दो जहरीले इंजेक्शन के बावजूद क्रिस्टा पाइक की मौत क्यों नहीं हुई? 207 साल में पहला केस


अमेरिका के टेनेसी राज्य में 30 सितंबर 2026 की रात को एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया. मौत की सजा पाई कैदी क्रिस्टा पाइक को जहरीले इंजेक्शन दिए गए, लेकिन वह मरी नहीं. पहला इंजेक्शन लगाने के बाद भी दिल धड़कता रहा, तो दूसरा इंजेक्शन दिया गया. दूसरे के बाद भी वह जिंदा रही और खर्राटे लेती रही. आखिरकार उसे अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां उसका इलाज चल रहा है. टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने इसके बाद 2026 की बाकी सभी मौत की सजाओं पर रोक लगा दी और एक तीसरे पक्ष से जांच कराने का आदेश दिया. लेकिन दो जहरीले इंजेक्शन के बाद भी क्रिस्टा कैसे जिंदा बची?

क्रिस्टा पाइक कौन है और उसने क्या किया?

क्रिस्टा पाइक को 1996 में कोलीन स्लेमर नाम की 19 साल की लड़की की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी. हत्या 1995 में नॉक्सविले के जॉब कोर सेंटर में हुई थी, जहां दोनों पढ़ती थीं. क्रिस्टा उस वक्त सिर्फ 18 साल की थी. आरोप था कि क्रिस्टा को लगा कि कोलीन उसका बॉयफ्रेंड छीनने की कोशिश कर रही है. इसी गुस्से में उसने अपने बॉयफ्रेंड टाडारिल शिप और एक दोस्त के साथ मिलकर कोलीन को जंगल में बुलाया, उसे बुरी तरह प्रताड़ित किया और मार डाला.

कोलीन के सीने पर एक पेंटाग्राम (शैतानी प्रतीक) उकेरा गया था और उसकी खोपड़ी का एक टुकड़ा निशानी के तौर पर रख लिया गया था. इसी वजह से मीडिया में क्रिस्टा को ‘सैटनिस्ट किलर’ कहा जाता रहा है.

मौत की सजा पर इतना विवाद क्यों?

क्रिस्टा पाइक का केस सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं है. इसके पीछे उसका बेहद दर्दनाक बचपन है. कोर्ट रिकॉर्ड्स और उसके वकीलों के मुताबिक, क्रिस्टा को बचपन से ही यौन शोषण और प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा. उसके साथ 11 साल की उम्र में रेप हुआ और टीनएज में भी उसके साथ यौन हिंसा हुई. मेडिकल रिपोर्ट्स में उसे बाइपोलर डिसऑर्डर और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) जैसी मानसिक बीमारियां भी बताई गईं, जिनका इलाज उसने कभी ठीक से नहीं कराया.

इसी आधार पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भी टेनेसी सरकार से गुजारिश की थी कि क्रिस्टा की सजा को उम्रकैद में बदल दिया जाए. उनका कहना था कि जब अपराध हुआ तब वह सिर्फ 18 साल की थी, उसका दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं हुआ था और वह गंभीर मानसिक बीमारी से जूझ रही थी. वकीलों ने यह भी दलील दी कि 30 साल जेल में रहने के दौरान क्रिस्टा बहुत बदल चुकी है और अब वह अपने किए पर पछताती है.

इंजेक्शन देने के दौरान आखिर हुआ क्या?

इसका जवाब पेंटोबार्बिटल नाम के ड्रग में छिपा है. यह एक शक्तिशाली सिडेटिव है जो शरीर के नर्वस सिस्टम को धीमा कर देता है. बड़ी डोज में यह सांस रोक देता है और दिल की धड़कन बंद कर देता है. टेनेसी का प्रोटोकॉल कहता है कि अगर पहले इंजेक्शन के बाद कैदी जिंदा रहे, तो दूसरा इंजेक्शन लगाया जाए.

क्रिस्टा के मामले में दो बार इंजेक्शन लगाने के बाद भी वह जिंदा रही. इसकी वजह यह है कि उसके खून में पेंटोबार्बिटल की मात्रा उतनी नहीं पहुंची जितनी मौत के लिए जरूरी थी. क्रिस्टा की लीगल टीम के मेडिकल एक्सपर्ट डॉ. जोएल जिवोट ने बीबीसी को बताया, ‘पाइक का ब्लड लेवल कभी उतना नहीं बढ़ा कि सांस रुक जाए और दिल बंद हो जाए.’

तो इसकी क्या वजह सामने आईं?

क्रिस्टा के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि उसकी नसें ढूंढने में भी दिक्कत आई. इंजेक्शन लगाने वालों को नस मिल ही नहीं रही थी. वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि जो पेंटोबार्बिटल इस्तेमाल किया गया, वह ‘डिग्रेडेड’ यानी खराब हो चुका था.

यह पहली बार नहीं है जब टेनेसी में ऐसा हुआ हो. इससे पहले मई 2026 में टोनी कैरुथर्स नाम के एक कैदी को इंजेक्शन लगाते वक्त नस नहीं मिली थी और वह लकवाग्रस्त हो गया था. उस मामले में भी वही डॉक्टर शामिल था जिसने क्रिस्टा को इंजेक्शन लगाया.

टेनेसी का प्रोटोकॉल और उठते सवाल

टेनेसी ने 2024 में अपना तरीका बदलकर तीन ड्रग की जगह सिर्फ पेंटोबार्बिटल इस्तेमाल करना शुरू किया था. लेकिन इस प्रोटोकॉल में यह साफ नहीं लिखा है कि अगर दूसरे इंजेक्शन के बाद भी कैदी जिंदा रहे तो क्या करना है. यही वजह है कि पाइक के मामले में अधिकारी समझ नहीं पाए कि आगे क्या करें.

डेथ पेनल्टी इन्फॉर्मेशन सेंटर की प्रमुख रॉबिन मेहर ने कहा, ‘पाइक के साथ जो हुआ वह अपने आप में अनोखा और बेमिसाल है.’ पहले भी सात लोगों के साथ ऐसा हुआ था कि नस न मिलने की वजह से इंजेक्शन नहीं लग पाया, लेकिन ड्रग लगने के बाद कोई भी जिंदा नहीं बचा था.

तो अब क्रिस्टा के साथ आगे क्या होगा?

क्रिस्टा को अस्पताल ले जाया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है. डॉ. जिवोट ने कहा कि देर से इलाज शुरू होने की वजह से उसे ब्रेन इंजरी भी हो सकती है. अब सवाल यह है कि क्या टेनेसी दोबारा उसे मारने की कोशिश करेगा या नहीं. कानूनी तौर पर दोबारा कोशिश की जा सकती है, लेकिन गवर्नर ने फिलहाल सभी मौत की सजाओं पर रोक लगा दी है.

पीड़िता की मां मे मार्टिनेज ने इस घटना को ‘पूरी तरह गड़बड़’ बताया. उन्होंने कहा कि वह दशकों से इस सजा का इंतजार कर रही थीं. वहीं, मौत की सजा के विरोधी संगठन रिप्रीव की प्रमुख माया फोआ ने कहा, ‘लेथल इंजेक्शन हर कदम पर गोपनीयता पर निर्भर करता है ताकि राज्य की हिंसा छिपी रहे. हमें यह नहीं पता कि असल में क्या गलत हुआ.’

टेनेसी राज्य में आखिरी बार किसी महिला को 1819 में मौत की सजा दी गई थी. यानी 2026 में क्रिस्टा पाइक का केस आने से पहले, राज्य में लगभग 207 साल तक किसी महिला को फांसी या जहरीला इंजेक्शन नहीं दिया गया था.