नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने क्लास 9 के लिए सोशल साइंस की नई किताब का पार्ट- 2 जारी कर दिया है. यह किताब 29 सितंबर 2026 को रिलीज हुई है, यानी जब नया अकादमिक सत्र शुरू हो चुका है और कई स्कूलों में हाफ-ईयरली परीक्षाएं भी लगभग खत्म हो चुकी हैं. किताब का नाम है ‘Understanding Society: India and Beyond- Part 2.’ आखिर किताबों की तब्दीली से क्या हासिल होगा…
पहले क्या पढ़ाया जाता था, अब क्या बदला?
पहले क्लास 9 की ‘India and The Contemporary World’ जैसी किताबें थीं, उनमें फ्रांसीसी क्रांति, रूसी क्रांति, यूरोप में समाजवाद और नाजीवाद का उदय जैसे यूरोपीय विषय पढ़ाए जाते थे. अब इनकी जगह भारत के मध्यकालीन इतिहास को ज्यादा जगह दी गई है.
नई किताब में छह चैप्टर हैं, जो हिस्ट्री, ज्योग्राफी, पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स को कवर करते हैं. ज्योग्राफी में अब ‘Oceans and Life’ और ‘Life on Earth’ जैसे चैप्टर हैं.
इसमें सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब 1000 से 1700 ईस्वी के बीच के 700 साल के इतिहास को ‘प्रतिरोध और लचीलापन’ (Resistance and Resilience) के नाम से पढ़ाया जाएगा. अब बच्चों को यह सिखाया जाएगा कि भारतीय समाज ने बाहरी हमलों का कैसे डटकर मुकाबला किया और अपनी परंपराओं को कैसे बचाए रखा.
जून 2026 में इस किताब का पार्ट- 1 जारी हो चुका है.
नए चैप्टर में क्या-क्या है?
नया चैप्टर ‘Resistance and Resilience (1000–1700 CE)’ तीसरे नंबर पर जोड़ा गया है. इसमें बताया गया है कि 7वीं सदी से भारतीय उपमहाद्वीप पर लगातार हमले होते रहे, जिनके पीछे क्षेत्रीय विस्तार और धार्मिक मकसद थे. अरब, तुर्क, मुगल और यूरोपीय ताकतों का सामना भारतीय शासकों और समुदायों ने किया.
किताब में राजपूतों, अहोम साम्राज्य, विजयनगर साम्राज्य, मराठों, सिखों और जाटों के प्रतिरोध की कहानियां हैं. इसमें महाराणा प्रताप का अकबर के खिलाफ प्रतिरोध, लाचित बोरफुकन का 1671 में सरायघाट की लड़ाई में मुगल बेड़े को हराना और मुगल जुल्म के खिलाफ सिखों का विरोध शामिल है.
महिला शासकों और आम लोगों की भूमिका
किताब में सिर्फ राजाओं की नहीं, महिला शासकों और आम लोगों के प्रतिरोध की भी बात है. चौलुक्य साम्राज्य की रानी नायकी देवी ने 1178 में माउंट आबू के पास मुहम्मद गोरी को हराया था. काकतीय साम्राज्य की रुद्रमा देवी का भी जिक्र है, जिन्होंने 1262 से 1289 तक दिल्ली सल्तनत से संघर्ष किया. उल्लाल की रानी अब्बक्का चौटा ने पुर्तगाली नौसेना को हराया था.
आम लोगों में 1669 में गोकुल जाट के नेतृत्व में जाट विद्रोह का जिक्र है, जो भारी टैक्स और औरंगजेब की धार्मिक नीतियों के खिलाफ था. 1686 में सिनसिनी और सोगर के जमींदारों का विद्रोह भी शामिल है.
देवी-देवताओं और तलवारों की परंपरा
किताब में एक खास बॉक्स है, जिसमें बताया गया है कि 7वीं सदी से भारत में देवी पूजा की परंपरा रही है और राजा काली, दुर्गा, भवानी जैसी शक्ति की देवियों की पूजा करते थे. इसमें लिखा है कि बस्तर के शासक अन्नमराजा को माणिक्यदेवी (दंतेश्वरी) से तलवार मिली, विजयनगर के कुमार कंपन ने मदुरै में सल्तनत की सेना के खिलाफ देवी की दी तलवार का इस्तेमाल किया और शिवाजी को तुलजा भवानी से तलवार मिली.
भक्ति और सूफी परंपरा
किताब में भक्ति परंपरा को ‘लचीलेपन की भावना की पुष्टि’ बताया गया है. इसमें लिखा है कि जब मंदिर बनाने पर रोक थी, तब भक्ति ने पूजा को जारी रखा. चैतन्य महाप्रभु ने बंगाल में काजी की रोक के खिलाफ सार्वजनिक संकीर्तन का नेतृत्व किया.
सूफी परंपरा को इस्लाम का एक उदार रूप बताया गया है, जिसने इस्लाम के प्रसार में मदद की. मुस्लिम कवियों रसखान और रहीम को भक्ति परंपरा का हिस्सा बताया गया है.
मंदिरों का मुद्दा भी जोड़ा
किताब में मंदिरों के टूटने और फिर से बनने का जिक्र है. जैसे, टोडरमल और मान सिंह ने काशी विश्वनाथ का पुनर्निर्माण किया, औरंगजेब ने इसे तोड़ा और अहिल्याबाई होल्कर ने इसे फिर से बनवाया.
आखिर इन बदलावों से क्या हासिल होगा?
NCERT प्रमुख दिनेश सकलानी के मुताबिक, इस उम्र में सोशल साइंस की पढ़ाई का मकसद बच्चों में विश्लेषणात्मक क्षमता, आलोचनात्मक सोच, अंतर-सांस्कृतिक समझ और नागरिक जीवन में आत्मविश्वास से भाग लेने की क्षमता विकसित करना है.
इस बदलाव को लेकर राजनीति भी गरम है. विपक्ष का कहना है कि यह इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश है. वहीं, सरकार का कहना है कि यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 के तहत किया गया है, जिसका मकसद बच्चों को भारत की जड़ों से जोड़ना है.
आलोचकों का यह भी कहना है कि पहले जो इतिहास ‘सहयोग और मिली-जुली संस्कृति’ पर जोर देता था, अब वह ‘हमला और प्रतिरोध’ के नजरिए से पढ़ाया जा रहा है. किताब में अकबर के बाद के शासन को अपेक्षाकृत समावेशी बताया गया है, इसलिए यह पूरी तरह एकतरफा नहीं है.
क्या बाकी सब्जेक्ट्स में भी बदलाव हुए?
सिर्फ इतिहास ही नहीं, बल्कि अन्य विषयों में भी बदलाव हुए हैं. ‘Authority’ नाम का चैप्टर हटाकर ‘Governance and Public Policy’ लाया गया है. इसमें बताया जाएगा कि सरकार कैसे काम करती है, टैक्स कैसे भरा जाता है और नागरिकों की क्या भूमिका होती है.
अर्थशास्त्र में बच्चों को इनकम-टैक्स स्लैब, निवेश के जोखिम और बिजनेस प्लानिंग सिखाई जाएगी. आयुष्मान भारत को हेल्थ इंश्योरेंस के उदाहरण के तौर पर पढ़ाया जाएगा. ‘India and the World’ चैप्टर को क्लास 9 से हटाकर क्लास 10 में भेज दिया गया है.
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