Vande Bharat Specific: वंदे भारत में किराया ज्यादा तो कम मिल रहे यात्री, ज्यादा पसंद आ रही शताब्दी-राजधानी एक्सप्रेस
वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन शुरू हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इस ट्रेन को चलाने में अब रेलवे को घाटा हो रहा है। इसका कारण यह है कि ट्रेन का किराया अधिक है, जबकि बैठने में आराम कम महसूस होता है।
By Priyank Sharma
Publish Date: Tue, 09 Apr 2024 09:30 AM (IST)
Up to date Date: Tue, 09 Apr 2024 09:30 AM (IST)

HighLights
- ज्यादा किराया देने के बाद वंदे भारत एक्सप्रेस के कोच में बैठने पर आराम कम महसूस होता है
- सीटों के बीच में लेग स्पेस भी शताब्दी एक्सप्रेस के मुकाबले कम है
Vande Bharat Specific: ग्वालियर (नप्र)। वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन शुरू हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इस ट्रेन को चलाने में अब रेलवे को घाटा हो रहा है। इसका कारण यह है कि ट्रेन का किराया अधिक है, जबकि बैठने में आराम कम महसूस होता है। सीटों के बीच में लेग स्पेस भी शताब्दी एक्सप्रेस के मुकाबले कम है। यही कारण है कि भोपाल और हजरत निजामुद्दीन के लिए अब भी शताब्दी एक्सप्रेस और राजधानी एक्सप्रेस को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। इसका कारण यह है कि भोपाल और हजरत निजामुद्दीन के लिए वंदे भारत की एक्जीक्यूटिव क्लास का किराया राजधानी एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी के किराये से ज्यादा है। वह भी तब, जब राजधानी व शताब्दी एक्सप्रेस के किराये में सर्वाधिक डायनामिक फेयर लग रहा है। यही कारण है कि वंदे भारत एक्सप्रेस को शताब्दी एक्सप्रेस के मुकाबले कम यात्री मिल रहे हैं।
लोग वंदे भारत एक्सप्रेस के बजाय शताब्दी एक्सप्रेस और राजधानी एक्सप्रेस में यात्रा करना पसंद कर रहे हैं। इसका कारण यह भी है कि भोपाल के लिए वंदे भारत के एक्जीक्यूटिव क्लास का किराया 2170 रुपये है, जबकि राजधानी एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में डायनामिक फेयर के साथ 2100 रुपये किराया लग रहा है। वहीं दिल्ली के लिए यह किराया 1785 रुपये होता है, जबकि राजधानी में डायनामिक फेयर के साथ 1755 रुपये किराया हो रहा है। इसमें भी यात्री को पूरी बर्थ उपलब्ध होती है, जिस पर वह लेटकर सफर कर सकता है। पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों पर गौर करें, तो देखने में आता है कि भोपाल और हजरत निजामुद्दीन के लिए वंदे भारत के मुकाबले शताब्दी एक्सप्रेस में ज्यादा यात्री सफर कर रहे हैं।
ऐसे समझें तीनों ट्रेनों के किराए में अंतर
भोपाल के लिए
- वंदे भारत के चेयर कार में 1210 रुपये किराया। एक्जीक्यूटिव क्लास में किराया 2170 रुपये।
- राजधानी में डायनामिक फेयर के साथ थर्ड एसी में 1270 रुपये, सेकंड एसी में 1695 रुपये किराया है। फर्स्ट एसी में ये किराया 2100 रुपये है।
- शताब्दी एक्सप्रेस में डायनामिक फेयर के साथ चेयर कार में 1180 रुपये और एक्जीक्यूटिव क्लास में 1785 रुपए किराया है।
दिल्ली के लिए
- वंदे भारत एक्सप्रेस के चेयर कार में एक हजार रुपए और एक्जीक्यूटिव क्लास में 1785 रुपये का किराया है।
- राजधानी में डायनामिक फेयर के साथ थर्ड एसी में 1060 रुपये, सेकंड एसी में 1420 रुपये और फर्स्ट एसी में 1755 रुपये किराया है।
- शताब्दी एक्सप्रेस में डायनामिक फेयर के साथ चेयर कार में 965 रुपये और एक्जीक्यूटिव क्लास में 1475 रुपये किराया लिया जाता है।
शताब्दी एक्सप्रेस में औसतन 200, वंदे भारत में 120 यात्री
वर्तमान में शताब्दी एक्सप्रेस में भोपाल तक के लिए प्रतिदिन ग्वालियर रेलवे स्टेशन से औसतन 200 यात्री सफर कर रहे हैं। गत 23 और 28 मार्च को 198-198 यात्री भोपाल के लिए रवाना हुए, वहीं सप्ताहांत के दिनों या शनिवार और रविवार को यह संख्या बढ़कर 210 तक भी पहुंच जाती है। दूसरी तरफ दिल्ली के लिए 165 से 180 तक यात्री शताब्दी एक्सप्रेस से रवाना होते हैं। दूसरी तरफ वंदे भारत एक्सप्रेस से भोपाल के लिए औसतन 120 यात्री रवाना होते हैं। हालांकि दिल्ली के लिए सुबह के समय यात्रियों की संख्या में इजाफा होता है। दिल्ली के लिए 160 तक यात्री रवाना होते हैं।
चलाने पर खर्चा अधिक, आय हुई कम
पर्याप्त संख्या में यात्री न मिलने के कारण वंदे भारत एक्सप्रेस अपने संचालन में होने वाले खर्च की आधी आय भी नहीं कर पा रही है। एक अप्रैल 2023 से 31 जनवरी 2024 तक इस ट्रेन के संचालन में रेलवे ने लगभग 75 करोड़ रुपए की राशि खर्च की, लेकिन आय लगभग 31 करोड़ रुपए ही हुई। वहीं शताब्दी एक्सप्रेस के संचालन में लगभग 35 करोड़ रुपए का खर्चा हुआ, जिसके बदले में 42 करोड़ रुपए से अधिक की आय हुई है।

