MP Lok Sabha Election 2024: मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव में एक बार फिर आमने-सामने होंगे तीन उम्मीदवार
Madhya Pradesh Lok Sabha Election 2024: मंडला में ओमकार सिंह मरकाम ने कुलस्ते को दी थी कड़ी टक्कर।
By Prashant Pandey
Publish Date: Tue, 26 Mar 2024 03:21 PM (IST)
Up to date Date: Tue, 26 Mar 2024 03:25 PM (IST)

HighLights
- बैतूल ऐसी सीट है जहां भाजपा और कांग्रेस से फिर वही उम्मीदवार मैदान में है।
- बैतूल से दुर्गादास उइके और रामू टेकाम लगातार दूसरी बार प्रतिद्वंद्वी बने हैं।
- सतना लोकसभा सीट से भाजपा के गणेश सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धार्थ कुशवाहा विधानसभा चुनाव में भी मैदान में थे।
Madhya Pradesh Lok Sabha Election 2024: नवदुनिया राज्य ब्यूरो, भोपाल। कहा जाता है कि राजनीति में कभी कुछ भी हो सकता है। कभी एक-दूसरे को धूल चटाने के लिए राजनीति के मैदान में उतरे प्रतिद्वंद्वी एक बार फिर आमने-सामने हैं। वह पिछले चुनाव के आधार पर एक-दूसरे की कमजोरियों पर प्रहार कर बाजी अपने पक्ष में करने की कोशिश में लगे हैं।
मंडला से भाजपा प्रत्याशी फग्गन सिंह कुलस्ते और कांग्रेस के ओमकार सिंह मरकाम 2014 के बाद फिर आमने-सामने हैं। तब मरकाम एक लाख 10 हजार 469 मतों से हार गए थे। इसी तरह बैतूल से दुर्गादास उइके और रामू टेकाम लगातार दूसरी बार प्रतिद्वंद्वी बने हैं।
पिछले लोकसभा चुनाव में टेकाम तीन लाख 60 हजार 241 मतों से पराजित हुए थे। सतना लोकसभा सीट से भाजपा के गणेश सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धार्थ कुशवाहा विधानसभा चुनाव में भी मैदान में थे। कुशवाहा ने इसमें गणेश सिंह 4,041 मतों से हराया था।
लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने सभी 29 तो कांग्रेस ने 22 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इनमें बैतूल ऐसी सीट है जहां भाजपा और कांग्रेस से फिर वही उम्मीदवार मैदान में है। इस सीट पर कांग्रेस से आखिरी बार 1991 में असलम शेर खान जीते थे। 1996 से लगातार भाजपा जीतती आ रही है।
वर्तमान सांसद दुर्गादास उइके पहली बार 2019 में जीते थे। रामू टेकाम आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। क्षेत्र में उनकी पकड़ को देखते हुए कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया है। वह विधानसभा चुनाव में बैतूल से टिकट मांग रहे थे, तभी पार्टी पदाधिकारियों ने उन्हें लोकसभा का टिकट दिलाने का आश्वासन दिया था।
सतना लोकसभा सीट पिछले छह बार (1998 से) भाजपा जीत रही है। ऐसे में यह सीट कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। सिद्धार्थ कुशवाहा पिछले विधानसभा चुनाव में गणेश सिंह को हराकर दूसरी बार विधायक बने हैं। दोनों प्रत्याशी ओबीसी वर्ग से हैं। इस वर्ग के मतदाता भी यहां बड़ी संख्या में हैँ।
सिद्धार्थ के पिता सुखलाल कुशवाहा भी यहां से 1996 में कांग्रेस प्रत्याशी अर्जुन सिंह और भाजपा के वीरेंद्र सखलेचा को हराकर जीते थे। जातिगत समीकरण को देखते हुए बसपा ने यहां से नारायण त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
मंडला सीट की बात करें तो भाजपा प्रत्याशी और सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते 2019 के लोकसभा चुनाव में 97 हजार 674 मतों से जीते थे, पर पिछला विधानसभा चुनाव निवास सीट से कांग्रेस के चैन सिंह बरकड़े से हार गए थे।


