Gwalior Information:शहर में साफ-सफाई की व्यवस्था खराब है, क्योंकि नगर निगम का ध्यान केवल वीआइपी सड़कों पर ज्यादा है, जबकि शहर की अन्य सड़कें धूल फांक रही हैं। जिनपर ठीक से झाड़ू तक नहीं लगती और वीआइपी सड़कों पर स्वीपिंग मशीन चलाने के साथ ही झाड़ू तक लग रही है।
By Ajay Upadhyay
Publish Date: Tue, 26 Mar 2024 11:09 AM (IST)
Up to date Date: Tue, 26 Mar 2024 11:09 AM (IST)
HighLights
- शहर में साफ-सफाई की व्यवस्था खराब है, क्योंकि नगर निगम का ध्यान केवल वीआइपी सड़कों पर ज्यादा है
- सड़क और डिवाइडर पर जमी धूल व सड़क किनारे पड़ी गंदगी स्वच्छता सर्वेक्षण की पोल खोल रही है
Gwalior Information: अजय उपाध्याय . ग्वालियर। शहर में साफ-सफाई की व्यवस्था खराब है, क्योंकि नगर निगम का ध्यान केवल वीआइपी सड़कों पर ज्यादा है, जबकि शहर की अन्य सड़कें धूल फांक रही हैं। जिनपर ठीक से झाड़ू तक नहीं लगती और वीआइपी सड़कों पर स्वीपिंग मशीन चलाने के साथ ही झाड़ू तक लग रही है। ऐसे में स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में इस बार हम फिर पिछड़ सकते हैं। क्योंकि शहर की सड़कें चीख-चीख कर यह बता रही हैं कि वह डस्ट फ्री नहीं हो सकीं। सड़क और डिवाइडर पर जमी धूल व सड़क किनारे पड़ी गंदगी स्वच्छता सर्वेक्षण की पोल खोल रही है। यदि यह स्थिति शहर की सड़कों की रही तो इस बार हम स्वच्छता सर्वेक्षण में कैसे बढ़त बना सकेंगे।
इन सड़कों पर चलती हैं स्वीपिंग मशीनें
शहर के चारों विधानसभा क्षेत्रों की प्रमुख सड़कों पर स्वीपिंग मशीनें चलाई जा रही हैं, जिसमें प्रमुख रूप से रेसकोर्स रोड, गांधी रोड, सात नंबर चौराहा, गोला का मंदिर, सिटी सेंटर, गोविंदपुरी रोड, एजी पुल, रेलवे स्टेशन का पुल, बाड़ा और थीम रोड आदि हैं। गजब की बात यह है कि इन सड़कों पर स्वीपिंग मशीन के साथ 65 कर्मचारी झाड़ू भी हर दिन लगाते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब स्वीपिंग मशीन से सड़कों को चमकाया जा रहा है तो फिर झाड़ू लगवाने की जरूरत क्यों है। झाड़ू लगाने वाले 65 सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी उन सड़कों पर क्यों नहीं लगाई जाती जहां पर स्वीपिंग मशीन संचालित नहीं होतीं।
इन स्थानों पर बुरा हाल-
सिटी सेंटर में राजमाता चौराह से लेकर एजी पुल के बीच में सड़क किनारे गंदगी और सड़क व डिवाइडर पर धूल जमी हुई है। इसी तरह से पटेल नगर रोड, चेतकपुरी के सामने वाली रोड, बसंत विहार वाली सड़क, फूलबाग से साईं बाबा रोड, किलागेट सड़क, बहोड़ापुर, नई सड़क, हास्पिटल रोड, राजपायगा रोड आदि पर सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। यदि इन स्थानों पर 65 सफाई कर्मचारियों का सहयोग लिया जाए तो यह सड़कें भी चमक उठेंगी। इसी के साथ शहर के उन गली-मोहल्लों और कालोनियों में सफाई कर्मी बढ़ाए जा सकते हैं, जहां पर कमी है।
साधन संख्या
- स्वीपिंग मशीन 8
- फागर मशीन 8
- सफाई कर्मचारी 3000
- टिपर वाहन 224
- ट्रेक्टर 18
- हाथ ठेला 500
डिवाइडर पर लगे पेड़-पौधों पर जमा धूल-
शहर की सड़कों के आसपास और डिवाइडर के बीच में खड़े पेड़-पौधों की पत्तियों पर डस्ट जमा है। इन पेड़ पौधों को डस्ट फ्री करने के लिए नगर निगम ने 8 फागर मशीनें तो खरीदीं पर इनका उपयोग पानी के छिड़काव में नहीं हो पा रहा है, क्योंकि डिवाइडर के बीच में खड़े पेड़-पौधों में टैंकर से पानी डाला जा रहा है, जिसके कारण पेड़-पौधों की पत्तियों पर डस्ट जमा है और डिवाइडर भी धूल से मुक्त नहीं हो सके। इनके बगल से जमा धूल को ना तो झाड़ू से हटाया जा सका और ना ही स्वीपिंग मशीन चलाई जा रही है और निगम ने फागर मशीन का उपयोग भी लगभग बंद कर दिया है।
डिप्टी कमिश्नर अमर सत्य गुप्ता से सीधी बात
- सवाल: चंद सड़कों पर स्वीपर मशीन और झाड़ू दोनों लगाई जा रही हैं बाकी की सड़कों का बुरा हाल है क्यों?
जवाब: होली के बाद सफाई कर्मचारी हटा दिए जाएंगे, जिससे उनका उपयोग अन्य सड़कों की सफाई पर लिया जा सके।
- सवाल: 65 कर्मचारी उन्हीं सड़कों पर काम कर रहे हैं जिनपर स्वीपिंग मशीनें चल रहीं है, जबकि कालोनियों में बुरा हाल है?
जवाब: जो कर्मचारी इन सड़कों से हटाए जाएंगे उन्हें कालोनी व उन गली-मोहल्लों में भेजा जाएगा जहां पर जरूरत है।
- प्रश्न: 8 फागर मशीनें है पर चलती एक भी नहीं दिखाई देती तो फिर इन्हें करोड़ों रुपये खर्च कर खरीदा ही क्यों गया?
जवाब: त्योहार के बाद फागर मशीनें भी आपको काम करती हुईं दिखाई देंगी पूरा रूट चार्ट तैयार कर लिया गया है।






