पीने के ऑनलाइन पानी से देश में कौन से लोग खोते हैं जान? आंकड़ा जानिये तो उड़ जाइये

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दूषित जल के दुष्प्रभाव : शुद्ध पानी के लिए हर घर में आरओ लगाया जाता है। शहर में भी साफ़ पानी की समस्याएँ पैदा हो रही हैं। असल में, इंसान के शरीर की आधी से ज्यादा गंदगी (दूषित पानी) की वजह से होती हैं। पित्ती पानी पीने से हैजा, पीलिया, पेचिश, गले की बीमारी, टाय्-पिरेमिक एसिडिटी जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं। भारत में हर दिन बड़ी संख्या में लोगों को पानी के भंडार मिलते हैं। वास्तव में कारण से कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं। आइए जानते हैं ये अक्षर कितना बड़ा है…

भारत में कितने लोग हैं प्यारे पानी

भारत में बड़ी संख्या में लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा है। जुलाई 2022 में ऑनलाइन पानी से जुड़े आंकड़े लैंसेट अध्ययन में बताया गया कि भारत में करीब 1.95 लाख साजोसामान में लोग पानी पी रहे हैं। इसी वजह से साल 2019 में 23 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।

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पानी से कितना घातक

कंपोजिट फ्लोटिंग स्ट्रेंथ इंजीनियर (सीडब्ल्यूएमआई) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कंपनी का पहला पानी पीने से हर साल दो लाख लोगों की मौत हो जाती है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2030 तक करीब 600 मिलियन लोगों को वॉटर स्ट्रेस से बचाया जा सकता है, जिस देश की कुल आबादी 40% है। पानी की समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित है दिल्ली और बिजनेसमैन। बास्ट से बचने के लिए हर किसी को साफ पानी पीने की कोशिश करनी चाहिए।

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मूंगफली पानी पीने के दुष्प्रभाव

1. सुपरमार्केट पानी में मौजूद बैक्टीरिया और पाचन तंत्र प्रभावित हो सकते हैं। इससे पेट दर्द और उल्टी की समस्या हो सकती है।

2. सुपरमार्केट पानी पीने से डायरिया और दस्त हो सकते हैं।

3. पानी में मौजूद टॉक्सिन्स, पेट में सूजन और ऐंठन पैदा कर सकते हैं।

4. सुपरमार्केट पानी में मौजूद साल्मोनेला और वायरस टाइ पार्टियाँ और बैक्टीरिया जैसे संक्रामक रोग पैदा हो सकते हैं।

5. कोलोराडो पानी में मौजूद विब्रियो कोलेरा और शिगेला बैक्टीरिया कोलेरा और डिसेंट्री जैसी संक्रामक बीमारी का कारण बन सकते हैं।

6. पानी में मौजूद हेवी मेटल्स और अन्य विषाक्त पदार्थ किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

7. सुपरमार्केट पानी में मौजूद कार्सिन पदार्थ कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

8. बाजार में मौजूद टॉक्सिन्स न्यूरोलॉजिकल मार्केट्स जैसे कि मेमोरियल लॉस, मूड्स और अन्य अवशेष पैदा हो सकते हैं।

अस्वीकरण: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया पर आधारित है। आप भी अमल में आने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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भूख लगने पर दिमाग क्यों नहीं, 99% लोग इसका जवाब नहीं जानते

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मस्तिष्क और पेट का कनेक्शन : जब भी हमें भूख लगती है तो हमारा दिमाग ही काम करना बंद कर देता है। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है. आख़िर दिमाग और भूख का कनेक्शन क्या है. अर्थशास्त्रियों के अनुसार, खाली पेट हमारे दिमाग की वायरिंग को बिगाड़ देता है, जिससे उसकी सोच-समझने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। ब्रेन की री-वायरिंग को न्यूरोस्टैटिसिटी भी कहा जाता है, जो डॉक्टर से फीचर करता है। यही कारण है कि जब बहुत अधिक भूख लगती है तो तनाव और अवसाद बढ़ जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं भूख और दिमाग के बीच का रिश्ता…

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खाली पेट रहना क्या होगा

जब हमें भूख लगती है, तब ब्लड में गट हार्मोन ग्रेलिन बढ़ता है, जिसका सीधा असर दिमाग पर होता है। ऐसे में कुछ भी खा लेना सामान्य बात है। खाली पेट रहने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे भूख और थकान बढ़ सकती है। खाली पेट स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल भी बढ़ता है, जिससे स्ट्रेस होने पर दिमाग काम करना बंद कर देता है।

भूख का दिमाग से क्या कनेक्शन है?

एक शोध में पाया गया है कि दिमाग का वो भाग जो जजमेंट है, वो गैट में मौजूद भूख हार्मोन पर निर्भर होता है। जब भूख हार्मोन ग्रेलिन ब्लड ब्रेन बैरियर से अधिक होती है, तो ब्रेकन की सक्रियता सीधे तौर पर प्रभावित होती है। शरीर में लगभग 50% डोपामिन और 95% सेरोटोनिन की मात्रा ही बनती है। डोपामिन एक तरह का न्यूरोट्रांसमीटर है, जो भोजन या नींद जैसी संतुष्टि पूरी तरह से खुशी का एहसास कराता है।

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भूख लगने पर दिमाग क्यों नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार, सेरोटोनिन मूड को खराब करता है, नींद और याददाश्त को प्रभावित करता है। जब हमारा पेट खाली हो जाता है, तब न सेरोटोनिन बनता है और न ही डोपामिन। इसके बजाय कोर्टिसोल बनना लगता है, जिससे शरीर में तनाव आ जाता है और मूड खराब हो जाता है। ब्रेन से सीधे पेट और कोलन तक जाने वाली वेगस नर्व गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल मेडिसिन के संकेत दिमाग तक ले जाते हैं।

भूख पर स्ट्रेस का रिस्पॉन्स भेजा जाता है, जिससे दिमाग ठीक तरह से काम नहीं कर पाता है। इसका कारण यह है कि जब किसी चीज को ले जाया जाता है तो पेट में दर्द होने लगता है या नर्वस होने लगता है।

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कुंभ राशि 2025 कुंभ राशिफल नए साल पर मां दुर्गा का आशीर्वाद

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कुंभ राशिफल 2025: कुम्भ राशि के स्वामी शनि हैं. शनि न्याय के देवता कहलाते हैं। साल 2025 कुंभ राशि वालों के लिए धन, प्रेम संबंध और बिजनेस के मामले में रहने वाला है, आइए जानते हैं कुंभ राशि का वार्षिक राशिफल-

कुंभ राशिफल 2025 (मकर राशिफल 2025 हिंदी में)

वर्ष 2025 कुंभ राशि वाले जातकों के लिए पूरे वर्ष शनि की साढ़े साती का प्रभाव बीतेगा। जीवन में धैर्य और समझदारी का टेस्ट होगा। वैसे इस राशि वाले लोग आत्मनिर्भर और बुद्धिमान होते हैं। यदि वास्तव में विश्वास है कि वह सही है तो अंत तक अपनी बात पर कायम है और अपने इसी स्वभाव के कारण कई बार शब्दों के साथ मित्रता का संबंध एक साथ नहीं बनता है। कुंभ राशि वाले इस साल मेहनत का फल पाएंगे सफल। माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त हो सकती है। कुंभ राशि वाले लोग विदेश यात्रा भी कर सकते हैं, पेट के रोग वर्ष के मध्य में चिंता कर सकते हैं। सेहत के मामले में चिंता न बरतें.

छात्रों को विदेश जाने का संभावित अवसर
शिक्षा के आवेदन से इस राशि के लिए वर्ष 2025 लाभ और थोड़ा बेहतर रह सकता है। जनवरी से लेकर मई माह तक उच्च शिक्षा का कारक बृहस्पति चतुर्थ भाव का दर्शन होगा। परिवार या विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। इसके अलावा मई के बाद के दिन भी अच्छा हो सकता है। रिवाइवल कला और साहित्य से जुड़े छात्रों को बेहतर परिणाम मिल सकते हैं, वे अपनी रुचि के हिसाब से काम कर सकते हैं। इसलिए आने वाला नया वर्ष लाभ अवश्य मिलेगा।

खर्च व बचत में होगा अंतर
कुंभ राशि के जातकों के लिए 2025 की आर्थिक दृष्टि से अधिक संख्या में रहने वाला नहीं। पहले छह महीने जनवरी से लेकर जून तक कुछ खास कमाई नहीं होने वाली, लेकिन उसके बाद उसके अच्छे नतीजे देखने को मिलेंगे। बचत के मामले में पूरा साल औसत रहने वाला है। कार्य सामान्य रूप से रहता है। विशेष रूप से विदेश से व्यापार करने वाले को बहुत लाभ मिल सकता है।

कुम्भ राशि, राशिफल
कुंभ राशि वाले लोग 2025 में नौकरी को लेकर कुछ खास बदलाव नहीं आने वाले और सभी कुछ व्यक्ति की मेहनत पर अड़े रहेंगे। लेकिन बातचीत के तौर-तरीकों में थोड़ी मेहनत करने की इजाज़त है जिससे ग़ालिब के साथ अच्छे संबंध बने और नौकरी चलती रहे। इसके अलावा जिस व्यक्ति को नौकरी की चाहत है तो उसके लिए 2025 का साल उपयुक्त है।

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अस्वीकरण: यहां चार्टर्ड सूचना सिर्फ अभ्यर्थियों और विद्वानों पर आधारित है। यहां यह जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह के सिद्धांत, जानकारी की पुष्टि नहीं होती है। किसी भी जानकारी या सिद्धांत को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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आपके मस्तिष्क के बाएँ और दाएँ भाग अलग-अलग हैं, लेकिन शायद उस तरह से नहीं जैसा आपने सोचा था

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क्या आपने कभी कुछ सौंदर्य प्रसाधनों को समझने में परेशानी होती है। क्या आप मानते हैं कि हम सभी एक प्रमुख ब्रेन स्टोन के साथ पैदा हुए हैं जो यह स्थापित करता है कि आप एक वैज्ञानिक वैज्ञानिक बनने के लिए भाग्यशाली हैं या एक विशेष कलाकार हैं जो आपको आश्चर्यचकित कर सकते हैं।

दिमाग का कौन सा पार्ट सबसे ज्यादा सोचा जाता है

लोकप्रिय संस्कृति इस विचार को बढ़ावा देती है कि हमारी सामग्रियाँ शैलीयाँ और व्यक्तित्व लक्षण लक्षण और बाएँ मस्तिष्क के बीच विभाजित हैं। जबकि बायां गोलार्ध अक्सर तर्कशास्त्र भाषा और विश्लेषणात्मक सोच से होता है। डायन गोलार्ध एनर्जी इंटरग्निशन और स्थानीय जागरूकता से यात्रा होती है। लेकिन शोध से ऐसा कुछ पता नहीं चला है। जानें कि मस्तिष्क के बाएं और अलग-अलग हिस्सों में वास्तव में क्या अंतर है। साथ ही अपने मस्तिष्क के सिद्धांतों को स्वस्थ और कार्यात्मक बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ की सलाह भी लें।

मस्तिक आपके शरीर को नियंत्रित करता है

मस्तिष्क आपका और आपके शरीर का केंद्र नियंत्रित होता है। यह आपके इंद्रियों से प्राप्त जानकारी की व्याख्या करता है और आपको व्यू-बोली और हिलने-डुलने की जानकारी देता है। इसके साथ ही सांस लेने, हृदय गति और अन्य ऑटोमोबाइल को भी नियंत्रित किया जाता है। मस्तिष्क तीन मुख्य इंजनों में विभाजित है। सेरेब्रम, सेरिबैलम और ब्रेन एनेस्थेसिया। सेरेब्रम हमारे मस्तिष्क के अधिकांश स्थानों पर कब्ज़ा कर लिया गया है। यह लगभग 80 से 90 प्रतिशत है, ओहियो में क्लीवलैंड क्लिनिक में मेलन सेंटर में एक हेल्थ साइकोलॉजी, ग्रेस ट्वोरेक, PsyD कहते हैं। सेरेब्रम में जो होता है वह ध्वनि, दृष्टि, स्पर्श, भावनाओं की दृढ़ता, तर्क, सीखना – ये सभी वास्तविक में हैं महत्वपूर्ण हैं कार्य.

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मस्तिष्क को दो मॉडलों में विभाजित किया गया है। जिसमें बायण और डायन मस्तिष्क गोलार्ध कहा जाता है। जो सफेद पदार्थ एक बड़ी सी-आकार की संरचना के माध्यम से जुड़े होते हैं और संचार करते हैं जिसे सफेद पदार्थ कहा जाता है। मस्तिष्क के अंतिम पदार्थ को अक्सर तारक पक्ष के रूप में लेबल किया जाता है। जो मुख्य रूप से भाषा संघ, तार्किक तर्क और समस्या-समाधान के लिए जिम्मेदार होता है।

बैगा ब्रोका भाषा का क्षेत्र जो वामपंथी गोलार्ध में स्थित है। भाषण उत्पादन और निर्देशन को स्पष्ट करने की क्षमता खो जाती है। मूल रूप से बाईं ओर एक तंत्रिका मार्ग के माध्यम से ब्रोका के क्षेत्र से जुड़ता है और लिखित और बोली जाने वाली भाषा वाली बंदूक से खोई हुई होती है।

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हाई यूरिक एसिड और जोड़ों के दर्द से जूझ रही हैं श्वेता तिवारी, जानिए लक्षणों के बारे में

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खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान की वजह से लोग तेजी से कई बेकार का शिकार हो रहे हैं। यूरिक एसिड भी लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्या है। जब शरीर में यूरिक एसिड बढ़ता है तो जोड़ों में असंवेदनशील दर्द होने लगता है। जिससे उठना-बैठना मुश्किल हो जाता है। टीवी एक्ट्रेस श्वेता तिवारी की भी ये गंभीर समस्या है.

हाल ही में एक साक्षात्कार में श्वेता तिवारी ने बताया कि उन्हें हाई यूरिक एसिड की समस्या है। इस समस्या को कंट्रोल करने के लिए एक्ट्रेस ने अपनी आय में शामिल हो गईं। कॉफी के सेवन से यूरिक एसिड नियंत्रित होता है। हाई यूरिक एसिड वाले लोगों के लिए क्या है एक पेय पदार्थ? फार्मेसी से पता चलता है कि नियमित रूप से कॉफी पीने से यूरिक एसिड का स्तर कम होता है। जिससे गॉट का खतरा कम हो सकता है। आइए जानते हैं यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए कैसे करें इस्तेमाल।

यूरिक एसिड में खतरनाक है कॉफ़ी

यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के लिए श्वेता तिवारी ने अपनी खुराक में शामिल किया। श्वेता तिवारी के अनुसार, चॉकलेट में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो यूरिक एसिड को नियंत्रित करने में खतरनाक होते हैं। यूरिक एसिड में दूध की जगह ब्लैक फूला का सेवन करना चाहिए। यानी बिना चीनी और दूध वाली कॉफी यूरिक एसिड में लाजवाब होती है।

यूरिक एसिड के लिए यूट्यूब कैसे काम करता है?

हाई यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के लिए ब्लैक पाउडर तैयार किया जाता है। कॉफी में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो शरीर में बनने वाले प्यूरीन केमिकल को तोड़ते हैं। कारखाने में क्लोर जिंक एसिड जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट जैसे सीरम पाए जाते हैं। पोर्टफोलियो नामांकन में भी सुधार किया जा सकता है। कॉफी जैन्थिन आयोडीन को रोकता है, जो यूरिक एसिड के उत्पाद में एक एंजाइम शामिल है, जो इसके असामान्य स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। कैफीन और पॉलीफिनॉल्स में मौजूद कैफीन की समस्या कम होती है।

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एक दिन में कितनी बार कॉफ़ी पीनी चाहिए?

कॉफी पीने से शरीर से बढ़ा हुआ यूरिक एसिड बाहर निकल जाता है, इसलिए दिन में 1 से 2 कप ब्लैक कॉफी पीना चाहिए। कैफीनयुक्त और डिकैफ़िन दोनों तरह की फिल्में यूरिक एसिड को कम करने में कमाल लगती हैं।

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आज का पंचांग 15 दिसंबर 2024 आज मार्गशीर्ष पूर्णिमा मुहूर्त योग राहु काल समय ग्रह नक्षत्र

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आज का पंचांग: आज 15 दिसंबर 2024 को मार्गशीर्ष पूर्णिमा, धनु संक्रांति, अन्नपूर्णा जयंती है। आज से हरमास भी शुरू हो रहे हैं. पूर्णिमा पर इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने और दूध मिश्रित जल चढ़ाने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

अगर आप वैवाहिक जीवन के क्लेश से परेशान हैं तो मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन लाल कपड़ों में हल्दी की पोशाक और सुपारी लेकर उसे मंदिर में रख दें। फिर अगले माह की जो भी पूर्णिमा पड़ी उस दिन कपड़े, हल्दी के दांत और सुपारी को बहते जल में प्रवाहित कर दें। सिद्धांत है इस उपाय से दाम्पत्य जीवन का दुःख दूर होता है।

अन्नपूर्णा जयंती पर आज चूल्हे की अच्छी तरह से सफाई और तिलक करें। अन्न का अल्पमानदों को दान करें। सिद्धांत यह है कि धन-अन्न के भंडार बने रहते हैं।

आइए जानें आज का शुभ-अशुभ उत्सव (शुभ मुहूर्त 15 दिसंबर 2024), राहु काल (आज का राहु काल), शुभ योग, ग्रह परिवर्तन, व्रत-त्योहार, तिथि आज का पंचांग (Panchang in Hindi)

आज का पंचांग, ​​15 दिसंबर 2024 (कैलेंडर 15 दिसंबर 2024)














दिनांक पूर्णिमा (15 दिसंबर 2024, शाम 04.58 – 16 दिसंबर 2024, दोपहर 2.31)
पक्ष शुक्ल
युद्ध रविवार
नक्षत्र मृगशिरा
योग शुभ
राहुकाल शाम 4.09 – शाम 5.26
सूर्योदय प्रातः 7.03 – सायं 05.25
चंद्रोदय
शाम 5.14 – चंद्रास्त नहीं
दिशा शूल
पश्चिम
चंद्र राशि
वृषभ
सूर्य राशि वृश्चिक

शुभ मुहूर्त, 15 दिसंबर 2024 (शुभ मुहूर्त)









ब्रह्म देवता प्रातः 04.46 – प्रातः 05.37
अभिजित मठाधीश प्रातः 11.54 – दोपहर 12.36
गोधूलि महोत्सव शाम 05.21 – शाम 05.48
विजय उत्सव दोपहर 01.59 – दोपहर 02.44
अमृत ​​काल सम्राट
शाम 06.06 – रात्रि 07.36
निशिता काल पुजारी रात्रि 11.46 – प्रातः 12.41, 16 दिसंबर

15 दिसंबर 2024 अशुभ मुहूर्त (आज का शुभ मुहूर्त)

  • यमगण्ड – दोपहर 12.16 – दोपहर 1.34
  • अदल योग – प्रातः 7.06 – रात्रि 10.19
  • गुलिक काल – दोपहर 2.51 – शाम 04.09

सफला एकादशी 2024: सफला एकादशी कब? इस व्रत को करने से क्या होता है, दिसंबर में इसकी तारीख जानें

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समुद्री मील में ज़ूम-जुकाम होने की संभावना अधिक क्यों होती है? जानें क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

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यह शरीर में कैंसर का पता लगाने का सबसे आसान तरीका है, पूरा लेख हिंदी में पढ़ें

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कैंसर की पहली स्टेज में ही पता चल जाए तो इसका इलाज आसानी से हो जाता है। साथ ही साथ चांस भी बढ़ जाते हैं कि वक्त रहेगा जान बच जाएगा। रिसर्च से पता चलता है कि डॉक्टरी परीक्षण कैंसर का शुरुआती चरण में निदान जीवन बीमा कंपनियों द्वारा किया जा सकता है। कैंसर का इलाज कैंसर के प्रकार और स्टेज के बारे में जानें। कैंसर के स्टेज होते हैं. एक सामान्य उपचार जो कैंसर को या धीरे-धीरे संभव हो सके कैंसर को दूर करता है। कैंसर वैज्ञानिकों को नष्ट करने के लिए उच्च ऊर्जा एक्स-रे या अन्य संसाधनों का उपयोग किया जाता है। चिकित्सा विशेषज्ञ और रोगी-वकालत समुदाय के पास कैंसर जांच के लिए विशेषज्ञ और दस्तावेज हैं। अपने डॉक्टर के साथ विभिन्न इलाक़े की समीक्षा करें और साथ मिलकर यह तय करें कि कैंसर के खतरे के लिए आपके खतरे के आधार पर आपके लिए सबसे अच्छा क्या है?

कैंसर के 200 से अधिक अलग-अलग प्रकार हैं जो कई अलग-अलग संकेत और लक्षण पैदा कर सकते हैं। कभी-कभी लक्षण शरीर के विशेष लक्षण जैसे पेट या त्वचा को प्रभावित करते हैं। लेकिन संकेत अधिक सामान्य भी हो सकते हैं, और इनमें कमजोरी कम होना, थकान (थकान) या बिना वजह दर्द शामिल हो सकते हैं। कैंसर के कुछ विशिष्ट लक्षण, जैसे पेट, कैंसर की तुलना में अधिक जाने जाते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे अधिक महत्वपूर्ण हैं या कैंसर होने की अधिक संभावना है। कैंसर के किसी भी लक्षण की जांच से पता चलता है।

कैंसर के अलग-अलग लक्षण होते हैं

कैंसर से पीड़ित लोग अलग-अलग तरह से प्रभावित हो सकते हैं। एक व्यक्ति में अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं और कुछ लोगों में कोई लक्षण नहीं होते। इसलिए, आपको कैंसर के सभी आभूषणों और नमूनों को याद रखना चाहिए कि उनका पालन-पोषण नहीं किया जाता है। करें. इससे प्रारंभिक चरण में कैंसर का निदान करने में मदद मिल सकती है, जब उपचार के सफल होने की संभावना अधिक होती है।

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कैंसर के 15 सामान्य लक्षण

डॉक्टर हमेशा कहते हैं कि जो मामूली लक्षण होते हैं उन्हें लोग अनदेखा कर देते हैं। बाद में पता चलता है कि वह कैंसर के शुरुआती लक्षण होते हैं और बाद में यही घातक बन जाता है। आज हम इस लेख के माध्यम से कैंसर के प्रारंभिक रहस्यों के बारे में विस्तार से बात करते हैं। जिसे अक्सर लोग सीमांत समझकर अनदेखा कर देते हैं। आज हम कैंसर के ऐसे 15 सामान्य रहस्यों के बारे में बात करेंगे जिस पर ध्यान देना जरूरी है।

कैंसर के प्रारंभिक लक्षण

सर्वाइकल और ओवेरियन कैंसर के लक्षण

अगर किसी महिला या लड़की के हॉस्टल में भर्ती रूप से बार-बार बदलाव देखा जा रहा है तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से दिखाना चाहिए। क्योंकि इसे वैध बनाना खतरनाक हो सकता है। यह सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

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खेलते समय दिल का दौरा पड़ने से 7 साल की बच्ची की मौत, जानिए लक्षण…

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एक 7 साल की बच्ची का ग्रुप टाइम हार्ट अटैक से मर गया। वह 1 कक्षा में पढ़ती थी। बच्ची की मौत के बाद फ़ैमिली में स्टूडियो मच गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह करीब 11 बजे वह स्कूल में खेल रही थी। इसी दौरान वह दर्द की शिकायत के कारण बेहोश हो गई। बच्चों में दिल का दौरा पड़ना बहुत ही अच्छा है। लेकिन कुछ विषम परिस्थितियाँ ऐसी हो सकती हैं। इन फायदों से बच्चों को हो सकता है हार्ट अटैक.

जेनेटिक हृदय रोग: असामान्य असामान्यताएं या मार्फ़न सिंड्रोम

छाती में चोट: छाती पर चोट लगने से दिल की गति रुक ​​जाती है

विद्युत रोग: हृदय की विद्युत प्रणाली में असामान्यताएं, जैसे वोल्फ-पार्किंसन-व्हाइट सिंड्रोम या लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम

हृदय की संरचना में असामान्यताएँ: हाइपरट्रॉफ़िक कार्डियोमाय पैथियाँ या फ़ोटोग्राफ़ हुई कार्डियोमाय पैथियाँ

संक्रमण: मायोकार्डिएट्रिक हार्ट की प्लास्टर का संक्रमण है

फैक्ट्री का सर्वाधिक उपयोग: फैक्ट्री का उपयोग कार्ड स्टोर का कारण बन सकता है

क्या आपके बच्चे का दिल भी हो रहा है ख़राब

कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, इन बच्चों की थेरेपी कोई काम नहीं कर रही है, उन्हें फास्ट फूड कल्चर में पाला जा रहा है। इसके अलावा पढ़ाई का तनाव भी साथ चल रहा है। ऐसे में माता-पिता को सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि जरा सी गुणवत्ता वाले बच्चे की सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि आजकल बच्चे टहलना और खेलना कम कर रहे हैं, जो हार्ट अटैक (दिल का दौरा) की वजह बन रहे हैं। बच्चों को पार्टिसिपेंट्स की चीजें सबसे ज्यादा पसंद आ रही हैं, घर पर दो मिनट में ब्रेकफास्ट तैयार करने के बजाय कई मां भी रोटी बना रही हैं, जिसकी वजह से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है।

बच्चों को हार्ट अटैक से बचने के लिए क्या करें

1. पारिवारिक संकट है तो सावधानी बरतें

दार्शनिकों का कहना है कि अगर घर में किसी को हार्ट अटैक की समस्या है तो सबसे अधिक संभावना है कि रहना जरूरी है। बच्चों के दिल में गलत स्थिति में ब्लॉकेज का खतरा पैदा न हो, इसके लिए उन्हें अस्थिरता से बचाया जाना चाहिए। कम उम्र में शुरुआत-शुरू में इसे लेकर तो महंगाई की स्थिति बन जाती है लेकिन बाद में यह बड़ी समस्या बन जाती है।

2. मोटापे से ग्रस्त बच्चों को हृदय रोग का खतरा

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में हार्ट डिजीज का सबसे बड़ा कारण मोटापा भी है। बच्चों में स्वास्थ्य की समस्या, मधुमेह और अन्य बीमारियाँ हो सकती हैं। यदि माता-पिता सही समय पर गंभीर नहीं हुए तो उनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

3. बच्चे को दिल की बीमारी से बचाना तो जरूरी है

वेदविज्ञानियों का कहना है कि अगर कोई बच्चा दिल की किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है तो उसका फॉलोअप लेते रहें। समय-समय पर डॉक्टर के पास और उनकी दवाएँ, सलाह लें। बच्चों की सेहत को लेकर चिंता न बरतें।

4. पढ़ाई का तनाव

तर्कशास्त्रियों का कहना है कि बहुत से माता-पिता छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बच्चों के लिए ठीक नहीं है। हमारे समाज में पढ़ाई को लेकर बड़ा तनाव है। घर से बाहर बच्चे अवैध वस्तुएं खाते हैं, कई बार तो कम उम्र में नशे का भी शिकार हो जाते हैं, पढ़ाई को लेकर भी तनाव लेते हैं, जो अपने दिल को खोखला कर देता है और गंभीर खतरा पैदा कर देता है।

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बच्चों के दिल को कैसे खरीदें

1.बच्चों को तनाव न दें।

2.बच्चों के आहार पर ध्यान. फास्ट फूड से बचें.

3. नियमित सुपरमार्केट.

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4. कम उम्र में सर्दी है तो मॉनिटरिंग करते रहें। बच्चों का बीपी चेक करें.

5. बच्चा मोटा है तो फैट बर्न करने के लिए फ्लो की मदद लें।

अस्वीकरण: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया पर आधारित है। आप भी अमल में आने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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क्या आप जानते हैं कि रोजाना चाय पीने और सिगरेट पीने से पुरानी कब्ज हो सकती है | क्या आप रोज़ाना चाय

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चाय और धूम्रपान के साथ सेवन वर्ल्ड भर में रिलैक्स और इंस्टेंट एनर्जी के लिए जाना जाता है। लेकिन पाचन पर इन प्रभावों का बार-बार ध्यान नहीं दिया जाता। कैफीन युक्त चाय ठीक है, लेकिन कैफीन और धूम्रपान का अत्यधिक सेवन आपके पेट के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। जिससे पुराने विनाश और अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं। चाय में कैफीन होता है. जो एक टॉनिक है, जिसका पाचन तंत्र पर मिश्रित प्रभाव हो सकता है। सही मात्रा में कैफीन सिरप में पौधे को शेष मल त्याग को आसानी से बनाया जा सकता है। दूसरी ओर अधिक चाय पीने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। परिणामस्वरूप मल त्याग धीमा हो जाता है।

कैफीन के रास्ते में जलन पैदा हो सकती है। शरीर से पानी आश्रम को बढ़ावा देता है। निर्जलीकरण सीधे मल की स्थिरता और मार्ग को प्रभावित करता है। जिससे विनाश होता है। लैक्टोज अशिष्णु व्यक्तिगत पाचन संबंधी पहलू जैसे कि सूजन या कब्ज से पीड़ित हो सकते हैं क्योंकि चाय में अक्सर दूध होता है। धूम्रपान से जठरांत्र (जीआई) पथ पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसमें मौजूद निकोटीन की मात्रा तंत्रिका तंत्र को बढ़ावा देती है और आकार के रूप में आंत्र गतिविधि को तेज कर सकती है लेकिन लगातार धूम्रपान करने से माइक्रोबायोटा का संतुलन बिगड़ जाता है। जो स्वस्थ पाचन के लिए आवश्यक है।

दूसरी ओर निकोटीन के घोल में रक्त के प्रवाह को कम किया जाता है। जिससे उनकी इम्पैक्टर्स से काम करने की क्षमता कम हो जाती है। समय के साथ रक्त प्रवाह में कमी और पुरानी सूजन की परत को नुकसान पहुंचता है। पाचन और मल त्याग में समस्या होती है। धूम्रपान से कब्ज से जुड़े आईबीएस और आईबीडी का खतरा भी बढ़ सकता है।

रोकथाम के उपाय

चाय का सेवन कम करें: कैफीन का सेवन कम करें और हर्बल चाय का सेवन करें जो कैफीन-मुक्त हो और जिसमें पुदीना या अदरक जैसे तत्व हों।

नक़्क़ाशीदार रहना: दिन भर में भरपूर पानी पीने से कैफीन के प्रभावों का मुकाबला किया जा सकता है। प्रतिदिन कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।

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धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान की आदत को कम या ख़त्म करने से स्वास्थ्य में सुधार संभव है।

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खाने में मात्रा की मात्रा: इनमें प्रचुर मात्रा में नारियल को शामिल करें, जैसे फल, मसाला और साबुत अनाज का सेवन करें। तीन मल त्याग में मदद करता है और रिकॉर्डिंग करता है।

अस्वीकरण: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया पर आधारित है। आप भी अमल में आने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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