ईरान-ओमान का समझौता ट्रंप को देगा झटका, होर्मुज स्ट्रेट में अब क्या होगा?


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • ईरान तभी मार्ग सुरक्षित करेगा जब अमेरिकी हमले रुकें।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तनाव के बीच अब ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कुछ ऐसा करने की तैयारी में जुटा है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बहुत बड़ा झटका हो सकता है. दरअसल, ईरान ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए एक नए शिपिंग कॉरिडोर की स्थापना से जुड़े समझौते पर साइन हो जाएंगे. हालांकि, देश के टॉप सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि अमेरिका के हमले और अन्य विरोधी गतिविधियों के रुकने तक ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग को पूरी तरह से फिर से खोलने की कोई गारंटी नहीं देगा.

ईरान और ओमान के बीच शिपिंग कॉरिडोर पर चल रही बात- रेजाई

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसिन रेजाई ने रविवार (6 सितंबर, 2026) को सरकारी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘ईरान और ओमान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए एक अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर की व्यवस्था को लेकर बातचीत कर रहे हैं. इस रूट के कुछ हिस्से ईरान और ओमान के जलक्षेत्र से होकर गुजरेंगे और प्रस्तावित कॉरिडोर से जहाजों के आने और जाने का मैनेजमेंट तेहरान करेगा.’

उन्होंने कहा, ‘यह बातचीत उस जलमार्ग पर मैरीटाइम ट्रैफिक बहाल करने के कूटनीतिक कोशिशों का हिस्सा है, जिसके जरिए युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया का करीब पांचवें हिस्से का तेल और लिक्वीफाइड नैचुरल गैस (LNG) की शिपिंग होती थी.’ 

होर्मुज स्ट्रेट तभी खुलेगा, जब US हमलों से दूर होगा- रेजाई

मोहसिन रेजाई ने कहा, ‘तेहरान तभी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुले रहने की गारंटी देगा, जब अमेरिका हमलों और उन गतिविधियों से दूर रहेगा, जिसे ईरान नुकसान पहुंचाने की कार्रवाई मानता है. युद्ध खत्म करने और व्यापक समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करने के मकसद से जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में सबसे बड़ी दिक्कत गारंटी का न होना था और मध्यस्थ भी इसके इंप्लीमेंटेशन को सुनिश्चित करने में नाकाम रहे.’

उन्होंने कहा, ‘समझौते के मुताबिक अमेरिका को ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना था, जबकि तेहरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करनी थी. हालांकि, इसके इंप्लीमेंटेशन को लेकर विवादों की वजह से यह समझौता ही फेल हो गया.’ 

यह भी पढ़ेंः रूस में हिमस्खलन की चपेट में आए पर्वतारोही, अब तक 11 की मौत, 6 लापता