Friday puja: शुक्रवार को करें ये खास उपाय, लक्ष्मी कृपा से कभी नहीं होगी धन की कमी

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सनातन धर्म में शुक्रवार के दिन का बेहद खास महत्व होता है. ये दिन धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है. शास्त्रों में इस बात का उल्लेख है कि शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक तंगी दूर होती है और घर में खुशहाली आती है. तो ऐसे में शुक्रवार को करें ये खास उपाय, घर में कभी नहीं होगी आर्थिक तंगी.

सनातन धर्म में शुक्रवार के दिन का बेहद खास महत्व होता है. ये दिन धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है. शास्त्रों में इस बात का उल्लेख है कि शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक तंगी दूर होती है और घर में खुशहाली आती है. तो ऐसे में शुक्रवार को करें ये खास उपाय, घर में कभी नहीं होगी आर्थिक तंगी.

आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के सामने एक सिक्का रख दें. इसके बाद लक्ष्मी जी की पूरी विधि-विधान से पूजा करें और अपने गुनाहों की माफी मांगे और ठीक अगले दिन इस सिक्के में लाल कपड़ा बांधकर अपने पास रख लें.

आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के सामने एक सिक्का रख दें. इसके बाद लक्ष्मी जी की पूरी विधि-विधान से पूजा करें और अपने गुनाहों की माफी मांगे और ठीक अगले दिन इस सिक्के में लाल कपड़ा बांधकर अपने पास रख लें.

शुक्रवार के दिन नीम के पेड़ में जल चढ़ाने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है. साथ ही ग्रह दोषों से भी छुटकारा प्राप्त होता है. यह उपाय विशेष रूप से शुक्रवार की सुबह स्नान करने के बाद करना बेहद शुभ माना जाता है.

शुक्रवार के दिन नीम के पेड़ में जल चढ़ाने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है. साथ ही ग्रह दोषों से भी छुटकारा प्राप्त होता है. यह उपाय विशेष रूप से शुक्रवार की सुबह स्नान करने के बाद करना बेहद शुभ माना जाता है.

शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए घी का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 बार जाप करें.

शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए घी का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 बार जाप करें.

ज्योतिष के अनुसार, शुक्रवार के दिन चींटियों को आटा और चीनी फेटकर खिलाने से ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है, जिससे अटके हुए काम फिर से शुरू हो जाते हैं और कार्यों में कामयाबी मिलती है.

ज्योतिष के अनुसार, शुक्रवार के दिन चींटियों को आटा और चीनी फेटकर खिलाने से ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है, जिससे अटके हुए काम फिर से शुरू हो जाते हैं और कार्यों में कामयाबी मिलती है.

शुक्रवार के दिन 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' और 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' जैसे मंत्रों का जाप कर सकते हैं. इस मंत्र के जाप से धन की प्राप्ति होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.

शुक्रवार के दिन ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ और ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ जैसे मंत्रों का जाप कर सकते हैं. इस मंत्र के जाप से धन की प्राप्ति होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.

Published at : 05 Dec 2025 07:30 AM (IST)

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IVF इलाज मतलब कर्ज! सरकारी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, पढ़ें गरीब क्यों हो रहे इससे दूर?

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Why IVF Is Expensive In India: भारत में IVF का खर्च इतना ज्यादा हो गया है कि ज्यादातर दंपति इलाज कराते-कराते कर्ज में डूब रहे हैं. एक नई सरकारी रिपोर्ट बताती है कि IVF कराने वाले हर 10 में से 9 भारतीय दंपति ऐसी स्थिति में पहुंच जाते हैं जहां इलाज पर होने वाला खर्च उनकी सालाना आय के 10 प्रतिशत से भी ज्यादा हो जाता है. एक IVF साइकिल पर निजी अस्पतालों में करीब 2.3 लाख रुपये और सरकारी अस्पतालों में भी औसतन 1.1 लाख रुपये खर्च आ रहा है. यह बोझ किसी भी आम परिवार के लिए बेहद भारी है और यही इस रिपोर्ट की सबसे चौंकाने वाली बात है.

यह देश का पहला बड़ा स्टडी है जिसे ICMR–NIRRCH ने स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए तैयार किया है. इसमें साफ दिखा है कि IVF सिर्फ महंगा नहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए आर्थिक झटका साबित हो रहा है क्योंकि एक साइकिल में सफलता की गारंटी नहीं होती और अक्सर लोगों को कम से कम तीन बार कोशिश करनी पड़ती है. रिपोर्ट में WHO के आंकड़ों का हवाला भी है, जिनके मुताबिक भारत में 4 से 17 प्रतिशत दंपति इनफर्टिलिटी से जूझते हैं और इनमें से करीब 8 प्रतिशत को IVF जैसे एडवांस्ड इलाज की जरूरत पड़ती है.

क्यों महंगा होता है इलाज?

आईवीएफ की पूरी प्रक्रिया कई चरणों से गुजरती है, ओवेरियन स्टिम्युलेशन, एग रिट्रीवल, फर्टिलाइजेशन, एंब्रियो ट्रांसफर, और लगातार मॉनिटरिंग. यही कारण है कि ये इलाज तकनीकी रूप से मुश्किल भी है और आर्थिक रूप से भारी भी. आयुष्मान भारत योजना अभी कमजोर तबकों को 5 लाख रुपये तक की अस्पताल उपचार कवर देती है, लेकिन आईवीएफ इसमें शामिल नहीं है. रिपोर्ट साफ कहती है कि चूंकि आईवीएफ का ज्यादातर खर्च ओपीडी में होता है, इसलिए इसे पैकेज में जोड़ा जाना चाहिए. अगर योजना में शामिल किया जाता है तो एक आईवीएफ साइकिल की 81,332 हजार रुपये की लागत को सरकारी दर मानने की सिफारिश की गई है. देश में करीब 2.8 करोड़ दंपति इनफर्टिलिटी की समस्या झेल रहे हैं, जिनके लिए आईवीएफ ही आखिरी उम्मीद है, लेकिन इलाज की ऊंची लागत उनके लिए रास्ता रोक देती है.

स्टडी में ये भी सामने आया कि सभी सर्वे मरीजों में पीसीओएस बांझपन की सबसे आम वजह थी. निजी अस्पतालों में सीधे इलाज का खर्च ज्यादा होता है, जबकि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को गैर-चिकित्सकीय खर्च, जैसे यात्रा, ठहरने का खर्च और काम से छुट्टी का नुकसान ज्यादा झेलना पड़ता है. आईवीएफ शुरू होने से पहले ही चार में से एक मरीज पर इतना खर्च हो चुका था कि वो इसे “catastrophic expenditure” की कैटेगरी में पहुंच गया. रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत के हेल्थ सिस्टम में इनफर्टिलिटी की समस्या को अभी भी बहुत कम प्राथमिकता मिलती है, जबकि इसके इलाज पर लगभग कोई आर्थिक सुरक्षा नहीं मिलती.

IVF इतना महंगा क्यों पड़ रहा है?

आईवीएफ की एक साइकिल का खर्च 50,000 से लेकर 2.5 रुपये लाख तक जा सकता है. इसमें दवाएं, टेस्ट, मॉनिटरिंग, एंब्रियो लैब, और कई बार बार-बार ट्राई करने का खर्च शामिल है. ऊपर से महंगाई ने दवाओं और टेस्ट की कीमत और बढ़ा दी है. मिडिल-क्लास परिवारों के लिए ये खर्च असहनीय है. हाउसहोल्ड कंजप्शन सर्वे के हिसाब से ग्रामीण परिवार हर महीने करीब 17,000 रुपये खर्च करते हैं. ऐसे में आईवीएफ का खर्च कई लोगों की पूरी सालाना आय से भी ज्यादा बैठ जाता है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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खाने में यह डिश सबसे ज्यादा पसंद करते हैं पुतिन, जानें इसे कैसे किया जाता है तैयार?

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Vladimir Putin Favourite Food: दुनिया के ताकतवर नेताओं में शुमार व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को भारत के दौरे पर आ रहे हैं. वे अपनी निजी जिंदगी के बारे में कम ही बोलते हैं. लेकिन जब बात खाने की आती है, तो उनकी पसंद उन यादों से जुड़ जाती है, जो उन्हें अपने बचपन और अपनी मां की रसोई तक ले जाती हैं. पुतिन की प्लेट पर सबसे खास जगह रूसी कैबेज-मीट पाई की होती है, वही डिश जो उनकी मां रविवार और त्योहारों पर अपने हाथों से बनाती थीं. पुतिन कई बार बता चुके हैं कि बचपन में उनकी मां जो पत्ता गोभी, मांस और चावल से भरी हुई पाई बनाती थीं, उसका स्वाद आज भी उनकी यादों में जिंदा है. भले ही आज उनके भोजन पर सख्त सुरक्षा और प्रोटोकॉल लागू रहता है, लेकिन जहां भी वे जाते हैं, मेज़बान देश अक्सर इस होम-कुक्ड फ्लेवर को दोबारा परोसने की कोशिश करते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि उनका फेवरेट डिश कौन सा है और उसको कैसे तैयार किया जाता है, इसमें कौन-कौन सी चीजें शामिल होती हैं. 

क्या है पुतिन की फेवरेट डिश?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,  पुतिन को सबसे ज्यादा पसंद है, रूसी स्टाइल कैबेज एंड मीट पाई यह एक पारंपरिक, सिंपल और भरपेट फ्लेवर वाली डिश होती है, जो रूस के ज्यादातर घरों में खास मौकों पर बनती है.

पुतिन की फेवरेट डिश कैसे तैयार की जाती है? 

सामग्री-

  • बारीक कटी पत्ता गोभी
  • उबला या हल्का पका हुआ कीमा (बीफ, लैम्ब, चिकन)
  • उबला हुआ चावल
  • प्याज
  • बटर
  • नमक, काली मिर्च
  • आटा (पाई के लिए)
  • अंडा (टॉप ब्रशिंग के लिए)

बनाने का आसान तरीका

फिलिंग तैयार करें– पैन में बटर गर्म करें और प्याज हल्का सुनहरा करें. अब इसमें पत्ता गोभी डालें और थोड़ा नरम होने तक पकाएं. इसी में कीमा, नमक, काली मिर्च और चावल मिलाएं. फिलिंग को थोड़ा सूखा और सुगंधित बनाएं.

पाई डो बेलें–  आटे की दो चादरें बेलें एक बेस के लिए, एक ऊपर ढकने के लिए. बेस पर फिलिंग फैलाएं और ऊपर दूसरी चादर रख दें. किनारों को दबाकर सील करें. ऊपर से थोड़ा अंडा ब्रश करें ताकि बेकिंग में अच्छा रंग आए. गर्मागर्म सर्व करें, यही है पुतिन की पसंदीदा होम-स्टाइल कम्फर्ट डिश.

पुतिन और क्या-क्या पसंद करते हैं खाने में?

  • ब्रेकफास्ट- दलिया , टेवोरोग, शहद
  • वर्कआउट के बाद- स्टेक और क्वेल एग्स
  • फिश- सैल्मन, स्टर्जन
  • रूसी डिशेज-  बोरश्च, श्ची (कैबेज सूप), पेलमेनी
  • सलाद-  टमाटर और लेट्यूस वाले हल्के सलाद
  • डेजर्ट- पिस्ता आइसक्रीम
  • ड्रिंक- ग्रीन टी अल्कोहल बहुत कम

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धर्मनिरपेक्ष देश रूस के राष्ट्रपति पुतिन किस धर्म को मानते हैं? क्या रखते हैं भगवान में श्रद्धा

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विदेश में दूध से बनी चीजें नहीं खाते पुतिन, फिर पनीर जैसा दिखने वाला त्वारोव क्या, जिसे रूस से साथ लाएंगे?

विदेश में दूध से बनी चीजें नहीं खाते पुतिन, फिर पनीर जैसा दिखने वाला त्वारोव क्या, जिसे रूस से साथ लाएंगे?

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ठंड में भी रहें पिंक-ग्लोइंग, घरेलू तरीकों से पाएं नेचुरल गुलाबी स्किन

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सर्दियां आते ही जहां एक तरफ रजाई, कॉफी और गरमागरम पकौड़ों का मजा बढ़ जाता है, वहीं दूसरी तरफ हमारी स्किन के लिए मुश्किलें भी शुरू हो जाती हैं. ठंडी हवा स्किन से नमी खींच लेती है, जिससे स्किन रूखी, बेजान और खुरदरी होने लगती है. ऐसे मौसम में चाहे आप कितनी भी महंगी क्रीम या सीरम यूज कर लें, असली निखार तभी आता है जब स्किन को अंदर से पोषण मिले.

हमारे घर की रसोई में ऐसे कई प्राकृतिक और सुरक्षित उपाय छुपे होते हैं, जो बिना किसी केमिकल के आपकी स्किन को गुलाबी, मुलायम और चमकदार बना सकते हैं. ये वही नुस्खे हैं जो हमारी दादी-नानी कभी समय निकालकर बनाती थीं, एकदम सस्ते, असरदार और बिल्कुल सुरक्षित. अगर आप इस सर्दी में बिना मेकअप के नैचुरल पिंक ग्लो पाना चाहते हैं, तो ये आसान घरेलू नुस्खे आपकी स्किन का जादुई रूप से बदल देंगे. तो चलिए जानते हैं कि सर्दियों में गुलाबी चमक पाने के बेहतरीन देसी उपाय जो आपकी स्किन को न सिर्फ खूबसूरत बनाएंगे, बल्कि अंदर से हेल्दी भी करेंगे. 

1. गुलाबी निखार के लिए गुलाब जल और शहद का टोनर – गुलाब जल स्किन को ठंडक देता है, पोर्स को टाइट करता है और चेहरे पर ताजगी लाता है. वहीं शहद प्राकृतिक मॉइस्चराइजर है, जो स्किन में नमी टिकाए रखता है. इसे बनाने के लिए एक साफ छोटी बोतल में बराबर मात्रा में गुलाब जल और शहद मिला लें.  इसे चेहरा धोने के बाद कॉटन पैड से यह मिक्सचर पूरे चेहरे पर लगाए. यह टोनर आपकी स्किन को तुरंत नरमी, नमी और हल्की गुलाबी चमक देता है. 

2. चुकंदर का फेस पैक – चुकंदर विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो चेहरे का खून बढ़ाकर नेचुरल गुलाबी रंग देता है. इसे बनाने के लिए आधा चुकंदर कद्दूकस करें, उसमें 1 चम्मच दूध या दही मिलाकर पेस्ट बना लें. चेहरे पर 10 से 15 मिनट लगाकर छोड़ दें फिर हल्के गुनगुने पानी से धो लें. सिर्फ 1 से 2 बार का यूज भी चेहरे पर नेचुरल रौशनी और गुलाबीपन ला देता है. 

3. दूध और बादाम का सौम्य फेस स्क्रब – सर्दियों में स्किन से डेड सेल्स हटाना बहुत जरूरी है, ताकि स्किन चमकती रहे. बादाम पोषक तेलों से भरपूर होता है और दूध लैक्टिक एसिड की मदद से हल्का एक्सफोलिएशन करता है. इसे बनाने के लिए 6 भीगे हुए बादाम पीस लें और उसमें थोड़ा दूध मिलाकर पेस्ट बना लें. इसे लगाने के लिए 3 से 5 मिनट चेहरे पर हल्के हाथों से गोल-गोल मसाज करें, फिर धो लें. यह स्क्रब स्किन को मुलायम, साफ और ब्राइट बनाता है. 

4. हल्दी–दही का चमक देने वाला मास्क – हल्दी स्किन की सूजन, रूखापन और दाग-धब्बों को शांत करती है. दही स्किन को ठंडक, पोषण और हल्का एक्सफोलिएशन देता है. इसके बनाने के लिए ही में बस एक चुटकी हल्दी मिलाएं. 10 मिनट चेहरे पर लगाकर छोड़ दें, फिर धो लें. इससे चेहरे पर तुरंत ताजगी और हल्का-सा ग्लो आता है जो बिल्कुल नेचुरल और खूबसूरत दिखता है. 

5. ठंडे दूध के छींटे – अगर आपको बहुत झंझट नहीं चाहिए, तो यह सबसे सरल तरीका है. दूध का लैक्टिक एसिड स्किन को साफ करता है और नमी देता है. इसे चेहरा धोकर उस पर ठंडे दूध के छींटे मारें या कॉटन पैड से चेहरा पोंछें. इसे रोजाना यूज किया जा सकता है. यह तरीका आपकी स्किन को तुरंत मुलायम और गुलाबी बनाता है. 

सर्दियों में गुलाबी और हेल्दी स्किन के लिए कुछ अतिरिक्त टिप्स

ठंड में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर में पानी की कमी से चमक गायब हो जाती है. इसलिए ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं. संतरा, अनार, आंवला ये आपकी स्किन को अंदर से चमकदार बनाते हैं.  विटामिन C वाली डाइट लें. हार्श सोप स्किन को और ज्यादा  सुखा देते हैं. हल्के फेस वॉश का यूज करें.  नहाने के बाद तुरंत मॉइस्चराइजर लगाएं. पानी सूखने से पहले ही क्रीम लगाने से नमी बंद रहती है. 

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Annapurna Jayanti Wishes in Hindi: मां अन्नपूर्णा की कृपा से भरा रहे अन्न भंडार, अन्नपूर्णा जयं

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Annapurna Jayanti Wishes in Hindi:अन्नपूर्णा जयंती का पर्व हर साल अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस साल अन्नपूर्णा जयंती गुरुवार, 4 दिसंबर 2025 को प ड़ रही है. इस दिन मां अन्नपूर्णा की पूजा-अराधना करने से घर पर धन-धान्य की कमी नहीं होती.

अन्नपूर्णा जयंती के पावन दिन सपरिवार एक साथ श्रद्धा व आस्था के साथ देवी अन्नपूर्णा की अराधना करें. साथ ही अपने प्रियजनों को भी इस पावन दिन की बधाई जरूर दें. अन्नपूर्णा जयंती की बधाई देने के लिए यहां देखिए बेहतरीन धार्मिक संदेश.

अन्नपूर्णा जयंती शुभकामनाएं (Maa Annapurna Wishes Messages Quotes in Hindi)

मां अन्नपूर्णा जयंती पर मैया के चरणों मे कोटी कोटी प्रणाम,
प्रार्थना है की हर घर में धन धान्य, वैभव, रिद्धि- सिद्धि बढ़ें
अन्नपूर्णा जयंती की शुभकामना 2025

Annapurna Jayanti Wishes in Hindi: मां अन्नपूर्णा की कृपा से भरा रहे अन्न भंडार, अन्नपूर्णा जयंती पर भेजें ये शुभकामनाएं

मां अन्नपूर्णा की कृपा ऐसे ही हम सभी पर अनवरत बरसती रहे
मां अन्नपूर्णा जयंती की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

Happy Annapurna Jayanti 2025

Annapurna Jayanti Wishes in Hindi: मां अन्नपूर्णा की कृपा से भरा रहे अन्न भंडार, अन्नपूर्णा जयंती पर भेजें ये शुभकामनाएं

अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शंकरप्राणवल्लभे
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्य भिक्षां देहि च पार्वति
अन्नपूर्णा जयंती 2025 शुभकामना

Annapurna Jayanti Wishes in Hindi: मां अन्नपूर्णा की कृपा से भरा रहे अन्न भंडार, अन्नपूर्णा जयंती पर भेजें ये शुभकामनाएं

मां अन्नपूर्णा जयंती पर मैया के चरणों मे कोटी कोटी प्रणाम,
यही प्रार्थना है की हर घर में धन धान्य, वैभव, रिद्धि- सिद्धि बढ़े.
कोई भूखा ना रहे, सबका मंगल और कल्याण हो.Annapurna Jayanti Wishes in Hindi: मां अन्नपूर्णा की कृपा से भरा रहे अन्न भंडार, अन्नपूर्णा जयंती पर भेजें ये शुभकामनाएं

मां अन्नपूर्णा करें कृपा निराली,
भर दें जीवन में खुशियों की थाली.
सद्भाव, समृद्धि और सुख बरसे हर दिन,
अन्नपूर्णा जयंती हो मंगलमयी.

Annapurna Jayanti Wishes in Hindi: मां अन्नपूर्णा की कृपा से भरा रहे अन्न भंडार, अन्नपूर्णा जयंती पर भेजें ये शुभकामनाएं

भक्ति की ज्योति मन में जलती रहे,
अन्न की कृपा जीवन में फलती रहे.
मां अन्नपूर्णा भर दें हर झोली,

अन्नपूर्णा जयंती की शुभकामनाएं 2025


Annapurna Jayanti Wishes in Hindi: मां अन्नपूर्णा की कृपा से भरा रहे अन्न भंडार, अन्नपूर्णा जयंती पर भेजें ये शुभकामनाएं

अन्न की देवी का पावन है दिन,
घर-आंगन महके पुण्य के संग.
हर घर में रहे अन्न-धन की भरमार,

अन्नपूर्णा जयंती की शुभकामनाएं 2025

Annapurna Jayanti Wishes in Hindi: मां अन्नपूर्णा की कृपा से भरा रहे अन्न भंडार, अन्नपूर्णा जयंती पर भेजें ये शुभकामनाएं

मां अन्नपूर्णा की जयंती पर
हर घर में रहे अन्न की बरकत,
हर मन में रहे संतोष का दीप.
मां की कृपा से जीवन में कभी कमी न आए

आप सभी को अन्नपूर्णा जयंती की शुभकामना

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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पौष माह को कहते हैं छोटा पितृ पक्ष, इन विशेष तिथियों पर श्राद्ध करने पर दूर होता है पितृ दोष

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Paush Month 2025: मार्गशीर्ष माह की समाप्ति के बाद 5 दिसंबर 2025 से पौष माह शुरू हो जाएगा. धार्मिक ग्रंथों में पौष माह को छोटा पितृ पक्ष भी कहा गया है, इस माह में पितरों के निमित्त किया गया श्राद्ध कर्म, दान, तर्पण जातक को तमाम कष्टों से मुक्ति दिलाता है.

पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. पौष माह में मांगलिक कार्य निषिद्ध रहते हैं. पौष माह की पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में रहता है इसलिए इस माह को पौष माह कहा जाता है.

पौष माह पितरों के उपाय

  • पौष माह में पीपल के पेड़ के नीचे काला तिल डालकर दीपक जलाएं और पेड़ की परिक्रमा करें. इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष समाप्त होता है.
  • ब्राह्मणों को घर बुलाकर भोजन कराएं और दक्षिणा व वस्त्र दान करें, यह पितरों की आत्मा को तृप्त करता है.
  • पितृ स्तोत्र का पाठ करें. इससे भी पितर प्रसन्न होते हैं.पशु-पक्षियों को भोजन कराएं. श्रीमद् भागवत के गजेंद्र मोक्ष अध्याय का पाठ भी कर सकते हैं. शनिवार को काले कुत्ते को उड़द की रोटी खिलाएं. इससे पितृ दोष दूर होने की मान्यता है.
  • जिनके माता-पिता नहीं है पौष माह में उन्हें रोजाना नियमित रूप से एक लोटा जल में दूध और तिल मिलाकर तर्पण करना चाहिए. इस विधि को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करना आवश्यक होता है. ऐसा करने से आपके जीवन में सुख-शांति आ सकती है और दोगुनी तरक्की हासिल होती है.

किन तिथियों पर करें पितर पूजा

पौष माह में संक्रांति, अमावस्या, पूर्णिमा के दिन विशेषतौर पर पितरों की पूजा का विधान है. इससे पितर प्रसन्न होते हैं.

सूर्योपासना का महत्व

पौष मास में में सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करेंगे. जिसके चलते मांगलिक कार्यों पर कुछ समय के लिए रोक लग जाएगी. ज्योतिषियों के अनुसार इस माह को लेकर मान्यता है कि यदि इस माह में पितरों का पिंडदान किया जाए तो उन्हें वैकुंठ की प्राप्ति होती है. जो व्यक्ति इस माह में भगवान सूर्य को अर्घ्य देता है उसे बल, बुद्धि, विद्या, यश और धन की प्राप्ति होती है.

Pradosh Vrat 2026 Dates: साल 2026 के प्रदोष व्रत कब-कब ?

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स्किन पर दिखने वाले ये संकेत हो सकते हैं कोलन कैंसर के इशारे, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

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कोलन कैंसर यानी कोलोरेक्टल कैंसर दुनिया में तेजी से बढ़ने वाले कैंसरों में से एक है. आमतौर पर लोग इसके लक्षणों को पेट के दर्द, मल त्याग की आदतों में बदलाव और खून आने जैसे पाचन संबंधी संकेतों से जोड़ते हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कई बार यह बीमारी शरीर के सबसे बड़े अंग यानी स्किन पर भी अपने शुरुआती संकेत दिखा सकती है.

अगर स्किन पर रैशेज, गांठ, रंग बदलना या घाव जैसे बदलाव दिखाई दे तो इन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि स्किन पर दिखने वाले कौन से संकेत कोलन कैंसर की तरफ इशारा करते हैं और इन्हें नजरअंदाज करना कितना भारी पड़ सकता है.

स्किन पर कैसे असर डालता है कोलन कैंसर

स्किन अक्सर शरीर के अंदर चल रही कई समस्याओं को बाहर से दिखा देती है. कोलन कैंसर में स्किन पर बदलाव कई कारणों से हो सकते हैं, जिनमें कैंसर कोशिकाओं का फैलाव, शरीर की प्रतिरोधक क्रिया या कैंसर के उपचारों के असर शामिल होते हैं. यह बदलाव शरीर के धड़, हाथ या पैरों पर दिखाई दे सकते हैं और कभी हल्की लाली तो कभी-कड़ी गांठ है या खुले घाव की तरह दिख सकते हैं. एक्सपर्ट मानते हैं कि परिवार में कोलन कैंसर की हिस्ट्री होने पर या लाइफस्टाइल से जुड़े खतरों में आने पर लोगों को इन संकेतों पर और ध्यान देना चाहिए. वहीं समय रहते हैं लक्षणों को पहचान लेना इलाज को आसान बनाता है.

कोलन कैंसर से जुड़े सबसे आम स्किन लक्षण

  • कटेनियस नोड्यूल्स- कई बार कोलन कैंसर की कोशिकाएं स्किन पर फैलकर सख्त गांठें बना देती है. यह आकार में अलग-अलग हो सकती है और कभी-कभी दर्द भी कर सकती है. यह संकेत बताता है कि कैंसर अपनी मूल जगह से आगे फेल रहा है.

  • एरिथेमा और इन्फ्लेमेटरी रैशेज- एरिथेमा यानी स्किन पर लालिमा और सूजन कोलन कैंसर में शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया के कारण दिख सकता है. यह पैच थोड़ा उभरे हुए, गर्माहट वाले या खुजली जैसे लग सकते हैं और आम रैश की तरह दिखने पर भी लंबे समय तक बने रहते हैं.

  • स्किन अल्सर- कुछ लोगों में स्किन पर ऐसे घाव दिख सकते हैं जो आसानी से नहीं भरते हैं. यह शरीर में चल रही कैंसर संबंधी प्रक्रियाओं का परिणाम हो सकता है. वहीं इनका धीरे-धीरे बढ़ना या लगातार बना रहना चेतावनी भी हो सकती है.

  • हाइपरपिगमेंटेशन और डिस्कलरेशन- कुछ मामलों में स्किन का रंग गहरा हो सकता है. यह शरीर में मेटाबॉलिक बदलाव या कैंसर उपचारों का असर हो सकता है. यह बदलाव धीरे-धीरे धड़, हाथों या चेहरे पर दिखने लगते हैं.

  • एक्ने जैसे दाने या लगातार रहने वाले रैश- कुछ लोगों में मुंहासे जैसे दाने या फैलाव वाले रैश दिख सकते हैं जो सामान्य स्किनकेयर से ठीक नहीं होते हैं. यह भी कैंसर की बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं.

कोलन कैंसर के संभावित कारण जो स्किन पर डालते असर

  • कैंसर कोशिकाओं का स्किन तक फैलना- कई बार कैंसर ब्लड या लिंफ सिस्टम के जरिए स्किन तक पहुंचता है और वहां गांठें बना देता है. यह स्थिति कम होती है लेकिन गंभीर होती है.

  • कैंसर ट्रीटमेंट के साइडइफेक्ट- कीमोथेरेपी या टारगेटेड थेरेपी स्किन में सूखापन, लालिमा, दाने या एक्ने जैसे लक्षण पैदा कर सकते हैं.

  • इम्यून रिएक्शन और पैरानेओप्लास्टिक सिंड्रोम- कैंसर शरीर की प्रतिरोधक क्रिया को बदल देता है, जिससे स्किन पर मोटापा, लाल पैच या असामान्य रैश दिखाई दे सकते हैं. यह लक्षण कई बार पाचन संबंधी लक्षणों से पहले भी दिख जाते हैं.

  • मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल बदलाव- कैंसर शरीर के रासायनिक संतुलन को प्रभावित करता है, जिससे स्किन का रंग और टेक्सचर बदल सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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लड़कियों को बैड बॉय ही क्यों आते हैं पसंद? इसके पीछे की वजह जान लेंगे तो उड़ जाएंगे होश

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Why Women Prefer Confident And Dominant Men: आपने अक्सर सुना होगा कि लड़कियों को बैड बॉय  पसंद आते हैं. अक्सर इसको लेकर लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है कि लड़कियों को  बैड बॉय पसंद आते हैं. इसको लेकर कुछ एक्सपर्ट कहते हैं कि इनकी खासियत यह होती है कि इनके स्वभाव में आत्मविश्वास और आजादी की झलक मिलती है, जो महिलाओं को बेहद अट्रैक्ट करती है. इन पुरुषों की बेपरवाह मर्दानगी महिलाओं को भीतर तक खींच लेती है.

सॉइकोलॉस्टि बताते हैं कि “अक्सर ऐसी महिलाएं स्वभाव से थोड़ी झिझक वाली होती हैं या बाहरी दुनिया से घबराती हैं. इसलिए वे उन पुरुषों की ओर खिंचती हैं जो मजबूत लगते हैं, दुनिया से भिड़ने का दम रखते हैं और उन्हें सुरक्षा का एहसास दे सकें.” दबंग लड़कों का पूरा स्वभाव यही है कि आत्मविश्वास, बेफिक्री, रहस्य, रोमांच और हर काम का अलग अंदाज. इनके चलने-बोलने से लेकर खाने, पहनावे और लोगों से बातचीत तक हर जगह इनका खुद का तरीका होता है और अपनी साथी के मामले में इन्हें बखूबी पता होता है कि उसे किस तरह अच्छा महसूस कराना है. हालांकि जैसे-जैसे महिलाएं उम्र और अनुभव में आगे बढ़ती हैं, वे लंबे रिश्तों के लिए स्थिरता और भरोसे को ज्यादा महत्व देने लगती हैं.

लड़कियां को बैड बॉय लड़कों पर क्यों फिदा हो जाती हैं?

 आत्मविश्वास

सबसे पहला जो कारण है वह है कि इनका आत्मविश्वास. ये जो भी करते हैं, एक जबरदस्त आत्मविश्वास के साथ करते हैं. यह रवैया किसी भी महिला को तुरंत प्रभावित कर देता है.

 मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता वाला अंदाज

दूसरा सबसे बड़ा जो कारण है वे है कि ऐसे लड़के नियमों में बंधकर नहीं चलते, अपना रास्ता खुद बनाते हैं. उनका यही बेफिक्र स्वभाव महिलाओं को बेहद आकर्षक लगता है.

 उनका रोमांच और साहस भरा स्वभाव

इनके लिए जिंदगी किनारे पर जीने का नाम है. यह रोमांच महिलाओं को बेहद भाता है. उनकी यह बेपरवाह जंगलीपन लड़कियों के लिए चुंबक की तरह काम करता है.

मर्दानगी

यह सिर्फ शरीर की बात नहीं है, उनकी आवाज, चाल, बात रखने का तरीका सबमें एक मर्दाना मजबूती झलकती है, जो महिलाओं को बेहद पसंद आती है.

 साथ होने पर एक ताकत

इनके साथ रहने पर महिलाओं को अपने अंदर भी थोड़ा साहस और हिम्मत महसूस होने लगता है, जो अपने आप में नशे जैसा एहसास देता है.

 महिलाओं से बात करने की कला

उनका बातचीत का तरीका, सही समय पर सही बात कहना, बिना झिझक अपनी राय रखना, ये सब गुण उन्हें महिलाओं के लिए बेहद आकर्षक बना देते हैं.

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क्या डायपर पहनाने से खराब हो जाती है बच्चों की किडनी, जानें इस बात में कितनी हकीकत?

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जब भी किसी घर में बच्चे का जन्म होता है तो उस नवजात बच्चे के लिए शॉपिंग की लिस्ट में डायपर जरूर होता है. आज के समय में छोटे बच्चों को डायपर पहनाना हर पेरेंट्स के लिए जरूरी हो गया है, खासकर तब जब घर में कामकाज ज्यादा हो या यात्रा के दौरान डायपर की जरूरत होती है. लेकिन इसी के साथ एक डर भी पेरेंट्स के बीच बढ़ा है. क्या सच में लंबे समय तक डायपर पहनाने से बच्चे की किडनी पर बुरा असर पड़ता है? ये सवाल और उससे जुड़ी गलत जानकारी सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही है, जिसे सुनकर या पढ़कर हर माता-पिता परेशान हैं कि इस दावे की सच्चाई आखिर क्या है.

क्या सच में डायपर से बच्चे की किडनी खराब होती है?

हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे इस दावे में बताया गया है कि डायपर बच्चों को पहनाने से बच्चे की किडनी पर गलत असर पड़ता है. यह दावा बिल्कुल झूठा है. डॉक्टर्स के मुताबिक, जो किडनी होती है वो हमारे शरीर के काफी अंदर होती है, जिसके आगे मसल्स की पूरी एक लेयर होती है. अगर डायपर या कोई भी कपड़ा जब हम बच्चे को पहनाते हैं तो वो किसी भी हालत में किडनी तक नहीं पहुंच सकता. इसलिए यह दावा बिल्कुल बेबुनियाद है.

कैसे हो सकती है किडनी खराब?

डायपर रैश: लंबे समय तक गीला डायपर रहने से बच्चे की त्वचा लाल, जलनदार और त्वचा को नुकसान हो सकता है. लेकिन यह त्वचा की समस्या है, किडनी की नहीं.

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI): पेशाब के रास्ते में बैक्टीरिया के कारण होने वाला संक्रमण है, जिसमें सबसे आम रूप से मूत्राशय प्रभावित होता है. यह पूरी तरह बैक्टीरिया आधारित इंफेक्शन है और बच्चों में उम्र के अनुसार इसके लक्षण भी बदलते हैं.

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डायपर का सही इस्तेमाल कैसे करें ताकि कोई नुकसान न हो?

  • हर 3–4 घंटे में डायपर बदलें.
  • बच्चा बहुत छोटा है तो हर 2 घंटे में बदलना बेहतर है.
  • रात में सुपर-एब्जॉर्बेंट डायपर, दिन में कपड़े का नैपी.
  • इससे लगातार त्वचा को हवा मिलती रहती है.
  • हर बार डायपर पहनाने से पहले त्वचा को सूखने दें.
  • गीलापन किसी भी समस्या की सबसे बड़ी जड़ है.
  • डायपर रैश क्रीम या नारियल तेल का उपयोग.
  • यह बच्चे की त्वचा की सुरक्षा परत बनाता है.

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