Holika Dahan 2024: मप्र के इस जिले में आज भी कायम है होलिका दहन के बाद सूतक की परंपरा

ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी होलिका दहन के बाद सूतक लगने वाली परंपरा कायम है।

By Hemant Kumar Upadhyay

Publish Date: Solar, 24 Mar 2024 10:44 AM (IST)

Up to date Date: Solar, 24 Mar 2024 10:44 AM (IST)

Holika Dahan 2024: मप्र के इस जिले में आज भी कायम है होलिका दहन के बाद सूतक की परंपरा

HighLights

  1. ढीमरखेड़ा तहसील के सुदूर वनांचल आदिवासी ग्राम दियागढ़ में परंपरा का निर्वाह
  2. होलिका जलने के बाद सूतक लगने की परंपरा कायम
  3. गांव के बाहर होलिका दहन का कार्यक्रम निर्धारित मुहूर्त में पुरुष करते हैं।

नईदुनिया न्यूज, उमरिया। ढीमरखेड़ा तहसील के सुदूर वनांचल आदिवासी ग्राम दियागढ़ में होली पर आज भी होलिका जलने के बाद सूतक लगने की परंपरा कायम है। यह परंपरा ग्रामीणों को अपने पूर्वजों से मिली है। जिसका पालन आज भी डेढ़ सौ आबादी वाले घरों में उसी उल्लास से किया जाता है। जिस तरह की होली पूर्वज मनाते आ रहे हैं।

गांव के बाहर होलिका दहन का कार्यक्रम निर्धारित मुहूर्त में पुरुष करते हैं। धुलेंडी की सुबह महिलाएं घर में साफ सफाई व आंगन में लिपाई करते हुए बाहर आती हैं। साथ ही घरों से पुराना झाडू व मटका भी निकाल लाती हैं। झाडू और मटके को गांव के बाहर फेंकते हुए महिलाएं तालाब में स्नान करने के बाद घर जाती हैं। इसके बाद ही ग्रामीण एकदूसरे को रंग लगाते हुए होली खेलते हैं।

पीढ़‍ियों से जारी है अनूठी परंपरा

ग्रामीणों मदन सिंह, धरम सिंह, तिलकधारी सिंह, दीपचंद, रूप सिंह का कहना है यह परंपरा उन्हें पूर्वजों से मिली है। जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी मनाते आ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया होलिका दहन में जो भी पुरुष जाता है। वह घर के अंदर तब तक प्रवेश नहीं करता जब तक कि स्नान न कर ले। रात में पुरुष होलिका के पास ही रहते हैं या फिर सार्वजनिक जगह पर नृत्य गायन कर सुबह का इंतजार करते हैं। सुबह होने पर घरों के बाहर स्नान करने के बाद अंदर जाते हैं। इसके बाद ही वे होली खेलते हैं। लोग इस दौरान घर घर जाकर फाग गाते हैं।

धार्मिक के साथ सामाजिक महत्व

सेवानिवृत्त शिक्षक एवं कवि राजा चौरसिया ने बताया कि होली में यह परंपरा पहले कई जगहों पर रही। जिसके पीछे अपना धार्मिक और सामाजिक महत्व रहा। लाइफ स्टाइल बदलने से कई जगह परंपरा विलुप्त होने लगी। कई ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी होलिका दहन के बाद सूतक लगने वाली परंपरा कायम है। इन्होंने कहा कि होलिका, प्रहलाद के साथ जीवित अवस्था में बैठी थी। यही एक कारण है कि लोग होलिका दहन के बाद सूतक मनाते आ रहे हैं।

  • ABOUT THE AUTHOR

    प्रिंट मीडिया में कार्य का 33 वर्ष का अनुभव। डिजिटल मीडिया में पिछले 9 वर्ष से कार्यरत। पूर्व में नवभारत इंदौर और दैनिक जागरण इंदौर में खेल संपादक और नईदुनिया इंदौर में संपादकीय विभाग में अहम जिम्‍मेदारियों का