Dhar Bhojshala ASI Survey: भोजशाला में तीन नए स्थलों पर खोदाई शुरू, अकल कुई का भी हुआ व्यापक सर्वे
भोजशाला परिसर के पीछे की ओर भी सर्वे किया गया। इस तरह अब तक 17 चिह्नित स्थानों में से 13 स्थान पर खोदाई चल रही है।
By Hemant Kumar Upadhyay
Publish Date: Mon, 08 Apr 2024 08:51 AM (IST)
Up to date Date: Mon, 08 Apr 2024 09:50 PM (IST)

HighLights
- धार भोजशाला में सर्वे का आज 18 वां दिन है। एएसआई ने 22 मार्च को धार भोजशाला परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण शुरू किया है।
- हिंदू और मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि भी एएसआई दल के साथ रहे मौजूद।
- भोजशाला के भीतरी भाग में जहां स्थान चयनित किए थे,वहां पर खोदाई शुरू हो चुकी है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। ऐतिहासिक भोजशाला के सर्वे के तहत सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम ने तीन नए स्थानों पर खोदाई शुरू की। वहीं, परिसर में स्थित अकल कुई (कूप) का भी व्यापक स्तर पर सर्वे किया गया। इसमें यह देखा जा रहा है कि कूप किस पाषाण का बना हुआ है और उसकी वास्तु शैली किस काल की है। आगामी एक-दो दिनों में गहन जांच के लिए नई मशीन आएगी। इससे वैज्ञानिक प्रणाली से सर्वे में मदद मिलेगी।
दोनों पक्ष की मौजूदगी में 18वें दिन का सर्वे सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक चला। सोमवार को टीम के पांच विशेषज्ञ कमाल मौलाना की दरगाह के परिसर में पहुंचे और उन्होंने उसके पाषाण और वास्तु शैली के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया। भोजशाला परिसर के पीछे की ओर भी सर्वे किया गया। इस तरह अब तक 17 चिह्नित स्थानों में से 13 स्थान पर खोदाई चल रही है।
#WATCH मध्य प्रदेश: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(ASI) की एक टीम सर्वेक्षण के लिए धार में भोजशाला परिसर पहुंची।
ASI ने 22 मार्च को धार भोजशाला परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण शुरू किया था। pic.twitter.com/3gc6bjRrep
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 8, 2024
21 साल पहले हिंदुओं के लिए खुले थे ताले
आठ अप्रैल 2003 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा एक आदेश जारी किया गया था। इसी के चलते पहली बार हिंदुओं को 21 साल पहले आठ अप्रैल 2003 को मंगलवार के दिन पूजा-अर्चना की अनुमति मिली थी। इस आदेश में शुक्रवार को नमाज की अनुमति के साथ शेष पांच दिन पर्यटकों के लिए खोले जाने का प्रविधान किया गया था। 21 साल से प्रति मंगलवार को अखंडित रूप से यहां पर पूजा-अर्चना की जा रही है।
हिंदू समाज के लोग 2003 के पहले भोजशाला के बाहरी दरवाजे तक पहुंचकर देहरी पूजन करके ही लौट आते थे। तब हिंदू समाज के लिए यहां पूजा-अर्चना प्रतिबंधित थी। हिंदू पक्ष के गोपाल शर्मा ने बताया कि 21 साल बहुत ही गौरवशाली हैं। इस आंदोलन में हमारे तीन कार्यकर्ता बलिदान हुए थे।
हमें सर्वे के माध्यम से आगामी दिनों में सुखद परिणाम मिलने की उम्मीद है। बता दें कि हिंदुओं के मुताबिक भोजशाला सरस्वती देवी का मंदिर है। सदियों पहले मुसलमानों ने इसकी पवित्रता भंग करते हुए यहां मौलाना कमालुद्दीन की मजार बनाई थी और अंग्रेज अधिकारी वहां लगी वाग्देवी की मूर्ति को लंदन ले गए थे।

