नियमों की अनदेखी पर एक्शन में सेबी, 68 इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के रजिस्ट्रेशन रद्द

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SEBI Actions on Investment Advisors: पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने नवीनीकरण शुल्क का भुगतान नहीं करने पर गुरुवार को 68 निवेश सलाहकारों का पंजीकरण रद्द कर दिया. सेबी की नामित प्राधिकारी सोमा मजूमदार द्वारा जारी आदेश में कहा गया, “मध्यस्थ विनियम, 2008 के तहत नोटिस संख्या 1 से 68 तक के निवेश सलाहकारों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए जाते हैं.”

सेबी का सख्त कदम

जिन संस्थाओं का पंजीकरण रद्द किया गया है, उनमें ट्रू नॉर्थ लैब्स प्राइवेट लिमिटेड, इक्विटी मंत्रा, सौरभ मुंद्रा, शीतल अग्रवाल, अतीत हेमंत वाघ, गेटबासिस सिक्योरिटीज एंड टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ल्यूसिड टेक्नोलॉजीज और एवेन्यू वेंचर पार्टनर्स इन्वेस्टमेंट एडवाइजर एलएलपी जैसी कंपनियाँ और व्यक्तिगत सलाहकार शामिल हैं.

सेबी के निवेश सलाहकार (IA) विनियमों के अनुसार, प्रत्येक पंजीकृत निवेश सलाहकार को पंजीकरण की मंजूरी की तारीख से हर पाँच वर्ष में नवीनीकरण शुल्क जमा करना अनिवार्य है.

शो-कॉज नोटिस के बाद कार्रवाई

नियामक ने बताया कि इन संस्थाओं को बार-बार समयसीमा समाप्त होने की जानकारी देने के बावजूद उन्होंने शुल्क का भुगतान नहीं किया. फरवरी से जून के बीच सेबी ने इन्हें कई शो-कॉज नोटिस जारी किए थे. चूँकि इनका प्रमाणपत्र पहले ही समाप्त हो चुका था, इसलिए सेबी ने पंजीकरण रद्द करने को आवश्यक कदम बताया, ताकि पंजीकरण का गलत उपयोग करके निवेशकों को गुमराह करने की स्थिति न बने. मजूमदार ने आदेश में कहा कि नोटिसधारकों के प्रमाणपत्र पहले ही निष्क्रिय हो चुके हैं, इसलिए मध्यस्थ विनियम, 2008 के तहत इनके पंजीकरण रद्द किए जाते हैं.

दूसरी तरफ सेबी ने निवेश सलाहकारों (IA) और शोध विश्लेषकों (RA) के लिए शैक्षिक योग्यता मानदंडों में राहत दी है. अब किसी भी विषय में स्नातक करने वाले व्यक्ति इन दोनों श्रेणियों में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे. हालांकि, डोमेन ज्ञान और पेशेवर क्षमता बनाए रखने के लिए नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स (NISM) की प्रमाणन परीक्षा पास करना अनिवार्य रहेगा.

अभी तक पंजीकरण के लिए आवेदकों के पास वित्त, व्यवसाय प्रबंधन, वाणिज्य, अर्थशास्त्र या पूंजी बाजार जैसे वित्त-संबंधित क्षेत्रों में स्नातक/स्नातकोत्तर डिग्री होना आवश्यक था. नई व्यवस्था के अनुसार अब कानून, इंजीनियरिंग या किसी भी अन्य विषय से स्नातक उम्मीदवार भी निवेश सलाहकार और शोध विश्लेषक बनने के लिए पात्र होंगे.

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भारत के ग्रोथ पर IMF की मुहर, हाई टैरिफ लगाने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिखाया आईना

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India’s GDP Growth: भारतीय अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़ रही है और वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. अपनी रिपोर्ट में IMF ने कहा है कि जीएसटी सुधारों (GST Reforms) की वजह से भारत को अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत उच्च टैरिफ के प्रभाव का मुकाबला करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

IMF ने अपने कार्यकारी निदेशक मंडल द्वारा भारत के वार्षिक आकलन को पूरा करने के बाद बयान जारी किया. इसमें कहा गया कि भारत की अर्थव्यवस्था लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है. वित्त वर्ष 2024-25 की 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर के बाद, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी.

आर्थिक ग्रोथ बनाए रखने की क्षमता

IMF का कहना है कि भविष्य में विकसित अर्थव्यवस्था बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को व्यापक संरचनात्मक सुधारों से मजबूती मिल सकती है. यह दीर्घकालिक उच्च विकास दर का मार्ग प्रशस्त करेगा. IMF ने यह भी कहा कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद घरेलू परिस्थितियाँ अनुकूल बनी हुई हैं, जिसकी वजह से आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रहने की उम्मीद है.

IMF के अनुसार, यदि अमेरिका का 50 प्रतिशत टैरिफ लंबे समय तक जारी रहता है, तब भी वास्तविक जीडीपी वृद्धि वित्त वर्ष 2025-26 में 6.6 प्रतिशत रह सकती है. हालांकि, यह वित्त वर्ष 2026-27 में घटकर 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

जीएसटी सुधारों का सकारात्मक असर

IMF का मानना है कि जीएसटी सुधार और इसके परिणामस्वरूप टैरिफ दरों में कमी, अमेरिकी शुल्कों के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद करेंगे. अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जिसमें रूस से ऊर्जा आयात पर 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है.

भविष्य के जोखिम और अवसर

IMF ने चेताया कि निकट भविष्य में आर्थिक दृष्टिकोण के सामने कई जोखिम मौजूद हैं.

सकारात्मक पक्ष:

  • नए व्यापार समझौतों के लागू होने से निर्यात, निजी निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है.
  • संरचनात्मक सुधारों के तेजी से लागू होने से विकास दर को अतिरिक्त समर्थन मिलेगा.

नकारात्मक पक्ष:

  • वैश्विक आर्थिक बिखराव बढ़ने पर वित्तीय स्थितियाँ सख्त हो सकती हैं.
  • कच्चे माल की कीमतें बढ़ सकती हैं.
  • व्यापार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और आर्थिक वृद्धि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

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शेयर बाजार में ताबड़तोड़ तेजी, रिकॉर्ड हाई लेवल पर सेंसेक्स और निफ्टी; क्या है वजह?

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Share Market: तीन दिन की गिरावट के बाद बुधवार को शेयर बाजार में गजब की तेजी देखी गई. बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने अच्छी-खासी बढ़त हासिल की. मार्केट में तेजी का सिलसिला गुरुवार को भी बरकरार रहा. गुरुवार को कारोबार के दौरान दोनों इंडेक्स लाइफटाइम हाई लेवल पर पहुंच गए. जहां निफ्टी 26,300 के पार चला गया. वहीं, सेंसेक्स भी पहली बार 86,000 का आंकड़ा पार कर गया. सुबह 10:19 बजे निफ्टी 73 अंक या 0.28 परसेंट चढ़कर 26,278.00 पर कारोबार करता नजर आया. वहीं, सेंसेक्स 294 अंक या 0.34 परसेंट की बढ़त हासिल कर 85,903.02 के लेवल पर था. 

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि तीसरी तिमाही में कारोबारी नतीजे में सुधार की उम्मीद और बेहतर मैक्रोइकोनॉमिक माहौल के चलते शेयर बाजार में तेजी आई है. बैंकिंग और मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा ने ANI को बताया कि भारतीय शेयर बाजार 27 सितंबर, 2024 को अपने ऑल टाइम हाई लेवल 85978 के अचीव करने के लिए अच्छी स्थिति में है. अगर मार्केट इस लेवल के ऊपर बंद हुआ, तो बाजार के उन सेगमेंट्स में और तेजी से सुधार आने के रास्ते खुल सकते हैं, जिन्होंने पिछले 14 महीनों में खराब परफॉर्म किया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि FY26 की दूसरी छमाही में कॉर्पोरेट अर्निंग्स के कम होती महंगाई, उपभोग में सुधार, सपोर्टिव फिस्कल और मॉनेटरी पॉलिसीज से बेहतर होने की उम्मीद है. 

शेयर बाजार में आई तेजी की वजहें

  • शेयर बाजार में आई इस तेजी की एक वजह फेडरल रिजर्व से रेट कट की बढ़ती उम्मीदें भी हैं. अमेरिका के कमजोर कन्ज्यूमर डेटा ने अगले महीने ब्याज दर में कटौती होने की संभावना को और बढ़ा दिया है. CME ग्रुप के फेडवॉच डेटा के मुताबिक, 85 परसेंट लोगों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और जेरोम पावेल इंटरेस्ट रेट को कम कर देंगे. 
  • बुधवार को इंडेक्स की अच्छी शुरुआत से सेंसेक्स के लगभग सभी स्टॉक हरे निशान पर आ गए. शुरुआतीर कारोबार में अडानी पोर्ट्स को सबसे ज्यादा फायदा हुआ, जिसने 1.93 परसेंट की बढ़त हासिल की. इसके बाद एक्सिस बैंक 1.90 परसेंट तक चढ़ा, ट्रेंट 1.79 परसेंट, टाटा स्टील 1.74 परसेंट और बजाज फाइनेंस में भी 1.57 परसेंट की तेजी आई है.  बैंकिंग, मेटल और फाइनेंशियल स्टॉक्स में खरीदारी से सेंसेक्स को मजबूती मिली.
  • इसके अलावा, शुरुआती कारोबार के एक घंटे बाद निफ्टी मिडकैप 100 में 1.13 परसेंट की बढ़त देखी गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 ने 1.21 परसेंट की बढ़त हासिल की. सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान पर थे. निफ्टी मेटल में 1.93 परसेंट की बढ़त हुई, निफ्टी PSU बैंक में 1.60 परसेंट का उछाल आया, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स ने 1.56 परसेंट की बढ़त हासिल की, जबकि निफ्टी IT, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑटो और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई.
  • कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है, जिससे बाजार को और मजबूती मिली. ब्रेंट क्रूड 62.48 रुपये प्रति बैरल पर आ गया, जो 22 अक्टूबर के बाद का सबसे निचला लेवल है. इस बीच, पीस डील पर अमेरिका के साथ यूक्रेन की सहमति बनने के साथ रूस के साथ लड़ाई खत्म करने में मदद मिल सकती है. अगर सबकुछ ठीक रहा, तो रूसी एनर्जी पर से भी कुछ पाबंदियां हट सकती हैं, जिससे ग्लोबल लेवल पर सप्लाई बढ़ सकती है.
  • अगले महीने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक समिति की बैठक होने वाली है. मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक, इस बार भी रिजर्व बैंक रेपो रेट में 0.25 परसेंट की कटौती कर सकती है. इससे बैंकों को लोन पर ब्याज कम करने में मदद मिलेगी. 
  • बाजार के लिए एक और पॉजिटिव फैक्टर विदेशी निवेशकों की लगातार भारतीय शेयरों की खरीदारी है. कल कैश मार्केट में FIIs ने 4778 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर खरीद डाले. जबकि घरेलू निवेशकों ने 6247 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अभी घरेलू शेयर बाजार में और भी खरीदारी होगी.

 

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शेयर बाजार ने दिखाया दम, ऑल-टाइम हाई के करीब पहुंचा सेंसेक्स; निफ्टी भी 26000 के पार 

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Share Market Updates:  भारतीय शेयर बाजार की आज अच्छी शुरुआत रही. सुबह के कारोबार में BSE सेंसेक्स 134 पॉइंट्स या 0.16 परसेंट बढ़कर 85743 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि निफ्टी 50  60.85 पॉइंट्स बढ़कर 26,266.15 पर पहुंच गया, जो 14 महीने बाद इसका अचीव किया गया अब तक का नया हाई लेवल है.

वहीं, सेंसेक्स भी आज 27 सितंबर, 2024 को अपने ऑल टाइम हाई लेवल 85978 के काफी करीब है. यानी कि आज सेंसेक्स अपने ऑल टाइम हाई रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए 235 अंक दूर है. ग्लोबल संकेतों के मुताबिक आज सेंसेक्स 86000 के पार जा सकता है. अगर ऐसा हो गया, तो आज सेंसेक्स एक और नया इतिहास रच देगा.

टॉप लूजर्स और गेनर्स

गुरुवार को कारोबार के शुरुआती सेशन में सेंसेक्स के ज्यादातर स्टॉक हरे निशान में ट्रेड कर रहे थे. टॉप गेनर्स की लिस्ट में बजाज फाइनेंस का नाम सबसे पहले रहा, जो 1.03 परसेंट चढ़ा. इसके बाद ऐक्सिस बैंक ने 0.83 परसेंट की बढ़त हासिल की. लार्सन एंड टूब्रो 0.76 परसेंट, ICICI बैंक 0.71 परसेंट और एशियन पेंट्स का स्टॉक 0.60 परसेंट तक चढ़ा. वहीं, सबसे ज्यादा नुकसान इटरनल को हुआ, जो 0.70 परसेंट तक फिसल गया. टाइटन के शेयर में 0.28 परसेंट, मारुति के स्टॉक में 0.25 परसेंट, कोटक महिंद्रा बैंक में 0.19 परसेंट और अडानी पोर्ट्स में 0.18 परसेंट की गिरावट दर्ज की गई. 

ग्लोबल मार्केट में भी तेजी

एशियाई मार्केट में आज मजबूती देखी गई. जापान के निक्केई से लेकर साउथ कोरिया के कोस्पी तक में बढ़त देखने को मिली. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, ग्लोबल इक्विटी नवंबर के अपने नुकसान को खत्म करने के करीब हैं, MSCI ऑल कंट्री वर्ल्ड इंडेक्स लगातार पांचवें सेशन में बढ़ा है.

इधर, रातों-रात वॉल स्ट्रीट ने भी अच्छा कारोबार किया क्योंकि इंटरेस्ट रेट में संभावित कटौती को लेकर उम्मीदें बनी हुई हैं, जिससे निवेशकों में दिलचस्पी बनी रही. S&P 500 0.69 परसेंट चढ़ा, जबकि टेक्नोलॉजी-हैवी नैस्डैक 0.82 परसेंट की बढ़त हासिल की.

 

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धमाल मचा सकता है यह स्टॉक! कंपनी को मिला 798 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर, फोकस में शेयर

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Patel Engineering Shares: पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड (Patel Engineering Limited) के शेयर गुरुवार 27 नवंबर को फोकस में रहेंगे क्योंकि कंपनी को कई बड़े ऑर्डर मिले हैं. बुधवार को मार्केट खुलने के बाद कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसे सैडेक्स इंजीनियर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (Saidax Engineers and Infrastructure Private Limited) से दो ऑर्डर मिले हैं.

क्या है ऑर्डर? 

798.19 करोड़ रुपये के इस ऑर्डर में खुदाई से लेकर कम्पोजिट, रीहैंडलिंग से लेकर ओवरबर्डन को हटाने के काम शामिल हैं. इसके अलावा, सरफेस माइनर से कोयले की कटिंग, लोडिंग और ट्रांसपोर्टेशन के साथ-साथ प्लांट और जरूरी इक्विपमेंट को किराए पर लेना, मेनटेनेंस, डीजल की सप्लाई भी करनी होगी. इस पूरे काम को करने के लिए जरूरी स्टाफ और लेबर भी ऑर्डर का हिस्सा है.  

कब तक पूरा करना होगा काम?

ऑर्डर का टाइम पीरियड नौ साल है यानी कि कंपनी को यह पूरा काम नौ साल के भीतर निपटाना है. कंपनी ने यह भी बताया कि प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप की कंपनियां इस ऑर्डर का हिस्सा नहीं है.

इस पर बात करते हुए कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर कविता शिरवाइकर ने कहा, “ये नए प्रोजेक्ट्स हमारे बड़े पैमाने पर किए जाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के कामों का एक नैचुरल एक्सटेंशन हैं, जो और नए रास्ते भी खोलते हैं. खास बात यह है कि यह काम 34,000 करोड़ से ज्यादा के एक मजबूत टेंडर के अलावा है, जिसके लिए पहले ही बोली लग चुकी है और अब जिसका वैल्यूऐशन चल रहा है. साथ ही इस फाइनेंशियल ईयर के खत्म होने से पहले 18,000 करोड़ की भी बोली लगने की उम्मीद है.”

दूसरी तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन

कारोबारी साल 2026 की दूसरी तिमाही में पटेल इंजीनियरिंग का ऑपरेशन से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 1,208 करोड़ रुपये रहा, जो साल 2025 की सितंबर तिमाही के 1,174 करोड़ रुपये से 2.91 परसेंट ज्यादा है.

कंपनी का कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग EBITDA पिछले साल के 162 करोड़ के मुकाबले 2 परसेंट की मामूली गिरावट के साथ159 करोड़ रुपये रहा. इसके चलते, ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन पिछले साल के 13.81 परसेंट से घटकर इस बार 13.31 परसेंट रह गया, जबकि नेट प्रॉफिट भी एक साल पहले के 80.7 करोड़ से घटकर 77 करोड़ हो गया.

कंपनी के पास ऑर्डर 

जुलाई से सितंबर तिमाही के आखिर तक कंपनी का ऑर्डर बुक 15,146 करोड़ रुपये का रहा, जिसमें 62 परसेंट प्रोजेक्ट्स हाइड्रोइलेक्ट्रिक सेगमेंट के थे. कंपनी के पास अभी 9,373 करोड़ के 16 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट हैं, जिनमें सुबनसिरी HEP (2,000 MW), दिबांग मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट (2,880 MW), किरू HEP (624 MW), अरुण-III HE प्रोजेक्ट (900 MW), शोंगटोंग HEP (450 MW), और क्वार HEP (540 MW) जैसे वेंचर्स शामिल हैं.

 

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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Petrol-Diesel जल्द होगा बेहद सस्ता? Brent Crude $30 तक! भारत को हो सकती है ₹6 लाख करोड़ की बचत!|

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Petrol और Diesel जल्द ही काफी सस्ते हो सकते हैं, क्योंकि Global Bank JP Morgan का बड़ा अनुमान सामने आया है। बैंक के मुताबिक अगले तीन वर्षों में दुनिया में तेल की सप्लाई उसकी मांग से ज़्यादा होने वाली है। इसी वजह से मार्केट में Excess Brent Crude Oil रहेगा, जिससे इसकी कीमतें 50% तक गिरकर FY 2027 के अंत तक लगभग $30 पर आ सकती हैं। यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। कीमतों में भारी गिरावट का सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा। साल 2024 में भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट बिल ₹12 लाख करोड़ से ज़्यादा है। अगर Brent Crude $30 पर आ जाता है, तो भारत को लगभग ₹6 लाख करोड़ की भारी बचत हो सकती है। इस Demand-Supply असंतुलन की सबसे बड़ी वजह है Non-OPEC+ देशों की तेज उत्पादन क्षमता। 2027 तक बाजार में जितनी नई सप्लाई आएगी, उसका लगभग आधा हिस्सा OPEC+ देशों के बाहर से होगा। इससे global inventories तेजी से भर रही हैं। इस साल दुनिया में 1.5 million barrels per day की दर से तेल का स्टॉक बढ़ा है, जिसमें लगभग 1 million barrels जहाजों और चीन के रिजर्व में जमा है। अगर Brent Crude $30 तक गिरा—तो भारत, सरकार और आम आदमी—तीनों को बड़ा फायदा मिलेगा।

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मुद्रास्फीति अनुमान पर आरबीआई डिप्टी गवर्नर का बड़ा बयान, जानें क्या दी जानकारी

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Rbi Deputy Governor Statement: भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने बुधवार को कहा कि, हर अनुमान में त्रुटियों का जोखिम होता है, पर केंद्रीय बैंक के मुद्रास्फीति अनुमान में ‘व्यवस्था के स्तर पर पूर्वाग्रह’ वाली कोई बात नहीं है.

इस संदर्भ में कुछ तबकों में चिंताओं के बीच, गुप्ता ने कहा कि केंद्रीय बैंक अपने मुद्रास्फीति अनुमानों पर पहुंचने के लिए विभिन्न मॉडल और विशेषज्ञ चर्चाओं का उपयोग करता है और अनुमानों का गलत होना कोई सिर्फ यहां का मामला नहीं है बल्कि ‘वैश्विक घटना’ है. 

डिप्टी गवर्नर का बयान 

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक भुगतान संतुलन के आंकड़े मासिक आधार पर जारी करने पर भी विचार कर रहा है. वर्तमान में तिमाही आधार पर ये आंकड़ें जारी किए जाते हैं. वैश्विक व्यापार नीतियों में हो रहे व्यापक बदलाव के बीच उन्होंने यह बात कही. भुगतान संतुलन देश की बाह्य स्थिति के बारे में संकेत देता है.

उल्लेखनीय है कि मुद्रास्फीति अनुमान को लेकर चिंता आंकड़ों को अधिक दिखाने के अनुमान से उत्पन्न हुई है. इसके बारे में आलोचकों का तर्क है कि इसने आरबीआई को पिछले कुछ महीनों में नीतिगत दरों में और कटौती करने से रोका है. 

मीडिया में लेख पढ़ना ‘मजेदार

मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान पर आलोचनाओं को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा कि मीडिया में लेख पढ़ना ‘मजेदार’ है, और बातों को कठोरता से लिखा जाता हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि आरबीआई इन विचारों को बहुत गंभीरता से लेता है. आरबीआई के मौद्रिक नीति विभाग में अपने सहयोगियों के साथ बातचीत का हवाला देते हुए, गुप्ता ने कहा कि हर अनुमान में त्रुटियों का जोखिम होता है और ऐसा कोई भी पूर्वानुमान लगाने वाला नहीं है जो हर बार सही हो. 

यह दुनिया के अन्य देशों में भी होता है. उन्होंने बताया कि आरबीआई मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान लगाने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें सिद्ध मॉडल का उपयोग, ऐतिहासिक प्रतिरूप का उपयोग, सर्वेक्षण और मंत्रालयों और विश्लेषकों सहित संबंधित पक्षों से परामर्श लिया जाना शामिल है.

डिप्टी गवर्नर ने यह भी कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) पर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आगामी संशोधन भारतीय रिजर्व बैंक के लिए मददगार होंगे. 

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सेबी का बड़ा प्रस्ताव, निवेशकों के लिए दस्तावेज प्रक्रिया सरल बनाने की कही बात

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SEBI Proposal: सेबी ने प्रतिभूतियों की प्रतिलिपि जारी करने के लिए आवश्यक सरलीकृत दस्तावेज की मौद्रिक सीमा को मौजूदा पांच लाख रुपये से दोगुना करके 10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया है. इसका मकसद निवेशकों के लिए अनुपालन को आसान बनाना और दस्तावेजों में विसंगतियों को दूर करना है. 

सेबी का बयान 

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा, ‘‘दस्तावेजों के गैर-मानकीकरण और पंजीयक हस्तांतरण एजेंट (आरटीए) सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा अपनाए गए अलग-अलग तरीकों के कारण, निवेशकों को विभिन्न सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अलग-अलग दस्तावेज तैयार करवाने में परेशानी होती है.’’

नियामक ने यह भी कहा कि सरलीकृत दस्तावेज का लाभ उठाने के लिए मौजूदा पांच लाख रुपये की सीमा कई साल पहले निर्धारित की गई थी. तब से, देश का प्रतिभूति बाजार पूंजीकरण, निवेशक भागीदारी और औसत निवेश आकार के मामले में काफी आगे बढ़ गया है.

सरलीकृत होंगे दस्तावेज

सरलीकृत दस्तावेज व्यवस्था के तहत, निवेशकों को एफआईआर, पुलिस शिकायत, अदालती आदेश या अखबारों में विज्ञापन की प्रतियां दाखिल करने से छूट दी गई है. इस पर गौर करते हुए सेबी ने कहा कि व्यक्तिगत प्रतिभूति होल्डिंग्स का मूल्य काफी बढ़ गया है. परिणामस्वरूप, पहले की सीमा को बनाए रखना अब वर्तमान बाजार की वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं है और निवेशकों के लिए प्रक्रिया संबंधी बाधाएं पैदा करता है. 

सेबी ने अपने परामर्श पत्र में कहा, ‘‘उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए और निवेशकों को निवेश में आसानी और प्रक्रियात्मक सुविधा प्रदान करने के लिए, डुप्लिकेट यानी प्रतिलिपि प्रतिभूतियों के जारी करने के लिए सरलीकृत दस्तावेज व्यवस्था की सीमा पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है.’’ 

इस प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए, नियामक ने एक सामान्य हलफनामा-सह-क्षतिपूर्ति फॉर्म शुरू करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे प्रतिलिपि प्रतिभूतियां प्राप्त करने की लागत भी कम होगी. इसके अतिरिक्त, यह प्रस्ताव किया गया है कि निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण निधि प्राधिकरण द्वारा अपनाई गई गतिविधियों के अनुरूप, स्टाम्प शुल्क निवेशक के निवास राज्य के आधार पर लगाया जाए.

वर्तमान में, प्रतिलिपि प्रतिभूतियां जारी करने के लिए, निवेशकों को कई दस्तावेज देने की जरूरत होती है. इसमें प्रतिभूति और प्रमाणपत्र संख्या का विवरण देने वाली एफआईआर या पुलिस शिकायत की प्रतियां, समाचार पत्रों में विज्ञापन और गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर निष्पादित अलग-अलग हलफनामे और क्षतिपूर्ति बॉन्ड शामिल हैं.

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चीन पर निर्भरता घटाने की तैयारी, मोदी कैबिनेट ने 7,280 करोड़ रुपये की योजना को दी मंजूरी

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Rare Earth Permanent Magnets Scheme India: पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की मीटिंग में बुधवार, 26 नवंबर को रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स की मैन्युफैक्चरिंग को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया हैं. इसके तहत सरकार ने रेयर अर्थ के मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की एक नई स्कीम को मंजूरी देने का फैसला लिया हैं.

भारत में शुरू हो रही यह अपने तरह की पहली योजना है. सरकार का उद्देश्य देश में  6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की इंटीग्रेटेड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना करना है. इस संबंध में पिछले कुछ दिनों से बातचीत जारी थी. 

6,000 मीट्रिक टन होगा उत्पादन

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस स्कीम को लेकर जानकारी देते हुए कहा कि, ‘सिन्टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम’ की शुरुआत देश में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए की गई हैं.

इस पहल के तहत हर साल 6,000 मीट्रिक टन क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. जिससे भारत इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सके. इस योजना के तहत एक अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड REPM मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करने की योजना है. 

चीन है रेअर अर्थ का किंग

पूरी दुनिया में मौजूद रेयर अर्थ का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा चीन के नियंत्रण में आता है. भारत समेत दुनिया के कई देश रेयर अर्थ के लिए बहुत हद तक चीन पर निर्भर हैं. पिछले दिनों चीन ने रेयर अर्थ को लेकर प्रतिबंध की घोषणा की थी और निर्यात पर रोक लगा दिया था.

आंकड़ों की बात करें तो, वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत ने चीन से 870 टन रेयर अर्थ मैग्नेट्स आयात किया है. हालांकि, भारत सरकार के आज के इस कदम से पूरी उम्मीद की जा रही है कि, आने वाले समय में भारत की निर्भरता चीन पर कम होगी. साथ ही भारत इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकेगा. 

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शेयर बाजार में धमाकेदार उछाल! जानें 26 नवंबर की तेजी के पीछे क्या है तीन बड़ी वजहें

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Indian Stock Market Rally: भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार, 26 नवंबर को जबरदस्त तेजी देखने को मिली. दोनों ही प्रमुख बेंचमॉर्क इंडेक्स हरे निशान पर ट्रेड करते हुए बंद हुए. 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1022 अंक के तेजी के साथ 85,609 अंक पर बंद हुआ.

वहीं एनएसई निफ्टी 50 में भी तेजी दर्ज की गई. निफ्टी 320 अंक उछलकर 26,205 लेवल पर बंद हुआ. भारतीय शेयर बाजार में आई इस तेजी के पीछे यह कुछ कारण हो सकते हैं.

1. विदेशी निवेशकों ने की जबरदस्त खरीदारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार के कारोबारी दिन भारतीय बाजार पर भरोसा जताया हैं. जिससे बाजार को मजबूती मिली. आंकड़ों की बात करें तो, विदेशी निवेशकों ने पिछले सत्र में 785 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है. साथ ही घरेलू निवेशकों ने भी शेयर बाजार में जमकर पैसा लगाया है. घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 3,912 करोड़ रुपए की खरीदारी की. 

2. अमेरिकी फेड रिजर्व ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद

अमेरिका से आ रही संभावित फेडरल रिजर्व रेट कट की उम्मीद ने, भारतीय बाजार को मजबूती दी. फेडरल रिजर्व के दो अधिकारियों के बयान से ब्याज दर की कटौती की उम्मीद बढ़ गई हैं. साथ ही एशियाई बाजार में भी 1 फीसदी की तेजी की असर भारतीय शेयर बाजार में देखने को मिला. 

3. क्रूड ऑयल की कीमतों में आई गिरावट

वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. जिससे भारतीय बाजार में तेजी देखने को मिली. बुधवार को, क्रूड ऑयल की कीमत 63 डॉलर से नीचे आ गई. 
 
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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