एलन मस्क के बच्चे किस स्कूल में पढ़ते हैं, वहां कितनी फीस?

एलन मस्क के बच्चे किस स्कूल में पढ़ते हैं, वहां कितनी फीस?


दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने की रेस में सबसे आगे चल रहे और टेस्ला-स्पेसएक्स जैसी कंपनियों के मालिक एलन मस्क अपनी बेहिसाब दौलत और अनोखे विचारों के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं. एलन मस्क का मानना है कि दुनिया की पारंपरिक शिक्षा प्रणाली बच्चों का भविष्य संवारने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है. इसी सोच के कारण मस्क ने अपने बच्चों को किसी आम या नामी स्कूल में भेजने के बजाय खुद का स्कूल शुरू कर दिया. उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए बनाए गए इस सीक्रेट स्कूल के शिक्षा मॉडल और भारी-भरकम फीस ने इस समय पूरी दुनिया के पैरेंट्स को हैरान कर रखा है. 

मस्क के बच्चों के लिए खुला अड एस्ट्रा स्कूल

एलन मस्क ने साल 2014 में अपने बच्चों को पारंपरिक स्कूलों से बाहर निकाल लिया था. उन्होंने स्पेसएक्स के कैलिफोर्निया हेडक्वार्टर में ही एक बेहद निजी स्कूल की शुरुआत की, जिसे अड एस्ट्रा नाम दिया गया. लैटिन भाषा के इस शब्द का अर्थ होता है- सितारों की ओर. इस स्कूल में शुरुआत में मुख्य रूप से केवल एलन मस्क के खुद के बच्चे और उनके स्पेसएक्स के चुनिंदा कर्मचारियों के बच्चे ही पढ़ते थे. इस स्कूल को पूरी तरह सीक्रेट रखा गया था और इसमें पारंपरिक विषयों की जगह पूरी आधुनिक दुनिया की शिक्षा दी जाती थी. 

अब एस्ट्रा नोवा के रूप में ऑनलाइन हुआ स्कूल

समय बदलने के साथ अड एस्ट्रा स्कूल का दायरा बढ़ा और साल 2020 में इसे एस्ट्रा नोवा नाम से पूरी दुनिया के बच्चों के लिए खोल दिया गया है. दिलचस्प बात यह है कि मस्क का यह स्कूल कोई फिजिकल स्कूल नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह वर्चुअल ऑनलाइन मॉडल पर चलता है. 10 से 15 साल के बच्चों के लिए डिजाइन किए गए इस स्कूल में दुनिया के किसी भी कोने से बच्चे घर बैठे स्क्रीन के जरिेए दाखिला ले सकते हैं. 

कितनी है मस्क के इस स्कूल की फीस?

अगर इस स्कूल के फीस की बात करें, तो यह पूरी दुनिया की सबसे महंगी ऑनलाइन क्लास में से एक है. एस्ट्रा नोवा स्कूल में 2 घंटे की क्लास की फीस 4,800 डॉलर भारतीय रुपये में करीब 4 लाख रुपये निर्धारित की गई है.

इस स्कूल के नियमों के मुताबिक, किसी भी छात्र को कम से कम दो घंटे की क्लास के लिए नामांकन कराना अनिवार्य होता है. छात्र अपनी जरूरत के हिसाब से अधिकतम 16 घंटे तक की क्लासेस चुन सकते हैं, जिसके लिए सालाना ट्यूशन फीस लगभग 36,000 डॉलर करीब 30.25 लाख रुपये से अधिक से अधिक तक पहुंच जाती है. 

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न कोई परीक्षा, न नंबर और न ही कोई भाषा

मस्क के इस स्कूल का पूरा सिलेबस और पढ़ने का तरीका हैरान करने वाला है. इस स्कूल में न तो बच्चों को कोई ग्रेड या नंबर दिए जाते हैं और न ही यहां कोई पारंपरिक परीक्षाएं होती हैं, मस्क का मानना है कि भाषा और संगीत जैसी चीजें सीखने में समय गंवाने के बजाय बच्चों को AI, कोडिंग, रोबोटिक्स और क्रिटिकल थिंकिग सिखानी चाहिए, यहां बच्चों का किताबी ज्ञान देने के बजाय सिंथेसिस और एथिकल डिलेमा यानी नैतिक उलझनें जैसी व्यावहारिक समस्याएं सुलझाने की ट्रेनिंग दी जाती है.

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