Lok Sabha Election 2024: पूर्वोत्तर में लोकसभा की 25 सीटें, जानिए यहां कैसा है घमासान

Lok Sabha Election 2024: पूर्वोत्तर में लोकसभा की 25 सीटें, जानिए यहां कैसा है घमासान

चुनाव शेड्यूल की बात करें तो पूर्वोत्तर की 25 सीटों में से 14 सीटों पर पहले चरण में 19 अप्रैल को और 11 सीटों पर दूसरे चरण में 26 अप्रैल को मतदान होगा।

By Sandeep Chourey

Publish Date: Thu, 04 Apr 2024 09:45 AM (IST)

Up to date Date: Thu, 04 Apr 2024 11:33 AM (IST)

असम की 14 सीटों पर पहले और दूसरे चरण में 5-5 और तीसरे चरण में 4 सीटों पर मतदान होगा।

HighLights

  1. पूर्वोत्तर भारत के 8 राज्यों में लोकसभा की 25 सीटें हैं।
  2. अकेले असम में 14 सीटें हैं।
  3. मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और त्रिपुरा में 2-2 सीटें हैं।

नीलू रंजन, नई दिल्ली। देश में बढ़ते तापमान के साथ सियासी पारा भी लगातार चढ़ रहा है। ऐसे में भाजपा पूर्वोत्तर में भी आक्रामक रणनीति से काम कर रही है और क्लीन स्वीप के तैयारी में जुटी हुई है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, इसके बावजूद एनडीए 25 में से 19 सीटें जीतने में सफल हुई थी। वहीं इस बार भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ तालमेल कर मैदान में आक्रामक रणनीति अपना रही है।

पूर्वोत्तर राज्यों में हैं 25 लोकसभा सीटें

पूर्वोत्तर भारत के 8 राज्यों में लोकसभा की 25 सीटें हैं, जिनमें अकेले असम में 14 सीटें हैं। मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और त्रिपुरा में 2-2 सीटें हैं, वहीं नागालैंड, सिक्किम और मिजोरम में 1-1 सीट है।

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पूर्वोत्तर में इन तारीखों में होगा मतदान

चुनाव शेड्यूल की बात करें तो पूर्वोत्तर की 25 सीटों में से 14 सीटों पर पहले चरण में 19 अप्रैल को और 11 सीटों पर दूसरे चरण में 26 अप्रैल को मतदान होगा। अरुणाचल प्रदेश की 2 सीटों पर साल 2014 में भाजपा और कांग्रेस 1-1 सीट जीती थी, लेकिन 2019 में भाजपा ने क्लीन स्वीप कर दिया। भाजपा इस बार फिर अरुणाचल में इतिहास दोहराने का प्रयास करेगी। मेघालय की बात की जाए तो कोनार्ड संगमा की NPP ने साल 2014 और 2019 में शिलांग में कांग्रेस को मात दी थी। यहां कांग्रेस सिर्फ तुरा सीट ही जीत पाई थी। अरुणाचल से NPP के उम्मीदवार वापस लेने के बाद भाजपा ने भी मेघालय में अपने उम्मीदवार वापस ले लिए हैं।

मणिपुर में भी भाजपा आश्वस्त

हिंसा से प्रभावित मणिपुर में भाजपा एक बार फिर 2019 का फार्मूले दोहरा सकती है। यहां इनर मणिपुर से भाजपा ने अपना प्रत्याशी खड़ा किया है, वहीं आउटर मणिपुर से सहयोगी दल नगा पीपुल्स फ्रंट को मौका दिया है। 2014 में मणिपुर की दोनों सीटें कांग्रेस ने जीती थी, लेकिन 2019 के बाद पासा पलट गया। नस्ली हिंसा के बावजूद भाजपा दोनों सीटें राजग के खाते में आने को लेकर आश्वस्त है। इनर मणिपुर में 19 अप्रैल और आउटर मणिपुर में 26 अप्रैल को वोटिंग होगी।

क्या त्रिपुरा में कायम रहेगी बढ़त?

त्रिपुरा में भाजपा ने CPM को 2017 के विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर कर दिया था। इसके बाद साल 2019 में लोकसभा चुनाव में दोनों लोकसभा सीटें भी जीत ली थी। इस बार के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा की स्थिति यहां काफी मजबूत है। इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा के साथ आने के बाद भाजपा का प्रभाव बढ़ गया है। पश्चिमी त्रिपुरा सीट पर 19 और पूर्वी त्रिपुरा की सीट पर 26 अप्रैल को मतदान है।

सिक्किम और मिजोरम अपवाद

पूर्वोत्तर भारत में सिक्किम और मिजोरम अपवाद है। मिजोरम में भाजपा और मिजो नेशनल फ्रंट दोनों मैदान में हैं। सिक्किम में भी भाजपा ने सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के साथ संबंध तोड़कर अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

असम में परिसीमन के कारण बदले समीकरण

असम की 14 सीटों पर पहले और दूसरे चरण में 5-5 और तीसरे चरण में 4 सीटों पर मतदान होगा। असम में परिसीमन के बाद सभी 14 सीटों के समीकरण बदल गए हैं। साल 2024 के आम चुनाव में पहली बार सीटों के परिसीमन का असर चुनाव नतीजों में भी देखने को मिल सकता है। साल 2014 में भाजपा 7 सीटों और साल 2019 में 9 सीटें जीती थी। असम में दोनों बार कांग्रेस के खाते में 3-3 सीटें आई थी। असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF 2014 में तीन और 2019 में एक सीट पर सिमट गई थी। AIUDF सिर्फ अपनी सीट बचा पाई थी। असम गण परिषद के साथ ही कांग्रेस ने भी मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतार कर AIUDF की मुश्किलें बढ़ा दी है।

पूर्वोत्तर में इसलिए भाजपा हो रही मजबूत

पूर्वोत्तर में भाजपा को बढ़त का मुख्य कारण नरेंद्र मोदी सरकार का 10 वर्षों का कार्यकाल है। इस दौरान विकास और शांति स्थापित करने में उल्लेखनीय कार्य किए गए। मोदी सरकार के कार्यकाल में सड़क, रेल और हवाई यात्रा की सुविधाओं बढ़ी है। देश के अन्य भागों से पूर्वोत्तर को दिलों को जोड़ने का भी काम किया है। पूर्वोत्तर के कई अलगाववादी संगठन समझौता कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं और उनके लगभग 10 हजार कैडर हथियार डाल चुके हैं।

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    कई मीडिया संस्थानों में कार्य करने का करीब दो दशक का अनुभव। करियर की शुरुआत आकाशवाणी केंद्र खंडवा से हुई। महाराष्ट्र में फील्ड रिपोर्टिंग, भोपाल दूरदर्शन, ETV न्यूज़ सहित कुछ रीजनल न्यूज चैनल में काम करके इलेक्