
World Arthritis Day के मौके पर यह समझना जरूरी है कि जोड़ों की देखभाल केवल बढ़ती उम्र में ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों के जरिए भी की जानी चाहिए. डेस्क जॉब करने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को गठिया हो ही जाएगा, लेकिन लंबे समय तक बैठे रहना, गलत पोश्चर और बार-बार एक ही तरह की गतिविधि करना मांसपेशियों और जोड़ों पर दबाव बढ़ा सकता है.

हमारे जोड़ सामान्य गतिविधियों के दौरान हिलते-डुलते रहते हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता और आसपास की मांसपेशियों की सक्रियता बनाए रखने में मदद मिलती है. जब कोई व्यक्ति कई घंटों तक लगातार बैठा रहता है, तो कूल्हों के आसपास की मांसपेशियों में खिंचाव और अकड़न महसूस होन लगती है. वहीं, कमर और रीढ़ पर लंबे समय तक पड़ने वाला दबाव पीठ दर्द की वजह बन सकता है. कंप्यूटर स्क्रीन की ओर लगातार झुककर देखने से गर्दन पर अतिरिक्त तनाव पड़ता है. इसी तरह, कंधों को आगे की ओर झुकाकर बैठने से भी परेशानी बढ़ सकती है. शुरुआत में ये लक्षण काम के बाद दिखाई देते हैं, लेकिन अगर रोजाना यही दिनचर्या बनी रहे, तो परेशानी बार-बार महसूस होने लगती है.

डेस्क जॉब में केवल बैठने के पोश्चर ही नहीं, बल्कि हाथों की बार-बार होने वाली गतिविधियां भी महत्वपूर्ण हैं. लगातार टाइपिंग करना, माउस क्लिक करना और कलाई को एक ही स्थिति में रखना हाथों, अंगूठे और उंगलियों के आसपास दर्द या खिंचाव पैदा कर सकता है. अगर माउस बहुत दूर रखा हो या कुर्सी की ऊंचाई सही न हो, तो हाथों के साथ कंधों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है. लगातार काम करने से कुछ लोगों को उंगलियों में झनझनाहट या कलाई में दर्द महसूस होता है. ऐसे लक्षणों को केवल काम की थकान समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है.

कई बार परेशानी की वजह काम की अधिकता के साथ-साथ ऑफिस में बैठने का गलत तरीका भी होता है. अगर कंप्यूटर स्क्रीन आंखों के स्तर से नीचे है, तो व्यक्ति अनजाने में गर्दन झुकाकर काम करता है. इसी तरह कमर को पर्याप्त सहारा न देने वाली कुर्सी पर बैठने से पीठ पर दबाव बढ़ सकता है. काम करते समय पैर जमीन पर टिके होने चाहिए और कोहनी लगभग 90 डिग्री के कोण पर होनी चाहिए. स्क्रीन को आंखों के सामने उचित ऊंचाई पर रखना और कीबोर्ड व माउस को पास रखना भी मददगार होता है. लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करने वालों के लिए लैपटॉप स्टैंड के साथ अलग कीबोर्ड और माउस का इस्तेमाल करना बेहतर होता है.

डेस्क जॉब के दौरान जोड़ों की देखभाल के लिए दिनचर्या में बड़े बदलाव करना जरूरी नहीं है. छोटी-छोटी आदतें भी फायदेमंद हो सकती हैं. हर 30 से 45 मिनट में ब्रेक लें और कुछ देर खड़े हों, थोड़ा चलें या हल्की स्ट्रेचिंग करें. सबसे जरूरी है पोश्चर पर ध्यान देना. पीठ को सहारा दें और गर्दन को लंबे समय तक आगे झुकाकर न रखें. टाइपिंग और माउस के इस्तेमाल के बीच छोटे ब्रेक लें और कलाई को आरामदायक स्थिति में रखें. नियमित वॉक और अपनी एक्सरसाइज शरीर को एक्टिव रखने में मदद करते हैं. वहीं पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित करना शरीर की रिकवरी के लिए महत्वपूर्ण है. ऐसे में अच्छी नींद लेना बेहज जरूरी है.

काम के बाद कभी-कभार हल्की अकड़न महसूस होना और लगातार दर्द बने रहना आम हो सकता है. अगर दर्द बार-बार हो रहा है, नींद में परेशानी पैदा करता है या हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन अथवा कमजोरी दिखाई देती है, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए.
Published at : 13 Oct 2026 09:07 AM (IST)
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Joint Pain Problems





