Chunavi Kissa: दिनकर, अज्ञेय, पंत जैसे साहित्यकारों ने किया प्रचार, फिर भी चुनाव हार गए थे कथा शिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु, जानें ‘चौथी कसम’ का किस्सा

फणीश्वरनाथ रेणु की अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के सरयू मिश्रा और सोशलिस्ट पार्टी के लखन लाल कपूर से पुरानी दोस्ती थी।

By Sandeep Chourey

Publish Date: Thu, 11 Apr 2024 10:42 AM (IST)

Up to date Date: Thu, 11 Apr 2024 10:43 AM (IST)

Chunavi Kissa: दिनकर, अज्ञेय, पंत जैसे साहित्यकारों ने किया प्रचार, फिर भी चुनाव हार गए थे कथा शिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु, जानें ‘चौथी कसम’ का किस्सा
अपनी जीवन की अंतिम सांस तक रेणु अपनी कसम पर अडिग रहे और फिर कभी चुनावी राजनीति में कदम नहीं रखा।

HighLights

  1. साल 1972 में बिहार में अररिया जिले के फारबिसगंज से फणीश्वरनाथ रेणु ने विधानसभा चुनाव लड़ा था।
  2. इन चुनावों उन्हें अपने साथियों से दगा मिला था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
  3. इससे आहत फणीश्वरनाथ रेणु ने कभी चुनाव न लड़ने की चौथी कसम खाई थी।

चुनाव डेस्क, नई दिल्ली। मशहूर कथा शिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु ने उपन्यास ‘मारे गए गुलफाम’ के अलावा भी कई अमर कृतियों की रचना की है। फणीश्वरनाथ रेणु की मुख्य पहचान एक साहित्यकार के रूप में है, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है एक बार फणीश्वरनाथ रेणु ने चुनावी मैदान में भी अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन करारी हार के बाद ऐसी चौथी कसम खाई थी कि उस कसम के किस्से आज भी सियासी गलियारों में होते हैं।

आखिर क्या थी रेणु की ‘चौथी कसम’

फणीश्वरनाथ रेणु के पुत्र डीपी राय इस बारे में विस्तार से बताते हैं। साल 1972 में बिहार में अररिया जिले के फारबिसगंज से फणीश्वरनाथ रेणु ने विधानसभा चुनाव लड़ा था। इन चुनावों उन्हें अपने साथियों से दगा मिला था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इससे आहत फणीश्वरनाथ रेणु ने कभी चुनाव न लड़ने की चौथी कसम खाई थी। अपनी जीवन की अंतिम सांस तक रेणु अपनी कसम पर अडिग रहे और फिर कभी चुनावी राजनीति में कदम नहीं रखा।

दिग्गज साहित्यकारों ने किया था प्रचार

डीपी राय बताते हैं कि फणीश्वरनाथ रेणु चुनावी सभाओं में खूब कहानी-किस्से, भजन और गीत सुनाते थे। उस समय गलियों में नारा गूंजता था, ‘कह दो गांव-गांव में, अबके चुनाव में वोट देंगे नाव में’। रेणु का मुकाबला उस समय कांग्रेस के कद्दावर नेता सरयू मिश्रा से था। तब रेणु के समर्थन में ख्यात साहित्यकारों रामधारी सिंह दिनकर, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय, सुमित्रा नंदन पंत, रघुवीर सहाय ने भी गली-गली जाकर चुनाव प्रचार किया था।

सरयू मिश्रा से थी रेणु की अच्छी दोस्ती

फणीश्वरनाथ रेणु की अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के सरयू मिश्रा और सोशलिस्ट पार्टी के लखन लाल कपूर से पुरानी दोस्ती थी। तीनों दोस्त साल 1942 के आंदोलन में भागलपुर जेल में बंद थे, हालांकि विचारधारा की लड़ाई में विरोध के कारण 1972 में तीनों एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़े। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सरयू मिश्रा 48 फीसदी वोटों के साथ जीते थे। चुनाव में रेणु की हार हुई थी, लेकिन इसका हिसाब साल 2010 में उनके बेटे पद्म पराग राय ‘वेणु’ पूरा किया, जब उन्होंने फारबिसगंज से जीत हासिल की।

फणीश्वरनाथ रेणु के तीन बेटों में से सबसे छोटे बेटे दक्षिणेश्वर प्रसाद राय का कहना है कि साल 1972 से ही रेणु परिवार का राजनीति में खूब इस्तेमाल हो रहा है। रेणु के ‘मारे गए गुलफाम’ उपन्यास पर सुपर हिट फिल्म तीसरी कसम बनी थी, जिसमें मुख्य किरदार 3 कसम खाता है। चुनावी हार के बाद आहत फणीश्वरनाथ रेणु चौथी समय खाते हैं। फणीश्वरनाथ रेणु की पुण्यतिथि आज 11 अप्रैल को ही है।