भारतीय कंपनियों के लिए Cyber Risk अलर्ट, 96 पर्सेंट फर्म्स पर असर

भारतीय कंपनियों के लिए Cyber Risk अलर्ट, 96 पर्सेंट फर्म्स पर असर


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  • भारत का सुरक्षा स्कोर 66 रहा, पर AI उपयोग चिंताएँ बढ़ाता है.

AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अटैक का खतरा भी कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. Cisco की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले 12 महीनों के दौरान 96 फीसदी संगठनों को ऐसे साइबर इंसिडेंट का सामना करना पड़ा, जिसका उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ा. इनमें एक-तिहाई से ज्यादा मामलों में AI की मदद से किए गए अटैक शामिल थे. कंपनियों के लिए साइबर सिक्योरिटी अब सिर्फ टेक्नोलॉजी से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर बिजनेस ऑपरेशन पर भी पड़ रहा है. 

साइबर डिफेंस में टेक्नोलॉजी से ज्यादा बड़ी दिक्कत क्या?

Cisco की Relentless Defense Report में बताया गया है कि कंपनियों की साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करने में सिर्फ टेक्नोलॉजी की कमी ही समस्या नहीं है. अप्रूवल में देरी, अलग-अलग जगह बंटा डेटा और आपस में ठीक से कनेक्ट न रहने वाली टीमें भी सिक्योरिटी मजबूत करने की राह में बड़ी रुकावट बन रही हैं. यह रिपोर्ट 30 बाजारों में 8,000 सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स के डबल-ब्लाइंड सर्वे पर आधारित है. इसमें भारत के 1,000 लोगों को भी शामिल किया गया था. 

भारत का सिक्योरिटी स्कोर 66 रहा

रिपोर्ट में कंपनियों को उनके सिक्योरिटी सिस्टम की कवरेज, साइबर खतरे पहचानने की स्पीड और उन्हें ठीक करने की क्षमता के आधार पर आंका गया. भारत का औसत स्कोर 100 में 66 रहा, जबकि ग्लोबल औसत 64 था, हालांकि भारत में सिर्फ 8 फीसदी संगठन ही सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कैटेगरी में पहुंचे. ग्लोबल स्तर पर भी यह आंकड़ा 8 फीसदी ही रहा. रिपोर्ट के मुताबिक, इन टॉप संगठनों में सिक्योरिटी कवरेज बेहतर होने के साथ खतरे पहचानने और उन पर तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता भी ज्यादा थी. 

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Security, IT और Networking टीमों के बीच गैप

भारत में सिर्फ 40 फीसदी लोगों ने कहा कि उनकी सिक्योरिटी, नेटवर्किंग और IT टीमें एक साथ काम करती हैं और उनके पास साझा टूल्स व विजिबिलिटी है. इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में संगठनों में सिक्योरिटी से जुड़े काम अलग-अलग टीमों में बंटे हुए हैं. डेटा भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया. 44 फीसदी भारतीय संगठनों ने बताया कि वह असली साइबर खतरों से निपटने की जगह अलग-अलग सिस्टम से डेटा इकट्ठा करने और उसे जोड़ने में ज्यादा समय लगा रहे हैं. वहीं 43 फीसदी ने माना कि डेटा सिलोज तक पहुंच न होने के कारण जरूरी जानकारी सामने नहीं आ पाती है. 

क्या AI साइबर सिक्योरिटी को बना रहा है ज्यादा मजबूत?

भारत में 90 पर्सेंट से ज्यादा सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक AI से साइबर खतरे पहचानने और उन पर कार्रवाई की क्षमता कम से कम 25 पर्सेंट बेहतर हुई है. करीब 40 पर्सेंट कंपनियां AI एजेंट्स का इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन डेटा लीक और सिस्टम सिक्योरिटी को लेकर अभी भी चिंता बनी हुई है. 

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