सुरों से सियासत तक… जानें कितनी पढ़ी-लिखी हैं बिहार की बेटी मैथिली ठाकुर?
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हाल ही में उन्होंने बीजेपी नेताओं नित्यानंद राय और विनोद तावड़े से मुलाकात की. इसके बाद से सोशल मीडिया और मीडिया जगत में उनकी चुनावी भागीदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है. उनके फैंस सोशल मीडिया पर उन्हें ‘बिहार की नई आवाज़’ कहकर सपोर्ट कर रहे हैं.

मैथिली ठाकुर का जन्म बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी इलाके में 25 जुलाई 2000 को हुआ. उनके पिता रमेश ठाकुर खुद संगीतकार हैं और मां पूजा ठाकुर हाउसवाइफ. घर में ही संगीत का माहौल होने की वजह से मैथिली ने रियाज और रागों की भाषा घर की हवा में ही सीखी.

उनके दो भाई ऋषभ और अयाची ठाकुर भी संगीत की दुनिया में सक्रिय हैं. तीनों अक्सर साथ में लाइव परफॉर्म करते हैं और सोशल मीडिया पर उनके गीत लाखों लोगों तक पहुँचते हैं.

मैथिली सिर्फ गायिका ही नहीं, बल्कि काफी पढ़ी-लिखी और समझदार युवा कलाकार भी हैं. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव में की. कुछ साल बाद परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया और मैथिली ने वहां बाल भवन इंटरनेशनल स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की.

इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. संगीत और पढ़ाई दोनों में संतुलन बनाना उन्होंने बहुत ही खूबसूरती से किया है.

मैथिली ठाकुर को उनके संगीत और योगदान के लिए कई अवॉर्ड मिल चुके हैं. 2024 में बिहार सरकार ने उन्हें राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड का ब्रांड एंबेसडर बनाया. इससे पहले उन्हें संगीत नाटक अकादमी का उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार भी मिल चुका है. यह पुरस्कार किसी भी युवा कलाकार के लिए बेहद सम्मान की बात माना जाता है.

मैथिली ठाकुर सिर्फ मंचों की ही नहीं, सोशल मीडिया की भी सुपरस्टार हैं. उनके यूट्यूब चैनल पर करोड़ों व्यूज और लाखों फॉलोवर्स हैं. उनके फैंस उन्हें प्यार से ‘जूनियर बिहार कोकिला’ कहते हैं. मैथिली की आवाज़ मैथिली, भोजपुरी या हिंदी किसी भी भाषा में हो, दिल को छू जाती है. उनके गीतों में लोकधुनों की मिठास और उनकी सादगी साफ झलकती है.
Published at : 12 Oct 2025 08:01 AM (IST)
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