सबसे पुराने अखबार हॉरेट्ज पर मानहानि केस करेंगे नेतन्याहू, वकीलों को दिया निर्देश


इजरायल के सबसे पुराने अखबार हॉरेट्ज और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच कानूनी जंग छिड़ गई है. पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है. प्रधानमंत्री ने मानहानि का केस दायर करने घोषणा की है. साथ ही अखबार की तरफ से लगाए गए आरोपों को मनगढ़ंत करार देते हुए अपनी सफाई भी दी है. 

नेतन्याहू के एक्स हैंडल पर एक बयान पोस्ट करते हुए कहा, ‘पीएम ने अपने वकीलों को निर्देश दिया है कि वे वामपंथी अखबार हॉरेट्ज, श्लोमी एल्डर और अन्य लोगों के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करें. इन लोगों ने पीएम के खिलाफ एक ऐसी झूठी कहानी गढ़ी है, जो कभी हुई ही नहीं. न ही कभी ऐसी कोई घटना घटी. इन दावों के विपरीत, सितंबर की शुरुआत से 7 अक्टूबर तक प्रधानमंत्री और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति के बीच कोई बातचीत नहीं हुई.’

‘जांच में नहीं मिला कोई सबूत’

बयान में आगे कहा गया, ‘प्रधानमंत्री ऑफिस, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और सैन्य सचिव ने उन दिनों के प्रधानमंत्री के कॉल लॉग की बारीकी से जांच की, और उन्हें इसका कोई भी सबूत नहीं मिला. प्रधानमंत्री और अमीराती राष्ट्रपति के बीच राजनयिक बातचीत केवल प्रधानमंत्री कार्यालय के माध्यम से होती है. इसमें अमीराती प्रतिनिधि एक खास एन्क्रिप्टेड डिवाइस लेकर ऑफिस आते हैं.’

बयान में कहा, ‘इन सभी बातचीत का रिकॉर्ड रखा जाता है. एल्डर ने खुद कल रात चैनल 12 पर एक इंटरव्यू में कहा कि जिस बातचीत का वे दावा कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को चेतावनी दी गई थी, वह इसी तरह से हुई थी. न केवल प्रधानमंत्री के कॉल लॉग की, बल्कि उस दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय में आने-जाने वालों के रिकॉर्ड की भी गहन जांच से पता चलता है कि अमीराती प्रतिनिधि के प्रधानमंत्री कार्यालय आने की कोई एंट्री नहीं है.’

कोई संभावना नहीं: PM ऑफिस

इसके अलावा बताया गया, ‘सुरक्षा बलों की तरफ से पेश डॉक्यूमेंट्स  और रिकॉर्डिंग के बिना प्रधानमंत्री ऑफिस में प्रवेश करने की कोई संभावना नहीं है. एल्डर ने यह भी झूठ बोला कि मिस्र ने प्रधानमंत्री को संभावित हमले के बारे में चेतावनी दी थी. यह दावा युद्ध की शुरुआत में ही गलत साबित हो चुका था. यह सब साबित करता है कि यह एक दुर्भावनापूर्ण मनगढ़ंत कहानी है जिसे स्पष्ट रूप से राजनीतिक समय को ध्यान में रखकर रचा गया है. यह वामपंथियों के चुनाव अभियान का हिस्सा है. ऐसी और भी झूठी कहानियां सामने आ सकती हैं.’

बयान में कहा गया, ‘इस मनगढ़ंत कहानी का मकसद लोगों का ध्यान उस बात से हटाना था जिसे वे पहले से ही समझते हैं. रोनेन बार और हर्जी हलेवी ने हमले शुरू होने से कई घंटे पहले ही इसके संकेत देख लिए थे. अगर गलत आकलन के बजाय, उन्होंने IDF, शिन बेट और स्टैंडबाय यूनिट्स को हमले से पहले ही कार्रवाई करने का निर्देश दिया होता, और अगर उन्होंने प्रधानमंत्री नेतन्याहू को समय पर जानकारी दी होती, तो उस भयानक नरसंहार को रोका जा सकता था.’

इधर, अखबार ने एक्स पर बयान देते हुए कहा कि अखबार और पत्रकारों श्लोमी एल्डर और रूथ युवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने से पहले एक चेतावनी भरा पत्र भेजा है. 

 

क्या है पूरा विवाद?
पूरा विवाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायल के सबसे पुराने अखबार हॉरटेज के बीच तीखी राजनीतिक और कानूनी लड़ाई से जुड़ा है. अखबार ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद ने सितंबर 2023 के आखिर में यानी 7 अक्टूबर के हमलों से करीब 10 दिन पहले नेतन्याहू को 45 मिनट तक फोन किया था. उन्होंने खास चेतावनी दी थी कि हमास एक बड़े हमले की तैयारी कर रहा है.