सिंगापुर में एक भारतीय नागरिक को (बैंकरप्ट) दिवालिया घोषित किया गया है. वह कई ऐसी कंपनियों के डायरेक्टर थे, जिन पर 400 से ज्यादा प्रवासी मजदूरों की मजदूरी बकाया थी. द स्ट्रेट्स टाइम्स ने गुरुवार को बताया कि रामू पलानी वेलु के खिलाफ 13 अगस्त को दिवालियापन का आदेश जारी किया गया था.
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रामू पलानी वेलु सिंगापुर के स्थायी निवासी हैं और वो 7 कंपनियों के डायरेक्टर हैं. जो एयर-कंडीशनिंग, प्लंबिंग और बिल्डिंग से जुड़ी सेवाएं देती हैं. इनमें KPA इंजीनियरिंग, SK इंडस्ट्रीज और VVR प्लांट इंजीनियरिंग शामिल हैं. भारतीय नागरिकों समेत कुल 407 कर्मचारियों ने बकाया वेतन के लिए दावा किया है. इनमें से कुछ को 2 महीने से ज्यादा समय से सैलरी नहीं मिली है.
क्या है पूरा मामला?
ये मामला 2025 में उस वक्त सामने आया, जब KPA इंजीनियरिंग के 5 कर्मचारियों ने बकाया वेतन को लेकर विवाद समाधान के लिए त्रिपक्षीय गठबंधन (Tripartite Alliance for Dispute Management) से अलग-अलग संपर्क किया. इन मामलों को एक हफ्ते के भीतर सुलझा लिया गया और कर्मचारियों को उनका भुगतान मिल गया. हालांकि, मई और जून में KPA इंजीनियरिंग के 4 अन्य कर्मचारियों ने भी बकाया वेतन के लिए दावे दायर किए.
जब 22 जून को 100 से ज्यादा कर्मचारी मदद के लिए बेंडमीर में मिनिस्ट्री ऑफ मैनपावर (MOM) के ऑफिस पहुंचे, तब उन मामलों पर पहले से ही कार्रवाई चल रही थी. 8 जून को निकाले जाने के नोटिस से प्रभावित KPA इंजीनियरिंग के कर्मचारियों के भुगतान के दावों के बारे में तब तक पता चल चुका था. 22 जून को वर्करों के बड़ी संख्या में MOM के पास पहुंचने से पहले ही अधिकारी कंपनी के डायरेक्टरों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे.
रामू ने खुद बैंकरप्ट के लिए किया आवेदन
जब बकाया वेतन का मामला सुर्खियों में आया, तो पता चला कि रामू देश से बाहर हैं. वे 26 जून को लौटे और जांच में MOM की मदद कर रहे हैं. कानून मंत्रालय के इनसॉल्वेंसी ऑफिस के रिकॉर्ड के अनुसार, रामू ने 9 जुलाई को दिवालियापन के लिए आवेदन किया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि जो नियोक्ता वेतन का भुगतान नहीं करते हैं, उन्हें प्रति आरोप 3,000 USD से 15,000 USD तक का जुर्माना और 6 महीने तक की जेल हो सकती है.
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