
मयंक का बचपन कानपुर में एक साधारण परिवार में बीता. उन्होंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई सरकारी स्कूल से की. उनके पिता एक प्राइवेट फैक्ट्री में इलेक्ट्रीशियन के तौर पर काम करते थे. परिवार में दो भाई-बहन और सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना उनके लिए आसान ऑप्शन नहीं था.

ऐसे में उन्होंने नौकरी के साथ अपने करियर को आगे बढ़ाने का फैसला लिया और भारतीय नौसेना में बतौर सेलर शामिल हो गए. वहीं मयंक ने करीब 15 साल भारतीय नौसेना में सेवा की. नौकरी के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी. उन्होंने इग्नू से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की.

नौसेना में रहते हुए भी मयंक का लक्ष्य आगे बढ़ने का था. उन्होंने सीडीएस के जरिए. कमीशन हासिल करने की कोशिश की और एसएसबी के दो प्रयास दिए, लेकिन दोनों बार सफलता नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी की, लेकिन प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर सके.

मयंक ने फिर सीएपीएफ परीक्षा का रुख किया. सीआरपीएफ की लिखित परीक्षा में भी उनके शुरुआती दोनों प्रयास सफल नहीं रहे. लगातार मिल रही है इन असफलताओं के बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी. उनके सफर में 15 साल से ज्यादा प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता भी शामिल रही.

लगातार नाकामियों के बाद मयंक ने यूपीएससी सीएपीएफ के लिए एक और प्रयास किया. 2025 में उन्होंने तीसरी बार सीएपीएफ परीक्षा दी और इस बार सफलता हासिल की. मयंक ने ऑल इंडिया रैंक 343 प्राप्त की.

उनके अनुसार भारतीय नौसेना में बिताए 15 वर्षों में उन्हें अनुशासन, धैर्य और मुश्किल परिस्थितियों में शांत रहने की आदत दी. नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखने और बार-बार मिली असफलताओं के बीच तैयारी करते रहने में यही अनुभव उनके काम आया.
Published at : 20 Sep 2026 07:06 AM (IST)





