‘उसने पीछे से वार किया’, स्मित माछर ने नेतन्याहू से फोन पर क्या की बात, पूरा VIDEO


दुबई से इजरायल जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में कथित कॉकपिट हमले को नाकाम करने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित माछर से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार को फोन पर बात की. बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने माछर की हिम्मत और मुश्किल हालात में सूझबूझ की तारीफ करते हुए उन्हें इजरायल, भारत और पूरी दुनिया का हीरो बताया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैप्टन माछर को अगले इजरायली स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया. यह सम्मान आमतौर पर इजरायली नागरिकों के लिए होता है.

माछर ने इस भावुक बातचीत में नेतन्याहू को कॉकपिट के अंदर हुए हमले के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने बताया कि किस तरह सह-पायलट के अचानक हमले के बाद विमान तेजी से नीचे जाने लगा और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश जारी रखी.

सह-पायलट प्रार्थना करने गया, कुछ मिनट बाद पीछे से हुआ हमला

माछर ने बताया कि उड़ान सामान्य तरीके से चल रही थी. उनके साथ मौजूद सह-पायलट ने प्रार्थना करने की बात कही. माछर ने कहा कि सम्मान के चलते वह आगे की ओर देखते रहे और पीछे की तरफ ध्यान नहीं दिया. करीब चार से पांच मिनट बाद उन्हें सिर के पीछे जोरदार चोट लगी. शुरुआत में उन्हें लगा कि विमान को कोई बड़ा नुकसान हुआ है. लेकिन जब लगातार हमले होते रहे तो उन्हें समझ आया कि विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि कॉकपिट में मौजूद सह-पायलट ही उन पर हमला कर रहा है. माछर ने बताया कि उन्होंने हमलावर को रोकने की कोशिश की, लेकिन लगातार चोट लगने के कारण उनकी आंखों के सामने धुंधलापन छाने लगा. इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि विमान बहुत तेजी से नीचे जा रहा है.

एक बार दरवाजा खोला, सह-पायलट ने फिर बंद कर दिया

माछर ने नेतन्याहू को बताया कि उन्होंने एक बार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की, लेकिन सह-पायलट ने उसे फिर बंद कर दिया. उस समय वह खुद कॉकपिट में गिर चुके थे. इसके बावजूद उन्हें लग रहा था कि अगर दरवाजा नहीं खुला तो विमान में सवार सभी लोगों की जान जा सकती है. उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने आखिरी ताकत जुटाई और दोबारा दरवाजा खोलने की कोशिश की. आखिरकार वह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे, जिससे दूसरे चालक दल के सदस्यों और यात्रियों को अंदर पहुंचने और हालात संभालने का मौका मिला.

174 यात्रियों को लेकर जा रही थी फ्लाईदुबई की उड़ान

यह घटना फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में हुई थी. विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था और उसमें 174 यात्री सवार थे. घटना के दौरान विमान ने आपात संकेत भेजे और करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई से तेजी से नीचे आया. अलग-अलग रिपोर्टों में विमान की ऊंचाई में करीब 17 हजार फीट या उससे अधिक की तेज गिरावट का उल्लेख किया गया है. इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबूक में आपात स्थिति में उतारा गया.

रिपोर्टों के अनुसार, हमले में कॉकपिट में मौजूद आपातकालीन उपकरण का इस्तेमाल किया गया था. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद माछर ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की. इसके बाद विमान में मौजूद अन्य लोगों ने सह-पायलट को काबू करने में मदद की.

नेतन्याहू बोले- असंभव हालात में भी आपने संयम नहीं खोया

बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने माछर से कहा कि वह उनकी हिम्मत और बेहद मुश्किल परिस्थितियों में फैसले लेने की क्षमता से प्रभावित हैं. उन्होंने कहा कि माछर ने कई लोगों की जान बचाई और उनके साहस की दुनिया भर में सराहना हो रही है. नेतन्याहू ने उन्हें इजरायल और भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया का हीरो बताया. उन्होंने यह भी कहा कि माछर ने जिस तरह हालात का सामना किया, वह असाधारण था.

अगले स्वतंत्रता दिवस पर मोदी और माछर को मशाल जलाने का न्योता

नेतन्याहू ने माछर को इजरायल के अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया. उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और माछर को समारोह में मशाल जलाते देखना चाहते हैं. नेतन्याहू के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस पर मशाल जलाना इजरायल के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है और आमतौर पर यह सम्मान इजरायली नागरिकों के लिए रखा जाता है. उन्होंने कहा कि इस मामले में इजरायल के लोग माछर को अपनाएंगे और उन्हें जल्द इजरायल में देखने की उम्मीद है.

सह-पायलट की पहचान को लेकर रिपोर्टों में सामने आया नाम

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मामले से परिचित लोगों के हवाले से सह-पायलट की पहचान ओमान के नागरिक हमाम अल-हम्मामी के तौर पर बताई है. हालांकि, कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि फ्लाईदुबई ने सार्वजनिक रूप से दोनों पायलटों की पहचान की पुष्टि नहीं की है. मामले की जांच जारी है. हमले के बाद माछर को शुरुआती इलाज के लिए सऊदी अरब के तबूक ले जाया गया था. इसके बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए अबूधाबी लाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है. इस बीच इजरायल की ओर से उनके साहस की सार्वजनिक रूप से सराहना की गई है.

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