नए लेबर कोड से सुधरेंगे कामगारों के हालात! जानें ऐसे 3 कानून जो बदल देगी उनकी जिंदगी

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New Labour Codes Benefits: केंद्र सरकार की ओर से मजदूरों, कर्मचारियों और गिग वर्करों आदि की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए 21 नवंबर को चार नए लेबर कोड लागू किए गए हैं. सरकार की ओर से 29 पुराने लेबर लॉ को इन 4 नए कानूनों में समाहित किया गया हैं. इस संबंध में सरकार का कहना हैं कि, इन कानूनों से वर्कर्स को बेहतर मेहनताना, सेफ्टी, सोशल सिक्योरिटी और उनके जीवन में महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलाव आएगा.

नए लेबर कोड से करीब 40 करोड़ कर्मचारियों को फायदा पहुंचने की उम्मीद सरकार कर रही हैं. साथ ही इन लेबर कोड का सबसे ज्यादा फायदा अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में काम करने वाले कामगारों को मिलेगा. जिसमें मुख्य रूप से डिलीवरी करने वाले गिग वर्कर्स, माइग्रेंट वर्कर्स, कॉन्ट्रैक्ट पर काम वाले ठेका मजदूर शामिल होंगे. आइए जानते है, उनकी जिंदगी में क्या-क्या बदलाव होंगे?

सबको मिलेगी न्यूनतम मजदूरी की गारंटी 

नए लेबर कोड के तहत न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दी गई है. चाहे कोई फैक्ट्री में काम करता हो, ऑफिस कर्मचारी हो और फिर गिग वर्कर, सभी को इसका लाभ मिलेगा. इससे पहले मिनिमम वेज कुछ शेड्यूल्ड इंडस्ट्रीज तक सीमित थी. सरकार ने इसमें बदलाव करते हुए, नेशनल फ्लोर वेज सेट करेगी.

एक साल के काम के बाद मिल सकेगी ग्रेच्युटी

नए लेबर कोड के तहत, सरकार ने  फिक्स्ड टर्म या कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की वेटिंग अवधि को घटाकर एक साल करने का फैसला लिया है. इससे पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए कर्मचारियों को 5 साल तक लगातार किसी कंपनी में काम करना होता था. यानी कि अगर कोई व्यक्ति किसी कंपनी में 1 साल तक लगातार काम करता हैं तो, वह ग्रेच्युटी की मांग कर सकता हैं. 

सबको मिलेगा अपॉइंटमेंट लेटर

नए लेबर कानूनों के मुताबिक, हर नियोक्ता को कर्मचारियों को ज्वाइनिंग के समय लिखित अपॉइंटमेंट लेटर देना होगा. इस कदम के पीछे सरकार का उद्देश्य कंपनियों के मनमानी को कम करना और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना हैं.   

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भारत बनेगा गोल्ड मार्केट का बादशाह? घरेलू खनन से मिल सकती हैं कीमत तय करने की ताकत

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India Gold Mining Production: भारत अगले दशक में घरेलू खनन के जरिये अपनी स्वर्ण मांग का लगभग 20 प्रतिशत पूरा कर सकता है, जिससे वह वैश्विक बाजार में ‘प्राइस-मेकर’ बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा. स्वर्ण उद्योग के विशेषज्ञों ने शुक्रवार को यह बात कही.

विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) के भारत क्षेत्र के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सचिन जैन ने यहां रत्न एवं आभूषण सम्मेलन में कहा कि, पर्याप्त घरेलू खनन और मजबूत स्वर्ण बैंकिंग प्रणाली के अभाव में भारत अभी तक वैश्विक कीमतों का ‘प्राइस-टेकर’ बना हुआ है.

प्राइस मेकर बनने की रुख करेगा भारत

उन्होंने उद्योग मंडल ‘चैंबर ऑफ कॉमर्स ऑफ इंडिया’ (सीसीआई) के सम्मेलन में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की पहल और बैंकिंग प्रणाली के विकास के साथ भारत की वैश्विक स्वर्ण कीमतों पर पकड़ मजबूत होगी और यह ‘प्राइस मेकर’ बनने का रुख करेगा.

भारत अभी सोने की कीमतें खुद तय नहीं करता है और वह विदेशी बाजारों में तय होने वाली कीमतों को मानने के लिए मजबूर होने की वजह से ‘प्राइस-टेकर’ है. लेकिन घरेलू स्तर पर सोने का खनन बढ़ने से वह इसकी कीमतों को भी प्रभावित या तय करने की क्षमता हासिल कर लेगा, जो कि प्राइस-मेकर होगा. 

आदित्य बिड़ला समूह की नोवेल ज्वेल्स के सीईओ  का बयान

आदित्य बिड़ला समूह की नोवेल ज्वेल्स के सीईओ संदीप कोहली ने बताया कि, भारतीय उपभोक्ताओं के पास करीब 25,000 टन सोना है, जबकि सरकार के पास केवल 800 टन सोना मौजूद है. उन्होंने कहा कि, भारत में सोने की इतनी बड़ी खपत होने के बावजूद उपभोक्ता कीमतों पर भारतीय बाजार का प्रभाव सीमित है. इस दौरान एमएमटीसी-पीएएमपी इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ समित गुहा ने पारदर्शिता, नैतिक और संघर्ष-मुक्त सोने की आपूर्ति को अनिवार्य बताया. 

उन्होंने कहा कि, वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए ओईसीडी और एलबीएमए जैसे मानकों को अपनाना जरूरी है. गुहा ने 24 कैरेट सोने की ईंट एवं सिल्ली के निर्यात पर लगाई पाबंदी हटाने की जरूरत भी जताई. आरबीआई ने वित्त वर्ष 2012-13 में इसके निर्यात पर पांबदी लगाई थी. 

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‘21000 निवेश करके हर महीने कमाओ डेढ़ लाख’, क्या है निर्मला सीतारमण के वायरल वीडियो की सच्चाई?

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Nirmala Sitharaman Viral Video: आधुनिकता के इस जमाने में सैकड़ों लोग रोजाना फ्रॉड के शिकार हो रहे हैं. किभी किसी योजना के नाम पर तो कभी पैसों का लालच देकर लोगों को ठगा जा रहा है. इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वह एक ऐसी निवेश योजना का प्रचार कर रही हैं, जो ₹21000 के निवेश पर सिर्फ एक महीने में ₹1.5 लाख रिटर्न की गारंटी देती है. जानिए इस वीडियो की सच्चाई क्या है. 

क्या है दावे की सच्चाई?

पीआईबी ने उच्च रिटर्न का वादा करने वाले इस वीडियो की पड़ताल की है. पीआईबी ने बताया है कि यह वीडियो पूरी तरह से नकली है और एआई से बनाया गया है. पीआईबी के मुताबिक, वित्त मंत्री ने इस तरह की किसी भी योजना से संबंधित कोई घोषणा नहीं की है. भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस तरह का रिटर्न प्रदान करने वाली कोई भी निवेश योजना किसी भी सरकारी प्राधिकरण ने शुरू नहीं की है.

सरकार ने लोगों से अपील की 

सरकार ने नागरिकों से ऑनलाइन वित्तीय सामग्री से जुड़ते समय ज्यादा सावधानी बरतने का आह्वान किया है. इसने लोगों को केवल सरकारी वेबसाइटों, प्रेस विज्ञप्तियों या विश्वसनीय समाचार प्लेटफार्मों पर प्रकाशित सत्यापित घोषणाओं पर निर्भर रहने की सलाह दी है. कम समय में बहुत ज्यादा रिटर्न का वादा करने वाले किसी भी निवेश को रेड फ्लैग माना जाना चाहिए.

(याद रखें : यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से दी गई है. यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि बाजार में निवेश करना जोखिम भरा है. एक निवेशक के रूप में धन का निवेश करने से पहले हमेशा एक विशेषज्ञ से सलाह लें. ABPLive.com कभी भी किसी को यहां धन निवेश करने की सलाह नहीं देता है. यहां केवल शिक्षा के उद्देश्य से शेयर बाजार से संबंधित खबरें दी जाती हैं. हम किसी भी शेयर के बारे में कॉल या टिप नहीं देते हैं.)



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भारत के जीडीपी डेटा पर IMF की कड़ी टिप्पणी, नेशनल अकाउंट्स आंकड़ों को दिया C ग्रेड

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IMF India GDP Data Quality: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की हैं. आईएमएफ ने अपने सालाना रिव्यू में भारत के राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों में गंभीर खामियां बताते हुए इसे सी ग्रेड में रखा है. अगर आंकड़ों की क्वालिटी की बात करें तो, यह दूसरा सबसे खराब स्तर माना जाता है.

आईएमएफ ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब आज, 28 नवंबर को भारत सरकार की इस वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े सामने आने वाले हैं. अनुमान लगा जा रहा है कि, भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 7 प्रतिशत से आगे बढ़ सकती हैं. आइए जानते हैं आईएमएफ ने इसको लेकर क्या कहा हैं…….

आईएमएफ का बयान

द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, आईएमएफ ने उपलब्ध आंकड़ों में कुछ कमियां बताई है. बतौर आईएमएफ आर्टिकल IV (असेसमेंट ऑफ इकोनॉमिक फ्रेमवर्क) के मुताबिक, भारत के नेशनल अकाउंट्स से संबंधित डेटा समय पर उपलब्ध होते हैं और इनसे पर्याप्त जानकारी भी मिलती है.

हालांकि, इसे निकालने की कार्यप्रणाली में कमियों के कारण भारतीय राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों को सी ग्रेड में रखा गया है. इसके साथ ही आईएमएफ ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) को बी ग्रेड दिया है. भारत में मुद्रास्फीति का पता लगाने वाला यह सबसे बड़ा सूचकांक हैं आईएमएफ ने ओवरऑल सभी डेटा कैटेगरी को बी ग्रेड में रखा है.

क्या है ग्रेड A, B, C और D ?

ग्रेड A का मतलब होता है कि, किसी देश का आर्थिक आंकड़ा अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से बिल्कुल सही ढंग से तैयार किया गया है. यानी जो भी डेटा उपलब्ध करवाया गया है, वह ग्लोबल लेवल की जरूरतों को पूरा करता है. वहीं ग्रेड B यह बताता है कि, डेटा में थोड़ी बहुत कमियां जरूर हैं, लेकिन कुल मिलाकर इस डेटा की मदद से हालात पर नजर बनाई जा सकती है.

ग्रेड C मिलने का मतलब है कि, डेटा तैयार करने के तरीके में कुछ गलतियां हैं, जिनकी वजह से IMF को सही ढंग से निगरानी करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. जबकि ग्रेड D सबसे कमजोर कैटेगरी में आता है, जो दिखाती है कि डेटा अंतरराष्ट्रीय बेसिक स्टैंडर्ड को पूरा नहीं करती. जिसका मतलब है कि, डेटा पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

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बिटकॉइन में दिखी रिकवरी, निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें, क्या कीमतों में आएगी और तेजी?

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Crypto Market Recovery: क्रिप्टो करेंसी बाजार में बहुत तेजी से उतार-चढ़ाव देखने को मिलता हैं. पिछले कुछ दिनों से क्रिप्टो लगातार टूट रही थी. हालांकि, अब इसमें सुधार दिख रहा है. दुनिया की सबसे बड़ी और पुरानी क्रिप्टो करेंसी पिछले कुछ दिनों से अपने 7 महीने के रिकॉर्ड को तोड़कर 90,000 डॉलर से नीचे ट्रेड कर रही थी, वापस से 90 हजार डॉलर के ऊपर पहुंच गई है.

बीते 2-3 कारीबारी दिनों से इसकी रौनक लौट रही है. भारतीय बाजार के साथ-साथ अमेरिकी बाजार में भी पॉजिटिव ट्रेंड देखने को मिल रहा हैं. निवेशकों के मन अब भी ये सवाल हैं कि, क्या क्रिप्टो बाजार में फिर से तेजी आएगी या फिर ये शॉर्ट टर्म के लिए आई एक रौनक हैं ?

बिटकॉइन की कीमतों में क्यों हुआ इजाफा

बिटकॉइन की कीमतों में पिछली गिरावटों की तुलना में हल्की तेजी देखने को मिल रही है. बाजार जानकारों के अनुसार यह तेजी शॉर्ट स्क्वीज की वजह से आई हो सकती हैं. साथ ही पिछले 2 दिनों में  BTC ETF में निवेशकों ने भरोसा जताया हैं. जिससे संकेत मिल रहे हैं कि, निवेशकों की दिलचस्पी दोबारा से क्रिप्टो में बढ़ रही हैं.

साथ ही अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दर कटौती की उम्मीद भी बढ़ी है. जिससे कारण बिटकॉइन बाजार हरे निशान पर रहने की उम्मीद जताई जा रही हैं. coinmarketcap के अनुसार, पिछले 7 दिनों में बिटकॉइन करीब 7 फीसदी तक उछल गई है. खबर लिखे जाने तक, बिटकॉइन 91,305 डॉलर पर कारोबार कर रही थी. 

क्रिप्टो बाजार का आज का हाल 

coinmarketcap के मुताबिक, 28 नवंबर की दोपहर 12:30 बजे बिटकॉइन 91,342 डॉलर पर कारोबार कर रही थी. पिछले 24 घंटे की तुलना करें तो, इसमें 0.10 प्रतिशत की तेजी दर्ज की जा रही थी. वहीं एथेरियम 3,010 डॉलर पर ट्रेड कर रही थी. एथेरियम में 0.60 फीसदी की गिरावट दिख रही थी. सोलाना क्रिप्टो करेंसी  करीब 139 डॉलर पर कारोबार कर रही थी. 

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद आज सपाट खुला शेयर बाजार, 26000 के स्तर से ऊपर बना हुआ निफ्टी

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Share Market Updates: पिछले तीन दिनों से अपनी बढ़त बरकरार रखने के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की सपाट शुरुआत हुई. निफ्टी 50 26,237.5 अंक पर खुला, जबकि BSE सेंसेक्स थोड़ा बढ़कर 85,791 अंक पर कारोबार की शुरुआत की.

हालांकि, फ्लैट शुरुआत के बावजूद बेंचमार्क इंडेक्स FMCG, मेटल और दूसरे सेक्टर के स्टॉक्स के सपोर्ट से ऊपर चढ़ते रहे. निफ्टी के टॉप गेनर्स में महिंद्रा एंड महिंद्रा, रिलायंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, हिंडाल्को, टाइटन, अडानी एंटरप्राइजेज जैसी कंपनियों के शेयर शामिल रहे. 

ग्लोबल मार्केट का क्या है हाल? 

शुक्रवार को एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार हुआ. जापान का निक्केई 225 खुलने पर 0.15 परसेंट फिसला, जबकि टॉपिक्स में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ. साउथ कोरिया के कोस्पी में 0.61 परसेंट की गिरावट आई, जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 थोड़ा ऊपर ट्रेड कर रहा था.

वहीं अगर वॉल स्ट्रीट की बात करें, तो डाउ जोन्स फ्यूचर्स ने 10 पॉइंट्स की बढ़त हासिल की, जबकि S&P 500 और नैस्डैक 100 फ्यूचर्स फ्लैटलाइन के ठीक ऊपर रहे.  नवंबर में US के बड़े इंडेक्स कमजोर स्थिति में रहने वाले हैं क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों की कमाई के आउटलुक को लेकर नई चिंताओं के बीच टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में गिरावट से उन पर दबाव पड़ा है. थैंक्सगिविंग की वजह से गुरुवार को US में मार्केट बंद रहा और शुक्रवार को छोटे सेशन में काम करेंगे. 

निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में गिरावट

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा, ”भले ही सेंसेक्स और निफ्टी ने कल नई ऊंचाइयों को छुआ, लेकिन निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स अपने पीक से लगभग 9 परसेंट नीचे है. यह अंडरपरफॉर्मेंस मुख्य रूप से इस सेगमेंट की खराब अर्निंग्स ग्रोथ और ज्यादा वैल्यूएशन के कारण है. आम तौर पर, स्मॉलकैप्स के शॉर्ट-टर्म से मीडियम-टर्म में अंडरपरफॉर्म करते रहने की संभावना है.”

 

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क्या अब तक नहीं मिल पाया है Income Tax Refund? अकाउंट में कब तक आएंगे पैसे? चेक करें Status

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ITR Refund: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद लोगों को रिफंड मिलने का बेसब्री से इंतजार रहता है. वैसे तो फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए ITR फाइल करने वालों में से अधिकतर को रिफंड इश्यू कर दिया गया है, लेकिन कई टैक्सपेयर्स ऐसे भी हैं, जिनके अकाउंट में रिटर्न का पैसा अभी तक नहीं आया है. पेमेंट मिलने में हो रही इतनी देरी की आखिर क्या वजह है?  

सोमवार को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कहा कि कुछ रिफंड क्लेम को ज्यादा ध्यान से रिव्यू किया जा रहा है क्योंकि वे ‘हाई-वैल्यू’ या ‘रेड-फ्लैग्ड’ की कैटेगरी में आते हैं. इन मामलों में आमतौर पर कुछ डिडक्शन के लिए रिक्वेस्ट शामिल होती हैं, जिन्हें अप्रूवल से पहले एक्स्ट्रा चेक करने की जरूरत होती है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) के अनुसार, सभी सही रिफंड दिसंबर 2025 तक जारी होने की उम्मीद है. 

कैसे चेक करेंगे क्लेम स्टेटस? 

अगर आपने अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) पहले ही फाइल कर दिया है और रिफंड के लिए एलिजिबल हैं, तो अब आप अपने परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) का इस्तेमाल करके ऑनलाइन इसका स्टेटस चेक कर सकते हैं. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स को ई-फाइलिंग पोर्टल और NSDL-TIN वेबसाइट के जरिए ऐसा करने की इजाजत देता है.

सबसे पहले आपको इनकम टैक्स की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा और यूजर आईडी और पासवर्ड से लॉगिन करना होगा. यहां आपको ई-फाइल वाली कैटेगरी में Income Tax Return का ऑप्शन मिलेगा. यहां View Filed Return पर क्लिक करने के साथ आपको आपका क्लेम स्टेटस दिख जाएगा. रिफंड क्रेडिट होने से पहले यह पक्का करना जरूरी है कि आपका बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेटेड हो, आपका रिटर्न सही तरीके से फाइल किया गया हो और आपका ITR ई-वेरिफाइड हो. 

एक क्लिक से मिल जाएगी पूरी जानकारी

NSDL-TIN की वेबसाइट पर आप अपने रिफंड को ट्रैक कर सकते हैं. अपना PAN डालने और असेसमेंट ईयर चुनने के बाद पेज पर रिफंड की डिटेल्स दिखेंगी, जिसमें यह भी शामिल होगा कि रिफंड जारी हुआ है या नहीं, अमाउंट और इस्तेमाल किया गया तरीका—चेक या NEFT. इस बीच, जैसे-जैसे डिपार्टमेंट अपनी जांच जारी रखेगा, टैक्सपेयर्स अपने रिफंड स्टेटस को ऑनलाइन ट्रैक करके जानकारी पा सकते हैं ताकि कोई भी अपडेट मिस न हो जाए.

 

 

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क्या AI एक बुलबुला है जो किसी भी वक्त फट सकता है, क्यों इससे किया जा रहा सावधान?

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AI Bubble Fears: तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी की दुनिया में एआई के आने से बड़ा उतार–चढ़ाव देखने को मिल रहा है. एक ओर कंपनियों ने हजारों कर्मचारियों की छंटनी की, तो दूसरी ओर एआई में भारी निवेश किए जा रहे हैं. इससे साफ है कि आने वाले समय में काम करने के तरीके बदलने वाले हैं. लेकिन एआई को लेकर चेतावनियां भी लगातार सामने आ रही हैं—इसे एक ऐसा ‘बुलबुला’ कहा जा रहा है, जो किसी भी समय फट सकता है. तकनीक जगत के कई विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि एआई में बबल बनने की संभावना है.

क्यों एआई को बताया जा रहा ‘बुलबुला’?

हाल ही में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने उपयोगकर्ताओं को एआई के इस्तेमाल को लेकर सावधान किया. उन्होंने कहा कि एआई पर आंख मूंदकर भरोसा न करें. साथ ही, उन्होंने एआई में निवेश करने वाली कंपनियों को भी सतर्क रहने की सलाह देते हुए इसे एक ऐसा बबल बताया, जो अगर फटा, तो किसी को भी बचने का मौका नहीं मिलेगा.

ओपनएआई के संस्थापक सैम ऑल्टमैन और माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने भी इसी तरह की चेतावनियां दी हैं. एआई की तुलना 2000 के डॉट कॉम बबल से की जा रही है—जब इंटरनेट के उभार को लेकर बहुत उत्साह था, निवेश तेज़ी से बढ़ रहे थे, लेकिन अचानक बबल फट गया और निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. आज एआई को लेकर वही अति-उत्साह दिखाई दे रहा है, इसलिए बबल की चर्चा तेज़ है.

क्या एआई बबल के दावे में दम है?

एआई की वजह से स्टॉक मार्केट में टेक कंपनियों के शेयरों में तेज़ उछाल आया है. बाज़ार विशेषज्ञों की आशंका है कि अगर यह बबल फटता है, तो वैश्विक शेयर बाजारों पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ सकता है. एक बड़ा सवाल यह है कि एआई के प्रमुख रूप से उभरने को तीन साल हो चुके हैं, फिर यह बहस अब क्यों? दरअसल, यह चर्चा कई कंपनियों की ताजा रिपोर्टों के बाद बढ़ी है.

अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्टेड बड़ी सात कंपनियां—Apple, Microsoft, Google, Meta, Tesla आदि—कुल मार्केट कैप का लगभग 34% हिस्सा अकेले रखती हैं. पिछले साल जिन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी आई, उनमें से आधे से अधिक इन्हीं कंपनियों के थे. इसलिए इन कंपनियों में गिरावट का सीधा असर पूरे शेयर बाजार पर पड़ेगा.

एआई सीखना और इस्तेमाल करना ज़रूरी है, लेकिन केवल एआई मॉडल्स या एआई-संचालित भविष्यवाणियों के भरोसे निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है. यदि यह एआई बबल वास्तव में फटता है, तो भारी नुकसान होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

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रिकॉर्ड हाई पर जाने के बाद फिसला बाजार, सपाट के साथ बंद, जानें कल कैसी रहेगी चाल

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Stock Market News: घरेलू शेयर बाजार गुरुवार को सर्वकालिक ऊंचाई छूने के बाद फिसलकर अंत में लगभग सपाट रुख के साथ बंद हुआ. बीएसई का 30-शेयरों वाला सेंसेक्स 111 अंक की हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 50 भी 10 अंकों की बढ़त लेकर सत्र समाप्त कर गया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 446.35 अंक उछलकर 86,055.86 के अपने नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था.

सपाट बंदी का दिन

सेंसेक्स का पिछला सर्वकालिक उच्च स्तर 27 सितंबर 2024 को 85,978.25 अंक रहा था. निफ्टी भी सत्र के दौरान 105.15 अंक तेजी के साथ 26,310.45 के नए शिखर तक पहुंचा, लेकिन अंत में महज 10.25 अंक (0.04%) की बढ़त के साथ 26,215.55 पर बंद हुआ. निफ्टी का पिछला रिकॉर्ड स्तर भी 27 सितंबर 2024 का था, जब यह 26,277.35 अंक तक गया था.

यह लगातार दूसरा ट्रेडिंग सत्र था जब बाजार में तेजी दिखी. बुधवार को सेंसेक्स 1,022.50 अंक और निफ्टी 320.50 अंक उछला था. गुरुवार को सेंसेक्स की कंपनियों में बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फिनसर्व, एचसीएल टेक और एचडीएफसी बैंक के शेयर सबसे ज्यादा मजबूत रहे. दूसरी ओर, मारुति, इटर्नल, अल्ट्राटेक सीमेंट और एसबीआई के शेयरों में गिरावट देखी गई.

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि उतार-चढ़ाव वाले सत्र में निफ्टी और सेंसेक्स ने अस्थायी रूप से नए रिकॉर्ड को छुआ, लेकिन दूसरे हिस्से में मुनाफावसूली बढ़ने से बढ़त सीमित रह गई. बीएसई स्मॉल-कैप इंडेक्स 0.38% टूटा, जबकि मिड-कैप इंडेक्स 0.01% फिसला.

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. के अनुसार, अमेरिका में ब्याज दर में कटौती की उम्मीदों से वैश्विक जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ है, जिसका लाभ भारतीय बाजारों को मिला.

शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को एफआईआई ने 4,778.03 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि डीआईआई ने 6,247.93 करोड़ रुपये की खरीदारी की. इस कैलेंडर वर्ष में अब तक सेंसेक्स 7,581.37 अंक (9.70%) और निफ्टी 2,570.75 अंक (10.87%) चढ़ चुके हैं.

एशियाई बाजार—दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग—सकारात्मक दायरे में बंद हुए. यूरोपीय बाजार दोपहर के कारोबार में हल्की बढ़त पर थे. अमेरिकी बाजार भी बुधवार को तेजी के साथ बंद हुए थे. इस बीच ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.05% गिरकर 63.10 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.

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डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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अडानी ग्रुप ने उठाया बड़ा कदम, फ्लाइट ट्रेनिंग कंपनी FSTC पर लगाया 820 करोड़ रुपये का बड़ा दांव

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Adani Defence: इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी और पोर्ट डेवलपमेंट के बाद अब अडानी ग्रुप डिफेंस सेक्टर में भी अपनी पकड़ मजबूत बना रहा है. इसी क्रम में अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (ADSTL) ने प्राइम एयरो सर्विसेज LLP के साथ मिलकर फ्लाइट सिमुलेशन टेक्निक सेंटर प्राइवेट लिमिटेड ( FSTC ) में बहुमत हिस्सेदारी (मेजोरिटी स्टेक) खरीदने का ऐलान कर दिया है. इस डील की कुल कीमत 820 करोड़ रुपये बताई जा रही है. यह देश के फ्लाइट ट्रेनिंग सेक्टर की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है. 

पायलट को दी जाती है ट्रेनिंग

FSTC एक ऐसी कंपनी है, जो पायलट को फ्लाइट चलाने की ट्रेनिंग प्रोवाइड करती है. यह देश की सबसे बड़ी और इंडिपेंडेंट फ्लाइट ट्रेनिंग और सिमुलेशन सेंटर है. FSTC के पास 11 फुल-फ्लाइट सिमुलेटर और 17 ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट हैं, जिसके जरिए कमर्शियल पायलट लाइसेंस से लेकर टाइप रेटिंग रिकरंट ट्रेनिंग और स्पेशल स्किल्स प्रोग्राम जैसे ट्रेनिंग प्रोग्राम्स चलाता है.

कंपनी DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) और EASA (यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी) से सर्टिफाइड है, जो गुरुग्राम और हैदराबाद में अपना सिमुलेशन सेंटर चलाती है. आने वाले समय में इसमें और विस्तार होने की संभावना है. इसके अलावा, कंपनी हरियाणा के भिवानी और नारनौल में भारत के सबसे बड़े फ्लाइंग स्कूलों में से एक भी चलाती है. 

क्यों अहम मानी जा रही यह डील? 

भारत का डिफेंस पायलट ट्रेनिंग इकोसिस्टम तेजी से उभर रहा है क्योंकि आने वाले समय में इसमें अपार संभावनाएं हैं. ऐसे में सिम्युलेटर-बेस्ड ट्रेनिंग में खर्च कम आता है और  सेफ्टी और एफिशिएंसी बेहतर होती है. FSTC ने डिफेंस और सिविल दोनों डोमेन में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की कोशिश में जुटी हुई है.

अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के CEO आशीष राजवंशी ने कहा, ”यह एक्विजिशन पूरी तरह से इंटीग्रेटेड एविएशन सर्विसेज प्लेटफॉर्म बनाने की हमारी स्ट्रैटेजी का अगला कदम है. FSTC के एयर वर्क्स और इंडैमर टेक्निक्स में शामिल होने से अब हम सिविल MRO, जनरल एविएशन MRO [मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल], डिफेंस MRO और फुल-स्टैक फ्लाइट ट्रेनिंग में कस्टमर्स को सर्विस दे सकते हैं.”

उन्होंने आगे कहा, ”भारत में एयरलाइंस आने वाले सालों में 1,500 से ज्यादा नए विमान शामिल करने की योजना बना रही हैं. साथ ही, आर्म्ड फोर्सेज के लिए एडवांस्ड ट्रेनिंग और मिशन रिहर्सल पर सरकार का जोर डिफेंस सिमुलेशन में नए मौके पैदा करता है. एक सुरक्षित देश बनाने में मदद करने की हमारी फिलॉसफी के हिसाब से हमारा मकसद इंडियन डिफेंस पायलटों की अगली पीढ़ी को सपोर्ट करना है.”

 

 

 

 

 

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