NIT दुर्गापुर के इंडक्शन प्रोग्राम में ‘चिकनी चमेली’ पर बवाल, प्रोफेसर ने सरेआम लताड़ा

NIT दुर्गापुर के इंडक्शन प्रोग्राम में ‘चिकनी चमेली’ पर बवाल, प्रोफेसर ने सरेआम लताड़ा


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  • कॉलेज में रचनात्मक स्वतंत्रता और अनुशासन संतुलन पर सवाल उठा।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) दुर्गापुर के 2026 इंडक्शन प्रोग्राम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में नए छात्रों के कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्र ‘चिकनी चमेली’ गाने पर डांस करते नजर आते हैं. इसी बीच एक महिला प्रोफेसर मंच के सामने खड़ी होकर प्रदर्शन पर आपत्ति जताती हैं और छात्रों के डांस मूव्स को लेकर सवाल करती दिखाई देती हैं. घटना के बाद वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है.

डांस पर लगी रोक

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि छात्र उत्साह के साथ प्रस्तुति दे रहे थे. कार्यक्रम के बीच प्रोफेसर अचानक खड़ी होती हैं और डांस रोकने के लिए हस्तक्षेप करती हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कि उन्होंने छात्रों से पूछा कि उन्हें इस तरह के वल्गर डांस मूव्स करने की अनुमति किसने दी? इसके बाद कार्यक्रम का माहौल कुछ देर के लिए असहज हो जाता है और प्रस्तुति बाधित होती दिखाई देती है.

इस वायरल वीडियो की घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों को दो अलग-अलग पक्ष में बांट दिया है. एक पक्ष का कहना है कि इंडक्शन प्रोग्राम जैसे औपचारिक संस्थागत कार्यक्रम में प्रस्तुति की भाषा, गाने और डांस मूव्स को लेकर मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए. वहीं दूसरा पक्ष छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कॉलेज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी के अधिकार को लेकर सवाल उठा रहा है. यह विवाद कॉलेज और विश्वविद्यालयों में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर एक व्यापक सवाल भी खड़ा करता है- छात्रों की रचनात्मक स्वतंत्रता और संस्थान की गरिमा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए? इंडक्शन प्रोग्राम आमतौर पर नए छात्रों को संस्थान के माहौल, नियमों और गतिविधियों से परिचित कराने के लिए आयोजित किए जाते हैं. ऐसे आयोजनों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां छात्रों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी होती हैं.

वीडियो को मिल रहे कमेंट्स

कुछ लोगों ने इसे छोटी-सी बात को बड़ा मुद्दा बनाने वाला मामला बताया, जबकि अन्य यूजर्स ने कहा कि शिक्षक और छात्रों के बीच ऐसी स्थिति को सार्वजनिक मंच पर टकराव में बदलने के बजाय आयोजकों को पहले से स्पष्ट गाइडलाइन तय करनी चाहिए थी. वहीं एक अन्य कमेंट में लिखा गया, कॉलेज में कल्चर और अनुशासन दोनों जरूरी हैं, लेकिन दोनों के बीच बैलेंस होना चाहिए.

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