60 के पार 30 रुपये वाली प्याज, आम आदमी की रसाेई का फिर बिगड़ा बजट

60 के पार 30 रुपये वाली प्याज, आम आदमी की रसाेई का फिर बिगड़ा बजट


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  • कमजोर मानसून ने खाद्य कीमतें बढ़ाईं, सिटि रिसर्च ने चेताया.
  • प्याज की कीमतें दोगुनी, अन्य दाल-चावल भी महंगे हुए.
  • देश का आधा हिस्सा सूखे से प्रभावित, अल नीनो रही मुख्य वजह.

त्योहारी सीजन में आम आदमी को एक और बड़ा झटका लगा है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म सिटी रिसर्च (Citi Research) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि इस साल भारत में उम्मीद से कमजोर मानसून होने की वजह से खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं. देश के कुल प्याज उत्पादन में लगभग 40% की हिस्सेदारी रखने वाले राज्य महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति के चलते प्याज की कीमतें पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई हैं. 

हालांकि, इस साल खरीफ की फसल की कुल बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले 1.2% कम होकर सामान्य स्तर के आसपास बना हुआ है, लेकिन जबकि देश का तीन-चौथाई प्याज, दो-तिहाई दालें और आधा चावल पैदा करने वाले राज्यों में बारिश में 10% से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है. इसका असर फसलों की पैदावार पर देखने को मिल सकता है. बहरहाल, कीमतों में दबाव पहले से ही देखा जा रहा है. 

कमजोर मानसून ने बिगाड़ा खेल

मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन (MoSPI) द्वारा जारी किए गए अगस्त के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों से पता चलता है कि खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ी हैं, जो कमजोर मानसून का ही असर है.

सितंबर में भी कीमतों में उतार-चढ़ाव का यह रुख देखने को मिला. प्याज के अलावा चीनी, चावल और दालों की भी कीमतों में तेजी देखी गई. इसके पीछे वजह ही यही है कि कमजोर मानसून के चलते भारत के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 के आखिर तक देश के लगभग आधे हिस्से (49.4% से अधिक) में सूखे जैसी स्थिति है, जो पिछले सालों के मुकाबले कहीं ज्यादा है. जहां साल 2023 में देश का केवल 30% ही हिस्सा सूखे की चपेट में था, वह इस साल सितंबर के अंत तक बढ़कर लगभग 50% तक पहुंच चुका है. इनमें से भी लगभग 10% हिस्सा ऐसा है, जहां स्थिति और भी ज्यादा गंभीर है. 

महाराष्ट्र और पंजाब का बुरा हाल

अगर बड़े राज्यों की बात करें, तो महाराष्ट्र के लगभग 84% और पंजाब के 80% हिस्से में सूखे जैसे हालात हैं.  सरकारी आंकड़ों के साथ-साथ आईआईटी-गांधीनगर (IIT-Gandhinagar) की डेटा से पता चलता है कि महाराष्ट्र में 358 में से 265 तालुके सूखाग्रस्त घोषित हो चुके हैं. यानी कि राज्य का लगभग 74% प्रभावित है. इनमें से भी लगभग 37% हिस्सा बहुत ज्यादा सूखे की हालात का सामना कर रहा है.

भारत में मुख्य रूप से अल नीनो की स्थिति के कारण लंबे समय के औसत के मुकाबले 12% कम बारिश दर्ज की गई है.  रिपोर्ट के अनुसार, 2015 के बाद से यह मानसून में आई अब तक की सबसे बड़ी कमी है, जिससे खरीफ फसलों पर खतरा मंडरा रहा है. 

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