Lok Sabha Chunav 2024: मध्य प्रदेश में भाजपा के चक्रव्यूह को तोड़ने के प्रयास में जुटे दिग्विजय सिंह और कांतिलाल भूरिया

Lok Sabha Chunav 2024: मध्य प्रदेश में भाजपा के चक्रव्यूह को तोड़ने के प्रयास में जुटे दिग्विजय सिंह और कांतिलाल भूरिया

रतलाम में कांतिलाल भूरिया स्थानीय इकाइयों को एकजुट करने कर रहे हैं बैठकें, विक्रांत भूरिया ने संभाला मोर्चा।

By Vaibhav Shridhar

Publish Date: Fri, 05 Apr 2024 04:00 AM (IST)

Up to date Date: Fri, 05 Apr 2024 04:00 AM (IST)

दिग्विजय सिंह और कांतिलाल भूरिया।

HighLights

  1. 33 वर्ष बाद राजगढ़ से चुनाव लड़ रहे हैं दिग्विजय सिंह, संपर्कों को पुनर्जीवित करने के लिए कर रहे पदयात्रा।
  2. दोनों ही सीटों को लेकर भाजपा भी सतर्क है और प्रत्येक बूथ पर घेरने के लिए चक्रव्यूह तैयार किया है।
  3. भाजपा के लिए जिस तरह से छिंदवाड़ा सीट को जीतना प्रमुख लक्ष्य है, उसी तरह दिग्विजय सिंह को रोकना भी प्राथमिकता में है।

Lok Sabha Chunav 2024: वैभव श्रीधर, भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा दिया है। दिग्विजय सिंह 33 वर्ष बाद राजगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं तो रतलाम से फिर कांतिलाल भूरिया मैदान में हैं। दोनों ही सीटों को लेकर भाजपा भी सतर्क है और प्रत्येक बूथ पर घेरने के लिए चक्रव्यूह तैयार किया है।

स्थानीय नेताओं को आगे करके घेराबंदी की जा रही है तो वरिष्ठ नेता भी पहले चरण के चुनाव के बाद डेरा भी डालेंगे। उधर, भाजपा के चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए संपर्कों को पुनर्जीवित करने के लिए दिग्विजय सिंह पदयात्रा कर रहे हैं तो कांतिलाल भूरिया को अभी स्थानीय इकाइयों को सक्रिय करने में जुटे हैं।

भाजपा के लिए जिस तरह से प्रदेश की छिंदवाड़ा सीट को जीतना प्रमुख लक्ष्य है, उसी तरह दिग्विजय सिंह को लोकसभा पहुंचने से रोकना भी प्राथमिकता में है। शिवराज सरकार में डा.मोहन यादव राजगढ़ के प्रभारी मंत्री थे। जिले के पांच विधानसभा सीटें भाजपा ने जीतीं। जबकि, दिग्विजय सिंह के गृह क्षेत्र राघोगढ़ की सीट जयवर्धन सिंह 4,505 मतों से ही जीते।

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कुल मिलाकर भाजपा ने दिग्विजय सिंह की तगड़ी घेराबंदी की है। वे भी यह अच्छी तरह से जानते हैं कि भाजपा यहां छिंदवाड़ा के बाद सर्वाधिक ताकत लगाएगी इसलिए उन क्षेत्रों में फोकस अधिक कर रहे हैं, जहां कांग्रेस को वोट कम मिलते हैं। पदयात्रा के माध्यम से पुराने संपर्कों को ताजा करने के साथ मतदान केंद्रों के लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं की टीम भी तैयार की जा रही है।

जयवर्धन सिंह, प्रियव्रत सिंह, रामचंद्र दांगी, बापू सिंह तंवर से लेकर अन्य पूर्व विधायक भी अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय हैं तो राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन होने के कारण आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ी भाजपा की पूर्व विधायक ममता मीना का साथ भी मिलेगा।

वहीं, भाजपा के प्रत्याशी रोडमल नागर संगठन की ताकत के आधार पर बूथ स्तर पर जमावट में जुटे हैं। सूत्रों का कहना है कि पहले चरण का चुनाव होने के बाद मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का फोकस राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में होगा। यहां केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सहित अन्य बड़े नेताओं की सभा कराने की तैयारी है।

उधर, कांतिलाल भूरिया रतलाम संसदीय क्षेत्र में माइक्रो लेवल पर काम कर रहे हैं। उन्होंने स्थानीय इकाइयों के साथ बैठकें प्रारंभ कर दी हैं। आलीराजपुर जिले में विशेष ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि यहां से भाजपा ने अपने स्थापित नेता वन मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी अनीता चौहान को मैदान में उतारा है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां की आठ विधानसभा सीटों में से तीन पर जीत हासिल की थी।

वहीं, रतलाम जिले की तीन सीटों में से दो भाजपा और एक सैलाना सीट से भारतीय आदिवासी पार्टी के कमलेश्वर डोडियार जीती हैं। आलीराजपुर जिले में मुकाबला बराबर का रहा था। यहां की दो सीटों में एक भाजपा तो एक कांग्रेस के पास है। भूरिया की चुनौती यह है कि उन्हें भाजपा के साथ-साथ पार्टी के स्थानीय नेताओं का साथ प्राप्त करने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। दरअसल, यहां कांग्रेस यहां कई गुटों में बंटी है।