्देश दिए गए। उन्होंने शहर की मुख्य और आंतरिक सड़कों का स्वयं निरीक्षण किया और संबंधित विभागों को अभियान के रूप में मरम्मत, पैचवर्क, वेट मिक्स, हॉट मिक्स प्लांट और कोल्ड मिक्स से डामर पैचवर्क, जेट पैचिंग और इम्पैक्शन विधियों से काम करने के निर्देश दिए।

आज गांधीधाम नगर निगम के प्रभारी आयुक्त मेहुल देसाई ने गांधीधाम क्षेत्र में चल रहे विभिन्न सड़क निर्माण कार्यों का दौरा कर निरीक्षण किया। आयुक्त ने सड़कों और पेवर ब्लॉक आदि की मरम्मत की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया। नगर आयुक्त ने गांधीधाम नगर निगम के पूर्वी क्षेत्र में चल रहे सड़क निर्माण कार्यों और मरम्मत कार्यों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

सुरेन्द्रनगर जिला कलेक्टर ने जिले के प्रमुख पुलों का गहन निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में किसी भी दुर्घटना या दुर्घटना से बचने के लिए, गांधीनगर सड़क एवं भवन विभाग की डिज़ाइन टीम ने एक सघन अभियान चलाया और विभिन्न पुलों और संरचनाओं के प्रदर्शन की गहन समीक्षा की। टीम ने सुरेन्द्रनगर-दुधरेज-वाना-मालवण-पाटडी-दसदा-बेचाराजी मार्ग (एसएच 19) पर बजाना मेजर ब्रिज, पाटडी ब्रिज, वाना मेजर ब्रिज, फुलखी-पाटडी-खराघोडा-ओडू रोड, लखतर-शियानी-लिंबड़ी रोड पर तलवाणी ब्रिज का दौरा किया और पुल की मजबूती, संरचनात्मक मजबूती और पुल की स्थिरता, सहायक संरचना, खंभों, दरारों की जाँच, मृदा अपरदन और जल निकासी स्थान (निकासी) के आधार पर सुरक्षा मानकों का भौतिक निरीक्षण किया।

मोरबी कलेक्टर श्री किरण जावेरी ने विधायक श्री कांति अमृतिया और उप नगर आयुक्त श्री सोनी के साथ 9 जुलाई 2025 को मोरबी के नटराज फाटक, विशपारा, रोहिदासपारा, अंबेडकर नगर, पंचासर रोड, नानी कैनाल रोड, अलाप पार्क आदि स्थानों का दौरा किया और सड़क और पानी की समस्याओं के बारे में जानकारी ली और उनके तत्काल समाधान के लिए सुझाव दिए। मोरबी नगर आयुक्त श्री स्वप्निल खरे ने 7 तारीख को मोरबी के ज़ोन चार का दौरा किया और सड़क मरम्मत, सीवर सफाई, घर-घर कचरा संग्रहण आदि कार्यों का निरीक्षण किया। ज़ोन चार में विद्युत नगर, रचना सोसाइटी, गोपाल सोसाइटी, अरुणोदय नगर, नित्यानंद रोड, शिवम पार्क आदि शामिल हैं और आवश्यक सुझाव दिए।

देवभूमि द्वारका के जिला कलेक्टर श्री राजेश तन्ना ने आज जिले के विभिन्न पुलों का दौरा किया, जिनमें (1) जामनगर-लालपुर-पोरबंदर रोड पर छोटा पुल (2) कल्याणपुर-चुर-भदथर रोड पर छोटा पुल (3) बेह-वडत्रा रोड पर छोटा पुल शामिल हैं।

जूनागढ़ जिले के ग्रामीण और नगरपालिका क्षेत्रों में भारी बारिश से प्रभावित सड़कों की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू हो गया है। जूनागढ़ जिले के माणावदर तालुका में सड़क निर्माण विभाग द्वारा सड़क मरम्मत का काम किया गया। साथ ही, जूनागढ़ नगर निगम के आयुक्त श्री तेजस परमार और तकनीकी कर्मचारी आज रात से वार्ड क्रमांक 7 और 10 में जर्जर मकानों और भवनाथ क्षेत्र की प्रभावित सड़कों का निरीक्षण शुरू करेंगे।

आज आयुक्त श्री एच.जे. प्रजापति ने तकनीकी कर्मचारियों और संसाधनों के साथ राजीवनगर में पोरबंदर महानगर क्षेत्र के सड़क और सीवरेज कार्यों का निरीक्षण किया। पंचायत सड़क निर्माण विभाग द्वारा प्रभावित सोलह सड़कों में से 10 सड़कों का काम पूरा हो चुका है। आज राणावाव क्षेत्र में काम जोरों पर रहा।

वर्तमान मानसून के मौसम में भारी बारिश के कारण कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के निर्देशानुसार, भावनगर नगर आयुक्त श्री डॉ. एन.के. मीणा ने आज भावनगर नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में कुंभारवाड़ा अंडर ब्रिज, घोघा सर्कल और रुवा रावेच धाम-मंत्रेश सर्कल का दौरा किया और पुलों और सड़कों की मरम्मत का निरीक्षण किया।

आज बोटाद जिला कलेक्टर श्री डॉ. जिंसी रॉय ने संबंधित विभाग की तकनीकी टीम के साथ बोटाद तालुका के पुलों का दौरा किया और आवश्यकता पड़ने पर पुलों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण हेतु कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने पलियाड में गोमा नदी पर बने पुल, रानपुर सुभादर नदी पर बने पुल और केरिया ढाल के निकट बने पुल का दौरा किया।

अमरेली केरियाचाड मार्ग पर विट्ठलपुर खंभालिया गाँव के पास शत्रुंजी नदी पर बने 140 मीटर लंबे और 8 मीटर चौड़े केरियाचाड प्रमुख पुल का अमरेली जिला सड़क एवं भवन निर्माण पंचायत के अधिशासी अभियंता श्री स्मित चौधरी ने निरीक्षण किया। कलेक्टर श्री विकल भारद्वाज के मार्गदर्शन एवं निर्देशानुसार प्रशासन द्वारा जिले में प्रभावित सड़कों एवं पुलों की मरम्मत का कार्य जोरों पर किया जा रहा है।

जिला कलेक्टर श्री एन.वी. उपाध्याय ने हाल ही में गिर सोमनाथ जिले के विभिन्न पुलों का दौरा कर पुलों का निरीक्षण किया।सड़कों की संरचनात्मक स्थिरता की जाँच हेतु सड़क एवं भवन विभाग के अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन एवं निर्देश दिए गए। जिसके अंतर्गत आज डिज़ाइन सर्कल के अधिकारियों की उपस्थिति में सड़क एवं भवन विभाग (पंचायत) के अंतर्गत कोडिनार तालुका के 11 पुलों का निरीक्षण किया गया। साथ ही, सड़क एवं भवन विभाग (पंचायत) द्वारा क्षतिग्रस्त सावनी पहुँच मार्ग पर पैचवर्क एवं वन कटाई का कार्य किया गया।

उत्तर गुजरात के विभिन्न जिलों में, बारिश के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों एवं पुलों के स्थानीय कलेक्टरों एवं नगर आयुक्तों ने अपने क्षेत्रों का दौरा किया, सड़क एवं पुल मरम्मत कार्यों का निरीक्षण किया और आवश्यक सुझाव भी दिए।

जिसके अंतर्गत अहमदाबाद जिला कलेक्टर श्री सुजीत कुमार ने दस्करोई तालुका के कुहा-कठलाल बाईपास रोड पर खारी नदी पर बने 65 वर्ष पुराने पुल का स्वयं निरीक्षण किया। अहमदाबाद नगर आयुक्त श्री बंछानिधि पाणि ने भी अपने दैनिक वार्ड दौरे के तहत सड़क मरम्मत कार्यों की समीक्षा की।

गांधीनगर कलेक्टर श्री ने देहगाम-नरोदा राजमार्ग पुल के निर्माण स्थल का दौरा किया और आवश्यक व्यवस्थाएँ कीं। इसके अलावा, जिले के सभी पुलों के निरीक्षण के लिए पाँच टीमों का गठन किया गया है और तुरंत विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर, नगर निगम के उपायुक्त श्री ने आज गांधीनगर शहरी क्षेत्र में चल रहे सड़क मरम्मत कार्यों का व्यक्तिगत रूप से दौरा किया और विवरण प्राप्त किया तथा आवश्यक निर्देश दिए।

इसी प्रकार, बनासकांठा जिला कलेक्टर श्री मिहिर पटेल ने सड़क एवं भवन विभाग की तकनीकी टीम के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 58 रतनपुर-मेरवाड़ा पर स्थित पुल का स्थल निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिए। बनासकांठा में, सड़क एवं भवन विभाग ने कुल 149 पुलों के निरीक्षण के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया है, जिनमें राज्य के लगभग 47, पंचायत विभाग के 28 और रेलवे के 24 पुल शामिल हैं।

पाटन जिला कलेक्टर तुषार भट्ट ने जिले में अलग-अलग टीमों का गठन कर विभिन्न पुलों का सुरक्षा ऑडिट कराया है। इसके तहत, जिला कलेक्टर ने तकनीकी टीम के साथ संतालपुर तालुका में अबियाना-पेदाशपुरा पुल, राधनपुर तालुका में खारी नदी पर बने शब्दलपुरा पुल और राधनपुर-सामी तालुका को जोड़ने वाले बनास नदी पर बने पुल का निरीक्षण किया।

दूसरी ओर, मेहसाणा नगर निगम क्षेत्र में, नगर आयुक्त रवींद्र खटाले ने तलेटी में चल रहे सड़क मरम्मत कार्य स्थल का दौरा किया, कार्य का निरीक्षण किया और सड़क को यातायात योग्य बनाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। इसके अनुसार, नगर निगम की टीम ने तलेटी गाँव में विटमेक्स बिछाकर सड़क को यातायात योग्य बना दिया है।

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सड़कों को लेकर सरकार का प्रो-एक्टिव दृष्टिकोण || ‘गुजमार्ग’ एप्लीकेशन के जरिए पिछले 6 महीने में प्राप्त 3632 शिकायतों में से 3620 यानी 99.66 फीसदी का तत्काल समाधान

सड़कों पर गड्ढे और क्षतिग्रस्त पुल जैसी समस्याओं की सूचना ‘गुजमार्ग’ एप्लीकेशन पर देने का अनुरोध
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‘गुजमार्ग’ ऐप बना बुनियादी ढांचा सुविधाओं से संबंधित शिकायतों को सीधे सड़क एवं भवन विभाग तक पहुंचाने का एक आसान मंच
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इस ऐप पर अब तक कुल 10 हजार से अधिक नागरिकों का रजिस्ट्रेशन
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गांधीनगर, 13 जुलाई : राज्य में वर्तमान मानसून सीजन के चलते क्षतिग्रस्त हुई सड़कों को पुनः मोटरेबल करने के लिए राज्य सरकार ने प्रो-एक्टिव दृष्टिकोण अपनाया है। मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने इन सभी क्षतिग्रस्त सड़कों को शीघ्र ही पूर्ववत करने के लिए सड़क एवं भवन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश देकर सभी कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके अंतर्गत वर्तमान में यह कार्य पूरे राज्य में युद्धस्तर पर चल रहे हैं।

सड़क एवं भवन विभाग के अंतर्गत कार्यरत ‘गुजमार्ग’ एप्लीकेशन पर अब तक पूरे राज्य से कुल 10 हजार से अधिक नागरिकों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। इस एप्लीकेशन के जरिए नागरिकों द्वारा कुल 3632 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, जिनमें से 99.66 फीसदी के साथ 3620 शिकायतों का सकारात्मक समाधान किया जा चुका है, जबकि शेष 7 शिकायतों पर कार्य प्रगति पर है।

सड़क एवं भवन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राज्य में सड़कों पर बने गड्ढों, क्षतिग्रस्त पुलों और अन्य बुनियादी ढांचा सुविधाओं से संबंधित समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए विभाग की ओर से ‘गुजमार्ग’ एप्लीकेशन कार्यरत किया गया है, जिस पर नागरिकों से उनके क्षेत्र की समस्याओं की सूचना देने का अनुरोध किया गया है।

‘गुजमार्ग’ एप्लीकेशन मुख्य रूप से गुजरात राज्य सड़क एवं भवन विभाग की ओर से सड़कों की स्थिति, पुल और अन्य बुनियादी ढांचों से संबंधित शिकायतें दर्ज कराने के लिए विकसित किया गया एक एप्लीकेशन है। नागरिक इस एप्लीकेशन के जरिए सड़कों पर बने गड्ढों और क्षतिग्रस्त पुलों जैसी समस्याओं की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे सकते हैं, ताकि इन समस्याओं का तत्काल समाधान किया जा सके।

‘गुजमार्ग’ एप्लीकेशन (Guj Marg Application) का मुख्य उद्देश्य गुजरात के नागरिकों को सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित शिकायतों को सीधे सड़क एवं भवन विभाग तक पहुंचाने के लिए एक आसान प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है। जिसमें नागरिक अपने क्षेत्र में सड़कों की खराब स्थिति, गड्ढों, पुलों को नुकसान या अन्य ढांचागत समस्याओं के बारे में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इस एप्लीकेशन में शिकायत के साथ फोटोग्राफ्स भी अपलोड करने की सुविधा उपलब्ध है। जिसके आधार पर संबंधित अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा, नागरिक इस ऐप के माध्यम से दर्ज करवाई गई शिकायत की स्थिति (स्टेटस) जान सकते हैं। सड़क एवं भवन विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार यह एप्लीकेशन गूगल प्ले स्टोर और ऐप स्टोर प्लेटफॉर्म से डाउनलोड किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी की घोषणा की

गुजरात को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का पावर हाउस बनाने की राज्य सरकार की मंशा
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मल्टीलेयर तथा एचडीआई प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, लिथियम आयन सेल, डिसप्ले एंड कैमरा मॉड्यूल्स, एसएमडी पैसिव कम्पोनेंट्स, इलेक्ट्रो मैकेनिकल पार्ट्स तथा उसके उत्पादन के लिए आवश्यक विशेष मशीनरी आदि के उद्योगों को राज्य में आकर्षित करने के लिए पॉलिसी में अनेक प्रोत्साहन
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पॉलिसी का लाभ लेने के लिए आवेदन 31 जुलाई 2025 तक किए जा सकेंगे
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* केन्द्र सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) अंतर्गत मंजूर हुए प्रोजेक्ट्स को गुजरात में प्रोजेक्ट स्थापना के लिए केन्द्रीय सहायता की 100 प्रतिशत सहायता प्राप्त होगी
* केन्द्रीय मंत्रालय मान्यता प्राप्त प्रोजेक्ट्स को एक ही मान्यता से केन्द्र-राज्य का दोहरा सहायता प्रोत्साहन लाभ मिलेगा
* एमईआईटीवाई की मंजूरी से वितरण तक गुजरात सरकार की ईसीएमएस का लाभ भी समानांतर मिलेगा, 30 दिन में प्रोत्साहन सहायता का भुगतान कर दिया जाएगा
* ईसीएमएस अंतर्गत टर्नओवर से जुड़े प्रोत्साहन 6 वर्ष के लिए प्रदान किए जाएंगे
* राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 35 हजार रुपए से अधिक के नए निवेश तथा अधिकाधिक हाईस्किल्ड एम्प्लॉयमेंट का लक्ष्य
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मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात की पॉलिसी ड्रिवन स्टेट के रूप में स्थापित हुई इमेज को व्यापक बनाने के लिए एक और पॉलिसी ‘गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2025 (जीईसीएमएस)’ की घोषणा की है।

गुजरात को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का पावर हाउस बनाने की मंशा के साथ मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल द्वारा घोषित की गई इस पॉलिसी की विशेषता यह है कि केन्द्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स तथा इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा मंजूरी तथा सहायता प्राप्त इकाइयों को गुजरात में भी केन्द्रीय मानदंड के अनुसार 100 प्रतिशत सहायता प्रोत्साहन मिलेगा।

यानी कि, गुजरात में स्थापित होने वाले एमईआईटीवाई स्वीकृत प्रोजेक्ट्स को केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार के दोहरे प्रोत्साहन लाभ प्राप्त हो सकेंगे।

यह पॉलिसी केन्द्र सरकार की ईसीएमएस पॉलिसी से सुसंगत है और इसके तहत 100 प्रतिशत टॉपअप का अनुकरण कर आसानी से कम से कम समय में सहायता प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जाएंगे।

इतन ही नहीं, एमईआईटीवाई द्वारा एक बार ईसीएमएस अंतर्गत प्रोजेक्ट मंजूर होने के बाद राज्य में स्थापित होने वाले प्रोजेक्ट्स स्वतः समान अनुदान – सहायता के पात्र बनेंगे और केन्द्र सरकार द्वारा सहायता का भुगतान किए जाने के बाद 30 दिन में राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन सहायता का भुगतान कर दिया जाएगा।

गुजरात देश के इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट लैंडस्केप में मैन्युफैक्चरिंग हब, ऑटो हब की प्रतिष्ठा वाला राज्य बना है। राज्य में चार सेमीकंडक्टर प्लांट्स भी कार्यरत हैं। ऐसे में, अब इस पॉलिसी के परिणामस्वरूप अपस्ट्रीम इंडस्ट्री को भी वेग मिलेगा और इसके चलते आयात पर निर्भरता घटेगी एवं टेक्नोलॉजिकल रेजिलिएंस में वृद्धि हो सकेगी।

इस पॉलिसी द्वारा राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 35 हजार करोड़ रुपए से अधिक के नए निवेश तथा अधिकाधिक हाईस्किल्ड एम्प्लॉयमेंट का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल द्वारा घोषित की गई इस जीईसीएमएस पॉलिसी के फलस्वरूप राज्य में मल्टीलेयर तथा एचआईडी प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, लिथियम आयन सेल, एसएमडी पैसिव कम्पोनेंट्स, डिसप्ले एवं कैमरा मॉड्यूल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स तथा उसके उत्पादन के लिए आवश्यक मशीनरी आदि जरूरी उद्योगों व इकाइयों को राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलने लगेगा।

इस पॉलिसी में इनोवेशन को प्रोत्साहन देकर टैलेंट गैप समाप्त करने के उद्देश्य से राज्य में रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए उदारतम सहयोग देने का प्रावधान रखा गया है। तद्अनुसार, गुजरात में स्थित एवं मान्यता प्राप्त संस्थाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, फिनिशिंग स्कूल्स या एप्लाइड रिसर्च लैब की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा अधिक से अधिक 12.5 करोड़ रुपए तक की मैचिंग सहायता देय होगी।

जीईसीएमएस अंतर्गत टर्नओवर लिंक्ड इंसेंटिव छह वर्ष की समयावधि तक प्रदान किया जाएगा

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल द्वारा घोषित की गई इस जीईसीएमएस पॉलिसी की मुख्य विशेषताएँ, उद्देश्य और प्रोत्साहन निम्नानुसार हैं :-

उद्देश्य
* इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट्स उत्पादन से वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन्स में गुजरात का मजबूत स्थान स्थापित करना।
* लोकल कम्पोनेंट तथा सब-असेम्बली उत्पादन को प्रोत्साहन देकर इलेक्ट्रॉनिक्स ग्लोबल वैल्यू चेन्स (जीवीसी) में उत्पादन मूल्य वृद्धि से अग्रसर रहकर आयात पर निर्भरता कम करना और निर्यात में वृद्धि करना।
योग्यता
* भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार इस पॉलिसी का लाभ लेने के लिए आवेदन 31 जुलाई 2025 तक करने होंगे।
* केन्द्र सरकार के एमईआईटीवाई द्वारा सहायता मंजूर हुई हो और गुजरात में कार्यरत हों; ऐसे सभी प्रोजेक्ट्स को स्वतः इस पॉलिसी का लाभ मिलेगा।
* गुजरात में उत्पादन यूनिट स्थापित करने के इच्छुक हों अथवा प्रगति पर हों; ऐसे प्रोजेक्ट्स को भी इसका लाभ मिलेगा।
प्रोत्साहन (इंसेंटिव्स)
* गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2022-28 अंतर्गत सहायता प्राप्त कर रही इकाइयों को छोड़कर अन्य इकाइयाँ ही इस नीति अंतर्गत देय लाभ प्राप्त करने के लिए मान्य होंगी।
* इस नीति अंतर्गत लाभ प्राप्त करने वाली इकाइयों को गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2022-28 का लाभ नहीं मिलेगा।
* प्रोत्साहन भारत सरकार की योजना की शर्तों तथा थ्रेशोल्ड के अनुसार रहेंगे।
अतिरिक्त प्रोत्साहन (इंसेंटिव्स)
* कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा लॉजिस्टिक्स : इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टरों में कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण तथा विकास के लिए आवश्यकता आधारित सहायता दी जाएगी।
इंसेंटिव वितरण
* भारत सरकार द्वारा मंजूर योजनाओं के लिए सहायता का भुगतान किए जाने के बाद राज्य सरकार 30 कार्य दिवस में सहायता का भुगतान करेगी।
पॉलिसी की समयावधि
* राज्य की इस नई नीति की समयावधि भारत सरकार की योजना के समान ही रहेगी।
पॉलिसी का क्रियान्वयन
* गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2025 का क्रियान्वयन गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन (जीएसईएम) द्वारा किया जाएगा।
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2030 तक एड्स उन्मूलन के लिए, सभी लोगों तक एचआईवी सेवाओं का पहुंचना है ज़रूरी

ASICON 2025 का उद्घाटन माननीय गुजरात के मुख्य मंत्री करेंगे

गुजरात में पहली बार हो रहा है एचआईवी चिकित्सकीय विशेषज्ञों का राष्ट्रीय अधिवेशन (ASICON 2025)

देश के एचआईवी चिकित्सकीय विशेषज्ञों का 16वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन इस साल अहमदाबाद, गुजरात, में 21-23 फ़रवरी के दौरान आयोजित होगा (ASICON 2025)। यह पहली बार है कि यह प्रतिष्ठित अधिवेशन गुजरात में आयोजित हो रहा है। एचआईवी चिकित्सकीय और आयुर्विज्ञान से जुड़े भारतीय विशेषज्ञों का सबसे प्रमुख चिकित्सकीय संगठन, एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (एएसआई) इस अधिवेशन को आयोजित कर रहा है।

ASICON 2025 अधिवेशन का उद्घाटन, गुजरात के माननीय मुख्य मंत्री श्री भूपेंद्र पटेल 21 फ़रवरी 2025 को करेंगे।

इस ASICON 2025 अधिवेशन के आयोजन में, चिकित्सकीय और आयुर्विज्ञान सहयोगियों में शामिल हैं: भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, गुजरात मेडिकल कौंसिल, इन्फेक्शियस डिजीस सोसाइटी ऑफ़ गुजरात, संयुक्त राष्ट्र का संयुक्त एड्स कार्यक्रम (UNAIDS), दक्षिण अफ्रीका का एड्स शोध संस्थान, आदि। गुजरात पर्यटन और केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय का भारतीय सम्मेलन संवर्धन ब्यूरो भी इस अधिवेशन को समर्थन दे रहा है।

ASICON 2025 अधिवेशन में देश भर से अनेक एचआईवी चिकित्सकीय देखरेख कर रहे विशेषज्ञ और शोधकर्ता भाग लेंगे। अनेक देशों के एचआईवी विशेषज्ञ भी इस अधिवेशन में शामिल हो रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं: दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, इटली, जर्मनी, केन्या, आदि।

तीन दिवसीय ASICON 2025 अधिवेशन में अनेक विषयों पर एचआईवी संबंधित चिकित्सकीय व्याख्यान और सत्र होंगे, इनमें प्रमुख विषय इस प्रकार हैं: एशिया पसिफ़िक क्षेत्र और भारत के एचआईवी संबंधित नवीनतम आंकड़े, एचआईवी परीक्षण (विशेषकर कि एचआईवी सेल्फ-टेस्ट या एचआईवी आत्म-परीक्षण), एंटीरेट्रोवायरल दवाओं संबंधित नवीनतम शोधपत्र, एचआईवी से बचाव के नवीनतम दवाएं जैसे कि “प्रेप” (जिसमें लेनकपवीर दवा शामिल है (हर 6 महीने में 1 इंजेक्शन), जिसके उपयोग से एचआईवी से संक्रमित होने से लगभग 100% बचा जा सकता है), “डॉक्सी प्रेप” दवा जो कुछ यौन संक्रमणों से बचाती है, एचआईवी और टीबी सह-संक्रमण और एचआईवी और हेपेटाइटिस सह-संक्रमण संबंधित नवीनतम अपडेट, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस संबंधित कैंसर, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, साइबर-सिक्योरिटी और स्वास्थ्य सेवा, जलवायु परिवर्तन, आदि।

भारत और एचआईवी
सरकारी राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार, भारत में एड्स नियंत्रण की ओर सराहनीय प्रगति हुई है। 2010 आंकड़ों की तुलना में, 2023 तक भारत में एड्स दर लगभग आधा हो गई थी (44.23% गिरावट) – जो एड्स दर में वैश्विक स्तर पर आई गिरावट (39%) से भी अधिक थी। इसी तरह, 2010 के आकड़ों की तुलना में, एड्स संबंधित मृत्यु दर में भी 2023 तक 79.26% गिरावट आई, जो 2010-2023 के दौरान वैश्विक एड्स मृत्यु दर में आई गिरावट (51%) से अधिक थी।

भारत में 25.44 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवित हैं। भारत की व्यस्क आबादी में एचआईवी दर 0.20% है जो वैश्विक दर से कम है (0.70%)। 2023 में भारत में 68,450 नए लोग एचआईवी पॉजिटिव चिह्नित हुए और 35,870 लोग एड्स-संबंधित कारणों से मृत हुए। 2023 में 19,961 गर्भवती महिलायें एचआईवी पॉजिटिव थीं और उन्हें विशेष चिकित्सकीय द्वाएँ और सहायता प्रदान की गई जिससे कि नवजात शिशु का गर्भावस्था, प्रसूति और स्तनपान के दौरान एचआईवी से संक्रमित होने का ख़तरा शून्य रहे।

गुजरात और एचआईवी
सरकारी राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार, गुजरात प्रदेश में व्यस्क आबादी में एचआईवी दर 0.19% थी। 2023 में गुजरात में 1,20,312 लोग एचआईवी के साथ जीवित थे और 800 लोग एड्स संबंधित कारणों से मृत हुए। 2023 में गुजरात में 2671 नए लोग एचआईवी पॉजिटिव चिह्नित हुए थे। 2010 की तुलना में, 2023 तक गुजरात में एचआईवी दर में 56.86% गिरावट आई थी (जो देश के 2010-2023 के दौरान एचआईवी दर गिरावट (44.23%) से अधिक थी)। ASICON 2025 के सह-अध्यक्ष डॉ हर्ष तोषनीवाल ने कहा कि ASICON 2025 अधिवेशन गुजरात में पहली बार आयोजित हो रहा है जिसका लाभ समस्त चिकित्सकीय समुदाय को मिलेगा, जो गुजरात को एड्स उन्मूलन की दिशा में प्रगति करने में सहायक होगा।

एड्स उन्मूलन के लिए सिर्फ 70 माह शेष
भारत समेत सभी सरकारों ने 2030 तक एड्स उन्मूलन का वादा किया है। इसके लिये यह ज़रूरी है कि हर एचआईवी के साथ जीवित व्यक्ति को यह पता हो कि उसे एचआईवी है, उसको जीवनरक्षक एंटीरिट्रोविरल द्वाओं के साथ-साथ सभी एचआईवी सेवाएँ मिल रही हों और उसका वायरल लोड नगण्य रहे। वायरल लोड नगण्य रहेगा तो किसी और को एचआईवी से संक्रमित होने का ख़तरा भी नहीं रहेगा, और एचआईवी के साथ जीवित व्यक्ति स्वस्थ और भरपूर जीवन जी सकेगा। हमें एड्स रोकधाम की ओर अधिक कार्यकुशलता, कार्यसाधकता और प्रभावशीलता के साथ कार्य करना होगा – यह कहना है डॉ ईश्वर गिलाडा का जो एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के एमेरिटस अध्यक्ष हैं, इंटरनेशनल एड्स सोसाइटी (आईएएस) की अध्यक्षीय मंडल के भी निर्वाचित सदस्य हैं, और आईएएस एशिया पसिफ़िक के अध्यक्ष हैं। 1986 में जब भारत में पहला व्यक्ति एचआईवी के साथ संक्रमित पाया गया था तब डॉ गिलाडा ने मुंबई के सरकारी जेजे अस्पताल में देश की पहली एचआईवी क्लिनिक की स्थापना की थी।

2025 तक पूरे करने हैं 95-95-95 लक्ष्य
डॉ ईश्वर गिलाडा ने कहा कि सभी सरकारों ने वादा किया है कि 2025 तक, 95% एचआईवी के साथ जीवित लोगों को परीक्षण से यह मालूम होना चाहिए कि वह एचआईवी संक्रमित हैं, इनमें से 95% लोगों को जीवनरक्षक एंटी-रेट्रो-वाइरल दवाएँ मिल रही हों, और जिन लोगों को यह दवाएँ मिल रही हों उनमें से 95% का वाइरल-लोड नगण्य रहे।

वर्तमान में भारत में 25.44 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवित हैं जिनमें से 81% को परीक्षण से यह मालूम है कि वह एचआईवी संक्रमित हैं, इनमें से 88% लोगों को जीवनरक्षक एंटी-रेट्रो-वाइरल दवाएँ मिल रही हैं, और जिन लोगों को दवाएँ मिल रही हैं उनमें से 97% लोगों के वाइरल-लोड नगण्य है।

विश्व में 86% को परीक्षण से यह मालूम है कि वह एचआईवी संक्रमित हैं, इनमें से 89% लोगों को जीवनरक्षक एंटी-रेट्रो-वाइरल दवाएँ मिल रही हैं, और जिन लोगों को दवाएँ मिल रही हैं उनमें से 93% लोगों के वाइरल-लोड नगण्य है।

एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिलीप मथाई ने कहा कि जिन लोगों को एचआईवी एंटीरेट्रोवायरल दवाएं मिल रही हैं, उन सभी के (100%) वायरल लोग नगण्य रहे – यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है।

2023 में भारत में जिन नए लोगों की एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई उनमें से 93% को जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवाएं मिल रही थीं। परंतु अनेक प्रदेशों में यह संख्या कम थी जैसे कि असम, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पुडुचेरी, और सिक्किम – उदाहरण के लिए, पुडुचेरी में 47% और असम में 76% लोगों को दवाएं मिल रही थीं।

2010-2023 के दौरान, भारत में तो एचआईवी दर में काफ़ी गिरावट आई परंतु कुछ प्रदेशों में दर में बढ़ोतरी हुई, जैसे कि त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में एचआईवी दर 400% बढ़ा और पंजाब और मेघालय में दुगना हुआ। राष्ट्रीय व्यस्क आबादी में एचआईवी दर (0.20%) रहा परंतु कुछ प्रदेशों में अधिक है जैसे कि मिज़ोरम (2.73%), नागालैंड (1.37%), और मणिपुर (0.87%)।

डॉ गिलाडा ने कहा कि शोध द्वारा यह प्रमाणित है कि एचआईवी के साथ जीवित व्यक्ति स्वस्थ और भरपूर जीवन जी सकता है, और सामान्य जीवन यापन कर सकता है। परंतु यह तब ही मुमकिन है जब हर एचआईवी पॉजिटिव इंसान को एचआईवी जाँच मिल सके। यदि किसी भी कारणवश एचआईवी जाँच उसको नहीं मिल पा रही है तो संभवत: एचआईवी सेल्फ-टेस्ट के उपयोग से वह परीक्षण करवाये और फिर एचआईवी की व्यापक स्वास्थ्य सेवा और परामर्श से जुड़े। ऐसे हर व्यक्ति को जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवाएँ मिलनी ज़रूरी हैं और उसका वायरल लोड नगण्य रहना ज़रूरी है जिससे कि वह स्वस्थ रहे, और उससे किसी को भी एचआईवी संक्रमण फैलने का ख़तरा भी न रहे। इसी तरह एचआईवी से बचाव के सभी साधन जानता को उपलब्ध होने चाहिए। “प्रेप” (PrEP) को सरकारी एचआईवी स्वास्थ्य सेवा में शामिल करना चाहिए।

“स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिए एक देश एक चुनाव” है जरूरी !

लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराये जाने के मसले पर लंबे समय से बहस चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस विचार का समर्थन कर इसे आगे बढ़ाया है। किसी भी स्वस्थ एवं निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आधारशिला होते हैं। भारत जैसे विशाल देश में निर्बाध रूप से निष्पक्ष चुनाव कराना हमेशा से एक चुनौती रहा है। अगर हम देश में होने चुनावों पर नजर डालें तो पाते हैं कि हर वर्ष किसी न किसी राज्य में चुनाव होते रहते हैं। चुनावों की इस निरंतरता के कारण देश हमेशा चुनावी मोड में रहता है। इससे न केवल प्रशासनिक और नीतिगत निर्णय प्रभावित होते हैं बल्कि देश के खजाने पर भारी बोझ भी पड़ता है। इस सबसे बचने के लिये नीति निर्माताओं ने लोकसभा तथा राज्यों की विधानसभाओं का चुनाव एक साथ कराने का विचार बनाया।ङ्ग इस मसले पर चुनाव आयोग, नीति आयोग, विधि आयोग और संविधान समीक्षा आयोग विचार कर चुके हैं। अभी हाल ही में विधि आयोग ने देश में एक साथ चुनाव कराये जाने के मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों, क्षेत्रीय पार्टियों और प्रशासनिक अधिकारियों की राय जानने के लिये तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था। इस कॉन्फ्रेंस में कुछ राजनीतिक दलों ने इस विचार से सहमति जताई, जबकि ज्यादातर राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया। ङ्गएक देश एक चुनाव कोई अनूठा प्रयोग नहीं है, क्योंकि १९५२, १९५७, १९६२, १९६७ में ऐसा हो चुका है, जब लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ करवाए गए थे। यह क्रम तब टूटा जब १९६८-६९ में कुछ राज्यों की विधानसभाएँ विभिन्न कारणों से समय से पहले भंग कर दी गई। आपको बता दें कि १९७१ में लोकसभा चुनाव भी समय से पहले हो गए थे। जाहिर है जब इस प्रकार चुनाव पहले भी करवाए जा चुके हैं तो अब करवाने में क्या समस्या है ? ङ्गएक देश एक चुनाव की अवधारणा में कोई बड़ी खामी नहीं है, किन्तु राजनीतिक पार्टियों द्वारा जिस तरह से इसका विरोध किया जा रहा है उससे लगता है कि इसे निकट भविष्य लागू कर पाना संभव नहीं है। इसमें कोई दो राय नहीं कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत हर समय चुनावी चक्रव्यूह में घिरा हुआ नजर आता है। चुनावों के इस चक्रव्यूह से देश को निकालने के लिये एक व्यापक चुनाव सुधार अभियान चलाने की आवश्यकता है। इसके तहत जनप्रतिनिधित्व कानून में सुधार, कालेधन पर रोक, राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण पर रोक, लोगों में राजनीतिक जागरूकता पैदा करना शामिल है जिससे समावेशी लोकतंत्र की स्थापना की जा सके।ङ्गयदि देश में ‘एक देश एक कर’ यानी डढ लागू हो सकता है तो एक देश एक चुनाव क्यों नहीं हो सकता? अब समय आ गया है कि सभी राजनीतिक दल खुले मन से इस मुद्दे पर बहस करें ताकि इसे अमलीजामा पहनाया जा सके।

“आप” के दिग्गजो ने इसबार चुनाव से क्यो बनाई दूरी ?

(चन्दन कुमार, नई दिल्ली)
जय पराजय ये तो चुनावी मैदान मे लगा रहता है, पर इसबार दिल्ली के चुनाव मे जिस प्रकार से आम आदमी पार्टी के कुछ बड़े चेहरे चुनाव से दूरी बनाए हुए है ! उससे यही प्रतीत होता है कि चुनाव से पहले ही आम आदमी पार्टी शस्त्र रखकर अपना समर्पण कर चुकी है ! ना तो इसबार किसी जनसभा के दौरान आम आदमी पार्टी से सांसद राघव चड्डा दिखाई दें रहे है ना ही उनके दो और सांसद सुशील गुप्ता और एन डी गुप्ता ! इसके आलावे आप के मंत्री गोपाल राय और सोमनाथ भारती भी दिल्ली चुनाव मे केवल और केवल अपने अपने विधानसभा मे लगे हुए है ! वही आम आदमी पार्टी की एकलौती महिला सांसद स्वाती मालिवाल अपने ही पार्टी के लिए बगावत पर उतर आई है ! वो केजरीवाल के लगभग सभी नीतियों पर सवाल खड़ी कर रही है और पार्टी के ऊपर कई प्रकार के आरोप लगा रही है ! ये वही सब लोग है जो अरविन्द केजरीवाल जी के काफी भरोसेमंद माने जाते है ! पिछले सभी चुनाव मे इन लोगों ने काफी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था ! पर इसबार ये सभी चेहरे कहीं दिखाई नहीं दे रहे है ! जबकि दूसरी तरफ कॉंग्रेस और भाजपा के प्रदेश नेतृत्व से लेकर केन्द्रीय नेतृत्व के सभी दिग्गज अपने-अपने हिसाब से मोर्चा संभाल रहे है ! शायद यही कारण है की जैसे-जैसे चुनाव के तारीक नजदीक आ रही है वैसे-वैसे आम आदमी पार्टी का जमीन से पकड़ कमजोर होती दिखाई दे रही है !

यदि हम आकलन करें तो आम आदमी पार्टी मे केवल पाँच चेहरे ही इसबार के चुनाव मे दिखाई पड़ रहे है ! आप प्रमुख अरविन्द केजरीवाल, मनीष सीसोदिया, मुख्यमंत्री आतीसी, सांसद संजय सिंह और सौरभ भारद्वाज ! मात्र यही वो चेहरे है जो इसबार के चुनावी समर मे आप के तरफ से दिखाई दे रहे है ! जबकि इससे पहले आम आदमी पार्टी मे चुनाव के समय नेताओ और कार्यकर्ताओ का तांता लगा रहता था ! जैसे जैसे पार्टी का कार्यकाल बढ़ता गया वैसे वैसे पार्टी के संस्थापक सदस्यों और जमीनी कार्यकर्ताओ का पलायन बढ़ता गया ! आज हालात ये बन गए है कि- आंदोलन की कोख से निकली आम आदमी पार्टी मुट्ठी भर नेताओ के बीच सिमट गई है !
आप सुप्रीमो अरविन्द केजरीवाल के वक्तव्य और प्रचार प्रसार मे भी पराजय का भय दिखाई पड़ रहा है, वो अब किसी से छिपा नहीं है ! ये वही अरविन्द केजरीवाल है जो पिछले सभी चुनावों मे अपने काम पर वोट मांगते थे, पर इस बार वो अपने लगभग सभी सभाओ में ये कहते दिखाई दे रहे है कि- यदि भाजपा सत्ता मे आयेगी तो दिल्ली वालों के ये सुविधाएं बंद कर देगी ! वो सुविधाएं बंद कर देगी ! इससे और स्पष्ट हो जाता है कि कहीं ना कहीं केजरीवाल को यह आभास हो चुका की आम आदमी पार्टी का इस बार सरकार मे आना मुश्किल है ! ये भी एक कारण हो सकता है जो आम आदमी पार्टी के बाकी दिग्गज प्रचारक अपने आप को चुनावी समर मे झोंकने से बच रहे है !