Holi 2024 : शहडोल में कंडों से होलिका दहन का संकल्प, पर्यावरण बचाने का दे रहे संदेश

Holi 2024 : नईदुनिया की ’आओ जलाएं कंडों की होली’ अभियान से प्रेरित हो रहा युवा वर्ग, लोगों ने भी दिया अभियान को समर्थन।

By Ravindra Vaidya

Publish Date: Sat, 23 Mar 2024 02:20 PM (IST)

Up to date Date: Sat, 23 Mar 2024 02:20 PM (IST)

Holi 2024 : शहडोल में कंडों से होलिका दहन का संकल्प, पर्यावरण बचाने का दे रहे संदेश

HighLights

  1. विशेषकर युवा वर्ग इस मुहिम से प्रेरित हो रहा है।
  2. कंडे का अधिकतम प्रयोग करें तो बहुत अच्छा रहेगा।
  3. गोसेवकों ने इंटरनेट पर वायरल किया संदेश।

Holi 2024 :नईदुनिया प्रतिनिधि, शहडोल। नईदुनिया के ’आओ जलाएं कंडों की होली अभियान’ को इस बार भी जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। विशेषकर युवा वर्ग इस मुहिम से प्रेरित हो रहा है। शहर के अंदर कई होलिकोत्सव समितियां अपने स्तर पर कंडों से होलिका दहन का संकल्प ले रहीं हैं। यही नहीं एक मोहल्ला एक होली की अवधारणा भी साकार हो रही है, इससे एकता को बल मिल रहा है। साथ ही पर्यावरण प्रदूषण की पर भी अंकुश लगने की स्थिति बन रही है।

गोसेवकों ने इंटरनेट पर वायरल किया संदेश

जिला मुख्यालय के अटल गौसेवा संस्थान और श्रीकृष्ण गोशाला के सदस्य नईदुनिया के ’आओ जलाएं कंडों की होली अभियान’ का समर्थन करते हुए इसके संदेश को इंटरनेट मीडिया के माध्यम से वायरल भी कर रहे हैं। आओ जलाएं कंडों की होली अभियान को ताकत प्रदान की जा रही है।अधिक से अधिक लोग इस बार कंडों की होली जलाकर पर्यावरण संरक्षण के मामले में अपना योगदान देने आगे आ रहे हैं।मां करणी सेवा समिति जो समाजसेवा में खासकर रक्तदान में हमेशा आगे रहती है वह समिति इस बार भी दर्जनों गांव में होली के कंडों को जलाने की अलख जगा रही है।इसके लिए चंदे के साथ कंडे लेने का नवाचार किया जा रहा है।

विराटेश्वरी मंदिर के पुजारी ने दिलाया संकल्प

विराटेश्वरी दुर्गा मंदिर के पुजारी जयंतराज तिवारी ने ट्रस्ट के सभी सदस्यों के साथ संकल्प लिया है कि हम पूरी तरह से धर्मयुक्त, प्रदूषण मुक्त और पाप मुक्त होली मनाएंगे। होली में पेड़ पौधे नहीं, कंडे जलाएंगे। इनका कहना है कि धार्मिक आस्था के नाम पर होली जलाने के लिए अंधाधुंध लकड़ी का प्रयोग किया जा रहा है। इससे पेड़ पौधे तो नष्ट हो ही रहे हैं, वायुमंडल भी प्रदूषित हो रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में आवश्यक है कि समय रहते हम कर्मकांडों हेतु लकड़ी का विकल्प स्वीकार कर लें। इसके स्थान पर गोबर के कंडे का अधिकतम प्रयोग किया जाए तो बहुत अच्छा रहेगा।

यह होता है कंडों की होली जलाने से

  • गाय के गोबर में कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता होती है।
  • कंडों की राख का फसलों पर जैव कीटनाशक के रूप में प्रयोग होता है।
  • होली पर पेड़ों को काटे जाने का सिलसिला बंद होगा।
  • परंपरा के नाम पर हरे भरे पेड़ों को काटने की मूर्खता बंद होगी।

एक होली में जल जाती है क्विंटलों लकड़ी

समाजसेवी विजय दुवे का कहना है कि एक औसत होली में करीब दो से ढाई क्विटल लकड़ी का उपयोग होता है। ऐसे हालात में दो होलिका दहन में एक हरे भरे वृक्ष की कटाई होना संभावित है। जबकि शहर में साठ से सत्तर स्थानों पर होली जलती है। ऐसे में बड़ी संख्या में पेड़ों की बलि इस कार्य के लिए दे दी जाती है। इससे बचने के लिए हम ऐसा क्यों न करें कि पेड़ों को काटें नहीं बल्कि होली के पर्व पर परिवार का हर सदस्य एक पौधा अवश्य लगाए। वृक्ष हमारे मित्र होते हैं। इनके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए होली पर हरे भरे पेड़ों की बलि न दें, बल्कि संकल्प लें कि कंडों की होली जलाएं।

शहर के लोगों ने कहा नईदुनिया की पहल हमेशा होती है अच्छी

वर्तमान में प्रदूषित वातावरण एक विकराल समस्या बन चुका है।हम अगर पेड़ काटकर होली जलाएंगे तो यह हमारा ही तो नुकसान होगा।हम सब लोग एकजुट होकर लकड़ी न जलाने का संकल्प लें।कंडों की ही होली जलाएं।

नीति सिंघल, समाजसेविका

तय करें कि न हम स्वयं लकड़ी की होली जलाएंगे न ही किसी को जलाने देंगे। पेड़ बिल्कुल भी न काटें बल्कि पौधारोपण का संकल्प लें ,ताकि आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रहे। लकड़ी की जगह कंडों का उपयोग करें।

डी.के.रूसिया सेवानिवृत्त प्राचार्य

हमारी परंपरा रही है कि गाय के गोबर से बने कंडों का प्रयोग ही होली में किया जाए। घरों के अंदर प्रतीकात्मक होली में गोबर की उपले का प्रयोग होता है। क्यों न सब लोग होलिका में भी लकड़ी के स्थान पर कंडों का ही प्रयोग करें।

विनोद शर्मा, नागरिक।

गोबर के जलने से प्रदूषण कम होता है। कंडों की होली जलाने का प्रचलन हम सबको अपनाना चाहिए। ऐसा करने से वन संपदा भी सुरक्षित रहेगी और वायु में प्रदूषण भी नहीं होगा।लोगों को इसके लिए प्रेरित करना बहुत जरूरी है।

संगीता दुवे, सचिव जिला महिला समिति

कंडों से तैयार की गई होलिका दहन करना शुभ माना गया है। अगर शहर और गांव में लोग कंडों का प्रयोग होलिका दहन के लिए करेंगे तो गांव के पशुपालकों के साथ ही गोशालाओं की भी आय बढ़ेगी।कंडों की होली जलाने का संकल्प करें।

गौरव मिश्रा, गौसेवक।

पेड़ हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। इन्हें कोई नुकसान न पहुंचाएं।नईदुनिया का यह अभियान सराहनीय है। मैं भी लोगों से अपील करता हूं कि होली में कंडों का प्रयोग करें। इससे प्रदूषण भी नहीं होगा और पेड़ों की सुरक्षा भी होगी।

प्रो.रामशकर, कुलपति पं.एसएन शुक्ला विश्वविद्यालय

  • ABOUT THE AUTHOR

    पटना में 2005 में जागरण समूह के दैनिक जागरण से शुरुआत की। 2017 में दैनिक जागरण प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में सेवाएं दीं। 2023 से जागरण समूह के www.naidunia.com से जुड़े। वर्तमान में सीनियर सब एडिटर के पद पर जबलपु