UGC ने बदला नियम, अब MPT-MOT की डिग्री में होगा स्पेशलाइजेशन

UGC ने बदला नियम, अब MPT-MOT की डिग्री में होगा स्पेशलाइजेशन


यूजीसी ने एलाइड और हेल्थ केयर से जुड़े कई डिग्री प्रोग्राम के ढांचे में बदलाव किया है. यह नया नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा. इसके तहत मास्टर्स ऑफ फिजियोथेरेपी और मास्टर्स ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी की डिग्री अब सामान्य नाम से नहीं, बल्कि तय स्पेशलाइजेशन के साथ दी जाएगी. यूजीसी ने यह बदलाव 27 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में जारी 5 वें संशोधन के तहत किया है. यह संशोधन यूजीसी की 2014 में जारी डिग्रियों से संबंधित अधिसूचना में किया गया है. इसके तहत एलाइड और हेल्थ केयर एजुकेशन से जुड़े कई नए और संशोधित डिग्री प्रोग्राम को भी लिस्ट में शामिल किया गया है.

MPT में इन क्षेत्रों में कर सकेंगे स्पेशलाइजेशन 

2026-27 से एमपीटी करने वाले छात्रों की डिग्री में उनके स्पेशलाइजेशन का उल्लेख किया जाएगा. यूजीसी ने इसके लिए 8 क्षेत्र निर्धारित किए हैं. इनमें मस्कुलोस्केलेटल साइंसेज, न्यूरोसाइंसेज, कार्डियोवैस्कुलर और पल्मोनरी साइंसेज, स्पोर्ट्स साइंसेज, पीडियाट्रिक्स और नियोनेटल साइंसेज, ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी साइंसेज, ऑन्कोलॉजी साइंसेज और कम्युनिटी रिहैबिलिटेशन साइंसेज शामिल है. वहीं एमपीटी प्रोग्राम की न्यूनतम अवधि 2 साल होगी और इसमें प्रवेश के लिए बैचलर डिग्री जरूरी होगी.

MOT की डिग्री भी होगी स्पेशलाइजेशन के साथ 

मास्टर्स का ऑक्यूपेशनल थेरेपी के लिए भी इस तरह का बदलाव किया गया है. इसके तहत छात्रों को अलग-अलग विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में डिग्री प्रदान की जाएगी. एमओटी के लिए मस्कुलोस्केलेटल विज्ञान, बाल चिकित्सा और नवजात विज्ञान, तंत्रिका विज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य, हृदय और फुफ्फुसीय विज्ञान, पुनर्वास, जराचिकित्सा, हाथ और ऑन्कोलॉजीकल विज्ञान जैसी स्पेशलाइजेशन निर्धारित की गई है. एमओटी की अवधि में भी कम से कम 2 साल रखी गई है और इसमें एडमिशन के लिए बैचलर डिग्री होगी. 

पुराने छात्रों पर लागू नहीं होगा नया नियम 

यूजीसी के नए नियम का असर पहले से पढ़ाई कर रहे छात्रों पर नहीं पड़ेगा. 2026-27 से पहले एमपीटी या एमओटी में एडमिशन ले चुके छात्रों को पहले नियमों के अनुसार ही डिग्री दी जा सकेगी. यूजीसी के डॉक्यूमेंट भी शामिल नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थ केयर प्रोफेशन के संचार में भी इस बात का उल्लेख किया गया है. 

ये भी पढ़ें-कैसे करें UPPCS इंटरव्यू की तैयारी, काम आएंगे ये टिप्स?

कई नए हेल्थ केयर डिग्री भी शामिल 

यूजीसी के पांचवें संशोधन में सिर्फ एमपीटी और एमओटी में बदलाव नहीं किया गया है. एलाइड और हेल्थ केयर एजुकेशन से जुड़े कई नए और संशोधित यूजी तथा पीजी डिग्री प्रोग्राम भी जोड़े गए हैं. इनमें बैचलर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंस, मास्टर्स ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंस, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी, हेमेटोलॉजी एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और हिस्टोलॉजी और साइकोपैथोलॉजी में मास्टर्स प्रोग्राम शामिल हैं. इसके अलावा बैचलर ऑफ इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट,  मास्टर्स ऑफ एडवांस्ड केयर पिरामिडिक्स, बैचलर और मास्टर्स ऑफ एनेस्थीसिया एंड ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी को भी लिस्ट में जगह दी गई है.

33 नए और 21 डिग्री प्रोग्राम में बदलाव 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, एनसीएएचपी के नियामक ढांचे के तहत 33 नए और 21 एलाइड तथा हेल्थ केयर यूजी-पीजी डिग्री प्रोग्राम को अपडेट किया गया है. इसका उद्देश्य इन प्रोग्राम की डिग्री के नाम, अवधि और प्रवेश योग्यता में एकरूपता लाना है. यूजीसी ने यह बदलाव यूजीसी एक्ट 1956 की सेक्शन (22) 3 के तहत किया है.

ये भी पढ़ें-यूपी में जल्द होगी होमगार्ड भर्ती, 7600 पदों पर आने वाली है वैकेंसी

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI