अतीक अहमद से लेकर मुख्तार अंसारी तक, पूर्वी यूपी में एक साल के अंदर अपराध के एक युग का अंत हुआ

राजनीतिक संरक्षण में मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद दोनों ने पूर्वी यूपी में काफी प्रभाव रखा। दोनों पर हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों की हत्या का आरोप था।

By Kushagra Valuskar

Publish Date: Fri, 29 Mar 2024 09:40 PM (IST)

Up to date Date: Fri, 29 Mar 2024 09:40 PM (IST)

अतीक अहमद से लेकर मुख्तार अंसारी तक, पूर्वी यूपी में एक साल के अंदर अपराध के एक युग का अंत हुआ
अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी (फाइल फोटो)

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दो सबसे बड़े गैंगस्टरों की मौत के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपराध के एक युग का अंत हो गया है। कभी पूर्वांचल में खौफ का नाम रहे अतीक अहमद की पुलिस हिरासत में गोली लगने से मौत हो गई, जबकि मुख्तार अंसारी की मौत हार्ट अटैक से हुई है। हालांकि मुख्तार के परिवार ने जेल में जहर देकर मारने का आरोप लगाया है।

राजनीतिक संरक्षण में मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद दोनों ने पूर्वी यूपी में काफी प्रभाव रखा। दोनों पर हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों की हत्या का आरोप था। उनकी आपराधिक गतिविधियों में जमीन पर कब्जा करना, कॉन्ट्रैक्ट हत्याएं, अपहरण और जबरन वसूली शामिल थी।

सपा और बसपा ने राजनीतिक संरक्षण दिया

बड़ी संख्या में जघन्य अपराध में शामिल मुख्तार और अतीक को सपा और बसपा से कई सालों तक राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होते रहा। इस कारण कानून की पकड़ से बचते रहे। पार्टियों ने अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए दोनों माफियों का का समर्थन किया। मुख्तार अंसारी लगातार पांच बार मऊ से विधायक रहे।

योगी सरकार आते ही बदला माहौल

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनते ही माफियों को सजाएं मिलती दिखी। सीएम आदित्यनाथ ने पुलिस को राज्य में कुख्यात अपराधियों से निपटने के लिए खुली छूट दे दी। पुलिस ने अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और विकास दुबे समेत कई गैंगस्टरों के खिलाफ माफिया विरोधी अभियान चलाया। अपराधियों की संपत्तियां जब्त कर ली गई और उन्हें जमींदोज कर दिया गया।

मुख्तार अंसारी को योगी सरकार में अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया है। अंसारी जो 2005 से 66 मामलों का सामना कर रहे थे। उन्हें 2017 तक कभी दोषी नहीं ठहराया गया था। इसी तरह पुलिस और न्यायिक प्रणाली पर सालों की हेरा-फेरी और प्रभाव के बाद 1997, 1999 और 2000 के मामलों में उनके खिलाफ आरोप तय किए गए। वहीं, अतीक अहमद को 2017 से लगातार पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उनकी 1400 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई। उनके बेटे अब्बास अहमद को भी यूपी पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था।

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    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मास कम्युनिकेशन स्नातक कुशाग्र वालुस्कर नईदुनिया डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर हैं। कंटेंट क्रिएशन के साथ नजर से खबर पकड़ने में माह