How To Fix Roof Water Leakage In Rainy Season: बारिश के मौसम में पुरानी छत से पानी टपकना एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है. शुरुआत अक्सर छत पर किसी बड़े छेद या टूट-फूट से नहीं होती. कई बार तेज बारिश के बाद छत पर पानी जमा रह जाता है, दीवार या सीलिंग पर हल्का गीला निशान दिखाई देता है या पैरापेट के पास बारीक दरारें नजर आने लगती हैं. इन्हें नजरअंदाज करने पर धीरे-धीरे पानी अंदर तक पहुंच सकता है. इससे सीलन बढ़ने, पेंट उखड़ने और कंक्रीट को नुकसान पहुंचने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
पुरानी छत को देखकर कई लोग सीधे पूरी छत दोबारा बनवाने के बारे में सोचने लगते हैं, जबकि हर बार ऐसा करना जरूरी नहीं होता. अगर समय रहते पानी आने की असली जगह पहचान ली जाए और सही तरीके से दरारों व कमजोर हिस्सों की मरम्मत की जाए, तो कई मामलों में समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है. पुरानी छत पर धूप, बारिश और तापमान में बदलाव का असर सालों तक पड़ता रहता है. कंक्रीट बार-बार फैलता और सिकुड़ता है, जिससे बारीक दरारें और कमजोर जोड़ बन सकते हैं. पुरानी वॉटरप्रूफिंग परत भी समय के साथ अपनी पकड़ खो सकती है.
सबसे पहले पानी आने की सही जगह पहचानें
छत से पानी टपकने पर सिर्फ कमरे की सीलिंग पर बने गीले निशान को देखकर मरम्मत शुरू नहीं करनी चाहिए. कई बार पानी छत की एक जगह से अंदर जाता है और कंक्रीट के भीतर से रास्ता बनाते हुए किसी दूसरी जगह दिखाई देता है. इसलिए जहां सीलिंग से पानी टपक रहा है, उसके ठीक ऊपर ही रिसाव हो, यह जरूरी नहीं है. केवल अंदर दिख रहे गीले हिस्से को ठीक करने से समस्या कुछ समय बाद फिर लौट सकती है.

रिसाव की जांच करते समय छत पर बनी दरारों, पैरापेट की दीवारों के किनारों, एक्सपेंशन जॉइंट और पानी निकलने वाले ड्रेन आउटलेट को ध्यान से देखें. बारिश के बाद किन जगहों पर पानी लंबे समय तक जमा रहता है, यह भी जांचना जरूरी है. अगर रिसाव की जगह आसानी से समझ न आए, तो अलग-अलग हिस्सों पर सीमित मात्रा में पानी डालकर जांच की जा सकती है. एक साथ पूरी छत को भिगोने के बजाय छोटे हिस्सों की जांच करने से समस्या वाली जगह पहचानना आसान हो सकता है.
बारीक दरारों को हल्के में न लें
पुरानी छत पर दिखने वाली हेयरलाइन क्रैक यानी बेहद पतली दरारें अक्सर मामूली लगती हैं. लेकिन समय के साथ इन्हीं दरारों से नमी वॉटरप्रूफिंग परत के नीचे पहुंच सकती है. ऐसी दरारों की पहले अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए और उनमें जमा धूल व ढीले कण हटाने चाहिए. इसके बाद छत के लिए उपयुक्त क्रैक फिलर या सीलेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर इसके ऊपर अनुकूल वॉटरप्रूफ कोटिंग की परत लगाई जाती है. छोटी दरारों की समय रहते मरम्मत करना आगे होने वाले बड़े नुकसान को रोकने में मदद कर सकता है.
हर दरार का इलाज एक जैसा नहीं होता. चौड़ी और गहरी दरारें सामान्य सतही दरारों से अलग हो सकती हैं. अगर दरार बढ़ रही है या संरचना में लगातार हलचल की वजह से बन रही है, तो केवल ऊपर से फिलर लगाना पर्याप्त नहीं हो सकता. ऐसे मामलों में सही कारण की जांच और जरूरत पड़ने पर एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर रहता है. गंभीर बनावट दरारों के लिए अलग तरह की मरम्मत की जरूरत हो सकती है.

पैरापेट और ड्रेन के पास ज्यादा ध्यान दें
पुरानी छतों में पैरापेट की दीवार और छत के जोड़ वाले हिस्से अक्सर रिसाव का कारण बनते हैं. यहां अलग-अलग सतहें मिलती हैं और मौसम के साथ होने वाली हलचल का असर भी पड़ता है. इसी तरह ड्रेन आउटलेट के आसपास लगातार पानी का बहाव रहता है. अगर इन जगहों की पुरानी सीलिंग खराब हो गई है या दरारें बन गई हैं, तो पानी आसानी से अंदर जा सकता है.
पुरानी वॉटरप्रूफिंग के ऊपर नई परत लगाने से पहले जांच जरूरी
अगर छत पर पहले से वॉटरप्रूफिंग या कोई पुरानी कोटिंग लगी हुई है, तो उसके ऊपर सीधे नई परत लगाना हमेशा सही तरीका नहीं है. पहले यह देखना जरूरी है कि पुरानी परत सतह से मजबूती से चिपकी हुई है या नहीं. अगर उसमें जगह-जगह से परत उखड़ रही है, फफोले जैसे हिस्से बन गए हैं, नीचे नमी फंसी हुई है या बड़े हिस्से में दरारें हैं, तो उसके ऊपर नई कोटिंग लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं मिलेगा.
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नई परत पुराने खराब हिस्से के साथ ही दोबारा उखड़ सकती है. वहीं, अगर पुरानी कोटिंग अच्छी तरह चिपकी हुई है और नुकसान केवल कुछ जगहों तक सीमित है, तो सतह की अच्छी सफाई और जरूरी मरम्मत के बाद अनुकूल नई कोटिंग लगाना संभव हो सकता है. सामग्री की आपसी अनुकूलता और निर्माता के निर्देशों को ध्यान में रखना जरूरी है.
मरम्मत के बाद तुरंत छत का इस्तेमाल न करें
सीलेंट या वॉटरप्रूफिंग कोटिंग लगाने के बाद उसका पूरी तरह सूखना और सेट होना जरूरी है. केवल सतह का छूने पर सूखा महसूस होना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह पूरी तरह तैयार हो चुकी है. अलग-अलग उत्पादों को पूरी तरह सेट होने में अलग समय लग सकता है.
कब सिर्फ एक हिस्से की मरम्मत काफी है और कब पूरी छत पर काम जरूरी?
अगर रिसाव केवल एक या दो जगहों पर है, बाकी वॉटरप्रूफिंग सही स्थिति में है और दरारें सीमित हैं, तो स्थानीय स्तर पर मरम्मत काफी हो सकती है. लेकिन हर बारिश में छत की कई जगहों से पानी आने लगे, पुरानी कोटिंग जगह-जगह उखड़ रही हो या मरम्मत बार-बार करनी पड़ रही हो, तो पूरी छत की वॉटरप्रूफिंग की जरूरत पड़ सकती है. शुरुआत में इसका खर्च ज्यादा लग सकता है, लेकिन हर मानसून में अलग-अलग जगह आपातकालीन मरम्मत कराने से बेहतर साबित हो सकता है.
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