महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और अन्य नेताओं को लेकर जारी विवाद के बीच राज्य सरकार ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को समिति का सचिव बनाया गया है, जबकि मुंबई हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दिलीप भोसले इसकी अध्यक्षता करेंगे. सरकार के इस फैसले के बाद पुणे में करीब 11 दिनों से प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया.
उम्मीदवार परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और पेपर लीक के मामले में करवाई और एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफा की मांग कर रहे थे. रविवार को लोक निर्माण विभाग मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने प्रदर्शनकारी छात्रों और उनके समर्थन में पहुंचे नेताओं से मुलाकात की. बातचीत के बाद सरकार ने जांच समिति बनाने और आंदोलनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने का आश्वासन दिया.
समिति में ये नाम शामिल
एमपीएससी की कार्यप्रणाली और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए गठित समिति में तुकाराम मुंढे के अलावा पूर्व न्यायाधीश पीडी नाईक, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम शामिल हैं. समिति को दो महीने यानी 60 दिनों के अंदर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी. समिति एमपीएससी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों की जांच करेगी. साथ ही आयोग के कामकाज की समीक्षा कर परीक्षा की कमियों की पहचान और जरूरी सुधार के सुझाव देगी. तुकाराम मुंढे फिलहाल महाराष्ट्र के खाद्य औषधि प्रशासन में आयुक्त के पद पर कार्यरत है.
जांच पूरी होने तक छुट्टी पर रहेंगे अध्यक्ष
उम्मीदवारों की प्रमुख मांगों में एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाना भी शामिल है. परीक्षा सरकार ने उन्हें फिलहाल पद से हटाने की बजाय जांच पूरी होने तक अनिवार्य छुट्टी पर भेजने का फैसला किया है. भीमनवार ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर छुट्टी पर जाने की जानकारी दी है. उन्होंने कहा है कि अपने पूरे जीवन में नैतिकता को प्राथमिकता देते आए हैं. ऐसे में जांच पूरी होने तक पद पर बने रहने के बजाय उन्हें छुट्टी पर जाने का निर्णय लिया है.
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3 साल में 70,000 पदों पर भर्ती की मांग
आंदोलन के दौरान उम्मीदवारों ने महाराष्ट्र में खाली सरकारी पदों को भरने की मांग उठाई. उनकी मांग है कि राज्य सरकार अगले 3 सालों में 70,000 पदों पर भर्ती करें. इसके अलावा जनवरी में प्रस्तावित ग्रुप-सी परीक्षा में रिक्तियों की संख्या बढ़ाने और एमपीएससी की अध्यक्षता व सचिव की नियुक्ति से पहले उनके पिछले रिकॉर्ड की जांच करने की मांग भी की गई. सरकार की ओर से 70,000 पदों पर भर्ती करने का आश्वासन दिए जाने की जानकारी सामने आई है. हालांकि भर्ती को लेकर विस्तृत रोडमैप और इन मांगों पर अमल की प्रक्रिया जरूरी होगी.
इंस्पेक्टर परीक्षा के बाद बढ़ा विवाद
एमपीएससी को लेकर उम्मीदवारों की नाराजगी ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक के मामले के बाद बढ़ी. यह परीक्षा 22 मार्च 2026 को हुई थी. जुलाई में रिजल्ट जारी होने और इंटरव्यू की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद विवाद सामने आया. इसके बाद आयोग ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप बी पदों की भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी. इस मामले में परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए.
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