मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी की घोषणा की

गुजरात को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का पावर हाउस बनाने की राज्य सरकार की मंशा
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मल्टीलेयर तथा एचडीआई प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, लिथियम आयन सेल, डिसप्ले एंड कैमरा मॉड्यूल्स, एसएमडी पैसिव कम्पोनेंट्स, इलेक्ट्रो मैकेनिकल पार्ट्स तथा उसके उत्पादन के लिए आवश्यक विशेष मशीनरी आदि के उद्योगों को राज्य में आकर्षित करने के लिए पॉलिसी में अनेक प्रोत्साहन
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पॉलिसी का लाभ लेने के लिए आवेदन 31 जुलाई 2025 तक किए जा सकेंगे
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* केन्द्र सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) अंतर्गत मंजूर हुए प्रोजेक्ट्स को गुजरात में प्रोजेक्ट स्थापना के लिए केन्द्रीय सहायता की 100 प्रतिशत सहायता प्राप्त होगी
* केन्द्रीय मंत्रालय मान्यता प्राप्त प्रोजेक्ट्स को एक ही मान्यता से केन्द्र-राज्य का दोहरा सहायता प्रोत्साहन लाभ मिलेगा
* एमईआईटीवाई की मंजूरी से वितरण तक गुजरात सरकार की ईसीएमएस का लाभ भी समानांतर मिलेगा, 30 दिन में प्रोत्साहन सहायता का भुगतान कर दिया जाएगा
* ईसीएमएस अंतर्गत टर्नओवर से जुड़े प्रोत्साहन 6 वर्ष के लिए प्रदान किए जाएंगे
* राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 35 हजार रुपए से अधिक के नए निवेश तथा अधिकाधिक हाईस्किल्ड एम्प्लॉयमेंट का लक्ष्य
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मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात की पॉलिसी ड्रिवन स्टेट के रूप में स्थापित हुई इमेज को व्यापक बनाने के लिए एक और पॉलिसी ‘गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2025 (जीईसीएमएस)’ की घोषणा की है।

गुजरात को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का पावर हाउस बनाने की मंशा के साथ मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल द्वारा घोषित की गई इस पॉलिसी की विशेषता यह है कि केन्द्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स तथा इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा मंजूरी तथा सहायता प्राप्त इकाइयों को गुजरात में भी केन्द्रीय मानदंड के अनुसार 100 प्रतिशत सहायता प्रोत्साहन मिलेगा।

यानी कि, गुजरात में स्थापित होने वाले एमईआईटीवाई स्वीकृत प्रोजेक्ट्स को केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार के दोहरे प्रोत्साहन लाभ प्राप्त हो सकेंगे।

यह पॉलिसी केन्द्र सरकार की ईसीएमएस पॉलिसी से सुसंगत है और इसके तहत 100 प्रतिशत टॉपअप का अनुकरण कर आसानी से कम से कम समय में सहायता प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जाएंगे।

इतन ही नहीं, एमईआईटीवाई द्वारा एक बार ईसीएमएस अंतर्गत प्रोजेक्ट मंजूर होने के बाद राज्य में स्थापित होने वाले प्रोजेक्ट्स स्वतः समान अनुदान – सहायता के पात्र बनेंगे और केन्द्र सरकार द्वारा सहायता का भुगतान किए जाने के बाद 30 दिन में राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन सहायता का भुगतान कर दिया जाएगा।

गुजरात देश के इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट लैंडस्केप में मैन्युफैक्चरिंग हब, ऑटो हब की प्रतिष्ठा वाला राज्य बना है। राज्य में चार सेमीकंडक्टर प्लांट्स भी कार्यरत हैं। ऐसे में, अब इस पॉलिसी के परिणामस्वरूप अपस्ट्रीम इंडस्ट्री को भी वेग मिलेगा और इसके चलते आयात पर निर्भरता घटेगी एवं टेक्नोलॉजिकल रेजिलिएंस में वृद्धि हो सकेगी।

इस पॉलिसी द्वारा राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 35 हजार करोड़ रुपए से अधिक के नए निवेश तथा अधिकाधिक हाईस्किल्ड एम्प्लॉयमेंट का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल द्वारा घोषित की गई इस जीईसीएमएस पॉलिसी के फलस्वरूप राज्य में मल्टीलेयर तथा एचआईडी प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, लिथियम आयन सेल, एसएमडी पैसिव कम्पोनेंट्स, डिसप्ले एवं कैमरा मॉड्यूल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स तथा उसके उत्पादन के लिए आवश्यक मशीनरी आदि जरूरी उद्योगों व इकाइयों को राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलने लगेगा।

इस पॉलिसी में इनोवेशन को प्रोत्साहन देकर टैलेंट गैप समाप्त करने के उद्देश्य से राज्य में रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए उदारतम सहयोग देने का प्रावधान रखा गया है। तद्अनुसार, गुजरात में स्थित एवं मान्यता प्राप्त संस्थाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, फिनिशिंग स्कूल्स या एप्लाइड रिसर्च लैब की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा अधिक से अधिक 12.5 करोड़ रुपए तक की मैचिंग सहायता देय होगी।

जीईसीएमएस अंतर्गत टर्नओवर लिंक्ड इंसेंटिव छह वर्ष की समयावधि तक प्रदान किया जाएगा

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल द्वारा घोषित की गई इस जीईसीएमएस पॉलिसी की मुख्य विशेषताएँ, उद्देश्य और प्रोत्साहन निम्नानुसार हैं :-

उद्देश्य
* इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट्स उत्पादन से वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन्स में गुजरात का मजबूत स्थान स्थापित करना।
* लोकल कम्पोनेंट तथा सब-असेम्बली उत्पादन को प्रोत्साहन देकर इलेक्ट्रॉनिक्स ग्लोबल वैल्यू चेन्स (जीवीसी) में उत्पादन मूल्य वृद्धि से अग्रसर रहकर आयात पर निर्भरता कम करना और निर्यात में वृद्धि करना।
योग्यता
* भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार इस पॉलिसी का लाभ लेने के लिए आवेदन 31 जुलाई 2025 तक करने होंगे।
* केन्द्र सरकार के एमईआईटीवाई द्वारा सहायता मंजूर हुई हो और गुजरात में कार्यरत हों; ऐसे सभी प्रोजेक्ट्स को स्वतः इस पॉलिसी का लाभ मिलेगा।
* गुजरात में उत्पादन यूनिट स्थापित करने के इच्छुक हों अथवा प्रगति पर हों; ऐसे प्रोजेक्ट्स को भी इसका लाभ मिलेगा।
प्रोत्साहन (इंसेंटिव्स)
* गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2022-28 अंतर्गत सहायता प्राप्त कर रही इकाइयों को छोड़कर अन्य इकाइयाँ ही इस नीति अंतर्गत देय लाभ प्राप्त करने के लिए मान्य होंगी।
* इस नीति अंतर्गत लाभ प्राप्त करने वाली इकाइयों को गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2022-28 का लाभ नहीं मिलेगा।
* प्रोत्साहन भारत सरकार की योजना की शर्तों तथा थ्रेशोल्ड के अनुसार रहेंगे।
अतिरिक्त प्रोत्साहन (इंसेंटिव्स)
* कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा लॉजिस्टिक्स : इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टरों में कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण तथा विकास के लिए आवश्यकता आधारित सहायता दी जाएगी।
इंसेंटिव वितरण
* भारत सरकार द्वारा मंजूर योजनाओं के लिए सहायता का भुगतान किए जाने के बाद राज्य सरकार 30 कार्य दिवस में सहायता का भुगतान करेगी।
पॉलिसी की समयावधि
* राज्य की इस नई नीति की समयावधि भारत सरकार की योजना के समान ही रहेगी।
पॉलिसी का क्रियान्वयन
* गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2025 का क्रियान्वयन गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन (जीएसईएम) द्वारा किया जाएगा।
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2030 तक एड्स उन्मूलन के लिए, सभी लोगों तक एचआईवी सेवाओं का पहुंचना है ज़रूरी

ASICON 2025 का उद्घाटन माननीय गुजरात के मुख्य मंत्री करेंगे

गुजरात में पहली बार हो रहा है एचआईवी चिकित्सकीय विशेषज्ञों का राष्ट्रीय अधिवेशन (ASICON 2025)

देश के एचआईवी चिकित्सकीय विशेषज्ञों का 16वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन इस साल अहमदाबाद, गुजरात, में 21-23 फ़रवरी के दौरान आयोजित होगा (ASICON 2025)। यह पहली बार है कि यह प्रतिष्ठित अधिवेशन गुजरात में आयोजित हो रहा है। एचआईवी चिकित्सकीय और आयुर्विज्ञान से जुड़े भारतीय विशेषज्ञों का सबसे प्रमुख चिकित्सकीय संगठन, एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (एएसआई) इस अधिवेशन को आयोजित कर रहा है।

ASICON 2025 अधिवेशन का उद्घाटन, गुजरात के माननीय मुख्य मंत्री श्री भूपेंद्र पटेल 21 फ़रवरी 2025 को करेंगे।

इस ASICON 2025 अधिवेशन के आयोजन में, चिकित्सकीय और आयुर्विज्ञान सहयोगियों में शामिल हैं: भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, गुजरात मेडिकल कौंसिल, इन्फेक्शियस डिजीस सोसाइटी ऑफ़ गुजरात, संयुक्त राष्ट्र का संयुक्त एड्स कार्यक्रम (UNAIDS), दक्षिण अफ्रीका का एड्स शोध संस्थान, आदि। गुजरात पर्यटन और केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय का भारतीय सम्मेलन संवर्धन ब्यूरो भी इस अधिवेशन को समर्थन दे रहा है।

ASICON 2025 अधिवेशन में देश भर से अनेक एचआईवी चिकित्सकीय देखरेख कर रहे विशेषज्ञ और शोधकर्ता भाग लेंगे। अनेक देशों के एचआईवी विशेषज्ञ भी इस अधिवेशन में शामिल हो रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं: दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, इटली, जर्मनी, केन्या, आदि।

तीन दिवसीय ASICON 2025 अधिवेशन में अनेक विषयों पर एचआईवी संबंधित चिकित्सकीय व्याख्यान और सत्र होंगे, इनमें प्रमुख विषय इस प्रकार हैं: एशिया पसिफ़िक क्षेत्र और भारत के एचआईवी संबंधित नवीनतम आंकड़े, एचआईवी परीक्षण (विशेषकर कि एचआईवी सेल्फ-टेस्ट या एचआईवी आत्म-परीक्षण), एंटीरेट्रोवायरल दवाओं संबंधित नवीनतम शोधपत्र, एचआईवी से बचाव के नवीनतम दवाएं जैसे कि “प्रेप” (जिसमें लेनकपवीर दवा शामिल है (हर 6 महीने में 1 इंजेक्शन), जिसके उपयोग से एचआईवी से संक्रमित होने से लगभग 100% बचा जा सकता है), “डॉक्सी प्रेप” दवा जो कुछ यौन संक्रमणों से बचाती है, एचआईवी और टीबी सह-संक्रमण और एचआईवी और हेपेटाइटिस सह-संक्रमण संबंधित नवीनतम अपडेट, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस संबंधित कैंसर, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, साइबर-सिक्योरिटी और स्वास्थ्य सेवा, जलवायु परिवर्तन, आदि।

भारत और एचआईवी
सरकारी राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार, भारत में एड्स नियंत्रण की ओर सराहनीय प्रगति हुई है। 2010 आंकड़ों की तुलना में, 2023 तक भारत में एड्स दर लगभग आधा हो गई थी (44.23% गिरावट) – जो एड्स दर में वैश्विक स्तर पर आई गिरावट (39%) से भी अधिक थी। इसी तरह, 2010 के आकड़ों की तुलना में, एड्स संबंधित मृत्यु दर में भी 2023 तक 79.26% गिरावट आई, जो 2010-2023 के दौरान वैश्विक एड्स मृत्यु दर में आई गिरावट (51%) से अधिक थी।

भारत में 25.44 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवित हैं। भारत की व्यस्क आबादी में एचआईवी दर 0.20% है जो वैश्विक दर से कम है (0.70%)। 2023 में भारत में 68,450 नए लोग एचआईवी पॉजिटिव चिह्नित हुए और 35,870 लोग एड्स-संबंधित कारणों से मृत हुए। 2023 में 19,961 गर्भवती महिलायें एचआईवी पॉजिटिव थीं और उन्हें विशेष चिकित्सकीय द्वाएँ और सहायता प्रदान की गई जिससे कि नवजात शिशु का गर्भावस्था, प्रसूति और स्तनपान के दौरान एचआईवी से संक्रमित होने का ख़तरा शून्य रहे।

गुजरात और एचआईवी
सरकारी राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार, गुजरात प्रदेश में व्यस्क आबादी में एचआईवी दर 0.19% थी। 2023 में गुजरात में 1,20,312 लोग एचआईवी के साथ जीवित थे और 800 लोग एड्स संबंधित कारणों से मृत हुए। 2023 में गुजरात में 2671 नए लोग एचआईवी पॉजिटिव चिह्नित हुए थे। 2010 की तुलना में, 2023 तक गुजरात में एचआईवी दर में 56.86% गिरावट आई थी (जो देश के 2010-2023 के दौरान एचआईवी दर गिरावट (44.23%) से अधिक थी)। ASICON 2025 के सह-अध्यक्ष डॉ हर्ष तोषनीवाल ने कहा कि ASICON 2025 अधिवेशन गुजरात में पहली बार आयोजित हो रहा है जिसका लाभ समस्त चिकित्सकीय समुदाय को मिलेगा, जो गुजरात को एड्स उन्मूलन की दिशा में प्रगति करने में सहायक होगा।

एड्स उन्मूलन के लिए सिर्फ 70 माह शेष
भारत समेत सभी सरकारों ने 2030 तक एड्स उन्मूलन का वादा किया है। इसके लिये यह ज़रूरी है कि हर एचआईवी के साथ जीवित व्यक्ति को यह पता हो कि उसे एचआईवी है, उसको जीवनरक्षक एंटीरिट्रोविरल द्वाओं के साथ-साथ सभी एचआईवी सेवाएँ मिल रही हों और उसका वायरल लोड नगण्य रहे। वायरल लोड नगण्य रहेगा तो किसी और को एचआईवी से संक्रमित होने का ख़तरा भी नहीं रहेगा, और एचआईवी के साथ जीवित व्यक्ति स्वस्थ और भरपूर जीवन जी सकेगा। हमें एड्स रोकधाम की ओर अधिक कार्यकुशलता, कार्यसाधकता और प्रभावशीलता के साथ कार्य करना होगा – यह कहना है डॉ ईश्वर गिलाडा का जो एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के एमेरिटस अध्यक्ष हैं, इंटरनेशनल एड्स सोसाइटी (आईएएस) की अध्यक्षीय मंडल के भी निर्वाचित सदस्य हैं, और आईएएस एशिया पसिफ़िक के अध्यक्ष हैं। 1986 में जब भारत में पहला व्यक्ति एचआईवी के साथ संक्रमित पाया गया था तब डॉ गिलाडा ने मुंबई के सरकारी जेजे अस्पताल में देश की पहली एचआईवी क्लिनिक की स्थापना की थी।

2025 तक पूरे करने हैं 95-95-95 लक्ष्य
डॉ ईश्वर गिलाडा ने कहा कि सभी सरकारों ने वादा किया है कि 2025 तक, 95% एचआईवी के साथ जीवित लोगों को परीक्षण से यह मालूम होना चाहिए कि वह एचआईवी संक्रमित हैं, इनमें से 95% लोगों को जीवनरक्षक एंटी-रेट्रो-वाइरल दवाएँ मिल रही हों, और जिन लोगों को यह दवाएँ मिल रही हों उनमें से 95% का वाइरल-लोड नगण्य रहे।

वर्तमान में भारत में 25.44 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवित हैं जिनमें से 81% को परीक्षण से यह मालूम है कि वह एचआईवी संक्रमित हैं, इनमें से 88% लोगों को जीवनरक्षक एंटी-रेट्रो-वाइरल दवाएँ मिल रही हैं, और जिन लोगों को दवाएँ मिल रही हैं उनमें से 97% लोगों के वाइरल-लोड नगण्य है।

विश्व में 86% को परीक्षण से यह मालूम है कि वह एचआईवी संक्रमित हैं, इनमें से 89% लोगों को जीवनरक्षक एंटी-रेट्रो-वाइरल दवाएँ मिल रही हैं, और जिन लोगों को दवाएँ मिल रही हैं उनमें से 93% लोगों के वाइरल-लोड नगण्य है।

एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिलीप मथाई ने कहा कि जिन लोगों को एचआईवी एंटीरेट्रोवायरल दवाएं मिल रही हैं, उन सभी के (100%) वायरल लोग नगण्य रहे – यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है।

2023 में भारत में जिन नए लोगों की एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई उनमें से 93% को जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवाएं मिल रही थीं। परंतु अनेक प्रदेशों में यह संख्या कम थी जैसे कि असम, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पुडुचेरी, और सिक्किम – उदाहरण के लिए, पुडुचेरी में 47% और असम में 76% लोगों को दवाएं मिल रही थीं।

2010-2023 के दौरान, भारत में तो एचआईवी दर में काफ़ी गिरावट आई परंतु कुछ प्रदेशों में दर में बढ़ोतरी हुई, जैसे कि त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में एचआईवी दर 400% बढ़ा और पंजाब और मेघालय में दुगना हुआ। राष्ट्रीय व्यस्क आबादी में एचआईवी दर (0.20%) रहा परंतु कुछ प्रदेशों में अधिक है जैसे कि मिज़ोरम (2.73%), नागालैंड (1.37%), और मणिपुर (0.87%)।

डॉ गिलाडा ने कहा कि शोध द्वारा यह प्रमाणित है कि एचआईवी के साथ जीवित व्यक्ति स्वस्थ और भरपूर जीवन जी सकता है, और सामान्य जीवन यापन कर सकता है। परंतु यह तब ही मुमकिन है जब हर एचआईवी पॉजिटिव इंसान को एचआईवी जाँच मिल सके। यदि किसी भी कारणवश एचआईवी जाँच उसको नहीं मिल पा रही है तो संभवत: एचआईवी सेल्फ-टेस्ट के उपयोग से वह परीक्षण करवाये और फिर एचआईवी की व्यापक स्वास्थ्य सेवा और परामर्श से जुड़े। ऐसे हर व्यक्ति को जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवाएँ मिलनी ज़रूरी हैं और उसका वायरल लोड नगण्य रहना ज़रूरी है जिससे कि वह स्वस्थ रहे, और उससे किसी को भी एचआईवी संक्रमण फैलने का ख़तरा भी न रहे। इसी तरह एचआईवी से बचाव के सभी साधन जानता को उपलब्ध होने चाहिए। “प्रेप” (PrEP) को सरकारी एचआईवी स्वास्थ्य सेवा में शामिल करना चाहिए।

“स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिए एक देश एक चुनाव” है जरूरी !

लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराये जाने के मसले पर लंबे समय से बहस चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस विचार का समर्थन कर इसे आगे बढ़ाया है। किसी भी स्वस्थ एवं निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आधारशिला होते हैं। भारत जैसे विशाल देश में निर्बाध रूप से निष्पक्ष चुनाव कराना हमेशा से एक चुनौती रहा है। अगर हम देश में होने चुनावों पर नजर डालें तो पाते हैं कि हर वर्ष किसी न किसी राज्य में चुनाव होते रहते हैं। चुनावों की इस निरंतरता के कारण देश हमेशा चुनावी मोड में रहता है। इससे न केवल प्रशासनिक और नीतिगत निर्णय प्रभावित होते हैं बल्कि देश के खजाने पर भारी बोझ भी पड़ता है। इस सबसे बचने के लिये नीति निर्माताओं ने लोकसभा तथा राज्यों की विधानसभाओं का चुनाव एक साथ कराने का विचार बनाया।ङ्ग इस मसले पर चुनाव आयोग, नीति आयोग, विधि आयोग और संविधान समीक्षा आयोग विचार कर चुके हैं। अभी हाल ही में विधि आयोग ने देश में एक साथ चुनाव कराये जाने के मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों, क्षेत्रीय पार्टियों और प्रशासनिक अधिकारियों की राय जानने के लिये तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था। इस कॉन्फ्रेंस में कुछ राजनीतिक दलों ने इस विचार से सहमति जताई, जबकि ज्यादातर राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया। ङ्गएक देश एक चुनाव कोई अनूठा प्रयोग नहीं है, क्योंकि १९५२, १९५७, १९६२, १९६७ में ऐसा हो चुका है, जब लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ करवाए गए थे। यह क्रम तब टूटा जब १९६८-६९ में कुछ राज्यों की विधानसभाएँ विभिन्न कारणों से समय से पहले भंग कर दी गई। आपको बता दें कि १९७१ में लोकसभा चुनाव भी समय से पहले हो गए थे। जाहिर है जब इस प्रकार चुनाव पहले भी करवाए जा चुके हैं तो अब करवाने में क्या समस्या है ? ङ्गएक देश एक चुनाव की अवधारणा में कोई बड़ी खामी नहीं है, किन्तु राजनीतिक पार्टियों द्वारा जिस तरह से इसका विरोध किया जा रहा है उससे लगता है कि इसे निकट भविष्य लागू कर पाना संभव नहीं है। इसमें कोई दो राय नहीं कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत हर समय चुनावी चक्रव्यूह में घिरा हुआ नजर आता है। चुनावों के इस चक्रव्यूह से देश को निकालने के लिये एक व्यापक चुनाव सुधार अभियान चलाने की आवश्यकता है। इसके तहत जनप्रतिनिधित्व कानून में सुधार, कालेधन पर रोक, राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण पर रोक, लोगों में राजनीतिक जागरूकता पैदा करना शामिल है जिससे समावेशी लोकतंत्र की स्थापना की जा सके।ङ्गयदि देश में ‘एक देश एक कर’ यानी डढ लागू हो सकता है तो एक देश एक चुनाव क्यों नहीं हो सकता? अब समय आ गया है कि सभी राजनीतिक दल खुले मन से इस मुद्दे पर बहस करें ताकि इसे अमलीजामा पहनाया जा सके।

“आप” के दिग्गजो ने इसबार चुनाव से क्यो बनाई दूरी ?

(चन्दन कुमार, नई दिल्ली)
जय पराजय ये तो चुनावी मैदान मे लगा रहता है, पर इसबार दिल्ली के चुनाव मे जिस प्रकार से आम आदमी पार्टी के कुछ बड़े चेहरे चुनाव से दूरी बनाए हुए है ! उससे यही प्रतीत होता है कि चुनाव से पहले ही आम आदमी पार्टी शस्त्र रखकर अपना समर्पण कर चुकी है ! ना तो इसबार किसी जनसभा के दौरान आम आदमी पार्टी से सांसद राघव चड्डा दिखाई दें रहे है ना ही उनके दो और सांसद सुशील गुप्ता और एन डी गुप्ता ! इसके आलावे आप के मंत्री गोपाल राय और सोमनाथ भारती भी दिल्ली चुनाव मे केवल और केवल अपने अपने विधानसभा मे लगे हुए है ! वही आम आदमी पार्टी की एकलौती महिला सांसद स्वाती मालिवाल अपने ही पार्टी के लिए बगावत पर उतर आई है ! वो केजरीवाल के लगभग सभी नीतियों पर सवाल खड़ी कर रही है और पार्टी के ऊपर कई प्रकार के आरोप लगा रही है ! ये वही सब लोग है जो अरविन्द केजरीवाल जी के काफी भरोसेमंद माने जाते है ! पिछले सभी चुनाव मे इन लोगों ने काफी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था ! पर इसबार ये सभी चेहरे कहीं दिखाई नहीं दे रहे है ! जबकि दूसरी तरफ कॉंग्रेस और भाजपा के प्रदेश नेतृत्व से लेकर केन्द्रीय नेतृत्व के सभी दिग्गज अपने-अपने हिसाब से मोर्चा संभाल रहे है ! शायद यही कारण है की जैसे-जैसे चुनाव के तारीक नजदीक आ रही है वैसे-वैसे आम आदमी पार्टी का जमीन से पकड़ कमजोर होती दिखाई दे रही है !

यदि हम आकलन करें तो आम आदमी पार्टी मे केवल पाँच चेहरे ही इसबार के चुनाव मे दिखाई पड़ रहे है ! आप प्रमुख अरविन्द केजरीवाल, मनीष सीसोदिया, मुख्यमंत्री आतीसी, सांसद संजय सिंह और सौरभ भारद्वाज ! मात्र यही वो चेहरे है जो इसबार के चुनावी समर मे आप के तरफ से दिखाई दे रहे है ! जबकि इससे पहले आम आदमी पार्टी मे चुनाव के समय नेताओ और कार्यकर्ताओ का तांता लगा रहता था ! जैसे जैसे पार्टी का कार्यकाल बढ़ता गया वैसे वैसे पार्टी के संस्थापक सदस्यों और जमीनी कार्यकर्ताओ का पलायन बढ़ता गया ! आज हालात ये बन गए है कि- आंदोलन की कोख से निकली आम आदमी पार्टी मुट्ठी भर नेताओ के बीच सिमट गई है !
आप सुप्रीमो अरविन्द केजरीवाल के वक्तव्य और प्रचार प्रसार मे भी पराजय का भय दिखाई पड़ रहा है, वो अब किसी से छिपा नहीं है ! ये वही अरविन्द केजरीवाल है जो पिछले सभी चुनावों मे अपने काम पर वोट मांगते थे, पर इस बार वो अपने लगभग सभी सभाओ में ये कहते दिखाई दे रहे है कि- यदि भाजपा सत्ता मे आयेगी तो दिल्ली वालों के ये सुविधाएं बंद कर देगी ! वो सुविधाएं बंद कर देगी ! इससे और स्पष्ट हो जाता है कि कहीं ना कहीं केजरीवाल को यह आभास हो चुका की आम आदमी पार्टी का इस बार सरकार मे आना मुश्किल है ! ये भी एक कारण हो सकता है जो आम आदमी पार्टी के बाकी दिग्गज प्रचारक अपने आप को चुनावी समर मे झोंकने से बच रहे है !

स्वर्णिम भारत : विरासत और विकास : 76वें गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस परेड में नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर ‘स्वर्णिम भारत : विरासत और विकास’ विषय पर गुजरात प्रस्तुत करेगा ‘गुजरात : आनर्तपुर से एकता नगर तक – विरासत भी, विकास भी’ की थीम पर आधारित झांकी
गुजरात की झांकी में 12वीं सदी के वडनगर यानी आनर्तपुर के ‘कीर्ति तोरण’ से लेकर 21वीं सदी के ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के रूप में राज्य की सांस्कृतिक विरासत के साथ ही रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में राज्य की ‘आत्मनिर्भरता’ को प्रदर्शित करती विभिन्न विकास परियोजनाओं को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है
रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में
बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहेंगे

नई दिल्ली, 22 जनवरी, 2025 :
‘स्वर्णिम भारत : विरासत और विकास’ शीर्षक के अंतर्गत 76वें गणतंत्र दिवस समारोह की परेड में गुजरात की ओर से जो झांकी प्रस्तुत की जा रही है, वह न केवल राज्य, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर और विकास के अभूतपूर्व संमिश्रण को अत्यंत प्रभावी तरीके से साकार कर रही है। गुजरात की झांकी में 12वीं सदी के वडनगर यानी आनर्तपुर के सोलंकी कालीन ‘कीर्ति तोरण’ से लेकर 21वीं सदी का अजूबा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में राज्य की ‘आत्मनिर्भरता’ को प्रदर्शित करती विभिन्न विकास परियोजनाओं का प्रभावशाली निदर्शन किया गया है।
गुजरात की झांकी के अगले हिस्से में सोलंकी काल में निर्मित वडनगर स्थित 12वीं सदी का गुजरात का सांस्कृतिक प्रवेशद्वार कहा जाने वाला ‘कीर्ति तोरण’ है, तो अंत में 21वीं सदी की शान, 182 मीटर ऊंची सरदार पटेल की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को दर्शाया गया है, जो दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इन दोनों विरासतों के बीच गुजरात में विभिन्न क्षेत्रों में हुए शानदार विकास की प्रतिकृतियां हैं। जिसमें रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत गुजरात की विभिन्न परियोजनाओं को दर्शाया गया है। भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती के अवसर पर गुजरात के ‘जनजातीय गौरव’ को प्रदर्शित करती पिथोरा चित्रों की शृंखला, पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी जी की 100वीं जयंती के प्रतीक के रूप में साबरमती रिवरफ्रंट के दोनों तटों को जोड़ने वाला ‘अटल ब्रिज’, द्वारका और शिवराजपुर बीच में आकार लेने वाले ‘अंडर वाटर स्पोर्ट्स’ की गतिविधियों के साथ मिट्टी और शीशे से बनी कच्छी कलाकृतियां झांकी को चार चांद लगा रही हैं।
गुजरात की झांकी के अग्रभाग में ‘यूनेस्को’ की हेरिटेज साइट में शामिल आनर्तपुर यानी मौजूदा वडनगर शहर में स्थित 12वीं सदी का सोलंकी कालीन ‘कीर्ति तोरण’ दर्शाया गया है। इसके चारों ओर मिट्टी और शीशे से निर्मित कच्छी कलाकृतियों के साथ जनजातीय देव ‘बाबा पिथोरा’ की स्मृति में रेखांकित ‘पिथोरा चित्रों’ की शृंखला को प्रदर्शित किया गया है।

झांकी के पृष्ठ भाग में रक्षा-टेक्नोलॉजी क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परियोजनाओं में से एक, वडोदरा में ‘टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड’ के द्वारा तैयार होने वाले भारतीय वायुसेना के सी-295 एयरक्राफ्ट की यूनिट, उसके नीचे अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट के दोनों तटों को जोड़ने वाला ‘अटल ब्रिज’ है, जिसे इंजीनियरिंग का चमत्कार कहा जाता है, गुजरात में भारी निवेश के साथ सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षेत्र की सफलता को दिखाते सेमीकंडक्टर चिप और उससे जुड़े विभिन्न उपकरण और उसके नीचे ऑटोमोबाइल-मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित हो रहे गुजरात के ऑटो और मशीन उद्योग को दर्शाया गया है।
झांकी के अंतिम हिस्से में भारत के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के मौके पर उन्हें स्मरणांजलि के रूप में 21वीं सदी की शान और देश भर के किसानों से एकत्रित किए गए लोहे से निर्मित सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को दर्शाया गया है, जो दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इसके नीचे के हिस्से में जगत मंदिर द्वारका की पवित्र भूमि और शिवराजपुर बीच में आकार लेने वाले ‘अंडर वाटर स्पोर्ट्स’ की गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया है। इस दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति की सामग्री प्रतिष्ठित चैनल ‘डिस्कवरी’ द्वारा उपलब्ध कराई गई है।
गुजरात की इस झांकी को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए पारंपरिक लेकिन अर्वाचीन दोहे के साथ राज्य के जोशीले मणियारा रास को जीवंत नृत्य के साथ प्रस्तुत किया गया है।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस की परेड में 14 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ-साथ केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों की 16 झांकियों समेत कुल 30 झांकियां प्रदर्शित की जाएंगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
गुजरात सरकार के सूचना विभाग की ओर से प्रस्तुत इस झांकी के निर्माण में सूचना एवं प्रसारण सचिव श्रीमती अवंतिका सिंह औलख, सूचना निदेशक श्री किशोर बचाणी और अतिरिक्त निदेशक श्री अरविंद पटेल के मार्गदर्शन में संयुक्त सूचना निदेशक डॉ. संजय कचोट और उप सूचना निदेशक श्री जिगर खूंट योगदान दे रहे हैं। इस झांकी का निर्माण स्मार्ट ग्राफ आर्ट एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड के श्री सिद्धेश्वर कानूगा कर रहे हैं।

AAP ने 12 साल में जो हासिल किया, बाकी पार्टियां 75 साल में नहीं कर सकीं: केजरीवाल

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को देश भर में अपनी उपलब्धियों से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया और कहा कि आप ने 12 साल में वह कर दिखाया है जो अन्य पार्टियां 75 साल में नहीं कर पाईं।

राष्ट्रीय परिषद की बैठक में बोलते हुए आप के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा, “किसी भी पार्टी के इतिहास में 12 साल बहुत छोटी अवधि होती है। लोग अपने जीवनकाल में एक बार विधायक बनने के लिए अपना जीवन लगा देते हैं। और फिर भी 12 साल में हमारी पार्टी अभूतपूर्व सफलता मिली है, और एक कारण से, यानी कि AAP ने वह किया है जो अन्य पार्टियाँ 75 वर्षों में नहीं कर सकीं।”

दिल्ली, पंजाब और देश में अन्य जगहों पर अपनी उपलब्धियों से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए, आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से आगामी लोकसभा और हरियाणा में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कमर कसने का आग्रह किया।

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने रविवार को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और 12वीं राष्ट्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता की।

दोनों बैठकों में देशभर से पार्टी पदाधिकारियों ने वर्चुअली हिस्सा लिया। पंजाब के सीएम भगवंत मान और आप के राष्ट्रीय महासचिव संगठन संदीप पाठक भी मौजूद रहे.

आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने दिल्ली में कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। यहाँ उनकी प्रमुख उपलब्धियों की सूची दी गई है:

1. शिक्षा के क्षेत्र में सुधार
– सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार किया, जिससे वे निजी स्कूलों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करने लगे।
– “हैप्पीनेस करिकुलम” और “देशभक्ति करिकुलम” जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए।
– शिक्षा बजट में वृद्धि की, जिससे बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की ट्रेनिंग में सुधार हुआ।

2. स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांति
– मोहल्ला क्लीनिक स्थापित किए, जहाँ मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं और दवाइयाँ उपलब्ध हैं।
– दिल्ली के अस्पतालों में मुफ्त जाँच और इलाज की सुविधा।
– स्वास्थ्य बजट को बढ़ाकर आधुनिक चिकित्सा उपकरण और सुविधाएं प्रदान की गईं।

3. बिजली और पानी में सुधार
– 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त उपलब्ध कराई।
– जल सप्लाई को सुधारने के लिए 20,000 लीटर तक मुफ्त पानी योजना।
– अनियमित क्षेत्रों में पानी की पाइपलाइन बिछाई।

4. परिवहन और महिला सुरक्षा
– महिलाओं के लिए डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा।
– सार्वजनिक परिवहन के लिए नई बसें जोड़ी गईं।
– सीसीटीवी कैमरे और स्ट्रीट लाइट्स लगाकर महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

5. पर्यावरण संरक्षण
– “पराली प्रबंधन” के लिए समाधान और जागरूकता अभियान।
– दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए “ग्रीन वार रूम” की स्थापना।
– यमुना सफाई अभियान और वृक्षारोपण योजनाएँ।

6. विभिन्न कल्याणकारी योजनाएँ
– श्रमिकों और गरीब वर्ग के लिए विभिन्न वित्तीय सहायता योजनाएँ।
– वृद्धावस्था पेंशन और विधवा पेंशन में वृद्धि।
– दिल्ली के नागरिकों को ईमानदार और भ्रष्टाचार मुक्त शासन।

7. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
– सड़कों और फ्लाईओवर का निर्माण।
– अनधिकृत कॉलोनियों के विकास के लिए प्रयास।
– बाजारों के आधुनिकीकरण की योजना।

आम आदमी पार्टी ने अपनी “जनता के लिए, जनता द्वारा” की नीति पर चलते हुए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उनकी शासन शैली को ईमानदारी और पारदर्शिता के लिए सराहा गया है।

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