इंजी़नियर रमाकांत पिप्पल ने नईदुनिया से लोकसभा चुनाव के परिदृश्य में बसपा की स्थिति को लेकर विशेष बातचीत की।
By shashikant Tiwari
Publish Date: Fri, 05 Apr 2024 04:00 AM (IST)
Up to date Date: Fri, 05 Apr 2024 04:00 AM (IST)
HighLights
- बसपा प्रदेश अध्यक्ष इंजी. रमाकांत ने कहा- कम से कम पांच सीट जीतने का लक्ष्य।
- विधानसभा चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पर गठबंधन की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
- चुनाव में बेरोजगारी, महंगाई, अपराध बड़ा मुद्दा हैं।
शशिकांत तिवारी, भोपाल। मध्य प्रदेश की रीवा सीट से लोकसभा में अपना पहला सांसद भेजने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) इस चुनाव को अपने लिए अच्छा अवसर मान रही है। पार्टी अपना मत प्रतिशत पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में दोगुना से अधिक करने के साथ ही पांच सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए बूथ स्तर तक संगठन की मजबूत के लिए कार्य किए गए हैं।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इंजी़नियर रमाकांत पिप्पल का कहना है कि मत प्रतिशत जरूर कम हुआ है, पर यह कहना ठीक नहीं है कि बसपा का जनाधार घटा है। इस बात का प्रमाण पार्टी के कार्यक्रमों में आने वाली भीड़ है। पिप्पल ने नईदुनिया से लोकसभा चुनाव के परिदृश्य में बसपा की स्थिति को लेकर विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश-
क्या वजह है कि प्रदेश में बसपा का जनाधार लगातार खिसक रहा है?
उत्तर : मत प्रतिशत अवश्य कम हुआ है, पर जनाधार कम नहीं हुआ है। भाजपा ने जो नीति अपना ली है लोगों को डराने-धमकाने की। अधिकारी भी सीआर खराब होने या स्थानांतरण के डर से भयभीत रहते हैं। इस कारण बसपा ही नहीं सभी दलों पर प्रभाव पड़ा है। यह उतार-चढ़ाव तो चलते रहते हैं।
क्या जनाधार खिसकने के पीछे पार्टी की संगठनात्मक कमजोरियां या अन्य कारण हैं?
उत्तर : संगठन के स्तर पर कोई कमजोरी नहीं है। हर बूथ तक पार्टी का नेटवर्क रहा है। कभी-कभी संसाधन की कमी पार्टी के पास आ जाती है, क्योंकि यह धन्नासेठों की पार्टी नहीं है। किसान, मजदूर, गरीब की पार्टी है। पहले भाजपा इतना धन-बल का प्रयोग नहीं करती थी, इसलिए सीमित संसाधन में भी हम अच्छा करते थे।

इस लोकसभा चुनाव में मतदाताओं को रिझाने के लिए पार्टी क्या कर रही है?
उत्तर : भाजपा ने संविधान बदलने का मंत्र छेड़ा है। एससी, एसटी, आदिवासी गरीब को संविधान में भरोसा है। वह जान रहे हैं कि संविधान में बदलाव हुए तो वह गरीबों के हित में नहीं होगा। यह बड़ा मुद्दा है। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अपराध बढ़े हैं। किसान परेशान हैं। फसलों का एमएसपी लागू नहीं किया जा रहा है। बहन जी (मायावती) की नीतियां ”सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय” के लिए होती हैं। यही चुनाव के मुद्दे रहेंगे।
दूसरे दलों से कई बड़े नेता बसपा में आए पर ज्यादा दिन नहीं टिके। क्या वह पार्टी का सिर्फ इस्तेमाल करते हैं?
उत्तर : आजकल नेताओं में स्वार्थ बहुत अधिक देखने को मिल रहा है। ऐसा कई पार्टियों में हो रहा है। कांग्रेस के तो हजारों नेता चले गए। जो बसपा से कांग्रेस में आए वह भी चले गए। कारण, एक तो उन्हें जांच एजेंसियों का डर है। दूसरा, उन्हें लगता है कि तीसरी बार फिर सरकार बनेगी तो उनका भला हो जाएगा।
मध्य भारत और मालवा-निमाड़ अंचल में पार्टी बहुत कमजोर स्थिति में है?
उत्तर : यह सही है मालवा-निमाड़ और मध्य भारत में हम मजबूत नहीं हो पाए हैं। वहां कार्यकर्ता आर्थिक रूप से काफी कमजोर हैं। वह अपनी रोजी-रोटी में जुटा रहता है। उसे पता नहीं चलता कि क्या सही और क्या गलत है। हां, बसपा के कार्यकर्ता हर जगह हैं और काम कर रहे हैं।
विधानसभा चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ बसपा ने गठबंधन किया था, पर इस चुनाव में अकेले ही लड़ रहे हैं?
उत्तर : गठबंधन की शर्तों का गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने ठीक से पालन नहीं किया था। कुछ जगह तो जहां हमारे प्रत्याशी खड़े होने थे वहां गोंडवाना वालों ने भी अपने खड़े कर दिए थे।





