एक समय था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बात चीन का जिक्र किए बिना नहीं करते थे. राष्ट्रपति चुनाव और अपने पहले कार्यकाल के दौरान वह बीजिंग पर अमेरिकी नौकरियां छीनने, कारखाने बंद कराने और मध्य वर्ग को कमजोर करने के आरोप लगाते रहे. लेकिन अब ट्रंप का चीन को लेकर रुख काफी बदल चुका है. वह इस सप्ताह व्हाइट हाउस में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मेजबानी करने वाले हैं. उनके स्वागत और स्टेट डिनर की तैयारी है, जो आमतौर पर अमेरिका के करीबी सहयोगियों के लिए आयोजित किए जाते हैं.
शी गुरुवार को वाशिंगटन पहुंचेंगे. दोनों नेताओं के बीच व्यापार, तकनीक, दुर्लभ खनिज, रेयर अर्थ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा होने की उम्मीद है. लेकिन खास बात सिर्फ यह नहीं है कि दोनों नेता किन मुद्दों पर बात करेंगे, बल्कि यह भी है कि ट्रंप अब शी के बारे में किस तरह बात कर रहे हैं. ट्रंप ने इस महीने कहा, “वह एक महान व्यक्ति हैं. हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं. चीन एक प्रतिस्पर्धी है, लेकिन राष्ट्रपति शी के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं.”
‘अमेरिका फर्स्ट’ से बातचीत तक कैसे पहुंचा ट्रंप का रुख?
2025 में सत्ता में लौटने के बाद ट्रंप का शुरुआती रुख चीन को लेकर टकराव वाला था. उन्होंने चीनी सामान पर शुल्क बढ़ाए, और ज्यादा शुल्क लगाने की धमकी दी. उनकी सरकार ने चीनी तकनीक पर प्रतिबंध भी कड़े किए और बीजिंग की आर्थिक नीतियों में बदलाव लाने की कोशिश की.
चीन पीछे नहीं हटा. इसके बजाय उसने रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिजों पर अपनी पकड़ का इस्तेमाल किया. ये सामग्री इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा प्रणालियों के लिए जरूरी हैं. नतीजा किसी एक पक्ष की स्पष्ट जीत के बजाय बातचीत के रूप में सामने आया.
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के वरिष्ठ सलाहकार माइकल कोव्रिग ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि ट्रंप ने चीन को लेकर अपना रुख इसलिए बदला क्योंकि अत्यधिक शुल्क और निर्यात प्रतिबंधों का शुरुआती प्रयास सफल नहीं हुआ. उनके मुताबिक, दोनों नेता प्रभाव और दबाव की ताकत आजमा रहे थे और इस मुकाबले में चीन मजबूत स्थिति में रहा.
टैरिफ से चीन की ताकत खत्म नहीं हुई
ट्रंप अब भी मानते हैं कि व्यापार युद्ध में अमेरिका के पास बढ़त है, लेकिन चीन के साथ अनुभव ने दिखाया कि केवल दबाव बढ़ाने से हर समस्या का समाधान नहीं होता. चीन इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और दूसरी उन्नत तकनीकों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और उसके उत्पाद दुनियाभर के बाजारों में पहुंच रहे हैं.
रेयर अर्थ और AI में चीन की बढ़त
चीन का प्रभाव सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है. रेयर अर्थ और उनके प्रसंस्करण की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चीन की बड़ी भूमिका है. इनकी आपूर्ति सीमित होने पर दूसरे देशों के उद्योग प्रभावित हो सकते हैं.
चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक वाहन और दूसरी रणनीतिक तकनीकों में भी तेजी से निवेश कर रहा है. अमेरिका रेयर अर्थ के लिए वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला बनाने और AI विकास को तेज करने की कोशिश कर रहा है. ट्रंप का कहना है कि AI की दौड़ में अमेरिका की रफ्तार कम होने से बीजिंग को फायदा हो सकता है.
अमेरिकी सहयोगियों से तनाव ने चीन को दिया मौका
इस रिश्ते में एक और पहलू अमेरिका के पारंपरिक सहयोगियों के साथ ट्रंप के संबंध हैं. ट्रंप यूरोपीय नेताओं से कई मुद्दों पर टकरा चुके हैं, नाटो के कुछ पहलुओं पर सवाल उठा चुके हैं और कनाडा के साथ व्यापार विवाद में भी उलझे हैं.
माइकल कोव्रिग के मुताबिक, इससे चीन को फायदा उठाने का अवसर मिला है. उनका कहना है कि पश्चिमी देशों के कई नेता अब बीजिंग जाकर शी के साथ संबंध स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वे ट्रंप से जुड़े विवादों पर ध्यान दे सकें.
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