सऊदी प्रिंस कड़ी सुरक्षा वाले गुप्त बंकर में छिपे! डिफेंस स्टॉक हो रहा खत्म, बड़ा अपडेट


मौजूदा समय में वैश्विक भू-राजनीति कई मोर्चों पर एक साथ सुलग रही है. एक तरफ जहां रूस-यूक्रेन युद्ध के मैदान से लगातार चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मध्य पूर्व में भी तनाव चरम पर पहुंच चुका है. यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर अपने हमलों को जिस तरह से तेज किया है, उसने रियाद के रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है. इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ी चर्चा सऊदी अरब के वास्तविक शासक और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की सुरक्षा को लेकर हो रही है, जिन्हें कथित तौर पर अत्यधिक सुरक्षित और गुप्त अंडरग्राउंड बंकरों में शिफ्ट कर दिया गया है.

MBS को कड़ी सुरक्षा वाले गुप्त बंकरों में क्यों छिपाया गया?

अमेरिकी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की हालिया रिपोर्ट ने दुनिया भर के सुरक्षा हलकों और कूटनीतिक गलियारों में भारी हलचल मचा दी है. रिपोर्ट के अनुसार, यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लगातार किए जा रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण सऊदी अरब का एयर डिफेंस नेटवर्क गंभीर दबाव में आ गया है. स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि रियाद के पास मौजूद इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक खतरनाक स्तर तक कम हो गया है.

इस मची उथल-पुथल के बीच, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा देश की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है. खुफिया और रक्षा रिपोर्टों से पता चलता है कि MBS अब अपने पारंपरिक और आम महलों में नहीं रह रहे हैं. उन्हें पूरी तरह से सीक्रेट, अत्यधिक सुरक्षित और आधुनिक तकनीक से लैस भूमिगत ठिकानों पर भेज दिया गया है. इन बंकरों की संरचना और सुरक्षा व्यवस्था इतनी चाक-चौबंद है कि वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता.

इन सुरक्षित गुप्त ठिकानों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं

ब्लास्ट और मिसाइल-प्रूफ संरचना: ये बंकर जमीन से कई फीट नीचे बेहद मजबूत कंक्रीट और स्टील से बनाए गए हैं, जो किसी भी बड़े मिसाइल हमले या बंकर-बस्टर बम के विनाशकारी असर को पूरी तरह से बेअसर करने में सक्षम हैं.

विशेष सुरक्षा दस्ता: क्राउन प्रिंस की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे एक विशेष और हैंडपिक्ड (चुनिंदा) सुरक्षा टीम तैनात रहती है, जिन्हें अत्याधुनिक हथियारों और विशेष प्रशिक्षण से लैस किया गया है.

स्वतंत्र जीवन-रक्षक प्रणाली: इन बंकरों के भीतर आधुनिक ऑक्सीजन जनरेटर, उन्नत एयर-फिल्ट्रेशन सिस्टम और स्वतंत्र पावर बैकअप की मुकम्मल व्यवस्था की गई है. इसके जरिए बिना बाहर निकले हफ्तों तक सुरक्षित तरीके से सरकार और सैन्य कमान संभाली जा सकती है.

पूरे देश में एयर डिफेंस की कमी

मिसाइल स्टॉक में आई भारी गिरावट के बाद, सऊदी अरब जैसे विशाल देश के चप्पे-चप्पे की सुरक्षा करना एक असंभव लॉजिस्टिकल और सामरिक चुनौती बन चुका है. इस मजबूरी के चलते रियाद प्रशासन ने अपनी सैन्य रणनीति में एक बड़ा और आपातकालीन बदलाव किया है. प्रशासन ने देश के सामान्य नागरिक इलाकों और अन्य हिस्सों से अपनी बची हुई एयर डिफेंस बैटरियों को हटाकर उन्हें चुनिंदा रणनीतिक जगहों पर री-डिप्लॉय करना शुरू कर दिया है.

सऊदी अरब अब अपनी सुरक्षा का दायरा समेटते हुए उसे केवल दो बेहद अहम और संवेदनशील जगहों पर केंद्रित कर रहा है.

क्रिटिकल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर: देश के विशाल तेल क्षेत्र, रिफाइनरियां और गैस प्लांट, जिन पर न केवल सऊदी अरब बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की ऊर्जा आपूर्ति टिकी हुई है. यदि इन पर बड़ा हमला होता है, तो देश की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है.

शाही निवास: वे सुरक्षित महल जहां क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और शाही परिवार के शीर्ष सदस्य निवास करते हैं. सैन्य विश्लेषकों का स्पष्ट रूप से मानना है कि एयर डिफेंस प्रणालियों को इस तरह से समेटने की मजबूरी इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि सऊदी सेना के पास हथियारों और इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी हो गई है. देश के पास अब इतने संसाधन नहीं बचे हैं कि वह एक ही समय में अपनी पूरी भौगोलिक सीमा और हवाई क्षेत्र की रक्षा कर सके.

800 किलोमीटर अंदर तक मार

सऊदी अरब का यह खौफ और सुरक्षा को लेकर बरती जा रही अत्यधिक सावधानी पूरी तरह से बेबुनियाद नहीं है. हाल ही में सऊदी हवाई क्षेत्र में हुई सुरक्षा चूक की एक बड़ी घटना ने रियाद के होश उड़ा दिए थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई क्रूज मिसाइलें सऊदी सीमा के अंदर 800 किलोमीटर से भी अधिक की दूरी तय करते हुए देश के भीतर तक घुस गईं.

इस दौरान दो प्रमुख घटनाएं सामने आईं. पहली क्रूज़ मिसाइल की घटना, इस मिसाइल ने राजधानी रियाद स्थित रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ को अपना निशाना बनाया था. गनीमत यह रही कि सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते इसे हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया.

दूसरी क्रूज़ मिसाइल रियाद के एयर डिफेंस रडार और सुरक्षा घेरे को पूरी तरह चकमा देने में कामयाब रही और देश के भीतर अपने तयशुदा लक्ष्य पर जा गिरी.

राजधानी के इतने करीब और 800 किलोमीटर की गहराई तक मिसाइलों के पहुंच जाने की इस क्षमता ने सऊदी अरब के मौजूदा रक्षा नेटवर्क की पोल खोल दी है और यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक डिफेंस सिस्टम अब पूरी तरह अचूक नहीं रह गए हैं.

डिफेंस स्टॉक इतनी तेजी से क्यों खत्म हो रहा है? 

सऊदी अरब अपनी रक्षात्मक आवश्यकताओं के लिए मुख्य रूप से अमेरिका में निर्मित ‘पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम’ पर निर्भर है. हालांकि, यह रक्षा मॉडल अब रियाद के लिए एक गंभीर आर्थिक और रणनीतिक दुविधा बन चुका है. इसके पीछे एक बहुत बड़ा वित्तीय गणित और लागत का भारी अंतर है.

सस्ते ड्रोन बनाम महंगी मिसाइलें: यमन के हूती विद्रोही जिन छोटे ड्रोन्स, रॉकेटों और कम लागत वाली देसी मिसाइलों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें तैयार करने में कुछ हजार डॉलर ही खर्च होते हैं. 

आसमान में आ रहे इन सस्ते खतरों को हवा में ही बेअसर करने और नष्ट करने के लिए सऊदी अरब को अपनी अत्याधुनिक ‘पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल’ दागनी पड़ती है. इनमें से प्रत्येक इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत लगभग 25 से 30 करोड़ भारतीय रुपये (यानी करीब 3 से 4 मिलियन अमेरिकी डॉलर) बैठती है.

लागत के इस भारी-भरकम अंतर और अमेरिका से नए रक्षा हार्डवेयर व हथियारों की सप्लाई में हो रही लगातार देरी के कारण सऊदी अरब का सक्रिय मिसाइल स्टॉक तेजी से खाली हो गया है. इसी आपूर्ति संकट और सुरक्षा के अत्यधिक जोखिम के चलते क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने बंकरों से ही देश की बागडोर संभालने का फैसला किया है. यह संकट न केवल सऊदी अरब की सैन्य तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आधुनिक युद्धक तकनीक में लागत का यह संतुलन किसी भी देश की अर्थव्यवस्था पर कितना भारी पड़ सकता है.